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                <title>Shipping Routes - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>एक्सपोर्ट ठप: 200 करोड़ का चावल बीच राह में अटका</title>
                                    <description><![CDATA[समुद्री जलमार्ग पर आवागमन बाधित होने से चावल उद्योग प्रभावित।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/exports-stalled--rice-worth-%E2%82%B9200-crore-stuck-in-transit/article-158760"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/12200-x-600-px)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मिडिल ईस्ट के तनाव का असर हाड़ौती के चावल उद्योग पर भी पड़ा है। भारत से 25 से 30 फीसदी तक चावल का निर्यात केवल ईरान में ही होता है, जिसमें हाड़ौती का बासमती चावल सबसे ज्यादा वहां भेजा जाता है। समुद्री जलमार्ग पर जहाजों का आवागमन बाधित होने के कारण हाड़ौती से बासमती चावल के निर्यात से जुड़ी सारी प्रक्रिया थम गई है। हालांकि अब अमेरिका व ईरान के बीच युद्ध विराम हो गया है, लेकिन अभी तक कारोबार शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में हाड़ौती का करीब 200 करोड़ का बासमती चावल का कारोबार मझधार में अटका हुआ है। करोड़ों का माल बंदरगाहों पर अटका पड़ा है। एक्सपोर्टर्स की ओर से विदेश में पहले से किए हुए बासमती चावल के सौदे भी खत्म होने की कगार पर हैं। निर्यात रुक जाने और जलमार्ग बंद होने से उठाव नहीं हो रहा है। इन हालातों के चलते एक्सपोर्टर से लेकर व्यापारी और मिल मालिक भी परेशान हो गए हैं। दूसरी तरफ मंडियों में धान के दाम गिर गए हैं, जिससे किसानों को भी परेशानी हो रही है।</p>
<p><strong>कुछ माल गोदाम तो कुछ बंदरगाहों पर अटका</strong><br />चावल एक्सपोर्टरों के अनुसार हाड़ौती की लगभग सभी राइस मिलों के पास अभी तक करीब 40 से 50 करोड़ के सौदे हैं, लेकिन यह सब कुछ अटक गए हैं। इनका माल मिल मालिकों के पास गोदाम में तैयार है। इसी तरह से 40 से 50 करोड़ का माल कांडला पोर्ट पर पड़ा हुआ है। इनका भुगतान भी आना बाकी है। एक महीने का प्रोडक्शन इन्होंने तैयार किया हुआ है। दो महीने का कच्चा माल भी उनके पास है। यह सब कुछ मिलाकर 200 करोड़ से ज्यादा का व्यापार फिलहाल अटक गया है। इसके अलावा माल खरीदा हुआ है, जिसका भुगतान करना शेष है। ऐसे में सकुर्लेशन पूरी तरह से ठप हो जाने पर मिलर्स को बड़ी हानि होने की संभावना बनी हुई है।</p>
<p><strong>इन देशों में निर्यात होता है चावल</strong><br />भामाशाहमंडी सहित कोटा संभाग के अन्य जिले बारां और बूंदी की मंडियों में बासमती चावल बिकने के लिए ज्यादा आता है, जिसमें से करीब 90 फीसदी चावल एक्सपोर्ट होता है। मिडिल ईस्ट में ईरान, इराक, दमाम, जेद्दा, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब व संयुक्त अरब अमीरात में भारत से चावल जाता है। भारत के कुल निर्यात का 25 से 30 फीसदी केवल ईरान में ही जाता है, जबकि 5 से 10 फीसदी यूएसए और यूके में जाता है। वहां तनाव जैसे हालात होने से सब रुक गया है। हाड़ौती में वर्तमान में 30 से आिक राइस मिल हैं, इनमें धान से तैयार चावल पड़ा हुआ है, लेकिन अब खरीददार नहीं हैं। एक्सपोर्ट होने वाला एक महीने का माल उनके पास है, जबकि तीन माह का उनके पास कच्चा माल है, ऐसे में इनके दाम लगातार कम होने से नुकसान मिल मालिकों को हो रहा है। मिल में आगे आॅर्डर नहीं आने के चलते काम बंद करने की स्थिति आ गई है।</p>
<p><strong>दामों में आ रहा उतार-चढ़ाव</strong><br />थोक चावल व्यापारी अंकित अग्रवाल ने बताया कि एक्सपोर्ट होने वाली 17-18 वैरायटी के दाम 5200 से 7100 के बीच चल रहे थे, जो अब 6350 के आसपास रह गए हैं। उम्मीद की जा रही थी कि यह बढ़कर 7500 के आसपास हो जाएंगे। इसी तरह से वैरायटी 1509 के दाम 5200 से लेकर 6800 के बीच थे, इसके दाम 5750 रह गए हैं। वैरायटी 1847 के दाम 4900 से 6600 प्रति क्विंटल के बीच रहते हैं, यह 5800 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास हैं। इनके दाम 6300 के आसपास पहुंच जाने का अनुमान था, हालांकि, 1509 से नीचे की क्वालिटी होने के बावजूद भी इसके दाम ऊंचे हो गए हैं।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />-200 करोड़ का कारोबार हुआ प्रभावित<br />-30 फीसदी चावल का निर्यात केवल ईरान में<br />-30 से अधिक राइस मिल हाड़ौती में<br />-47 लाख क्विंटल चावल होता है निर्यात</p>
<p>मिडिल ईस्ट में चले युद्ध के कारण बासमती चावल का कारोबार पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। अब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम हो गया है, लेकिन अभी तक समुद्री जलमार्ग पर आवागमन सुचारू नहींं हो पाया है। इस कारण करोड़ों का माल बंदरगाहों पर अटका पड़ा है।<br /><strong>- भूपेन्द्र सोनी, प्रमुख व्यापारी, भामाशाहमंडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 14:21:24 +0530</pubDate>
