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                <title>Legislative Reform - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>महिला आरक्षण विधेयक पर घमासान : कांग्रेस ने सरकार के फैसले को बताया 'एकतरफा' , सर्वदलीय बैठक की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 16 अप्रैल से बुलाई गई संसद की तीन दिवसीय बैठक को सरकार की 'मनमानी' करार दिया है। विपक्ष ने विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इसे 29 अप्रैल के बाद करने का सुझाव दिया था। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार बिना सर्वदलीय सहमति के नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन और परिसीमन जैसे गंभीर मुद्दों को थोप रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-targets-the-centre-calling-a-three-day-meeting-of-parliament/article-148995"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/congress-logo.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों के बीच 16 अप्रैल से महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन पर चर्चा के लिए संसद की तीन दिवसीय बैठक बुलाना सरकार का एकतरफा निर्णय है और इस बैठक को लेकर विपक्ष को नजरअंदाज कर पूरी तरह से मनमानी की गई है। कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने शुक्रवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि संसद की बैठक 16, 17 और 18 अप्रैल को बुलाई गयी है। </p>
<p>इस बारे में सरकार के साथ जो विचार विमर्श हुआ था उसमें कहा गया था कि कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव हो रहे हैं इसलिए 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाकर इस बारे में विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि 16 मार्च को संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023' में प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा की इच्छा जताई तो श्री खरगे ने 15 मिनट के भीतर ही पत्र का जवाब देते हुए सुझाव दिया कि अलग-अलग चर्चा करने के बजाय सभी विपक्षी दलों को एक साथ आमंत्रित कर सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।</p>
<p>लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी कहा कि यदि सरकार महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन करना चाहती है, तो इस पर सभी दलों की सहमति आवश्यक है और इसके लिए सर्वदलीय बैठक सबसे उपयुक्त मंच होगा। कांग्रेस नेता के अनुसार खरगे ने कहा था कि इस बारे में सामूहिक तौर पर फ़ैसला लीजिए और 29 अप्रैल के बाद सभी दलों की बैठक इस बारे में बुलाइए। सरकार के साथ इसको लेकर 16 से 26 मार्च तक खतों का आदान प्रदान हुआ लेकिन लगता है कि सरकार पहले ही मन बना चुकी थी और अंत में उसने एकतरफा निर्णय लेते हुए 16, 17, 18 अप्रैल को संसद की बैठक बुलाने का निर्णय लिया। मतलब साफ है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले ही आचार संहिता के दौरान ये संसद की बैठक होगी जबकि 24 मार्च को तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर, सभी विपक्षी दल सर्वदलीय बैठक के पक्ष में थे।</p>
<p>विपक्षी दलों ने सर्वसम्मति से सुझाव दिया था कि 29 अप्रैल के बाद बैठक बुलाए क्योंकि तब तक सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव समाप्त हो जाएंगे। इसके बावजूद सरकार ने इस सुझाव को नहीं माना। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विपक्ष की मांग को दरकिनार करते हुए 16 अप्रैल से तीन दिन की संसद की बैठक बुलाई है, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि इस सत्र में महिला आरक्षण विधेयक के साथ-साथ परिसीमन का मुद्दा भी उठाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अब तक कोई व्यापक चर्चा नहीं हुई है।</p>
