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                <title>Passenger - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>चम्बल के तीर बिना नीर- सूखे कण्ठ से यात्रा की मजबूरी </title>
                                    <description><![CDATA[संजय नगर रोडवेज बस स्टैण्ड यात्री सुविधाओं के नाम पर फिसड्डी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/without-water-on-the-banks-of-the-chambal-river--the-compulsion-to-travel-through-a-dry-gorge/article-143928"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(11)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संजय नगर स्थित रोडवेज बस स्टैण्ड जिसे शहर का आधुनिक बस अड्डा कहा जाता है, आज यात्री सुविधाओं के नाम पर बदहाली की मिसाल बन चुका है। 22.76 लाख लीज किराया देने वाला यह परिसर सुविधाओं के नाम पर धेला तक खर्च नहीं करता । वर्ष 2013 से संचालित यह बस स्टैण्ड अब मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। यात्रियों का कहना है कि आधुनिक और भव्य भवन होने के बावजूद यदि मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हों, तो ऐसी व्यवस्था का कोई औचित्य नहीं रह जाता। सबसे चिंताजनक स्थिति पेयजल व्यवस्था की है, जो पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। कोटा शहर जिसे देशभर में 24 घन्टे पेयजल की आपूर्ति के लिये जाना जाता है उस शहर में रोडवेज के उपयोगकतार्ओं को यहां के दयनीय हालात पर गुस्सा आना लाजमी है।</p>
<p><strong>नल टूटे, कनेक्शन कटे, प्याऊ अलमारी बन गये</strong><br />बस स्टैण्ड भवन पोर्च एरिया में बनी प्याऊ में एक भी नल नहीं है। इस प्याऊ के तो कनेक्शन तक हटा दिए गए हैं। जिस स्थान पर यात्रियों को पानी पीना चाहिए, वहां सफाई कर्मचारियों ने झाड़ू और अन्य सामान रख दिया है।प्रबंधन का तर्क है कि इस प्याऊ में पानी चालू करने पर सेनेटरी लाइन चौक हो जाती है, जिससे बरामदे में पानी भर जाता है। हालांकि प्रबंधन मरम्मत का आश्वासन दे रहा है, लेकिन फिलहाल यात्रियों को तत्काल राहत का कोई रास्ता नहीं निकाला जा रहा है।</p>
<p><strong>दो अन्य प्याऊ भी लेकिन पानी सिर्फ एक नल से</strong><br />मंदिर के पास स्थित एक अन्य प्याऊ पर 80 लीटर का वाटर कूलर रखा हुआ है, लेकिन उसका बिजली व पानी का कनेक्शन कटा हुआ है। दूसरा,  बस स्टैण्ड के प्रवेश द्वार के पास एक संस्था द्वारा संचालित प्याऊ ही किसी तरह चालू है। यहां भी दो में से एक नल टूटा हुआ है, जबकि दूसरे में भी टंकियां चोक होने से पानी का प्रेशर नहीं है । पूरे बस स्टैण्ड की जलापूर्ति इसी एक नल पर निर्भर है। गर्मी के मौसम में जब यात्रियों की संख्या और पानी की जरूरत बढ़ जाती है, तब यह व्यवस्था नाकाफी साबित होगी ।</p>
<p><strong>पीना तो दूर हाथ धोने तक के लिए खरीदना पड़ रहा पानी</strong><br />प्रतिदिन कईं यात्री इस बस स्टैण्ड से आवागमन करते हैं। पानी की सुविधा न होने के कारण उन्हें मजबूरन बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है ।निगम की तरफ से हाथ धोने तक का पानी नहीं मुहैय्या नहीं कराया जा रहा। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के यात्रियों के लिए यह अतिरिक्त बोझ बन गया है। कई यात्रियों ने बताया कि बस का इंतजार करते समय प्यास लगने पर उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता है।</p>
<p><strong>सबसे बड़े अधिकारी का कार्यालय फिर भी यह हाल</strong><br />सबसे हैरानी की बात यह है कि इसी बस स्टैण्ड परिसर में रोडवेज के वरिष्ठ अधिकारी का कार्यालय भी स्थित है। इसके बावजूद यात्री सुविधाओं की यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता को दशार्ती है। यही नहीं कोटा आगार का पूरा मेनेजमेंन्ट स्टाफ इसी परिसर में ड्यूटी बजाता है। ऐसे में भी यहां रोड़वेज की छवि को खराब करने वाली यह दुर्दशा पर किसी का ध्यान ना जाना प्रशासनिक अधिकारियों की असंवेदनशीलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है</p>
