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                <title>society - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>सोसाइटी ने एमआई रोड पर लगाई प्याऊ, ताकि भीषण गर्मी में लोगों को पीने के पानी की मिले सुविधा : राहगीरों को बांटे परिंडे, लोगों को परिंडे लगाने के लिए किया जागरूक</title>
                                    <description><![CDATA[अभिलाषा वुमेन वेलफेयर सोसाइटी ने एमआई रोड स्थित शनि देव मंदिर के बाहर प्याऊ लगाकर राहगीरों को भीषण गर्मी में राहत दी। साथ ही 101 परिंडे बांधकर पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था की गई। अध्यक्ष डॉ. रमा माथुर ने बताया कि यह सेवा हर साल की जाती है और लोगों को परिंडे लगाने के लिए जागरूक भी किया गया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-society-installed-a-pond-on-mi-road-so-that/article-151784"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(4)22.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर। अभिलाषा वुमेन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से रविवार को एमआई रोड स्थित शनि देव मंदिर के बाहर प्याऊ लगाई, गई, ताकि भीषण गर्मी में लोगों को पीने के पानी की सुविधा मिल सके। 101 पक्षियों के लिए परिंडे भी बांधें और राहगीरों को बांटे गए। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सोसाइटी अध्यक्ष डॉ.रमा माथुर ने बताया की भीषण गर्मी में पक्षियों की प्सास बुझाने का पुण्य का काम सोसायटी हर साल करती है। लोगों को परिंडे लगाने के लिए जागरूक भी किया गया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 11:18:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : हौसलों की उड़ान हो तुम, सपनों की पहचान हो तुम</title>
                                    <description><![CDATA[कई महिलाएँ चुनौतियों को पार कर अपने सपनों को साकार करती हैं।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/international-women-s-day-special--you-are-the-flight-of-courage--you-are-the-identity-of-dreams/article-145790"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(1)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।"हौसलों की उड़ान से ही मंजिलें मिलती हैं,रास्ते आसान हों तो पहचान नहीं बनती।" महिलाओं की सफलता के पीछे अक्सर संघर्ष, धैर्य और मजबूत इरादों की कहानी छिपी होती है। घर, परिवार, समाज और करियर की जिम्मेदारियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं होता। फिर भी कई महिलाएँ चुनौतियों को पार कर अपने सपनों को साकार करती हैं। महिला दिवस के अवसर पर दैनिक नवज्योति ने शहर की ऐसी ही प्रेरणादायक महिलाओं से बातचीत की और जाना कि उन्होंने अपनी मंजिÞल तक पहुँचने के लिए किन संघर्षों और चुनौतियों का सामना किया। उनकी जुबानी सुनिए सफलता की यात्रा।</p>
<p><strong>महिला जीवन की चुनौतियां और संकल्प की शक्ति</strong><br />महिला होने के नाते जीवन के हर पड़ाव पर अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। बचपन में अक्सर ऐसा होता है कि परिवार में भाई को अधिक प्राथमिकता दी जाती है, जबकि लड़कियों पर कई तरह की पाबंदियाँ लगा दी जाती हैं, कैसे रहना है, क्या पहनना है और कहाँ जाना है। मेरे जीवन में भी ऐसे अनुभव रहे। जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, चुनौतियों का स्वरूप भी बदलता गया। घर की चौखट से बाहर निकलकर  नौकरी की ओर कदम बढ़ाने पर कई तरह के आक्षेप और सवाल सामने आए। फिर भी जब मन में दृढ़ निश्चय हो कि हमारा विचार सही है और हमें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना है, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। चुनौतियों को मैंने हमेशा सकारात्मक रूप में लिया, क्योंकि उनसे सीखने और खुद को और अधिक मजबूत बनाने का अवसर मिलता है। आज जिस मुकाम पर हूं, उसमें सभी का हाथ है। जब माता-पिता के पास थे तो उनकी भूमिका सबसे ज्यादा रही। मैं बीकानेर की रहने वाली हूँ। मेरे पिता का हमेशा मानना था कि अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए और  आत्मनिर्भर बनना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने मुझे घर से दूर वनस्थली विद्यापीठ भेजा, जहाँ से मैंने स्कूल से लेकर कॉलेज तक की पढ़ाई पूरी की। वहाँ की शिक्षा ने मेरे जीवन की मजबूत नींव तैयार की। मेरी माँ स्वयं  पढ़ी-लिखी नहीं थीं, लेकिन हम सभी  को पढ़ाने के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। पति से भी जीवन में कई महत्वपूर्ण बातें सीखने का अवसर मिला और आज मैं जिस मुकाम पर हूँ, उसमें परिवार के समर्थन की बड़ी भूमिका रही है। </p>
<p><strong>महिला दिवस पर संदेश</strong><br />बच्चियां और महिलाएं अपनी प्रतिभा को पहचानें, बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत, समर्पण और साहस के साथ आगे बढ़ें। साथ ही उन्हें वित्तीय प्रबंधन, सामुदायिक सहयोग और नेतृत्व की जिम्मेदारियों को भी समझना होगा। बाधाएं जीवन में आती हैं, लेकिन सकारात्मक सोच और दृढ़ संकल्प से उन्हें पार कर एक स्थायी और उज्ज्वल भविष्य बनाया जा सकता है।<br /><strong>-डॉ. विमला डुकवाल, कुलगुरु, कृषि विश्वविद्यालय, कोटा</strong></p>
<p><strong>फॉरेंसिक विज्ञान में बनाई मजबूत पहचान</strong><br />मैंने वर्ष 1998 में इस क्षेत्र में कार्य करना शुरू किया। उस समय महिलाओं और लड़कियों में इस क्षेत्र के प्रति जागरूकता बहुत कम थी। फॉरेंसिक विज्ञान का कार्य केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं होता, बल्कि कई बार क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन के लिए किसी भी समय ड्यूटी देनी पड़ती है। कई घटनास्थल बेहद भयावह होते हैं और कई बार गहन जंगलों या एकांत स्थानों पर भी जांच करनी पड़ती है। ऐसे में वैज्ञानिक साक्ष्यों को संकलित करते समय धैर्य, साहस और समझदारी बेहद जरूरी होती है। समाज में जब रेप जैसे जघन्य अपराध सामने आते हैं, तो एक महिला होने के नाते ये दृश्य मन को गहराई से झकझोर देते हैं। आज के समय में मानसिक, शारीरिक और तकनीकी रूप से मजबूत बने बिना आगे बढ़ना संभव नहीं है, इसलिए हर चुनौती का दृढ़ता से सामना करना पड़ता है।</p>
<p>पुरुष प्रधान समाज में बिना किसी समझौते के आगे बढ़ना भी अपने आप में एक चुनौती रहा है। कई बार परिवार और समाज की पारंपरिक सोच भी सामने आती है। समय के साथ कदम मिलाने की कोशिश में कई बार परिवार और बच्चों को उतना समय नहीं दे पाते, जितना देना चाहते हैं। वहीं कार्यस्थल पर भी जब एक महिला अधिकारी उच्च पद पर होती है, तो कई बार पुरुष सहकर्मियों और अधीनस्थों के लिए उसे सहज रूप से स्वीकार करना आसान नहीं होता। फिर भी निरंतर मेहनत और समर्पण के साथ आगे बढ़ना ही सफलता का रास्ता बनाता है। मैं अपनी सोच और मूल्यों का श्रेय अपनी मां शांति देवी, पिता भरत सिंह, सास प्रेम खन्ना और पति राजेश खन्ना को देना चाहूंगी। परिवार ही वह आधार है, जिससे जुड़कर हम समाज के लिए भी बेहतर कार्य कर सकते हैं।</p>
