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                <title>tax - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ट्रांसपोर्ट कारोबार पर मंडराया संकट: गुरुग्राम समेत दिल्ली-एनसीआर में ट्रांसपोर्टरों की तीन दिवसीय हड़ताल शुरू,  जानिए क्या खुला और क्या बंद?</title>
                                    <description><![CDATA[ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर दिल्ली-एनसीआर में तीन दिवसीय हड़ताल शुरू हो गई है। ग्रीन टैक्स और नए प्रतिबंधों के विरोध में 21 से 23 मई तक माल ढुलाई पूरी तरह बंद रहेगी। गुरुग्राम के औद्योगिक हब में इसके चलते करोड़ों का कारोबार और आपूर्ति शृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/crisis-looms-on-transport-business-three-day-strike-of-transporters-begins/article-154575"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/strike.png" alt=""></a><br /><p>गुरुग्राम। हरियाणा के गुरुग्राम समेत पूरे दिल्ली-एनसीआर में ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर गुरुवार से तीन दिवसीय हड़ताल शुरू हुई। हड़ताल का सीधा असर गुरुग्राम में देखने को मिल रहा है। पहले ही दिन गुरुग्राम से दिल्ली जाने वाले ट्रकों और कॉमर्शियल वाहनों की संख्या में भारी कमी दर्ज की गयी, जिससे औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो गयी हैं। ट्रांसपोर्ट संघों ने स्पष्ट किया है कि 21 मई की सुबह से 23 मई की रात तक माल ढुलाई से जुड़ी कोई भी छोटी या बड़ी गाड़ी दिल्ली की सीमा में प्रवेश नहीं करेगी। ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के पदाधिकारियों का आरोप है कि दिल्ली सरकार लगातार कमर्शियल वाहनों पर नये प्रतिबंध लागू कर रही है और ग्रीन टैक्स के नाम पर भारी शुल्क वसूला जा रहा है। इससे ट्रांसपोर्ट कारोबार संकट में पहुंच गया है।</p>
<p>ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत और समस्याओं के समाधान की मांग की गयी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी के विरोध में उन्हें सांकेतिक हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। गुरुग्राम को देश के प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब में गिना जाता है। यहां ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियां संचालित हैं, जिनकी आपूर्ति शृंखला पूरी तरह ट्रांसपोर्ट नेटवर्क पर निर्भर है। हड़ताल के चलते उद्योग जगत में चिंता बढ़ गयी है। व्यापारिक विशेषज्ञों के अनुसार, गुरुग्राम और आसपास के क्षेत्रों में प्रतिदिन करोड़ों रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है। यदि हड़ताल आगे बढ़ती है, तो दिल्ली-एनसीआर में फल, सब्जियां, दूध और दवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है, जिससे आम लोगों की परेशानियां बढ़ने की आशंका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 18:32:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष के बेटे के ठिकानों पर छापा, करोड़ों की टैक्स चोरी का खुलासा </title>
                                    <description><![CDATA[डीजीजीआई की 25 से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम ने गुरुवार सुबह करीब 8 बजे यह कार्रवाई शुरू की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bhilwara/rupture-of-crores-of-tax-evasion-on-the-locations-of/article-125106"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(9)16.png" alt=""></a><br /><p>भीलवाड़ा। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ इंटेलीजेंस (डीजीजीआई) की जयपुर जोनल यूनिट ने गुरुवार को भीलवाड़ा में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई के तहत, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष और पूर्व न्यास अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण डाड के कारोबारी बेटे निखिल डाड के 10 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापा मारा गया। इस दौरान, डीजीजीआई की टीमों ने गहन तलाशी अभियान चलाया और महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, शुरूआती जांच में अब तक लगभग 13 करोड़ की जीएसटी चोरी का खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि निखिल डाड केमिकल, कोयला और प्रॉपर्टी के कारोबार से जुड़े हैं और उन पर फर्जी बिलिंग और अवैध लेनदेन के जरिए कर चोरी का आरोप है।</p>
<p>डीजीजीआई की 25 से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम ने गुरुवार सुबह करीब 8 बजे यह कार्रवाई शुरू की। टीम सबसे पहले निखिल के पैतृक आवास, शास्त्री नगर न्यू हाउसिंग बोर्ड पहुंची, जिसके बाद उन्हें कुमुद विहार स्थित निखिल के फ्लैट की जानकारी मिली। इसके साथ ही, टीमों ने रीको औद्योगिक क्षेत्र चित्तौड़ रोड स्थित प्रोसेस यूनिट और निखिल के व्यापारिक पार्टनर अनुज सोमानी के ठिकानों पर भी छापा मारा। जांच के दौरान, टीमों ने निखिल के आवास, कार्यालय और अन्य ठिकानों पर लैपटॉप, डिजिटल डेटा, पेन ड्राइव और अन्य दस्तावेजों की गहन जांच की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>भीलवाड़ा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Aug 2025 12:40:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बजट 2025-26 पर लोकसभा की मुहर, गूगल टैक्स समाप्त</title>
                                    <description><![CDATA[अब चर्चा की औपचारिकता के लिए राज्य सभा में भेजा जाएगा और उस पर वहां वित्त मंत्री के जवाब के बाद उसे उसी रूप में लोकसभा को लौटा दिया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/lok-sabha-seal-on-budget-2025-26-ends-google-tax/article-108670"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/6622-copy179.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोकसभा ने सरकार द्वारा प्रस्तुत 35 संशोधनों को ध्वनिमत से मंजूरी देते हुए मंगलवार को वित्त विधेयक 2025 को पारित कर दिया जिसमें गूगल और मेटा जैसी कंपनियों के प्लेटफार्म पर विज्ञापन जैसी सेवाओं की आय पर छह प्रतिशत के इक्वालाइजेशन कर को हटाने का प्रस्ताव भी शामिल है। विधेयक पर चर्चा पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के जवाब के बाद सदन में विपक्ष के एनके प्रेमचंद्रन, सौगत राय तथा कुछ अन्य सदस्यों के गैर सरकारी संशोधनों को खारिज कर वित्त विधेयक को स्वीकृति प्रदान की। इसके साथ ही लोकसभा ने 2025-26 के बजट को पारित करने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। लोकसभा में संशोधनों के साथ पारित वित्त विधेयक 2025 को अब चर्चा की औपचारिकता के लिए राज्य सभा में भेजा जाएगा और उस पर वहां वित्त मंत्री के जवाब के बाद उसे उसी रूप में लोकसभा को लौटा दिया जाएगा।</p>
