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                <title>elephants - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>elephants RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>विशेष स्वास्थ्य शिविर : हाथियों की आंख, खून और लार के लिए नमूने, विस्तृत जांच के लिए राज्य रोग निदान केंद्र भेजा</title>
                                    <description><![CDATA[कुंडा स्थित हाथी गांव में वन विभाग के दो दिवसीय विशेष हेल्थ कैंप में 76 हाथियों की गहन जांच की गई। विशेषज्ञों ने ब्लड, आंख और लार के सैंपल लेकर स्वास्थ्य का आकलन किया। सैंपल जांच के लिए राज्य रोग निदान केंद्र भेजे गए। डॉ. अरविंद माथुर और डॉ. अशोक तंवर की निगरानी में शिविर सफलतापूर्वक आयोजित हुआ।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/special-health-camp-ran-for-two-days-samples-of-elephants/article-150070"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/6622-copy41.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर। जयपुर के कुंडा स्थित हाथी गांव में वन विभाग की ओर से आयोजित विशेष हाथी स्वास्थ्य परीक्षण शिविर में  76 हाथियों की गहन जांच की गई। इस हेल्थ कैंप में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने हाथियों के ब्लड, आंख, लार सहित विभिन्न जरूरी सैंपल लेकर उनकी स्वास्थ्य स्थिति का बारीकी से आकलन किया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सभी सैंपलों को आगे की विस्तृत जांच के लिए राज्य रोग निदान केंद्र भेजा गया है। शिविर के दौरान नाहरगढ़ जैविक उद्यान के उप निदेशक डॉ. अरविंद माथुर और जयपुर चिड़ियाघर के वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. अशोक तंवर सहित वन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। उनकी निगरानी में पूरे शिविर का संचालन किया गया। वन विभाग की यह पहल हाथियों के बेहतर स्वास्थ्य और समय पर उपचार सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Apr 2026 10:39:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतिम दर्शन के कगार पर पहुंचते हाथी</title>
                                    <description><![CDATA[हाथी धरती पर सबसे बड़े जमीनी जानवर हैं, जो झुंड में रहने वाले बुद्धिमान सामाजिक प्राणी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/elephants-reaching-the-verge-of-last-darshan/article-123440"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/njnng.png" alt=""></a><br /><p>हाथी धरती पर सबसे बड़े जमीनी जानवर हैं, जो झुंड में रहने वाले बुद्धिमान सामाजिक प्राणी हैं। दुनियाभर की विभिन्न संस्कृतियों में हाथी को प्यार, सम्मान और आदर दिया जाता रहा है, लेकिन फिर भी यह चिंता का बड़ा कारण है कि दो विशाल महाद्वीपों एशिया तथा अफ्रीका में धरती का यह शानदार प्राणी अंतिम दर्शन के कगार पर हैं। कुछ अनुमानों के अनुसार पिछले एक दशक में ही हाथियों की संख्या में करीब 62 प्रतिशत की गिरावट आई है और हाथियों के संरक्षण के लिए यदि तत्काल सुरक्षात्मक उपाय नहीं किए गए, तो अगले दशक के अंत तक अधिकांश हाथी समाप्त हो सकते हैं। हाथियों के प्राकृतिक आवास खत्म हो जाने से हाथियों के साथ मानव संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। इसी संघर्ष के फलस्वरूप हाथियों को पकड़ लिया जाता है या मार दिया जाता है। पकड़े गए ऐसे ही कुछ हाथियों को चिड़ियाघरों तथा सर्कसों में भेज दिया जाता है, जहां वे जीवनभर करतब दिखाने में ही बिता देते हैं।</p>
<p><strong>मानवजनित दबाव :</strong></p>