<p><strong>राजस्व और छवि पर भी असर</strong><br />सुविधाओं की लगातार कमी के कारण बस स्टैण्ड का राजस्व भी प्रभावित हो रहा है। खराब अनुभव के चलते कई यात्री निजी वाहनों या अन्य साधनों को प्राथमिकता देने लगे हैं। इसी कारण यहां से यात्री भार लगातार कम होता जा रहा है। वर्तमान में ड़िपो की कुल आय का मात्र 2 प्रतिशत से भी कम यहां से प्राप्त होती है।</p>
<p>मै स्वयं संजय नगर रहता हूँ लेकिन इस बस स्टैण्ड़ पर सुविधाओं के नाम कोई जिम्मेदार नहीं इसलिये कोई यात्री परिवार के साथ आना  पसन्द नहीं करता, टेक्सी लेकर नयापुरा जाना बेहतर है।<br /><strong>- गोविन्द सिंह गौड़, निवासी संजय नगर</strong></p>
<p>हमारी संस्था द्वारा एक पक्की प्याऊ लगायी गयी है, जिसे जन सुविधा की दृष्टि से हम देख्रेख भी करवा रहे है, इसे 2 दिनों साफ सफाई करवाकर चालू करवा देंगे ।<br /><strong>- महावीर नागर , कोषाघ्यक्ष श्री धरणीधर जनसेवा संस्थान</strong></p>
<p>मेरी जानकारी में आया है इसके लिये एक टीम बनवाकर शीघ्र ही निस्तारण करवा दिया जायेगा।<br /><strong>- अजय कुमार मीणा मुख्य प्रबंधक कोटा आगार</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 15:01:44 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली हवाई अड्डे पर पायलट ने यात्री पर किया प्रहार : सोशल मीडिया पर वीडियो हुआ वायरल, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[IGI हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 पर एयर इंडिया एक्सप्रेस के पायलट ने यात्री अंकित दीवान पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। विवाद तब शुरू हुआ जब दीवान के परिवार को शिशु के स्ट्रोलर के कारण स्टाफ लेन का सुझाव मिला। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पायलट को तुरंत निलंबित कर दिया गया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pilot-attacks-passenger-at-delhi-airport-video-goes-viral-on/article-136601"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/े्ललेोे्.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) के टर्मिनल-1 पर एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसमें एयर इंडिया एक्सप्रेस के एक पायलट ने एक सह-यात्री पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। पीड़ित अंकित दीवान अपने परिवार के साथ यात्रा कर रहे थे।</p>
<p>सुरक्षा कर्मियों ने दीवान के परिवार को शिशु के स्ट्रोलर के कारण स्टाफ लेन का उपयोग करने का सुझाव दिया। इसी दौरान कैप्टन वीरेंद्र ने लाइन तोड़ने का प्रयास किया। जब यात्री ने विरोध किया, तो पायलट ने आपत्तिजनक टिप्पणी की और शाब्दिक विवाद जल्द ही हिंसा में बदल गया। पायलट के प्रहार से अंकित के चेहरे से रक्तस्राव होने लगा।</p>
<p>सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों में पायलट की वर्दी पर खून के धब्बे साफ दिखाई दे रहे हैं। एयर इंडिया एक्सप्रेस ने आरोपी पायलट को तत्काल निलंबित कर दिया है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 13:27:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हे भगवान, जान की कीमत पैसों से ज्यादा कब होगी,कोटा शहर में  लगभग 80 बसें रजिस्टर्ड, सुरक्षा नियमों की नहीं कर रहे पालना</title>
                                    <description><![CDATA[परिवहन विभाग ने की पांच बसों पर कार्रवाई, मानक अनुरूप नहीं थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/oh-god--when-will-life-be-more-valuable-than-money--nearly-80-buses-are-registered-in-kota-city--yet-they-are-not-following-safety-rules/article-129846"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/5246.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जैसलमेर-जोधपुर मार्ग पर एसी बस में शॉर्ट-सर्किट से लगी आग में 22 यात्रियों की मौत के बाद प्रशासन नींद से जागा है। वहीं, परिवहन विभाग ने कोटा सहित पूरे राजस्थान में सभी परमिटधारी बसों की जांच शुरू कर दी है। बता दें कि  दैनिक नवज्योति ने कई प्रमुख खबरों का प्रकाशन कर ऐसी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए नकारा संसाधन निजी बसों की मनमानी को लेकर चेताया था। वहीं कोटा शहर में स्लीपर और एसी बसों की सुरक्षा हालात अभी भी चिंताजनक हैं। दैनिक नवज्योति ने जब जांच-पड़ताल की, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कई