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                <title>Peace Initiative - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Peace Initiative RSS Feed</description>
                
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                <title>पश्चिम एशिया संकट खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा समर्थन : 18 देशों ने की तत्काल युद्धविराम की अपील, लेबनान को कूटनीतिक वार्ताओं का हिस्सा बनाना अनिवार्य </title>
                                    <description><![CDATA[लेबनान में शांति के लिए 18 देशों का महा-अभियान शुरू हुआ है। ब्रिटेन और फ्रांस सहित इन देशों ने तत्काल युद्धविराम और मानवीय संकट रोकने की अपील की है। इजरायल और हिज्बुल्ला के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने हेतु उन्होंने संप्रभुता का सम्मान करने और कूटनीतिक वार्ता के माध्यम से स्थायी समाधान निकालने पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/international-support-increased-to-end-the-west-asia-crisis-18/article-150559"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/midil-esat.png" alt=""></a><br /><p>बेरुत। लेबनान में जारी जंग को रोकने के लिए कनाडा-ब्रिटेन समेत 10 देशों की शुरू की गयी शांति पहल अब बड़े वैश्विक अभियान में बदलती नजर आ रही है। मंगलवार को जारी इस साझा बयान का समर्थन करते हुए यूरोप के आठ अन्य देश भी इसमें शामिल हो गये हैं। इससे अब कुल 18 देशों ने एक सुर में लेबनान में तत्काल युद्धविराम की अपील की है। इन देशों ने बढ़ते मानवीय संकट और विस्थापन पर गहरी चिंता जताते हुए स्पष्ट किया है कि क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए लेबनान को कूटनीतिक वार्ताओं का हिस्सा बनाना अनिवार्य है।</p>
<p>बयान में मार्च में लेबनान में संयुक्त राष्ट्र के तीन शांति रक्षकों की हत्या की भी निंदा की गयी है। संयुक्त राष्ट्र ने पिछले हफ्ते तीन इंडोनेशियाई शांति रक्षकों की मौत की शुरुआती जांच रिपोर्ट जारी की थी। इसमें पाया गया कि ये दो हमले संभवतः इजरायली टैंक के गोले और एक आईईडी के कारण हुए थे। मुमकिन है कि वह हिजबुल्ला ने लगाया हो। संयुक्त बयान में कहा गया, "हम ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, क्रोएशिया, साइप्रस, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, ग्रीस, आइसलैंड, लक्जमबर्ग, माल्टा, नीदरलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, स्लोवेनिया, स्पेन, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम के विदेश मंत्री, क्षेत्रीय तनाव कम करने के प्रयासों में लेबनान को शामिल करने का आह्वान करते हैं और सभी पक्षों से एक स्थायी राजनीतिक समाधान की दिशा में काम करने का आग्रह करते हैं।"</p>
<p>लेबनान में युद्ध जारी रहने से मौजूदा क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिशों को खतरा पैदा हो गया है, जिसका सभी पक्षों को पूरी तरह से सम्मान किया जाना चाहिए। इन देशों ने इजरायल के साथ सीधी बातचीत शुरू करने की लेबनान की पहल और अमेरिका की मध्यस्थता में वार्ता शुरू करने की इजरायल की स्वीकृति का स्वागत किया है। बयान में कहा गया है, "हम दोनों पक्षों से इस अवसर का लाभ उठाने का आह्वान करते हैं। सीधी बातचीत लेबनान, इजरायल और इस पूरे क्षेत्र के लिए स्थायी सुरक्षा का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। हम उनका समर्थन करने के लिए तैयार हैं। इसलिए हम सभी पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे तनाव कम करें और अमेरिका व ईरान के बीच युद्धविराम से मिले इस अवसर का फायदा उठाएं।"</p>
<p>इसमें कहा गया है "हम इजरायल के खिलाफ हिजबुल्ला के हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, जिन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए। हम आठ अप्रैल को लेबनान पर इजरायल की ओर से किये गये बड़े हमलों की भी सख्त निंदा करते हैं। इसमें लेबनानी अधिकारियों की साझा की गयी ताजा जानकारियों के अनुसार, 350 से अधिक लोग मारे गये और 1,000 से अधिक घायल हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुसार नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की रक्षा की जानी चाहिए।"</p>
<p>इन देशों ने 'लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल' के खिलाफ हमलों की भी कड़े शब्दों में निंदा की और दोहराया कि संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षकों की सुरक्षा और सलामती हर समय सुनिश्चित की जानी चाहिए। नेतृत्व समूह ने लेबनानी जनता और वहां के अधिकारियों के प्रति अपनी पूरी एकजुटता और अटूट समर्थन व्यक्त किया। इसके साथ ही, लेबनान सरकार के साथ समन्वय कर 10 लाख से अधिक विस्थापित लोगों को आपातकालीन सहायता प्रदान करने का संकल्प लिया।</p>