<p><strong>महिला दिवस पर संदेश</strong><br />एक सशक्त महिला या बालिका को अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए मन और तन दोनों को मजबूत बनाना होगा। निरंतर प्रयास के साथ जीवन में संतुलन बनाए रखना जरूरी है।  विशेष रूप से अपराध के मामलों में महिलाओं को खुद को केवल पीड़ित न मानते हुए साहस के साथ आगे आना चाहिए और साक्ष्य प्रस्तुत करने में सहयोग देना चाहिए। इससे अपराधियों में भय पैदा होगा और उन्हें उनके अपराध की सजा भी मिलेगी।<br /><strong>-डॉ. राखी खन्ना,  एडिशनल डायरेक्टर रीजनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी कोटा रेंज</strong></p>
<p><strong>संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास से सफलता का मार्ग</strong><br />जी वन में चुनौतियों का सामना हर व्यक्ति को करना पड़ता है। मेरे जीवन में भी संघर्ष मुख्य रूप से पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े रहे। पढ़ाई के दौरान कई बार असफलताएँ भी मिलीं, लेकिन ऐसे समय में धैर्य और दृढ़ निश्चय सबसे अधिक जरूरी होता है। मेरे माता-पिता का हमेशा पूरा समर्थन मिला और उन्होंने हर परिस्थिति में मुझे प्रेरित किया। यूपीएससी की तैयारी के दौरान मेरा चयन तीसरे प्रयास में हुआ। इससे पहले के प्रयास में केवल एक अंक से चयन छूट गया था, उस समय बहुत निराशाजनक लगता था। लेकिन परिवार के सहयोग और अपने धैर्य की वजह से मैंने हिम्मत नहीं हारी लगातार अपने प्रयास जारी रखे। हमेशा यही कोशिश रही कि मनोबल बनाए रखा जाए और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया जाए।</p>
<p>-कॉलेज के समय से ही मेरा लक्ष्य था कि मुझे सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में जाना है। मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बिजनेस स्टडीज में स्नातक किया और उसी दौरान इस दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया। इस पूरे सफर में मेरे माता-पिता की प्रेरणा सबसे बड़ी ताकत रही। जब हम मेहनत करते हैं और हमारे काम से हमारे अपने लोग खुश होते हैं, तो उससे और अधिक ऊर्जा मिलती है। आज भी उनका मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। जीवन में हर भूमिका को संतुलन के साथ निभाना भी बहुत जरूरी है। जब मैं काम पर होती हूँ तो पूरी तरह अपने कार्य पर ध्यान देती हूँ, और जब घर पर होती हूँ तो परिवार को समय देने की कोशिश करती हूँ। कई बार काम का दबाव होता है और कभी पारिवारिक जिम्मेदारियाँ बढ़ जाती हैं, लेकिन इन दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना ही सबसे महत्वपूर्ण है।</p>
<p><strong>महिला दिवस पर संदेश</strong><br /> महिलाओं और युवतियों के लिए मेरा संदेश है कि सबसे पहले खुद पर विश्वास रखें। मेहनत और लगन के साथ काम करें, क्योंकि इंसान की सबसे बड़ी सीमा उसकी सोच होती है। यदि आप आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं, तो आप जो चाहें वह हासिल कर सकते हैं।<br /><strong>-चारु शंकर, एसडीएम रामगंजमंडी</strong></p>
<p><strong> संघर्ष, संकल्प और बड़े सपनों की उड़ान</strong><br />सिविल सेवा में आने से पहले का मेरा सफर संघर्ष और धैर्य से भरा रहा। यूपीएससी की परीक्षा मैंने चौथे प्रयास में सफलतापूर्वक पास की। इन चार वर्षों की तैयारी काफी मेहनत और धैर्य की परीक्षा लेने वाली रही। कई बार ऐसे क्षण आए जब निराशा भी हुई। दो बार मैंने परीक्षा दी, एक बार इंटरव्यू तक पहुँची, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो पाया। ऐसे झटके किसी भी अभ्यर्थी के लिए कठिन होते हैं। कई बार हम योजनाएँ बनाते हैं, लेकिन परिणाम उम्मीद के अनुसार नहीं मिलते। ऐसे समय में परिवार और समाज का दबाव भी महसूस होता है और कई लोग बीच रास्ते में हार मान लेते हैं।मेरे लिए सबसे बड़ी ताकत मेरा परिवार रहा। उन्होंने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया और कहा कि जितना समय चाहिए, उतना लेकर पूरी लगन से तैयारी करो। इसी समर्थन और आत्मविश्वास के साथ मैंने चौथे प्रयास में सफलता प्राप्त की। मेरे पिता राज्य सरकार में कार्यरत थे और उन्हें देखकर ही मुझे शुरूआत से ही कुछ करने की प्रेरणा मिली। बाद में जब मैंने कॉपोर्रेट क्षेत्र में काम करना शुरू किया, तब मुझे एहसास हुआ कि निजी क्षेत्र में पब्लिक इंटरफेस और सामाजिक प्रभाव अपेक्षाकृत कम होता है। वहीं से यह विचार और मजबूत हुआ कि सरकारी व्यवस्था में काम करके समाज पर अधिक सकारात्मक प्रभाव डाला जा सकता है।मेरी प्रेरणा मेरी माँ और बहनें रही हैं। उन्होंने हमेशा यही सिखाया कि जो भी काम करें, पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ करें, क्योंकि हर काम के अपने सकारात्मक और नकारात्मक पहलू होते हैं।</p>
<p><strong>महिला दिवस पर संदेश</strong><br />अगर आपको लगता है कि आप कुछ बड़ा करना चाहते हैं, तो शुरूआत करने से कभी न डरें। अपने सपनों को साकार करने के लिए पहला कदम उठाइए। कहीं न कहीं से सहयोग अवश्य मिलेगा। सबसे जरूरी है कि बड़े सपने देखने का साहस हमेशा बनाए रखें।<br /><strong>-आराधना चौहान, प्रशिक्षु आईएएस</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 12:32:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बेटियों को सशक्त बनाना हर परिवार और समाज की जिम्मेदारी : राष्ट्र निर्माण की एक मजबूत शक्ति बनकर उभर रही नारी शक्ति, रेखा गुप्ता ने कहा- अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें महिलाएं</title>
                                    <description><![CDATA[गुप्ता ने कहा कि बेटियों की शिक्षा और सशक्तिकरण हर परिवार की जिम्मेदारी। ‘भारती नारी से नारायणी’ कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि मोदी सरकार के नेतृत्व में महिलाएं राष्ट्र निर्माण की मजबूत ताकत बन रही। लखपति बिटिया, सहेली पिंक स्मार्ट कार्ड और कोलेट्रल-फ्री लोन जैसी योजनाएं महिलाओं को सुरक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त बना रही।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/empowering-daughters-is-the-responsibility-of-every-family-and-society/article-145626"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/6622-copy54.