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                <title>एस्ट्रोटर्फ तो दूर, शहर में नहीं हॉकी मैदान,कैसे तैयार होंगे ध्यानचंद</title>
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                        <![CDATA[संसाधनों का अभाव फिर भी  खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का सपना संजोए हुए हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/forget-astroturf--there-s-not-even-a-proper-hockey-field-in-the-city--how-will-future-dhyan-chands-be-produced/article-136383"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/etws-(1200-x-600-px)-(2)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । भारत का राष्ट्रीय खेल होने के बावजूद शहर में खिलाड़ियों के लिए एक ढंग का हॉकी मैदान तक नहीं मिल पा रहा है। एस्ट्रो टर्फ जैसी आधुनिक सुविधा की बात करना तो दूर, अभ्यास के लिए भी मैदान उपलब्ध नहीं हो पा रहा। परिणामस्वरूप, प्रतिभाशाली खिलाड़ी संसाधनों के अभाव में अपनी क्षमता का पूरा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। यह शहर के हॉकी खिलाड़ियों के लिए किसी विडंबना से कम नहीं है। शहर के हॉकी कोच दीपक नीनामा ने बताया कि वे कच्चे मैदानों या साझा खेल परिसरों में अभ्यास करने को मजबूर हैं, जहां न तो मानक मापदंड पूरे होते हैं और न ही सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था। बारिश के दिनों में मैदान की हालत और बदतर हो जाती है, जिससे अभ्यास बाधित होता है। कई बार चोटिल होने का खतरा भी बना रहता है। इसके बावजूद, खिलाड़ियों का उत्साह कम नहीं हुआ है। वे सीमित संसाधनों में भी राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का सपना संजोए हुए हैं।</p>
<p><strong>खिलाड़ी अन्य शहरों की ओर रुख करने को मजबूर </strong><br />उन्होंने बताया कि हॉकी को बढ़ावा देने के लिए सरकार और खेल संघों द्वारा समय-समय पर घोषणाएं जरूर होती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अलग ही तस्वीर पेश करती है। शहर में न तो स्थायी कोचिंग व्यवस्था है और न ही नियमित प्रतियोगिताओं का आयोजन। नतीजतन, खिलाड़ी अन्य शहरों की ओर रुख करने को मजबूर होते हैं, जहां बुनियादी ढांचा अपेक्षाकृत बेहतर है। इससे न केवल स्थानीय प्रतिभा का पलायन होता है, बल्कि शहर की खेल पहचान भी प्रभावित होती है। खेल प्रेमियों और अभिभावकों का कहना है कि यदि शहर में एक मानक हॉकी स्टेडियम और एस्ट्रो टर्फ मैदान विकसित किया जाए, तो यहां से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकल सकते हैं। स्कूल-कॉलेज स्तर पर हॉकी को प्रोत्साहन देने, प्रशिक्षित कोच उपलब्ध कराने और नियमित लीग प्रतियोगिताएं शुरू करने की भी आवश्यकता है। यह निवेश केवल खेल सुविधा नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य में निवेश होगा।</p>
<p><strong>हॉकी भारत की पहचान</strong><br />ठोस योजना बनाकर समयबद्ध तरीके से काम शुरू करें। हॉकी भारत की पहचान रही है और यदि शहर में इसे सम्मान नहीं मिला, तो यह केवल खिलाड़ियों का नहीं, पूरे खेल तंत्र का नुकसान होगा। उम्मीद है कि जिम्मेदार अधिकारी जल्द जागेंगे और शहर के हॉकी खिलाड़ियों को उनका हक मिलेगा।<br /><strong>- दीपक नीनामा, कोच, कोटा</strong></p>
<p><strong>अलग से हॉकी का मैदान जरूरी</strong><br />कोटा शहर शिक्षा के साथ-साथ खेलों में भी अपनी पहचान बना रहा है। वहीं राष्ट्रीय खेल हॉकी को बढावा देने के लिए अलग से मैदान भी जरूरी है, ताकि प्रतिभवान खिलाड़ी तैयार हो सके।<br /><strong>- सुधीर कुमार, खिलाड़ी कोटा</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर में हॉकी खिलाड़ियों के लिए उपयुक्त और आधुनिक ग्राउंड का अभाव आज भी एक कड़वी सच्चाई है। बेहतर सुविधाओं के बिना प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। हमारा दृढ़ प्रयास है कि खेलो इंडिया जैसी राष्ट्रीय योजना के माध्यम से शहर को एक अत्याधुनिक एस्ट्रो टर्फ हॉकी मैदान की सौगात मिले, जिससे स्थानीय प्रतिभाओं को नया मंच और नई पहचान मिल सके। यह सपना लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल से ही साकार हो सकता है, जो शहर के खेल भविष्य को नई दिशा देगा।<br /><strong>- वाई बी सिंह, जिला खेल अधिकारी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Dec 2025 14:43:38 +0530</pubDate>
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                <title>ताइक्वांडो विवादों के घेरे में, खिलाड़ियों का भविष्य अधर में !</title>
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                        <![CDATA[पैरेलल ताइक्वांडो बॉडियों की भरमार, वैध-अवैध फेर के पेच में फसा फेडरेशन विवाद]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/taekwondo-embroiled-in-controversies--players--future-hangs-in-the-balance/article-136124"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(3)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राष्ट्रीय स्तर पर ताइक्वांडो के भविष्य पर अब अनिश्चितता के बादल छा हुए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर 'इंडिया ताइक्वांडो' (विश्व ताइक्वांडो से मान्यता प्राप्त) और 'ताइक्वांडो फेडरेशन आॅफ इंडिया (टीएफआइ) के बीच चल रही खींचतान ने अब राजस्थान ताइक्वांडो एसोसिएशन को अपनी चपेट में ले लिया है। इस आंतरिक कलह के कारण स्थानीय स्तर पर खेल का माहौल बुरी तरह प्रभावित हुआ है, तीन से चार समानांतर गुट आमने-सामने खड़े हैं। विवाद की जड़ वर्तमान में किसी के पास भी मान्यता नहीं होना है। चूंकि यह तय नहीं हो पा रहा है कि कौन सी राष्ट्रीय इकाई वैध या अवैध है। समानन्तर में खूब सारी बॉडिया खड़ी है। अभी तक किसी को भी  खेल मंत्रालय, भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) या वर्ल्ड ताइक्वांडो (डब्ल्यूटी) की मान्यता प्राप्त नहीं है। ऐसे में सबसे बड़ा नुकसान खिलाड़ियों, खासकर बच्चों के भविष्य को हो रहा है।</p>
<p>राष्ट्रीय महासंघ स्तर पर अदालती मुकदमों के तहत विवादों के संबंध में जल्द ही अदालत द्वारा दिए गए निर्देश के आधार पर राष्ट्रीय ताइक्वांडो महासंघ के एकीकरण का निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद, केवल वही राज्य स्तरीय ताइक्वांडो एसोसिएशन, जिन्हें 2019 और 2022 के पिछले चुनाव में मतदान का अधिकार प्राप्त था, 2026 के चुनाव में अपने मतदान के अधिकार का उपयोग करने के हकदार होंगे। बता दें कि कोटा में ताइक्वांडो एसोसिएशन 2017 से खेल अधिनियम 2005 के तहत पंजीकृत है। केवल खेल परिषद और जिला ओलंपिक संघ द्वारा मान्यता प्राप्त ताइक्वांडो संघ है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार पहले आंतरिक विवादों के चलते अलग-अलग गुट बनते चले गए और पैरेलल बॉडियां खड़ी होती चली गईं। इसी कारण न तो यह स्पष्ट है कि देश में कुल कितने क्लब हैं और न ही यह तय हो पा रहा है कि कौन सी संस्था वैध है। राजस्थान की स्थिति और भी उलझी हुई है। यहां अब तक कोई भी ताइक्वांडो स्टेट बॉडी विधिवत रूप से रजिस्टर्ड नहीं है। इसी कारण हर कोई अपना झंडा उठाकर दावा कर रहा है। इंडिया ताइक्वांडो के तहत डब्ल्यूटीए को कुछ वर्ष पूर्व शर्तों के कारण मान्यता दी गई थी, जो 2026 तक वैध बताई जा रही है, लेकिन यह भी अंतिम नहीं है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जब तक एक मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय फेडरेशन अस्तित्व में नहीं आती, तब तक किसी भी राज्य या जिला संघ को ओलंपिक या आधिकारिक प्रतियोगिताओं के लिए एफिलिएशन नहीं दिया जा सकता। </p>