बसें बिना परमिट या अपूर्ण फिटनेस सर्टिफिकेट के सड़कों पर दौड़ रही थीं। फायर सेफ्टी उपकरण का अभाव, संकरी गैलरी और ठीक से न खुलने वाले शटर यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। बता दें कि कोटा शहर में लगभग 80 बसें रजिस्टर्ड है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निजी बसों में जान-माल का सर्वाधिक खतरा बना रहता है। डीटीओ सुरेन्द्रसिंह राजपुरोहित ने बताया कि कोटा में जांच की गई बसों में इमरजेंसी गेट या निकासी द्वार पर अवरोध पाया गया। नाकाबंदी के दौरान ऐसे बसों पर कार्रवाई की जा रही है। बुधवार को हुई नाकाबंदी में पांच बसों को यात्रियों की सुविधा के अनुरूप न पाए जाने पर कार्रवाई की गई।</p>
<p><strong> दैनिक नवज्योति लगातार चेता रहा, नहीं दिया जा रहा ध्यान</strong><br />दैनिक नवज्योति निजी स्लीपर बसों में दुर्घटना के खतरे को लेकर दो साल से लगातार चेता रहा है। स्थिति  यह है कि 8 जुलाई 2023 को ही दैनिक नवज्योति ने अलर्ट प्रकाशित किया था, एक पल में मौत की नींद सुला सकती हैं बसें शीर्षक से खबर प्रकाशित कर संभावित खतरे से आगाह किया था। इसके बाद 16 दिसम्बर को फिर स्लीपर बसों में मुसाफिरों की जान खतरे में शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इतना ही नहीं इसके बाद लगातार नवज्योति ने इस मुद्दे पर यातायात प्रशासन और बस मालिक, चालक, यात्री सभी की सुरक्षा को लेकर संभावित खतरा टालने को कई समाचार प्रकाशित किए।   </p>
<p><strong>बिना सेफ्टी दौड रही बसों को रोकने की जिम्मेदारी किस की? कैसे चल रही थी? </strong><br />राज्य में हाल ही में हुई बस दुर्घटनाओं के बाद सुरक्षा जांच और मानकों को लेकर बस संचालकों ने विरोध जताया है। बस संचालकों का कहना है कि उनकी सभी बसों में इमरजेंसी गेट और फायर सेफ्टी उपकरण मौजूद हैं। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि जो भी कमी हो, उन्हें बताई जाए ताकि वे उसे सुधार सकें। बस यूनियन के सत्यनारायण शाहू ने नवज्योति से विशेष बातचीत में बताया कि वर्तमान में बीएस-6 और यूरो-6 इंजन की वायरिंग इतनी जटिल हो गई है कि स्पार्किंग से आग लग सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कोई बस मानक पर खरी नहीं उतरती, तो उसे पास नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी गेट हटाकर सीट बढ़ाना गलत है और इसके विरोध में हैं। उन्होंने बताया कि एक दुर्घटना के कारण पूरे राजस्थान के बस संचालकों को परेशान किया जा रहा है, जबकि दीपावली के मौके पर यात्रियों को आवागमन में परेशानी हो रही है। बुधवार को जोधपुर, जैसलमेर और जयपुर की कई बसें रद्द हो चुकी हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनके विरोध को नहीं सुना गया तो पूरे राजस्थान में चक्का जाम किया जाएगा।</p>
<p><strong>फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी</strong><br />- बस में कम से कम दो अलग-अलग प्रकार के फायर एक्सटिंग्विशर अनिवार्य हैं।<br />- सभी फायर एक्सटिंग्विशरों की जांच हर छह महीने में जरूरी है।<br />- बस में धुआं और आग का अलार्म होना चाहिए।<br />- कम से कम दो आपातकालीन दरवाजे और खिड़कियां होनी चाहिए, जो आसानी से खुलने योग्य हों।<br />- दरवाजे और खिड़कियों के रास्ते में शटर या जंजीर जैसी बाधाएं नहीं होनी चाहिए। <br />- चालक और स्टाफ को फायर सेफ्टी और आपातकालीन निकासी का प्रशिक्षण अनिवार्य है।<br />- आग बुझाने और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया का नियमित अभ्यास होना चाहिए।<br />- आपातकालीन निकास के पास स्पष्ट संकेत और निर्देश होने चाहिए।<br />- दिव्यांग यात्रियों के लिए सर्विस गेट के पास आरक्षित सीट अनिवार्य है।</p>
<p><strong>स्लीपर बसों में खतरे के कई कारण</strong><br />- ड्राइवर की थकावट भी हादसों की बड़ी वजह है। रातभर 300-1000 किमी की दूरी तय करने वाले ड्राइवर अक्सर नींद में गायब हो जाते हैं।<br />- अधिकांश बसों में ड्राउजीनेस अलर्ट सिस्टम नहीं होता।<br />- स्लीपर बसें आरामदायक सोने की सुविधा देती हैं, लेकिन हिलने-डुलने की जगह बेहद कम होती है।<br />- बसों की ऊंचाई भी खतरे का कारण बनती है। अतिरिक्त लगेज डिग्गी लगने से ऊंचाई 10-12 फीट तक बढ़ जाती है।</p>