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नई</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिल्ली। दिल्ली</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मुख्यमंत्री</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रेखा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गुप्ता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कहा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बेटियों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पढ़ाना</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्हें</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सशक्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बनाना</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तथा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">समाज</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उनके</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">योगदान</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मान्यता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">देना</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">परिवार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">समाज</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जिम्मेदारी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है। गुप्ता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आज</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यहां</span> '<span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भारती</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नारी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नारायणी कार्यक्रम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कहा कि प्रधानमंत्री</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नरेंद्र</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मोदी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नेतृत्व</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आज</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नारी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शक्ति</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">राष्ट्र</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निर्माण</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मजबूत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शक्ति</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बनकर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उभर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रही</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">महिलाओं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सशक्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बनाना</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सभी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">साझा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जिम्मेदारी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिल्ली</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लखपति</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बिटिया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">योजना</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सहेली</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पिंक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">स्मार्ट</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कार्ड</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कोलेट्रल</span>-<span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">फ्री</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लोन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नाइट</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शिफ्ट</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">काम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अनुमति</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जैसे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कदमों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">माध्यम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नारी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शक्ति</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुरक्षित</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सशक्त</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आत्मनिर्भर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बनाने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिशा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लगातार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कार्य</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">किया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रहा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मुख्यमंत्री</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अपने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जीवन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कठिनाइयों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संघर्षों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">का</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जिक्र</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">किया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कैसे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">छोटे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">साधारण</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">परिवार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बेटी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मेहनत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हिम्मत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिल्ली</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मुख्यमंत्री</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कुर्सी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">का</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सफर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तय</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">किया।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">महिलाओं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कहा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अपने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अधिकारों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रति</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जागरूक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रहें।