<p>वर्तमान में जो भी टूनार्मेंट कराए जा रहे हैं और जो प्रमाणपत्र बांटे जा रहे हैं, वे एक तरह से कानूनी रूप से शून्य हैं। वहीं कोटा के खिलाड़ियों को भी यह बड़ी समस्या सामनो आ रही है कि वे किस एसोसिएशन के तहत प्रशिक्षण लें और किस टूनार्मेंट में भाग लें ताकि उनकी जीत राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर मान्य हो और खेल कोटे से नौकरी मिल सके। इस मान्यता संकट ने स्थानीय प्रतिभाओं के लिए आगे बढ़ने के दरवाजे बंद कर दिए हैं।</p>
<p>सभी गुट एकजुट हों, चुनाव कराए जाएं और एक मजबूत, मान्यता प्राप्त नेशनल बॉडी बने। तभी राज्य संघों का पंजीकरण, क्लबों की वैधता और खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित हो पाएगा। फिलहाल ताइक्वांडो प्रशासन में पसरा यह असमंजस बच्चों के सपनों पर भारी पड़ता दिख रहा है। जब तक यह विवाद नहीं सुलझता है तब तक वो स्कूल स्तर के टूनार्मेंट और स्कूल गेम्स फेडरेशन आॅफ इंडिया के टूनार्मेंटों में खिलाकर अपने स्तर सुधार सकते है।<br /><strong>- दशरथसिंह शेखावत, अध्यक्ष, ताइक्वांडो एसोसिएशन आॅफ कोटा</strong></p>
<p>फैडरेशन विवाद जब तक नहीं सुलझेगा तब तक सामानांतर चल रही कोटा ताइक्वांडो में प्रशिक्षण प्राप्त कर खिलाड़ियों का भविष्य में अधर में लटका हुआ है। दूसरी ओर इनसे मिलने वाले सर्टिफिकेट की कोई मान्यता नहीं है, ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि वैध ताइक्वांडो एसोसिएशन में ही खिलाए ताकि बच्चों को आगे इनसे लाभ मिल सके।<br /><strong>- अशोक गौतम, कोच, कोटा</strong></p>
<p>फैडरेशन को लेकर अभी कोई विवाद नहीं है। कोर्ट से आए निर्णय के अनुसार टीएफआई मान्य है। 2026 में चुनाव करवाएं जाएंगे, तभी स्थिति साफ हो सकेगी। 2022 में चुनाव हुए थे।<br /><strong>- लक्ष्मण सिंह हाड़ा, जनरल सेक्रेटरी राजस्थान ताइक्वांडो एसोसिएशन</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Dec 2025 15:16:06 +0530</pubDate>
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                <title>बीसीसीआई की बैठक 22 दिसम्बर को : केन्द्रीय अनुबंध में रोहित-विराट का ए+ ग्रेड खतरे में, महिला खिलाड़ियों की घरेलू फीस पर होगी चर्चा  </title>
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                        <![CDATA[22 दिसंबर की बीसीसीआई बैठक में खिलाड़ियों के केंद्रीय अनुबंध पर बड़ा फैसला हो सकता है। रोहित शर्मा और विराट कोहली के ए+ ग्रेड से बाहर होने के आसार हैं, जबकि शुभमन गिल, ऋषभ पंत और केएल राहुल के प्रमोशन पर चर्चा होगी। महिलाओं की घरेलू मैच फीस और अंपायरों के भुगतान में बदलाव भी एजेंडे में शामिल हैं।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/bcci-meeting-on-december-22-rohit-virats-a-grade-in-the/article-135691"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(4)10.png" alt=""></a><br /><p>मुम्बई। 22 दिसंबर को होने वाली बीसीसीआई की मीटिंग में खिलाड़ियों का केन्द्रीय अनुबंध सबसे बड़ा मुद्दा होगा। रोहित शर्मा और विराट कोहली ए+ ग्रेड में हैं, लेकिन उनका टॉप ग्रेड से बाहर होना लगभग तय माना जा रहा है। वजह यह कि दोनों खिलाड़ी अब केवल वनडे खेल रहे हैं। उनकी जगह शुभमन गिल, ऋषभ पंत और केएल राहुल के ए+ ग्रेड में प्रमोशन पर चर्चा होगी।</p>
<p><strong>महिलाओं की घरेलू मैच फीस में है असमानताएं :</strong></p>
<p>महिला टीम की शानदार एकदिवसीय विश्व कप जीत के बाद मैच फीस में बदलाव की उम्मीद थी और बीसीसीआई ने इस मुद्दे पर बैठक में चर्चा करने का फैसला किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरुष और महिलाओं के बीच सैलरी में समानता है, घरेलू प्रतियोगिताओं में असमानताएं बनी हुई हैं।</p>
<p><strong>अम्पायरों की मैच फीस में भी होगा बदलाव :</strong></p>
<p>एजेंडा का एक और अहम मुद्दा पुरुष टीम के लिए केन्द्रीय अनुबंध है। रोहित शर्मा और विराट कोहली को किस ग्रेड में रखा जाएगा, यह खास दिलचस्पी का विषय है, क्योंकि दोनों स्टार खिलाड़ी तीन में से दो अंतरराष्ट्रीय प्रारुपों से संन्यास चे चुके हैं। बीसीसीआई अंपायरों की मैच फीस में भी बदलाव करना चाहता है। बैठक में 30वीं एपेक्स काउंसिल मीटिंग के मिनट्स की पुष्टि। घरेलू क्रिकेट में महिला क्रिकेटरों के पेमेंट में बदलाव। बीसीसीआई डिजिटल प्रॉपर्टीज पर अपडेट। अंपायर और मैच रेफरी के पेमेंट में बदलाव। सालाना प्लेयर रिटेनरशिप कॉन्ट्रैक्ट।  </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Dec 2025 11:42:25 +0530</pubDate>
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                <title>क्रिकेट मैदान पर न आउट की पुकार, न हाउज दैट की गूंज..बस खुशी का इजहार, मूक-बधिर खिलाड़ियों ने बिना बोले लिखी जीत की कहानी</title>
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                        <![CDATA[राजस्थान में पहली बार राज्य स्तरीय अंडर-19 मूक बधिर क्रिकेट टूनार्मेंट में प्रदेशभर की 18 टीमों के 300 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/on-the-cricket-field--there-were-no-shouts-of-%22out-%22-no-cries-of-%22how-s-that%22----just-expressions-of-joy--the-deaf-and-mute-players-wrote-their-story-of-victory-without-uttering-a-word/article-131677"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(1)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में राज्य स्तरीय अंडर-19 मूक-बधिर क्रिकेट टूनार्मेंट के दूसरे दिन मैदान पर ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर दर्शक के दिल को छू लिया। यहां कोई आवाज नहीं गूंज रही थी, न आउट की पुकार, न हाउज दैट की गूंज फिर भी खेल का रोमांच किसी भी आइपीएल मैच से कम नहीं था। इस टूनार्मेंट में बच्चे अपने हाथों के इशारों, मुस्कान और चेहरे के भावों से जीत और हार की पूरी कहानी बयां कर रहे थे। मैच की शुरूआत से ही खिलाड़ियों का जोश देखते ही बनता था। गेंदबाज रन-अप लेते हुए टीममेट्स को इशारे से प्रोत्साहित करता, विकेट मिलने पर दोनों हाथ ऊपर उठाकर हवा में थम्स-अप देता। दूसरी ओर बल्लेबाज चौका लगाते ही बल्ला उठाकर साथियों की ओर मुस्कराकर देखता  मानो कह रहा हो, हम कर सकते हैं। यह सब कुछ बिना बोले, केवल दिल से महसूस किया जा सकता था। राजस्थान में पहली बार आयोजित इस राज्य स्तरीय अंडर-19 मूक बधिर क्रिकेट टूनार्मेंट में प्रदेशभर की 18 टीमों के 300 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।</p>
<p><strong>सब कुछ इशारों में</strong><br />शिक्षक दिनेश कुमार सुमन ने जब कोटा क्रिकेट टीम को जीत की बधाई दी, तो खिलाड़ियों ने हाथों से धन्यवाद का साइन किया और मुस्कुराते हुए जीत की मुद्रा में हाथ लहराए। किसी को आउट करने पर गेंदबाज साथी के पास जाकर थम्स-अप देता, और चौका पड़ने पर फील्डर हल्के मजाकिया इशारों से अपनी प्रतिक्रिया देता, यह सब कुछ बिना बोले, मगर पूरे भाव से समझाया। अंपायर भी आउट, नो-बॉल, वाइड या ओवर पूरा होने के संकेत विशेष हैंड साइन से देते। दर्शक दीर्घा में बैठे लोग भी इस मौन उत्सव का हिस्सा बने। तालियों की जगह वे हाथ ऊपर उठाकर लहराते और चेहरे के भावों से खुशी जताते। इस अनोखे माहौल में किसी को आवाज की कमी महसूस नहीं हुई, क्योंकि हर इशारा अपने आप में एक संदेश था। मैच में खेल रहे बधिर खिलाड़ियों ने बॉलिंग करना, कैच पकड़ना, जीत की खुशी का इजहार के साथ रन दौड़ने की रणनीति को ईशारों के रूप में बताया।</p>
