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                <title>कीचड़, गंदगी और बरसाती पानी...खरीदार, किसान और हम्मालों को भारी परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[ कीचड़ और जलभराव के बीच चलता रहा कारोबार।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mud--filth--and-rainwater----immense-trouble-for-buyers--farmers--and-porters/article-162281"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(2)21.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। गुरुवार को सुबह आठ बजे का समय। शहर की सबसे बड़ी थोक फल-सब्जी मंडी धीरे-धीरे खरीदारों, किसानों और व्यापारियों से गुलजार हो रही थी। ट्रकों से उतर रही ताजा सब्जियां, फलों की ढेरियां, लगती बोलियां और माल खरीदने की भागदौड़... लेकिन इस पूरे दृश्य के बीच सबसे ज्यादा नजर आ रहा था मंडी परिसर में फैला कीचड़, गंदगी और बरसाती पानी। रातभर हुई बारिश ने मंडी की व्यवस्थाओं की हकीकत फिर उजागर कर दी। परिसर की अधिकांश हिस्सा कीचड़ में बदल चुका था। कहीं पानी भरा था तो कहीं फिसलन भरा कीचड़। खरीदार कपड़ों और जूतों को बचाते हुए रास्ता तलाश रहे थे, जबकि हम्माल सिर और कंधों पर सब्जियों की भारी बोरियां उठाकर कीचड़ से गुजरने को मजबूर थे।</p>
<p><strong>गंदगी के बीच लाखों का कारोबार</strong><br />शहर की सबसे बड़ी थोक मंडी में हर रोज लाखों रुपए का फल और सब्जी कारोबार होता है। गुरुवार को भी कारोबार नहीं रुका। किसानों से माल खरीदने के लिए व्यापारियों की भीड़ लगी रही। होटल, रेस्टोरेंट और फुटकर विक्रेता बड़ी मात्रा में खरीदारी करते रहे, लेकिन हर कदम पर अव्यवस्थाएं उनका रास्ता रोकती नजर आईं। सब्जी लेकर आए किसानों ने बताया कि गांवों से ताजा माल तो समय पर पहुंच गया, लेकिन मंडी के अंदर उसे दुकानों तक पहुंचाना सबसे मुश्किल काम रहा। कीचड़ के कारण हाथ ठेले और छोटी गाड़ियां कई जगह फंस गईं। हम्मालों को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ी और माल उतारने में सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय लगा।</p>
<p><strong>अव्यवस्थाएं रोकती रहीं रास्ता</strong><br />मंडी में खरीदारी करने आए ग्राहक रामहेत व दौलतचंद ने बताया कि विभिन्न तरह की सब्जियों की खरीदारी करने के लिए उन्हें गंदे पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ा। कई जगह फिसलन इतनी अधिक थी कि लोग संभल-संभलकर चलते दिखाई दिए। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। लोगों का कहना था कि यदि समय रहते सफाई और जल निकासी नहीं हुई तो बारिश के पूरे मौसम में यही हाल बना रहेगा। इधर व्यापारियों ने कहा कि यह कोई नई समस्या नहीं है। हर बारिश के बाद मंडी की यही तस्वीर बन जाती है। जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था नहीं होने से थोड़ी देर की बारिश भी पूरे परिसर को जलभराव में बदल देती है। इसका असर व्यापार की गति पर भी पड़ता है और ग्राहकों को भी भारी असुविधा होती है।</p>
<p>हर बारिश के बाद मंडी की यही स्थिति हो जाती है। कीचड़ और पानी भरने से ग्राहकों की संख्या प्रभावित होती है। माल उतारने और दुकानों तक पहुंचाने में भी काफी परेशानी होती है।<br /><strong>-विजय कुमार, फल-सब्जी व्यापारी</strong></p>
<p> गांवों से ताजा सब्जियां और फल लेकर आते हैं, लेकिन मंडी में प्रवेश करते ही परेशानी शुरू हो जाती है। कीचड़ में माल ढोना मुश्किल हो जाता है। कई बार माल खराब होने का भी डर बना रहता है।<br /><strong>-बिरधीचंद मीणा, किसान</strong></p>
<p>सब्जियां खरीदने के लिए मजबूरी में कीचड़ और गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए सबसे ज्यादा परेशानी होती है। मंडी जैसी महत्वपूर्ण जगह पर ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए।<br /><strong>-शम्भूदयाल बैरवा, ग्राहक</strong></p>
<p>बारिश के कारण कुछ स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन जाती है। जहां-जहां पानी भरता है, वहां निकासी का कार्य कराया जाता है। व्यापारियों किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाते हैं।<br /><strong>-विश्वजीत सिंह, सचिव, थोक फल मंडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 15:00:46 +0530</pubDate>
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                <title>स्टार्टअप स्केलिंग के लिए सिस्टम की पैचिदगियां बड़ी चुनौती, एकल विंडो की जरूरत, आइडिया, टैलेंट, फंड और मजबूत तकनीक जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ यूनिकार्न के लिए प्रबंधन, बाजार की समझ और वित्तीय अनुशासन प्रभावी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/systemic-complexities-pose-a-major-challenge-for-scaling-startups--a-single-window-system-is-needed--alongside-ideas--talent--funding--and-robust-technology/article-160693"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)86.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्टार्टअप को स्केल करने के लिए केवल फंडिंग ही पर्याप्त नहीं है। आइडिया, सही टीम, मजबूत तकनीक, प्रभावी प्रबंधन, बाजार की समझ और वित्तीय अनुशासन अपनाने पर ही स्टार्ट अप हाडौती में सफल हो सकते हैं और राष्ट्रीय स्तर पर अपना स्थान बना सकते हैं। यह बात उभर कर आई दैनिक नवज्योति की बुधवार को हुई मासिक परिचर्चा में। दैनिक नवज्योति कार्यालय में आयोजित इस टॉक शो का विषय था हाडौती में स्टार्टअप स्केलअप होने के लिए किस तरह की चुनौतियां हैं( चैलेंजज इन स्केलिंगअप स्टार्ट अप इन हाडौती) । इस टॉक शो में इंडस्ट्री,व्यापार,नये और पुराने स्टार्टअप के फाउंडर,कोटा व्यापार संघ से जुडे सदस्य,एसएसआई के मैंबर, आई स्टार्ट के मेंटोर,चार्टर एकाउंटेंट, कंपनी सैकेट्री, सरकारी और प्राइवेट एजेसियों से जुड़े लोगों  ने हिस्सा लिया। प्रस्तुत हैं टॉक शो के उसके अंश-</p>
<p><strong>यह हैं स्टार्टअप स्केलअप के चैलेंज</strong><br />- स्टार्टअप के विस्तार के लिए पूंजी की कमी<br />- टैलेंट और कर्मचारियों की कमी<br />-राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना आसान नहीं होता<br />- तकनीकी प्रणाली मजबूत नहीं होने पर सेवा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती <br />-मजबूत प्रबंधन टीम बनाने की आवश्यकता <br /> -नकदी प्रवाह का प्रबंधन<br /> -स्ट्रेटीजी तैयार हो, बाजार में बड़ी कंपनियां भी प्रवेश कर सकती हैं<br />- उत्पाद या सेवा की गुणवत्ता मेंग्राहक संतुष्टि बनाए रखना बड़ी चुनौती<br />- टैक्स, डेटा सुरक्षा, श्रम कानून, लाइसेंस और अन्य सरकारी नियमों का पालन बड़ी चुनौती<br />-सही समय पर, नियंत्रित और टिकाऊ विस्तार</p>
<p><strong>न्यूक्लियर पावर अपॉर्च्युनिटी</strong><br />हाड़ौती में न्यूक्लियर पावर की प्रचुरता है। इससे संबंधित स्टार्टअप पर फोकस कर उसे शुरू किया जाए तो उसका अधिकतम लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इस क्षेत्र में कोटा व हाड़ौती के स्टार्टअप पूरे देश में अपनी पहचान बना सकते हैं और यहां से विकसित राजस्थान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। लेकिन अधिकतर लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं है। साथ ही स्टार्टअप शुरू करने व इन्हें प्रोत्साहित करने के सरकारी नियम तो बने हुए हैं उसमें कई तरह की छूट का प्रावधान भी किया गया है लेकिन उनका वास्तविक रूप में लाभ नहीं मिल पा रहा है। यदि शत प्रतिशत लाभ मिलने लगे तो कोई कारण नहीं हैं कि स्टार्टअप स्केलअप नहीं कर सकें। साथ ही युवाओं को रोजगार व उनकी आय के साधन भी मिलने लगेंगे।<br /><strong>-गोविंद राम मित्तल, फाउंडर प्रेसिडेंट द एसएसआई एसोसिएशन</strong></p>
