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                <title>Pakistan Mediation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Pakistan Mediation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान : ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने के करीब, कूटनीतिक सफलता का दिया संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष समाप्त होने का संकेत देते हुए पाकिस्तान में दोबारा शांति वार्ता शुरू होने की घोषणा की है। अमेरिकी सेना द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की प्रभावी नाकाबंदी से ईरान का 90% समुद्री व्यापार ठप हो गया है। अमेरिका ने यूरेनियम संवर्धन रोकने और परमाणु केंद्रों को नष्ट करने की कड़ी शर्त रखी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trumps-big-announcement-indicates-diplomatic-success-as-war-with/article-150525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trumpp.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि ईरान के साथ संघर्ष 'समाप्त होने के करीब' है। उन्होंने एक संभावित कूटनीतिक सफलता का संकेत भी दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि रुकी हुई बातचीत पाकिस्तान में कुछ ही दिनों में फिर से शुरू हो सकती है, जिससे युद्धविराम समाप्त होने से पहले किसी समझौते की उम्मीद जगी है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर अपनी पकड़ काफी सख्त कर दी है। सेना ने पुष्टि की है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से घेराबंदी लागू करते हुए ईरानी समुद्री व्यापार को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया है।</p>
<p>अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के प्रमुख ब्रैड कूपर ने कहा कि इस अभियान ने 36 घंटों से भी कम समय में ईरान की व्यापारिक जीवन रेखा को पंगु बना दिया है। ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी पूरी तरह से लागू कर दी गई है। ईरान की लगभग 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार पर निर्भर है, जो अब प्रभावी रूप से ठप हो गई है। शक्ति प्रदर्शन के बावजूद मुख्य गतिरोध अभी भी बने हुए हैं। अमेरिका ईरान के यूरेनियम संवर्धन को तत्काल रोकने और प्रमुख परमाणु केंद्रों को नष्ट करने की मांग कर रहा है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की भी मांग कर रहा है। हालांकि, दोनों पक्षों द्वारा समझौते पर सहमति नहीं बन पाने के कारण 10 अप्रैल को हुई पहले दौर की बातचीत के बाद मुख्य मुद्दे अनसुलझे रह गए हैं।</p>
<p>अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दोनों पक्षों के बीच गहरी अविश्वास की भावना को स्वीकार किया लेकिन एक सतर्क आशावादी रुख भी अपनाया। उन्होंने कहा, "आप इस समस्या को रातों-रात हल नहीं करने जा रहे हैं।" जेडी वेंस ने हालांकि यह भी जोड़ा कि ईरानी वार्ताकार समझौता करने के इच्छुक दिख रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम जहाँ हैं, उसे लेकर मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूँ।" डोनाल्ड ट्रंप ने सुझाव दिया कि सप्ताहांत की चर्चाओं के विफल होने और घेराबंदी लागू होने के बाद, अगले 48 घंटों के भीतर पाकिस्तान में अगले दौर की बातचीत हो सकती है, जो बढ़ते दबाव के बीच एक नए कूटनीतिक प्रयास का संकेत है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने भी जोर देकर कहा कि किसी भी समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी के लिए 'बेहद विस्तृत' सत्यापन तंत्र शामिल होना चाहिए। बातचीत के अगले चरण में यह प्रमुख मुद्दा हो सकता है। इस बीच, पूरे क्षेत्र में तनाव और कूटनीति का असर दिख रहा है। इजरायल और लेबनान ने 14 अप्रैल को दशकों में पहली बार अपनी पहली सीधी बातचीत की, जिसमें दोनों पक्ष जुड़ाव जारी रखने पर सहमत हुए। हालांकि, इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में युद्धविराम के लिए प्रतिबद्धता नहीं जताई, जो ईरान-अमेरिका गतिरोध से जुड़ा एक और संवेदनशील मुद्दा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 16:26:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>युद्धविराम की विफलता के लिए ईरान नहीं होगा दोषी, इजरायल पर लगाम लगाए अमेरिका : उमर अब्दुल्ला</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अमेरिका से इजरायल को नियंत्रित करने की अपील की है, ताकि पश्चिम एशिया में शांति बनी रहे। उन्होंने ट्रंप की भाषा की आलोचना की और पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना की। इसके अलावा, उन्होंने महिला आरक्षण और लुप्त होते जल निकायों पर चिंता जताते हुए सामूहिक नागरिक जिम्मेदारी पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/iran-will-not-be-blamed-for-the-failure-of-the/article-149775"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/umer-abdullah.png" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा कि युद्धविराम की स्थिति सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका को इजरायल पर लगाम लगानी चाहिये। उन्होंने चेतावनी दी कि निरंतर होते हमले पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों को पटरी से उतार सकते हैं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आचरण की भी आलोचना की और उनके बयानों में "असंगति तथा अनुचित भाषा" का आरोप लगाते हुए कहा कि यह उनके पद की गरिमा के अनुकूल नहीं है। मुख्यमंत्री ने श्रीनगर में एक कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से कहा कि ईरान ने संघर्ष की शुरुआत नहीं की थी और युद्ध उस पर "थोपा" गया था। उन्होंने युद्धविराम के बाद अमेरिका के जीत के दावों पर भी सवाल उठाये।</p>
<p>सीएम उमर अब्दुल्ला ने वाशिंगटन से "इजरायल को नियंत्रित करने" का आह्वान किया और लेबनान में जारी हमलों तथा नागरिक हताहतों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि युद्धविराम विफल होता है, तो इसकी जिम्मेदारी ईरान पर नहीं बल्कि इजरायल पर डाली जानी चाहिये। उमर अब्दुल्ला ने भारत की विदेश नीति पर कांग्रेस की आलोचना के संबंध में कहा कि वह इसे विफलता या सफलता का नाम नहीं देंगे, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि पाकिस्तान "वह करने में सफल रहा जो दूसरे नहीं कर सके।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि इजरायल के साथ भारत के घनिष्ठ संबंधों ने शायद उसके राजनयिक दायरे को सीमित कर दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि ऐसा न होता, तो अमेरिका और ईरान दोनों के साथ बेहतर संबंधों के कारण नई दिल्ली अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकती थी। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यदि पाकिस्तान ने इसमें योगदान दिया है, तो "इसकी सराहना की जानी चाहिए और हमें आगे बढ़ना चाहिए।" सीएम ने महिला आरक्षण विधेयक की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि संसद पहले ही इस मुद्दे पर कानून पारित कर चुकी है और सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि अब क्या बदल गया है। उन्होंने कहा कि अब तक कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया है। उन्होंने पूछा, "अब क्या बदल गया है?" उन्होंने ध्यान दिलाया कि यह कानून भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राजग सरकार ही लाई और उसी के नेतृत्व में इसे पारित किया गया था, न कि यह किसी पिछली सरकार से विरासत में मिला था।</p>
<p>उमर अब्दुल्ला ने महिला आरक्षण के प्रति समर्थन दोहराया लेकिन कहा कि "कुछ तो सही नहीं है।" उन्होंने भारत सरकार, विशेष रूप से भाजपा से इस पर "सच्चाई सामने रखने" का आग्रह किया कि मौजूदा कानून होने के बावजूद नये विधेयक पर विचार क्यों किया जा रहा है। श्री उमर ने जम्मू-कश्मीर में जल निकायों के सिकुड़ने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पूरे क्षेत्र में - श्रीनगर के आसपास और ग्रामीण क्षेत्रों में - झीलें और जल निकाय या तो काफी सिकुड़ गये हैं या पूरी तरह लुप्त हो गये हैं। उमर अब्दुल्ला ने सामूहिक कार्रवाई का आह्वान करते हुये कहा कि पर्यावरण की रक्षा करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने सवाल किया कि क्या लोग आने वाली पीढ़ियों को एक खराब पर्यावरण सौंपना चाहते हैं। दैनिक आदतों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने नागरिकों से प्लास्टिक का उपयोग कम करने का आग्रह किया और पूछा कि व्यक्ति प्लास्टिक पर निर्भर रहने के बजाय अपना थैला खुद क्यों नहीं ले जा सकते।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 18:46:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति : निर्णायक शांति समझौते की दिशा में अहम कदम, होर्मुज जलडमरुमध्य खुला</title>
                                    <description><![CDATA[तनाव के बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ निर्णायक युद्धविराम की घोषणा की है। पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए इस समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाएगा। ट्रंप की समय-सीमा समाप्त होने से पहले मिली इस सहमति ने वैश्विक युद्ध के खतरे को टाल दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-iran-agree-on-two-week-ceasefire-important-step-towards-decisive-peace/article-149498"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान युद्ध विराम के लिए सहमत हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका और ईरान एक निर्णायक शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं और बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमत हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह घोषणा वाशिंगटन समयानुसार 18:32 बजे की जो कि श्री ट्रंप द्वारा तय की गई रात आठ बजे की समय सीमा के अंदर थी।</p>