<p><strong>चेहरे का हावभाव ही भाषा का व्याकरण</strong><br />बाधित बाल विकास केन्द्र की अध्यक्ष सर्वेशरी रानीवाला ने नवज्योति से बातचीत में कहा, जब साइन लैंग्वेज की बात आती है, तो चेहरे के हाव-भाव ही उसका व्याकरण होते हैं। बिना एक्सप्रेशन हमारी भाषा अधूरी है। हम अपने भावों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं ताकि देखने वाला हमारे हर एहसास को महसूस कर सके। विद्यालय में बच्चों को खेल के साथ-साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। हम चाहते हैं कि ये बच्चे सिर्फ खेल में ही नहीं, बल्कि हर क्षेत्र में आगे बढ़ें और अपनी पहचान बनाएं।</p>
<p><strong>वीडियो कॉल पर खुशी का इजहार</strong><br />एक अन्य खिलाड़ी ने अपनी जीत की खुशी अपने परिवार में वीडियो कॉल करके अपने चेहरे व हाथ के ईशारों से मैच की जानकारी दी तथा कोटा के जेके पैवेलियन में हुए मैचों के रोमांचक क्षणों को साझा किया। वहीं वीडियो कॉल पर बात करते हुए उसके साथी ने भी उसका हौंसला बढ़ाया। शिक्षक दिनेश कुमार सुमन ने बताया कि सभी बधिर बच्चे हर सामान्य की तरह ही अपने हर छोटी खुशी को एक दूसरे से साझा करते है तथा इस मैदान में नए बने दोस्तों के साथ खूब इशारों-इशारों में मैच के दौरान घटित क्षणों का लुत्फ उठाते है।</p>
<p><strong> टूर्नामेंट सभी के लिए बनेगा प्रेरणादायक</strong><br />बच्चे हमें सिखाते हैं कि खेल भावना का कोई शब्दकोश नहीं होता। असली खेल भावना अनुशासन, मेहनत और आपसी सम्मान में होती है। जब कोई टीम हारती भी, तब विरोधी टीम के खिलाड़ी उनके पास जाकर कंधे पर हाथ रखकर हौसला बढ़ाते। कोई कटुता नहीं, केवल स्नेह और खेल के प्रति समर्पण दिखाई देता। खेल के माध्यम से ये बच्चे समाज को यह संदेश दे रहे हैं कि सीमाएं  शरीर में नहीं, सोच में होती हैं। क्रिकेट खेल के माध्यम से अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा है। बधिर बच्चों ने इस खेल के माध्यम से सभी का दिल जीत लिया।<br /><strong>-वाइबी सिंह, खेल विकास अधिकारी, कोटा </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Nov 2025 16:26:50 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा में नहीं है क्रिकेट अकादमी :  हुनर को सेंचुरी मारने का नहीं मिल रहा मौका, सुविधाओं के अभाव में गली-मोहल्लों तक सिमट रही प्रतिभा</title>
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                        <![CDATA[सही मार्गदर्शन मिले तो कोटा के खिलाड़ी भी राज्य व राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकते है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-is-no-cricket-academy-in-kota--talent-is-not-getting-the-opportunity-to-score-centuries--and-due-to-lack-of-facilities--potential-is-confined-to-the-streets-and-neighborhoods/article-130684"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(2)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं, लेकिन अफसोस इस बात का है कि इन खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए मंच नहीं मिल पा रहा। क्रिकेट प्रेमी युवाओं में जोश और जज्बा तो कूट-कूट कर भरा है, मगर सुविधाओं के अभाव ने उनके सपनों को मोहल्लों की गलियों तक सीमित कर दिया है। शहर में एक भी ऐसी प्रोफेशनल क्रिकेट अकादमी नहीं है जहां से खिलाड़ी राज्य या राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकें। </p>
<p><strong>कोच की नजर में है छिपी प्रतिभा</strong><br />स्थानीय क्रिकेट कोच कहते हैं कि कोटा में कम से कम दो आधुनिक क्रिकेट अकादमियों की सख्त जरूरत है। यहां के बच्चे बेहद प्रतिभाशाली हैं। यदि उन्हें सही कोचिंग और संसाधन मिले तो कई नामी क्रिकेटरों की सूची में कोटा के खिलाड़ी भी शामिल होंगे।</p>
<p><strong>खिलाड़ियों की पीड़ा, सपना है देश के लिए खेलना</strong><br />नयापुरा क्षेत्र के खंड गावड़ी निवासी युवा खिलाड़ी महिपाल सिंह का कहना है कि, हम रोजाना सुबह-शाम मैदान में अभ्यास करते हैं, लेकिन यहां टर्फ विकेट या फिटनेस ट्रेनर जैसी सुविधा नहीं है। सही मार्गदर्शन मिले तो हम भी बड़े मंच पर प्रदर्शन कर सकते हैं। प्रशासन से अकादमी खोलने की मांग है। </p>
<p><strong>स्थानीय टूर्नामेंटों तक सीमित प्रतिभा</strong><br />वही बॉक्सींग से जुडे कोच प्रीतम सिंह भी कहते है की  हर मोहल्ले में कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो दमदार बल्लेबाजी, धारदार गेंदबाजी और शानदार क्षेत्ररक्षण से लोगों को प्रभावित करते हैं। मगर इनका हुनर गली क्रिकेट और छोटे टूर्नामेंटों से आगे नहीं बढ़ पाता। अकादमी न होने के कारण उन्हें न तो नियमित कोचिंग मिलती है और न ही प्रतियोगी माहौल।</p>
<p><strong>खेल प्रेमियों की अपील, बने सुविधाओं का हब</strong><br />खेल प्रेमियों का कहना है कि प्रशासन और खेल विभाग को मिलकर ग्रामीण व शहरी दोनों स्तरों पर क्रिकेट अकादमियों की स्थापना करनी चाहिए। इससे न केवल स्थानीय युवाओं को अवसर मिलेगा, बल्कि कोटा खेलों का एक नया केंद्र बनकर उभरेगा। कोटा के युवा खिलाड़ी आज भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनका शहर एक दिन ऐसा मंच बनेगा, जहां से अगला राजस्थान रॉयल्स या टीम इंडिया का स्टार उभरेगा। फिलहाल, उनके सपने गली क्रिकेट की पिचों पर ही संघर्ष कर रहे हैं।</p>
<p>शहर में हाल ही में नई जिला क्रिकेट एसोसिएशन की कार्यकारिण्ी का गठन किया गया है। नई टीम के गठन से खिलाड़ियों में उत्साह भी है, एसोसिएशन का उद्धेश्य है कि अब प्रतिभाशाली क्रिकेटरों को बड़े मंच पर खेलने का सुनहरा अवसर मिले, जिससे शहर के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बेहतर मौका मिलेगा।<br /><strong>- वाईबी सिंह, खेल विकास अधिकारी, कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Oct 2025 16:41:01 +0530</pubDate>
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                <title>मेडल जीते, फिर भी नौकरी का गोल हो रहा फेल, खेल का सर्टिफिकेट लेने के बाद खिलाड़ी सरकारी नौकरी की तरफ करते  हैं रूख</title>
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                        <![CDATA[प्रशिक्षित कोचों की संख्या बेहद सीमित, नहीं  मिल रहा खिलाड़ियों को सही दिशा में मार्गदर्शन ।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/despite-winning-medals--the-goal-of-securing-a-job-remains-elusive--after-obtaining-sports-certificates--players-turn-their-attention-to-government-jobs/article-130521"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(3)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती अंचल खेलों की प्रतिभाओं से भरा पड़ा है। यहां के युवा और बालिकाएं जिला और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार गोल्ड और सिल्वर मेडल जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं। लेकिन बड़ी सच्चाई यह है कि कोचों की कमी, मानक अनुरूप ग्राउंड का अभाव और लंबे समय से रुकी भर्ती की वजह से इन खिलाड़ियों का सफर आगे बढ़ ही नहीं पाता। सरकार खेलों को बढ़ावा देने के तमाम प्रयास कर रही है, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी खिलाड़ियों की मेहनत पर भारी पड़ रही है। खेलों से सरकारी नौकरी पाने का रास्ता खुला है। यही वजह है कि खिलाड़ी राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय सर्टिफिकेट लेकर नौकरी की तैयारी में लग जाते हैं। उनके भीतर की खेल प्रतिभा वहीं ठहर जाती है। सरकार अगर सही समय पर प्रशिक्षित कोच और मानक स्तर के मैदान उपलब्ध कराए, तो यही खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चमक सकते हैं।</p>