<p><strong>अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में अनिश्चितताओं का मुकाबला करने में मदद मिलेगी</strong><br />वित्त मंत्री ने  गूगल कर नाम से मशहूर छह प्रतिशत के इक्वालाइजेशन कर को समाप्त करने के प्रस्ताव को रखते हुए कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में व्याप्त अनिश्चितताओं का मुकाबला करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि मैं विज्ञापनों के लिए छह प्रतिशत के इक्वेलाइजेशन लेवी को समाप्त करने का प्रस्ताव करती हूं। ऑनलाइन विज्ञापनों पर यह कर इसलिए हटाया जा रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अनिश्चितता का सामना किया जा सके।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Mar 2025 11:21:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत ज्यादा ही टैक्स ले रहा है: डोनाल्ड ट्रंप </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर पारस्परिक कर (रेसिप्रोकल टैक्स ) लगाने का इरादा जाहिर किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-is-charging-too-much-tax-donald-trump/article-98070"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/220922-donald-trump-mjf-1544-99e118.jpg" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर पारस्परिक कर (रेसिप्रोकल टैक्स ) लगाने का इरादा जाहिर किया है। ट्रंप ने इस मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि अगर वो हम पर भारी टैक्स लगाते हैं, तो हम भी उन पर उतना ही टैक्स लगा सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि अभी तक वो टैक्स लगा रहे हैं, लेकिन हम ऐसा नहीं कर रहे हैं। ट्रंप का ये बयान उनके राष्ट्रपति पद की शपथ लेने से कुछ दिन पहले आया है। ट्रंप इससे पहले भी भारत की टैरिफ किंग कह कर आलोचना कर चुके हैं। ट्रंप ने हाल ही में ब्रिक्स देशों को अमेरिकी डॉलर के अलावा किसी भी मुद्रा का समर्थन करने पर उनके निर्यात पर 100 प्रतिशत कर लगाने की चेतावनी दी थी। टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि टैक्स के मामले में रेसिप्रोकल टैक्स महत्वपूर्ण है, क्योंकि अगर कोई हम पर शुल्क लगाता है, तो हमें भी ऐसा करना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत, चीन, ब्राजील जैसे कई देश बहुत अधिक शुल्क ले रहे हैं। अगर वे अमेरिका पर शुल्क लगाना चाहते हैं तो ठीक है, लेकिन हम उनसे भी वही शुल्क लेंगे। डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के अलावा कनाडा को भी हाल ही में चेतावनी दी है कि अगर वे अमेरिका में ड्रग्स और अवैध अप्रवासियों की एंट्री नहीं रोकते हैं, तो उन पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाएंगे।</p>
<p><strong>पहले कार्यकाल में भी लगाए थे टैरिफ :</strong></p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी भारतीय स्टील और एल्यूमीनियम पर उच्च टैरिफ लगाए थे। इससे बादाम और सेब जैसे अमेरिकी उत्पादों पर भारत ने जवाबी शुल्क लगाया था। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ट्रंप फिर से भारत को निशाना बनाते हैं तो इसी तरह के व्यापारिक तनाव पैदा हो सकते हैं। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के अजय श्रीवास्तव ने टीओआई से कहा है कि ट्रंप की पारस्परिक व्यापार नीति के तहत ऑटोमोबाइल, कपड़ा और फार्मास्युटिकल्स क्षेत्रों को उच्च टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है। श्रीराम म्यूचुअल फंड के एक विश्लेषण के अनुसार, अमेरिकी ट्रंप की प्रस्तावित टैरिफ नीतियों के कारण होने वाले व्यापार व्यवधानों से भारत को निर्यात अवसरों का लाभ भी मिल सकता है। चीन, मेक्सिको और कनाडा जैसे प्रमुख व्यापारिक भागीदारों पर ट्रंप के टैरिफ व्यापार प्रवाह को बदल सकते हैं। इससे भारत के लिए अवसर पैदा होंगे। रेसिप्रोकल यानी पारस्परिक टैरिफ को एक ऐसी नीति के रूप में समझा जा सकता है, जहां देश समान वस्तुओं पर अपने व्यापारिक भागीदारों के समान टैरिफ बढ़ाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Dec 2024 12:04:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कार घर में खड़ी, हजारों किमी दूर टोल पर कट रहा टैक्स</title>
                                    <description><![CDATA[मोबाइल पर आ रहे मैसेज उड़ा रहे वाहन चालकों के होश।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/car-parked-at-home--tax-being-deducted-at-toll-plaza-thousands-of-kms-away/article-97512"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(1)24.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कार घर में खड़ी और हजारों किमी दूर टोल प्लाजा से टैक्स कटने का मैसेज इन दिनों वाहन मालिकों के होश उड़ा रहा है। हर महीने आधा दर्जन से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। लोग इसकी शिकायत एनएचएआई के टोल फ्री व वेबसाइट पर दिए गए नम्बरों पर कर रहे हैं लेकिन वहां से संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा और न ही बिना गाड़ी गुजरे टैक्स कटने का कारण बता रहे। सरकारी मशीनरी की लचरता के कारण ठगी के शिकार वाहन मालिक मानसिक तनाव से जुझ रहे हैं। दैनिक नवज्योति ने पीड़ित वाहन मालिकों से बात की तो वे एनएचएआई की गैरजिम्मेदाराना रवैये  से आहत नजर आए। उन्होंने इस तरह के मैसेज से किस तरह की मानसिक अवसाद से गुजरना पड़ता है, वो दर्द बयां किए। पेश है खबर के प्रमुख अंश....</p>
<p><strong>क्राइम हो जाए तो निर्दोष साबित करना चूनौतिपूर्ण </strong><br />इरशाद का कहना है, बात टोल टैक्स के 50-60 रुपए की नहीं है। यदि, संबंधित  टोल प्लाजा क्षेत्र में कोई क्राइम हो जाए और उसी दरमियान घर में खड़ी कार का टैक्स कटने का मैसेज आना यानी टोल रिकॉर्ड में गाड़ी संबंधित टोल प्लाजा से गुजरना दर्शा दिया जाएगा। ऐसे में वारदात में खुद को निर्दोष साबित करना ही पीड़ित के लिए चुनौतिपूर्ण व संघर्षपूर्ण हो जाएगा। एनएचएआई को इस तरह के मामलों की रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। </p>
<p><strong>2021 में फास्टैग किया था अनिवार्य  </strong><br />केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने गत 16 फरवरी 2021 से देशभर में टोल से गुजरने वाले वाहनों पर फास्टैग लगाना अनिवार्य कर दिया था। इसके पीछे कैशलेस लेन-देन के अलावा तय रकम से ज्यादा वसूली को रोकना था। वहीं, टोल प्लाजा पर टैक्स चुकाने में लगने वाले लंबे जाम से मुक्ति दिलाने के लिए भी यह व्यवस्था शुरू की थी। ऐसे में वाहन चालकों ने बैंकों, एनएचएआइ और निजी कंपनियों से फास्टैग बनवाकर अपने चार पहिया वाहनों पर चस्पा करा लिए, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते वाहन चालकों के साथ समस्या शुरू हो गई। शहर के कई लोग ऐसे हैं, जो अपने चार पहिया वाहन से किसी भी टोल प्लाजा से होकर नहीं गुजरे हैं। फिर भी उनके फास्टैग खाते से पैसा कट जाता है और उनके पास एसएमएस पहुंच जाता है।  </p>
<p><strong>एक माह से घर में कार खड़ी और कट गया टोल</strong><br />स्टेशन निवासी आसिफ बैग ने बताया कि गत 10 जुलाई को गजनगढ़ टोल प्लाजा से 55 रुपए टैक्स कटने का मैसेज आया। जबकि, कॉलोनी में सीवरेज पाइप लाइन डलने का काम चलने से सड़क पूरी खुदी पड़ी थी। ऐसे में कार एक माह से घर में ही खड़ी थी। इसके बावजूद टोल कट गया। एनएचएआई प्रशासन की लापरवाही से आए दिन वाहन मालिक ठगी के शिकार हो रहे हैं।</p>