<p><strong>पूरी रिसर्च से शुरू करें स्टार्टअप</strong><br />स्टार्टअप शुरू करना किसी बिजनेस से कम नहीं है। इसके लिए पहले पूरी तैयारी करने की जरूरत होती है। किसी भी काम के बारे में पूरी जानकारी करने के बाद ही शुरू करने पर उसमें सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है। हालांकि सरकार की ओर से स्टार्टअप को प्रमोट करने के लिए नियम व नीतियां तो अच्छी बनाई गई हैं। लेकिन सरकारी सिस्टम में कई कमियां हैं जिनके कारण युवा चाहकर भी अपना स्टार्टअप शुरू करने के बाद उसे आगे नहीं बढ़ा पाते हैं। चीन में उद्योग बढने का कारण वहां सुुविधाएं अधिक है। जबकि तुलनात्मक रूप से भारत में उद्योग, व्यापार या स्टार्टअप को शुरू करने व आगे बढ़ाने में सुविधाएं बाधक बन जाती हैं।<br /><strong>-अशोक माहेश्वरी ,प्रेसिडंट होटल फेडरेशन आॅफ राजस्थान कोटा डिवीजन</strong></p>
<p><strong>स्टार्टअप की स्केल प्रोडक्ट पर निर्भर</strong><br />स्टार्टअप को शुरू हुए दस साल हो गए हैं। देशभर में अब तक दो लाख स्टार्टअप हो चुके हैं। हाड़ौती में 560 व कोटा में 490 स्टार्टअप हैं। नवम्बर 2025 के एक ही महीने में एक साथ 150 स्टार्टअप शुरू हुए थे। लेकिन बहुत कम स्टार्टअप ऐसे है जो व्यापक स्तर पर अपनी पहचान बना सके हैं। राजस्थान के दो ही स्टार्टअप देशभर में अपनी पहचान बना पाए हैं। स्टार्टअप स्केल की समस्या स्थानीय स्तर पर ही नहीं है पूरे देश की समस्या है। स्टार्टअप स्केल प्रोडक्ट पर निर्भर करता है। प्रोडक्ट की डिमांड अधिक होगी तो उसका मार्केट भी उतना ही बड़ा होगा। स्टार्टअप शुरू करने से पहले उससे संबंधित सभी पहलुओं की तैयारी करनी पड़ती है तभी सफलता संभव है।<br /><strong>-कोस्तुभ भट्टाचार्य, मेंटोर स्टार्टअप कंसलटेंट आई स्टार्ट राजस्थान</strong></p>
<p><strong>स्टार्टअप स्केलअपन में फंड मैनेजमेंट बड़ी समस्या</strong><br />स्टार्टअप का मतलब ही नए सिरे से किसी व्यवसाय को शुरू करना है। एक बार हिम्मत कर युवा स्टार्टअप शुरू कर भी देते हैं लेकिन उसे आगे बढ़ाने के लिए फंड की आवश्यकता होती है। जबकि फंडिंग ही नहीं होने से युवा अपने स्टार्टअप को आगे नहीं बढ़ा पाते। हालांकि स्टार्टअप को आगे बढ़ाने के लिए कनेक् शन भी होने चाहिए। उन्हें भी फंडिंग व कनेक् शन की समस्या का सामना करना पड़ा था लेकिन देर से ही सही समाधान भी मिला। अब वे गुजरात, मध्य प्रदेश व दिल्ली समेत कई जगह पर अपना काम कर रहे हैं।<br /><strong>-शुभम शर्मा फाउंडर सीबीएस प्लीवर स्टार्टअप</strong></p>
<p><strong>मार्केट की स्वीकार्यता बड़ी चुनौती</strong><br />कोई भी स्टार्टअप शुरू करना तो आसान है। लेकिन उसकी मार्केट में एक्सेबिलिटी भी होनी चाहिए। युवाओं द्वारा जो प्रोडक्ट तैयार किया जा रहा है उसकी मार्केट में डिमांड होगी तो वह ग्रो करेगा वरना परेशानी होती है। हालत यह है कि कई स्टार्टअप इसलिए भी आगे नहीं बढ़ पाते कि उनके द्वारा जो प्रोडक्ट तैयार किया जाता है उसका प्रमोशन नहीं होने से मार्केट नहीं मिल पाता। आरएनडी भी बड़ी समस्या रहती है। मार्केट के साथ उसका प्रमोशन उतना ही जरूरी है।<br /><strong>-सिद्धार्थ गुप्ता ,ट्रेजरार डिवी. चैम्बर आॅफ कामर्स</strong></p>
<p><strong>बेस्ट टैलेंट की कमी</strong><br />कोटा में स्टार्टअप तो कई शुरू हो रहे हैं। लेकिन ऐसे स्टार्टअप जो देश में अपनी पहचान बनाएं ऐसा स्टार्टअप शुरू करने के लिए यहां तकनीकी विशेषज्ञ या इंजीनियर ही नहीं है। टेलेंट व काम करने वालों की कमी है। लोग स्टार्टअप शुरू तो कर देते हैं लेकिन उसे आगे बढ़ाने के लिए काम की गम्भीरता व जुनून भी होना चाहिए। बाहर से तकनीकी विशेषज्ञ मंगवाने पर उनकी कीमत अधिक चुकानी पड़ती है। साथ ही महिलाओं को स्टार्टअप शुरू करने या उनके प्रोडक्ट को मार्केट में पहचान दिलाने में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पडता है।<br /><strong>-नेहा गुप्ता फाउंडर गेन बुक स्टार्टअप</strong></p>
<p><strong>माकेर्टिंग और प्रमोशन के साथ रिसर्च की जरूरत</strong><br />स्टार्टअप शुरू करने से पहले जो भी प्रोडक्ट तैयार किया जाए उसकी पूरी जानकारी होनी चाहिए। प्रोडक्ट तैयार करने व उसकी माकेर्टिंग और प्रमोशन के लिए फंड की आवश्यकता होती है। लेकिन स्टार्टअप के सामने सबसे बड़ी समस्या ही फंड की रहती है। साथ ही जिस स्तर का स्टार्टअप होना चाहिए उसमें काम करने के लिए उस स्तर का टेलेंट नहीं मिल पाता है। जिससे स्टार्टअप एक सीमित दायरे तक ही रह जाते हैं। कोटा व हाड़ौती के स्टार्टअप को आगे बढ़ाने की जरूरत है। जिससे युवाओं को रोजगार के साथ ही उनके प्रोडक्ट की डिमांड भी बढ़े।<br /><strong>-सीए सुधांशु उपाध्याय सैकेट्री आईसीएआई</strong></p>
<p><strong>कई सरकारी औपचारिकताएं बाधक बन रही</strong><br />जिस तरह से कई विभागों में सीएसआर का फंड दिया जाता है। उसी तरह का फंड यदि स्टार्टअप को दिया जाए तो उन्हें आर्थिक सम्बल मिलेगा। स्टार्टअप को फंडिंग के लिए एक सिस्टम बनाने की आवश्यकता है। वहीं दूसरी तरफ स्टार्टअप शुरू करना तो आसान है लेकिन उसके ग्रो करने में कई सरकारी औपचारिकताएं बाधक बनती हैं। उन सिस्टम को सुधारने की जरूरत है। स्टार्टअप में प्रोडक्ट उत्पादन पर फोकस किया जाएगा तो अधिक लोगों को रोजगार भी दिया जा सकेगा।<br /><strong>-अमित सिंघल, डायरेक्टर इंडेक्सल इंजीनियरिंग</strong></p>
<p><strong>नई तकनीक पर आधारित स्टार्टअप ग्रो तेजी से करेंगे</strong><br />समय के साथ बदलाव बहुत जरूरी है। फिर चाहे व कोई प्रोडक्ट हो या शिक्षा का क्षेत्र। शिक्षा के क्षेत्र में भी नए-नए स्टार्टअप शुरू किए जा सकते हैं। लेकिन उनमें मेन पावर के साथ ही एआई का अधिक उपयोग किया जाएगा तो उनकी डिमांड व उपयोगिता अधिक होगी। एआई आधारित प्रोडक्ट की डिमांड अधिक होने से उस काम को करने वाले अधिक युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। नई तकनीक पर आधारित स्टार्टअप की कोटा व हाड़ौती में ही नहीं पूरे देश में डिमांड रहेगी तो स्टार्टअप ग्रो भी तेजी से करेंगे।<br /><strong>-सुदर्शन माथुर ,डायरेक्टर एलबीएस एजुकेशन ग्रुप</strong></p>
<p><strong>सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया जाए </strong><br />स्टार्टअप को प्रमोट करने के लिए नियम व नीतियां तो बनी हुई हैं लेकिन सिस्टम में कई कमियां हैं। माइंड सेट ही नहीं है। जिनके कारण स्टार्टअप शुरू करने वालों को कई परेशाननियों का सामना करना पड़ता है। सरकारी सिस्टम में सुधार करने की जरूरत है। साथ ही सिंगल विंडो सिस्टम को लागू किया जाए तो युवाओं को सुविधा होगी और स्टार्टअप अधिक सुगमता से काम कर पाएंगे।<br /><strong>-समीर सूद, सैकेट्री एसएसआई एसोसिएशन</strong></p>
<p><strong>स्टार्टअप पर वर्तमान हालात की मार</strong><br />देश दुनिया में जो हालात हैं उससे स्टार्टअप भी अछूते नहीं हैं। इन पर असर पड़ रहा है। मार्केट ग्रोथ में 40 फीसदी कमी आई है। मैने नोएड़ा में वर्क किया पर वहां पर काफी कर्मचारी कोटा सहित अन्य जगहों के कर्मचारी मेरे पास काम करते थे। जिसमे कुछ तो इंटर करने के लिए आते थे तो कुछ अपना टैलेंट एक्सप्लोर करने के लिए आते थे।मेरी मैंटलिटी हमेशा से रही है कि मैं कोटा में ही रहकर काम करूं, इसके लिए मेरे प्रयास हमेशा ही रहत ेथे कि अधिक से अधिक पैसा बाहर से लाने की कोशिश करता हूं। अभी युद्ध से सहित अन्य विभिन्न कारणों से स्टार्टअप फील्ड और अन्य फील्ड में करीब 40 प्रतिशत गिरावट र्दज की गई हैं। इसके चलते हमने बड़ी-बड़ी कंसल्टेंसी कंपनियों को अभी रूक रखा हैं।<br /><strong>-सिद्धार्थ वशिष्ठ ,फाउंडर रिपोर्टस एन्ड इनसाइज बिजनस रिसर्चर </strong></p>
