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                <title>FCRA Amendment Bill - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>FCRA Amendment Bill RSS Feed</description>
                
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                <title>कांग्रेस ने लिया केंद्र को आड़ेहाथों: FCRA के मौजूदा विधेयक को स्वीकार करने से इंकार, चर्चा से बच रही सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) विधेयक को दमनकारी बताते हुए विपक्ष ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार गैर-सरकारी संगठनों को निशाना बना रही है। विपक्ष ने स्पष्ट किया कि विधेयक को इस रूप में पारित नहीं होने दिया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-takes-center-to-task-for-refusing-to-accept-the/article-162060"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) विधेयक के मौजूदा स्वरूप को दमनकारी बताते हुए उसका कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि पार्टी और पूरा विपक्ष इसे वर्तमान स्वरूप में स्वीकार नहीं करेगा और सब मिलकर इसका पुरजोर विरोध करेंगे। कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने बुधवार को संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस और पूरा विपक्ष एफसीआरए विधेयक को मौजूदा स्वरूप में स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि आरएसएस से जुड़े संगठनों के लिए अलग व्यवस्था और अन्य गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के लिए अलग नियम रखने की सोच स्वीकार्य नहीं है। उनका कहना था कि पार्टी इस 'दमनकारी' विधेयक को पारित नहीं होने देगी।</p>
<p>वेणुगोपाल ने कहा "लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एफसीआरए विधेयक को लेकर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है। पार्टी और पूरे विपक्ष का रुख बिल्कुल स्पष्ट है कि एफसीआरए विधेयक को उसके मौजूदा स्वरूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। आरएसएस सब कुछ कर सकता है, जबकि अन्य गैर-सरकारी संगठनों के लिए अलग नियम हों, ऐसी सोच स्वीकार्य नहीं है। हम इस दमनकारी विधेयक का पुरजोर विरोध करेंगे और इसे किसी भी कीमत पर पारित नहीं होने देंगे।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले से ही राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर चर्चा की मांग कर रही है क्योंकि पूरा देश इस मुद्दे को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री को छात्रों पर कथित अत्याचार और गोलीबारी के मुद्दे पर सदन में आकर बयान देना चाहिए। संसद बहस और चर्चा का मंच है, लेकिन सरकार चर्चा से बचते हुए विधेयकों को जल्दबाजी में पारित कराना चाहती है।</p>
<p>इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया है कि सरकार जनता और विपक्ष की आवाज नहीं सुन रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष छात्रों पर कथित हमले, ई-20 मुद्दे, जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने तथा राम मंदिर चढ़ावा विवाद जैसे जनहित के मुद्दे संसद में उठा रहा है, लेकिन सरकार चर्चा कराने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन में आकर अपना वक्तव्य दें। उन्होंने कहा कि चर्चा से ही समाधान निकलेगा और सदन में उपस्थित न होकर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री संसद का अपमान कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Aug 2026 14:43:58 +0530</pubDate>
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                <title>टीएमसी का केंद्र पर तीखा हमला: भाजपा संसद में ज़बरदस्ती करा रही है बिल पास, डेरेक ओ'ब्रायन ने लगाया महत्वपूर्ण कानूनों को जल्दबाज़ी में पास कराने का आरोप </title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने केंद्र सरकार पर संसद में बिना पर्याप्त चर्चा के एफसीआरए जैसे कठोर कानून जबरन पास कराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सदन के लगातार बाधित होने से लोकतांत्रिक जवाबदेही कमजोर होती है, जिससे सरकार विधायी जांच से बच निकलती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tmcs-sharp-attack-on-the-center-bjp-is-forcing-bills/article-161638"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(1).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने सरकार पर "कठोर" कानून लाने और बिना पर्याप्त चर्चा के संसद में ऐसे बिलों को ज़बरदस्ती पास कराने का आरोप लगाया। साथ ही, उन्होंने दोनों सदनों के कामकाज में बार-बार हो रही रुकावटों पर भी सवाल उठाए। ओ'ब्रायन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी ने संसद में विवादास्पद कानून लाने और बिना सार्थक बहस के उन्हें पास कराने का तरीका अपना लिया है।</p>
<p>तृणमूल कांग्रेस नेता ने कहा, "भाजपा का तरीका: एफसीआरए जैसे कठोर बिल लाना और फिर बिना किसी बहस के संसद में उन्हें ज़बरदस्ती पास करा लेना।" वरिष्ठ सांसद ने यह भी तर्क दिया कि संसद में लंबे समय तक कामकाज में रुकावट से अंततः लोकतांत्रिक जवाबदेही कमज़ोर होती है, क्योंकि इससे कार्यपालिका (सरकार) की विधायी जांच सीमित हो जाती है। ओ'ब्रायन ने 'एक्स' पर लिखा, "जब संसद काम नहीं करती, तो किसे फ़ायदा होता है? सत्ता में सरकार, सरकार संसद के प्रति जवाबदेह, संसद जनता के प्रति जवाबदेह। जब संसद नहीं चलती, तो सरकार किसी के प्रति जवाबदेह नहीं रहती।"</p>