<p>कृषि और बुनियादी ढ़ांचे के विकास के लिए हम हाथियों के पारंपरिक आवासों पर लगातार अतिक्रमण कर रहे हैं और मानवजनित दबाव के कारण हाथियों को उनके आवासों से बाहर खदेड़ा जा रहा है। पशुओं के चरने और औद्योगिक विकास का दबाव निरंतर बढ़ रहा है, जिससे हाथियों के लिए उपलब्ध भोजन की मात्रा प्रभावित हो रही है और भूख से व्याकुल घबराए हुए हाथियों द्वारा आसपास के लोगों पर हमला किए जाने की संभावनाएं बढ़ रही हैं। विशालकाय जंगलों में घूमने वाले हाथियों के पास अलग-थलग पड़ी जमीन के छोटे-छोटे हिस्से ही रह जाने के कारण जब जंगलों को कब्जाकर बनी बस्तियों में हाथियों का आक्रमण होता है, तो वहां भूखे हाथी एक ही रात में पूरे एक साल की फसल नष्ट कर देते हैं। ऐसी परिस्थितियों में आजीविका के लिए फसलों पर ही निर्भर रहने वाले समुदायों में आक्रोश पनपता है, जिसकी परिणति मानव और हाथी संघर्ष के रूप में होती है। इस संघर्ष में दोनों या तो घायल होते हैं या मारे जाते हैं।</p>
<p><strong>अस्तित्व संकट में :</strong></p>
<p>विभिन्न शोधों से यह स्पष्ट हो चुका है कि मानव बस्तियां और इसके परिणामस्वरूप उत्पन्न जैविक दबाव तथा सड़कें, रेलवे लाइन, नहरें और गलियारे वाले क्षेत्रों में अतिक्रमण इत्यादि रैखिक अवसंरचनाएं मानव बस्तियों में हाथियों के प्रवेश के प्रमुख कारण हैं। सड़कें, रेलवे लाइन, पाइपलाइन, कारखाने और मानव बस्तियां वन्यजीवों की आवाजाही में बाधा बन रही हैं, जिससे उनके प्राकृतिक आवास छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित हो रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार एशिया और अफ्रीका में यह सब हाथियों के अस्तित्व के लिए ठीक नहीं है। एशियाई हाथियों की वैश्विक आबादी का 60 प्रतिशत से अधिक भारत में है। वर्तमान में देश के 14 राज्यों में 65 हजार वर्ग किलोमीटर में हाथियों के लिए 30 वन क्षेत्र सुरक्षित हैं। हाथियों की संख्या में गिरावट के प्रमुख कारणों में आवास की क्षति के अलावा मानव-हाथी संघर्ष, उनके साथ कैद में दुर्व्यवहार और अवैध शिकार शामिल हैं।</p>
<p><strong>अवैध शिकार होना :</strong></p>
<p>एक अनुमान के अनुसार हाथी दांत, मांस और शरीर के अंगों की तलाश में शिकारियों द्वारा प्रतिदिन करीब सौ अफ्रीकी हाथियों को मार दिया जाता है। चीन में हाथी दांत की कीमतें कई गुना बढ़ जाने के कारण हाथियों का अवैध शिकार आसमान छूने लगा। एशिया में ही हाथी दांत के लिए हजारों अफ्रीकी हाथियों को मार डाला जाता है। हाथी दांत के लिए अवैध शिकार और चिड़ियाघरों तथा सर्कसों सहित बंदी वन्यजीव उद्योग के लिए जंगली जानवरों को पकड़ने के कारण अफ्रीकी और एशियाई हाथियों को जंगल में खतरा है। जंगली हाथियों का सीमा पार व्यापार भी होता है। भारत से नेपाल में जीवित हाथियों की तस्करी के कुछ मामले सामने भी आ चुके हैं। हालांकि भारत में एशियाई हाथी को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अनुसूची 1 के जानवर के रूप में संरक्षित किया गया है।</p>
<p><strong>विशेषज्ञों का मानना है :</strong></p>
<p>अध्ययन के मुताबिक बंदी हाथियों के साथ प्राय: काफी दुर्व्यवहार किया जाता है, जिनमें से अधिकांश पैर की समस्याओं और आंखों की बीमारियों से पीड़ित हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि करीबी पर्यटक संपर्क के लिए उपयोग किए जाने वाले सभी हाथियों को दर्दनाक प्रशिक्षण पद्धति से गुजरना पड़ता है, जिसमें युवा हाथी के बच्चों को उनकी मां से अलग करना, उन्हें अलग-थलग रखना, उन्हें भोजन-पानी से वंचित करना तथा जब तक वे टूट न जाएं और उन्हें डर से नियंत्रित नहीं किया जा सके, इसके लिए उन्हें बार.बार पीटना शामिल हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है अफ्रीकी तथा एशियाई हाथी मानव कैद में रहने के लिए उपयुक्त नहीं हैं और इनमें से बड़ी संख्या में मानव हिरासत में युवावस्था में ही मर जाते हैं। बहरहाल, विशेषज्ञों के मुताबिक मानव- हाथी संघर्ष को कम करने और संघर्षरत हाथियों को पकड़ने से रोकने में वन्यजीव गलियारों का निर्माण एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।</p>