<p><strong>इमरजेंसी गेट हटाकर लगाई अतिरिक्त सीटें</strong><br />नवज्योति ने बस के ड्राइवर से इमरजेंसी गेट के बारे में पूछा, तो बताया कि गेट पीछे की ओर है। लेकिन, कई बसों में इसे बंद करवाकर अतिरिक्त सीटें लगा दी गई हैं। दोनों तरफ सीटें होने से बस की गैलरी संकरी हो जाती है। आगजनी की स्थिति में यात्रियों के लिए खिड़कियों से कूदना ही एकमात्र विकल्प बचता है, जो जानलेवा हो सकता है।</p>
<p> सभी बसों की मानक अनुरूप मापदंड को लेकर चैकिंग की जा रही है। अब तक पांच बसों पर कार्रवाई की गई है। इन बसों की जांच में यह पाया गया कि ये मानक के अनुरूप नहीं हैं। इन बसों में इमरजेंसी गेट या निकासी द्वार पर अवरोध था। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। <br /><strong>    -सुरेन्द्रसिंह राजपुरोहित, डीटीओ, कोटा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Oct 2025 15:39:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बंद रोडवेज बसों ने बढ़ाई यात्रियों की मुश्किल, निजी वाहनों का किराया मंहगा</title>
                                    <description><![CDATA[खानपुर में बारां-झालावाड़ मेगा हाइवे पर बस स्टैण्ड की दरकार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/roadways-buses-have-been-suspended--increasing-passenger-hardship--and-private-vehicle-fares-have-become-more-expensive/article-129013"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/roadways1.png" alt=""></a><br /><p> खानपुर। खानपुर में कोरोना काल से रोडवेज की कुछ बसें बंद चल रही थी जिसके चलते राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी अनुसार खानपुर में बारां झालावाड़ मेगा हाइवे पर ना तो कोई बस स्टैंड बना हुआ है और ना ही यात्रियों को बसों की सुविधा मिल पा रही है। रोडवेज की कुछ बसें ऐसी है जो पहले चलती थी जैसे हिंडौन गाड़ी जो की खानपुर से सुबह 5 रवाना होती थी और उधर से कोटा से आते समय लगभग 6:30 बजे कोटा से रवाना होती थी।  इससे व्यापारी कृषक व विद्यार्थी भी सुबह से जाने वाला विद्यार्थी शाम को घर वापस आ जाता था उसके लिए हिंडौन गाड़ी बहुत ही अच्छी गाड़ी थी क्योंकि उसमें कोटा जाने वाला व्यापारी पूरा कार्य करके और 9 बजे भी तैयार होकर वहां से बैठ जाता था और खानपुर पहुंच जाता था। मजबूरन रोजाना झालावाड़ या कोटा जाने वालों को निजी वाहनों में सफर करना पड़ रहा है और निजी वाहनों का किराया भारी पड़ता है जो एक गरीब व्यक्ति उसका वहन नहीं कर सकता। निजी वाहन में सफर करना महंगा और असुरक्षित है परिवहन की बसों की गारंटी है निजी वाहनों की कोई सुरक्षा नहीं है। खानपुर कस्बे वासियों का कहना है की जो बसें बंद हुई है अगर वह बसे वापस चालू हो जाती है जैसे हिंडौन बस झालावाड़ से रात्रि सेवा सुविधा और भी कुछ बसे हैं जो पहले चलती थी तो यात्रियों को थोड़ी <br />राहत मिलेगी। </p>
<p>इधर से तो हम कोटा चले जाते हैं लेकिन कोटा से खरीदारी करने के बाद जब वापस आते हैं तो उधर से आने के लिए कोई बस नहीं है इसलिए हिंडौन गाड़ी वापस चालू की जाए।<br /><strong>-बंटी गौतम, कस्बेवासी </strong></p>
<p>अभी बीच में झालावाड़ जाने के लिए खानपुर से सुबह 7 बजे दो या तीन महीने पहले बस चल रही थी लेकिन वह बस बंद हो गई है उसे चालू किया जाए।<br /><strong>-मुकेश मालव, कस्बेवासी </strong></p>
<p>कोटा से रात को आने के लिए हिंडौन बस चलती थी वह बस खानपुर के लिए एक बहुत अच्छी सेवा थी उसे सेवा को वापस चालू की जाए।<br /><strong>-टोनी मीणा, कस्बेवासी</strong></p>
<p>कोरोना काल के बाद कुछ बसें खानपुर से बंद हो गई है उन बंद बसों को चालू किया जाए ताकि यात्री परिवहन की बस में सफर कर सके।<br /><strong>-राजाराम गुर्जर, कस्बेवासी</strong></p>
<p>बच्चों को खानपुर से झालावाड़ कॉलेज भी जाना पड़ता है और कोई आॅफिसर खानपुर से झालावाड़ डेली अप डाउन भी करता है तो उनको परेशानी का सामना करना पड़ता है अत: बंद बसों को चालू करने की कृपा करें।<br /><strong>-पपला गुर्जर, कस्बेवासी</strong></p>