<p><strong>पानी बिजली कोचिंग बड़ी संभावनाएं </strong><br />कोटा में भारी संभावना है। हाड़ौती में पानी, बिजली सहित अन्य व्यवस्था यहां पर हैं। यहां तीन लाख बच्चे आते हैं। इसे टैलेंट में बदलना होगा। यह एक  अपॉर्चुनिटी है। कुछ समय पहले हमारी एसोसिएशन ने हाड़ौती में रोजगार और बिजनेस को लेकर क्या संभावना हैं। साथ ही हाड़ौती के लिए क्या कुछ कर सकते हैंं पर गंभीर चर्चा की। रोजगार बढ़े और अधिक से अधिक से लोग लाभांवित हो इसके लिए क्या करना चाहिए। पैरेंटस यहां पर केवल मेडिकल की शिक्षा प्राप्त करने के लिए भेज रहे हैं। पर हमे कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे बच्चा यहां पर मेडिकल के साथ ही डिजिटल शिक्षा, स्किल डवलपमेंट सहित अन्य फील्ड में भी वहां शिक्षा प्राप्त कर सके। क्यो कि अभी पैरेंटस शहर में बच्चे को डर-डर के यहां पर भेज रहा हैं।<br /><strong>-राजेश गुप्ता , प्रेसिडंट डिवीजनल चैम्बर आॅफ कामर्स</strong></p>
<p><strong>मार्केट और सेल में खुद उतरना पड़ता है </strong><br />मैंने बिजनेस की शुरूआत पापड़ व मंगोड़ी बनाने सहित अन्य कार्य से की जिसमें घर-घर जाकर पापड़ बेचे। फिर शुरूआत में मेरे साथ एक महिला जुड़ी इस तरीके से मेरे साथ महिलाएं जुड़ती गई। अब करीब मेरे पास 80 महिलाएं काम करती हैं। शुरूआत में बिजनेस में लोन लेने के लिए भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ग्राहक भी प्रोडक्ट नहीं खरीदते थे उनको समझना पड़ता था। तब जाकर प्रोडक्ट कि सेल बढ़ी, उसके बाद मैंने लड्डू गोपाल कि पोशाक बनाना शुरू तो उसके बारे में इधर-उधर से जानकारी जुटाई और इस कार्य को आगे बढ़ाया। बहुत सी बार वर्कस को सुविधाएं देने के बाद भी वहां हमारे साथ कार्य नहीं करना चाहता है। तो इस दौरान हमको विभिन्न परेशानी का सामना करना पड़ता हैं।<br /><strong>- भावना करमचंदानी .बिजनस वुमन</strong></p>
<p><strong>सीएसआर फंडिंग का एक हिस्सा स्टार्टअप्स के लिए भी निर्धारित हो</strong><br />स्टार्टअप के लिए इकोसिस्टम भी तेजी से उभर रहा है। सरकार और विभिन्न संस्थाओं के प्रयासों से नवाचार को बढ़ावा मिला है। स्टार्टअप्स को बनाए रखने के लिए बेहतर प्रशिक्षण और उद्योग का एक्सपोजर देना होगा। सीएसआर फंडिंग का एक हिस्सा स्टार्टअप्स के लिए भी निर्धारित होना चाहिए, जिससे उन्हें शुरूआती स्तर पर अवसर मिल सके। सरकार को, उद्योग, निवेशकों, शिक्षण संस्थानों और स्टार्टअप्स से जोड़ने वाला एकीकृत डिजिटल पोर्टल विकसित किया जाना चाहिए, जहाँ अपनी समस्या साझा करें और स्टार्टअप्स के लिए समाधान प्रस्तुत कर सकें।<br /><strong>- आयुष त्यागी, मेंटोर आई स्टार्टअप राजस्थान</strong></p>
<p><strong>फंड राइजर्स के लिए प्रयास ज़रूरी<br /></strong>मैंने पिछले सालों में करीब तीस हजार लोगों को रोजगार दिया साथ ही कई कंपनियों के साथ हम कार्य करते हैं। इसके तहत एमएसएमई संस्था प्राय सरकारी योजनाओं की विभिन्न सूचनाएं सहित अन्य सूचनाएं उद्योगों को उपलब्ध करती हैं। साथ ही विभिन्न सरकारी कार्यालय और उद्योगों केबीच संस्था सेतु का काम करती हैं। साथ ही हमारा प्रयास है कि 18-25 वर्ष तक का बच्चा कोटा शहर में रहकर की कार्य करें। साथ ही एमएसएमई के माध्यम से शॉर्ट टैंक से बातचीत करके शहर के उद्योगों को शॉर्ट टैंक से रिवॉर्ड लेकर आ रहे हैं।<strong><br />-दीपक मेहता , एसएसई एसोसिएशन अध्यक्ष</strong></p>
<p><strong>फंड के लिए विश्वास हासिल करना चुनौती<br /></strong> देखा जाएं तो स्टार्टअप में बेसिकली सबसे ज्यादा समस्या फंडिग की आती है क्योकि एंट्ररप्रेन्योर अभी बिजनेस बिल्ड करना चाहते हैं जिसको लेकर उनको परेशानी का सामना करना पड़ता हैं।साथ ही जो पुरानी कंपनियां है फंडिग के लिए उनको प्राथमिकता मिलती हैं। जो पुराने बिजनेस करने वाले है वहां अपना कार्य का तरीका नहीं बदल पा रहे हैं। स्टार्टअप को फंड्स के लिए जल्द कोई तैयार नहीं होता। इस क्षेत्र में आप उतर रहे हैं तो मार्केट रिसर्च बहुत जरूरी है। टैलेंट और लिक्विट केपिटल पर भी ध्यान देना पड़ेगा।<strong><br />-दीक्षा दुग्गड़,कंपनी सचिव आईसीएसआई कोटा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 15:29:50 +0530</pubDate>
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                <title>हाडौती के टैक्सटाइल, इंजीनियरिंग और कृषि उत्पादों के निर्यात को मिलेगा बढ़ावा</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिटेन से जुड़ेगा कोटा का कारोबार, बढ़ेंगे अवसर व रोजगार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/exports-of-hadauti%E2%80%99s-textile--engineering--and-agricultural-products-to-get-a-boost/article-160020"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)62.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । भारत और ब्रिटेन के बीच लागू होने जा रहे मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट-एफटीए) को देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ राजस्थान के कोटा संभाग के उद्योगों और कृषि क्षेत्र के लिए भी बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस समझौते के तहत ब्रिटेन भारतीय उत्पादों पर लगने वाले अधिकांश आयात शुल्क को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करेगा, जिससे भारतीय उत्पाद ब्रिटेन के बाजार में पहले की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे। इसका सीधा लाभ कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ जिले के निर्यातकों और उद्यमियों को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कोटा संभाग में टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग उत्पाद, स्टोन, मसाले, धनिया, सोयाबीन आधारित उत्पाद, लहसुन, खाद्य प्रसंस्करण और एमएसएमई इकाइयों का मजबूत आधार है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन में भारतीय उत्पादों के लिए शुल्क कम होने से इन क्षेत्रों के उत्पादों की मांग बढ़ सकती है। इससे स्थानीय उद्योगों को नए आॅर्डर मिलने के साथ उत्पादन और निवेश में भी वृद्धि होगी।</p>
<p><strong>विदेश में महकेगी यहां के मसालों की खुशबू</strong><br />कोटा देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में शामिल है। यहां इंस्ट्रूमेंटेशन, इंजीनियरिंग उपकरण, केबल, विद्युत उपकरण, मशीन पार्ट्स और विभिन्न मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां कार्यरत हैं। एफटीए के बाद इन उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार तक अपेक्षाकृत कम लागत में पहुंचाने का अवसर मिलेगा। वहीं बारां और झालावाड़ जैसे कृषि प्रधान जिलों में उत्पादित धनिया, मसाले, सोयाबीन और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। उद्योग जगत का मानना है कि यह समझौता केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को भी वैश्विक बाजार से जुड़ने का अवसर देगा। निर्यात बढ़ने से उत्पादन क्षमता का विस्तार होगा और इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इस समझौते से परिवहन, पैकेजिंग, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।</p>
<p><strong>अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोटा संभाग की बनेगी पहचान</strong><br />आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता कोटा संभाग के उद्योग, कृषि और एमएसएमई क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोल सकता है। यदि स्थानीय उद्योग आधुनिक तकनीक, गुणवत्ता सुधार और नियार्तोन्मुख उत्पादन पर ध्यान दें तो आने वाले समय में कोटा संभाग अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ब्रिटेन जैसे विकसित बाजार में टिके रहने के लिए स्थानीय उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों, आधुनिक पैकेजिंग, प्रमाणन और समयबद्ध आपूर्ति पर विशेष ध्यान देना होगा। यदि उद्योग समय रहते अपनी उत्पादन प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार करते हैं तो आने वाले वर्षों में कोटा संभाग का निर्यात उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकता है।</p>
