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                <title>Legal Setback - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से झटका : अदालत ने ठुकराई ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की अर्जी, असम सीएम की पत्नी पर की थी आपत्तिजनक टिप्पणी</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की अर्जी ठुकरा दी है। असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर विवादास्पद टिप्पणी और पासपोर्ट संबंधी आरोपों के मामले में खेड़ा को अब असम की अदालत में पेश होना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह स्थानीय अदालत की कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/shock-to-pawan-kheda-from-the-supreme-court-the-court/article-150802"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/01.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा झटका देते हुए उनकी ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की अर्जी ठुकरा दी है। यह मामला असम पुलिस द्वारा असम के मुख्यमंत्री सरमा की पत्नी की शिकायत पर दर्ज की गई एक प्राथमिकी से जुड़ा है। पवन खेड़ा का आरोप था कि सीएम सरमा की पत्नी के पास अलग-अलग देशों के कई पासपोर्ट हैं।</p>
<p>पवन खेड़ा की उस अर्जी को भी अदालत ने ठुकरा दिया जिसमें उन्होंने ट्रांजिट जमानत को अगले मंगलवार तक बढ़ाने की मांग की थी ताकि वह सोमवार को असम की अदालत में पेश हो सकें। यह घटनाक्रम शीर्ष अदालत द्वारा उनकी अग्रिम जमानत पर रोक लगाने के दो दिन बाद सामने आया है। यह अग्रिम जमानत उन्हें तेलंगाना उच्च न्यायालय ने दी थी। न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और अतुल एस चांदुरकर की पीठ ने टिप्पणी की कि यदि संबंधित अदालत काम नहीं कर रही है, तो मामले की सुनवाई के लिए अनुरोध किया जा सकता है, जिस पर मौजूदा चलन के अनुसार विचार किया जा सकता है।</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न तो वह और न ही तेलंगाना उच्च न्यायालय असम की उस अदालत के काम में कोई दखल देगा जो पवन खेड़ा के खिलाफ मामले की सुनवाई करेगी। गौरतलब है कि 5 अप्रैल को एक संवाददाता सम्मेलन में पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि सीएम सरमा के पास कई पासपोर्ट हैं और कई देशों में उनकी संपत्तियां हैं, जिनका जिक्र असम के मुख्यमंत्री ने अपने चुनावी हलफनामे में नहीं किया था। मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को खारिज कर दिया, जिसके बाद पवन खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:01:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को बड़ा झटका: ब्रिटेन हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, भारत में प्रत्यर्पण का रास्ता साफ</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिटिश हाईकोर्ट ने भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी की भारत प्रत्यर्पण रोकने वाली अपील को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत ने भारत सरकार के राजनयिक आश्वासनों को "विश्वसनीय और पर्याप्त" माना है। इस फैसले के साथ ही नीरव के भारत आने का रास्ता साफ हो गया है, क्योंकि कोर्ट ने असाधारण परिस्थितियों के अभाव में केस दोबारा खोलने से इनकार कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-blow-to-fugitive-diamond-trader-nirav-modi-uk-high/article-147990"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/nirav-modi.png" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली। ब्रिटेन के हाईकोर्ट ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को एक बड़ा झटका देते हुए उसके भारत में प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील पर फिर से सुनवाई की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार के ताजा आश्वासनों को पर्याप्त और विश्वसनीय मानते हुए यह फैसला सुनाया। लंदन स्थित रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस की खंडपीठ ने 25 मार्च 2026 को दिए फैसले में कहा कि अपील को दोबारा खोलने के लिए 'असाधारण परिस्थितियों' की आवश्यकता होती है, जो इस मामले में मौजूद नहीं हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानूनी मापदंडों के आधार पर अपील को फिर से शुरू करने का कोई ठोस कारण नहीं है। यह निर्णय लॉर्ड जस्टिस स्टुअर्ट-स्मिथ और जस्टिस जे ने सुनाया।</p>
<p>गौरतलब है कि नीरव मोदी की याचिका मुख्य रूप से 2025 के एक अन्य अदालती फैसले पर आधारित थी, जिसमें भारत में पूछताछ के दौरान खराब व्यवहार की आशंका जताई गई थी। ब्रिटिश अदालत ने सुनवाई करते कहा कि भारत सरकार ने सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच "व्यापक, विस्तृत और विश्वसनीय" आश्वासन दिए हैं कि प्रत्यर्पण के बाद नीरव मोदी से किसी भी प्रकार की पूछताछ नहीं की जाएगी। भारतीय राजनयिक आश्वासनों के अनुसार, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय या किसी अन्य भारतीय जांच एजेंसी को ब्रिटेन के अधिकारियों की पूर्व सहमति के बिना नीरव मोदी से पूछताछ करने की अनुमति नहीं होगी। अदालत ने कहा कि ये वादे राजनयिक स्तर पर बाध्यकारी हैं और यह मानने का कोई आधार नहीं है कि भारत अपनी प्रतिबद्धताओं के विपरीत कार्य करेगा।</p>
<p>जजों ने कहा कि भले ही भारत के भीतर कानून लागू करने को लेकर कुछ सैद्धांतिक सवाल बाकी हों, लेकिन दिए गए आश्वासनों का व्यावहारिक असर इतना काफी है कि इससे किसी भी तरह के प्रतिबंधित बर्ताव का कोई भी असली खतरा खत्म हो जाता है। मामले को समाप्त करते हुए, अदालत ने फैसला दिया कि अपील को दोबारा खोलना न तो ज़रूरी था और न ही सही। अदालत ने नीरव मोदी की अर्ज़ी को खारिज कर दिया है और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को पहले के आदेशों के मुताबिक आगे बढ़ाने की इजाज़त दे दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 15:48:34 +0530</pubDate>
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