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">समाज</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बदलाव</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लाएं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">खुद</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पहचान</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बनाएं।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जोर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मेहनत</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">साहस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लगन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कोई</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लड़की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अपने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जीवन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बड़ी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उपलब्धियां</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हासिल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सकती</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 15:56:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>सुर, संघर्ष और संवेदना का संगम, नेशनल लिटरेचर ड्रामा फेस्टिवल के दूसरे दिन साहित्य, समाज और प्रकृति पर मंथन</title>
                                    <description><![CDATA[राजनीति के आपसी संबंधों के साथ-साथ शिक्षा और संस्कृति पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव पर गंभीर विमर्श हुआ, जिसमें सैकड़ों युवा एवं वरिष्ठ साहित्य प्रेमियों ने सहभागिता की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/confluence-of-sur-sangharsh-and-sensation-brainstorming-on-literature-society/article-135886"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/6622-copy31.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पिंकसिटी प्रेस क्लब में आयोजित नेशनल लिटरेचर ड्रामा फेस्टिवल के दूसरे दिन शनिवार को साहित्य, संगीत, संघर्ष और सामाजिक सरोकारों का सजीव संगम देखने को मिला। एक ओर युवाओं और महिला लेखिकाओं की सशक्त काव्य प्रस्तुतियां गूंजती रहीं, तो दूसरी ओर फिल्म संगीत पर झूमते श्रोता और जीवन संघर्षों से जूझकर आगे बढ़ने की प्रेरक कहानियां मंच से साझा होती रहीं। मुख्य सभागार में पृथ्वी, पर्यावरण, संस्कृति, साहित्य और राजनीति के आपसी संबंधों के साथ-साथ शिक्षा और संस्कृति पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव पर गंभीर विमर्श हुआ, जिसमें सैकड़ों युवा एवं वरिष्ठ साहित्य प्रेमियों ने सहभागिता की।</p>
<p>कार्यक्रम की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय कवयित्री रति सक्सेना की अध्यक्षता में आयोजित काव्यगोष्ठी से हुई, जिसका संचालन शिवानी शर्मा ने किया। इस सत्र में डॉ. कविता, ज्योत्सना, जयश्री शर्मा, डॉ. रेखा गुप्ता सहित 15 कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज और संवेदनाओं को स्वर दिया। दिन का प्रमुख वैचारिक सत्र जीवन संघर्ष और हम रहा, जिसमें महामंडलेश्वर पुष्पा माई ने ट्रांसजेंडर अधिकारों के लिए अपने संघर्ष की प्रेरक गाथा साझा की। उन्होंने बताया कि ट्रांसजेंडर समुदाय को वोट का अधिकार दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक संघर्ष करना पड़ा। विनीता नायर ने थिएटर को मानसिक सशक्तीकरण का माध्यम बताते हुए अपने संघर्षपूर्ण सफर को साझा किया। कैंसर से जंग जीत चुकीं रुचि गोयल ने सकारात्मक सोच और परिवार के सहयोग से जीवन को फिर से संवारने की भावुक कहानी सुनाई। </p>
<p>प्रो. कृष्ण कुमार शर्मा, डॉ. लाइक हुसैन, अमरचंद बिश्नोई और विनोद जोशी ने पृथ्वी संरक्षण और सांस्कृतिक चेतना पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि साहित्य और रंगमंच समाज को जागरूक करने का सशक्त माध्यम हैं। शाम को दरीचा-ए-सुखन कार्यक्रम में गजलों की मधुर प्रस्तुतियां हुईं, जबकि ओपन माइक में विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Dec 2025 11:28:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दियो के अलावा नायकों के कर्तव्य पथ से भी हुई थी जगमग दीपावली, पुलिस, डॉक्टर, रेलवे कर्मियों ने निभाया फर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[नायकों की ड्यूटी और समर्पण ने पूरे शहर को सिखाया दीपावली का असली अर्थ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/diwali-was-illuminated-not-only-by-lamps-but-also-by-the-path-of-duty-of-these-heroes--police--doctors--and-railway-workers-fulfilled-their-responsibilities/article-131064"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/diyo-k-alawa-nayako-k-kartavya-path-s-bhi-hui-thi-jagmag-deepwali,-police,-doctor,-railway-karmiyo-ne-nibhaya-farz...kota-news-31.10.2025.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। त्योहारों के रंग, रोशनी और उत्सव के बीच जब हर कोई अपने परिवार के साथ दीपावली की खुशियां मना रहा था, तब कोटा शहर के कुछ असली नायक अपनी ड्यूटी निभाने में व्यस्त थे। इन नायकों की दीपावली रोशनी और पटाखों से नहीं, बल्कि अपने कर्तव्य, त्याग और सेवा की ज्योति से जगमगाई। पुलिसकर्मी, डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और रेलकर्मी इस दीपावली पर भी अपने घर-परिवार से दूर रहकर समाज के लिए रोशनी फैलाते रहे। इन नायकों की ड्यूटी और समर्पण ने पूरे शहर को यह सिखाया कि दीपावली का असली अर्थ केवल घर को सजाना नहीं, बल्कि किसी के जीवन में प्रकाश फैलाना है। यही सेवा का दीप, मानवता की सबसे बड़ी ज्योति है। कोटा की इस दीपावली ने यह साबित किया कि सच्ची रोशनी दीयों की लौ से नहीं, बल्कि उन लोगों के समर्पण से फैलती है जो समाज की सेवा में खुद को समर्पित कर देते हैं। </p>
<p><strong>सुरक्षा की ड्यूटी ही बन गई दीपावली</strong><br />शहर की सड़कों पर शांति बनाए रखने के लिए कोटा पुलिस की टीमें दिन-रात मुस्तैद रहीं। थाना चौकियों से लेकर बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों तक पुलिसकर्मी चौकसी में तैनात रहे। दीपावली की रात हमारे लिए ड्यूटी की सबसे लंबी रात होती है। परिवार जब घर पर पूजा करता है, तब हमारा ध्यान लोगों की सुरक्षा लगता रहता है। हमारी चौकसी से न केवल यातायात सुचारु रहा, बल्कि दुर्घटनाओं और आपराधिक घटनाएं भी ना के बराबर रही। जब शहरवासी सुकून से दीप जलाते रहे तब पुलिस कर्मियों ने वर्दी की शपथ को निभाते हुए त्योहार पर लोगों को राहत पहुंचाई।<br /><strong>- राकेश मीणा, हैड कांस्टेबल, ट्रॉफिक पुलिस कोटा</strong></p>
