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                <title>Peace Proposal - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Peace Proposal RSS Feed</description>
                
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                <title>पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच शी जिनपिंग ने रखा चार-सूत्री योजना का प्रस्ताव : दुनिया को जंगल बनाने से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का करना चाहिए सम्मान, विकास एवं सुरक्षा के सामंजस्य पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया में स्थिरता के लिए चार-सूत्री सुरक्षा प्रस्ताव पेश किया है। अबू धाबी के युवराज के साथ बैठक में उन्होंने संप्रभुता के सम्मान और अंतरराष्ट्रीय कानून पर जोर दिया। अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने और तेल की कीमतों में उछाल के बीच चीन अब इस संकट में मध्यस्थ बनने की तैयारी में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/amidst-the-increasing-tension-in-west-asia-xi-jinping-proposed/article-150367"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/shi-jinpin.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया युद्ध में मध्यस्थ की भूमिका में दिलचस्पी दिखाते हुए कहा है कि उन्होंने क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए यहां अबू धाबी के युवराज ज़ायेद अल नहयान के साथ बैठक में चार-सूत्री प्रस्ताव रखा है। शी जिनपिंग ने शांति पर जोर देते हुए कहा कि पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र के लिए एक साझा, विस्तृत, सहयोगपूर्ण और टिकाऊ सुरक्षा व्यवस्था बनायी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी देशों की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का भी पूरी तरह सम्मान होना चाहिए। साथ ही नागरिकों एवं अवसंरचनाओं की भी सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।</p>
<p>शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया को जंगल बनाने से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने विकास एवं सुरक्षा के सामंजस्य पर जोर देते हुए सभी पक्षों से साथ आकर क्षेत्रीय विकास के लिए अनुकूल माहौल बनाने अनुरोध किया। चीन का कूटनीतिक प्रयास ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह का युद्धविराम चल रहा है। इस दौरान दोनों देशों ने पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में बैठकर शांति वार्ता भी की। यह शांति वार्ता 21 घंटे तक चली लेकिन इसका कोई हल नहीं निकला, जिससे युद्धविराम पर संकट के बादल मंडराने लगे। इस बीच, अमेरिका ने राष्ट्रपति ट्रंप की घोषणा के बाद ईरान के बंदरगाहों को बाधित कर दिया है, जिससे तेल के दामों में उछाल देखने को मिला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 16:26:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>क्या 48 घंटों में अमेरिका-ईरान में होने जा रहा सीजफायर? 45-दिनों के संभावित संघर्ष-विराम की शर्तों पर होगी चर्चा, होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की मांग तेज </title>
                                    <description><![CDATA[ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच संघर्ष टालने के लिए दो-चरणीय योजना पर बातचीत जारी है। इसके तहत 45 दिनों के युद्धविराम का प्रस्ताव है, ताकि 'होर्मुज जलडमरूमध्य' और परमाणु मुद्दों पर स्थायी समाधान निकल सके। हालांकि तनाव बरकरार है, लेकिन मध्यस्थों के जरिए विश्वास बहाली के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि युद्ध को समाप्त किया जा सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/is-there-going-to-be-a-ceasefire-between-america-and/article-149225"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-casefire.png" alt=""></a><br /><p>मास्को। अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थ संघर्ष को सुलझाने के लिए बनाई गयी दो-चरणों वाली योजना के पहले चरण के तौर पर 45 दिनों के संभावित युद्धविराम की शर्तों पर चर्चा कर रहे हैं।अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ट्रंप प्रशासन ने हाल के दिनों में ईरान के सामने कई प्रस्ताव रखे थे, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने अभी तक उनमें से किसी को भी स्वीकार नहीं किया है। सूत्रों के मुताबिक अगले 48 घंटों के भीतर दोनों पक्षों के बीच किसी समझौते की संभावना कम है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इससे पहले सोशल मीडिया पर ईरान के ऊर्जा संयंत्रों और पुलों को मंगलवार को नष्ट करने की धमकी दी है और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की मांग की है। रिपोर्ट के अनुसार संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक दो-चरणों वाले समझौते पर फिलहाल चर्चा चल रही है। पहले चरण में 45 दिनों का युद्धविराम शामिल है, जिसके दौरान अंतिम शांति की शर्तों पर चर्चा की जाएगी। सूत्रों ने कहा कि यदि पक्षों को बातचीत के लिए अधिक समय की आवश्यकता होती है, तो इस युद्धविराम को बढ़ाया भी जा सकता है। दूसरे चरण में युद्ध को समाप्त करने के लिए एक समझौते को अंतिम रूप देना शामिल है।</p>
<p>सूत्रों के हवाले से कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलने और ईरान के पास अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम होने जैसे मुद्दों को केवल एक अंतिम समझौते के हिस्से के रूप में ही सुलझाया जा सकता है। इसके अलावा मध्यस्थ अमेरिका के लिए विश्वास-बहाली के उपायों पर काम कर रहे हैं और उन कदमों की तलाश कर रहे हैं जिन्हें अमेरिका ईरान की कुछ मांगों को पूरा करने के लिए उठा सकता है। उधर, ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत कर रहा है और मंगलवार तक कोई समझौता हो सकता है। उन्होंने पहले कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच सार्थक बातचीत हुई है।</p>
<p>वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय ने सीधे बातचीत से इनकार कर दिया था, लेकिन कहा था कि ईरान को मध्यस्थों के ज़रिए अमेरिका की ओर से संदेश मिले हैं कि वह संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत शुरू करना चाहता है। गौरतलब है कि अमेरिका और इज़रायल ने 28 फरवरी को ईरान में कई ठिकानों पर हमले शुरू किये थे, जिसमें तेहरान भी शामिल है। वहीं जवाबी कार्रवाई में ईरान इज़रायली क्षेत्र के साथ-साथ पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 14:29:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मिडिल-ईस्ट में जारी जंग के बीच ज़रीफ ने की शांति की अपील: ट्रंप की लापरवाह आक्रमकता का​ दिया हवाला, अमेरिका प्रतिबंध हटा ले, तो ईरान फिर खोल देगा होर्मुज जलडमरूमध्य</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के पूर्व विदेश मंत्री जावेद ज़रीफ़ ने 'फॉरेन अफेयर्स' के जरिए अमेरिका को शांति योजना का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने ट्रंप की आक्रामकता की निंदा करते हुए परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं लगाने और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की पेशकश की। ज़रीफ़ ने जोर दिया कि प्रतिबंध हटने और आपसी सुरक्षा गारंटी से ही क्षेत्रीय स्थिरता संभव है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/zarif-appeals-for-peace-amid-the-ongoing-war-in-the/article-148970"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iranian-foreign-minister-mohammad-javad-zarif.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जरीफ ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की 'लापरवाह आक्रमकता' का उल्लेख करते हुए उसके साथ शांति स्थापित करने की अपील की है। जरीफ ने कहा कि लंबी अवधि का संघर्ष केवल विनाश और अनिश्चितता को बढ़ाता है और स्थायी समाधान के लिए प्रत्यक्ष और वास्तविक बातचीत ही एकमात्र मार्ग है। उन्होंने सभी पक्षों से शांतिपूर्ण ढंग से विवाद सुलझाने और क्षेत्रीय तनाव को कम करने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा है कि मौजूदा संघर्ष के किसी भी समाधान में ईरान के राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखना सबसे जरूरी है।</p>
