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                <title>Lebanon Conflict - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Lebanon Conflict RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>हिज़बुल्ला युद्धविराम पर सहमत : इज़रायल को उल्लंघन के खिलाफ दी चेतावनी, युद्धविराम के लिए रखी शर्ते</title>
                                    <description><![CDATA[लेबनान के सैन्य संगठन हिज्बुल्लाह ने इजरायल के साथ युद्धविराम पर सहमति जताई है। हिज्बुल्लाह नेता महमूद कोमाती ने स्पष्ट किया कि संगठन तभी पालन करेगा जब इजरायल भी अपनी शर्तों पर टिका रहे। उन्होंने पुराने अनुभवों का हवाला देते हुए 'इजरायली विश्वासघात' के प्रति आगाह किया और फिलहाल दक्षिणी लेबनान में यात्रा न करने की सलाह दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/hezbollah-agrees-to-ceasefire-warns-israel-against-violating-conditions-laid/article-150647"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(4)8.png" alt=""></a><br /><p>बेरुत। लेबनान स्थित प्रमुश शिया मुस्लिम राजनीतिक अर्ध सैन्य संगठन हिजबुल्लाह ने युद्धविराम के लिए सहमति व्यक्त की है लेकिन शर्त रखी है कि इजरायल भी इसका पालन करेगा। हिजबुल्लाह की राजनीतिक परिषद के उप प्रमुख महमूद कोमाती ने यह जानकारी दी है हिजबुल्लाह ने इस शर्त पर इजरायल के साथ युद्धविराम पर सहमति व्यक्त की है कि दोनों पक्ष इसका पालन करेंगे। उप प्रमुख महमूद कोमाती ने कहा, "हम युद्धविराम पर सहमत हुए, लेकिन हम 2024 के समझौते के अनुभव को दोहराने की अनुमति नहीं देंगे, जहां हमने इसका पालन किया जबकि इजरायली पक्ष अपने दायित्वों से मुकर गया।"</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि हम इजरायली विश्वासघात को लेकर सतर्क हैं और उन्होंने इस समय दक्षिणी लेबनान की यात्रा न करने की सलाह दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 14:26:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा समर्थन : 18 देशों ने की तत्काल युद्धविराम की अपील, लेबनान को कूटनीतिक वार्ताओं का हिस्सा बनाना अनिवार्य </title>
                                    <description><![CDATA[लेबनान में शांति के लिए 18 देशों का महा-अभियान शुरू हुआ है। ब्रिटेन और फ्रांस सहित इन देशों ने तत्काल युद्धविराम और मानवीय संकट रोकने की अपील की है। इजरायल और हिज्बुल्ला के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने हेतु उन्होंने संप्रभुता का सम्मान करने और कूटनीतिक वार्ता के माध्यम से स्थायी समाधान निकालने पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/international-support-increased-to-end-the-west-asia-crisis-18/article-150559"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/midil-esat.png" alt=""></a><br /><p>बेरुत। लेबनान में जारी जंग को रोकने के लिए कनाडा-ब्रिटेन समेत 10 देशों की शुरू की गयी शांति पहल अब बड़े वैश्विक अभियान में बदलती नजर आ रही है। मंगलवार को जारी इस साझा बयान का समर्थन करते हुए यूरोप के आठ अन्य देश भी इसमें शामिल हो गये हैं। इससे अब कुल 18 देशों ने एक सुर में लेबनान में तत्काल युद्धविराम की अपील की है। इन देशों ने बढ़ते मानवीय संकट और विस्थापन पर गहरी चिंता जताते हुए स्पष्ट किया है कि क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए लेबनान को कूटनीतिक वार्ताओं का हिस्सा बनाना अनिवार्य है।</p>
<p>बयान में मार्च में लेबनान में संयुक्त राष्ट्र के तीन शांति रक्षकों की हत्या की भी निंदा की गयी है। संयुक्त राष्ट्र ने पिछले हफ्ते तीन इंडोनेशियाई शांति रक्षकों की मौत की शुरुआती जांच रिपोर्ट जारी की थी। इसमें पाया गया कि ये दो हमले संभवतः इजरायली टैंक के गोले और एक आईईडी के कारण हुए थे। मुमकिन है कि वह हिजबुल्ला ने लगाया हो। संयुक्त बयान में कहा गया, "हम ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, क्रोएशिया, साइप्रस, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, ग्रीस, आइसलैंड, लक्जमबर्ग, माल्टा, नीदरलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, स्लोवेनिया, स्पेन, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम के विदेश मंत्री, क्षेत्रीय तनाव कम करने के प्रयासों में लेबनान को शामिल करने का आह्वान करते हैं और सभी पक्षों से एक स्थायी राजनीतिक समाधान की दिशा में काम करने का आग्रह करते हैं।"</p>