<p>उन्होंने धमकी दी थी कि अगर ईरान घोषित समयसीमा के भीतर युद्धविराम पर सहमत नहीं होता है तो ईरानी सभ्यता को खत्म कर दिया जाएगा। ईरान के विदेश मेत्री अब्बास अरागची ने भी कहा है कि उनका देश दो सप्ताह के युद्ध विराम पर सहमत हो गया है। इस दौरान होर्मुज जलडमरुमध्य को खोल दिया जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, युद्ध विराम पर सहमति पाकिस्तान के मध्य्थता से हुई है और इजरायल भी इसपर सहमत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 15:25:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार का दावा: अमेरिका, ईरान के बीच वार्ता की मध्यस्थता करने के लिए तैयार है पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की भी हो सकते हैं शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने पुष्टि की है कि उनका देश ईरान और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक वार्ता की मेजबानी करेगा। सऊदी अरब और तुर्की के समर्थन से यह कूटनीतिक प्रयास बढ़ते सैन्य तनाव और तेल संकट के बीच शुरू हुआ है। दोनों देशों के साथ अच्छे संबंधों के कारण पाकिस्तान इस जटिल संघर्ष में मुख्य मध्यस्थ बनकर उभरा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pakistani-foreign-minister-ishaq-dar-claims-america-is-ready-to/article-148465"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/isak-dar.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान जल्द ही ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता वार्ता की मेज़बानी करने के लिए तैयार है। विदेश मंत्री एवं उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने रविवार को इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इसको लेकर मिस्र, सऊदी अरब और तुर्की के शीर्ष राजनयिकों के साथ बातचीत हुई है। ये बातचीत ऐसे समय में हुई जब ईरान ने अमेरिका को ज़मीनी हमला करने के खिलाफ चेतावनी दी थी और अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच जारी जंग के चलते वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ गई हैं।</p>
<p>इशाक डार ने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि बातचीत सीधी होगी या परोक्ष, या यह कब और कहाँ होगी लेकिन उन्होंने कहा कि यह आने वाले दिनों में होगी। पाकिस्तानी विदेश मंत्री के दावों के बाद अमेरिका या ईरान, किसी ने भी तत्काल कोई टिप्पणी जारी नहीं की। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान बहुत खुश है कि ईरान और अमेरिका दोनों ने बातचीत में पाकिस्तान की मध्यस्थता पर अपना भरोसा जताया है, जो आने वाले दिनों में होगी।</p>
<p>राजनयिकों से मुलाक़ात के बाद इशाक डार ने दावा किया कि उन्होंने मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान के प्रयासों का सक्रिय रूप से समर्थन किया है और पाकिस्तान से अपील की है कि वह शामिल पक्षों के बीच व्यवस्थित बातचीत के लिए माहौल तैयार करे। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इशाक डार ने बढ़ते तनाव के बीच शांति तक पहुँचने के एकमात्र व्यावहारिक रास्ते के रूप में कूटनीति की वकालत की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस संघर्ष को समाप्त करने के सभी प्रयासों और पहलों में सक्रिय रूप से शामिल रहा है। उन्होंने कहा, "हम स्थिति को शांत करने और संघर्ष का समाधान खोजने के अपने प्रयासों में अमेरिकी नेतृत्व के साथ भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं।" पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि मंत्री चतुष्पक्षीय बैठक समाप्त होने के बाद पाकिस्तान से रवाना हो गए हैं।</p>