<p>कोरोना के बाद कुछ बसें बंद हो गई थी उन बसों को सुचारू रूप से चालू की जाए ताकि निजी वाहनों से बचकर परिवहन की बसों में यात्रा कर सके।<br /><strong>-नरेंद्र मालव, कस्बेवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />रोडवेज बस जो कुछ समय पहले बंद हो गई थी, वह संसाधन तुरंत चालू किए जाएंगे और जहां तक हो सके तो फरवरी में स्थाई रूप से खानपुर में बस स्टैंड भी बन जाएगा।  खानपुर में हमें जमीन भी मिल गई है बाउंड्री को रोडवेज के नाम करवा लिया है इसलिए हो सके तो बस स्टैंड फरवरी में लगभग बन सकता है इसका पट्टा भी बन चुका है।<br /><strong>-पवन सैनी यातायात प्रबंधक, झालावाड़</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 16:27:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पुराने से नहीं हो रहा मोह भंग, नया बस अड्डा उजड़ने लगा</title>
                                    <description><![CDATA[2013 में नया बस स्टैंड भवन से ही होता था बसों का संचालन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/not-getting-disillusioned-with-the-old-one--the-new-bus-stand-started-getting-ruined/article-122928"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/oer-(2)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के हृदयस्थल स्थित नयापुरा रोडवेज बस स्टैंड आज भी 50 साल पुरानी बिल्डिंग में ही संचालित हो रहा है। शहर के संजयनगर में स्थित नया रोडवेज बस स्टैंड बनने के बाद 2013 में सभी बसों का यहां संचालन शुरू कर दिया था। रोडवेज के सभी बड़े अधिकारी भी यही शिफ्ट हो गए है। कोरोना के बाद से सभी बसों का संचालन नयापुरा पुराना बस स्टैंड से ही रोडवेज बसों का संचालन रहा है। यूं भी कह सकते हैं कि रोडवेज का पुरानी बिल्डिंग में चल रहे बस स्टैंड से मोह भंग नहीं हो रहा है। वहीं रोडवेजकर्मियों का तर्क है कि यहां यात्रीभार ना के बराबर है तथा सभी नयापुरा बस स्टैंड से अपने गतंव्य के लिए यात्रा करते है। कुछ यह भी कहते हैं यहां केवल कोटा आगार की बसें ही आती है। अधिकारियों का कहना है कि यात्री चाहे तो कार्यशाला से बस स्टैंड जा रही बसों में चढ़ सकते है तथा टिकट बस के अंदर या नयापुरा बस स्टैंड से ले सकते हैं।  यहां वर्तमान में कुल 93 बसें है तथा 9 अनुबंधित है। स्टाफ की कमी के चलते कई बार शेड्यूल भी बदलता रहता है। यहां की बसे रोजाना 32 हजार किलोमीटर का सफर तय करती है। रोडवेज की पुरानी बसों की स्थिति काफी खराब है। नवज्योति के रिपोर्टर ने स्टिंग आॅपरेशन के दौरान व्यवस्थाओं को जाना तो हकीकत कुछ और ही नजर आई। संजयनगर स्थित नए भवन में बने बस स्टैंड में अधिकारियों व कर्मचारियों जब यहां से संचालित बसों के बारे में जानकारी मांगी तो ढुलमुल जवाब देते नजर आए। नवज्योति रिपोर्टर यात्री बनकर वहां खड़े कुछ लोगों से खाली पड़े बस स्टैंड के बारे जानकारी ली।</p>
<p><strong>नयापुरा बस स्टैंड में है तकनीकी खामियां</strong><br />रिपोर्टर जब नयापुरा बस स्टैंड पहुंचा तो हकीकत कुछ और ही नजर आई। हालांकि यह शहर की प्राईम लोकेशन है। लेकिन यह बिल्डिंग को समय के साथ अपडेट नहीं होने के कारण इसमें कई तकनीकी खामियां है। जिनको दूर करना जरूरी है।<br />- यह बिल्डिंग 50 साल से भी ज्यादा पुरानी है। बिल्डिंग की छतों से प्लास्टर गिर रहा है। आरसीसी के सरिए दिख रहे हैं। यहां बने कई कमरे जर्जर अवस्था में है। कमरों की दीवारों की तरेड़े भी आ रखी है। बारिश के दिनों में छतों से पानी टपकता रहता है।<br />- बस स्टैंड में बनी पुलिस चौकी भी जर्जर अवस्था में है। बरसात के दिनों में यहां बैठकर काम करना काफी मुश्किल है। यहां चौकी इंचार्ज कृष्ण गोपाल मीणा को कई बार कमरे में पानी भरे होने के बावजूद सारा काम देखना पड़ता है। इस बारे में आलाधिकारियों को भी अवगत करवा रखा है।<br />- सबसे बड़ी बात बस स्टैंड पर बनी सड़कों लेवल काफी नीचे हैं। बरसात के दिनों में सड़कों से सारा पानी यहां आ जाता है तथा जलभराव या सरोवर बन जाता है। इस दौरान यात्रा करना काफी मुश्किल है।  जब बस स्टैंड का निर्माण हुआ तो गतंव्य की जाने वाली सड़कों का लेवल बराबर था। अब 2025 में मुख्य सड़कों का लेवल काफी उपर हो गया है। इस कारण यहां आने-जाने वाले यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।<br />- बस स्टैंड की सड़क का लेवल काफी नीचे है। इस कारण यहां से निकलने वाली बसों के लिए चढ़ते या उतरते समय आस-पास भीड़ होने से हादसे का भी डर बना रहता हैं। क्योंकि रोडवेज <br />की अधिकांश बसों की स्थिति काफी खराब है। <br />- एक ड्राइवर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अधिकांश बसें काफी पुरानी है यहां कार्यशाला जाने के बावजूद भी ब्रेक फेल या अन्य तकनीकी कारणों से हादसे की आशंका बनी रहती है।</p>