<p>लेबनान में युद्ध जारी रहने से मौजूदा क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिशों को खतरा पैदा हो गया है, जिसका सभी पक्षों को पूरी तरह से सम्मान किया जाना चाहिए। इन देशों ने इजरायल के साथ सीधी बातचीत शुरू करने की लेबनान की पहल और अमेरिका की मध्यस्थता में वार्ता शुरू करने की इजरायल की स्वीकृति का स्वागत किया है। बयान में कहा गया है, "हम दोनों पक्षों से इस अवसर का लाभ उठाने का आह्वान करते हैं। सीधी बातचीत लेबनान, इजरायल और इस पूरे क्षेत्र के लिए स्थायी सुरक्षा का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। हम उनका समर्थन करने के लिए तैयार हैं। इसलिए हम सभी पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे तनाव कम करें और अमेरिका व ईरान के बीच युद्धविराम से मिले इस अवसर का फायदा उठाएं।"</p>
<p>इसमें कहा गया है "हम इजरायल के खिलाफ हिजबुल्ला के हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, जिन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए। हम आठ अप्रैल को लेबनान पर इजरायल की ओर से किये गये बड़े हमलों की भी सख्त निंदा करते हैं। इसमें लेबनानी अधिकारियों की साझा की गयी ताजा जानकारियों के अनुसार, 350 से अधिक लोग मारे गये और 1,000 से अधिक घायल हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुसार नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की रक्षा की जानी चाहिए।"</p>
<p>इन देशों ने 'लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल' के खिलाफ हमलों की भी कड़े शब्दों में निंदा की और दोहराया कि संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षकों की सुरक्षा और सलामती हर समय सुनिश्चित की जानी चाहिए। नेतृत्व समूह ने लेबनानी जनता और वहां के अधिकारियों के प्रति अपनी पूरी एकजुटता और अटूट समर्थन व्यक्त किया। इसके साथ ही, लेबनान सरकार के साथ समन्वय कर 10 लाख से अधिक विस्थापित लोगों को आपातकालीन सहायता प्रदान करने का संकल्प लिया।</p>
<p>इन देशों ने लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 (2006) को पूरी तरह से लागू करने के महत्व की पुष्टि की। वे अपने क्षेत्र पर पूर्ण संप्रभुता का प्रयोग करने में लेबनान का समर्थन करना जारी रखेंगे।<br />गौरतलब है कि लेबनान में शांति बहाली के लिए यह पहली कोशिश नहीं है। इससे पहले मार्च 2026 के आखिरी हफ्ते में यूरोपीय संघ (ईयू) के नेतृत्व में बेल्जियम, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों ने भी इसी तरह का आह्वान किया था।</p>
<p>इसके अलावा, सितंबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भी अमेरिका और फ्रांस ने एक अस्थायी युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था। इसे तब सऊदी अरब और कतर जैसे क्षेत्रीय देशों का भी साथ मिला था। हालांकि, मंगलवार का यह ताजा कदम इसलिए खास है, क्योंकि इसकी शुरुआत भले ही 10 देशों के छोटे समूह ने की थी, लेकिन देखते ही देखते इसमें यूरोप के कई प्रभावशाली राष्ट्र जुड़ते गये, जो इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती एकजुटता को दर्शाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 18:28:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>जेडी वैंस का दावा: अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम समझौते में लेबनान शामिल नहीं, समझौते की तीन धाराओं के उल्लंघन का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ हुए युद्धविराम में लेबनान शामिल नहीं था। उन्होंने ईरानी दावों को 'गलतफहमी' बताते हुए कहा कि संघर्ष विराम की प्रक्रिया जटिल होती है। वैंस के अनुसार, इजरायल और खाड़ी देशों की जवाबी कार्रवाई समझौतों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सुरक्षा का हिस्सा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/jd-vance-claims-lebanon-is-not-included-in-the-ceasefire/article-149657"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/jd-vance.