<p>इन देशों ने लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 (2006) को पूरी तरह से लागू करने के महत्व की पुष्टि की। वे अपने क्षेत्र पर पूर्ण संप्रभुता का प्रयोग करने में लेबनान का समर्थन करना जारी रखेंगे।<br />गौरतलब है कि लेबनान में शांति बहाली के लिए यह पहली कोशिश नहीं है। इससे पहले मार्च 2026 के आखिरी हफ्ते में यूरोपीय संघ (ईयू) के नेतृत्व में बेल्जियम, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों ने भी इसी तरह का आह्वान किया था।</p>
<p>इसके अलावा, सितंबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भी अमेरिका और फ्रांस ने एक अस्थायी युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था। इसे तब सऊदी अरब और कतर जैसे क्षेत्रीय देशों का भी साथ मिला था। हालांकि, मंगलवार का यह ताजा कदम इसलिए खास है, क्योंकि इसकी शुरुआत भले ही 10 देशों के छोटे समूह ने की थी, लेकिन देखते ही देखते इसमें यूरोप के कई प्रभावशाली राष्ट्र जुड़ते गये, जो इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती एकजुटता को दर्शाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 18:28:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>फ्रांस-ब्रिटेन होर्मुज में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करेंगे : राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और पीएम कीर स्टार्मर होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन के लिए अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। यह मिशन पूरी तरह रक्षात्मक होगा और अमेरिकी नाकेबंदी से अलग स्वतंत्र रूप से कार्य करेगा। इसका उद्देश्य वैश्विक व्यापार मार्ग को बहाल करना और तनावपूर्ण क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय सहयोग सुनिश्चित करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/france-uk-president-emmanuel-macron-to-host-international-conference-to-ensure/article-150274"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/france-president-emmanuel-macron.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने सोमवार को यह घोषणा की कि फ्रांस और ब्रिटेन आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। फ्रांसिसी राष्ट्रपति ने बताया कि इस सम्मेलन में उन देशों को एक साथ लाया जाएगा जो नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने के उद्देश्य से एक शांतिपूर्ण, बहुराष्ट्रीय अभियान में योगदान देने के इच्छुक हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, "यह पूरी तरह से रक्षात्मक मिशन होगा, जो युद्धरत पक्षों से अलग होगा और परिस्थितियों के अनुकूल होते ही इसे तैनात किया जाएगा।"</p>
<p>ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ब्रिटेन ने 40 से अधिक देशों को इस मिशन के लिए आमंत्रित किया है जो नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने के हमारे लक्ष्य को साझा करते हैं। स्टार्मर ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने को 'बेहद हानिकारक' बताते हुए कहा कि ब्रिटेन और फ्रांस इस सप्ताह एक शिखर सम्मेलन की सह-मेजबानी करेंगे। इसका उद्देश्य संघर्ष समाप्त होने पर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की सुरक्षा के लिए एक समन्वित, स्वतंत्र और बहुराष्ट्रीय योजना पर काम करना है। </p>
<p>मैक्रॉन का यह बयान श्री स्टार्मर के उस रुख के बाद आया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया था कि ब्रिटेन ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी सैन्य नाकेबंदी में शामिल नहीं होगा। गौरतलब है कि कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उद्घोषणा के अनुरूप सोमवार सुबह 10 बजे (भारतीय समयानुसार रात 8:30 बजे) से ईरानी बंदरगाहों के सभी समुद्री यातायात को रोकने की घोषणा की है। ब्रिटेन ने स्पष्ट किया है कि उसके 'माइनस्वीपर्स' (समुद्री बारूदी सुरंग हटाने वाले जहाज) और एंटी-ड्रोन इकाइयां क्षेत्र में अपना संचालन जारी रखेंगी, लेकिन ब्रिटिश नौसैनिक जहाजों और सैनिकों का उपयोग अमेरिकी नाकेबंदी लागू करने के लिए नहीं किया जाएगा।</p>
<p>इस बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान द्वारा परमाणु हथियारों को त्यागने से इनकार करना 'इस्लामाबाद वार्ता' की विफलता का मुख्य कारण रहा। वहीं, ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि तेहरान ने 'भविष्योन्मुखी पहल' का प्रस्ताव रखा था, लेकिन वह अभी तक अमेरिकी विश्वास हासिल नहीं कर सका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 18:02:20 +0530</pubDate>