<p><strong>आपातकालीन सेवा ही बनी सबसे बड़ा उत्सव</strong><br />कोटा के मेडिकल कॉलेज संबंद्ध अस्पतालों के इमरजेंसी वार्ड में दीपावली की रात भी गतिविधियां सामान्य दिनों की तरह ही जारी रहीं। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के लिए वहां आने वाला हर मरीज उनके लिए दीप का उजाला था। हमारे लिए किसी की जान बचाना ही सबसे बड़ा लक्ष्मी पूजन है। दीपावली की रात भी हादसे होते हैं, इसलिए हमारा अस्पताल में होना जरूरी है। हमने वीडियो कॉल पर घरवालों को शुभकामनाएं दीं और आॅनलाइन लक्ष्मीपूजन किया। जब किसी मरीज को राहत मिलती है, तो वही हमारे लिए सच्ची दीपावली होती है। यह भावना ही सेवा को पूजा बनाती है।<br /><strong>- डॉ. निर्मल कुमार गुप्ता, विभागाध्यक्ष, प्लास्टिक सर्जरी विभाग, मेडिकल कालेज कोटा</strong></p>
<p><strong>रेलवे कर्मियों का अनोखा त्याग</strong><br />कोटा रेलवे स्टेशन पर त्योहारों की भीड़ के बीच रेलकर्मी भी ड्यूटी पर तैनात रहते है। ट्रेनों की आवाजाही से लेकर यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा तक, सब कुछ सुचारु रखने में हमारी भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। हमारी दीपावली तब पूरी होती है जब यात्री सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंच जाए। यही हमारे लिए सबसे बड़ा तोहफा होता है। हमारा स्टाफ 24 घंटे सेवाओं में लगे रहते है ताकि यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो। त्योहारों पर अपने परिवार से दूर रहकर भी हम खुश हैं क्योंकि हमारा काम ही यात्रियों की खुशी की वजह बनता है।<br /><strong>- दीपक शर्मा, सीटीआई रेलवे मंडल, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Oct 2025 15:34:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कायनात की बेबस छलकती आंखें ढूंढ रहीं पति शाहिद व बेटी आलिया-तस्नीम की मुस्कान : कैंसर से गई आवाज, ऑपरेशन में कटेगी जीभ व जबड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[छिन गई परिवार की खुशियां, पत्नी कायनात की उम्मीदें अब होने लगी धूमिल।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kainat-s-helpless--tearful-eyes-search-for-the-smiles-of-her-husband-shahid-and-daughters-alia-and-tasneem--cancer-has-taken-away-his-voice--and-his-tongue-and-jaw-will-be-amputated-in-an-operation/article-129532"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के छावनी रोड के मोती महाराज मौहल्ला में एक छोटे से मकान में दर्द की ऐसी दास्तान छिपी है, जिसे सुनकर हर किसी का दिल भर आए। कभी पेंटिंग और पीओपी का हुनर दिखाकर दूसरों के घरों की दीवारें चमकाने वाले 44 वर्षीय शाहिद खान आज खुद अंधेरे में घिर गया हैं। जो हाथ कभी रंगों से जिंदगी को सजाया करते थे, उनके घर में जहां कभी हंसी-खुशी की आवाजें गूंजती थीं। दीपावली के त्योहार पर अपने हुनर से दूसरों के घर सजाया करते थे। लेकिन आज अपने ही घर में सन्नाटा छाया हुआ है। सात दिन बाद दिवाली आने वाली है लेकिन अब उनके घर में हमेशा के लिए अंधेरा हो गया है।  कैंसर ने शाहिद की आवाज छीन ली, बीमारियों ने उनके परिवार को भी तोड़ दिया है। परिवार अब बेबस होकर समाज और सरकार से दवा और मदद के गुहार लगा रहा हैं।  जब दैनिक नवज्योति का रिपोर्टर जब छावनी रोड पर स्थित मोती महाराज मौहल्ला में पहुंचा तो परिवार के आंसू छलक गए। परिवार में पत्नी कायनात, बेटा रहमत, बेटियां आलिया व तस्नीम और खुद शाहिद फफक कर रो पड़े। उनके परिवार का कहना है कि प्रशासन की छोटी-सी मदद भी मिल जाए तो हमारे परिवार के लिए किसी खजाने से कम नहीं होगा।</p>
<p><strong>परिवार पर टूट पड़ा एक साथ कई बीमारियों का पहाड़</strong><br />बीमारी की मार सिर्फ शाहिद तक सीमित नहीं रही। अब पूरा परिवार किसी न किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। 15 वर्षीय बेटी आलिया, जो कभी 9वीं में पढ़ती थी, दो साल से ब्रैन स्ट्रॉक्स की समस्या से जूझ रही है। अचानक बेहोश हो जाती है, गिर पड़ती है। जेके लोन अस्पताल में इलाज चल रहा है। जांचे करवाने के बाद उसकी भी दवाइयां लागू हो गई हैं। ब्रैन स्ट्रॉक्स  की वजह से आलिया का स्कूल भी छूट गया। वहीं 13 वर्षीय छोटी बेटी तस्नीम पिछले छह महीने से थायराइड की बीमारी से पीड़ित है। गले में दर्द इतना होता है कि वह खाना और पानी तक नहीं ले पाती।  खाना सामने होती हुए भी खा नहीं पाती थी और रोने लग जाती है। अब निजी डॉक्टर को घर बुलाकर कभी अस्पताल जाकर इलाज करवाया जा रहा है। शाहिद की बूढ़ी मां अख्तरी बेगम भी बीमार हैं। उन्हें खुद चलने-फिरने में परेशानी होती है। वो खुद अपने बेटे व परिवार की हालत में आंसू बहा रही है।</p>
<p><strong>मामूली छाले से कैंसर तक का सफर </strong><br />करीब दो साल पहले शाहिद की जीभ पर मामूली छाला निकला। उन्होंने सोचा कुछ दिन में ठीक हो जाएगा। लेकिन यह मामूली छाला धीरे-धीरे कैंसर में बदल गया।  इलाज इतना महंगा था कि घर की जमा पूंजी एक-एक करके सब खत्म हो गई। तीन महीने पहले आई बायोप्सी रिपोर्ट ने शाहिद और उनके परिवार की दुनिया ही हिला दी। अब शाहिद के कैंसर को ठीक करने के लिए आॅपरेशन से जबड़ा व जीभ काटनी पड़ेगी। उसमें भी बचने कोई गारंटी नहीं है। अब वे न तो बोल सकते हैं, न खाना खा सकते हैं। उनके चेहरे और शरीर पर बीमारी का असर साफ झलकता है। </p>
<p><strong>अब घर की जिम्मेदारी ही सबसे बड़ी परीक्षा : रहमत</strong><br />घर की जिम्मेदारी तथा अपने पिता का कैंसर का व अपनी छोटी बहनों की गंभीर बीमारियों का इलाज अब 17 वर्षीय रहमत खान के कंधों पर आ गई है। दसवीं का छात्र रहमत अब ओपन स्कूल से पढ़ाई कर रहा है ताकि दिन में थोड़ा काम कर सके। उसने बताया कि अब घर चलाना ही मेरे लिए सबसे बड़ी परीक्षा है, रहमत कहता है। अब्बू को देखकर दिल टूट जाता है। अब मेरे लिए पढ़ाई से ज्यादा जरूरी घर की जिम्मेदारी है, मेरी बहनों की परवरिश है, मां व दादी का ख्याल रखना है मैं अपने परिवार के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हूं। वह कभी किसी किराना तो कभी कपड़े की दुकान पर काम करता है, तो कभी किसी के साथ पेंटिंग में हाथ बंटा देता है। जितना कमाता है, उससे केवल घर खर्च ही मुश्किल से निकल पा रहा है।</p>
<p><strong>कायनात की मजबूरी :अब नहीं बची जीने की हिम्मत </strong><br />शाहिद की पत्नी कायनात अब पूरी तरह थक चुकी हैं। वह कहती है कि मैं बाहर जाकर काम भी नहीं कर सकती, बीमारी के चलते पति व बेटियों को हर पल मेरी जरूरत होती है, बेटियां बीमार हैं, सास की सेवा करनी है। अब समझ नहीं आता कहां जाऊं, किससे मदद मांगू। अब बेबश होकर तथा आंख में आंसू लिए बोलीं तब तो जीने की इच्छा ही खत्म हो गई। ऐसा दर्द किसी भी परिवार को नहीं दें। सबके घर में खुशियां व बरकत दें। किसी भी घर में आंसू नहीं छलकना चाहिए।</p>