<p><strong>आम लोगों को क्या फायदा होगा?</strong><br />-ब्रिटिश लग्जरी कारें होंगी सस्ती: रॉल्स-रॉयस, लैंड रोवर, जगुआर जैसी ब्रिटिश कारों पर आयात शुल्क चरणबद्ध तरीके से कम होने से इनकी कीमतों में आने वाले वर्षों में कमी आ सकती है।<br />-रोजगार के अवसर बढ़ेंगे: कोटा संभाग में इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, कृषि प्रसंस्करण और एमएसएमई इकाइयों को नए निर्यात आॅर्डर मिलने पर उत्पादन बढ़ेगा, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।<br />-किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना: कोटा, बारां और झालावाड़ के धनिया, सोयाबीन, मसाले और अन्य कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ने पर किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिलने की उम्मीद रहेगी।<br />-स्थानीय कारोबार को मिलेगा बढ़ावा: निर्यात बढ़ने से परिवहन, पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स और छोटे व्यापारियों के काम में भी तेजी आएगी।<br />-विदेश में नौकरी और प्रोफेशनल्स को फायदा: भारतीय इंजीनियर, आईटी विशेषज्ञ, चार्टर्ड अकाउंटेंट, आर्किटेक्ट और अन्य पेशेवरों के लिए ब्रिटेन में काम करने के अवसर बढ़ सकते हैं। इससे कोटा जैसे शिक्षा केंद्र के विद्यार्थियों को भी भविष्य में नए अवसर मिलेंगे।<br />-कुछ आयातित उत्पाद सस्ते हो सकते हैं: ब्रिटेन से आने वाले कुछ कॉस्मेटिक्स, चॉकलेट, प्रीमियम फूड आइटम, मेडिकल उपकरण और अन्य उत्पादों की कीमतों में भी समय के साथ कमी आ सकती है।</p>
<p>भारत-ब्रिटेन एफटीए निर्यातकों के लिए बड़ा अवसर है। कोटा संभाग के व्यापार जगत के लिए यह समझौता काफी लाभकारी साबित हो सकता है। यहां की इंजीनियरिंग, एमएसएमई इकाइयों सहित अन्य उद्योगों को ब्रिटेन में नए बाजार मिल सकेंगे।<br /><strong>-अशोक माहेश्वरी, महासचिव, कोटा व्यापार महासंघ</strong></p>
<p>ब्रिटेन में शुल्क कम होने से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। इससे कोटा के उद्योगों को नए आॅर्डर मिलने और उत्पादन बढ़ाने का अवसर मिलेगा। यहां की सामग्री को निर्यात में छूट मिलने से मंद हो रहे कई उद्योग को संजीवनी मिल सकती है।<br /><strong>-भूपेन्द्र सोनी, उद्योगपति व व्यापारी</strong></p>
<p>कोटा, झालावाड़ और बारां क्षेत्र में मसाले, धनिया और सोयाबीन का अच्छा उत्पादन होता है। यदि इन उत्पादों की प्रोसेसिंग और गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए तो ब्रिटेन सहित यूरोपीय बाजार में अच्छी मांग मिल सकती है।<br /><strong>-आर.के. शर्मा, कृषि विशेषज्ञ</strong></p>
<p>एफटीए का वास्तविक लाभ उन्हीं उद्योगों को मिलेगा जो अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता, पैकेजिंग और प्रमाणन के मानकों का पालन करेंगे। यह समझौता निर्यातकों के लिए दीर्घकालिक अवसर लेकर आया है।<br /><strong>-रोहित जैन, सीए व निर्यात सलाहकार</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:00:24 +0530</pubDate>
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                <title>अतिक्रमण की भरमार, जाम फल-सब्जी कारोबार</title>
                                    <description><![CDATA[थोक मंडी के गेटों पर ठेले वालों ने जमा रखा कब्जा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rampant-encroachment-disrupts-fruit-and-vegetable-trade/article-158379"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/12200-x-600-px)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में एरोड्राम के पास स्थित थोक फल सब्जीमंडी में अतिक्रमण के कारण कारोबार प्रभावित हो रहा है। मंडी के सभी गेटों के बाहर सब्जी और फल विक्रेताओं ने दुकानें और ठेले लगाकर अतिक्रमण कर रखा है। इससे मंडी में रोजाना जाम की स्थिति बनने लगी है। फल और सब्जी लेकर आने वाले बड़े वाहन अतिक्रमण के कारण गेट पर फंस जाते हैं। गेट के बाहर मौजूद अतिक्रमी अपने ठेलों को नहीं हटाते हैं। इससे कई बार विवाद की स्थिति तक हो जाती है। ऐसे में मंडी के गार्डो को आकर जाम हटवाने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। इस सम्बंध में मंडी प्रशासन ने कई बार समझाइश कर अतिक्रमियों को हटाने का प्रयास किया, लेकिन सख्ती नहीं होने से वह फिर से डेरा जमा लेते हैं। इससे मंडी के आढतियों और ग्राहकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>सुबह के समय ज्यादा होती है दिक्कत</strong><br />मंडी के व्यापारियों के अनुसार मंडी में महाराष्टÑ, गुजरात, मध्यप्रदेश, पुणे, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, बैंगलुरु से विभिन्न तरह के फल बिक्री के लिए आते हैं। इसके अलावा कोटा सहित हाड़ौती के जिलों से काफी मात्रा में सब्जियों की आवक होती है। मंडी के गेट के बाहर बेतरतीब खड़े फलों और सब्जी के ठेलों के कारण माल से भरे ट्रक, मिनी ट्रक और अन्य वाहन प्रवेश नहीं कर पाते हैं और दिनभर में कई बार जाम लगा रहता है। इससे एरोड्राम चौराहे के आसपास व डीसीएम रोड पर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। बाहरी राज्यों से फलों और सब्जियों से भरे वाहन देर रात में आने शुरू हो जाते हैं। इसके बाद सुबह फल और सब्जी बेचने का काम होता है। इसी दौरान ठेलों के अतिक्रमण के कारण कारोबार ठप सा हो जाता है। ग्राहकों को भी काफी परेशानी होती है।</p>
<p><strong>जाम में उलझ जाता है किसानों का लहसुन</strong><br />शहर में भामाशाहमंडी के अलावा थोक फलसब्जी मंडी में भी लहसुन की खरीद-फरोख्त की जाती है। ऐसे में यहां पर भी काफी संख्या में किसान लहसुन बेचने के लिए आते हैं। वर्तमान में यहां पर पांच से छह हजार कट्टे लहसुन की आवक हो रही है। किसान अपने माल को बड़े वाहनों में लेकर आते हैं। इस दौरान मंडी गेट के बाहर ठेलों के कारण जाम लगने से किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कई बार लहसुन की नीलामी में भी देरी हो जाती है। किसानों का कहना है कि मंडी गेट पर अतिक्रमण से आवागमन में दिक्कत आती है। इसका समाधान होना चाहिए।</p>
<p><strong>पहले हटा चुके अतिक्रमण, फिर आ जमे</strong><br />थोक मंडी प्रशासन की ओर से पूर्व में विभिन्न विभागों के सहयोग से मंडी के गेटों के बाहर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी। इस दौरान पुलिस जाब्ते व कर्र्मचारियों ने मंडी के गेटों के बाहर खड़े फल-सब्जी के बेतरतीब ठेले वालों को यहां से खदेड़ दिया गया था। कुछ दिनों फल और सब्जी वालों ने फिर से गेटों के बाहर कब्जा जमा लिया। यहां पर अतिक्रमण का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। जिससे फिर से भारी वाहनों को मंडी में प्रवेश करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंडी के आढतियों ने यहां पर अतिक्रमण के खिलाफ नियमित कार्रवाई करने की मांग की है।</p>
<p>थोक मंडी के बाहर अवैध रूप से फल और सब्जी वाले अपने ठेले लेकर कारोबार करने लगते हैं। इससे बाहर से माल लेकर आने वाले वाहन गेट पर फंस जाते हैं। मंडी में माल से भरे वाहनों को प्रवेश कराने में आढ़तियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>-गुलशन कुमार, मंडी आढ़तिया</strong></p>