<p><strong>-योगेश कुमार गोयल</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Aug 2025 12:04:55 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>गुजरात में रथ यात्रा के दौरान हाथी बेकाबू : भीड़ में अफरा-तफरी, 2 लोग घायल </title>
                                    <description><![CDATA[इसे अपना सौभाग्य माना कि उन्हें आषाढ़ी बीज के पावन अवसर पर भगवान के दर्शन, आरती और रथ यात्रा आरंभ करने का अवसर प्राप्त हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/during-the-chariot-yatra-in-gujarat-elephants-injured-in-uncontrollable/article-118700"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news60.png" alt=""></a><br /><p>अहमदाबाद। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अहमदाबाद स्थित जगन्नाथ मंदिर से आसाढी दूज भगवान जगन्नाथ की 148वीं रथयात्रा शुरुआत करने की 'पहिंद विधि की। हर साल भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री भगवान के रथ की पहिंद रस्म पूरी करते हैं और रथयात्रा शुरू कराते हैं। इस परंपरा को जारी रखते हुए पटेल ने लगातार चौथी बार भगवान जगन्नाथ के रथ को सोने की झाड़ू से साफ कर पहिंद समारोह पूरा किया और सभी नागरिकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इसे अपना सौभाग्य माना कि उन्हें आषाढ़ी बीज के पावन अवसर पर भगवान के दर्शन, आरती और रथ यात्रा आरंभ करने का अवसर प्राप्त हुआ।</p>
<p>रथ यात्रा के दौरान खड़िया के पास 17 हाथियों में से 2 हाथी डीजे के कारण बेकाबू हो गए। बेकाबू हाथियों ने 2 लोगों को घायल कर दिया। इससे यात्रा में अफरा-तफरी हो गई। इस हादसे में किसी को गंभीर चोट नहीं आई है। वन विभाग के कर्मियों ने स्थिति को संभाला।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Jun 2025 14:57:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर के हाथी गांव में अब हाई-टेक सुरक्षा: हाथियों पर रखी जाएगी 24 घंटे नज़र!</title>
                                    <description><![CDATA[हाथियों के संरक्षण और सुरक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए, एक निजी फाइनेंस कम्पनी ने अपनी महत्वाकांक्षी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) पहल के तहत जयपुर के हाथी गांव को 15 अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे दान किए हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/high-tech-security-elephants-will-now-be-kept-24-hours-in/article-117433"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news34.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हाथियों के संरक्षण और सुरक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए, एक निजी फाइनेंस कम्पनी ने अपनी महत्वाकांक्षी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) पहल के तहत जयपुर के हाथी गांव को 15 अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे दान किए हैं। यह पहल लगभग 70 हाथियों के जीवन में एक बड़ा बदलाव लाएगी, जिन्हें अब 24 घंटे निगरानी और बेहतरीन सुरक्षा मिल सकेगी।</p>
<p>सहायक वन संरक्षक वन्यजीव, चिड़ियाघर जयपुर प्राची चौधरी ने बताया कि यह पहल हाथियों के कल्याण और उनके सुरक्षित वातावरण के प्रति एक महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इन कैमरों से न केवल हाथियों की गतिविधियों पर नज़र रखी जा सकेगी, बल्कि किसी भी अनधिकृत गतिविधि या खतरे को भी तुरंत भांपा जा सकेगा, जिससे हाथी गांव और उसके निवासियों के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित होगा। इस अवसर पर रेंजर गौरव चौधरी भी मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Jun 2025 11:59:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>श्रीलंका में ट्रेन नेे जंगली हाथियों को मारी टक्कर : हादसे में 6 हाथियों की मौत, 2 घायल; पटरी पर उतरा ट्रेन का इंजन </title>