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                <title>क्या टल गया तीसरे विश्व युद्ध का खतरा? अमेरिका-ईरान ने तनाव घटाने पर जताई सहमति, तकनीकी वार्ता जारी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव के बाद फिलहाल दोनों पक्ष पीछे हटने पर सहमत हुए हैं। ट्रंप प्रशासन के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन जारी रखने के लिए अंतरिम व्यवस्था लागू की गई है। हालांकि, क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता और तनाव अभी भी बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/has-the-threat-of-third-world-war-been-averted-america-iran/article-158362"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/12200-x-600-px)9.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य हमलों के बाद दोनों पक्षों ने फिलहाल तनाव कम करने पर सहमति जतायी है। ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को कहा कि दोनों पक्ष "फिलहाल पीछे हटेंगे" और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही जारी रहेगी। इस संबंध में ईरान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच एक अंतरिम व्यवस्था लागू है और जहाजों की आवाजाही में बाधा नहीं आएगी। </p>
<p>होर्मुज में वास्तविक स्थिति अभी भी सामान्य नहीं दिख रही है, जिससे वाणिज्यिक जहाजों के संचालकों और चालक दल के बीच अनिश्चितता और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं। उल्लेखनीय है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने दावा किया कि अमेरिका द्वारा ईरानी ठिकानों पर हमले किये जाने के बाद उसने कुवैत और बहरीन सहित पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इससे पहले होर्मुज में आवाजाही के कारण अमेरिका-ईरान के बीच हमलों का आदान-प्रदान हुआ था।</p>
<p>एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ईरान के साथ तकनीकी स्तर की वार्ता निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले चेतावनी दे चुके हैं कि यदि ईरान की ओर से हमले जारी रहे तो अमेरिका और सैन्य कार्रवाई करेगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि क्षेत्र के देशों को अपनी भूमि अथवा सुविधाओं का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए नहीं होने देना चाहिये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 13:04:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात पर की चर्चा: मोदी ने सऊदी अरब के शहजादे से की बात, ऊर्जा ठिकानों पर हमलों की निंदा की</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने शिपिंग मार्गों की सुरक्षा और नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने पर सहमति जताई, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/discussed-the-deteriorating-situation-in-west-asia-modi-spoke-to/article-148285"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/modi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सऊदी अरब के शहजादे और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान के साथ बातचीत की जिसमें पश्चिम एशिया में बिगड़ती स्थिति और उसके क्षेत्रीय स्थिरता तथा वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर व्यापक प्रभावों पर विशेष चर्चा हुई। मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि दोनों नेताओं ने संघर्ष से उत्पन्न स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान किया और महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री, प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बात की और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने ऊर्जा ठिकानों पर हमलों के खिलाफ भारत के दृढ़ रुख को दोहराया, जो क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच एक प्रमुख चिंता के रूप में उभरे हैं। मोदी ने कहा, मैंने क्षेत्रीय ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों की भारत द्वारा निंदा को दोहराया।</p>
<p><strong>शिपिंग मार्गों को खुला रखने पर सहमत </strong></p>
<p>उन्होंने कहा, हम नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और शिपिंग मार्गों को खुला और सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर सहमत हुए, उन्होंने खाड़ी क्षेत्र से जुड़े प्रमुख मार्गों को लेकर चिंताओं को उजागर किया, जिनसे होकर विश्व के तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। भारत अपने कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आयात करता है और वह लगातार तनाव कम करने और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा की मांग करता रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 09:43:58 +0530</pubDate>
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