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                <title>पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार का दावा: अमेरिका, ईरान के बीच वार्ता की मध्यस्थता करने के लिए तैयार है पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की भी हो सकते हैं शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने पुष्टि की है कि उनका देश ईरान और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक वार्ता की मेजबानी करेगा। सऊदी अरब और तुर्की के समर्थन से यह कूटनीतिक प्रयास बढ़ते सैन्य तनाव और तेल संकट के बीच शुरू हुआ है। दोनों देशों के साथ अच्छे संबंधों के कारण पाकिस्तान इस जटिल संघर्ष में मुख्य मध्यस्थ बनकर उभरा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pakistani-foreign-minister-ishaq-dar-claims-america-is-ready-to/article-148465"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/isak-dar.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान जल्द ही ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता वार्ता की मेज़बानी करने के लिए तैयार है। विदेश मंत्री एवं उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने रविवार को इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इसको लेकर मिस्र, सऊदी अरब और तुर्की के शीर्ष राजनयिकों के साथ बातचीत हुई है। ये बातचीत ऐसे समय में हुई जब ईरान ने अमेरिका को ज़मीनी हमला करने के खिलाफ चेतावनी दी थी और अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच जारी जंग के चलते वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ गई हैं।</p>
<p>इशाक डार ने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि बातचीत सीधी होगी या परोक्ष, या यह कब और कहाँ होगी लेकिन उन्होंने कहा कि यह आने वाले दिनों में होगी। पाकिस्तानी विदेश मंत्री के दावों के बाद अमेरिका या ईरान, किसी ने भी तत्काल कोई टिप्पणी जारी नहीं की। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान बहुत खुश है कि ईरान और अमेरिका दोनों ने बातचीत में पाकिस्तान की मध्यस्थता पर अपना भरोसा जताया है, जो आने वाले दिनों में होगी।</p>
<p>राजनयिकों से मुलाक़ात के बाद इशाक डार ने दावा किया कि उन्होंने मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान के प्रयासों का सक्रिय रूप से समर्थन किया है और पाकिस्तान से अपील की है कि वह शामिल पक्षों के बीच व्यवस्थित बातचीत के लिए माहौल तैयार करे। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इशाक डार ने बढ़ते तनाव के बीच शांति तक पहुँचने के एकमात्र व्यावहारिक रास्ते के रूप में कूटनीति की वकालत की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस संघर्ष को समाप्त करने के सभी प्रयासों और पहलों में सक्रिय रूप से शामिल रहा है। उन्होंने कहा, "हम स्थिति को शांत करने और संघर्ष का समाधान खोजने के अपने प्रयासों में अमेरिकी नेतृत्व के साथ भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं।" पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि मंत्री चतुष्पक्षीय बैठक समाप्त होने के बाद पाकिस्तान से रवाना हो गए हैं।</p>
<p>इशाक डार ने बताया कि इस बैठक के बाद प्रत्येक मंत्री के साथ अलग-अलग बहुत ही सार्थक द्विपक्षीय बैठकें भी हुईं। एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में उभरते हुए, पाकिस्तान उन चुनिंदा देशों में से एक है जिनके अमेरिका और ईरान दोनों के साथ कूटनीतिक रूप से अच्छे संबंध हैं। पाकिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि उनके ये सार्वजनिक प्रयास हफ़्तों की खामोश कूटनीति के बाद सामने आए हैं, हालाँकि अब तक न तो ईरान और न ही अमेरिका ने बातचीत करने में बहुत ज़्यादा इच्छा दिखाई है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अब तक कूटनीति और बातचीत करने के प्रयासों को लेकर अमेरिका की गंभीरता के बारे में मिले-जुले संकेत दिए हैं। जहाँ एक ओर उन्होंने इस्लामिक गणराज्य के नेतृत्व के साथ बातचीत करने की सक्रिय रूप से अपील की है, वहीं साथ ही उन्होंने अमेरिकी सेना की तरफ से बड़े पैमाने पर बमबारी अभियान की तैयारियों को लेकर चेतावनी भी दी है। यहाँ तक कि उन्होंने ज़मीन पर पूरी तरह से हमला करने की धमकी भी दी है। सैन्य शक्ति प्रदर्शन को और बढ़ाते हुए, अमेरिका ने इस क्षेत्र में हज़ारों अतिरिक्त सैनिक और एक पूरा नया नौसैनिक हमला समूह भेजा है, जिसमें एक हमलावर जहाज़ और लड़ाकू विमान शामिल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 18:24:55 +0530</pubDate>
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