<p>थोक फल सब्जीमंडी के गेट पर फल और सब्जी विक्रेता ठेले लेकर खड़े रहते हैं। पूर्व में अन्य विभागों के सहयोग से यहां से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी। कई बार समझाइश से भी इन्हे हटाया जाता है। अब फिर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>-    विश्वजीत सिंह, सचिव, थोक फल सब्जीमंडी कोटा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 15:00:46 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: 23 नई सेवाएं समयबद्ध कानून में शामिल, लाइसेंस-एनओसी तय समय सीमा में मिलेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली सरकार ने 'राइट टू टाइम बाउंड डिलीवरी एक्ट' के तहत 23 नई सेवाओं को शामिल किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, अब फैक्टरी स्वीकृति, दुकान पंजीकरण, बार लाइसेंस और एनओसी जैसी अनुमतियां 1 से 60 दिनों की निश्चित समय सीमा में मिलेंगी। इस कदम से भ्रष्टाचार रुकेगा और व्यापार करना बेहद आसान होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-decision-of-delhi-government-23-new-services-included-in/article-157765"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rekha-guprta.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने सुशासन, पारदर्शिता और जनसुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 23 नयी सेवाओं को दिल्ली राइट ऑफ सिटिजन टू टाइम बाउंड डिलीवरी ऑफ सर्विसेज एक्ट, 2011 के तहत समयबद्ध सेवा वितरण व्यवस्था में शामिल किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को कहा कि इस निर्णय से आम नागरिकों के साथ-साथ उद्योग, व्यापार, होटल, पर्यटन, निर्माण और सेवा क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों तथा आम जन को सीधे लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य नागरिकों और कारोबारियों को सरकारी सेवाएं निर्धारित समय सीमा में उपलब्ध कराना है। अब विभिन्न विभागों से मिलने वाली महत्वपूर्ण अनुमतियां, लाइसेंस, पंजीकरण और अनापत्ति प्रमाणपत्र तय समय सीमा के भीतर जारी किये जायेंगे। इससे अनावश्यक देरी और कार्यालयों के चक्कर लगाने की समस्या में कमी आयेगी।</p>
<p>सरकार देश की राजधानी दिल्ली को निवेश, व्यापार और रोजगार के लिए अधिक अनुकूल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। समयबद्ध सेवा वितरण व्यवस्था न केवल नागरिकों का अधिकार सुनिश्चित करेगी बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही को भी मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने के लिए लगातार सुधार किये गये हैं। केंद्र सरकार की इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए दिल्ली सरकार भी ऐसी व्यवस्थाएं विकसित कर रही है जिनसे उद्योगों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों, स्टार्टअप्स और सेवा क्षेत्र को अधिक सुविधाजनक वातावरण मिल सके।</p>
<p>अब नयी व्यवस्था के अंतर्गत श्रम विभाग में फैक्टरी योजना स्वीकृति 15 दिनों में और दुकान एवं स्थापना अधिनियम के तहत पंजीकरण केवल एक दिन में किया जायेगा। दिल्ली जल बोर्ड द्वारा सीवरेज कनेक्शन 15 दिनों में उपलब्ध कराया जायेगा, जबकि दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम द्वारा फिल्म शूटिंग की अनुमति 15 दिनों के भीतर प्रदान की जायेगी। इसके अलावा ऊर्जा विभाग के अंतर्गत बिजली मीटर से संबंधित आवेदन और कनेक्शन समझौते की प्रक्रिया 60 दिनों में पूरी की जायेगी। विधिक माप विज्ञान के अंतर्गत दुकानों, उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में उपयोग होने वाले तौल-माप उपकरणों के पंजीकरण का कार्य 45 दिनों में पूरा किया जायेगा। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) द्वारा बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के अंतर्गत बैटरी अपशिष्ट के संग्रहण, भंडारण, परिवहन एवं पुनर्चक्रण से संबंधित गतिविधियों के लिए आवश्यक प्राधिकरण-पत्र (ऑथराइजेशन) 15 दिनों में जारी किया जायेगा।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने बताया कि नगर निगम से संबंधित सेवाओं में वाटर स्पोर्ट्स एवं एडवेंचर स्पोर्ट्स संचालकों के पंजीकरण तथा मनोरंजन पार्क संचालन की सहमति 60 दिनों में, खाद्य व्यवसाय के लिए राज्य लाइसेंस के लिए स्थानीय निकाय का एनओसी 60 दिनों में, होटल पंजीकरण या संचालन अनुमति 60 दिनों में तथा बूचड़खाना लाइसेंस 60 दिनों में जारी किया जायेगा। मोबाइल टावर स्थापना की अनुमति 30 दिनों में तथा निर्माण सामग्री भंडारण की स्वीकृति केवल एक दिन में उपलब्ध करायी जायेगी। कृषि विभाग द्वारा कीटनाशक नियंत्रण संचालन लाइसेंस, बिक्री पंजीकरण और बीज लाइसेंस की प्रक्रियाएं 21-21 दिनों में पूरी की जायेंगी।</p>
<p>आबकारी विभाग के अंतर्गत बार लाइसेंस 30 दिनों में, आईएमएफएल श्रेणी के ब्रैंड/लेबल पंजीकरण 42 दिनों में और एफएल श्रेणी के ब्रांड/लेबल पंजीकरण 42 दिनों में किये जायेंगे। उन्होंने जानकारी दी कि वन एवं वन्यजीव विभाग द्वारा दिल्ली प्रिजर्वेशन ऑफ ट्रीज एक्ट के तहत वृक्ष कटान संबंधी अनुमति के आवेदनों पर 60 दिनों के भीतर निर्णय लिया जायेगा। लोक निर्माण विभाग द्वारा रोड कटिंग और उससे जुड़े अन्य कार्यों से संबंधित अनुमति 45 दिनों में प्रदान की जायेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 19:00:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ट्रांसपोर्ट कारोबार पर मंडराया संकट: गुरुग्राम समेत दिल्ली-एनसीआर में ट्रांसपोर्टरों की तीन दिवसीय हड़ताल शुरू,  जानिए क्या खुला और क्या बंद?</title>
                                    <description><![CDATA[ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर दिल्ली-एनसीआर में तीन दिवसीय हड़ताल शुरू हो गई है। ग्रीन टैक्स और नए प्रतिबंधों के विरोध में 21 से 23 मई तक माल ढुलाई पूरी तरह बंद रहेगी। गुरुग्राम के औद्योगिक हब में इसके चलते करोड़ों का कारोबार और आपूर्ति शृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/crisis-looms-on-transport-business-three-day-strike-of-transporters-begins/article-154575"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/strike.png" alt=""></a><br /><p>गुरुग्राम। हरियाणा के गुरुग्राम समेत पूरे दिल्ली-एनसीआर में ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर गुरुवार से तीन दिवसीय हड़ताल शुरू हुई। हड़ताल का सीधा असर गुरुग्राम में देखने को मिल रहा है। पहले ही दिन गुरुग्राम से दिल्ली जाने वाले ट्रकों और कॉमर्शियल वाहनों की संख्या में भारी कमी दर्ज की गयी, जिससे औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित हो गयी हैं। ट्रांसपोर्ट संघों ने स्पष्ट किया है कि 21 मई की सुबह से 23 मई की रात तक माल ढुलाई से जुड़ी कोई भी छोटी या बड़ी गाड़ी दिल्ली की सीमा में प्रवेश नहीं करेगी। ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के पदाधिकारियों का आरोप है कि दिल्ली सरकार लगातार कमर्शियल वाहनों पर नये प्रतिबंध लागू कर रही है और ग्रीन टैक्स के नाम पर भारी शुल्क वसूला जा रहा है। इससे ट्रांसपोर्ट कारोबार संकट में पहुंच गया है।</p>