<p><strong>फुटबॉल और क्रिकेट के लिए नहीं है राष्ट्रीय स्तर का मैदान</strong><br />खेल शिक्षा अधिकारियों और कोचों के मुताबिक, हाड़ौती में फुटबॉल और क्रिकेट जैसे बड़े खेलों के लिए न तो राष्ट्रीय स्तर के मैदान हैं और न ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं। नतीजा यह है कि खिलाड़ी अपने दम पर मेहनत तो कर रहे हैं, लेकिन आगे बढ़ने के रास्ते उनके लिए बहुत जल्दी बंद हो जाते हैं।</p>
<p><strong>कोटा की गर्ल्स फुटबॉल एकेडमी में सुविधाएं मौजूद</strong><br />राजस्थान में फिलहाल दो सरकारी फुटबॉल एकेडमी संचालित हैं। एक लड़कियों के लिए कोटा में और दूसरी लड़कों के लिए जोधपुर में। कोटा की गर्ल्स एकेडमी में 30 सीटें हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से एक ही छात्रा कोटा शहर की है। इसका नाम निहारिका मेहरा, जो कुन्हाड़ी कोटा की है। बाकी सभी खिलाड़ी बाहर के जिलों से हैं। यहां हॉस्टल की व्यवस्था है, प्रशिक्षण सुबह-शाम होता है, और सरकार इसकी पूरी लागत उठाती है। बावजूद इसके मैदान का स्तर राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं है। </p>
<p><strong>निजी कोच अपने स्तर पर कर रहे प्रयास</strong><br />सरकारी कोचों की कमी के बीच निजी क्षेत्र के कोच अपने स्तर पर खिलाड़ियों को तैयार कर रहे हैं। राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में ये खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन भी कर लेते हैं। लेकिन संसाधनों और मार्गदर्शन की कमी के चलते वे आगे चलकर बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में टिक नहीं पाते। नतीजा यह होता है कि कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी केवल राज्य या राष्ट्रीय स्तर का प्रमाणपत्र हासिल करके सरकारी नौकरी की तैयारी में लग जाते हैं। उनका हुनर, जो देश का नाम रोशन कर सकता था, वहीं रुक जाता है।</p>
<p><strong>कोचों की भारी कमी, खिलाड़ी भटक रहे</strong><br />हर खेल में प्रशिक्षित कोचों की संख्या बेहद सीमित है। यही कारण है कि खिलाड़ी सही दिशा में मार्गदर्शन नहीं पा रहे। फुटबॉल और क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों में भी यही हाल है। खासकर लड़कियों के लिए प्रशिक्षित कोच उपलब्ध नहीं हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करने के लिए यह सबसे बड़ी बाधा है।</p>
<p><strong>कागजी खानापूर्ति से नहीं बनेगा खिलाड़ी</strong><br />अधिकांश स्कूल-कॉलेजों में खेल गतिविधियां केवल खानापूर्ति तक सीमित हैं। प्रतियोगिताएं होती हैं, लेकिन इनमें खिलाड़ियों को न तो बेहतर ट्रेनिंग मिलती है और न ही आवश्यक सुविधाएं। इस वजह से प्रतिभाशाली खिलाड़ी शुरूआत में दम तो दिखाते हैं, लेकिन आगे चलकर उनका करियर अधर में रह जाता है।</p>
<p><strong>सरकार के प्रयास अधूरे ही साबित</strong><br />सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं बना रही है। स्कूल-कॉलेजों में प्रतियोगिताएं हो रही हैं। लेकिन कोचों की भर्ती न होना और संसाधनों की कमी इन प्रयासों को अधूरा बना रही है। राजस्थान में दो सरकारी एकेडमियां जरूर चल रही हैं, लेकिन उनमें भी मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है। जब तक प्रशिक्षित कोच और मानक मैदान नहीं मिलेंगे, तब तक हाड़ौती की खेल प्रतिभाएं केवल शुरूआती स्तर तक ही सिमटकर रह जाएंगी।</p>
<p><strong>2012 के बाद से नहीं हुई कोचों की भर्ती</strong><br />राजस्थान सरकार की नीतियां भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। 1991 के बाद करीब 21 साल तक कोई कोच भर्ती नहीं निकली। 2012 में बड़ी मुश्किल से एक भर्ती निकली, लेकिन उसके बाद से अब तक 13 साल बीत गए। आज भी खेल विभाग में प्रशिक्षित कोचों की भारी कमी है। स्कूलों और कॉलेजों में खेलों को बढ़ावा देने के नाम पर शिक्षकों पर ही खेलों की जिम्मेदारी डाल दी जाती है। ऐसे में खेल आयोजन तो हो जाते हैं, लेकिन खिलाड़ी वास्तविक प्रशिक्षण से वंचित रह जाते हैं। खेलो इंडिया खेलो के बाद भी खिलाडियों को नौकरी नहीं मिल रही है।<br /><strong>- एमपी सिंह, पूर्व अध्यक्ष जिला  फुटबॉल संघ कोटा</strong></p>
<p><strong>हाड़ौती में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं</strong><br />कोटा, बूंदी, झालावाड़ और बारां हाड़ौती क्षेत्र का हर जिला खेल प्रतिभाओं से लबालब है। फुटबॉल, क्रिकेट, एथलेटिक्स, कबड्डी, ताइक्वांडो और बास्केटबॉल जैसे खेलों में यहां के खिलाड़ी राज्य स्तर पर लगातार अपनी पहचान बना रहे हैं। खासकर बालिकाओं ने हाल के वर्षों में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए गोल्ड और सिल्वर मेडल अपने नाम किए हैं। लेकिन यह तस्वीर अधूरी है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए जिन सुविधाओं की दरकार होती है, वे यहां मौजूद ही नहीं हैं।<br /><strong>- मधू बिश्नोई, कोच</strong></p>
<p><strong>बालिकाओं का भविष्य अधर में</strong><br />बालिकाओं के खेल को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कोटा में एकेडमी जरूर खोली है, लेकिन यह केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। कोचों की कमी, मैदान का स्तर खराब होना और स्थानीय प्रतिभाओं का एकेडमी से दूर रहना इस योजना को अधूरा बना रहा है। आज की बालिकाएं हर खेल में आगे बढ़ रही हैं। ओलंपिक से लेकर एशियन गेम्स तक, भारतीय बालिकाएं देश का नाम ऊंचा कर रही हैं। लेकिन कोटा जैसी जगहों पर, जहां बालिकाएं मेहनत करने को तैयार हैं, उन्हें सही मार्गदर्शन और मंच नहीं मिल पा रहा।<br /><strong>- मीनू सोलंकी, कोच</strong></p>
<p><strong>यह बोलीं एकेडमी की बालिकाएं</strong><br />मैं दो साल से एकेडमी में हू, अभी हॉस्टल में रह रही हूं। सुबह और शाम रोजाना दो घंटे स्टेडियम में मैच की प्रेक्टिस करते हैं। प्रैक्टिस के दौरान रनिंग, फास्ट रनिंग, स्टेचिंग, शूटिंग, कोन तथा व्यायाम करते है। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में अलवर में हमारी एकेडमी टीम गोल्ड मेडल जीता है। आगे भी राष्टÑीय स्तर खेलने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे है। चार साल से लगातार गोल्ड मेडल ला रहे है।<br /><strong>-अंजलि मेहरा, कुन्हाड़ी कोटा</strong></p>
<p>मैंने इस साल ही एकेडमी ज्वाइनिंग की है। मैं इसके माध्यम आगे बढ़ना चाहती हूं तथा राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के साथ नेशनल व इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में पार्टिसिपेट करना चाहती हूं। इसके लिए मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं। हमारे कोच भी अच्छे है, जो हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते है।<br /><strong>-निहारिका मेहरा, हनुमानगढ़</strong></p>
<p>मैंने चार साल रहकर एकेडमी में पढ़ाई की तथा कोटा के रामपुरा की रहने वाली हूं। मैंने 13 बार राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया तथा 6 बार गोल्ड, 2 बार सिल्वर व एक बार कांस्य पदक हासिल किया। अभी हाल ही में नेशनल प्रतियोगिता में भाग भी लिया है हम प्रतियोगिता पंजाब के अमृतसर में हुई थी जिसमें सभी स्टेट की टीमों ने पार्टिसिपेट किया था। अब हमारे सामने यह दुविधा है कि आगे की प्रतियोगिताओं के लिए कैसे तैयारी करें, अच्छे कोचों का गाइडेंस के साथ राष्टÑीय-अंतरराष्टÑीय मैचों में भाग लेने के लिए प्रशासन से हमें कोई सपोर्ट नहीं मिल पा रहा है। <br /><strong>-  मेधनी सैन, रामपुरा, कोटा</strong></p>
