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                <title>अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : हौसलों की उड़ान हो तुम, सपनों की पहचान हो तुम</title>
                                    <description><![CDATA[कई महिलाएँ चुनौतियों को पार कर अपने सपनों को साकार करती हैं।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/international-women-s-day-special--you-are-the-flight-of-courage--you-are-the-identity-of-dreams/article-145790"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(1)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।"हौसलों की उड़ान से ही मंजिलें मिलती हैं,रास्ते आसान हों तो पहचान नहीं बनती।" महिलाओं की सफलता के पीछे अक्सर संघर्ष, धैर्य और मजबूत इरादों की कहानी छिपी होती है। घर, परिवार, समाज और करियर की जिम्मेदारियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं होता। फिर भी कई महिलाएँ चुनौतियों को पार कर अपने सपनों को साकार करती हैं। महिला दिवस के अवसर पर दैनिक नवज्योति ने शहर की ऐसी ही प्रेरणादायक महिलाओं से बातचीत की और जाना कि उन्होंने अपनी मंजिÞल तक पहुँचने के लिए किन संघर्षों और चुनौतियों का सामना किया। उनकी जुबानी सुनिए सफलता की यात्रा।</p>
<p><strong>महिला जीवन की चुनौतियां और संकल्प की शक्ति</strong><br />महिला होने के नाते जीवन के हर पड़ाव पर अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। बचपन में अक्सर ऐसा होता है कि परिवार में भाई को अधिक प्राथमिकता दी जाती है, जबकि लड़कियों पर कई तरह की पाबंदियाँ लगा दी जाती हैं, कैसे रहना है, क्या पहनना है और कहाँ जाना है। मेरे जीवन में भी ऐसे अनुभव रहे। जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, चुनौतियों का स्वरूप भी बदलता गया। घर की चौखट से बाहर निकलकर  नौकरी की ओर कदम बढ़ाने पर कई तरह के आक्षेप और सवाल सामने आए। फिर भी जब मन में दृढ़ निश्चय हो कि हमारा विचार सही है और हमें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना है, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। चुनौतियों को मैंने हमेशा सकारात्मक रूप में लिया, क्योंकि उनसे सीखने और खुद को और अधिक मजबूत बनाने का अवसर मिलता है। आज जिस मुकाम पर हूं, उसमें सभी का हाथ है। जब माता-पिता के पास थे तो उनकी भूमिका सबसे ज्यादा रही। मैं बीकानेर की रहने वाली हूँ। मेरे पिता का हमेशा मानना था कि अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए और  आत्मनिर्भर बनना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने मुझे घर से दूर वनस्थली विद्यापीठ भेजा, जहाँ से मैंने स्कूल से लेकर कॉलेज तक की पढ़ाई पूरी की। वहाँ की शिक्षा ने मेरे जीवन की मजबूत नींव तैयार की। मेरी माँ स्वयं  पढ़ी-लिखी नहीं थीं, लेकिन हम सभी  को पढ़ाने के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। पति से भी जीवन में कई महत्वपूर्ण बातें सीखने का अवसर मिला और आज मैं जिस मुकाम पर हूँ, उसमें परिवार के समर्थन की बड़ी भूमिका रही है। </p>
<p><strong>महिला दिवस पर संदेश</strong><br />बच्चियां और महिलाएं अपनी प्रतिभा को पहचानें, बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत, समर्पण और साहस के साथ आगे बढ़ें। साथ ही उन्हें वित्तीय प्रबंधन, सामुदायिक सहयोग और नेतृत्व की जिम्मेदारियों को भी समझना होगा। बाधाएं जीवन में आती हैं, लेकिन सकारात्मक सोच और दृढ़ संकल्प से उन्हें पार कर एक स्थायी और उज्ज्वल भविष्य बनाया जा सकता है।<br /><strong>-डॉ. विमला डुकवाल, कुलगुरु, कृषि विश्वविद्यालय, कोटा</strong></p>