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने ईरान के साथ हुए युद्धविराम पर कहा कि उनका मानना है कि ईरान को यह गलतफहमी थी कि लेबनान को भी इसमें शामिल किया गया है। श्री वैंस बुधवार को हंगरी से रवाना होते समय पत्रकारों से बातचीत में ये बातें कही। जेडी वैंस ने कहा कि युद्धविराम हमेशा पेचीदा होते हैं और उन्होंने ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ के इस दावे का जवाब दिया कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्धविराम समझौते की तीन धाराओं का उल्लंघन किया है।</p>
<p>ईरानी संसद के अध्यक्ष ने दावा किया था कि अमेरिका युद्धविराम समझौते के तीन बिंदुओं का उल्लंघन कर रहा है। उन्होंने लेबनान में लगातार गोलीबारी, कथित रूप से ईरानी हवाई क्षेत्र में ड्रोन के प्रवेश और ईरान के यूरेनियम संवर्धन के अधिकार से इनकार का हवाला दिया। जेडी वेंस ने कहा कि अगर श्री ग़ालिबफ़ के असहमति के केवल तीन बिंदु हैं, तो निश्चित रूप से कई बिंदुओं पर सहमति भी होगी। उपराष्ट्रपति ने कहा, "सबसे पहले, उन्होंने ईरान पर हुए एक कथित हमले का जिक्र किया और बताया कि यह युद्धविराम का उल्लंघन था। युद्धविराम हमेशा ही पेचीदा होते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा युद्धविराम की घोषणा के एक घंटे बाद ही कई मिसाइलें दागी गईं, इजरायल ने जवाबी कार्रवाई की और कुछ खाड़ी अरब देशों ने भी जवाबी कार्रवाई की।</p>
<p>जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका ने कभी भी लेबनान को युद्धविराम समझौते में शामिल करने का वादा नहीं किया था, भले ही ईरान ने ऐसा दावा किया हो और उन्होंने इसे दोनों पक्षों के बीच एक गलतफहमी करार दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 14:35:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>युद्धविराम समझौते की घोषणा के बाद इज़रायली हमलों में लेबनान में 254 लोगों की मौत : 100 से अधिक कमांड केंद्रों और सैन्य स्थलों को बनाया गया निशाना, हिज़बुल्लाह ने खाई जवाबी कार्रवाई की कसम</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के साथ युद्धविराम के बावजूद, इजरायल ने लेबनान पर सबसे बड़ा हवाई हमला किया है। 10 मिनट में 100 कमांड सेंटर तबाह कर दिए गए, जिसमें 182 लोग मारे गए। अमेरिका ने स्पष्ट किया कि हिजबुल्लाह इस समझौते का हिस्सा नहीं है। लेबनान में अब तक 12 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/182-people-killed-in-lebanon-in-israeli-attacks-after-the/article-149660"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hizbullah.png" alt=""></a><br /><p>यरूशलेम। लेबनान पर इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 254 लोग मारे गए और 1,165 अन्य घायल हो गए। यह जानकारी अल जज़ीरा ने लेबनानी नागरिक सुरक्षा के हवाले से गुरुवार को दी। बुधवार को, इजरायली विमानों ने मध्य बेरूत के मज़रा, मनारा, ऐन अल मरेसेह और बरबोर इलाकों के साथ-साथ दक्षिणी उपनगरों के आठ इलाकों पर हमला किया। लेबनानी आंदोलन हिजबुल्लाह ने कहा कि इजरायल द्वारा लेबनान पर की गई बमबारी आंदोलन को जवाबी कार्रवाई का अधिकार देती है।</p>
<p>तुर्की ने लेबनान पर इजरायल के हमलों की निंदा की है, जिसके परिणामस्वरूप कई लोग हताहत हुए हैं। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "हम लेबनान पर इजरायल के बढ़ते हमलों की कड़ी निंदा करते हैं जिनके परिणामस्वरूप भारी जानमाल का नुकसान हुआ है। ये हमले देश में मानवीय स्थिति को और भी बदतर बना रहे हैं।" मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में घोषित युद्धविराम के बावजूद, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार शांति एवं स्थिरता स्थापित करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को लगातार कमजोर कर रही है। बयान में कहा गया कि तुर्की ने लेबनान की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना समर्थन दोहराया है।</p>
