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                <title>Iran-India Relations - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Iran-India Relations RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पाकिस्तानी शिकायत पर कुछ देर में पोस्ट डिलीट, कश्मीर से मदद पर ईरान की धन्यवाद पोस्ट का मामला</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने कश्मीरी महिला द्वारा पति की आखिरी निशानी (सोना) दान करने पर आभार जताया, लेकिन पाकिस्तानी दबाव के आगे झुकते हुए पोस्ट डिलीट कर दी। नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास का यह कदम भारत के प्रति उसके दोगलेपन को दर्शाता है। भारतीय नागरिकों की सहानुभूति और मदद के बावजूद, कश्मीर मुद्दे पर ईरान का यह रवैया कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/post-deleted-after-some-time-due-to-pakistani-complaint-case/article-147788"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(2)45.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान/नई दिल्ली। ईरान को भारत के लोग सहानुभूति दिखाते हुए भारी भरकम पैसे मदद के नाम पर भेज रहे हैं। लेकिन कश्मीर को लेकर ईरान दोगलापन कर रहा है। ईरान ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए कश्मीर के लोगों को शुक्रिया अदा किया था लेकिन कुछ पाकिस्तानियों की शिकायत पर भारत स्थिति ईरानी दूतावास पोस्ट डिलीट कर <br />देता है।</p>
<p>दरअसल ईरानी दूतावास ने एक पोस्ट किया था जिसमें भारत के प्रति आभार जताया गया था। इसमें कहा गया था कश्मीर की एक सम्मानित बहन ने अपने पति की याद में सहेजकर रखा हुआ सोना, जिनका 28 साल पहले निधन हो गया था, ईरान के लोगों के प्रति प्रेम और एकजुटता से भरे दिल के साथ दान कर दिया। आपके आंसू और आपकी पवित्र भावनाएं ईरान के लोगों के लिए सांत्वना का सबसे बड़ा स्रोत हैं और इन्हें कभी भुलाया नहीं जाएगा। धन्यवाद #कश्मीर। धन्यवाद #भारत। </p>
<p>ईरानी दूतावास ने इस पोस्ट के साथ हैशटैग में भारत का भी नाम लिया था। इसपर कुछ पाकिस्तानियों ने शिकायत करनी शुरू कर दी। वजाहत काजमी नाम के पाकिस्तानी पत्रकार ने ईरान दूतावास के पोस्ट को रीट्वीट करते हुए लिखा कि हे ईरान, कश्मीर भारत का नहीं है। इसपर भारत की तरफ से अवैध तरीके से कब्जा किया गया है और ये पाकिस्तान का है। अपने फैक्ट को सही करो। जिसके बाद दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पोस्ट को डिलीट कर फरार हो गया। यानि कश्मीर की जिस महिला ने अपने पति की आखिरी निशानी तक ईरान को दान में दे दिया उस महिला के साथ भी ईरान खड़ा नहीं रह सका।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 11:38:15 +0530</pubDate>
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                <title>ऑस्ट्रेलिया-ईयू के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता, सामानों के सस्ते होने की उम्मीद  </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने कश्मीरी महिला द्वारा पति की आखिरी निशानी (सोना) दान करने पर आभार जताया, लेकिन पाकिस्तानी दबाव के आगे झुकते हुए पोस्ट डिलीट कर दी। नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास का यह कदम भारत के प्रति उसके दोगलेपन को दर्शाता है। भारतीय नागरिकों की सहानुभूति और मदद के बावजूद, कश्मीर मुद्दे पर ईरान का यह रवैया कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/historic-free-trade-agreement-between-australia-and-eu-expected-to/article-147790"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(6)12.png" alt=""></a><br /><p>एजेंसी/कैनबरा/ब्रसेल्स। ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ (ईयू) ने लगभग आठ वर्षों की बातचीत के बाद एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे दिया है, जिससे दोनों पक्षों के बीच बाजार पहुंच को बढ़ावा मिलेगा, आयात शुल्क में कटौती होगी और आर्थिक संबंध गहरे होंगे। इस समझौते की घोषणा ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और  यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने की। लेयेन ने इस समझौते को दोनों पक्षों के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने और खुले एवं नियम-आधारित व्यापार को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। समझौते के तहत, ईयू को किया जाने वाला लगभग 98 प्रतिशत ऑस्ट्रेलियाई निर्यात शुल्क मुक्त प्रवेश पा सकेगा। इससे ऑस्ट्रेलियाई कृषि, विनिर्माण और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों को काफी बढ़ावा मिलेगा। ऑस्ट्रेलियाई किसानों को वाइन, डेयरी, सीफूड, अनाज, फल और नट्स जैसे उत्पादों पर आयात शुल्क हटने से लाभ होगा, जिसमें अकेले वाइन निर्यातकों को सालाना लगभग 3.7 करोड़ डॉलर का लाभ होने की उम्मीद है। यह समझौता बीफ, भेड़ के मांस, चीनी और डेयरी जैसे प्रमुख उत्पादों के लिए विस्तारित कोटा के माध्यम से सार्थक पहुंच सुनिश्चित करेगा। </p>
<p>ऑस्ट्रेलिया में अधिकांश आयात शुल्क हटने से यूरोपीय सामान जैसे वाइन, स्पिरिट, बिस्कुट, चॉकलेट, पास्ता आदि सामानों के ऑस्ट्रेलियाई बाजारों में सस्ते होने की उम्मीद है। साथ ही मशीनरी और वाहनों की कीमत भी कम होगी। इस समझौते के महत्व का उल्लेख करते हुए अल्बनीज ने कहा, लगभग आठ वर्षों की बातचीत के बाद, हमने एक ऐतिहासिक समझौता किया है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए लाभ पहुंचाएगा। यह समझौता यूरोपीय संघ की विशाल 30 लाख करोड़ (ट्रिलियन) डॉलर की अर्थव्यवस्था में ऑस्ट्रेलियाई निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा करता है और ऑस्ट्रेलियाई उपभोक्ताओं के लिए लागत कम करेगा। </p>
<p>व्यापार में विविधता लाने का अवसर </p>
<p>ऑस्ट्रेलिया के व्यापार मंत्री डॉन फैरेल ने इसे कड़ी मेहनत से किया गया सौदा बताया जो निर्यातकों और उत्पादकों के लिए वास्तविक व्यावसायिक लाभ प्रदान करता है। उन्होंने कहा, यूरोपीय संघ के आयात शुल्क हटने से ऑस्ट्रेलियाई निर्यातकों को 27 देशों और 45 करोड़ उपभोक्ताओं के साथ व्यापार में विविधता लाने का अवसर मिलता है। फैरेल ने कहा, अधिक व्यापारिक भागीदारों के साथ अधिक व्यापार का अर्थ है अधिक आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा, अधिक अच्छी तनख्वाह वाली नौकरियां, सस्ती कीमतें और अधिक राष्ट्रीय आय। यह समझौता ऑस्ट्रेलियाई फर्मों के लिए सालाना लगभग 845 अरब डॉलर मूल्य के यूरोपीय संघ के सार्वजनिक खरीद अनुबंधों तक पहुंच भी प्रदान करता है। इसके साथ ही पेशेवरों की आवाजाही में सुधार करता है और वित्त, शिक्षा, पर्यटन और संचार जैसी सेवाओं में अवसर बढ़ाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 11:37:50 +0530</pubDate>
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