<p><strong>मोहल्ले वालों का सहारा...पर कब तक!</strong><br />मोहल्ले के लोग और रिश्तेदार इस परिवार की मदद कर रहे हैं। कोई दवा के पैसे देता है, कोई राशन लाकर रख देता है। लेकिन ये मदद कितनी देर तक चलेगी, कोई नहीं जानता। पड़ोसी इमरान कहते हैं हम सब कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इलाज बहुत महंगा है। सरकार या कोई संस्था आगे आए तो शायद शाहिद भाई को बचाया जा सके।  कभी दीपावली के वक्त शाहिद रात-रातभर काम करते थे। अब उनके परिवार को आने वाले त्योहार डरावने लगते हैं। लोग अपने घर सजा रहे हैं, और उनका परिवार अपने घर में ही अंधेरे में बैठा हैं।</p>
<p><strong>सरकार और समाज से मदद की उम्मीद</strong><br />पत्नी कायनात कहती है कि अब किसी की मदद मिल जाए तो इलाज हो सकता है, वरना बस अल्लाह के भरोसे हैं। अब यह परिवार समाज और सरकार से मदद की आस लगाए बैठा है। मोहल्लेवालों ने भी जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि शाहिद खान जैसे परिवारों की पहचान कर सरकारी सहायता योजनाओं से जोड़ें। वहीं कायनात का कहना है कि अगर कोई संस्था या सरकारी मदद या कोई व्यक्ति हमारे लिए मदद में आगे आए तो वो हमारे लिए किसी परिश्ते से कम नहीं होगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Oct 2025 15:49:52 +0530</pubDate>
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                <title>शिक्षक दिवस - समाज के रियल हीरो तराश रहे भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[अशिक्षा के भंवर में फंसी जिंदगी में शिक्षा की रोशनी बिखेर रहे गुरुजी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/teacher-s-day-today---real-heroes-of-society-are-carving-the-future/article-125941"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/(630-x-400-px)-(2)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अज्ञानता के अंधेरे से ज्ञान की रोशनी की ओर ले जाने वाले गुरु को भारतीय संस्कृति में जो स्थान प्राप्त है, वह माता-पिता और ईश्वर को भी नहीं है। लेकिन, बदलते समय के साथ गुरु-शिष्य के संबंधों का आधार भी बदल गया। त्याग और समर्पण का भाव अब व्यापारिक हो गया। जिससे शिष्य और गुरु के बीच निष्ठा की जमीन दरकने लगी तो पैसों के तराजु पर ज्ञान तोला जाने लगा।  ऐसे माहौल में भी समाज में कुछ लोग ऐसे हैं, जो आज भी विश्वास, त्याग, समर्पण की परंपरा को अपने संघर्ष से सींच रहे हैं। उनके लिए शिक्षक दिवस है। पेश है खबर के प्रमुख अंश......</p>
<p><strong>छात्राओं को ग्रेजुएशन से बीएड करवाई</strong><br />सेवानिवृत व्याख्याता अश्वनी गौतम ने दो छात्राओं को गोद लेकर न केवल पढ़ा रहे हैं बल्कि स्वयं के खर्चे पर एमएसी बीएड व बीए-बीएड भी करवाई है। वर्तमान में दोनों छात्राओं को अध्यापक ग्रेड-1 भर्ती परीक्षा की कोचिंग भी स्वयं के खर्चें पर करवा रहे हैं। गौतम कहते हैं, वर्ष 2007 से 2012 तक अर्जुनपुरा राजकीय विद्यालय में पदस्थापित थे। वहां 9वीं कक्षा की छात्रा अर्चना (परिवर्तित नाम) अध्ययनरत थी, घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने से उनके पिता आगे पढ़ाना नहीं चाहते थे। मैंने उसके पिता से बात कर गीता को गोद लिया और एमएससी बीएड करवाई। इसी तरह वर्ष 2015 में गुमानपुरा स्कूल में ट्रांसफर हुआ तो यहां भी 9वीं कक्षा की छात्रा सीमा (परिवर्तित नाम) के पिता व भाई नहीं थे। घर की जिम्मेदारी मां पर थी। ऐसे में सीमा को गोद लेकर बीए-बीएड करवाई।  </p>
<p><strong>2000 बच्चों को किया शिक्षित, खोली नि:शुल्क कोचिंग</strong><br />बच्चों को कूड़ा-कचरा बीनते देख इंजीनियर अक्षय वैष्णव का दिल पसीज गया। उन्होंने मल्टीनेशनल कम्पनी की नौकरी छोड़ नि:शुल्क कोचिंग की नींव डाली और असहाय-अनाथ बच्चों को शिक्षित करना ही अपनी जिदंगी का मकसद बना लिया। संस्था के फाउंडर अक्षय कहते हैं, 5 जनवरी 2022 को रंगबाड़ी सर्कल के पास एवी निशुल्क कोचिंग की शुरुआत की थी। दोस्तों के साथ  बस्तियों में जाकर स्कूल न जाने वाले बच्चों को चिन्हित किया। वर्तमान में कोचिंग की दो ब्रांच हैं। जहां कक्षा 1 से 10वीं तक के बच्चों को नि:शुल्क कोचिंग देते हैं। अब तक 2000 बच्चों को शिक्षित कर चुके हैं। हाल ही में उनके कोचिंग से एक छात्र ने ईरान में आयोजित इंटरनेशनल ओलम्पियाड सिलवर मेडल प्राप्त किया। उल्लेखनीय कार्यों के लिए जिला कलक्टर द्वारा अक्षय को दो बार जिला स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है।</p>
<p><strong>टूटती शिक्षा की डोर जोड़ रहे भारत </strong><br />शिक्षा विभाग में कार्यरत सहायक प्रशासनिक अधिकारी भारत पाराशर टूटती शिक्षा की डोर जोड़ रहे हैं। वे स्वयं के खर्चे पर एक दर्जन से अधिक बच्चों को सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। जिन बच्चों को प्राइवेट स्कूलों ने आरटीई के दायरे से बाहर कर एडमिशन देने से इंकार कर दिया, भारत ने उन्हीं बच्चों का उसी स्कूल में खुद की जेब से फीस भरकर एडमिशन कराया। वहीं, कई बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से लेकर स्टेशनरी का खर्चा भी उठा रहे हैं। आॅफिस के बाहर मोबाइल, मैकेनिक व चाय की थड़ियों पर काम करते बच्चों को देख दिल पसीज गया। उनके अभिभावकों से बात कर स्कूल भेजने को राजी किया। जहां पैसा रूकावट बना वहां पाराशर ढाल बनकर खड़े हो गए।  </p>
<p><strong>नीट की नि:शुल्क कोचिंग दे रही अनुभूति</strong><br />कोचिंग इंस्टीटयूट में नीट-यूजी की फैकल्टी प्रोफेसर अनुभूति दीक्षित महावीर नगर विस्तार योजना में अपने आवास पर बच्चों को नि:शुल्क नीट की कोचिंग दे रही हैं। अनुभूति बच्चों को स्कूली शिक्षा के साथ गणित, बॉडी लैंग्वेज, जिंदगी जीने की कला, बातचीत करने का लहजा, कम्प्यूटर टेक्नोलॉजी और संस्कार के अलावा नैतिक शिक्षा का भी ज्ञान दे रहीं हैं। इसके अलावा बीमार बच्चों का भी खुद अपने खर्चे पर इलाज करवातीं है। अनुभूति कहतीं हैं, हर दिन हर पल, कहीं न कहीं, अशिक्षा टकरा ही जाती है। इनके जीवन में रोशनी सिर्फ शिक्षा के जरिए ही आ सकती है। </p>
<p><strong>30 बच्चों को भिक्षावृति से दूर कर पढ़ा रहीं बीना </strong><br />जिन बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, वे भिक्षा मांग रहे थे। जिसे देख शिक्षिका बीना केदावत की आंखें नम हो गई। उन्होंने इन बच्चों का जीवन संवारने को जिम्मा उठाया और अन्त्योदय फाउंडेशन मुम्बई के सहयोग से बाल मुस्कान पाठशाला की नींव डाली। शिक्षिका बीना बताती हैं, यह पाठशाला उन बच्चों के लिए है जिनके परिवार भिक्षावृत्ति और कचरा बीनने पर निर्भर हैं। यहां बच्चों को न सिर्फ पढ़ाई करवाई जाती है, बल्कि उन्हें किताबें, बैग, चप्पलें, स्टेशनरी और खेल-खिलौनों की सुविधा भी दी जाती है।</p>