<p>खबरों के अनुसार, सरकार अगले हफ़्ते लोकसभा में 'विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम संशोधन विधेयक' (एफसीआरए) पेश कर सकती है। ये टिप्पणियां संसद के चल रहे मॉनसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक खींचतान के बीच आई हैं, जहां बार-बार सदन स्थगित होने और विरोध-प्रदर्शनों के कारण कई मौकों पर विधायी कामकाज बाधित हुआ है। विपक्षी दलों ने बार-बार सरकार पर विवादास्पद मुद्दों पर विस्तृत चर्चा से बचने और संसद में महत्वपूर्ण कानूनों को जल्दबाज़ी में पास कराने का आरोप लगाया है; केंद्र सरकार ने इन आरोपों को लगातार खारिज किया है।</p>
<p>ओ'ब्रायन ने अपनी पोस्ट में जिस विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) का ज़िक्र किया है, वह एक विवादास्पद कानून रहा है। विपक्षी दलों और कई नागरिक समाज संगठनों का आरोप है कि इसके प्रावधानों का इस्तेमाल गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के कामकाज को सीमित करने के लिए किया गया है। हालांकि, सरकार का कहना है कि इस कानून का मकसद राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए विदेशी अंशदान प्राप्त करने और उसके इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। ओ'ब्रायन की ताज़ा टिप्पणियां संसदीय कार्यवाही के संचालन को लेकर सरकार के प्रति विपक्ष की आलोचना को और बढ़ाती हैं। कई विपक्षी नेताओं ने कानूनों के पारित होने से पहले उन पर अधिक बहस और जांच-परख की मांग की है। सरकार ने कहा है कि वह विधायी कामकाज करने के लिए प्रतिबद्ध है और उसने विपक्षी दलों पर बार-बार विरोध-प्रदर्शन और नारेबाजी करके संसद की कार्यवाही में बाधा डालने का आरोप लगाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 14:03:04 +0530</pubDate>
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                <title>विदेशी फंडिंग पर सरकार का पहरा: लोकसभा में विदेशी अभिदाय (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 पुरः स्थापित, नित्यानंद राय ने देशहित वाला विधेयक बताया</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विदेशी अभिदाय (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 पेश किया गया। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इसे पारदर्शिता और देशहित के लिए जरूरी बताया, जबकि विपक्ष ने इसे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन और शक्तियों का केंद्रीकरण करार दिया। यह कानून विदेशी चंदे को जवाबदेह बनाने और निजी स्वार्थ के लिए दुरुपयोग रोकने के उद्देश्य से लाया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/to-make-foreign-funding-transparent-and-accountable-the-foreign-contribution/article-147844"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/parliament1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोकसभा में बुधवार को विदेशी अभिदाय (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 पुरः स्थापित किया गया जो विदेशी फंडिंग को पारदर्शी और उत्तरदायी बनायेगा। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विदेशी अभिदाय (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 सदन में पेश करते हुए कहा कि यह आवश्यक संशोधन विधेयक है। उन्होंने कहा कि यह सेवा, पारदर्शिता और देशहित वाला विधेयक है। उन्होंने कहा कि विदेशी अभिदाय (विनियमन) अधिनियम 2010 को संशोधित करने के लिए इस विधेयक को लाया गया है। </p>
<p>इस कानून में पारदर्शी और उत्तरदायी ढांचा बनाने के लिए संशोधन विधेयक को लाया गया है। उन्होंने कहा कि नामित प्राधिकरण को दिये गये अधिकार नियमों के अधीन है। विधेयक का उद्देश्य विदेशी अंशदान को पारदर्शी बनाना है। कोई भी संस्था जो देश की भावना और कानून के अनुरुप होगा उसे यह विधेयक बाधित नहीं करेगा। देशहित के खिलाफ कोई काम करेगा उसके खिलाफ कार्रवाई किया जायेगा।</p>
<p>गृह राज्य मंत्री ने विपक्ष के आरोपों के जवाब में कहा कि यह खतरनाक उसके लिए होगा जिसके नीयत में खोट होगा। जो अपनी संस्था को निजी लाभ पहुंचाना चाहेगा उसके लिए यह अवश्य खतरनाक है। इससे पहले कांग्रेस के मनीष तिवारी ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इसमें आवश्क विधायी शर्ते होनी चाहिए थी वह नहीं है। इससे यह संसद के अधिकारों को भी कम करता है इसलिए इस विधेयक के इस फार्म में पेश नहीं किया जाए।</p>
<p>कांग्रेस के एडवोकेट गोवाल कागदा पडवी ने कहा कि इसमें केंद्र के पास अधिक शक्तियां देता है और संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लंघन करने वाला है। यह विधेयक अनुच्छेद 25 और 26 का भी उल्लंघन करता है। तृणमूल कांग्रेस की प्रतिमा मंडल ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह बहुत खतरानाक है। इसमें शक्तियों को केंद्रीकृत किया गया है। यह संविधान की मूल रुप रेखा का उल्लंखन होता है इसलिए वह इस विधेयक का विरोध करती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 17:44:33 +0530</pubDate>
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