<p><strong>फॉरेंसिक विज्ञान में बनाई मजबूत पहचान</strong><br />मैंने वर्ष 1998 में इस क्षेत्र में कार्य करना शुरू किया। उस समय महिलाओं और लड़कियों में इस क्षेत्र के प्रति जागरूकता बहुत कम थी। फॉरेंसिक विज्ञान का कार्य केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं होता, बल्कि कई बार क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन के लिए किसी भी समय ड्यूटी देनी पड़ती है। कई घटनास्थल बेहद भयावह होते हैं और कई बार गहन जंगलों या एकांत स्थानों पर भी जांच करनी पड़ती है। ऐसे में वैज्ञानिक साक्ष्यों को संकलित करते समय धैर्य, साहस और समझदारी बेहद जरूरी होती है। समाज में जब रेप जैसे जघन्य अपराध सामने आते हैं, तो एक महिला होने के नाते ये दृश्य मन को गहराई से झकझोर देते हैं। आज के समय में मानसिक, शारीरिक और तकनीकी रूप से मजबूत बने बिना आगे बढ़ना संभव नहीं है, इसलिए हर चुनौती का दृढ़ता से सामना करना पड़ता है।</p>
<p>पुरुष प्रधान समाज में बिना किसी समझौते के आगे बढ़ना भी अपने आप में एक चुनौती रहा है। कई बार परिवार और समाज की पारंपरिक सोच भी सामने आती है। समय के साथ कदम मिलाने की कोशिश में कई बार परिवार और बच्चों को उतना समय नहीं दे पाते, जितना देना चाहते हैं। वहीं कार्यस्थल पर भी जब एक महिला अधिकारी उच्च पद पर होती है, तो कई बार पुरुष सहकर्मियों और अधीनस्थों के लिए उसे सहज रूप से स्वीकार करना आसान नहीं होता। फिर भी निरंतर मेहनत और समर्पण के साथ आगे बढ़ना ही सफलता का रास्ता बनाता है। मैं अपनी सोच और मूल्यों का श्रेय अपनी मां शांति देवी, पिता भरत सिंह, सास प्रेम खन्ना और पति राजेश खन्ना को देना चाहूंगी। परिवार ही वह आधार है, जिससे जुड़कर हम समाज के लिए भी बेहतर कार्य कर सकते हैं।</p>
<p><strong>महिला दिवस पर संदेश</strong><br />एक सशक्त महिला या बालिका को अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए मन और तन दोनों को मजबूत बनाना होगा। निरंतर प्रयास के साथ जीवन में संतुलन बनाए रखना जरूरी है।  विशेष रूप से अपराध के मामलों में महिलाओं को खुद को केवल पीड़ित न मानते हुए साहस के साथ आगे आना चाहिए और साक्ष्य प्रस्तुत करने में सहयोग देना चाहिए। इससे अपराधियों में भय पैदा होगा और उन्हें उनके अपराध की सजा भी मिलेगी।<br /><strong>-डॉ. राखी खन्ना,  एडिशनल डायरेक्टर रीजनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी कोटा रेंज</strong></p>
<p><strong>संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास से सफलता का मार्ग</strong><br />जी वन में चुनौतियों का सामना हर व्यक्ति को करना पड़ता है। मेरे जीवन में भी संघर्ष मुख्य रूप से पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े रहे। पढ़ाई के दौरान कई बार असफलताएँ भी मिलीं, लेकिन ऐसे समय में धैर्य और दृढ़ निश्चय सबसे अधिक जरूरी होता है। मेरे माता-पिता का हमेशा पूरा समर्थन मिला और उन्होंने हर परिस्थिति में मुझे प्रेरित किया। यूपीएससी की तैयारी के दौरान मेरा चयन तीसरे प्रयास में हुआ। इससे पहले के प्रयास में केवल एक अंक से चयन छूट गया था, उस समय बहुत निराशाजनक लगता था। लेकिन परिवार के सहयोग और अपने धैर्य की वजह से मैंने हिम्मत नहीं हारी लगातार अपने प्रयास जारी रखे। हमेशा यही कोशिश रही कि मनोबल बनाए रखा जाए और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया जाए।</p>
<p>-कॉलेज के समय से ही मेरा लक्ष्य था कि मुझे सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में जाना है। मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बिजनेस स्टडीज में स्नातक किया और उसी दौरान इस दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया। इस पूरे सफर में मेरे माता-पिता की प्रेरणा सबसे बड़ी ताकत रही। जब हम मेहनत करते हैं और हमारे काम से हमारे अपने लोग खुश होते हैं, तो उससे और अधिक ऊर्जा मिलती है। आज भी उनका मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। जीवन में हर भूमिका को संतुलन के साथ निभाना भी बहुत जरूरी है। जब मैं काम पर होती हूँ तो पूरी तरह अपने कार्य पर ध्यान देती हूँ, और जब घर पर होती हूँ तो परिवार को समय देने की कोशिश करती हूँ। कई बार काम का दबाव होता है और कभी पारिवारिक जिम्मेदारियाँ बढ़ जाती हैं, लेकिन इन दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना ही सबसे महत्वपूर्ण है।</p>