                                    <description><![CDATA[पूर्वी श्रीलंका के बट्टिकलोआ से राजधानी कोलंबो की ओर जा रही एक ट्रेन की चपेट में आने से छह जंगली हाथियों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/6-wild-elephants-killed-by-hitting-the-train-2-injured%C2%A0/article-104914"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/pze-(5)6.png" alt=""></a><br /><p>कोलंबो। पूर्वी श्रीलंका के बट्टिकलोआ से राजधानी कोलंबो की ओर जा रही एक ट्रेन की चपेट में आने से छह जंगली हाथियों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए है। पुलिस ने बताया कि यह दुर्घटना गुरुवार सुबह श्रीलंका के उत्तर मध्य प्रांत में गैल ओया रेलवे स्टेशन के पास हुई।</p>
<p>पुलिस ने बताया कि दुर्घटना में ट्रेन का इंजन पटरी से उतर गया लेकिन कोई यात्री घायल नहीं हुआ। पिछले अक्टूबर में इसी रेल लाइन पर इसी तरह की दुर्घटना में दो हाथियों की मौत हो गई थी और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Feb 2025 14:10:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हाथी कल्याण सोसायटी की बैठक में हाथियों से जुड़े मुद्दों पर होगी चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[बैठक में हाथीगांव की गतिविधियों और प्रबंधन और विकास के संबंध में समीक्षा करने के साथ ही बैठक में मुख्य बिंदुओ पर चर्चा होगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/issues-related-to-elephants-will-be-discussed-in-the-meeting/article-83967"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/2233-copy23.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हाथीगाँव में सवारी की दरों में बढ़ोतरी को लेकर अरण्य भवन के बैठक कक्ष संख्या बी-209 में सोमवार को सुबह साढ़े 11 बजे हाथी कल्याण सोसायटी जयपुर की कार्यकारिणी की बैठक होगी। इसमें मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), जयपुर, टी. मोहन राज सहित पुरातत्व, पर्यटन विभाग के अतिरिक्त अन्य विभागों के अधिकारी भी शामिल होंगे।</p>
<p>बैठक में हाथीगांव की गतिविधियों और प्रबंधन और विकास के संबंध में समीक्षा करने के साथ ही बैठक में मुख्य बिंदुओ पर चर्चा होगी। जिसमें साल 2024-25 की वार्षिक कार्य योजना पर विचार विमर्श तथा अनुमोदन, वर्ष 2023-24 की आय का विवरण पर विचार विमर्श और अनुमोदन एवं ऑडिट रिपोर्ट,  मृत हाथियों की मुआवजा राशि, हाथी गावं में निर्मित नवीन हाथी ठान आवंटन, हाथी गांव में हाथी सवारी टिकिट दर बढाने, हाथीगांव गेस्ट हाउस आर.टी.डी.सी को लीज पर देने सहित अन्य विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jul 2024 14:53:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिम्बाब्वे के नेशनल पार्क में सूखे से सौ हाथियों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[अंतर्राष्ट्रीय पशु कल्याण कोष (आईएफएडब्ल्यू) ने एक बयान में कहा, मौजूदा अल नीनो के कारण गर्मियों में बारिश पांच सप्ताह देर से हो रही है इससे जिम्बाब्वे के सबसे बड़े संरक्षित क्षेत्र, लगभग 45,000 हाथियों का घर, ह्वांगे नेशनल पार्क में कई हाथियों की मौत हो चुकी है।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/hundred-elephants-die-due-to-drought-in-zimbabwes-national-park/article-64024"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/elephant.png" alt=""></a><br /><p>हरारे। जिम्बाब्वे के सबसे बड़े खेल अभयारण्य ह्वांगे नेशनल पार्क में अल नीनो के कारण पड़े सूखे से कम से कम 100 हाथियों की मौत हो गई है। अंतरराष्ट्रीय पशु कल्याण और संरक्षण समूह ने सोमवार को यह जानकारी दी।  </p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय पशु कल्याण कोष (आईएफएडब्ल्यू) ने एक बयान में कहा, मौजूदा अल नीनो के कारण गर्मियों में बारिश पांच सप्ताह देर से हो रही है इससे जिम्बाब्वे के सबसे बड़े संरक्षित क्षेत्र, लगभग 45,000 हाथियों का घर, ह्वांगे नेशनल पार्क में कई हाथियों की मौत हो चुकी है।  </p>