<p><strong>बातचीत के कुछ अंश</strong><br />रिपोर्टर : बुकिंग खिड़की कहां पर है।<br /><strong>कार्मिक :</strong> सामने बनी हुई है।<br />रिपोर्टर : : उस बुकिंग खिड़की में तो अनावश्यक सामान पड़ा है।<br /><strong>कार्मिक :</strong> आपको जाना कहां है<br />रिपोर्टर : बीकानेर जाना है... लेकिन यहां तो टिकट खिड़की भी बंद है और बसे भी नजर नहीं आ रही है।<br /><strong>कार्मिक :</strong> आप कार्यशाला से अभी बस नयापुरा बस स्टैंड के लिए निकलेगी उसमें चढ़ जाएं..टिकट भी वहीं से मिलेगा।<br />रिपोर्टर : क्या यहां से बसों का संचालन नहीं होता है।<br /><strong>कार्मिक :</strong> कोरोना के बाद सभी बसें वहीं से जा रही है। वैसे यहां कोटा आगार की बसें ही यहां आती है कार्यशाला में जाने के लिए<br />रिपोर्टर : धन्यवाद भाई।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />93 कुल बसें <br />09 अनुबंधित <br />32 हजार किमी रोजाना का सफर </p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू</strong><br /> नयापुरा बस स्टैंड पुराना जरूर है लेकिन प्राइम लोकेशन होने के कारण अधिकांश यात्री इसी बस स्टैंड से सफर करना पसंद करते है। दूसरी बात निजी बस स्टैंड भी पास ही है। इस कारण यात्रियों के पास आॅप्शन रहता है कि किसी भी बस से यात्रा कर सकते हैं। संजय नगर स्थित बस स्टैंड काफी दूर है। यहां से बस नयापुरा पहुंचने में भी 25 से 30 का समय लग जाता है। वहां पहुंचने से पहले ही यात्री निजी बसों की सेवा ले लेते हैं। जिस कारण रोडवेज का आर्थिक नुकसान का भी डर रहता है। ऐसे कई कारण है जिनसे यात्रियों के हितों के लिए बस कार्यशाला से निकल ही सीधे नयापुरा बस स्टैंड ही जाती है। हालांकि यहां आने वाली यात्री कार्यशाला से निकलने वाली बस में बैठकर नयापुरा बस स्टैंड पहुंच सकते हैं। टिकट बस में भी उपलब्ध है और रोडवेज बस स्टैंड से भी ले सकते है।<br /><strong>- अजय मीणा, चीफ मैनेजर, रोडवेज डिपो, कोटा</strong></p>
<p><strong>मानव जीवन भी पड़ सकता हैं खतरे में</strong><br />पुरानी बिल्डिंग के जर्जर होने से हादसे की आशंका भी बनी रहती है। नयापुरा स्थित पुराना बस स्टैंड का रख-रखाव भी सही नहीं है। यहां मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति ही की जाती है। यहां से बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं। यहां आने वाले यात्रियों को उनके परिजन भी छोड़ने आते हैं। इस दौरान कोई हादस घटित होता है तो मानव जीवन भी खतरें में पड़ सकता है।<br /><strong>- शैलेन्द्र सिंह यात्री दादाबाड़ी विस्तार योजना </strong></p>
<p>कोटा आगार की सभी बसें कार्यशाला आती है तथा बसों की जांच की जाती है। ड्राइवरों से भी बातचीत की जाती है। हालांकि बसे पुरानी जरूर है लेकिन इस कार्यशाला से सही कंडीशन होने के बाद ही बसें बाहर जाती है। मैकेनिक बसों का रख-रखाव अच्छा करते हैं। यहां पर आ रहे यात्री बस से जा सकते हैं। यहां यात्रीभार ना के बराबर है। यहां से बस निकलकर नयापुरा ही जाती है। वहां से अपने गंतत्वय की और रवाना होती है। नयापुरा बस स्टैंड शहर की प्राइम लोकेशन है। सभी यात्री वहीं पर आते है।<br /><strong>- शुचिता गुप्ता, एमओ, रोडवेज कार्यालय, कोटा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Aug 2025 15:51:40 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सिंधी कैंप बस स्टैंड पर बढ़ा यात्रीभार, रोडवेज की आय में बढ़ोतरी</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के सिंधी कैंप बस स्टैंड पर इन दिनों यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/increased-passenger-roadways-income-increased-at-sindhi-camp-bus-stand/article-121964"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/212142roer-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर के सिंधी कैंप बस स्टैंड पर इन दिनों यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। निजी कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसों की हड़ताल का सीधा फायदा राजस्थान रोडवेज को मिल रहा है। बीते तीन दिनों में रोडवेज का लोड फैक्टर 7 फीसदी बढ़कर 100 फीसदी तक पहुंच गया है।</p>