<p><strong>महिला दिवस पर संदेश</strong><br /> महिलाओं और युवतियों के लिए मेरा संदेश है कि सबसे पहले खुद पर विश्वास रखें। मेहनत और लगन के साथ काम करें, क्योंकि इंसान की सबसे बड़ी सीमा उसकी सोच होती है। यदि आप आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं, तो आप जो चाहें वह हासिल कर सकते हैं।<br /><strong>-चारु शंकर, एसडीएम रामगंजमंडी</strong></p>
<p><strong> संघर्ष, संकल्प और बड़े सपनों की उड़ान</strong><br />सिविल सेवा में आने से पहले का मेरा सफर संघर्ष और धैर्य से भरा रहा। यूपीएससी की परीक्षा मैंने चौथे प्रयास में सफलतापूर्वक पास की। इन चार वर्षों की तैयारी काफी मेहनत और धैर्य की परीक्षा लेने वाली रही। कई बार ऐसे क्षण आए जब निराशा भी हुई। दो बार मैंने परीक्षा दी, एक बार इंटरव्यू तक पहुँची, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो पाया। ऐसे झटके किसी भी अभ्यर्थी के लिए कठिन होते हैं। कई बार हम योजनाएँ बनाते हैं, लेकिन परिणाम उम्मीद के अनुसार नहीं मिलते। ऐसे समय में परिवार और समाज का दबाव भी महसूस होता है और कई लोग बीच रास्ते में हार मान लेते हैं।मेरे लिए सबसे बड़ी ताकत मेरा परिवार रहा। उन्होंने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया और कहा कि जितना समय चाहिए, उतना लेकर पूरी लगन से तैयारी करो। इसी समर्थन और आत्मविश्वास के साथ मैंने चौथे प्रयास में सफलता प्राप्त की। मेरे पिता राज्य सरकार में कार्यरत थे और उन्हें देखकर ही मुझे शुरूआत से ही कुछ करने की प्रेरणा मिली। बाद में जब मैंने कॉपोर्रेट क्षेत्र में काम करना शुरू किया, तब मुझे एहसास हुआ कि निजी क्षेत्र में पब्लिक इंटरफेस और सामाजिक प्रभाव अपेक्षाकृत कम होता है। वहीं से यह विचार और मजबूत हुआ कि सरकारी व्यवस्था में काम करके समाज पर अधिक सकारात्मक प्रभाव डाला जा सकता है।मेरी प्रेरणा मेरी माँ और बहनें रही हैं। उन्होंने हमेशा यही सिखाया कि जो भी काम करें, पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ करें, क्योंकि हर काम के अपने सकारात्मक और नकारात्मक पहलू होते हैं।</p>
<p><strong>महिला दिवस पर संदेश</strong><br />अगर आपको लगता है कि आप कुछ बड़ा करना चाहते हैं, तो शुरूआत करने से कभी न डरें। अपने सपनों को साकार करने के लिए पहला कदम उठाइए। कहीं न कहीं से सहयोग अवश्य मिलेगा। सबसे जरूरी है कि बड़े सपने देखने का साहस हमेशा बनाए रखें।<br /><strong>-आराधना चौहान, प्रशिक्षु आईएएस</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 12:32:59 +0530</pubDate>
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                <title>पराक्रम दिवस: पीएम मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को दी श्रद्धांजलि, राष्ट्रीय भावना को किया याद</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पराक्रम दिवस पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि देते हुए उनके निडर नेतृत्व, अदम्य साहस और देशभक्ति को याद किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/on-valor-day-pm-modi-paid-tribute-to-netaji-subhash/article-140569"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पराक्रम दिवस पर शुक्रवार को स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी और उनके अदम्य साहस और भारत की राष्ट्रीय भावना पर उनके स्थायी प्रभाव को याद किया। प्रधानमंत्री मोदी ने आज एक्स पर साझा किए गए एक संदेश में कहा कि नेताजी निडर नेतृत्व और अटूट देशभक्ति के प्रतीक थे और उनके आदर्श पीढिय़ों को प्रेरित करते रहेंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर, जिसे पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है, हम उनके अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प और देश के लिए उनके बेमिसाल योगदान को याद करते हैं। उन्होंने कहा, नेताजी निडर नेतृत्व और अटूट देशभक्ति के प्रतीक थे। उनके आदर्श पीढिय़ों को एक मजबूत भारत बनाने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।</p>