<p>बयान में कहा गया है,''पानी की कमी के कारण कम से कम 100 हाथियों के मरने की खबर है।''</p>
<p>आईएफएडब्ल्यू ने कहा कि पार्क में 104 सौर ऊर्जा संचालित बोरहोल अत्यधिक तापमान से निपटने के लिए अपर्याप्त हैं, जिससे मौजूदा जलस्रोत सूख रहे हैं और वन्यजीवों को भोजन और पानी की तलाश में लंबी दूरी तक चलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Dec 2023 18:54:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हथिनियों के खाने में जहर मिलाने का आरोप, एफआईआर दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[मंगलवार को मृत हथिनी लक्ष्मी के शव का पोस्टमार्टम किया गया। इस दौरान सैंपल लेकर जाँच के लिए फ़ॉरेंसिक लैब जयपुर और बरेली स्थित आईवीआरआई सेंटर भेजे जाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/fir-registered-for-mixing-poison-in-the-food-of-elephants/article-58204"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/elephant.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हाथीगाँव में रहवास कर रही 57 नम्बर हथिनी लक्ष्मी की मौत के बाद तीन और हथिनिया बीमार चल रही है। हाथी मालिक सद्दीक़ खान ने आरोप लगाया कि किसी ने हथिनियों को बाटियों में ज़हर मिलाकर खिलाया है। इसे लेकर थाने में एफ़आईआर भी दर्ज कराई है। वहीं वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सैंपलों की जांच रिपोर्ट आने के बाद स्थिति साफ़ हो पाएगी।</p>
<p>गौरतलब है कि मंगलवार को मृत हथिनी लक्ष्मी के शव का पोस्टमार्टम किया गया। इस दौरान सैंपल लेकर जाँच के लिए फ़ॉरेंसिक लैब जयपुर और बरेली स्थित आईवीआरआई सेंटर भेजे जाएंगे। हथिनी की मौत के मामले में दैनिक नवज्योति ने बुधवार को ख़बर भी प्रकाशित की थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Sep 2023 16:21:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब गजराज भी कद्रदानों के लिए तरसे</title>
                                    <description><![CDATA[ऐतिहासिक आमेर महल में शाही शानो-शौकत की निशानी रहा गजराज अब कद्रदानों को तरस गया है। सैलानियों की आवक कम होने से मालिकों-महावतों के लिए हाथियों को पालना मुश्किल हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-elephants-wait-of-tourists/article-12729"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/ele-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ऐतिहासिक आमेर महल में शाही शानो-शौकत की निशानी रहा गजराज अब कद्रदानों को तरस गया है। सैलानियों की आवक कम होने से मालिकों-महावतों के लिए हाथियों को पालना मुश्किल हो गया है। उन्होंने अब तक सफेद हाथियों के बारे में किस्से, कहानियों और मुहावरों में ही सुना था, लेकिन अब महंगाई की मार और पर्यटन उद्योग की बेरुखी ने पारम्परिक हाथियों को सफेद हाथी की तुलना में ला खड़ा कर दिया है।</p>
<p><strong>हाथी की एक दिन की खुराक का खर्चा 3500 रुपए</strong><br />महावत बताते हैं कि कोरोना से पहले पर्यटक यहां हाथी सवारी के लिए लाइन लगाकर अपनी बारी का इंतजार करते थे। समय का फेर देखिए, अब हाथी सैलानियों का इंतजार करते हैं। महावत हिसाब लगाकर बताते हैं कि प्रति हाथी की एक दिन की खुराक पर 3500 रुपए खर्च होते हैं। पहले ये खर्चा 2500 हुआ करता था। गन्ना पहले 550 रुपए क्विंटल मिलता था, अब 800 रुपए क्विंटल हो गया है। जो रिंजका पहले 300 रुपए का 40 किलो मिलता था, वह अब 750 रुपए का मिल रहा है।</p>