<p><strong>ऐसे वापस पा सकते हैं पैसा  </strong><br />एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर संदीप अग्रवाल ने बताया कि महीने में इस तरह के 8-10 मामले आ जाते हैं। फास्टैग से पैसा वापस पाने के लिए कई उपाय हैं। जिस कंपनी से फास्टैग लिया है, वहां शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इसके अलावा फास्टैग के पोर्टल पर हेल्प डेस्क में आॅनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। वाहन चालक चाहें, तो एनएचएआई के टोल फ्री नंबर 1033 पर भी शिकायत कर सकते हैं। यदि, यहां से भी समाधान न हो तो एनएचएआई की वेबसाइट पर मैनेजर के नम्बर व ईमेल पर कम्पलेन कर सकते हैं फिर भी समाधान न हो तो संबंधित क्षेत्र के प्रोजेक्ट डायरेक्टर से शिकायत कर सकते हैं। जहां से शीघ्र ही पैसे वापस रिफंड करवाने की कार्रवाई की जाती है। </p>
<p><strong>टोल कटने का मैसेज यूं उड़ा रहा होश</strong><br />मैसेज आते ही गाड़ी चोरी होने का सताया डर : बजरंग नगर निवासी शिक्षक योगेंद्र कुमार नाथावत ने बताया कि 21 अगस्त को परिवार के साथ परिचित के घर किसी समारोह में गया था। वहां सड़क किनारे कार खड़ी कर प्रोग्राम में शरीक हुए। करीब 45 मिनट बाद मोबाइल पर टोल कटने का मैसेज आया। जिसे पढ़ते ही होश उड़ गए। इस पर तुरंत घर से बाहर निकलकर गाड़ी देखने पहुंचा। जब कार सामने दिखी तो जान में जान आई। बाद में एनएचएआई के टोल फ्री नम्बर 1033 पर सम्पर्क किया तो वहां कस्टर केयर ने फास्टैग जारी करने वाले बैंक से सम्पर्क करने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। <br />7 दिन से गाड़ी गैराज में और कट गया टोल : संजय नगर निवासी व्यवसायी पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि गत 17 अक्टूबर को कार सर्विस के लिए मैकेनिक के गैराज में खड़ी की थी। इसके अगले दिन रात को गजनपुरा टोल प्लाजा से टोल कटने का मैसेज आया। जिसे देखते ही कार चोरी का डर सताया। इस पर तुरंत मैकेनिक को फोन कर  मामले की जानकारी दी तो वह भी सकते में आ गया और रात को ही वह गैराज पहुंचा तो ताला लगा मिला तो सांस आई। घटना को लेकर एनएचएआई के टोल फ्री नम्बर 1033 पर सम्पर्क कर कारण तलाशने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं दिया।<br />सात दिन में दो बार कट गया टैक्स : रायपुरा निवासी मुस्लिम राष्टÑीय मंच के क्षेत्रिय सह संयोजक ईरशाद अली ने बताया कि घर में खड़ी कार के दो बार टोल टैक्स कट गया। उन्होंने बताया कि पहली बार-गत 27 नवम्बर को सुबह 8.40 मिनट पर लिंगलापुर टोल प्लाजा से 50 रुपए टैक्स कटने का मोबाइल पर मैसेज आया। इसके बाद  4 दिसम्बर को सुबह 8.4 मिनट पर जहूर टोल प्लाजा से 35 रुपए टैक्स कटने का फिर से मैसेज आया। इस तरह घर में खड़ी गाड़ी का 7 दिन में दो बार टोल टैक्स कट गया। जब इसकी शिकायत एनएचएआई के हेल्पलाइन नम्बर की तो उन्होंने  बैंक से सम्पर्क करने की बात कहकर फोन काट दिया। </p>
<p><strong>एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर संदीप अग्रवाल से सीधी बात</strong><br /><strong>सवाल : </strong>घर में खड़ी गाड़ी का टोल कट रहा है, इसका क्या कारण है?<br /><strong>जवाब :</strong> टोल प्लाजा पर लगे स्कैनर कई बार वाहन के नम्बर व फास्टैग को तकनीकी कारणों से रीड नहीं कर पाता है तो वहां मौजूद कर्मचारी मैन्यूअली वाहन नम्बर  सॉफ्टवेयर पर दर्ज करते हैं। ऐसे में कई बार टाइप की मिस्टेक हो जाती है, जिससे इस तरह के वाक्य घटित हो जाते हैं।<br /><strong>सवाल : </strong>किस तरह की होती है टाइप आॅफ मिस्टेक<br /><strong>जवाब : </strong>मान लीजिए, किसी टोल प्लाजा से फ्न05उअ 88  नम्बर की गाड़ी गुजरी। जिसके फास्टैग नम्बर को टोल प्लाजा का स्कैनर स्केन नहीं कर पाया। ऐसे में कर्मचारी सॉफ्टवेयर पर मैन्यूअली वाहन नम्बर फीड करेगा। इस दौरान जल्दीबाजी में कार की सीरीज उअ की जगह उइ तथा 88 की जगह 80 टाइप हो जाए तो इस नम्बर के वाहन का टोल कट जाता है, जो घर में खड़ी होती है। <br /><strong>सवाल :</strong> रिफंड पाने के लिए पीड़ित वाहन मालिक क्या  करें?<br /><strong>जवाब : </strong>सबसे पहले अपने नजदीकी एनएचएआई आॅफिस में सम्पर्क करें और मामले की शिकायत करें। आॅफिस से कम्लेन नम्बर मिलेगा, जिसके व्हाट्स एप पर घटना का संक्षिप्त डिलेट भेजे। दो-तीन दिन में समाधान हो जाएगा। <br /><strong>सवाल : </strong>फिर भी रिफंड वापस नहीं आया तो क्या करें?<br /><strong>जवाब :</strong> एनएचएआई ने सभी टोल मैनेजर को सीयूजी नम्बर दिए हैं। वाहन मालिक एनएचएआई की वेबसाइड पर जाकर यह सीयूजी नम्बर ले सकता है। इस पर कम्पलेन करें, यदि यहां से भी समाधान नहीं होता है तो संबंधित क्षेत्र के एनएचएआई प्रोजेक्ट मैनेजर से सम्पर्क कर शिकायत करें। जल्द ही रिफंड करवा दिया जाता है। <br /><strong>सवाल : </strong>आपके पास भी इस तरह की शिकायत आती है?<br /><strong>जवाब : </strong>हां, महीने में 8 से 10 शिकायत इस तरह की ही आती है। हमने कई पीड़ितों को एक-दो दिन में ही रिफंड करवाएं हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/car-parked-at-home--tax-being-deducted-at-toll-plaza-thousands-of-kms-away/article-97512</link>
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                <pubDate>Fri, 13 Dec 2024 15:56:45 +0530</pubDate>
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                <title>खाड़ी देशों में युद्ध से हाड़ौती के चावल का अटका निर्यात</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती का 90 फीसदी चावल विदेशों में निर्यात किया जाता है, लेकिन इस साल खाड़ी देशों के बीच चल रहे युद्ध के कारण चावल का निर्यात प्रभावित हो रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/export-of-hadoti-rice-stuck-due-to-war-in-gulf-countries/article-97417"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । खाड़ी देशों के बीच चल रहे युद्ध और केन्द्र सरकार की ओर से एक्सपोर्ट डयूटी पर टैक्स लगाने का खामियाजा हाड़ौती के धान (चावल) उत्पादक किसानों को उठाना पड़ रहा है। पिछले साल धान का भाव 3700 से 4500 रुपए प्रति क्विंटल था, जो इस साल घटकर 2300 से 3400 रुपए प्रति क्विंटल पर ठहर गया है। हाड़ौती का 90 फीसदी चावल विदेशों में निर्यात किया जाता है, लेकिन इस साल खाड़ी देशों के बीच चल रहे युद्ध के कारण चावल का निर्यात प्रभावित हो रहा है। जो देश भारत से चावल से आयात करते थे उन सभी देशों ने इस बार दूसरे देशों से चावल खरीद लिया है।  इस कारण हाड़ौती का चावल बाहर विदेशों में नहीं जा रहा है। इससे यहां के चावल उत्पादक किसानों को फसल का अच्छा दाम नहीं मिल पा रहा है। </p>
<p><strong>मंडियों में बम्पर आवक, लेकिन दाम काफी कम</strong><br />कोटा की भामाशाहमंडी सहित हाड़ौती की मंडियों में वर्तमान में करीब एक लाख से क्विंटल से अधिक चावल रोज बिकने आ रहा है, लेकिन इस साल दाम कम मिलने के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले साल विदेशों में माल का एक्सपोर्ट अच्छा होने से धान का दाम 4500 रुपए प्रति क्विंटल पहुंच गया था। इस साल स्थिति बिलकुल विपरित है। इजराइल व हमास के बीच काफी समय से युद्ध चलने के कारण धान का एक्सपोर्ट प्रभावित हो रहा है। इससे किसानों को धान की अलग-अलग किस्मों में 1000 से 1500 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान पहुंच रहा है। इसी तरह का नुकसान मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी किसानों को हो रहा है।</p>