<p>पीएम मोदी ने अपने सार्वजनिक जीवन पर नेताजी बोस के व्यक्तिगत प्रभाव पर भी बात की और गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के एक महत्वपूर्ण क्षण को याद किया। उन्होंने कहा कि नेताजी ने उन्हें बहुत प्रेरित किया था और 23 जनवरी, 2009 को ई-ग्राम विश्वग्राम योजना के लॉन्च का जिक्र किया।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा, यह कार्यक्रम हरिपुरा से लॉन्च किया गया था, जो नेताजी बोस के जीवन में ऐतिहासिक महत्व का स्थान है। उन्होंने कहा, ई-ग्राम विश्वग्राम योजना गुजरात के आईटी परिदृश्य को बदलने के उद्देश्य से एक अग्रणी योजना थी। उन्होंने कहा कि हरिपुरा से उनका एक विशेष भावनात्मक जुड़ाव था। उन्होंने कहा, मैं कभी नहीं भूलूंगा कि हरिपुरा के लोगों ने मेरा कैसे स्वागत किया और उसी सड़क पर जुलूस निकला जिस पर नेताजी बोस चले थे।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि पराक्रम दिवस हर साल 23 जनवरी को भारत के सबसे प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों में से एक और भारतीय राष्ट्रीय सेना (आईएनए) के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विरासत का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 11:56:17 +0530</pubDate>
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                <title>डिप्रेशन से जूझ रही थीं दीपिका पादुकोण, हिम्मत और साहस के लिए 'टाइम 100 इम्पैक्ट अवॉर्ड' से सम्मानित </title>
                                    <description><![CDATA[दीपिका पादुकोण ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर कर अवॉर्ड जीतने की खुशी जाहिर की। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/deepika-padukone-was-battling-depression--honored-with-time-100-impact-award-for-courage-and-courage/article-6945"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/dipika.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड की जानीमानी अभिनेत्री दीपिका पादुकोण को 'टाइम 100 इम्पैक्ट अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया है। दीपिका पादुकोण के जीवन में एक ऐसा समय भी आया था जब वह डिप्रेशन से जूझ रही थीं। दीपिका ने न सिर्फ खुद को डिप्रेशन से बचाया बल्कि मेंटल हेल्थ की फील्ड में काफी काम भी किया। दीपिका को इसी हिम्मत और साहस के लिए 'टाइम 100 इम्पैक्ट अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया है।</p>
<p>दीपिका पादुकोण ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर कर अवॉर्ड जीतने की खुशी जाहिर की। दीपिका ने कैप्शन में लिखा, ''मुझे लगता है कि सोमवार की शुरूआत करने के लिए इससे अच्छा और कुछ नहीं हो सकता।'' इसके साथ ही उन्होंने आभार व्यक्त करते हुए 'टाइम' को टैग भी किया।''<br /><br />दीपिका पादुकोण डिप्रेशन से जूझ रहे दूसरे लोगों की मदद करती हैं, जिसके लिए उन्होंने एक मेंटल हेल्थ फाउंडेशन भी शुरू किया। जिसका नाम'लिव लव लाफ फाउंडेशन' है। 'टाइम 100 इम्पैक्ट अवॉर्ड' से दुनिया के 100 उन चुनिंदा लोगों को सम्मानित किया गया है जो अपनी पहचान का इस्तेमाल एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए कर रहे हैं। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Mar 2022 15:26:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>अच्छी खबर : बेटियों ने बाल विवाह के खिलाफ दिखाया हौसला</title>