<p>पूर्व विदेश मंत्री ने इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए अपने प्रस्ताव की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इस शांति योजना को सार्वजनिक करने को लेकर अपने मन में चल रहे द्वंद्व का भी जिक्र किया। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "एक ईरानी होने के नाते, मैं डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामकता और उनके अपमानजनक बयानों से गुस्से में हूँ। मुझे अपनी सेना और देश के लोगों पर गर्व है, इसलिए पत्रिका 'फॉरेन अफेयर्स' में इस शांति योजना को छपवाने को लेकर मेरे मन में उलझन थी। फिर भी, मुझे यकीन है कि युद्ध का अंत ईरान के राष्ट्रीय हितों के हिसाब से ही होना चाहिए।"</p>
<p>ईरान के उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री जैसे बड़े पदों पर रह चुके ज़रीफ़ का मानना है कि तमाम मुश्किलों के बाद भी ईरान, अमेरिका-इजरायल के लगातार हवाई हमलों के सामने मजबूती से टिका हुआ है। अमेरिकी पत्रिका 'फॉरेन अफेयर्स' में अपना प्रस्ताव रखने के कुछ घंटों बाद श्री ज़रीफ़ ने कहा, "ईरान ने यह युद्ध शुरू नहीं किया था लेकिन एक महीने से ज्यादा की लड़ाई के बाद यह साफ है कि जीत ईरान की हो रही है। लगातार बमबारी के बावजूद हमने अपने देश को बचाया है और हमलावरों को करारा जवाब दिया है।"</p>
<p>ज़रीफ़ ने अपने लेख में चेतावनी दी कि भले ही ईरान को सैन्य सफलता मिल रही हो लेकिन आगे की लड़ाई से आम जनता और देश के ढांचे का भारी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि यह हिंसा एक बड़े क्षेत्रीय या वैश्विक युद्ध का रूप ले सकती है। उन्होंने इस बात पर भी दुख जताया कि युद्ध के पहले ही दिन करीब 170 स्कूली बच्चों की मौत पर दुनिया खामोश है। अपनी शांति योजना में ज़रीफ़ ने युद्ध खत्म करने के लिए एक समझौते का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान को अपनी मजबूत सैन्य स्थिति का फायदा उठाकर बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि अगर अमेरिका प्रतिबंध हटा ले, तो ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं लगाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए तैयार हो सकता है।</p>
<p>इसके अलावा, ज़रीफ़ ने अमेरिका और ईरान के बीच एक-दूसरे पर हमला न करने का वादा करने का भी सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि अगर दोनों देश दुश्मनी छोड़कर आर्थिक सहयोग बढ़ाएं, तो ईरान अपनी अर्थव्यवस्था सुधारने और जनता के कल्याण पर ध्यान दे पाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 15:25:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>वॉर या नो वॉर...क्या खत्म होगी जंग? ट्रंप के संबोधन से पहले तेज हुई कूटनीतिक हलचल, 2 अप्रैल को करेंगे राष्ट्र को संबोधित</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2 अप्रैल को राष्ट्र को संबोधित करेंगे, जिसमें ईरान संघर्ष समाप्ति की बड़ी घोषणा संभव है। चीन और पाकिस्तान ने शांति के लिए पांच सूत्रीय फार्मूला पेश किया है, जिसमें तत्काल युद्धविराम और समुद्री सुरक्षा पर जोर दिया गया है। तेहरान ने भी बातचीत के संकेत दिए हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में शांति की उम्मीद जागी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/war-or-no-war-is-us-president-trump-going-to/article-148764"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच दुनिया की नजरें अब डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित संबोधन पर टिकी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारतीय समयानुसार 2 अप्रैल की सुबह राष्ट्र को संबोधित करेंगे, जिसमें जारी सैन्य टकराव को समाप्त करने से जुड़ी अहम घोषणा की उम्मीद जताई जा रही है। ट्रंप के द्वारा दिए गए हाल के बयानों से संकेत मिल रहा है कि अमेरिका अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल कर चुका है और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति अब उसके लिए निर्णायक मुद्दा नहीं रही।</p>