<p><strong>एक्सपोर्ट डयूटी टैक्स ने भी बिगाड़ा गणित</strong><br />चावल निर्यातक विशाल गुप्ता ने बताया कि दिसंबर 2023 में केन्द्र सरकार ने 20 फीसदी एक्सपोर्ट डयूटी लगाई थी। इसमें एक किलो चावल पर 10 रुपए की एक्सपोर्ट डयूटी लगी थी। इस पर अधिक टैक्स लगाने से चावल का निर्यात बंद कर दिया गया। इससे दिसंबर 2023 से अक्टूबर 2024 तक विदेशी देशों ने दूसरे देशों से चावल लेना शुरू कर दिया। जिससे यहां के किसानों को चावल के भाव कम मिलने लगे। हालांकि एक्सपोर्ट डयूटी इसी साल केन्द्र सरकार ने वापस ले ली है। इसके बाद नवंबर में विदेशों में चावल का एक्सपोर्ट होना शुरू हो गया है। ऐसे में आगामी दिनों में चावल के भावों में तेजी होने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p><strong>जहाजों पर हुए हमले तो बदला रूट</strong><br />भामाशाहमंडी में चावल के व्यापारी योगेश कुमार ने बताया कि धान की दाम में कमी का मुख्य कारण इजरायल के साथ ईरान व हमास का युद्ध है। युद्ध के चलते समुद्री रास्तों में आतंकवादी गतिविधियां बढ़ने लगी है। बंदरगाहों पर जहाजों पर हमले किए जा रहे हैं। ऐसे में दूसरे समुद्री रास्तों से लंबा फेरा लगाकर जहाजों से चावल पहुंचाया जा रहा है। इससे ज्यादा रेट होने के कारण वहां के अधिकांश देश पड़ौसी देशों से चावल का आयात करने लगे हैं। भारत से करीब 150 देशों में चावल का निर्यात किया जाता है। इनमें से प्रमुख रूप से पांच देश अमेरिका, इटली, थाइलैंड, स्पेन और श्रीलंका सबसे  बड़े आयातक देश हैं। इसके अलावा अन्य देशों में सिंगापुर, फिलीपिंस, हांगकांग, मलेशिया जैसे देश भी शामिल हैं। युद्ध के कारण अब इन देशों में चावल का निर्यात प्रभावित हो रहा है।</p>
<p><strong>पांच साल में निर्यात</strong><br />2020-21: 1600 से 1650 <br />2021-21:  1700 से 1800 <br />2021-22:  1900 से 2000 <br />2022-23: 2000 से 2100 <br />2023-24: एक्सपोर्ट डयूटी टैक्स से निर्यात नहीं</p>
<p>पिछले साल 4500 रुपए प्रति क्विंटल तक का चावल बिका और अच्छा मुनाफा भी हुआ था। इस बार चावल घाटे का सौदा है। 1000 से 1500 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान हो रहा है। दो से तीन साल तक चावल रखने के बाद भाव नहीं मिलने से मजबूरी में बेचकर जाना पड़ रहा है।<br /><strong>- मांगीलाल, किसान, माधोराजपुरा</strong></p>
<p>धान के भाव गिरने का मुख्य कारण खाड़ी देशों में युद्ध और केन्द्र सरकार द्वारा एक्सपोर्ट डयूटी पर टैक्स लगाना है। ऐसे में विदेशी देशों में निर्यातक का  भारत से चावल के आयात के लिए सम्पर्क कम हो गया है। अक्टूबर में टैक्स हटा दिया है। अब धीरे-धीरे भाव तेज होने की संभावना है।<br /><strong>- भानु कुमार, चावल निर्यातक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Dec 2024 18:47:22 +0530</pubDate>
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                <title>लड़ाई पूंजीपति को छूट, गरीब की लूट वाले टैक्स के खिलाफ: राहुल</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि मोदी सरकार अमीरों को राहत दे रही है और गरीबों को लूटकर पूंजीपतियों का पोषण कर रही है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rahul-fights-against-tax-that-robs-the-poor-exemption-for/article-97019"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/9930400-sizee22.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि मोदी सरकार अमीरों को राहत दे रही है और गरीबों को लूटकर पूंजीपतियों का पोषण कर रही है। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार गरीबों को लूट रही है और पूंजीपतियों को सहूलियत दे रही है और उन्हें करों से राहत दे रही है। वस्तु एवं सेवा कर-जीएसटी तथा अन्य कई तरह के कर लगाकर आम लोगों को महंगाई की आग में झोंककर उनका जीवन मुश्किल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूंजीपतियों को छूट और आम लोगों से लूट का एक और उदाहरण देखिए। एक तरफ कॉरपोरेट टैक्स के मुकाबले इनकम टैक्स लगातार बढ़ रहा है। दूसरी तरफ मोदी सरकार गब्बर सिंह टैक्स से और ज्यादा वसूली की तैयारी कर रही है। सुनने में आ रहा है कि जीएसटी से लगातार बढ़ती वसूली के बीच सरकार एक नया टैक्स स्लैब पेश करने जा रही है। आपकी ज़रूरत की चीज़ों पर जीएसटी बढ़ाने की योजना है।</p>
<p><strong>कपड़ों पर जीएसटी 12 से बढ़ाकर 18% करने जा रही सरकार</strong></p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि जरा सोचिए अभी, शादियों का सीजन चल रहा है। लोग कब से पाई-पाई जोड़कर पैसे इकट्ठा कर रहे होंगे और सरकार इसी बीच 1500 रुपए से ऊपर के कपड़ों पर जीएसटी 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत करने जा रही है। यह घोर अन्याय है। अरबपतियों को टैक्स में छूट देने और उनके बड़े से बड़े कर्ज़ माफ करने के लिए गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की मेहनत की कमाई को टैक्स द्वारा लूटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई इसी अन्याय के ़खिलाफ है। आम लोगों पर पड़ रही टैक्स की मार के ़खिलाफ हम मजबूती से आवाज उठाएंगे और इस लूट को रोकने के लिए सरकार पर दबाव बनाएंगे।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Dec 2024 11:36:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>संगठित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ते कदम</title>
                                    <description><![CDATA[रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रत्यक्ष कर संग्रह में इस वित्तीय वर्ष 2024 में अब तक 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/steps-towards-organized-economy/article-91305"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/tax.png" alt=""></a><br /><p>प्रत्यक्ष कर किसी भी देश के राजकोषीय ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत में, आमतौर पर नागरिक आयकर देने के इच्छुक नहीं होते, वे कर देने की बजाय दान देना पसंद करेंगे, लेकिन भारत के प्रत्यक्ष कर बोर्ड की ओर से हाल ही जारी एक रिपोर्ट से पता चलता है कि अब कर चुकाने के मामले में भारतीय नागरिकों की मानसिकता बदल रही है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रत्यक्ष कर संग्रह में इस वित्तीय वर्ष 2024 में अब तक 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे यह परिलक्षित होता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था जो अनौपचारिक या असंगठित होती थी, वह अब औपचारिक अर्थव्यवस्था यानी संगठित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही है। प्रत्यक्ष कर आय, लाभ और धन पर लगाए जाते हैं। इसमें आयकर, कॉर्पोरेट कर, पूंजीगत लाभ कर और ऐसे अन्य कर शामिल हैं, जबकि अप्रत्यक्ष कर  वस्तुओं और सेवाओं पर लगाए जाते हैं और उपभोक्ताओं को समान रूप से प्रभावित करते हैं। इसके विपरीत प्रत्यक्ष कर प्रगतिशील होते हैं, जिसका अर्थ है कि उच्च आय वाले व्यक्ति और संस्थाएं अपनी आय का बड़ा हिस्सा करों के रूप में चुकाते हैं। </p>