<p><strong>हथिनियों का बाहुल्य है</strong><br />जयपुर में तकरीबन 80 हाथी हैं। इनमें से 68 हाथी, हाथी गांव में रह रहे हैं। हाथियों की इस महफिल में मादा हाथियों का बाहुल्य है। नर हाथी यहां ना के बराबर कहे जा सकते हैं। हथनियों अब सैलानियों की इस बेकद्री को देखकर मायूस नजर आती हैं।</p>
<p><strong>मानते हैं पारिवारिक सदस्य</strong><br />हाथी मालिक और महावतों के लिए गजराज महज आमदनी का जरिया नहीं हैं, बल्कि वे उससे पारिवारिक सदस्य से भी ज्यादा लगाव रखते हैं। हाथी मालिक बल्लू खां का कहना है कि जब बुरा वक्त आया, तो कुछ हाथी मालिकों ने हाथियों के लिए जेवरात बेचने या गिरवी रखने से गुरेज नहीं किया।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jun 2022 10:16:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रेम के रंग में रंगी हाथियों वाली होली</title>
                                    <description><![CDATA[ रंगों के त्यौहार के दिन शाम के समय हाथियों पर बैठकर होली खेली जाती थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/holi-with-elephants-colored-in-love/article-6258"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/hel.jpg" alt=""></a><br /><p>रंगीले त्यौहार होली पर हर साल जयपुर में हाथी होली के नजारे को देखने के लिये समूचा शहर टूट कर जुटता था और देखते ही देखते वहां हर्षोल्लास का वातावरण बन जाता था। जहां कभी राजाओं के शौक पूरा करने हेतु हाथियों की लड़ाई कराई जाती थी,उसी चौगान स्टेडियम पर भी कई बार हाथी होली खेली गई थी।</p>
<p><br /> रंगों के त्यौहार के दिन शाम के समय हाथियों पर बैठकर होली खेली जाती थी। इस अनूठी गज होली को देखने के लिए भारतीय और विदेशी पर्यटकों के अलग-अलग दल बनाए जाते थे तथा होली में चार चांद लगाने के लिये हाथियों के सवारो के सिर पर रंग-बिरंगी पगड़ियां बांधी जाती थीं। हाथियों को राजसी पोशाकों से सजाया जाता था। महावतों का निर्देश पा हाथी झूमने लगते थे और हंसते-हंसाते हाथी होली आई,के स्वर के साथ हाथियों पर बैठे भारतीय दल के सदस्य अपने हाथों में छुपी थैलियों में से हरा,नीला,पीला,लाल आदि रंग निकाल कर विदेशी लोगों पर उछालते थे। बैंडबाजे बज उठते थे और क्षणभर में आसमान का नजारा रंगीन हो जाता था।</p>
<p><br />संगीत के मधुर स्वरों एवं उड़ते विभिन्न रंगों का नजारा देख हाथियों पर आराम से बैठे विदेशी दल के लोग अचंभित हो उठते। दर्शकों में विशेषकर बच्चों को यह इतना आकर्षित करती थी कि वे भी इस मस्ती में डूब जाने को बेताब हो उठते थे। इस विचित्र होली को देखकर,हाथी भी मस्त हो जाते और वे गुलाल उछालने वालों की ओर बढ़-बढ़ कर उन्हें भी इस मनोरंजक खेल में सम्मिलित करने के लिए संकेत देते। क्षणभर में वे हाथियों को लाल, पीले,नीले रंगों से रंग देते और हाथी भी झूम-झूम कर नाचने लगते। जब पहली बार हाथी होली खेली गई तब इस अनूठी होली को विश्वभर में सराहा गया। बीबीसी लंदन ने इस होली पर एक फिल्म बना कर दुनिया के लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया था। उसके बाद से यहां पर हर वर्ष हाथी होली,खेली जाती।  </p>