<p><strong>28 साल से विद्यार्थियों की हर मोड़ पर कर रहे मदद</strong><br />राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़गांव के व्याख्याता मनोज भारद्वाज 28 साल से जरूरतमंद बच्चों को स्टेशनरी, गणवेश, स्वेटर, जर्सी सहित जरूरत की सभी चीजें उपलब्ध करवा रहे हैं। वहीं, बोर्ड परीक्षाओं में आने वाले टॉपर्स छात्र-छात्राओं व बोर्ड फीस समेत हर वर्ष बच्चों के विकास पर 70 से 80 हजार की राशि स्वयं खर्च करते हैं। सेवाभावी कार्यों के लिए भारद्वाज को राज्य स्तरीय पुरस्कार, भामाशाह सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं। भारद्वाज द्वारा बोर्ड परीक्षा में अव्वल रहे छात्र-छात्राओं का अभिभावकों के साथ सम्मान करते हैं। टॉपर विद्यार्थियों को प्रोत्साहन स्वरूप राशि भेंट करते हैं। निर्धन छात्र-छात्राओं की 12वीं बोर्ड फीस भी स्वयं जमा करवाते हैं।  </p>
<p><strong>कहानियों व संगीत से गणित को रोचक बनाया</strong><br />राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गिरधरपुरा के शिक्षक नवाचार के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने गणित जैसे कठिन  विषयों में जटिल गणनाओं को कहानियों व संगीत के माध्यम से रोचक बनाया। जिसका फायदा बोर्ड परीक्षाओें में विद्यार्थियों को मिले 98% के रूप में देखने को मिला। उनके प्रयासों से विद्यालय में पहली बार नेशनल मीम्स मेरिट स्कोलरशिप में कक्षा 8वीं के 4 बच्चों का चयन हुआ है। दिनेश स्वयं कई शिक्षण प्रतियोगिताओं में भी अव्वल रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Sep 2025 14:51:56 +0530</pubDate>
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                <title>भाजपा षड्यंत्रकारी पार्टी, समाज में नफरत फैलाती है : अखिलेश</title>
                                    <description><![CDATA[समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि महात्मा बुद्ध व बाबासाहेब जैसे महापुरुष की प्रतिमाओं को हटाने पर सीतापुर में हुआ विवाद एक बड़ी सियासी साज़िश की ओर इशारा कर रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/bjp-conspiracy-party-spreads-hatred-in-society/article-109923"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(1)12.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि महात्मा बुद्ध व बाबासाहेब जैसे महापुरुष की प्रतिमाओं को हटाने पर सीतापुर में हुआ विवाद एक बड़ी सियासी साज़िश की ओर इशारा कर रहा है। सब जानते हैं कि वो कौन हैं जिनके इशारे पर प्रशासन ऐसा प्रहार कर रहा है। शोषित-वंचित समाज की जागरूकता नई चेतना बनकर उभर रही है, इन साज़िशों की उम्र अब बहुत लंबी नहीं बची है। यादव ने कहा कि भाजपा षडयन्त्रकारी पार्टी है। भाजपा समाज में नफरत फैलाती है। सामाजिक सछ्वाव बिगाड़ती है। भाजपा पीडीए विरोधी है। भाजपा ने पीडीए के हर सम्मान और आरक्षण को छीना है। पीडीए की एकजुटता से भाजपा के लोग घबराए हुए हैं। भाजपा सरकार में पीडीए के साथ षड्यंत्र हो रहा है। समाजवादी पार्टी पीडीए के साथ बाबा साहब के विरोधियों का हर स्तर पर मुकाबला करने को तैयार है। </p>
<p>समाजवादी पार्टी सामाजिक सछ्वाव, संविधान और लोकतंत्र के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।  सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार हर मोर्चे पर फेल है। मंहगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार चरम पर है। किसान, नौजवान, व्यापारी, महिलाएं सभी इस सरकार की गलत नीतियों से त्रस्त हैं। भाजपा सरकार ने किसानों, नौजवानों सभी से झूे वादे किये। किसानों की आय दोगुनी नही हुई। मंहगाई बढ़ने से खेती का लागत मूल्य बढ़ गया। भाजपा सरकार ने किसानों से धोखा किया। गन्ने का मूल्य नहीं बढ़ाया। चीनी मिलों पर किसानों का हजारों करोड़ रूपये बकाया है। गेंहू की सरकारी खरीद नहीं हो रही है। बिचौलिए और बड़ी कम्पनियां औने पौने दाम में किसानो की फसल खरीदकर उन्हें लूट रहे है। सरकार की उनसे मिलीभगत है। भाजपा सरकार जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दो से ध्यान हटाने के लिए नए-नए मुद्दे ला रही है। इसके समर्थक अराजक तत्व समाज में तनाव और वैमनस्यता फैलाने का काम करते है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Apr 2025 12:01:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केंद्र और राज्य सरकार संजीवनी सोसायटी पीड़ितों को दिलाएं न्याय : सोसायटी ने कई राज्यों में आमजन की कमाई को लूटा, गहलोत ने कहा- मोदी एवं भजनलाल वित्तीय अनियमितताओं पर लें संज्ञान </title>
                                    <description><![CDATA[इसके अलावा लगभग 22 बीघा जमीन को पिछले दिनों बाजार दर से एक चौथाई कीमत पर नीलाम कर दिया गया। यह दिखाता है कि भाजपा के नेता एवं राज्य सरकार के अधिकारी मिलकर निवेशकों के साथ अन्याय कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-central-and-state-government-sanjeevani-society-should-provide-the/article-109130"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/ashok-gehlot1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केन्द्र और राज्य सरकार से मांग की है कि आदर्श संजीवनी सोसायटी के पीड़ितों को न्याय दिलाएं। गहलोत ने कहा कि आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी ने राजस्थान, गुजरात समेत कई राज्यों में आमजन से ठगी की एवं उनकी मेहनत की कमाई को लूटा। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस लूट की कमाई से अर्जित की गई कई संपत्तियों को अटैच किया, जिससे कानूनी प्रक्रिया पूर्ण कर निवेशकों को उनकी राशि लौटाई जा सके। ऐसा जानकारी में आया है कि 8 अप्रैल 2019 को आदर्श सोसायटी की संपति अटैच करने के बाद 2024 एवं 2025 में बिना प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की अनुमति के सिरोही के अधिकारियों ने कई जमीनों का नामांतरण अवसायक (लिक्विडेटर ) के नाम पर खोल दिया। </p>
<p>इसके अलावा लगभग 22 बीघा जमीन को पिछले दिनों बाजार दर से एक चौथाई कीमत पर नीलाम कर दिया गया। यह दिखाता है कि भाजपा के नेता एवं राज्य सरकार के अधिकारी मिलकर निवेशकों के साथ अन्याय कर रहे हैं। इसी प्रकार, राज्य में भाजपा सरकार आने के बाद संजीवनी सोसाइटी मामले की जांच भी लगभग रुक सी गई है और कई आरोपियों को एसओजी अब आरोपी ही नहीं मान रही है। पीएम नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आग्रह करता हूं कि आदर्श सोसाइटी के मामले में की जा रहीं इन वित्तीय अनियमितताओं पर संज्ञान लें एवं राजस्थान में आदर्श, संजीवनी जैसी सोसाइटियों के पीड़ितों को न्याय दिलवाने की कार्रवाई करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 Mar 2025 16:08:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>समाज के उत्थान में सभी की भूमिका अहम, हर क्षेत्र में प्रगति की दिशा में हम बढ़ाते रहें कदम : भजनलाल</title>