<p>भारत में प्रत्यक्ष करों का बड़ा हिस्सा  आयकर और कॉर्पोरेट कर से आता है। पिछले दो दशकों में, प्रत्यक्ष कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो कुल सरकारी राजस्व में अधिक हिस्सेदारी में योगदान देता है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 में प्रत्यक्ष कर संग्रह 16.61 लाख करोड़ रुपए रहा, जबकि वित्त वर्ष 2011-12 में यह 6.38 लाख करोड़ रुपए था, जो एक प्रभावशाली वृद्धि दर्शाता है। केन्द्रीय प्रत्यक्षकर बोर्ड ने इस वित्तीय वर्ष 2024 के 17 सितम्बर तक की अवधि के आंकड़े जारी किए हैं, जिसके अनुसार भारत में शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 16.12 फीसदी बढ़कर 9.95 लाख करोड़ रुपए से अधिक रहा।</p>
<p>भारत में प्रत्यक्ष कर संग्रह में वृद्धि के मूलभूत चालकों में से एक अर्थव्यवस्था की निरंतर वृद्धि रही है। पिछले कुछ दशकों में, विशेष रूप से 1991 के उदारीकरण सुधारों के बाद, भारत के सकल घरेलू उत्पाद में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस वृद्धि ने आय, कॉर्पोरेट लाभ और संपत्ति में वृद्धि की है, जो सभी प्रत्यक्ष कराधान के अधीन हैं। उदाहरण के लिए, सेवा क्षेत्र, जिसमें आईटी, बैंकिंग और वित्तीय सेवा शामिल हैं, आर्थिक विकास में एक प्रमुख योगदानकर्ता रहा है। यह क्षेत्र अब भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 55 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है और इसने व्यक्तिगत और कॉर्पोरेट आय में वृद्धि की है। उच्च आय वाले लोगों, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में पेशेवरों की बढ़ती संख्या ने आयकर के लिए कर आधार का विस्तार किया है, जबकि कॉर्पोरेट कर संग्रह भी बढ़ते व्यापारिक मुनाफे के साथ बढ़ा है। </p>
<p>अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने के लिए भारत सरकार के ठोस प्रयासों ने कर संग्रह में वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर नवंबर 2016 में विमुद्रीकरण था, जिसने उच्च मूल्य वाले मुद्रा नोटों को अमान्य करके काले धन को लक्षित किया। इस कदम ने नकदी आधारित अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में प्रवेश करने के लिए मजबूर किया, जिससे आय और वित्तीय लेनदेन की बेहतर रिपोर्टिंग हुई। इसके अलावा 2017 में माल और सेवा कर जीएसटी की शुरुआत ने औपचारिकता को और बढ़ाया। हालांकि जीएसटी एक अप्रत्यक्ष कर है, लेकिन इसके कार्यान्वयन ने व्यवसायों को डिजिटल रिकॉर्ड और औपचारिक लेखा प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। इसने बदले में, प्रत्यक्ष करों के अनुपालन में वृद्धि की है, क्योंकि व्यवसाय और व्यक्ति जो पहले अनौपचारिक क्षेत्र का हिस्सा थे, उन्हें अपनी आय घोषित करनी पड़ी है।</p>
<p>आयकर विभाग के अनुसार, विमुद्रीकरण के बाद दाखिल आयकर रिटर्न की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2015-16 में 3.79 करोड़ से बढ़कर 2020-21 में 6.84 करोड़ हो गई है, जो व्यापक कर आधार और बेहतर अनुपालन का संकेत है। कर ढांचे को सरल बनाने और करदाताओं के लिए अनुपालन बोझ को कम करने के लिए लगातार सरकारों ने कई कर सुधार लागू किए हैं। 2019 के वित्त अधिनियम ने कॉर्पोरेट कर दरों में बड़ी कमी की, जिससे घरेलू कंपनियों के लिए कर की दर 30प्रतिशत से घटकर 22प्रतिशत और नई विनिर्माण कंपनियों के लिए 15 प्रतिशत हो गई। इस कदम का उद्देश्य निवेश आकर्षित करना, कॉर्पोरेट लाभप्रदता को बढ़ावा देना और कर अनुपालन को बढ़ाना है। इसके अलावा सरकार ने 2020 में फेसलेस असेसमेंट स्कीम शुरू की, जो करदाताओं और कर अधिकारियों के बीच शारीरिक संपर्क के बिना इलेक्ट्रॉनिक रूप से कर आकलन करने की अनुमति देती है। इस सुधार ने भ्रष्टाचार की गुंजाइश को कम किया है और कर अनुपालन को आसान और अधिक पारदर्शी बनाया है, जिससे व्यक्तियों और निगमों को सटीक रिटर्न दाखिल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। प्रौद्योगिकी के उपयोग ने भारत में कर प्रशासन में क्रांति ला दी है। ई-फाइलिंग, ई-सत्यापन, नेटबैकिंग और फोन पे व पेटीएम जैसी डिजिटल भुगतान प्रणालियों की शुरुआत ने कर दाखिल करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया है, जिससे करदाताओं के लिए यह अधिक सुलभ हो गया है। आयकर विभाग ने उच्च मूल्य के लेन देन को ट्रैक करने और रिपोर्ट की गई आय और वास्तविक वित्तीय व्यवहार के बीच विसंगतियों का पता लगाने के लिए डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भी भारी निवेश किया है। पैन को आधार, एक बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली से जोड़ने की सरकार की पहल ने विभिन्न प्लेटफार्मों पर आय और व्यय को ट्रैक करने की क्षमता को बढ़ाया है। इससे अनुपालन और कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है क्योंकि व्यक्तियों के लिए आय या व्यय को कम करके दिखाना मुश्किल हो गया है।</p>
<p><strong>-राम शर्मा </strong><br /><strong> यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Sep 2024 11:23:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>RBI MPC Meeting : अब यूपीआई से पांच लाख रुपए तक के टैक्स का होगा भुगतान, कुछ घंटों में होगा चेक क्लीयरेंस</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय रिजर्व बैंक ने एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) से लेनदेन को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए यूपीआई के जरिये कर भुगतान करने की सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rbi-mpc-meeting-now-tax-up-to-rs-5-lakh/article-87201"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/shaktikanta-das_rbi_governor.jpeg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक ने एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) से लेनदेन को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए यूपीआई के जरिये कर भुगतान करने की सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी है।</p>
<p>शक्तिकांत दास ने बताया कि चेक ट्रंकेशन प्रणाली (सीटीएस) वर्तमान में दो कार्य दिवसों तक के समाशोधन के साथ चेक क्लियर करता है। चेक क्लीयरेंस की दक्षता में सुधार करने और प्रतिभागियों के लिए निपटान जोखिम को कम करने तथा ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने के उद्देश्य से बैच प्रोसेसिंग के वर्तमान दृष्टिकोण से सीटीएस को ऑन-रियलाइजेशन-सेटलमेंट के साथ निरंतर क्लीयरेंस में बदलने का प्रस्ताव है।</p>
<p>इसके तहत चेक को कुछ ही घंटों में स्कैन, प्रस्तुत और पास किया जाएगा तथा यह कार्य कारोबारी घंटों के दौरान निरंतर आधार पर किया जाएगा। समाशोधन चक्र वर्तमान टी+1 दिनों से घटकर कुछ घंटों का रह जाएगा। इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश शीघ्र ही जारी किए जाएंगे।</p>
<p>आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार को मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक के बाद चालू वित्त वर्ष की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा की और कहा कि यूपीआई अपनी खासियतों  के कारण भुगतान का सबसे पसंदीदा तरीका बन गया है। वर्तमान में यूपीआई के लिए लेन-देन की सीमा एक लाख रुपये है। हालांकि रिजर्व बैंक ने समय-समय पर पूंजी बाजार, आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) सदस्यता, ऋण संग्रह, बीमा, चिकित्सा और शैक्षिक सेवाओं जैसी कुछ श्रेणियों के लिए यूपीआई लेनदेन सीमाओं की समीक्षा की है और उन्हें बढ़ाया है।</p>