<p>इशाक डार ने बताया कि इस बैठक के बाद प्रत्येक मंत्री के साथ अलग-अलग बहुत ही सार्थक द्विपक्षीय बैठकें भी हुईं। एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में उभरते हुए, पाकिस्तान उन चुनिंदा देशों में से एक है जिनके अमेरिका और ईरान दोनों के साथ कूटनीतिक रूप से अच्छे संबंध हैं। पाकिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि उनके ये सार्वजनिक प्रयास हफ़्तों की खामोश कूटनीति के बाद सामने आए हैं, हालाँकि अब तक न तो ईरान और न ही अमेरिका ने बातचीत करने में बहुत ज़्यादा इच्छा दिखाई है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अब तक कूटनीति और बातचीत करने के प्रयासों को लेकर अमेरिका की गंभीरता के बारे में मिले-जुले संकेत दिए हैं। जहाँ एक ओर उन्होंने इस्लामिक गणराज्य के नेतृत्व के साथ बातचीत करने की सक्रिय रूप से अपील की है, वहीं साथ ही उन्होंने अमेरिकी सेना की तरफ से बड़े पैमाने पर बमबारी अभियान की तैयारियों को लेकर चेतावनी भी दी है। यहाँ तक कि उन्होंने ज़मीन पर पूरी तरह से हमला करने की धमकी भी दी है। सैन्य शक्ति प्रदर्शन को और बढ़ाते हुए, अमेरिका ने इस क्षेत्र में हज़ारों अतिरिक्त सैनिक और एक पूरा नया नौसैनिक हमला समूह भेजा है, जिसमें एक हमलावर जहाज़ और लड़ाकू विमान शामिल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 18:24:55 +0530</pubDate>
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                <title>देश की विदेश नीति पर चिंता जताते हुए प्रमोद तिवारी ने साधा केन्द्र सरकार पर निशाना, बोले-पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यस्थ के रूप में पेश करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने मोदी सरकार की विदेश नीति को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान-अमेरिका तनाव में पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाने की चर्चा पर चिंता जताई। तिवारी ने 'अब की बार ट्रंप सरकार' नारे पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या देश की सुरक्षा और सम्मान से समझौता किया जा रहा है?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/expressing-concern-over-the-countrys-foreign-policy-pramod-tiwari-targeted/article-148375"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pramod-tiwari-1738226239.jpg.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं सांसद प्रमोद तिवारी ने देश की विदेश नीति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। प्रमोद तिवारी ने सोमवार को यहां एक बयान में कहा कि जिस पाकिस्तान ने पहलगाम जैसी घटनाओं में देश की बहनों का सुहाग उजाड़ने का काम किया, उसी पाकिस्तान को आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यस्थ के रूप में पेश किया जा रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान की मध्यस्थता की बात कहना और इस्लामाबाद में संभावित वार्ता को भारत के लिए अत्यंत चिंताजनक बताया।</p>
<p>कांग्रेस सांसद ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने 'अब की बार ट्रंप सरकार' का नारा दिया था लेकिन आज देश की विदेश नीति को किस दिशा में ले जाया जा रहा है, यह सवाल खड़ा हो रहा है।" उन्होंने केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मामलों पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए। गौरतलब है कि, पाकिस्तान ने रविवार को कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को समाप्त करने के लिए "सार्थक वार्ता" की मध्यस्थता और मेजबानी करने के लिए तैयार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 12:58:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम एशिया तनाव के बीच पाकिस्तानी पीएम ने की ईरानी राष्ट्रपति से टेलिफोन पर बात: अमेरिका-ईरान की मेजबानी का रखा प्रस्ताव, युद्ध समाप्त करने की अपील की</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की औपचारिक पेशकश की है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से वार्ता के बाद, पाकिस्तान ने निर्णायक संवाद के लिए मेजबान बनने को 'सम्मान' बताया। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/amidst-west-asia-tension-pakistani-pm-spoke-to-iranian-president/article-147795"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pakistan3.png" alt=""></a><br /><p>पाकिस्तान। पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी करने की पेशकश की है, ताकि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को समाप्त किया जा सके।</p>
<p>पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा, अमेरिका और ईरान की सहमति के अधीन, पाकिस्तान सार्थक और निर्णायक बातचीत को सुगम बनाने तथा जारी संघर्ष के व्यापक समाधान के लिए मेजबान बनने के लिए तैयार है और इसे अपने लिए सम्मान की बात मानता है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र और उससे आगे शांति और स्थिरता के हित में पश्चिम एशिया के युद्ध को समाप्त करने के लिए जारी संवाद के प्रयासों का स्वागत करता है और उनका पूर्ण समर्थन करता है।  </p>