<p> 26 जुलाई को जहां रोडवेज की आय 483.24 लाख रुपए थी, वहीं 28 जुलाई को यह बढ़कर 520.48 लाख रुपए हो गई। सिर्फ सिंधी कैंप से ही रविवार को 36 लाख और सोमवार को 40 लाख रुपए का राजस्व दर्ज किया गया। दिल्ली रूट पर यात्रीभार सबसे ज्यादा देखने को मिला, वहीं रविवार को खाटूश्यामजी जाने वाले यात्रियों की संख्या भी अधिक रही। हरियाणा रोडवेज की दो दिन सेवाएं बंद रहने से भी राजस्थान रोडवेज को लाभ हुआ। वर्तमान में रोडवेज की बसों में सीटें फुल चल रही हैं और यात्रियों की भीड़ लगातार बढ़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Jul 2025 17:11:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बसों का ठहराव नहीं होने से आमजन परेशान, लिखित शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[ना चाहते हुए भी महिला यात्रियों सहित अन्य को यहा-वहा बैठने पर मजबूर होना पड़ता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/common-people-are-troubled-due-to-lack-of-bus-halt/article-119106"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/rtroer-(4)1.png" alt=""></a><br /><p>मोईकलां। मेगा हाइवे के पास मोईकलां में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय विधायक कोष से बनवाए गए यात्री प्रतीक्षालय का लाभ पूरी तरह से जनता को नहीं मिल पा रहा है। प्रतीक्षालय के सामने रोड़वेज बसों का ठहराव नहीं होने के कारण यात्री प्रतीक्षालय सूना पड़ा रहता है। जानकारी के अनुसार कस्बे वासियों की मांग पर मेगा हाइवे के पास लोगो की सुविधा के लिए यात्री प्रतीक्षालय बनवाया गया था। यहां यात्रियों के बैठने के लिए कोई भी सार्वजनिक स्थान नही होने के कारण विशेष तौर पर महिला यात्रियों को काफी परेशान होना पड़ता था। प्रतीक्षालय बनकर तैयार होने के बाद से यहां पर शायद ही कभी रोड़वेज बसों का ठहराव हुआ हो। ऐसा भी नहीं है कि यात्री प्रतीक्षालय पर यात्री बसों का इंतजार नहीं करते हों। लेकिन यात्रियों को बैठा देखकर भी रोड़वेज चालक बसों का ठहराव नहीं करते। ऐसे में ना चाहते हुए भी महिला यात्रियों सहित अन्य को यहा-वहा बैठने पर मजबूर होना पड़ता है। </p>
<p><strong>लिखित शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्यवाही</strong><br />पूर्व सरपंच इन्द्रा शर्मा व गिरिजा शर्मा ने बताया कि अगर रोडवेज चालक यात्री प्रतीक्षालय के सामने नियमित बसों का ठहराव करे तो सर्दी, गर्मी व बारिश के समय यह जनता के लिए काफी आरामदायक व सुविधाजनक साबित हो सकता है। कस्बे के लोगों ने बताया कि पूर्व में भी बारां आगार प्रबंधक को बसों के ठहराव को लेकर लिखित रूप से शिकायत की गई थी। जिसके बाद भी आमजन की इस समस्या को गंभीरता से नही लिया गया।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />आज ही समस्या की जानकारी मिली है। यात्री प्रतीक्षालय के सामने बसों के ठहराव को लेकर रूट के सभी चालकों को पाबंद किया जाएगा।<br /><strong>-योगेन्द्र सिंह, प्रबंधक, बारां आगार </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Jul 2025 16:46:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>यात्री प्रतीक्षालय बन रहा खतरे की घंटी, भंवरगढ़ बस स्टैंड स्थित प्रतीक्षालय हो रहा जर्जर</title>
                                    <description><![CDATA[राहगीरों को दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है और इसी के साथ इस प्रतीक्षालय में शराबियों का भी जमावड़ा लगा रहता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/passenger-waiting-room-is-becoming-a-danger-bell/article-104180"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(1)40.png" alt=""></a><br /><p>भंवरगढ़। भंवरगढ़ के बस स्टैंड पर स्थित यात्री प्रतीक्षालय प्रतीक्षालय नहीं रहकर खतरे की घंटी बना हुआ है। जो यात्री प्रतीक्षालय बना हुआ है, वह बहुत ही जर्जर अवस्था में है। जिससे कभी भी दुर्घटना होने के आशंका बनी रहती है लेकिन इस पर किसी का भी ध्यान नहीं जा रहा है। लगता है दुर्घटना होने के बाद ही इस पर संज्ञान लिया जाएगा या फिर दुर्घटना होने का इंतजार किया जा रहा है। कई बार इसके बारे में सरपंच और अन्य आला अधिकारियों से शिकायत की गई है फिर भी इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। </p>