<p>दास ने कहा कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर भुगतान आम, नियमित और उच्च मूल्य के हैं। इसलिए, यूपीआई के माध्यम से कर भुगतान की सीमा को एक  लाख रुपये से बढ़ाकर पांच  लाख रुपये प्रति लेनदेन करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में आवश्यक निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।</p>
<p>आरबीआई गवर्नर ने बताया कि यूपीआई से लेनदेन करने वाले ग्राहकों की संख्या 42.4 करोड़ पर पहुंच गई है। साथ ही यूपीआई से लेनदेन करने वालों की संख्या में और बढ़ोतरी होने की पूरी  संभावना है। ऐसे में यूपीआई में'प्रत्यायोजित भुगतान शुरू करने का प्रस्ताव है। प्रत्यायोजित भुगतान एक व्यक्ति (प्राथमिक उपयोगकर्ता) को उनके बैंक खाते पर किसी अन्य व्यक्ति (द्वितीयक उपयोगकर्ता) के लिए यूपीआई  लेनदेन सीमा निर्धारित करने की अनुमति देगा। इससे पूरे देश में डिजिटल भुगतान की पहुंच  और उपयोग में वृद्धि होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में विस्तृत निर्देश जल्द ही जारी किए जाएंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Aug 2024 14:36:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने पलटा अपना फैसला, रॉयल्टी कोई कर नहीं </title>
                                    <description><![CDATA[संविधान पीठ ने कहा कि खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम (खान अधिनियम) राज्यों को खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति से वंचित नहीं करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-reversed-the-its-decision-no-royalty-tax%C2%A0/article-85861"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने करीब 35 साल पुराना अपना एक फैसला पलटते हुए कहा कि रॉयल्टी कोई कर नहीं है तथा राज्यों के पास खनिजों और खदानों पर कर लगाने का अधिकार है। शीर्ष अदालत की 9 सदस्यीय संविधान पीठ ने केंद्र और विभिन्न खनन कंपनियों की आपत्तियों को खारिज करते हुए आठ-एक के बहुमत वाले फैसले से 1989 के सात सदस्यीय पीठ के फैसले (इंडिया सीमेंट लिमिटेड बनाम तमिलनाडु सरकार) को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि राज्यों के पास कर लगाने का कोई अधिकार नहीं है। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय, न्यायमूर्ति अभय एस ओका, न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुयान, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की संविधान पीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने हालांकि, बहुमत के फैसले से असहमति जताई।</p>
<p>संविधान पीठ ने कहा कि खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम (खान अधिनियम) राज्यों को खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति से वंचित नहीं करेगा। शीर्ष अदालत के बहुमत वाले इस फैसले में कहा गया है कि रॉयल्टी कोई टैक्स नहीं तथा विधानसभाओं के पास खनिजों वाली भूमि पर कर लगाने की विधायी शक्ति प्राप्त है। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने बहुमत के फैसले में कहा कि संसद के पास खनिज अधिकारों के तहत कर लगाने की शक्ति नहीं, लेकिन वह (राज्य द्वारा) कर लगाने की सीमा निर्धारित कर सकती है। खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकरण और अन्य ने सात सदस्यीय पीठ के फैसले को चुनौती दी थी। ओडिशा और झारखंड आदि ने दलील दी थी कि संविधान के अनुसार कर लगाने का अधिकार सिर्फ राज्यों के पास है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jul 2024 16:18:15 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>हेल्थ फॉर ऑल और वन नेशन वन टैक्स लागू हो</title>
                                    <description><![CDATA[ ढाई घंटे चली परिचर्चा में विशेषज्ञों ने कई ऐसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए जिससे कोटा प्रगति के पथ पर और अधिक तेजी से अग्रसर हो सके। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/health-for-all-and-one-nation-one-tax-should-be-implemented/article-84933"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/photo-size-(2)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। केन्द्रीय बजट से कोटा को आशा और अपेक्षा विषय को लेकर मंगलवार को दैनिक नवज्योति कार्यालय में परिचर्चा आयोजित की गई। परिचर्चा में उद्योग वाणिज्य, व्यापार, इकॉनॉमिस्ट, मैनुफैक्चरर, सामान्य व्यापारी, टैक्स जीएसटी, होटल और पर्यटन, किराना, सीए, कामर्स फ्रोफेसर, मेडिकल एन्ड हेल्थ, कोटा स्टोन सहित सभी सैक्टर के विषय विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।  ढाई घंटे चली परिचर्चा में विशेषज्ञों ने कई ऐसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए जिससे कोटा प्रगति के पथ पर और अधिक तेजी से अग्रसर हो सके। प्रस्तुत हैं उसके अंश :</p>
<p><strong>केन्द्रीय बजट से कोटा की आशा और अपेक्षा</strong><br />- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट की जरूरत।<br />- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट खुले।<br />- पर्यटन के साथ विश्व विद्यालयों में पर्यटन संबंधी संबंधी कोर्स शुरू हों। <br />- नियमों का सरलीकरण हो जिससे इन्वेस्टर कोटा आ सकें।<br />- वन नेशन वन न्यायालय शुरू हों।<br />- एमएसएमई में बदलाव के साथ रेल कॉरिडोर व रोड कॉरिडोर बनें।<br />- नये पर्यटन सर्किट बनें जिससे कोटा जुड सके।<br />- जीएसटी का सरलीकरण के साथ इन्कम टैक्स नियमों में बदलाव जरूरी।<br />- स्टार्टअप इको सिस्टम को डवलप कर कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए।<br />- टैक्स से मध्यमवर्गीय परिवार पीड़ित, सोना बेचने पर तो कम से कम टैक्स नहीं लगे।</p>
<p><strong>जीएसटी मुक्त हो किराना</strong><br /> किराना हर घर की महती जरूरत है। समाज में हर वर्ग का व्यक्ति महंगा राशन से दुखी है। सरकार ने खाद्य सामग्री पर जीएसटी लगाकर  राशन के दाम बढ़ा दिए। आगे से ही माल महंगा आता है और रिटेलर तक पहुंचते पहुंचते उसके दाम और बढ़ जाते हैं। हर व्यापारी अपना टैक्स निकालना चाहता है, जिसकी वजह से सामग्री और महंगी हो जाती है। ऐसे में सरकार को आने वाले बजट में किराना को जीएसटी से मुक्त करना चाहिए। <br /><strong>-पवन दुआ, अध्यक्ष किराना व्यापार संघ </strong></p>
<p><strong>छूट नहीं मिले लेकिन टैक्स कम होना चाहिए</strong><br />सरकार ने हर वस्तु पर टैक्स लगा रखा है वह भी 18 फीसदी। इससे कई वस्तुएं महंगी हो गई और आम आदमी की पहुंच से दूर हैं। सरकार को चाहिए कि भले ही छूट नहीं दे लेकिन टैक्स  नियम का सरलीकरण होना चाहिए। यहां तक कि बीमा किश्त पर टैक्स लगाना लगत है। सोना बेचने पर टैक्स लगा रखा है। जबकि मध्यम वर्गीय परिवार मजबूरी में ही सोना बेचता है। पहले वैट सिस्टम काफी सरल था। जिससे सरकार के खजाने में हर साल अधिक टैक्स जमा हो रहा था। जबकि जीएसटी पेचीदा होने से शुरुआत में तो वह काफी कम जमा हुआ। उसे फिर से ढर्रे पर आने में ही करीब तीन साल लग गए। <br /><strong>- आशीष राज, म्ैेनुफेक्चरर</strong></p>