<p>पीएम शरीफ का यह प्रस्ताव उनके मंगलवार को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ हुई टेलीफोन और पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक दार की उनके ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची के साथ एक दिन पहले हुई बातचीत के बाद आया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 14:18:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जयराम रमेश का दावा: अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध में पाकिस्तान की भूमिका भारत के लिए कूटनीतिक झटका, पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान ने ट्रंप के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित किए</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि अमेरिका-ईरान संघर्ष में पाकिस्तान प्रमुख मध्यस्थ बनकर उभरा है, जो भारत के लिए बड़ा झटका है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तानी नेतृत्व की बढ़ती नजदीकियों पर चिंता जताई। रमेश ने केंद्र की इजरायल यात्रा की आलोचना करते हुए इसे भारत की तटस्थ मध्यस्थ भूमिका को कमजोर करने वाला कदम बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/jairam-ramesh-claims-pakistans-role-in-us-israel-iran-war-diplomatic-setback/article-147662"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jairam-ramesh2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि पाकिस्तान एक तरफ अमेरिका और इजरायल और दूसरी तरफ ईरान के बीच एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में उभरा है जो भारत के लिए एक गंभीर झटका है। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर अपने संदेश में कहा, "प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों की कई रिपोर्टों ने पाकिस्तान को अमेरिका और इजरायल तथा दूसरी तरफ ईरान के बीच इस्तेमाल किए जा रहे मध्यस्थों में से एक के रूप में पहचाना है। यदि ये रिपोर्ट सच हैं, तो वे भारत के लिए एक गंभीर झटका और तिरस्कार का प्रतिनिधित्व करती हैं।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' में भारत की "निस्संदेह सैन्य सफलताओं" के बावजूद पाकिस्तान ने पिछले एक साल में कूटनीतिक रूप से नई दिल्ली को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा, "दुखद वास्तविकता यह है कि उसके बाद पाकिस्तान का कूटनीतिक जुड़ाव और विमर्श प्रबंधन केंद्र सरकार की तुलना में काफी बेहतर रहा है।" उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद, जो कभी गंभीर राजनीतिक, आर्थिक और वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहा था, अब फिर से प्रासंगिक हो गया है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने पाकिस्तान के नेतृत्व और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच विकसित होते संबंधों की ओर भी इशारा किया और आरोप लगाया कि इसने इस्लामाबाद की वैश्विक स्थिति को मजबूत किया है। उन्होंने दावा किया कि ट्रंप ने पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को "गर्मजोशी से और बार-बार गले लगाया" था और कई मौकों पर असीम मुनीर की व्हाइट हाउस में मेजबानी की, जिसमें उन्होंने एक "अभूतपूर्व दोपहर के भोजन" का भी उल्लेख किया। रमेश ने कहा कि "पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान ने राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी घेरे के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित कर लिये हैं।"</p>
<p>केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए रमेश ने उनकी हालिया कूटनीतिक पहुंच की आलोचना की, विशेष रूप से ईरान पर अमेरिका-इजरायल के कथित हवाई हमलों से ठीक पहले की गई इजरायल यात्रा को लेकर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार की इजरायल की अनुचित यात्रा, जो ईरान पर अमेरिका-इजरायल के अकारण हवाई हमले शुरू होने से ठीक दो दिन पहले समाप्त हुई, हमारे राजनीतिक इतिहास में एक बेहद विनाशकारी विकल्प के रूप में दर्ज की जाएगी।" उन्होंने तर्क दिया कि इस यात्रा ने इस क्षेत्र में एक तटस्थ मध्यस्थ के रूप में कार्य करने की भारत की क्षमता को कमजोर कर दिया है।</p>
<p>उन्होंने सरकार की विदेश नीति के प्रति अपने दृष्टिकोण की आलोचना तेज करते हुए कहा, "केंद्र सरकार की कूटनीति की पोल बुरी तरह खुल गई है। देश को इसकी कीमत चुकाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।" ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब भारत ने पारंपरिक रूप से इजरायल, ईरान और प्रमुख अरब देशों सहित पूरे पश्चिम एशिया में संतुलित संबंध बना रखे थे ओर अक्सर क्षेत्रीय संघर्षों में खुद को एक संभावित सेतु के रूप में प्रस्तुत किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 12:26:14 +0530</pubDate>
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