<p>ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत और समस्याओं के समाधान की मांग की गयी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी के विरोध में उन्हें सांकेतिक हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। गुरुग्राम को देश के प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब में गिना जाता है। यहां ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियां संचालित हैं, जिनकी आपूर्ति शृंखला पूरी तरह ट्रांसपोर्ट नेटवर्क पर निर्भर है। हड़ताल के चलते उद्योग जगत में चिंता बढ़ गयी है। व्यापारिक विशेषज्ञों के अनुसार, गुरुग्राम और आसपास के क्षेत्रों में प्रतिदिन करोड़ों रुपये का कारोबार प्रभावित हो सकता है। यदि हड़ताल आगे बढ़ती है, तो दिल्ली-एनसीआर में फल, सब्जियां, दूध और दवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है, जिससे आम लोगों की परेशानियां बढ़ने की आशंका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 18:32:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नार्वे और भारत के बीच सहयोग की अपार संभावना,नार्वे की कंपनियों के लिए खुले हैं दरवाजे: पीएम मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओस्लो में भारत-नॉर्वे व्यापार शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने नॉर्वे की कंपनियों को स्वच्छ ऊर्जा, जहाज निर्माण और समुद्री उद्योगों में निवेश के लिए आमंत्रित किया। पीएम मोदी ने TEPA समझौते के तहत $100 अरब के निवेश और भारत में 10 लाख रोजगार सृजन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/there-is-immense-potential-for-cooperation-between-norway-and-india/article-154317"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi8.png" alt=""></a><br /><p>ओस्लो। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत और नार्वे के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा है कि नॉर्वे की कंपनियों के लिए भारत के दरवाजे खुले हैं और उन्हें स्वच्छ ऊर्जा, जहाज निर्माण, समुद्री उद्योगों और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी में निवेश के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास खाद्य सुरक्षा, उर्वरक, मत्स्य पालन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग के उत्कृष्ट अवसर हैं। नार्वे की दो दिन की यात्रा पर गये पीएम मोदी ने सोमवार रात भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। पीएम मोदी ने बाद में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि व्यापार क्षेत्र और अनुसंधान जगत से जुड़े हितधारकों के साथ संवाद करना एक सुखद अवसर था।</p>
<p>उन्होंने कहा, "ओस्लो सिटी हॉल में प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे और मैंने एक व्यापार एवं अनुसंधान शिखर सम्मेलन में भाग लिया। व्यापार क्षेत्र और अनुसंधान जगत से जुड़े हितधारकों के साथ संवाद करना एक सुखद अवसर था। हमारे देशों के पास खाद्य सुरक्षा, उर्वरक, मत्स्य पालन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग के उत्कृष्ट अवसर हैं। मैंने नॉर्वे को भारत की स्वच्छ ऊर्जा पहलों में निवेश के लिए आमंत्रित किया। मैंने भारत के सुधार एजेंडा के समर्थन में भी अपने विचार रखे। जहाज निर्माण एक ऐसा क्षेत्र है जो व्यापक और असीम संभावनाएं प्रदान करता है।"</p>
<p>पीएम मोदी ने भारत और नॉर्वे के बीच मजबूत आर्थिक सहयोग का आह्वान करते हुए नॉर्वे की कंपनियों को स्वच्छ ऊर्जा, जहाज निर्माण, समुद्री उद्योगों और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी में निवेश बढ़ाने के लिए कहा। शिखर सम्मेलन में नॉर्वे के क्राउन प्रिंस हाकोन के अलावा 50 से अधिक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ-साथ दोनों देशों के व्यापार और अनुसंधान क्षेत्रों के 250 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए। यह आयोजन भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के लागू होने के बाद भारत-नॉर्वे संबंधों में बढ़ती गति को दर्शाता है।</p>
<p>पीएम मोदी ने भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था पर प्रकाश डाला और दोनों देशों के हितधारकों से व्यापार समझौते के तहत निर्धारित महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में कार्य करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "दोनों पक्षों के हितधारकों को टीईपीए के तहत 100 अरब डॉलर के निवेश लक्ष्य तथा भारत में 10 लाख रोजगार सृजन के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रयास करने चाहिए।" प्रधानमंत्री ने भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, अनुकूल जनसांख्यिकी और निवेशक-अनुकूल नीतियों पर जोर देते हुए देश को वैश्विक निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बताया। उन्होंने नॉर्वे को समुद्री अर्थव्यवस्था, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित परिवर्तन, महत्वपूर्ण खनिज, नवप्रवर्तन उद्यमों और जहाज निर्माण जैसे क्षेत्रों में अधिक भागीदारी के लिए आमंत्रित किया, साथ ही सतत विकास और जलवायु कार्रवाई के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा, "भारत का विशाल आकार, बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताएं और जलवायु प्रतिबद्धताएं नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना के तीव्र विस्तार को बढ़ावा दे रही हैं।" उन्होंने समुद्री क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन में कमी, महासागर स्थिरता और जलवायु वित्त में नॉर्वे की विशेषज्ञता की भी सराहना की। प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के व्यवसायों को नई साझेदारी बनाने और आर्थिक संबंधों को गहरा करने के लिए उभरते अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय और नार्वे की कंपनियों तथा संस्थानों के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर भी किए गए। इससे पहले दिन में, ओस्लो में चार गोलमेज चर्चाएंआयोजित की गईं, जिनमें स्वास्थ्य सेवा नवाचार, समुद्री सहयोग, बैटरी और ऊर्जा भंडारण प्रणाली, डिजिटलीकरण और विद्युतीकरण तथा पवन ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 12:35:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चीन ने निजी स्कूलों और ट्यूशन इंडस्ट्री पर कसा शिकंजा, 100 अरब डॉलर का कारोबार प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने शिक्षा का व्यवसायीकरण रोकने के लिए कक्षा 1 से 9 तक के निजी स्कूलों और मुनाफे वाली कोचिंग पर पाबंदी लगा दी है। बच्चों का मानसिक दबाव कम करने हेतु अब ट्यूशन कंपनियां विदेशी निवेश या शेयर बाजार से फंड नहीं जुटा सकेंगी। इस ऐतिहासिक फैसले से $100 अरब की ट्यूशन इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव आएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-tightens-screws-on-private-schools-and-tuition-industry-business/article-153583"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/china2.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने अपनी शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए 6 से 15 वर्ष तक के बच्चों के लिए संचालित लाभ कमाने वाले निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला प्राथमिक और जूनियर सेकेंडरी शिक्षा यानी कक्षा 1 से 9 तक लागू किया गया है। नई नीति के तहत अब स्कूल विषयों की पढ़ाई कराने वाली कंपनियां मुनाफा नहीं कमा सकेंगी, विदेशी निवेश नहीं ले सकेंगी और शेयर बाजार से पूंजी जुटाने पर भी रोक रहेगी। कई कंपनियों को गैर-लाभकारी संस्था में बदलने या संचालन बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p>इस फैसले से चीन की करीब 100 अरब डॉलर की निजी ट्यूशन इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा है। कई बड़ीं शिक्षा कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। सरकार ने सप्ताहांत और छुट्टियों में ट्यूशन, विदेशी पाठ्यक्रम और बच्चों पर अधिक होमवर्क जैसे मामलों पर भी रोक लगाई है।</p>