<p><strong>सिलेंडर व खाद्य सामग्री पर घटे टैक्स</strong><br />गृहणियां हर बार बजट में उनके लिए कुछ अच्छा होने की उम्मीद रखती है। सरकार को सिलेंडर, दाल, चावल सहित अन्य खाद्य सामग्री से टैक्स हटाना चाहिए। सिलेंडर के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। जिससे रसोई का बजट ही गड़बड़ा जाता है। हर छोटी-छोटी चीजों के लिए महिलाओं को परेशान होना पड़ता है। वहीं, सरकार ने जो खाद्य सामग्री बीपीएल, एपीएल लोगों के लिए फ्री की उन्हें तो मिल नहीं रही। गरीब आदमी को गेहूं नहीं मिल रहा। जिन्हें मिल रहा है वो दुकानों पर आधी कीमत में बेच रहा है। गरीबों को उनका हक मिले, इसके लिए सरकार को प्रभावी मॉनिटरिंग कर जांच करनी चाहिए। <br /><strong>मधु कुमावत, गृिहणी</strong></p>
<p><strong>कोटा में खुले रिफायनरी व सौलर एनर्जी प्लांट</strong><br />बीकानेर जैसी रिफायनरी प्लांट कोटा में खुले तो यहां के बहुत से लोगों का भला होगा। बीटेक व एमटेक करने वाले इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों  को सीधा रोजगार मिल सकेगा। वहीं, सौलर एनर्जी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। झालावाड़ रोड पर बहुत जगह खाली पड़ी है, जहां सौलर एनर्जी प्लांट लग सकता है। सरकार को आगामी बजट में रिफायनरी व सौलर प्लांट की सौगात देनी चाहिए। इससे पेट्रोल-डीजल की खपत  कंट्रोल हो सकेगी साथ ही वायुमंडल को प्रदूषित होने से बचा सकेंगे। <br /><strong>- मुकुल विजय, एमटेक स्टूडेंट</strong></p>
<p><strong>एमएसएमई एक्ट के नियम को हटाए सरकार</strong><br />बजट में आम जनता की नजरें हमेशा टैक्स स्लैब पर रहती है। पिछले तीन चार सालों से जो बजट आ रहे हैं, उनमें लगातार टैक्स में सेविंग को प्रमोट न करके टैक्स स्लैब को चेंज किया जा रहा है। जिससे टैक्स की नई स्लैब में अमाउंट कम करके लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। जिससे लोगों की सेविंग करने की आदत रही है वो बदलती जा रही है।  सरकार ने पिछले बजट में एमएसएमई एक्ट को इनकम टैक्स एक्ट में एप्लीकेबल कर दिया है। जिससे व्यापारियों के बीच सामंजस्य की कमी हो गई। जिससे वे आपस में व्यापार नहीं कर रहे।<br /><strong>- प्रकाश चौधरी, अध्यक्ष, सीए कोटा ब्रांच आईसीएआई</strong></p>
<p><strong>स्टार्टअप ईको सिस्टम विकसित हो</strong><br />स्टार्टअप इको सिस्टम को डवलप किए जाने की आवश्यकता है। जिन उद्योगों में रोजगार कम है वहां अधिक बजट  इनवेस्ट किया जा रहा है। ऐसे में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए। जिससे ग्रीन इकोनोमी मजबृत होगी।  कोटा को हाइटेक सिटी बनाया जाना चाहिए। यहां ऑल इंडिया मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट आने चाहिए। कोटा में प्राइवेट टूरिज्म की दृष्टि से पर्यटन सर्किट बनना चाहिए।      <br /><strong>- डॉ. गोपाल सिंह, अर्थशास्त्री </strong></p>
<p><strong>उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए मिले बजट</strong><br />केन्द्र सरकार को चाहिए कि उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बजट उपलब्ध करवाए। प्रदेश में बिजनेस सेंटर विकसित होने चाहिए। इनवेस्टर को प्रमोट करने की जरूरत है। यह तभी संभव होगा जब उन्हें प्रोत्साहन दिया जाएगा। कोटा औद्योगिक नगरी था इसे फिर से उसी श्रेणी में लाने के लिए प्रयास करने होंगे।     <br /><strong>-अनुज माहेश्वरी, सचिव दी एसएसआई एसोसिएशन </strong></p>
<p><strong>शिक्षा से खत्म हो 18 प्रतिशत जीएसटी</strong><br />एजुकेशन सेक्टर पर बजट ज्यादा होना चाहिए, अभी बजट 3प्रतिशत से भी कम है। जबकि, यूनिस्को की गाइड लाइन के अनुसार जीडीपी का 6 प्रतिशत बजट शिक्षा पर होना चाहिए। क्योंकि, वर्तमान में एजुकेशन सेक्टर बहुत ही लॉ कंडीशन में चल रहा है। नई शिक्षा नीति लागू की है, जिससे कुछ परिवर्तन हुए हैं लेकिन फंडामेंटल लेवल पर बहुत सारी चीजों पर प्रयास होना बाकी है। डिजिटल एजुकेशन प्लेटफॉर्म पर जो भी विद्यार्थी एजुकेशन लेता है उसे 18प्रतिशत जीएसटी देनी पड़ती है।     <br /><strong>- अनिता माहेश्वरी, सहायक आचार्य, राजकीय गर्ल्स कॉमर्स कॉलेज</strong></p>
<p><strong>टूरिस्ट स्टडी कोर्स लागू हो</strong><br />कोटा में पर्यटन के नाम पर सिर्फ चम्बल रिवर फ्रंट है। घरेलू पर्यटक ही यहां नहीं आ पा रहा। ऐसे में विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करना बड़ी चुनौती है। पर्यटक बूंदी तक आकर ही निकल जाते हैं। कोटा में एयरपोर्ट होना चाहिए। लेकिन जिन शहरों में एयरपोर्ट नहीं हैं वहां भी पर्यटन  का विकास हुआ है। ऐसे में केन्द्र सरकार को चाहिए कि पर्यटन स्टडी कोर्स लागू किया जाए।  कोटा में बिजली, पानी व रेल की कनेक्टिविटी काफी अच्छी है। ऐसे में यहां पर्यटन के क्षेत्र में अधिक संभावनाएं हैं। इसके लिए यहां उसी स्तर के होटल, परिवहन व अन्य संसाधनों को भी विकसित किया जाए। रा’य सरकार द्वारा पेश बजट में पर्यटन के लिए जो बजट दिया है वह प्रदेश के अन्य शहरों के लिए है उसमें कोटा को  कुछ नहीं मिला। यहां पर्यटन के लिए चम्बल सफारी को प्रमोट किया जाना चाहिए।  कोटा में ट्यूरिज्म एजुकेशन के लिए विशेष पाठ्यक्रम सरकार के स्तर पर विश्वविद्यालय या कॉलेजों में शुरू किए जाएं। साथ ही सेंटर भी खोले जाएं ताकि, ट्यूरिज्म को बढ़ावा मिल सके। <br /><strong>- अनुकृति शर्मा प्रोफेसर ट्यूरिज्म</strong></p>
<p><strong>कोटा स्टोन से खत्म हो जीएसटी</strong><br />कोटा स्टोन कोटा की पहचान है।  सरकार को आम बजट में कोटा स्टोन से जीएसटी हटानी चाहिए, ताकि इसका आयात निर्यात बढ़े और रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ सके।  <br /><strong>- हरिश प्रजापति, कोटा स्टोन इंडस्ट्रीज </strong></p>
<p><strong>पेट्रोल-डीजल पर भी लागू हो जीएसटी</strong><br />पेट्रोल-डीजल आवश्यक वस्तु की श्रेणी में आते हैं। उसके बाद भी पंजाब में इनकी रेट कम है और राजस्थान में अधिक है। वह भी थोड़ा अंतर नहीें काफी अधिक अंतर है। पेट्रोल-डीजल महंगा मिलने के कारण ही सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों की डिमांड अधिक होने लगी है। ऐसे में केन्द्र सरकार को चाहिए कि वह पेट्रोल-डीजल पर जीएसटी लागू करे। जिससे पूरे देश में इनकी एक समान रेट रहे। जीएसटी काउंसिल में यह मामला जाने के बाद भी अभी तक लागू नहीं हुआ है। सरकार को इस मामले में पहल करनी होगी। <br /><strong>- तरूमीत सिंह बेदी, अध्यक्ष पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन </strong></p>
