<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/strategic-failure/tag-75624" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>Strategic Failure - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/75624/rss</link>
                <description>Strategic Failure RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत नाकाम : दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर दोष मढ़ा, दोनों देश लौटे अपने देश</title>
                                    <description><![CDATA[इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। जेडी वेंस ने ईरान पर परमाणु हथियारों के मुद्दे पर अड़ियल रुख अपनाने का आरोप लगाया, वहीं ईरान ने अमेरिकी शर्तों को 'अत्यधिक मांगें' करार दिया। इस विफलता ने पश्चिम एशिया में फिर से तनाव और अनिश्चितता बढ़ा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/talks-between-america-and-iran-failed-both-sides-blamed-each/article-150140"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump2.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच की बातचीत नाकाम हो गई है और दोनों पक्ष इस नाकामी के लिए एक-दूसरे पर दोष मढ़ने का काम कर रहे हैं। अमेरिका ने एक ओर जहां समझौते की शर्तों को ठुकराने के लिए ईरान को दोषी ठहराया, वहीं ईरान ने कहा कि बातचीत बिना किसी नतीजे के इसलिए खत्म हो गई क्योंकि अमेरिका ने 'अत्यधिक मांगें' पेश कीं। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि वे बिना किसी समझौते के स्वदेश लौट रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि समझौता न हो पाना 'अमेरिका के लिए बुरी खबर होने से कहीं अधिक ईरान के लिए बुरी खबर है।'</p><p>जेडी वेंस ने स्वदेश रवाना होने से पहले पत्रकारों से कहा, "हालांकि कई अहम मुद्दों पर बातचीत हुई लेकिन ईरान ने हमारी शर्तें मानने से इनकार कर दिया।" ईरान ने कहा कि अमेरिकी टीम की बहुत अधिक मांगों और महत्वाकांक्षाओं के कारण दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया। ईरान ने अपने अधिकारों को सुरक्षित रखने पर बल दिया था। जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका के लिए मुख्य मुद्दा यह था कि क्या ईरान परमाणु हथियार न बनाने की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता जताने को तैयार है।</p><p>उन्होंने कहा, "सवाल सीधा सा है, क्या हमें ईरानियों की ओर से परमाणु हथियार न बनाने की कोई बुनियादी प्रतिबद्धता नजर आती है-सिर्फ अभी के लिए नहीं, सिर्फ दो साल बाद के लिए नहीं बल्कि लंबे समय के लिए? हमें अभी तक ऐसी कोई प्रतिबद्धता नजर नहीं आई है। हमें उम्मीद है कि आगे चलकर हमें ऐसी प्रतिबद्धता देखने को मिलेगी।" जेडी वेंस ने कहा कि हालांकि ईरान का परमाणु कार्यक्रम 'नष्ट' हो चुका है, फिर भी भविष्य में परमाणु हथियारों के विकास को रोकने के लिए एक स्पष्ट और स्थायी प्रतिबद्धता की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा पेश किया गया प्रस्ताव उसका 'अंतिम और सबसे अच्छा प्रस्ताव' था।</p><p>जेडी वेंस ने कहा, "हमने यह बहुत साफ कर दिया है कि हमारी 'रेड लाइन' (सीमाएं) क्या हैं, किन मामलों में हम उनकी बात मानने को तैयार हैं और किन मामलों में हम उनकी बात मानने को तैयार नहीं हैं।" उन्होंने कहा कि ईरानी पक्ष ने उन शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। ईरान ने कहा कि लगभग 21 घंटे तक चली बातचीत के दौरान उनकी वार्ता टीम ने विभिन्न राजनीतिक और सैन्य क्षेत्रों के साथ-साथ शांतिपूर्ण परमाणु प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी ईरान के लोगों के बुनियादी अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए अमेरिका की 'अत्यधिक मांगों' को पूरा होने से रोक दिया।</p><p>ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ ने कहा कि जहां ईरान ने कई 'भविष्य-उन्मुखी पहलें' सामने रखीं, वहीं अमेरिका अंततः ईरानी पक्ष का 'भरोसा जीतने' में विफल रहा। गालिबफ़ ने सोशल मीडिया पर लिखा, "मैंने बातचीत से पहले ही इस बात पर बल दिया था कि हमारे पास जरूरी सद्भावना और इरादा है लेकिन पिछले दो युद्धों के अनुभवों के कारण हम दूसरे पक्ष पर भरोसा नहीं करते।" ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'तसनीम' ने ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिकियों का इरादा उन लक्ष्यों को हासिल करना था जिन्हें वे ईरान के खिलाफ युद्ध के जरिए हासिल करने में विफल रहे थे। इनमें होर्मुज़ ज़लड़मरूमध्य का मुद्दा और देश से परमाणु सामग्री को हटाना शामिल था। तसनीम की रिपोर्ट के अनुसार ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने इस प्रयास को विफल कर दिया।</p><p>उन्होंने कहा, "मेरे सहयोगियों ने भविष्य-उन्मुखी पहलें पेश कीं लेकिन दूसरा पक्ष अंततः ईरानी प्रतिनिधिमंडल का भरोसा जीतने में विफल रहा।" उन्होंने कहा, "अमेरिका ने हमारे तर्क और सिद्धांतों को समझा और अब यह तय करने का समय है कि वह हमारा भरोसा जीत सकता है या नहीं। हमारा मानना है कि सैन्य संघर्ष के साथ-साथ 'शक्ति की कूटनीति' भी एक और दृष्टिकोण है। हम ईरानियों द्वारा चालीस दिनों तक किए गए राष्ट्रीय रक्षा प्रयासों की उपलब्धियों को मजबूत करने के अपने प्रयासों को एक पल के लिए भी नहीं रोकेंगे।" अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में वैंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर शामिल थे, जबकि ईरानी टीम में संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ, विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराकची और विशेषज्ञ शामिल थे।</p><p>तसनीम की रिपोर्ट के अनुसार ईरानी टीम ने विभिन्न पहलें पेश करके अमेरिकी पक्ष को एक साझा रूपरेखा पर पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ाने की कोशिश की लेकिन अत्यधिक मांगों के प्रति अमेरिकी 'लालच' ने उन्हें तार्किकता और यथार्थवाद से बहुत दूर धकेल दिया। वैंस ने कहा कि उन्होंने बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कम से कम आधा दर्जन बार बात की और दोनों पक्षों के बीच मतभेद के सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक परमाणु हथियारों के विकास से जुड़ा था।</p><p>ईरानी सरकार ने पहले कहा था कि बातचीत जारी रहेगी और दोनों पक्षों के तकनीकी विशेषज्ञ दस्तावेजों का आदान-प्रदान करेंगे। इस्लामाबाद में हुई यह बातचीत एक दशक से भी अधिक समय में अमेरिका और ईरान के बीच पहली सीधी बैठक थी और 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से अब तक की सबसे उच्च-स्तरीय चर्चा थी। ईरानी प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंचा। वे दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और युद्ध में मारे गए अन्य लोगों के शोक में काले कपड़े पहने हुए थे। वे उन 170 छात्रों के जूते और बैग अपने साथ लाए थे, जो युद्ध की शुरुआत में एक लड़कियों के स्कूल पर हुई अमेरिकी बमबारी में मारे गए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/talks-between-america-and-iran-failed-both-sides-blamed-each/article-150140</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/talks-between-america-and-iran-failed-both-sides-blamed-each/article-150140</guid>
                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 11:00:35 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/trump2.png"                         length="1238663"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयराम रमेश का दावा: अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध में पाकिस्तान की भूमिका भारत के लिए कूटनीतिक झटका, पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान ने ट्रंप के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित किए</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि अमेरिका-ईरान संघर्ष में पाकिस्तान प्रमुख मध्यस्थ बनकर उभरा है, जो भारत के लिए बड़ा झटका है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तानी नेतृत्व की बढ़ती नजदीकियों पर चिंता जताई। रमेश ने केंद्र की इजरायल यात्रा की आलोचना करते हुए इसे भारत की तटस्थ मध्यस्थ भूमिका को कमजोर करने वाला कदम बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/jairam-ramesh-claims-pakistans-role-in-us-israel-iran-war-diplomatic-setback/article-147662"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jairam-ramesh2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि पाकिस्तान एक तरफ अमेरिका और इजरायल और दूसरी तरफ ईरान के बीच एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में उभरा है जो भारत के लिए एक गंभीर झटका है। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर अपने संदेश में कहा, "प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों की कई रिपोर्टों ने पाकिस्तान को अमेरिका और इजरायल तथा दूसरी तरफ ईरान के बीच इस्तेमाल किए जा रहे मध्यस्थों में से एक के रूप में पहचाना है। यदि ये रिपोर्ट सच हैं, तो वे भारत के लिए एक गंभीर झटका और तिरस्कार का प्रतिनिधित्व करती हैं।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' में भारत की "निस्संदेह सैन्य सफलताओं" के बावजूद पाकिस्तान ने पिछले एक साल में कूटनीतिक रूप से नई दिल्ली को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा, "दुखद वास्तविकता यह है कि उसके बाद पाकिस्तान का कूटनीतिक जुड़ाव और विमर्श प्रबंधन केंद्र सरकार की तुलना में काफी बेहतर रहा है।" उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद, जो कभी गंभीर राजनीतिक, आर्थिक और वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहा था, अब फिर से प्रासंगिक हो गया है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने पाकिस्तान के नेतृत्व और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच विकसित होते संबंधों की ओर भी इशारा किया और आरोप लगाया कि इसने इस्लामाबाद की वैश्विक स्थिति को मजबूत किया है। उन्होंने दावा किया कि ट्रंप ने पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को "गर्मजोशी से और बार-बार गले लगाया" था और कई मौकों पर असीम मुनीर की व्हाइट हाउस में मेजबानी की, जिसमें उन्होंने एक "अभूतपूर्व दोपहर के भोजन" का भी उल्लेख किया। रमेश ने कहा कि "पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान ने राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी घेरे के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित कर लिये हैं।"</p>
<p>केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए रमेश ने उनकी हालिया कूटनीतिक पहुंच की आलोचना की, विशेष रूप से ईरान पर अमेरिका-इजरायल के कथित हवाई हमलों से ठीक पहले की गई इजरायल यात्रा को लेकर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा, केंद्र सरकार की इजरायल की अनुचित यात्रा, जो ईरान पर अमेरिका-इजरायल के अकारण हवाई हमले शुरू होने से ठीक दो दिन पहले समाप्त हुई, हमारे राजनीतिक इतिहास में एक बेहद विनाशकारी विकल्प के रूप में दर्ज की जाएगी।" उन्होंने तर्क दिया कि इस यात्रा ने इस क्षेत्र में एक तटस्थ मध्यस्थ के रूप में कार्य करने की भारत की क्षमता को कमजोर कर दिया है।</p>
<p>उन्होंने सरकार की विदेश नीति के प्रति अपने दृष्टिकोण की आलोचना तेज करते हुए कहा, "केंद्र सरकार की कूटनीति की पोल बुरी तरह खुल गई है। देश को इसकी कीमत चुकाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।" ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब भारत ने पारंपरिक रूप से इजरायल, ईरान और प्रमुख अरब देशों सहित पूरे पश्चिम एशिया में संतुलित संबंध बना रखे थे ओर अक्सर क्षेत्रीय संघर्षों में खुद को एक संभावित सेतु के रूप में प्रस्तुत किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/jairam-ramesh-claims-pakistans-role-in-us-israel-iran-war-diplomatic-setback/article-147662</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/jairam-ramesh-claims-pakistans-role-in-us-israel-iran-war-diplomatic-setback/article-147662</guid>
                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 12:26:14 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/jairam-ramesh2.png"                         length="1725187"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        