<p><strong>खेलों से नौकरी तक खुल रही राह</strong><br />हाड़ौती के खिलाड़ी अब खेलों के जरिए न सिर्फ अपना हुनर दिखा रहे हैं बल्कि सरकारी नौकरियों तक पहुंच भी बना रहे हैं। राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में कोटा के युवा लगातार हिस्सा ले रहे हैं और अपनी मेहनत व लगन से गोल्ड मेडल जीतकर शहर का नाम रोशन कर रहे हैं। सरकार की ओर से खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं ताकि वे खेल के हर स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें। खेल विभाग की ओर से खिलाड़ियों को और अधिक सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए प्रस्ताव भी सरकार को भेजा गया है। सुविधाओं का दायरा और बढ़ा रहे है ताकि खिलाड़ी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमक बिखेर सकें।<br /><strong>-वाईबी सिंह, खेल विकास अधिकारी, कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sat, 25 Oct 2025 15:30:53 +0530</pubDate>
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                <title>इंतजार और अभी : खेल दिवस पर भी खाली हाथ रह गए खिलाड़ी और कोच, उम्मीदें जगाकर भी नहीं हो सकी महाराणा प्रताप और गुरु वशिष्ठ अवार्ड की घोषणा</title>
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                        <![CDATA[अपरिहार्य कारणों से आज घोषणा संभव नहीं हो सकी। जल्द ही पुरस्कारों की घोषणा की जाएगी और समारोह आयोजित कर खिलाड़ियों व कोचों का सम्मान किया जाएगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/waiting-and-still-on-sports-day-the-players-and-coaches/article-125202"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/6622-copy67.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मेजर ध्यानचन्द के जन्म दिन राष्ट्रीय खेल दिवस पर राजस्थान खेल परिषद द्वारा प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित महाराणा प्रताप और गुरु वशिष्ठ अवार्ड देने की घोषणा की गई थी। इसके लिए कई महीनों से तैयारियां भी चल रही थीं। लेकिन शुक्रवार को पुरस्कारों की घोषणा भी नहीं हो सकी। सात साल से सम्मान का इंतजार कर रहे खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को एक बार फिर मायूसी हाथ लगी। इस संबंध में खेल परिषद के सचिव राजेन्द्र सिंह सिसोदिया ने कहा कि हमने पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन कुछ अपरिहार्य कारणों से आज घोषणा संभव नहीं हो सकी। जल्द ही पुरस्कारों की घोषणा की जाएगी और समारोह आयोजित कर खिलाड़ियों व कोचों का सम्मान किया जाएगा।</p>
<p><strong>सात साल से अटका सम्मान</strong><br />प्रदेश में महाराणा प्रताप और गुरु वशिष्ठ अवार्ड आखिरी बार 2017-18 में दिए गए थे। उसके बाद से अब तक कुल 481 खिलाड़ी और कोच इन पुरस्कारों के लिए आवेदन कर चुके हैं। इनमें 334 खिलाड़ी महाराणा प्रताप पुरस्कार के दावेदार हैं, जबकि 147 प्रशिक्षक गुरु वशिष्ठ अवार्ड की कतार में हैं।</p>
<p><strong>दो दिन चली चयन बैठक</strong><br />पुरस्कारों के लिए अलग-अलग चयन समितियों का गठन किया गया था। दो दिन तक चली लंबी बैठकों के बाद सूचियों को अंतिम रूप दिए जाने का दावा किया गया, लेकिन ऐलान आखिरी समय पर रोक दिया गया। परिषद ने इसके पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया। इसी को लेकर खेलजगत में चुटकियां भी ली गईं कि कहीं एसआई भर्ती जैसी स्थिति न हो जाए। </p>
<p><strong>एक साथ 70 को मिलना है सम्मान</strong><br />नियम के अनुसार हर साल 5 खिलाड़ी महाराणा प्रताप और 5 प्रशिक्षक गुरु वशिष्ठ अवार्ड के लिए चुने जाते हैं। इस हिसाब से अब एक साथ 35 खिलाड़ी और इतने ही प्रशिक्षक सम्मानित किए जाएंगे। परिषद सूत्रों के मुताबिक फिलहाल न तो सम्मान स्वरूप दी जाने वाली प्रतिमाएं तैयार हैं, और न ही चयनित खिलाड़ियों के लिए प्रशस्ति पत्र और ब्लेजर बन पाए हैं। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>खेल</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Aug 2025 10:00:14 +0530</pubDate>
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                <title>खिलाड़ी कम थे, फिर भी जीत लिया मैच : रियल मैड्रिड ने पचुका को 3-1 से हराया</title>
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                        <![CDATA[खिलाड़ियों वाली रियल मैड्रिड ने फीफा क्लब विश्वकप 2025 में ग्रुप एच के अपने मुकाबले में मैक्सिको की पचुका को 3-1 से हराया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/real-madrid-vs-pachuca-fifa-club-world-cup-2025/article-118292"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news-(2)36.png" alt=""></a><br /><p>चार्लोट। खिलाड़ियों वाली रियल मैड्रिड ने फीफा क्लब विश्वकप 2025 में ग्रुप एच के अपने मुकाबले में मैक्सिको की पचुका को 3-1 से हराया। मैड्रिड ने रविवार रात बैंक ऑफ अमेरिका स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में 7 मिनट बाद ही वेनेजुएला के स्ट्राइकर सॉलोमन रोंडन को बॉक्स के बाहर आखिरी डिफेंडर के रूप में फाउल करने के लिए सीधा रेड कार्ड दिखाया गया। इसके बाद मैड्रिड को मैच 10 खिलाडियों से खेलना पड़ा। एक खिलाड़ी कम होने के बावजूद रियल मैड्रिड ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया।</p>
<p>जूड बेलिंगहैम ने 35वें मिनट में मैड्रिड के लिए गोल दाग कर अपनी टीम को बढ़त दिलाई। मैड्रिड ने हाफटाइम से ठीक पहले एक और गोलकर बढ़त को दोगुना कर दिया। फेडेरिको वाल्वरडे ने 70वें मिनट में मैड्रिड के लिए तीसरा गोल किया। इससे दस मिनट बाद इलियास मोंटिएल ने पचुका के लिए एक गोल किया। इस जीत के साथ रियल मैड्रिड के 2 मैचों में 4 अंक हो गए हैं। रियल मैड्रिड गुरुवार को फिलाडेल्फिया में आरबी साल्जबर्ग से मुकाबला करेगी।</p>]]>
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                                                            <category>खेल</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/khel/real-madrid-vs-pachuca-fifa-club-world-cup-2025/article-118292</link>
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                <pubDate>Mon, 23 Jun 2025 15:23:15 +0530</pubDate>
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                <title>छबड़ा के खेल मैदान में जन सुविधाओं का अभाव, बड़ी संख्या में घूमने आते हैं महिला-पुरूष</title>
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                        <![CDATA[पालिका प्रशासन की उदासीनता से पीने के पानी तक की नहीं है व्यवस्था]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/lack-of-public-facilities-in-chhabra-s-playground/article-116247"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(1)8.png" alt=""></a><br /><p>छबड़ा। छबड़ा कस्बे के एक मात्र सीनियर हायर सैकंडरी के खेल मैदान पर पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं होने एवं चारों ओर गन्दगी का आलम पसरा रहने से रोजाना मोर्निग एवं ईवनिंग वाक पर आने वालों, अपनी खेल प्रतिभा को निखारने आने वाले खिलाड़ियों, पुलिस सेना भर्ती की तेयारियों करने वाले छात्रों तथा छुट्टियों का आनन्द उठाने के लिये आ रहे छोटे बच्चों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र से आकर तपती दोपहर में यहां थोड़ी देर सुस्ताने वाले ग्रामीणों को पीने के पानी की समस्या से जूझना पड़ता है। आश्चर्य तो इस बात का हे की लगभग 25 वर्षो पूर्व बने इस खेल मैदान पर जन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये न तो नगर पालिका ने ध्यान दिया न किसी भी दल के जनप्रतिनिधियों ने। भाजपा के वरिष्ठ नेता संजय नामदेव ने लोगों की इस पीड़ा का समाधान करने का बीड़ा उठाते हुए क्षेत्रीय विधायक एवं पालिका प्रसासन को पत्र लिखकर खेल में दान पर शीघ्र टुयुबवेल एवं वाटर कूलर लगाने तथा लोगों के स्वास्थ्य के तहत खेल मैदान की सफाई कराने की मांग की हे  ताकी लोगों को राहत मिल सके।</p>