                                    <description><![CDATA[ सीएम कर्नाटक के बेंगलुरू में सुवर्णा समब्रह्म और 11वें राज्य स्तरीय ब्राह्मण सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/everyones-role-is-important-in-the-upliftment-of-the-society/article-101269"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/6622-copy85.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि देश और समाज के उत्थान में हर व्यक्ति की भूमिका अहम है। समाज में शांति, न्याय और सद्भावना को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ हमारी जिम्मेदारी है कि हम हर क्षेत्र में प्रगति की दिशा में कदम बढ़ाते रहें। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हमें विकास के साथ विरासत का संरक्षण करने की प्रेरणा दी है। हमें उनके दिखाए मार्ग का अनुसरण करते हुए हमारे पूर्वजों की दी हुई सांस्कृतिक विरासत को संजोने के साथ मजबूत भी करना चाहिए। सीएम कर्नाटक के बेंगलुरू में सुवर्णा समब्रह्म और 11वें राज्य स्तरीय ब्राह्मण सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।</p>
<p>राजस्थान और कर्नाटक सांस्कृतिक विरासत के लिए विख्यात: सीएम ने कहा कि जिस तरह राजस्थान अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है, उसी तरह कर्नाटक भी अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए विख्यात है। शास्त्रों के अनुसार भगवान परशुराम ने कर्नाटक के कोंकण तट का निर्माण किया था, इसलिए इसे परशुराम सृष्टि कहा जाता है। मैं राजस्थान और कनार्टक के सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और अधिक मजबूत करने के लिए आप सभी को राजस्थान आने के लिए आमंत्रित करता हूं।</p>
<p><strong>सरकार धार्मिक आस्था और संस्कृति का कर रही संरक्षण</strong><br />शर्मा ने कहा कि राजस्थान में हमारी सरकार धार्मिक आस्था और संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। खाटूश्यामजी मंदिर को भव्यता प्रदान करने के लिए 100 करोड़ के कार्य तथा 20 प्रमुख मंदिरों और आस्था धामों में भी विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। राजस्थान का हर कोना, अपनी समृद्ध धरोहर, प्रकृति, संस्कृति और विविधताओं का दर्शन करवाता है। उद्यमियों को निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए सीएम ने कहा कि हमारी सरकार ने निवेशकों के लिए एक ऐसा माहौल तैयार किया है, जहां उन्हें हर संभव सुविधाएं मिलेंगी। कार्यक्रम में अखिल कर्नाटक ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष अशोक हर्नाहल्ली सहित महासभा के अन्य पधाधिकारी, संत, महात्मा तथा बड़ी संख्या में विप्र समाज के लोग उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Jan 2025 11:19:15 +0530</pubDate>
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                <title>लालू-नीतीश का उद्देश्य समाज को बांटकर राजनीति करना : प्रशांत</title>
                                    <description><![CDATA[अपने शासन काल में गरीबों, वंचितों और पिछड़ों को आवाज दी लेकिन उन्होंने जिन वर्गों को आवाज दी, उन्हें शिक्षा, जमीन या रोजगार क्यों नहीं दिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/lalu-nitishs-aim-is-to-do-politics-by-dividing-the-society/article-98363"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/prashant-kishor.jpg" alt=""></a><br /><p>पटना। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर शनिवार को हमला बोला और कहा कि इन दोनों नेताओं का राजनीतिक मॉडल एक जैसा है, दोनों नेताओं का उद्देश्य समाज को बांटकर और सबको गरीब, अनपढ़ और मजदूर बनाकर अपनी राजनीति करते रहना है। किशोर ने शनिवार को कहा कि सामाजिक न्याय और समतामूलक समाज के नाम पर जनता को बेवकूफ बनाकर उनसे वोट लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लालू यादव से किसी ने सवाल नहीं किया कि वो दावा करते हैं कि उन्होंने अपने शासन काल में गरीबों, वंचितों और पिछड़ों को आवाज दी लेकिन उन्होंने जिन वर्गों को आवाज दी, उन्हें शिक्षा, जमीन या रोजगार क्यों नहीं दिया। </p>
<p>उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने आवाज दी, जिससे वो जीवन भर उनके लिए नारे लगा सकें और उनका झंडा लेकर घूम सकें। वहीं यदि उन्होंने इन वर्गों को शिक्षा दी होती या पूंजी उपलब्ध कराकर रोजगार मुहैया कराया होता तो आज वो उनकी पार्टी का झंडा लेकर नहीं घूम रहे होते।   जनसुराज के सूत्रधार ने कहा कि अपनी राजनीति के लिए इन नेताओं ने पूरे बिहार को गरीब, अनपढ़ और मजदूर बना दिया है। इसका नतीजा है कि महज 400 रुपये पेंशन पाने के बावजूद लोग सरकार को इस बात के लिए वोट दे रहे हैं कि सरकार 400 रुपये दे रही है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Dec 2024 13:08:46 +0530</pubDate>
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                <title>राजस्थान पेंशनर समाज का अधिवेशन आयोजित</title>
                                    <description><![CDATA[ राजस्थान पेंशनर समाज का प्रदेश स्तरीय अधिवेशन आगामी रविवार को जयपुर में वैशाली नगर स्थित महल रजवाड़ा रिसॉर्ट में आयोजित हुआ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-pensioners-society-convention-organized/article-97058"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/24.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान पेंशनर समाज का प्रदेश स्तरीय अधिवेशन आगामी रविवार को जयपुर में वैशाली नगर स्थित महल रजवाड़ा रिसॉर्ट में आयोजित हुआ। जिसमें मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला रहे। इनके अतिरिक्त सांसद मंजू शर्मा, सांसद राव राजेंद्र सिंह, विधायक गोपाल शर्मा, विधायक बाल मुकुंदाचार्य,श्रवण सिंह बगड़ी,निदेशक पेंशन, परियोजना निदेशक आर जी एच एस शिप्रा विक्रम विशिष्ठ अतिथि रहे। </p>
<p>प्रदेशाध्यक्ष शंकर सिंह मनोहर ने बताया कि प्रदेश भर में पेंशनरों में अधिवेशन को लेकर भारी उत्साह है और काफी संख्या में पेंशनर इस अधिवेशन में भाग लिए। अधिवेशन में सभी जिला अध्यक्षों को सम्मानित किया गया। अधिवेशन में राजस्थान पेंशनर समाज की स्मारिका का विमोचन भी किया गया। यह स्मारिका पेंशनरों से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी को समावेश करते हुए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Dec 2024 17:06:30 +0530</pubDate>
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