<p>चीन का कहना है कि बढ़ते शैक्षणिक दबाव और महंगी शिक्षा बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और परिवारों पर असर डाल रही थी। हालांकि प्रतिबंधों के बावजूद देश में निजी ट्यूशन की मांग अब भी बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 14:05:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर के सर्राफा बाजार में पहले दिन खरीदारी सुस्त, ज्वैलरी कंपनियों के शेयरों में गिरावट</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री की सोना न खरीदने की अपील के बाद जयपुर के बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही कम हो गई है। सर्राफा व्यापारियों का मानना है कि इससे विदेशी मुद्रा भंडार तो मजबूत होगा, लेकिन कारीगरों के रोजगार पर संकट आ सकता है। आयात पहले से ही लगभग बंद होने से ज्वैलरी कारोबार में गिरावट की चिंता बढ़ गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/buying-slow-in-jaipurs-bullion-market-on-the-first-day/article-153460"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/11-(630-x-400-px).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से एक वर्ष तक सोना नहीं खरीदने की अपील का असर सर्राफा बाजार में दिखाई देने लगा है। हालांकि पहले दिन कारोबार में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला, लेकिन बाजार में खरीदारी का माहौल कमजोर रहा और ज्वैलरी कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। जयपुर के किशनपोल बाजार, एमआई रोड और वैशाली नगर स्थित प्रमुख ज्वैलरी शोरूमों पर फिलहाल ग्राहकों की आवाजाही सामान्य से कम रही। सर्राफा ट्रेडर्स कमेटी जयपुर के अध्यक्ष कैलाश मित्तल ने प्रधानमंत्री की अपील का स्वागत करते हुए कहा कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए अन्य प्रभावी उपाय भी आवश्यक हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस निर्णय का सबसे अधिक असर कारीगरों और बड़े मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर पड़ेगा, जिससे रोजगार प्रभावित हो सकता है। फिलहाल बाजार पहले से ही ठंडा चल रहा है। मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार पिछले एक माह से सोने का आयात अघोषित रूप से लगभग बंद जैसी स्थिति में है। भारत में सामान्य तौर पर हर महीने करीब 60 टन सोने का आयात होता है, ऐसे में मांग घटने का असर पूरे व्यापारिक तंत्र पर पड़ सकता है। ज्वैलरी एक्सपोर्टर नीरज लुणावत ने कहा कि प्रधानमंत्री की इस अपील का आने वाले समय में ज्वैलर्स पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने बताया कि ज्वैलरी कारोबार पहले से ही कमजोर ग्राहक मांग और धीमी बिक्री की चुनौती से जूझ रहा है। ऐसे में इस अपील से बाजार पर और दबाव बढ़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 18:15:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजस्थान रॉयल्स का मालिक फिर बदला : IPL 2026 के बीच 15,660 करोड़ में बिकी टीम, जानें कौन है नए मालिक ?</title>
                                    <description><![CDATA[दिग्गज उद्योगपति लक्ष्मी मित्तल और अदार पूनावाला ने राजस्थान रॉयल्स में नियंत्रण हिस्सेदारी खरीदने का ऐतिहासिक समझौता किया है। $1.65 अरब के इस सौदे से टीम की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी। 2026 तक पूरी होने वाली इस डील के बाद मित्तल परिवार के पास 75% हिस्सेदारी होगी, जो टीम के लिए नए युग की शुरुआत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/owner-of-rajasthan-royals-changed-again-team-sold-for-rs/article-152542"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/ipl.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आईपीएल की प्रसिद्ध टीम राजस्थान रॉयल्स के स्वामित्व में बड़ा बदलाव तय हो गया है। देश के दिग्गज उद्योगपति लक्ष्मी मित्तल के परिवार ने उद्योगपति अदार पूनावाला के साथ मिलकर टीम में नियंत्रण हिस्सेदारी खरीदने का समझौता किया है। इस सौदे की कुल कीमत करीब 1.65 अरब डॉलर यानी लगभग 15,660 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह टीम अब तक मनोज बडाले और उनके सहयोगियों के पास थी, जिनसे इसे खरीदा जा रहा है। इस समझौते में केवल राजस्थान रॉयल्स ही नहीं, बल्कि दक्षिण अफ्रीका और कैरेबियाई क्षेत्र में इसकी सहयोगी टीमों को भी शामिल किया गया है, जिससे यह एक बहु-देशीय खेल पहचान के रूप में और मजबूत होगी।</p>
<p>सौदा पूरा होने के बाद मित्तल परिवार के पास करीब 75 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि अदार पूनावाला के पास लगभग 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। बाकी 7 प्रतिशत हिस्सा पहले से जुड़े निवेशकों के पास रहेगा। यह प्रक्रिया वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही तक पूरी होने की संभावना है, हालांकि इसके लिए भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग और आईपीएल संचालन परिषद से मंजूरी आवश्यक होगी।</p>
<p>नई संरचना में लक्ष्मी मित्तल, अदार पूनावाला और मनोज बडाले निदेशक मंडल में शामिल होंगे। राजस्थान रॉयल्स, जिसने Indian Premier League 2008 का पहला खिताब जीता था, उभरते खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए जानी जाती है। लक्ष्मी मित्तल ने इस निवेश को अपने राजस्थान से जुड़े पारिवारिक रिश्तों से भी जोड़ा है, जबकि अदार पूनावाला ने इसे टीम के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 15:44:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इजरायल, अमेरिका और ईरान का संघर्ष : शादियों व होटल-रेस्टोरेंट पर दिखने लगा युद्ध का असर, बुकिंग को लेकर नियमों में बदलाव</title>
                                    <description><![CDATA[ कई जगहों पर आयोजकों को पहले से ज्यादा कीमत पर सिलेंडर मंगवाने पड़ रहे हैं, जिससे खर्च भी बढ़ गया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/conflict-between-israel--the-us--and-iran--the-impact-of-the-war-is-being-felt-on-weddings-and-hotels-and-restaurants/article-146099"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव और युद्ध का असर अब स्थानीय स्तर पर भी दिखने लगा है। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा आपूर्ति और परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसका असर देश के कई हिस्सों की तरह कोटा में भी दिखाई देने लगा है, जहां एलपीजी गैस की किल्लत होने लगी है। शहर में गैस सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित होने से होटल, रेस्टोरेंट और शादी समारोह आयोजित करने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई होटल संचालकों का कहना है कि गैस सिलेंडरों की आपूर्ति समय पर नहीं हो रही है, जिससे रसोई संचालन में दिक्कतें आ रही हैं।</p>
<p><strong>अतिरिक्त सिलेंडर की व्यवस्था करने में मशक्कत</strong><br />शादी-विवाह का सीजन होने के कारण मांग पहले से ही अधिक है। ऐसे में कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों को अतिरिक्त सिलेंडर की व्यवस्था करने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। कई जगहों पर आयोजकों को पहले से ज्यादा कीमत पर सिलेंडर मंगवाने पड़ रहे हैं, जिससे खर्च भी बढ़ गया है। होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि यदि गैस की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो भोजन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। कुछ छोटे रेस्टोरेंट संचालकों ने वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में इलेक्ट्रिक उपकरणों या अन्य ईंधन का सहारा लेना शुरू कर दिया है, लेकिन इससे लागत बढ़ रही है।</p>