<p><strong>बड़ी संख्या में घूमने आते हैं महिला-पुरूष</strong><br />कस्बे के चारों ओर ईंट भट्ठे संचालित होने के चलते सुबह शाम खेल मैदान पर सेकंडों महिला पुरुष एवं युवक युवतियां यहां स्वास्थ्य की दृष्टी से घूमने आते हैं। भले ही सर्दी में पानी की कमी महसूस न हो लेकिन गर्मी में घूमने व्यायाम करने के दोरान प्यास सताने लगती है। जिससे बड़ी संख्या में लोग जल्दी ही लोट जाते हे तथा बहुत से लोग पानी की बोतल साथ लाते हैं।</p>
<p><strong>खिलाड़ी प्रतिदिन करते हैं अभ्यास</strong><br />विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ी तो रोजाना यहां अभियान करते ही हे साथ ही प्रतिदिन खिलाड़ी विशेष तोर से क्रिकेट के शोकीन भी यहां आते हें लेकिन पानी की कमी से इन्हें भी जूझना पड़ता है।</p>
<p><strong>सेना एवं पुलिस भर्ती की तैयारी के लिए बहाते हैं पसीना:</strong> यहां रोजाना पुलिस एवं सेना भर्ती के साथ शारिरिक क्षमता वाली अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तेयारी करने वाले छात्र छात्राएं रोजाना यहां आकर दोड एवं व्यायाम के साथ पसीना बहाते हैं तथा नोकरी पाने की लालसा मे अपनी क्षमता से सभी अधिक परिश्रृम करते हैं।</p>
<p><strong>छोटे-छोटे बच्चे भी आते हैं छुट्टियों का आनन्द उठाने </strong><br />स्कूल में पढ़ने जाने वाले बच्चों का गर्मी की छुट्टियां मोज मस्ती करने का सबसे उत्तम समय होता हे तथा वह घर से क्रिकेट का सामान लाकर क्रिकेट खेलने का आनन्द उठाते हैं। लेकिन इस दौरान लगने वाली प्यास आनंद में खलल डाल देती है।</p>
<p><strong>गंदगी का अंबार होने से होती है परेशानी</strong><br />खेल में दान पर लम्बे समय तक सफाई न होने से यहां गन्दगी का आलम पसरा रहता हे जिससे उठती बदबू दोड भाग कर स्वास्थ्य सुधारने आये लोगों के स्वास्थ्य पर उल्टा प्रभाव डालती है।</p>
<p>हैंडपम्प लगाने का कार्य जलदाय विभाग द्वारा किया जा रहा है तथा जहां तक मेरी जानकारी में आया है, विधायक ने जलदाय विभाग को यहां शीघ्र हैंडपंप लगाने के निर्देश दिए हैं।<br /><strong>-यादवेन्द्र यादव, तहसीलदार एवं ईओ, नगर पालिका, छबड़ा </strong></p>
<p>खेल मैदान पर पानी की किसी रे तरह की कोई सुविधा नहीं है। मैंने विधायक सिंघवी को एवं पालिका प्रसासक को पत्र लिखकर यहां टुयुबवेल खुदवाने एवं वाटर कूलर लगवाने की मांग की है। ताकि लोगों को राहत मिल सके। <br /><strong>-संजय नामदेव, वरिष्ठ भाजपा नेता</strong></p>
<p>मैं साथियों सहित रोजाना सुबह शाम घूमने जाता हूं। लेकिन खेल मैदान पर पानी की कोई व्यवस्था नहीं है तथा सफाई नहीं होने से गन्दगी भी पसरी रहती है।<br /><strong>-सीपी गेरा, पूर्व भाजपा नगर अध्यक्ष</strong><br /> <br />खेल मैदान पर प्रतिदिन सैंकडों महिला पुरुष घूमने आते हैं। लेकिन पानी की समस्या के चलते सभी परेशान होते हैं। जबकि यहां डाक्टर, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी भी आते हैं।<br /><strong>-प्रवीण जैन, रिटायर्ड कर्मचारी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Jun 2025 15:53:31 +0530</pubDate>
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                <title>बेसिक संसाधन मिले तो खिलाड़ी लहरा देंगे परचम, खिलाड़ियों के लिए नहीं पूरी सुविधाएं</title>
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                        <![CDATA[स्वस्थ जीवनशैली और युवा सशक्तिकरण का प्रतीक भी।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-basic-resources-are-provided--players-will-fly-the-flag/article-113306"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/news15.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा में खेल को लेकर युवाओं में जोश और जनून दोनों है। यहां के युवक युवतियां विश्व स्तर पर कोटा की पहचान बना चुके है।  लेकिन एथलेटिक्स में अभी काफी सूखा है। अभी तक राष्ट्रीय स्तर तक ही एथलेटिक्स पहुंच सके है। यहां अच्छा सिंथेट्रिक ट्रैक तो बना दिया लेकिन अच्छे कोच और खेल सामग्री नहीं होने से खिलाड़ी अभी अंतरराष्ट्रीय स्तर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा पाए है।  विश्व एथलेटिक्स दिवस सिर्फ एक खेल दिवस नहीं है, बल्कि यह एक स्वस्थ जीवनशैली और युवा सशक्तिकरण का प्रतीक है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि खेल सिर्फ जीतने के लिए नहीं बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक हैं। विश्व एथलेटिक्स दिवस  हर साल 7 मई  को मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं में खेलों, विशेषकर एथलेटिक्स के प्रति रुचि को बढ़ाना और स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता फैलाना है। यह दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है और इसकी शुरुआत अंतरराष्ट्रीय एमेच्योर एथलेटिक्स महासंघ  द्वारा की गई थी, जिसे अब वर्ल्ड एथलेटिक्स  के नाम से जाना जाता है। </p>
<p><strong>खिलाड़ियों के लिए नहीं पूरी सुविधाएं</strong><br />कोटा में एथलेटिक्स में अपना नाम रोशन करने के लिए युवा आतुर है लेकिन उनको खेल सामग्री और संसाधन नहीं मिलते जिससे वो आगे नहीं बढ़ पा रहे है। यहां अच्छे सिखाने वाले कोच की कमी है। सिंथेटिक ट्रैक तो बना दिया लेकिन अन्य संसाधन नहीं है। ऐसे में खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर भी नहीं पहुंच पाते है। अगर आपके पास अच्छा कोच है तभी आप अच्छी उपलब्धि हासिल कर सकते है। यहां अच्छी खेल एकडमी नहीं है जहां अभ्यास किया जा सकें। मैं छठी कक्षा से खेलना शुरू कर दिया। अच्छी रैंक आने लगी तो एकडमी ज्वाइन की। फिर कोच विशाल मीणा के सानिध्य में खेल सुधार हुआ और मेडल मिलने लगे। कोटा में मध्यम वर्गीय परिवार के बच्चों के लिए खेल में आगे बढ़ने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। खिलाड़ी के लिए सबसे परेशानी आर्थिक प्रबंधन की आती है। खेल की ट्रैनिंग फिटनेस और डाइट के लिए पैसे चाहिए होते है। अभी वर्तमान 200 मीटर दौड़ में जुनियर नेशनल सिल्वर मेडिल जीता है। वेस्ट जोन में 100 व 200 मीटर दौड़ दो गोल्ड मेडिल जीते। एथलेटिक्स में युवतियों के लिए कई बेहतर विकल्प है। लड़कियां रोटिया बनाने का दम रखती तो रोटी कमाने का दम रखें खेल के साथ हर फिल्ड में लड़कियां अपना परचम फहरा रही है। मेडल लाने वाले खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए। संसाधन बढ़ाने की आवश्यकता है।  जिससे  खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर सकें।  <br /><strong>- आइशा खानम, राष्ट्रीय एथलेटिक्स खिलाड़ी</strong></p>
<p><strong>रिजनल सेंटर में पचास फीसदी ही खेल सामग्री मिलती है</strong><br />सरकार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है। खेल मैदान भी विकसित कर रही है। लेकिन अभी कोटा में एथलेटिक्स के लिए पूरे संसाधन नहीं है। कोटा में श्रीनाथपुरम में साढे आठ करोड़ की लागत से सिंथेटिक ट्रैक बनाया लेकिन वहां फूटबॉल व अन्य खिलाड़ी भी अभ्यास करते है। इसके अलावा ट्रैंक पर मॉर्निंग वॉक वालों की दखल है। ऐसे में कई बार दौड़ के दौरान फूटबॉल की ट्रैंक पर आ जाती है जिससे खिलाड़ी स्पीड बाधित हो जाती है। टोकने पर खिलाड़ी आपस में भीड़ जाते है। एथलेटिक्स के लिए ही ट्रैक प्रयोग होना चाहिए। गोला फेंक, भाला फेंक, तस्तरी फेंकने अभ्यास के लिए  अलग से स्थान नहीं है। इसके लिए अलग से स्थान निर्धारित होना चाहिए। श्रीनाथपुरम स्टेडियम व उम्मेद सिंह स्टेडियम में बेसिक संसाधन तक नहीं है। रिजनल सेंटर पर खेल सामग्री 50 फीसदी ही मिलती है। संसाधन बढ़ाने की आश्यकता है। दो स्टेडियम है लेकिन  एथलेटिक्स के लिए उपयोग नहीं हो रहा है। बेसिक सुविधा की ज्यादा जरुरत है। <br /><strong>- श्याम बिहारी नाहर, कोच व वरिष्ठ गोला फेंक खिलाड़ी</strong></p>