<p><strong>कोटा में भी खुले होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट</strong><br />कोटा में ट्यूरिज्म को प्रमोट करने की जरूरत है, क्योंकि इससे स्थाई रोजगार बढ़ेगा। यहां थर्मल की अप स्ट्रीम से लेकर गरड़िया तक चंबल सफारी होती है, इतने लंबे रुट पर सफारी पूरे देश में कहीं नहीं है। राजस्थान सरकार ने इंफ्रास्ट्रेक्चर डवलप करने के लिए 5 हजार करोड़ रुपए डिक्लेयर किया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि बजट में जो घोषणाएं हों, उसे प्राथमिकता से अमल में लाया जाए। केंद्र सरकार ने होटल मैनेजमेंट के लिए रानपुर में जगह दी हुई है। लेकिन पिछले 5 सालों में यहां कोई भी गतिविधियां नहीं हुई। इंडियन इंस्ट्यिूड होटल मैनेजमेंट कॉलेज कोटा में खुले। इसके अलावा प्राइवेट सेक्टर में भी कॉलेज खोले जाएं। बूंदी में जैतसागर, नवल सागर सहित धार्मिक, आध्यात्मिक व एडवेंचर पर्यटन हैं। उसी से हम कनेक्टेड हैं। हमारे पास भी किशोर सागर, चंबल सफारी, चंबल रिवर फ्रंट, सिटी पार्क, सेवन वंडर सहित कई धार्मिक व एडवेंचर पर्यटन स्थल हैं। फिर भी हमारे यहां बूंदी के बराबर पर्यटक नहीं आते। जरूरत है तो प्रचार प्रसार व अतिथि सत्कार की। <br /><strong>- अशोक माहेश्वरी, संभागीय अध्यक्ष होटल फेडरेशन ऑफ राजस्थान</strong></p>
<p><strong>उद्योगों के लिए नियमों का हो सरलीकरण</strong><br />भारत और राजस्थान में बाहरी देशों के उद्यमी आकर उद्योग लगाना चाहते हैं लेकिन यहां नियम इतने अधिक पेचीदा हैं कि इनवेस्टर पीछे हट जाते हैं। नियमों में सरलीकरण किया जाए तो उद्योग लगेंगे। कलस्टर डवलपमेंट स्कीम बनाने की आवश्यकता है। साथ ही उद्योगों के लिए पानी और बिजली भी आवश्यक है। इनकी उपलब्धता सरल होनी चाहिए। फूड सेफ्टी एक्ट ऐसा हो जिसमें अमानक वस्तुओं को नष्ट करने की जगह उनका पशु आहार में उपयोग किया जा सके। वन नेशन वन न्यायालय  और वन नेशन वन टैक्स लागू होना चाहिए। की व्यवस्था हो। एमएसएमई की पॉलिसी काफी पुरानी हो चुकी है उसमें बदलाव किया जाना चाहिए। उद्योगों के लिए पुराना रिकॉर्ड रखने की समय सीमा तय होनी चाहिए। साथ ही सभी के लिए कलेंडर वर्ष एक ही होना चाहिए।     <br /><strong>- गोविंद राम मित्तल, संस्थापक अध्यक्ष दी एसएसआई एसोसिएशन </strong></p>
<p><strong>हेल्थ फॉर ऑल लागू हो</strong><br />कोटा में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। जिस तरह से कोटा में कोचिंग के लिए सरकार के स्तर पर नहीं निजी स्तर पर प्रयास किए गए। जिसके बढ़ने से यह शिक्षा नगरी के रूप में बना था। उसी तरह से यहां पर्यटन सर्किट बनाने के लिए भी सरकार  पर निर्भर रहने के स्थान पर पर्यटन से जुड़े व्यवसाईयों को संगठित होकर काम करना होगा। वहीं हैल्थ फोर ऑल लागू हो। साथ ही हैल्थ सेक्टर के बजट को बढ़ाने की आवश्यकता है। एआई टूल सिस्टम लागू हो। टेली मेडिसिन व व टेली रेडियोलोजी सिस्टम पर फोकस किया जाना चाहिए। मेडिकल में जांच के उपकरण बनाने के लिए देश में संसाधन नहीं है। अधिकर उपकरण बाहर से आते हैं। इस कारण से जांच महंगी होती है। देश में ही मेडिकल व जांच के उपकरण बनाने की व्यवस्था हो और बाहर से आने वाले उपकरणों पर कस्टम ड्यूटी समाप्त हो तो जांच सस्ती हो सकती है। <br /><strong>- डॉ. विजय सरदाना, पूर्व प्रचार्य, मेडिकल कॉलेज कोटा </strong></p>
<p><strong>स्टार्टअप बूस्ट करने को फंडिंग हो आसान  </strong><br />एमबीए की डिग्री के भरोसे ही स्टूडेंट्स को नौकरी नहीं मिलती। इसके लिए स्किल डवलपमेंट की जरूरत है। इंडस्ट्री की आवश्यकता के अनुसार सिलेबस डिजाइन हों और प्रोफेशनल वर्कशॉप, इंडस्ट्री विजिट  करवाई जाए ताकि विद्यार्थियों को ग्राउंड लेवल के साथ ग्लोबल एक्सप्रिंस हो सके। कई स्टूडेंट्स ऐसे हैं जो अपना स्टार्टअप करना चाहते हैं लेकिन फंडिंग नहीं होने से रोजगार की राह और कठिन हो जाती है। हम चाहते हैं सरकार आने वाले बजट में फंडिंग को लेकर नीति बनाएं। <br /><strong>- लवीना, एमबीए स्टूडेंट, कोटा विवि</strong></p>
<p><strong>बीमा किश्त पर टैक्स लगाना गलत</strong><br />सरकार ने जीएसटी लागू किया है लेकिन उसकी स्लैप में इतनी अधिक पेचीदगियां हैं कि हर किसी के लिए उन्हें पूरी तरह से समझ पाना मुश्किल है। जीएसटी की स्लैप का सरलीकरण तो किया ही जाए। साथ ही बीमा किश्त पर टैक्स लगाया जा रहा है। यह गलत है इसे समाप्त किया जाना चाहिए। वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली सरकारी दवाईयों की खर्च सीमा तय की गई है। उसे बढ़ाया जाना चाहिए। 43 बी में बदलाव होना चाहिए। साथ ही कोटा में आईआईटी व आईआईएम जैसे इंस्टीट्यूट की आवश्यकता है। केन्द्र सरकार को  बजट में इनके लिए प्रावधान करना चाहिए।     <br /><strong>- एम.एम. शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता </strong></p>
<p><strong>देशभर में लागू हो फॉरेन करेंसी होल्डिंग अकाउंट</strong><br />सरकार को इंडिया में फोरेन करेंसी होल्डिंग अकाउंट को अलाव करना चाहिए। ताकि, विदेशी करेंसी जब इंडिया में ट्रांसफर हो तो वह उसी करेंसी में ही रहे, रुपए में कन्वर्ड न हो और ट्रांजेक्शन नेट बैकिंग के द्वारा आसानी से हो जाए। अब तक हो यह रहा है, अमेरिका से जब भारत में किसी व्यापारी के खाते में डॉलर ट्रांसफर होते हैं तो वह ऑटोमेटिक रुपए में कन्वर्ड हो जाते हैं। जब उसे वापस अमेरिका में ट्रांजेक्शन करना होता है तो इंडियन करेंसी को फिर से डॉलर में कन्वर्ड करवाने के लिए बैंकों के चक्कर काटने पड़ते हैं और अनावश्यक फॉर्मल्टी से जुझना पड़ता है। साथ ही इंटरनेशनल ट्रांसजेक्शन में इंडिया को नुकसान होता है। इसलिए, सरकार को भारत में फोरेन करेंसी होल्डिंग अकाउंट को मंजूरी देना चाहिए ताकि, डॉलर बैंक खाते में डॉलर के रूप में ही रहे ताकि, जरूरत पड़ने पर डॉलर ही भेजा जा सके। <br /><strong> - नवीन कुमार चार्टड अकाउंटेंट एवं एक्सपर्ट इंटरनेशनल टैक्सेशन</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jul 2024 14:06:58 +0530</pubDate>
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                <title>यूडी टैक्स के बकायादारों पर कसा शिकंजा, एक दर्जन संपत्तियां कुर्क</title>
                                    <description><![CDATA[उपायुक्त मालवीय नगर जोन मुकेश कुमार ने बताया 6 बकायादारों से मौके पर ही 27 लाख 56 हजार 994 रुपए राशि के चैक प्राप्त किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/crackdown-on-defaulters-of-ud-tax--properties-attached/article-70979"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/336633-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नगरीय विकास कर का समय पर भुगतान नहीं करने वालों के खिलाफ अब दोनों ही नगर निगम जयपुर ग्रेटर एवं हेरिटेज ने सख्ती करना शुरू कर दिया है। शहर के विभिन्न इलाकों में एक दर्जन संपत्तियों को कुर्क किया गया। नगर निगम जयपुर ग्रेटर आयुक्त रूकमणि रियाड़ के निर्देशों पर मालवीय नगर जोन उपायुक्त मुकेश कुमार के नेतृत्व में राजस्व अधिकारी महेश चंद, कार्यवाहक राजस्व अधिकारी देवेन्द्र सिंह सागर, एआरआई राजेन्द्र शर्मा एवं राजस्व टीम ने व्यावसायिक एवं संस्थानिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करते हुए 7 परिसम्पत्तियों पर कार्रवाई की। </p>
<p>इनमें से 6 परिसम्पत्तियों ने मौके पर ही बकाया यूडी टैक्स जमा करवाया तथा इनमें से 1 परिसम्पत्ति को मौके पर ही सीज किया गया। उपायुक्त मालवीय नगर जोन मुकेश कुमार ने बताया 6 बकायादारों से मौके पर ही 27 लाख 56 हजार 994 रुपए राशि के चैक प्राप्त किए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Feb 2024 14:05:00 +0530</pubDate>
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