<p>इजरायल द्वारा पूरे लेबनान में हवाई हमलों की एक बड़ी श्रृंखला चलाई गई जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए और घायल हुए। अधिकारियों ने कहा कि ईरान में युद्धविराम के बावजूद लेबनानी सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह के खिलाफ युद्ध जारी है। यह जानकारी बीबीसी ने गुरुवार को दी। इजरायल ने इसे इस संघर्ष में हवाई हमलों की सबसे बड़ी श्रृंखला कहा जिसमें 10 मिनट के भीतर हिजबुल्लाह के 100 से अधिक कमांड केंद्रों और सैन्य स्थलों को निशाना बनाया गया।</p>
<p>बेरुत के दक्षिणी उपनगर, दक्षिणी लेबनान और पूर्वी बेका घाटी को निशाना बनाया गया। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कम से कम 182 लोग मारे गए, यह संख्या बढ़ने की संभावना है, और 890 लोग घायल हुए हैं। बेरुत पर हुए अब तक के सबसे बड़े हवाई हमले के स्थल पर, घंटों बाद भी, आपातकालीन कर्मी क्षतिग्रस्त इमारतों में खोजबीन कर रहे हैं।</p>
<p>ये हमले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय द्वारा पाकिस्तान के इस दावे को खारिज करने के बाद हुए, जिसने अमेरिका और ईरान के बीच समझौते में मध्यस्थता की थी और कहा था कि युद्धविराम में लेबनान का संघर्ष भी शामिल है। वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने भी कहा था कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं था। युद्धविराम समझौते की घोषणा के बाद से किसी भी हमले की जिम्मेदारी न लेने वाले हिजबुल्लाह ने कहा कि समूह को जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार है और विस्थापित परिवारों को घर लौटने की कोशिश करने से पहले औपचारिक युद्धविराम की घोषणा का इंतजार करने की चेतावनी दी।</p>
<p>लेबनानी राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि वह क्षेत्रीय शांति में लेबनान को शामिल करने के प्रयासों को जारी रखेगा। हिज़्बुल्लाह और इज़रायल के बीच दशकों से चले आ रहे संघर्ष में नवीनतम तनाव तब उत्पन्न हुआ जब समूह ने युद्ध के प्रारंभिक चरण में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के प्रतिशोध में और नवंबर 2024 में हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद लेबनान पर इज़रायल के लगभग दैनिक हमलों के जवाब में इज़रायल पर रॉकेट दागे।</p>
<p>लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि युद्ध के परिणामस्वरूप अब तक 1,700 से अधिक लोग मारे गए हैं जिनमें कम से कम 130 बच्चे शामिल हैं हालांकि मंत्रालय ने लड़ाकों और नागरिकों के बीच कोई अंतर नहीं बताया है। इजराइल का कहना है कि उसने लगभग 1,100 हिजबुल्लाह लड़ाकों को मार गिराया है। 12 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं जो आबादी का पांचवां हिस्सा, जिनमें से अधिकांश शिया मुस्लिम समुदाय से हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 12:43:07 +0530</pubDate>
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                <title>इजरायली सुरक्षा बलों और कार्यकर्ताओं के बीच झड़प: युद्ध के विरोध में प्रदर्शन कर रहे 17 लोगों गिरफ्तार, 50 से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी</title>
                                    <description><![CDATA[इजरायली पुलिस ने तेल अवीव में युद्ध के खिलाफ रैली कर रहे 17 लोगों को हिरासत में लिया है। प्रदर्शनकारी लेबनान, ईरान और गाजा में सैन्य कार्रवाई रोकने की मांग कर रहे थे। सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और भीड़ बढ़ने पर घुड़सवार पुलिस ने बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया। क्षेत्र में युद्ध के बढ़ते तनाव के बीच यह झड़प हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/clash-between-israeli-security-forces-and-activists-17-people-protesting/article-149174"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/isa.png" alt=""></a><br /><p>तेल अविव। इजरायली पुलिस ने तेल अवीव के थिएटर स्क्वायर पर युद्ध के विरोध में रैली कर रहे 17 लोगों को हिरासत में लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को इस प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी अधिकारियों से लेबनान, ईरान और गाजा पट्टी में जारी सैन्य कार्रवाई को समाप्त करने की मांग कर रहे थे। हालांकि, इस रैली को मंजूरी दी गई थी, लेकिन यह नागरिक सुरक्षा नियमों के उल्लंघन में आयोजित की गई थी। नियमों के मुताबिक, गोलाबारी के खतरे के कारण खुले क्षेत्रों में 50 से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदियां हैं।</p>
<p>मौके पर मौजूद संवाददाताओं के अनुसार, घुड़सवार पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया, जिससे सुरक्षा बलों और कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर इजरायली उच्च न्यायालय के उस आदेश के उल्लंघन का आरोप लगाया, जिसमें हबीमा स्क्वायर पर 600 से कम प्रतिभागियों वाले प्रदर्शनों को तितर-बितर करने से पुलिस को रोका गया था। जब भीड़ निर्धारित संख्या से अधिक हो गई, तो पुलिस ने इसे अवैध घोषित कर कार्रवाई शुरू कर दी।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी से ईरान में हमले शुरू किए थे, जिसके जवाब में ईरान इजरायली क्षेत्र और पश्चिमी एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है। इज़रायल और लेबनानी हिज़बुल्लाह के बीच तनाव दो मार्च की रात से और बढ़ गया, जब हिज़बुल्लाह ने रॉकेट हमले तेज कर दिए। जवाब में इज़रायल ने दक्षिणी क्षेत्रों, बेका घाटी और बेरूत के बाहरी इलाकों सहित लेबनान पर बड़े पैमाने पर हमले किए। 16 मार्च को इज़रायली सेना ने आधिकारिक तौर पर दक्षिणी लेबनान में ज़मीनी अभियान शुरू करने की घोषणा की थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 16:36:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>यूनिसेफ की चेतावनी: लेबनान में सामूहिक विस्थापन; तीन हफ्ते में 3,70,000 बच्चों समेत 10 लाख लोग हुए बेघर, तत्काल युद्धविराम की अपील</title>
                                    <description><![CDATA[इजरायली पीएम नेतन्याहू ने दक्षिणी लेबनान में सैन्य अभियान बढ़ाने का निर्देश दिया है, जिससे युद्ध भीषण हो गया है। यूनिसेफ ने चेतावनी दी है कि 20% आबादी विस्थापित हो चुकी है, जिसमें 3.7 लाख बच्चे शामिल हैं। बमबारी से स्कूल और जल प्रणालियां ध्वस्त हैं, जिससे लाखों मासूम बेघर होकर गंभीर मनोवैज्ञानिक आघात और असुरक्षा झेल रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/unicef-warns-of-mass-displacement-in-lebanon-1-million-people/article-148433"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/unicef.png" alt=""></a><br /><p>बेरूत। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक ओर सेना को दक्षिणी लेबनान में आक्रमण का विस्तार करने का निर्देश दिया है, वहीं दूसरी ओर यूनिसेफ ने चेतावनी दी है कि लेबनान में तेजी से बढ़ते संघर्ष ने बड़ा मानवीय संकट पैदा कर दिया है। मात्र तीन हफ्तों के भीतर देश की लगभग 20 प्रतिशत आबादी विस्थापित हो गयी है। प्रभावित लोगों में 3,70,000 से अधिक बच्चे शामिल हैं। यूनिसेफ के अनुसार, हर दिन औसतन 19,000 बच्चे अपना घर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।</p>
<p>इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने रविवार को नॉर्दर्न कमांड से जारी वीडियो संदेश में कहा है, "मैंने अभी मौजूदा सुरक्षा बफर जोन का और विस्तार करने का निर्देश दिया है। हम इजरायल के उत्तर की स्थिति को मौलिक रूप से बदलने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" इसके साथ ही उन्होंने कब्जे वाले 'गाजा मॉडल' को दोहराने के अपने देश के घोषित प्रयास को आगे बढ़ाया। यूनिसेफ के अधिकारियों का कहना है कि विस्थापन की गति और पैमाना हाल के वर्षों में अभूतपूर्व है। पूरे देश में 10 लाख से अधिक लोग अपने घरों से भागने को मजबूर हुए हैं। इनमें से कई दूसरी, तीसरी या चौथी बार विस्थापित हुए हैं। सहायता समूहों ने इस स्थिति को बेहद अराजक और अस्थिर करने वाला बताया है।</p>