<p><strong>यहां राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर का ट्रैक है अभ्यास के लिए</strong><br />कोटा में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खेलकूद प्रतियोगिता कराने के लिए और अभ्यास के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर का श्रीनाथपुरम में स्टेडियम बना हुआ है। उसमें दौड़ के लिए सिंथेटिक ट्रैक जहां खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए अभ्यास कर सकते है। एथलेटिक्स के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे है। <br /><strong>- यतिंद्र बहादुर सिंह खेल अधिकारी कोटा</strong></p>
<p><strong>गोला व भाला फेंक के अभ्यास के लिए नहीं है मैदान</strong><br />कोटा में एथलेटिक्स के आगे बढ़ने के लिए युवा आतुर है लेकिन यहां अभ्यास के समित संसाधन है। अभ्यास के लिए अलग से मैदान नहीं है। सभी खेलों  के खिलाड़ी एक ही स्टेडियम में अभ्यास करते है। ऐसे में कभी दुर्घटना का खतरा बना रहता है। भाला फैंक, गोला फेंक और डिस के लिए अलग से स्थान होना चाहिए जिससे खिलाड़ी सुरक्षित अभ्यास कर सकें। <br /><strong>- कुंदन गुर्जर, कांस्य पदक विजेता एथलेटिक्स गोला फेंक </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 May 2025 15:41:34 +0530</pubDate>
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                <title>3 साल से गड्ढ़ों में फुटबॉल मैदान, प्रेक्टिस को भटक रहे खिलाड़ी </title>
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                        <![CDATA[हाड़ौती का एकमात्र राजकीय फुटबॉल छात्रावास वाकेशनल स्कूल का खेल मैदान जिम्मेदारों की उपेक्षा का दंश झेल रहा है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/football-ground-in-potholes-for-3-years--players-wandering-for-practice/article-99800"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(24).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती का एकमात्र राजकीय फुटबॉल छात्रावास वाकेशनल स्कूल का खेल मैदान जिम्मेदारों की उपेक्षा का दंश झेल रहा है। छात्रावास का फुटबॉल ग्राउंड पिछले 3 सालों से गड्ढ़ों में तब्दील है, जबकि इसके डवलपमेंट के लिए बजट भी मिला हुआ है। इसके बावजूद खेल और खिलाड़ियों के प्रति  जिम्मेदारों ने लापरवाहपूर्ण रवैया अपनाया हुआ है। हालात यह है कि इस छात्रावास में प्रदेशभर से खिलाड़ी आते हैं, जिन्हें खेलने के लिए मैदान नहीं मिलता। ऐसे में प्रेक्टिस के लिए उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता है।  </p>
<p><strong>97 लाख का बजट कराया था उपलब्ध</strong><br />नयापुरा स्थित राजकीय फुटबॉल छात्रावास में खेल मैदान है, जो वर्तमान में खेलने लायक नहीं है। मैदान में जगह-जगह गड्ढ़े हो रहे हैं। जिसकी वजह से हॉस्टल के फुटबॉल खिलाड़ी अपने ही मैदान में पिछले तीन साल से प्रेक्टिस नहीं कर पा रहे। जबकि, तत्कालीन सरकार ने  हॉस्टल डवलपमेंट के लिए 97 लाख का बजट केडीए (पूर्व में यूआईटी) को उपलब्ध करवा दिया था। इसके बावजूद मैदान को डवलप नहीं किया गया। हालांकि, गत वर्ष हॉस्टल में नए कमरे बनाए गए थे और मैदान में मिट्टी भरवाकर समतलीकरण किया जाना था, जो अब तक नहीं करवाया गया। </p>
<p><strong>हर रोज ग्राउंड पहुंचने के लिए  होती है मशक्कत</strong><br />शारीरिक शिक्षक प्रवीण विजय ने बताया कि पिछले तीन साल से छात्रावास का मैदान में गड्ढ़े हो रहे हैं। जिसमें खिलाड़ियों का प्रेक्टिस करना संभव नहीं है। ऐसे में उन्हें स्टेडियम जाना पड़ता है, जहां कई बार खेलने के लिए जगह नहीं मिल पाती, क्योंकि वहां पहले से ही कई अकेडमियों की टीमें प्रेक्टिस कर रही होती है। ऐसे में टीम को खेलने से पहले हर रोज ग्राउंड ढूंढने की मशक्कत करनी पड़ती है। जबकि, खिलाड़ियों को हर रोज दो से ढाई घंटे प्रेक्टिस करनी होती है, जो ग्राउंड के अभाव में नहीं हो पाती। समस्या से अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को भी अवगत कराया लेकिन समाधान नहीं हुआ।</p>
<p><strong>खिलाड़ियों के पैदल स्टेडियम जाने-आने में हादसे का खतरा</strong><br />संभाग का एकलौता राजकीय फुटबॉल छात्रावास नयापुरा जेकेलोन अस्पताल के सामने वोकेशनल स्कूल में है।   यहां खेल मैदान नहीं होने से 20 खिलाड़ियों को करीब 500 मीटर स्टेडियम में पैदल-पैदल जाना-आना पड़ता है। जबकि, इस रोड पर ट्रैफिक अधिक रहता है। ऐसे में हादसे की आशंका बनी रहती है। वहीं, अव्यवस्थाओं का असर उनके खेल पर भी पड़ता है। जबकि, राज्य के विभिन्न जिलों से खिलाड़ी अच्छी खेल सुविधा के भरोसे में कोटा आते हैं। ऐसे में उन्हें अव्यवस्थाओं से जूझना पड़े तो प्रदेश में कोटा की छवि पर गलत प्रभाव पड़ेगा। </p>
<p><strong>मैदान में झाड़-झाड़ियों </strong><br />का लगा ढेरफुटबॉल छात्रावास का खेल मैदान करीब 100 गुना 100 साइज का है। जिसमें से प्रेक्टिस एरिया 100 गुना 80 है। जिसमें झाड़-झाड़ियों उगी होने से जंगल हो रहा है। जिसमें जहरीले जीव जंतुओं की मौजूदगी बनी रहती है। वहीं, जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। हॉस्टल के नवनिर्मित कमरों के निर्माण के बाद मैदान में मिट्टी भरवाकर जमीन समतलीकरण की जानी थी, जो अब तक पूरा नहीं हो सका। हालांकि, मैदान में केवल सीढ़ियां ही बनी है। </p>
<p><strong>अभावों के बावजूद उप विजेता रही टीम </strong><br />शारीरिक शिक्षक प्रवीण विजय ने बताया कि छात्रावास की फुटबॉल टीम गत वर्ष सितम्बर माह में बारां में आयोजित हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उप विजेता रही है। वहीं, नेशनल टीम में एक बच्चे का चयन हुआ है। इसके अलावा 17 व 19 वर्षीय फुटबॉल स्टेट टूर्नामेंट इसी साल होना है। जिसमें अधिकतर खिलाड़ी छात्रावास के ही होंगे। ऐसे में इनकी नियमित प्रेक्टिस जरूरी है। अधिकारियों को हस्तक्षेप कर ग्राउंड विकसित करवाया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>कैसे निखरेगी प्रतिभाएं</strong><br />प्रदेशभर के अलग-अलग जिलों से चयनित खिलाड़ी कोटा आते हैं। लेकिन छात्रावास में खेलने के लिए मैदान ही नहीं है। रोजाना पैदल-पैदल स्टेडियम जाना होता है, फिर वहां खेलने के लिए जगह ढूंढनी पड़ती है। इतनी मशक्कत के बाद कभी जगह मिलती हो तो प्रेक्टिस हो पाती है, कई बार तो बैरंग लौटना पड़ता है। अभावों में खेल प्रतिभाएं कैसे निखरेगी।</p>
<p><strong>क्या कहते हैं खिलाड़ी</strong><br />खुद के ही कैम्पस में खेल नहीं पा रहे। मैदान में इतने गड्ढ़े हैं कि प्रेक्टिस करने की सोच भी नहीं सकते। जबकि, बोर्ड परीक्षा के बाद स्टेट टूर्नामेंट होने वाला है, ऐसे में प्रेक्टिस की सख्त आवश्यकता है लेकिन स्टेडियम में भी कई बार जगह नहीं मिल पाती। जिसकी वजह से पे्रक्टिस नहीं हो पाती। अधिकारियों को खेल सुविधाएं विकसित करनी चाहिए।<br /><strong>- सुरेंद्र गोयल (परिवर्तित नाम) खिलाड़ीं</strong></p>
<p> यह बहुत पुराना फुटबॉल ग्राउंड है, जो मरम्मत के अभाव में खेलने लायक नहीं बचा है। इस एरिया में फुटबॉल खेलना बंद सा हो गया है। जिम्मेदार अधिकारियों को इसके विकास पर ध्यान देना चाहिए ताकि, प्रतिभाएं निखर सके। क्योंकि शहर में पहले ही खेल मैदानों की कमी है, ज्यादा मैदान होंगे तो कोटा को ज्यादा खिलाड़ी मिल सकेगी।<br /><strong>- तीरथ सांगा, सचिव, जिला फुटबॉल संघ कोटा</strong></p>
<p>स्कूल खुलने पर जिला शिक्षाधिकारी की मौजूदगी में प्रिंसिपल व कोच की बैठक कर समस्या क्या है, मैदान डवलप क्यों नहीं हो पा रहा, इसकी जानकारी करेंगे और मिलकर समाधान करवाएंगे।<br /><strong>- शिवराज सिंह चौधरी, उप जिला शिक्षाधिकारी, शारीरिक शिक्षा</strong></p>