<p><br />  हाथी होली का शुभारंभ चमकीली रंग-बिरंगी पोशाकें पहने हाथियों के राजसी जुलूस के साथ जिनके मस्तक कलात्मक ढंग से सिंदूर से सजे होते उनके ऊपर बैठे होते थे पगड़ी पहने महावत और वे मैदान के चक्कर लगाते हुए हर आगन्तुक का स्वागत करते। इस जुलूस में पालकी में दुल्हन के साक्षात दर्शन होते थे। दूसरी ओर मजदूरी के दृश्य में अनाप-शनाप सामान लादे हाथी अपना अलग ही परिचय देते हुये आगे बढ़ते जाते। जब सैकड़ों पर्यटकों एवं दर्शकों की भीड़ इकट्ठे हो जाती थी तो तालियों की गड़गड़ाहट व हंसी की आवाज से समूचा मैदान गुंजायमान हो जाता था। हाथियों की दौड़ में जब भारी भरकम हाथियों को दौड़ते देख उपस्थित जन समूह हंसते हंसते लोटपोट हो जाते थे। प्रेम व सद्भाव के प्रतीक गुलाल का भरपूर प्रयोग कर विदेशी एवं भारतीय एक-दूसरे से गले मिल कर दुनिया को प्रेम का संदेश देते थे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Mar 2022 15:44:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हाथियों के लिए दो दिवसीय मेडिकल कैम्प शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[आमेर कुण्डा स्थित हाथीगाँव में दो दिवसीय मेडिकल कैम्प की शुरुआत हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%A6%E0%A5%8B-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AA-%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%82/article-3788"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/elephant.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आमेर कुण्डा स्थित हाथीगाँव में मंगलवार से दो दिवसीय मेडिकल कैम्प की शुरुआत हुई। कैम्प में हाथियों के फ़िकल, ब्लड, ट्रंक वास सहित अन्य सेम्पल जाँच के लिए एकत्रित किए गए।  जयपुर जू के डॉ. अशोक तंवर ने बताया कि इस दौरान हाथीमालिकों एवं महावतों को हाथियों को दी जाने वाली दवाइयों एवं डाइट की जानकारी भी दी गई। हाथी मालिक बल्लू खां ने बताया कि हाथियों को सर्दी से बचाने के लिए रोज़ तेल मालिश की जा रही है। गौरतलब है कि इस मेडिकल कैम्प में तक़रीबन 80 हाथियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Jan 2022 14:30:13 +0530</pubDate>
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                <title>  10 दिन से वन विभाग ढूंढ रहा है इन हाथियों को, अभी तक नहीं मिले</title>
                                    <description><![CDATA[फर्जी ट्रांसपोर्ट सर्टिफिकेट बना यूपी से जयपुर लाए तीन हाथी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/10-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97-%E0%A4%A2%E0%A5%82%E0%A4%82%E0%A4%A2-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B--%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%87/article-3215"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/elephant-file-photo.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। उत्तर प्रदेश से जयपुर में अवैध रूप से हाथी लाने का मामला सामने आया है। कुछ दिन पहले वन विभाग को सूचना मिली थी कि यूपी से फर्जी ट्रांसपोर्ट सर्टिफिकेट के जरिए तीन हाथियों को जयपुर लाया गया है। इस संबंध में विभाग के उच्चाधिकारियों ने स्टाफ को इसकी सूचना दी थी। इस पर स्टाफ ने हाथियों की खोजबीन के लिए जगह-जगह दबिश दी, लेकिन अभी तक हाथियों का पता नहीं लगा। वन अधिकारियों का कहना है कि बार-बार हाथियों की लोकेशन बदली जा रही है, जिससे उन्हें ढूंढने में दिक्कतों का सामना कर पड़ रहा है। <br /><br />फर्जी ट्रांसपोर्ट सर्टिफिकेट से यूपी से तीन हाथी जयपुर लाए गए हैं। इन हाथियों को ढूंढने के प्रयास किए जा रहे हैं। <br />-<strong>दीपक शर्मा, रेंजर</strong> <br /><br /><strong>माइक्रोचिप लगे हाथियों की मिली जानकारी</strong><br />जानकारी के अनुसार यूपी से जोनाली, चूनीमाला और गोलाबी नाम के 3 हाथियों को जयपुर लाया गया है। इसमें जोनाली 961001000001037, चूनीमाला 961001000004645 और गोलाबी का माइक्रोचिप नम्बर 961001000006253 है। जो व्यक्ति इन्हें यूपी से जयपुर लाए उन्होंने स्वयं ही फर्जी ट्रांसपोर्ट सर्टिफिकेट बना लिया था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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