<p>कांग्रेस ने यह भी कहा कि सितंबर 2023 में लोकसभा और राज्यसभा द्वारा पारित महिला आरक्षण विधेयक में 30 महीनों के भीतर संशोधन लाने की बात कही गई थी और अब तीन दिन की बैठक बुलाकर इसी दिशा में कदम उठाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिला आरक्षण का समर्थन किया है और पहली बार चुनाव में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने किया था। उनके नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने 1989 में 64, 65 संविधान संशोधन कर पंचायत और नगर पालिकाओं में एक तिहाई महिला आरक्षण का प्रावधान किया था। लोकसभा में यह संविधान संशोधन विधेयक पारित हुआ लेकिन राज्यसभा में भाजपा तथा उसके लोगों ने ही इसका विरोध किया था, जिसके कारण ये पारित नहीं हो पाया। तब 1993 में कांग्रेस की सरकार में 73, 74 संविधान संशोधन लोकसभा और राज्यसभा में पारित कराया जिसके कारण आज पंचायत और नगरपालिकाओं में करीब 30 लाख चुने प्रतिनिधियों में से 15 लाख महिलाएं हैं। आरक्षण का प्रावधान एक तिहाई है लेकिन महिलाओं की भूमिका उससे भी ज्यादा बढ़कर 50 प्रतिशत के करीब है लेकिन केंद्र सरकार आज इसका श्रेय लेने की कोशिश कर रही है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 18:06:43 +0530</pubDate>
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                <title>तेलंगाना विधानसभा बजट सत्र 10वें दिन में प्रवेश: एजेंडे में प्रमुख विधेयक और बजट मांगें शामिल, नवीकरणीय ऊर्जा और नियामक निकायों की रिपोर्ट होगी पेश</title>
                                    <description><![CDATA[तेलंगाना विधानसभा के बजट सत्र में आज गिग श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा और हेट स्पीच रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए गए। उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क ने ऊर्जा क्षेत्र की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। सदन में ₹62,610 करोड़ के अनुपूरक अनुदान पर चर्चा के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट पर अंतिम मतदान होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/telangana-assembly-budget-session-enters-10th-day-agenda-includes-major/article-148332"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/teleangana-parliament.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। तेलंगाना विधानसभा का बजट सत्र रविवार को अपने 10वें दिन में प्रवेश कर गया, जहां सुबह 10 बजे कार्यवाही शुरू हुई । इसमें महत्वपूर्ण विधेयकों की प्रस्तुति तथा वर्ष 2026-27 के लिए अनुदान मांगों पर अंतिम चरण की चर्चा और मतदान प्रमुख एजेंडा में शामिल हैं। विधानसभा सचिव रेंदला तिरुपति द्वारा जारी कार्यसूची के अनुसार, आज प्रश्नकाल स्थगित रखा गया ।उपमुख्यमंत्री (वित्त, योजना एवं ऊर्जा) भट्टी विक्रमार्क मल्लू ,टीएसजेनको, ट्रांसको और डिस्कॉम सहित विभिन्न विद्युत उपयोगिताओं और निगमों की वार्षिक रिपोर्ट सदन में पेश करेंगे। इसके साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा और नियामक निकायों की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जाएंगी।</p>
<p>सदन में पूर्व विधायक ए. गोविंद नाइक के निधन पर शोक प्रस्ताव भी लाया जाएगा, जिसमें उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की जाएगी। कार्यसूची में कई महत्वपूर्ण सरकारी विधेयक भी शामिल हैं, जिनमें तेलंगाना वैट (संशोधन) विधेयक, 2026, तेलंगाना हेट स्पीच एवं हेट क्राइम (रोकथाम) विधेयक, 2026, तथा प्लेटफॉर्म आधारित गिग श्रमिकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित विधेयक शामिल हैं। इसके अलावा पंचायती राज अधिनियम में संशोधन और माता-पिता के प्रति कर्मचारियों की जवाबदेही से जुड़े विधेयक भी पेश किए जाएंगे।</p>
<p>सत्र में वर्ष 2026-27 के वार्षिक बजट के तहत अनुदान मांगों पर मतदान का चौथा और अंतिम दिन भी होगा। इसमें स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, सिंचाई, सड़क एवं भवन, श्रम एवं रोजगार तथा पर्यावरण क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण आवंटन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, सदन वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 62,610 करोड़ रुपये से अधिक के अनुपूरक व्यय अनुमानों पर भी चर्चा कर मतदान करेगा। बजट चर्चा के अंतिम चरण में सरकार के प्रमुख विधायी और वित्तीय प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिहाज से यह कार्यवाही महत्वपूर्ण मानी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 15:35:19 +0530</pubDate>
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