<p>इसी बीच कूटनीतिक मोर्चे पर चीन और पाकिस्तान ने 31 मार्च को बीजिंग में साझा पहल पेश कर शांति की नई राह सुझाई है। इस पहल को इशाक डार और वांग यी ने आगे बढ़ाया, जिसमें पांच सूत्रों के जरिए तत्काल युद्धविराम और संवाद की बहाली पर जोर दिया गया है। प्रस्ताव में नागरिक ढांचे पर हमले रोकने, समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समाधान तलाशने की बात प्रमुख है।</p>
<p>हालांकि ईरान ने पाकिस्तान की प्रत्यक्ष मध्यस्थता पर आपत्ति जताई है, लेकिन क्षेत्र में शांति स्थापित करने की अपील का समर्थन किया है। तेहरान का यह रुख संकेत देता है कि वह बातचीत के पक्ष में है, पर मध्यस्थ की भूमिका को लेकर सतर्क रणनीति अपना रहा है। अब वैश्विक समुदाय की निगाहें ट्रंप के संबोधन पर टिकी हैं—क्या वे चीन-पाकिस्तान की पहल को स्वीकार करेंगे या अपनी शर्तों के साथ इस संघर्ष के अंत की घोषणा करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:12:02 +0530</pubDate>
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                <title>ईरानी  लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम जोल्फागरी की कड़ी चेतावनी: शर्तों के अनुरूप होने पर अमेरिका के साथ बातचीत संभव, तब तक कुछ भी नहीं होगा सामान्य </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिका के 15 सूत्री शांति प्रस्ताव को ठुकराते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक वाशिंगटन अपनी आक्रामक सोच और शत्रुता नहीं त्यागता, कोई बातचीत संभव नहीं है। प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फागरी ने इसे स्वाभिमान की लड़ाई बताया। 28 फरवरी के हमलों के बाद तनाव चरम पर है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें धुंधली हो गई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-presidents-stern-warning-that-nothing-will-be-normal-until/article-147860"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran9.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने अमेरिका के साथ तत्काल किसी भी प्रकार की बातचीत से इनकार करते हुए कहा है कि वार्ता तभी संभव है जब वह ईरान की इच्छा के अनुरूप होगी और अमेरिका ईरानी लोगों के प्रति किसी भी प्रकार के शत्रुतापूर्ण इरादे को पूरी तरह से त्याग देगा। ईरान के खातम अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम जोल्फागरी ने बुधवार को एक कड़ा संदेश देते हुए कहा कि जब तक अमेरिका अपनी आक्रामक सोच को नहीं त्याग देता तब तक सामान्य स्थिति बहाल नहीं हो पाएगी।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, "जब तक हमारी इच्छा नहीं होगी तब तक कुछ भी सामान्य नहीं होगा। हमारा पहला और आखिरी शब्द यही था, है और रहेगा। हम जैसे लोग आप जैसे लोगों के साथ कभी बातचीत नहीं करेंगे।" ये टिप्पणियां उन खबरों के बीच आई हैं जिनमें कहा गया है कि अमेरिका ने ईरान को मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से 15 सूत्री प्रस्ताव पेश किया है, जिसका असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ने लगा है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में अज्ञात अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी गई है।</p>
<p>अमेरिकी और इजरायली सेनाओं द्वारा 28 फरवरी को तेहरान सहित पूरे ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए जाने के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। इन हमलों में भारी नुकसान हुआ और नागरिक हताहत हुए। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए।</p>
<p>अमेरिका और इज़रायल ने हालांकि शुरू में इन हमलों को ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ पूर्वनिर्धारित उपाय बताया था लेकिन बाद में दोनों देशों ने संकेत दिया कि ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव को कम करना और संभावित रूप से नेतृत्व में बदलाव लाना उनके व्यापक उद्देश्यों में हैं। इस पृष्ठभूमि में ईरान का नवीनतम रुख एक कठोर स्थिति का संकेत देता है, जिससे निकट भविष्य में किसी भी राजनयिक सफलता की संभावना पर संदेह उत्पन्न होता है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 16:08:58 +0530</pubDate>
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