<p><strong>आगे कारोबार पर और दिखेगा असर</strong><br />मार्च और अप्रैल का महीना शादियों चलते होटल और रेस्टोरेंट कारोबारी के लिए काफी व्यस्त रहता है. लेकिन कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई रुकने से हलवाई और कैटर्स की भी मुश्किलें बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। अगर होटल और रेस्टोरेंट में कमर्शियल गैस सिलेंडर की बिना रुकावट के सप्लाई नहीं होती है तो इसका सीधा-सीधा असर खाने की कीमतों पर भी देखा जा सकता है, वहीं औद्योगिक इकाइयां जैसे कपड़ा कांच जैसे उद्योगों में गैस की खपत ज्यादा होती है उन पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहते हैं तो ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति और कीमतों पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।</p>
<p><strong>बुकिंग को लेकर नियमों में बदलाव</strong><br />कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडर ही नहीं बल्कि घरेलू उपभोक्ताओं पर बुकिंग को लेकर कई नियमों में बदलाव किया है। पहले उपभोक्ता को दो या तीन दिन में घरेलू गैस की सप्लाई होती थी लेकिन अब यह सप्लाई 7 से 10 दिनों तक की जाएगी यानी कुल मिलाकर घरेलू गैस की किल्लत का असर आम व्यक्ति की रसोई पर भी देखने को मिलेगा। कॉमर्शियल गैस सिलेंडर का लोग स्टॉक कर रह हैं। इस वजह से तेल कंपनियों ने गैस आपूर्ति की सप्लाई को पूरी तरीके से बाधित कर दिया है। तेल कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडर की डिलीवरी पर रोक लगाने का ऐलान किया है।</p>
<p>कामर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई रोक दिए जाने से कोटा शहर में चल रहे होटल, रेस्टोरेंट- ढाबे,कचौरी नमकीन की दुकानों ,खोमचे वालों एवं शादियों के सीजन को देखते हुए हलवाई कैटरिंग व्यवसाइयों के सामने गहरा संकट खड़ा हो गया है। हमने जब सभी गैस एजेंसियों के संचालकों से कमर्शियल सिलेंडर सप्लाई की बात कही तो सभी ने हाथ खड़े कर दिए। इससे इन व्यवसाइयों से जुड़े लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है क्योंकि एक-दो दिन में सप्लाई नहीं आई तो कोटा में संचालित व सभी व्यवसाइयो को अपना व्यवसाय बंद करना पड़ेगा। सरकार को चाहिए कि कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति को यथावत रखा जाए।<br /><strong>-अशोक माहेश्वरी, अध्यक्ष व संदीप पाडिया, महासचिव, होटल फेडरेशन आॅफ राजस्थान कोटा डिवीजन</strong></p>
<p>केंद्र सरकार द्वारा कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई पर रोक लगाए जाने से हाड़ौती क्षेत्र में चल रहे शादी-विवाह के सीजन के बीच कैटरिंग व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। गैस की कमी के कारण हलवाइयों और कैटरर्स के सामने भोजन तैयार करने को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है, जिससे विवाह समारोहों की व्यवस्थाएं भी प्रभावित होने लगी हैं। अचानक सप्लाई बंद होने से कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों के सामने भोजन व्यवस्था को लेकर बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है।<br /><strong>- सचिन माहेश्वरी,अध्यक्ष, हाड़ौती हलवाई-कैटरर्स एसोसिएशन</strong></p>
<p>कोटा में घरेलू गैस सिलेंडरों की नियमित रूप से आपूर्ति हो रही है। केवल कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई पर रोक लगाई गई है। वहीं अब ई-केवाईसी भी अनिवार्य कर दी गई है। इसके अलावा एलपीजी गैस सिलेंडर की दोबारा बुकिंग अब पिछली डिलीवरी के 25 दिन बाद ही हो सकेगी।<br /><strong>-अरविंद गुप्ता, अध्यक्ष, हाड़ौती कोटा एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 15:50:59 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>शादी सीजन- 2025 में देशभर में 46 लाख शादियों से 6.5 लाख करोड़ का व्यापार, राजस्थान में लक्जरी व डेस्टिनेशन वेडिंग्स का बोलबाला</title>
                                    <description><![CDATA[कैट रिसर्च एंड ट्रेड डेवलपमेंट सोसाइटी (सीआरटीडीएस) के अध्ययन के अनुसार, 1 नवंबर से 14 दिसंबर 2025 के बीच देशभर में लगभग 46 लाख शादियां होंगी, जिनसे 6.50 लाख करोड़ रुपए का व्यापार होगा। राजस्थान में 3.5 लाख और दिल्ली में 4.8 लाख शादियां होंगी। ‘वोकल फॉर लोकल’ से स्थानीय कारीगरों व उत्पादों की मांग में 25-30% वृद्धि दर्ज हुई है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/wedding-season-business-worth-rs-65-lakh-crore-from/article-131039"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/_4500-px)-(10)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की अनुसंधान शाखा कैट रिसर्च एंड ट्रेड डेवलपमेंट सोसाइटी (सीआरटीडीएस) ने अनुमान लगाया है कि आगामी शादी सीजन एक नवंबर से 14 दिसंबर 2025 के दौरान देशभर में लगभग 46 लाख शादियां होंगी, जिनसे कुल 6.50 लाख करोड़ का व्यापार होगा।</p>
<p>कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि यह अध्ययन 15 से 25 अक्टूबर 2025 के बीच देश के 75 प्रमुख शहरों में किया गया। इसमें राजस्थान की बाजार भागीदारी को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है, जहां लक्जरी और डेस्टिनेशन वेडिंग्स का चलन तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ विजन के अनुरूप, राजस्थानी हस्तकला, परंपरागत आभूषण, बंदेज साड़ियां और लोकल कारीगरों की सेवाएं शादी बाजार में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।</p>
<p><strong>कैट अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष :</strong></p>
<ul>
<li>कुल शादियां 46 लाख</li>
<li>अनुमानित व्यापार 6.50 लाख करोड़</li>
<li>राजस्थान में शादियां 3.5 लाख</li>
<li>दिल्ली में शादियां 4.8 लाख</li>
<li>दिल्ली का योगदान 1.8 लाख करोड़</li>
</ul>
<p>इस वर्ष शादियों की संख्या पिछले वर्ष के करीब है, लेकिन प्रति शादी खर्च में वृद्धि हुई है। बढ़ती आय, कीमती धातुओं की कीमतें और उपभोक्ता विश्वास के कारण। राजस्थान में यह वृद्धि विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जहां डेस्टिनेशन वेडिंग्स उदयपुर, जयपुर और जोधपुर जैसे शहरों में पंचतारा रिसॉर्ट्स व पैलेस वेन्यूज पर केंद्रित हैं। अध्ययन में पाया गया कि 70% से अधिक शादी सामान भारतीय निर्मित हैं।</p>
<p><strong>राजस्थान में ‘वोकल फॉर लोकल वेडिंग्स’ अभियान :</strong></p>
<p>राजस्थान में बाजार भागीदारी को प्रमुखता देते हुए कैट राजस्थान के चेयरमैन सुरेश पाटोदिया ने बताया कि स्थानीय कारीगरों को बंदेज, लहरिया, गोटा-पत्ती कार्य, मीनाकारी आभूषण और हस्तनिर्मित सजावट सामग्री के लिए भारी ऑर्डर मिल रहे हैं। ‘वोकल फॉर लोकल वेडिंग्स’ अभियान ने चीनी आयातों को कम कर राजस्थानी उत्पादों को बढ़ावा दिया है, जिससे जयपुर के ज्वैलर्स, उदयपुर के डेकोरेटर्स और जोधपुर के वस्त्र उत्पादकों की बाजार हिस्सेदारी में 25-30% की वृद्धि दर्ज की गई है।</p>
<p><strong>राजस्थान में करीब 40 हजार शादियां होगी :</strong></p>
<p>देवउठनी एकादशी एक और दो नवम्बर को राज्य में 35 से 40 हजार शादियां हो सकती है। शहर के बजाय गांवों में अधिक शादियां होगी। सभी मैरिज गार्डन बुक है। 14 दिसम्बर के बाद मलमास शुरू होगा। <br /><strong>-रास बिहारी शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान टैंट डीलर किराया व्यवसायी समिति, जयपुर</strong></p>
<p><strong>उत्पाद और सेवाओं के खर्च का प्रतिशत :</strong></p>
<ul>
<li>वस्त्र एवं साड़ियां 10%</li>
<li>आभूषण 15% </li>
<li>इलेक्ट्रॉनिक्स 5% </li>
<li>सूखे मेवे व मिठाई 5%</li>
<li>किराना 5% गिफ्ट 4%</li>
<li>अन्य सामान 6% हिस्सा लेंगे।</li>
<li>सेवाओं में इवेंट मैनेजमेंट 5% </li>
<li>कैटरिंग 10% फोटोग्राफी 2%</li>
<li>यात्रा 3% </li>
<li>पुष्प सजावट 4% </li>
<li>म्यूजिकल ग्रुप्स 3% </li>
<li>लाइट एंड साउंड 3% </li>
<li>एडवाइज 3% योगदान देंगी।</li>
<li>मेनेजमेंट 3% योगदान देंगी। </li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Oct 2025 11:46:02 +0530</pubDate>
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