                                    <description><![CDATA[एक पहुंची कोर्ट, दूसरी ने पिता के फैसले का किया विरोध]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%85%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9B%E0%A5%80-%E0%A4%96%E0%A4%AC%E0%A4%B0---%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B9-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AB-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%8C%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A4%BE/article-2253"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/dholpur.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। उसकी शादी आज से करीब नौ साल पहले अपने से आठ साल बडी उम्र के युवक से कर दी गई थी। पढ़ने की ललक और बाल विवाह की कुरीति को देखते हुए नाबालिग ने न सिर्फ इस बाल विवाह का विरोध किया, बल्कि फैमिली कोर्ट में परिवाद पेश कर बाल विवाह को निरस्त भी कराया। हम बात कर रहे हैं कि मालवीय नगर निवासी बीस वर्षीय अंजू (परिवर्तित नाम) की। अंजू को ससुराल ले जाने के बाद उसके ग्यारह सहपाठियों ने शहर की गलियां छानते हुए अपनी सहेली का पता लगया और कलेक्टर की दखल के बाद पुलिस को निर्देश दिए गए। नाबालिक परिजन एफआईआर करवाने को राजी नहीं थे ऐसे में मालवीय नगर थाना पुलिस ने अंजू का बालगृह भेजा था। अंजू की ओर से फैमिली कोर्ट क्रम-3 में वर्ष 2017 में परिवाद  पेश कर अपने बाल विवाह को निरस्त करने की गुहार की। परिवाद पेश करते समय अंजू की उम्र 16 साल की होने के कारण उसने अपनी मां के जरिए यह परिवाद पेश किया था। परिवाद में कहा गया कि 11 साल दस माह की उम्र में 30 अप्रैल, 2012 को उसका विवाह बीस साल के युवक से कर दिया गया था। हाल ही में उसने कक्षा दस पास की तो उसके ससुराल वाले गौना करवाने के लिए दबाव डालने लगे, जबकि वह आगे पढ़ाई करना चाहती है और अपने विवाह को स्वेच्छा से स्वीकार नहीं करती। उसे अपने पसंद का जीवन साथी चुनने और उसके साथ विवाह करने का पूरा अधिकार है। उसने प्रतिवादी को न तो कभी स्वीकार किया और ना ही कभी उसके साथ रही है। ऐसे में उसके बाल विवाह को शून्य घोषित कर डिग्री जारी की जाए। सुनवाई के दौरान प्रतिवादी की ओर से आपत्ति नहीं करते हुए विवाह शून्य घोषित करने की डिग्री जारी करने की सहमति दी गई। इस पर अदालत ने विवाह का शून्य घोषित करते हुए डिग्री जारी कर दी है।   <br /> <strong><br /> मंत्री जी! मुझे बचा लो, मुझे आठ लाख में बेचा जा रहा है</strong><br /> धौलपुर। मंत्री जी मुझे बचा लो, मुझे 8 लाख रुपए में बेचा जा रहा है। यदि आपने नहीं बचाया तो एक बिटिया की हत्या का पाप आपको लेना पड़ेगा, मैं उस लड़के से शादी नहीं करूंगी, आत्महत्या कर लूंगी। ये गुहार धौलपुर जिले के सैंपऊ इलाके के एक गांव की 15 वर्षीय नाबालिग बेटी की है जिसने महिला एवं बाल विकास मंत्री ममता भूपेश के नाम ये पत्र लिखा है। मंत्री ममता भूपेश के नाम लिखा गया ये पत्र ईमेल के माध्यम से महिला एवं बाल विकास विभाग धौलपुर के कार्यालय के ईमेल पर भी आ गया जिसके बाद विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया। विभाग के उपनिदेशक भूपेश गर्ग ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला कलक्टर राकेशकुमार जायसवाल को अवगत कराया है। साथ ही सैंपऊ सीडीपीओ को जांच कर शादी रुकवाने के आदेश दिए हैं। वहीं पुलिस अधिकारियों को भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री ममता भूपेश के नाम लिखे गए पत्र में कहा गया है कि मंत्री जी मैं 15 साल की नाबालिग बेटी हूं, मेरे पिता एक ऐसे लड़के से मेरी शादी कर रहे हैं जो शराब पीता है और जुआ खेलता है। मेरी शादी 14 नवंबर 2021 को किसी दूसरे स्थान पर ले जाकर की जाएगी। इसके लिए मेरे पिता ने लड़के वालों से 8 लाख रुपए लिए हैं, यानि मुझे बेचा जा रहा है। इसकी शिकायत मैंने स्थानीय पुलिस चौकी पर भी की। लेकिन पुलिस चौकी वाले मेरे पिता से ही मिल गए।  