<p>मानवीय सहायता कर्मियों ने बच्चों तक पहुंचने में गंभीर चुनौतियों की सूचना दी है, विशेष रूप से दक्षिणी लेबनान में, जहां लगातार हो रही बमबारी ने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। हवाई हमलों ने पुलों और सड़कों को नष्ट कर दिया है, जिससे पूरी की पूरी बस्तियां अलग-थलग पड़ गयी हैं और वहां तक पहुंचना कठिन हो गया है। यूनिसेफ के एक प्रतिनिधि ने बार-बार होने वाले हमलों के बाद बिगड़ते हालात का उल्लेख करते हुए कहा, "ऐसे बच्चे भी हैं, जो उन समुदायों में फंसे हुए हैं, जहां पहुंचना बहुत कठिन है।"</p>
<p>यह संकट न केवल शारीरिक है, बल्कि गहरा मनोवैज्ञानिक भी है। कई बच्चे पिछले संघर्षों के सदमे को दोबारा जी रहे हैं। सहायता कर्मियों ने चेतावनी दी है कि बार-बार विस्थापन और हिंसा के संपर्क में आने से बच्चों को दीर्घकालिक भावनात्मक क्षति हो रही है। बेरूत में एक आश्रय स्थल में शरण लेने वाली 11 वर्षीय ज़ैनब ने अपना अनुभव साझा किया। 18 महीने पहले भी उसी स्कूल में शरण लेने के बाद वह एक बार फिर खुद को अजनबियों से घिरा हुआ पाती है और रात में गोलाबारी की आवाज़ें सुनती है। उसने कहा कि उसकी इच्छा बहुत साधारण है- अपने घर लौटना और अपना सामान्य जीवन व शिक्षा दोबारा शुरू करना।</p>
<p>वर्तमान में 1,35,000 से अधिक विस्थापित लोग 660 से अधिक सामूहिक आश्रय स्थलों में रह रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या बच्चों की है। हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं, क्योंकि कई परिवार अधूरे बने ढांचों, सार्वजनिक स्थानों और यहां तक कि वाहनों में भी शरण ले रहे हैं। वर्षों के आर्थिक संकट से पहले ही जर्जर हो चुके लेबनान का बुनियादी ढांचा अब ढहने की कगार पर है। बेका और बालबेक जैसे क्षेत्रों में बमबारी ने जल प्रणालियों को नष्ट कर दिया है, जिससे हजारों लोग सुरक्षित पेयजल से वंचित हो गये हैं। शिक्षा भी बुरी तरह बाधित हुई है। लगभग 435 सरकारी स्कूलों का उपयोग अब आश्रय स्थलों के रूप में किया जा रहा है, जिससे 1,15,000 से अधिक छात्रों की पढ़ाई रुक गयी है।</p>
<p>मानवीय क्षति का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। संघर्ष बढ़ने के बाद से कम से कम 121 बच्चे मारे गये हैं और 395 घायल हुए हैं। जीवित बचे लोग अक्सर केवल अपने पहने कपड़ों के साथ भाग रहे हैं और उन्हें अक्सर कुछ ही दिनों के भीतर कई बार विस्थापित होना पड़ रहा है। अस्पतालों, स्कूलों और स्वच्छता प्रणालियों सहित आवश्यक बुनियादी ढांचे को बार-बार क्षति पहुंचायी गयी है या नष्ट कर दिया गया है, जिससे राहत प्रयासों में और भी मुश्किलें आ रही हैं। इन चुनौतियों के बावजूद यूनिसेफ और उसके सहयोगी आपातकालीन सहायता प्रदान करने के लिए काम कर रहे हैं। हाल के हफ्तों में, सहायता टीमों ने 1,67,000 से अधिक विस्थापित लोगों तक आवश्यक सामग्री पहुंचायी है। 140 टन से अधिक चिकित्सा सहायता प्रदान की गयी है और 40 मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयां तैनात की गयी हैं।</p>
<p>लगभग 190 आश्रय स्थलों में आपातकालीन जल और स्वच्छता सेवाएं प्रदान की जा रही हैं, जबकि ऑनलाइन शिक्षा और अस्थायी शिक्षण केंद्र स्थापित करने के प्रयास जारी हैं। लगातार हो रहे हमलों और पहुंच पर प्रतिबंधों के कारण मानवीय अभियान गंभीर रूप से सीमित हो रहे हैं। पैरामेडिक्स सहित सहायता कर्मी भी हमलों की चपेट में आये हैं और कई प्रभावित क्षेत्र अब भी पहुंच से बाहर हैं। यूनिसेफ ने निर्बाध मानवीय पहुंच और तत्काल युद्धविराम के लिए अपील जारी की है। संगठन ने स्कूलों, अस्पतालों और जल प्रणालियों सहित नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों को रोकने का भी आह्वान किया है। एजेंसी ने चेतावनी देते हुए कहा, "बच्चे इस संघर्ष की सबसे भारी कीमत चुका रहे हैं। उन्हें भागना बंद करने और एक बच्चे की तरह सामान्य जीवन जीने की ज़रूरत है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 17:26:35 +0530</pubDate>
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