<p>आपके द्वारा मामला संज्ञान में आया है। मंगलवार को स्कूल खुलने पर मैं स्वयं खेल मैदान का निरीक्षण करुंगा। यदि, मैदान डवलपमेंट के लिए बजट आया हुआ है फिर भी काम नहंी करवाया गया तो गंभीर बात है। मामले की पूरी जानकारी कर प्राथमिकता से समाधान करवाएंगे।<br /><strong>- केके शर्मा, जिला शिक्षाधिकारी माध्यमिक कोटा </strong></p>
<p>राज्य सरकार खेलों को बढ़ावा दे रही है। छात्रावास के फुटबॉल ग्राउंड को डवलप करवाने व समस्या के समाधान के लिए जिला शिक्षाधिकारी व एडीपीसी को निर्देशित किया है। <br /><strong>- सतीश गुप्ता, विशेषाधिकारी शिक्षा मंत्री</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jan 2025 17:33:55 +0530</pubDate>
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                <title>सरकार ने खिलाड़ियों के पैरों में कसी शुल्क की जंजीर</title>
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                        <![CDATA[खिलाड़ियों ने जताई नाराजगी]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-government-has-tightened-the-chains-of-fees-on-the-feet-of-the-players/article-98766"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer56.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकार एक तरफ खेल को प्रोत्साहित करने का दावा करती है वहीं दूसरी ओर शुल्क लगाकर प्रतिभाओं को मैदान से दूर रखने की कोशिश कर रही है। पे एंड प्ले पॉलिसी का कोटा में विरोध शुरू हो गया है। यहां खेल संगठनों व खिलाड़ियों ने इस पॉलिसी पर नाराजगी जताते हुए इसे स्पोर्ट्स को आगे बढ़ने से रोकने वाला कदम बताया है।  दरअसल, राज्य सरकार नए साल में एक जनवरी से पे एंड प्ले पॉलिसी लागू कर रही है। जिसके तहत राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद के स्टेडियमों में खेलने के लिए खिलाड़ियों को शुल्क चुकाना पड़ेगा। सरकार की इस पॉलिसी का खेल जगत में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। </p>
<p><strong>मैदान से दूर होगी खेल प्रतिभाएं</strong><br />खिलाड़ियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार की यह पॉलिसी अव्यवहारिक है। इस तरह स्पोर्ट्स आगे बढ़ने की बजाए पीछे चला जाएगा। कई खेल प्रतिभाएं ऐसी हैं, जिनकी पारिवारिक स्थिति ठीक नहीं है, फिर भी जैसे-तैसे वह मैदान तक पहुंच रहे हैं। लेकिन, अब शुल्क वसूलेंगे तो वह मैदान तक भी पहुंच नहीं पाएंगे। हालात यह है, जिला व राज्य स्तर प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं मिलता और अजीबो-गरीब पॉलिसी लागू कर खिलाड़ियों के साथ अन्याय किया जा रहा है।  </p>
<p><strong>खिलाड़ी बोले-समझ से परे सरकारी नीति</strong><br />ऐसे तो कैसे जीतेंगे मेडल बॉक्सिंग खिलाड़ी निशा गुर्जर का कहना है, पे एंड प्ले पॉलिसी खिलाड़ियों का मनोबल तोड़ने वाली है।  कोई भी गेम सिर्फ मैदान तक ही सीमित नहीं होता बल्कि उसके संसाधन व सामग्री भी जुटानी होती है। जिसका जुगाड़ खिलाड़ी जैसे-तैसे कर पाता है, अब  स्पोर्ट्स शुल्क वसूले जाने से उसका खेलना और मुश्किल हो जाएगा। यह स्कीम 1 जनवरी से सभी क्षेत्रीय व जिला खेलकूद प्रशिक्षण केंद्रों पर लागू कर दी जाएगी। एक ओर जहां ओलंपिक में मेडल लाने की बात कही जाती वहीं दूसरी स्पोर्ट्स कोचिंग पर शुल्क लगाकर खिलाड़ियों पर कुठाराधात किया जा रहा है। </p>
<p><strong>खेलों को नहीं मिलेगा प्रोत्साहन </strong><br />वुशू खिलाड़ी भावेश मीणा का कहना है, खेल मैदान पर खिलाड़ियों को खेलते देख लोग अपने बच्चों को भी स्पोर्ट्स में लाने के लिए प्रेरित होते हैं। लेकिन खेलने व कोचिंग का पैसा लिया जाएगा तो प्रतिभाओें का मैदान तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा।  राज्य क्रीडा परिषद के स्टेडियमों में खेलने व कोचिंग के लिए खिलाड़ियों से विभिन्न गेम कैटेगिरी में प्रतिमाह 200 से 500 प्रतिमाह वसूले जाएगा। वहीं, नॉन प्लेयर को 1500 रुपए का शुल्क देना पड़ेगा। जब स्पोर्ट्स कॉर्मिशियल होगा तो देखने व प्रोत्साहित करने वाले भी ग्राउंड पर नहीं आएंगे। ऐसे में यह पे एंड प्ले पॉलिसी खिलाड़ियों के हित में नहीं है। ऐसे में इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए। </p>
<p><strong>गेम्स की इन तीन श्रेणियों में तय किया शुल्क  </strong><br /><strong>कैटेगरी-'अ' :</strong> लॉन टेनिस, बैडमिंटन, किकेट, टेबल टेनिस, राइफल, शूटिंग, जिम, स्क्वैश शामिल है। इसमें  नए खिलाडियों को कोचिंग के 500 रुपए प्रतिमाह, शौकियां / नॉन प्लेयर को 1500 रु. प्रतिमाह देना होगा।  <br /><strong>कैटेगरी-'ब' :</strong> एथलेटिक्स, जूडो, हॉकी, तीरंदाजी, भारोत्तोलन, जिम्नास्टिक, ताइक्वांडो में नए खिलाड़ियों को कोचिंग के 300 रुपए प्रतिमाह, शौकियां / नॉन प्लेयर के लिए 1000 रुपए प्रतिमाह तय किया है। <br /><strong>कैटेगरी- 'स' : </strong>साइक्लिंग, कुश्ती, कबड्डी, हैंडबॉल, बॉक्सिंग, बास्केटबॉल, वॉलीबॅल, फुटबॉल, खो-खो, वुशू नए खिलाड़ियों को कोचिंग के 200 रुपए प्रतिमाह, नॉन प्लेयर को 500 रु. प्रतिमाह देने होंगे। </p>
<p>राज्य सरकार खिलाड़ियों को ग्राउंड पर आने पर रोक रही है। पे एंड प्ले स्कीम स्पोर्ट्स को फिर से पीछे धकेल देगी।  खिलाड़ियों को 2017 से लेकर 2024 तक का राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं का भुगतान और राष्ट्रीय प्रतियोगिता भुगतान जो राज्य सरकार से दी जाने वाली मदद राशि है वह अब तक नहीं दी गई है। ऐसे खेल प्रतिभाएं कैसे निखरेगी।<br /><strong>-शिव भगवान गोदारा, अध्यक्ष वुशू संघ कोटा</strong></p>
<p>सरकार खिलाड़ियों को आगे बढञाने का प्रयास करती है। पे एन्ड प्ले स्कीम से भी खिलाड़ियों को लाभ ही मिलेगा। खेल मैदान पर गंभीर खिलाड़ी ही आएंगे। खिलाड़ियों को अच्छी सुविधा मिल पाएंगी। <br /><strong>-विजय सिंह, खेल निदेशक कोटा यूनिवर्सिटी    </strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं कोच</strong><br />सरकार की इस योजना से गरीब खिलाड़ी कभी ग्राउंड पर नहीं आ पाएगा। प्रतिभाओं का हनन होगा। हम पहले ही खेलों में बहुत पिछड़े हुए हैं। कई खिलाड़ी अपने दम पर जिले से राज्य स्तरीय टीम में चयनित होकर मेडल लाते हैं। जब इस तरह की पॉलिसी वजूद में आती है तो उनका मनोबल टूट जाता है और वह खेलों से दूरी बना लेते हैं।  कई देश जो हमारे राज्यों से भी छोटे हैं लेकिन स्पोर्ट्स की बेहतर फेसेलिटी से  आलम्पिक में मेडल जीतने में हमसे कई गुना आगे रहते हैं। यह पॉलिसी बंद होनी चाहिए। <br /><strong>-अशोक गौतम, सचिव वुशू संघ कोटा </strong></p>
<p>पे एंड प्ले पॉलिसी खिलाड़ियों के बढ़ते कदम रोकने  जैसी है। अधिकांश बच्चों की आर्थिक स्थिति अच्छी  नहीं है। उनके लिए खेलों से जुड़ा रहना ही मुश्किलोंभरा रहता है। ऐसे में आर्थिक बोझ डालने से वे खेलों से दूर हो जाएंगे। इस तरह की पॉलिसी से स्पोट्स कॉमर्शियल में तब्दील होगा, जिससे आगे बढ़ने की जगह पिछड़ जाएगा। यदि, सरकार स्पोर्ट्स को प्रमोट करना चाहती है तो सुविधाएं बढ़ाएं, कोच लगाएं। स्कूली स्तर से बच्चों को खेलों से जोड़ने के प्लान तैयार किए जाएं ताकि प्रतिभाओें को मंच मिल सके।<br /><strong>-डॉ. तीरथ सांगा, फुटबॉल कोच एवं सचिव जिला फुटबॉल संघ कोटा </strong></p>
<p>अभी इस पॉलिसी की गाइड लाइन नहीं आई है। एक-दो दिन में आ जाएगी, जिसका अध्ययन करने के बाद ही, जानकारी दे पाएंगे।<br /><strong>-वाए बी सिंह, जिला खेल अधिकारी कोटा </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Dec 2024 16:01:46 +0530</pubDate>
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