नाबालिग लड़की ने मंत्री से गुहार लगाते हुए कहा है कि आप मेरी माता जी की तरह हैं। इस विपत्ति से मुझे बचा लो। आपसे हाथ जोड़कर निवेदन करती हूं। यदि आपने ऐसा नहीं किया तो एक बिटिया की हत्या का पाप आपको लेना पड़ेगा, क्योंकि मैं उससे शादी नहीं करूंगी, आत्महत्या कर लूंगी। इस पत्र के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और अधिकारी कार्रवाई में जुट गए हैं।<br /> <br /> <strong>इनका कहना है: </strong><br /> शाम पांच बजे ही मेरी जानकारी में मामला आया है। हमने पुलिस को कहा है कि मौके पर जाकर जांच करें और जो भी आवश्यक हो वे कदम उठाए जाएं। टीम कल जाकर जांच कर लेगी। -<strong>राकेश कुमार जायसवाल, कलक्टर धौलपुर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Nov 2021 11:15:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>बेटियो, कोई छेड़छाड़ करे तो सहन करने के बजाय चप्पल से जवाब दो: डीजीपी लाठर</title>
                                    <description><![CDATA[महिलाओं व युवतियों के लिए अब अपराधियों से डरने का नहीं, साहस दिखाने का समय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/617a4b24c3eeb/article-1959"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/mohan-lal-latherdgp_ml_lather.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अजमेर।</strong> पुलिस महानिदेशक एमएल लाठर ने कहा कि कोई पुरुष अगर महिला या युवतियों को छेड़ता है या अत्याचार करता है, तो सिर झुका कर जाने व डरने की जरूरत नहीं, बल्कि पीछे मुड़कर उन्हें चप्पल उठाकर जवाब देना चाहिए। अब समय सहन करने का नहीं साहस दिखाने का है। साहस की वजह से ही हम समाज में बदलाव व महिला अत्याचार में कमी ला सकते हैं। डीजीपी लाठर बुधवार को अजमेर के जवाहर रंगमंच पर आवाज दो (स्पीकअप) महिला सशक्तीकरण एवं जागरुकता अभियान प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। लाठर ने कहा कि अब महिलाओं व युवतियों को भी साहस दिखाना चाहिए।</p>
<p><br /> उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई कुत्ता या बन्दर आपके पीछे पड़ता और आप भागते हैं, तो वह आपको पकड़ता है। लेकिन आप भागने की जगह पलटकर उसे देखते हैं या किसी चीज से वार करते हैं, तो वह भाग जाता है। उसी तरह कोई अपराधी जब बहनों पर अत्याचार करे, तो बस साहस के साथ चप्पल दिखाने की जरूरत है। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>आत्मरक्षा का कौशल विकसित करें</strong></span></span><br />  लाठर ने कहा कि पुलिस की ओर से भी महिलाओं में आत्मरक्षा कौशल विकसित करने के लिए आॅनलाइन व पुलिस लाइन में कार्यक्रम चलाए जाते हैं। हमारे ट्रेनर्स महिलाओं को सुरक्षा के गुर सिखाते हैं। जिन महिलाओं व युवतियों  को इसका प्रशिक्षण लेना है वह अपना रजिस्ट्रेशन करा सकती हैं। पुलिस की ओर से ऐसे मास्टर ट्रेनर भी तैयार किए गए हैं, जो शिक्षण संस्थाओं में भी जाकर छात्राओं को भी प्रशिक्षण देते हैं। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>नैतिक मूल्यों में गिरावट मुख्य कारण</strong></span></span><br /> लाठर ने कहा कि किसी पुरुष के मन में महिला अत्याचार व दुराचार की मानसिकता पनपती है, तो इसके पूर्व वो रोल रिवर्स (खुद पर हो तो) कर विचार करें, इससे महिला के प्रति अत्याचारों में कमी आ जाएगी। डीजीपी ने कहा कि नैतिक मूल्यों में निरंतर गिरावट भी बढ़ते महिला अत्याचार का कारण है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Oct 2021 12:51:19 +0530</pubDate>
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