<p><strong>राहगीर जर्जर प्रतीक्षालय में ले रहे शरण</strong><br />मोहन सिंह ने बताया कि मजबूरी में राहगीरों को इस जर्जर प्रतीक्षालय में ही शरण लेनी पड़ रही है। राहगीरों को दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है और इसी के साथ इस प्रतीक्षालय में शराबियों का भी जमावड़ा लगा रहता है। जिसके कारण महिलाओं, बच्चों व लोगों को कभी भी दुर्घटनाओं  और अन्य कोई बात होने की आशंका बनी रहती है। </p>
<p><strong>प्रतीक्षालय की छत लटकी हुई है नीचे</strong><br />वहीं प्रतीक्षालय की छत पूरी तरह से नीचे की ओर लटक गई है और कभी भी नीचे आ सकती है जो किसी भी व्यक्ति को जान की  हानि पहुंचा सकती है। बस स्टैंड पर स्थित लोगों का यह भी कहना है कि  आने वाले यात्रियों के लिए कोई आश्रय स्थल नहीं है। जिसके कारण उन्हें इसी जर्जर प्रतीक्षालय में शरण लेने को मजबूर होना पड़ता है। </p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />ग्राम सभा में यात्री प्रतीक्षालय को लिया जा चुका है। जिसकी बैठक भी आयोजित की गई थी लेकिन वार्ड पंचों को सूचित करने के बाद भी कोई भी वार्ड पंच उपस्थित नहीं हुआ। <br /><strong>- संकेश डे, ग्राम सेवक। </strong></p>
<p>जितनी जल्दी होगा, उतनी जल्दी प्रस्ताव पास कर लिया जाएगा और  प्रतीक्षालय का निर्माण जल्द से जल्द करवाया जाएगा और बैठक का आयोजन पुन: किया जाएगा। <br /><strong>- पिस्ता बाई, सरपंच। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Feb 2025 18:04:09 +0530</pubDate>
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                <title>बिना टिकट यात्रा की तो लगेगा 10 गुना जुर्माना </title>
                                    <description><![CDATA[रोडवेज निरीक्षक को प्रतिमाह 36000 रुपए अधिभार राशि वसूलने का दिया लक्ष्य। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-you-travel-without-a-ticket--you-will-be-fined-10-times/article-98435"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(3)25.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान रोडवेज को घाटे से उबारने के लिए अब प्रशासन ने कमर कस ली है। आय बढ़ाने और लिकेज को रोकने के लिए  नित नए जतन किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि रोडवेज लगातार घाटे में चल रही है जिससे नई बसे खरीदने और कर्मचारियों के वेतन भुगतान में भी परेशानी हो रही है। घाटे से रोडवेज को उभारने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे है। नए नवाचार कर रोडवेज फिर से पटरी पर लाने के लिए प्रशासन सख्त कदम उठा रहा है। अब रोडवेज मुख्यालय ने रोडवेज बस में बिना टिकट यात्री के पकड़े जाने पर बस चालक व परिचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के साथ-साथ यात्री पर भी किराए का दस गुना अथवा दो हजार रुपए जुर्माना लगाने का फैसला किया है। साथ ही यात्री द्वारा जुर्माना नहीं देने पर संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए है। सरकार व रोडवेज प्रबंधन के कड़ा रुख अपनाने का उद्देश्य यही है कि इससे रोडवेज के कर्मचारियों में व्याप्त भ्रष्टाचार खत्म हो और रोडवेज घाटे से भी उबर पाए।</p>
<p><strong>निरीक्षकों को दिया गया लक्ष्य</strong><br />अब तक राजस्थान में रोडवेज बसों के निरीक्षण के दौरान बिना टिकट यात्रियों से अधिभार राशि वसूल नहीं की जाती थी, लेकिन अब रोडवेज ने इस पर भी सख्ती करते हुए बिना टिकट यात्रियों से राशि वसूलने का कड़ा निर्णय लिया है। रोडवेज प्रशासन ने बसों में निरीक्षण का कार्य करने वाले अधिकारियों का भी लक्ष्य बढ़ा दिया है। अब उन्हें प्रतिमाह 36000 रुपए अधिक अधिभार राशि वसूलने का लक्ष्य दिया गया है।</p>
<p><strong>एक माह पांच से अधिक प्रकरण पर करेंगे निलंबित</strong><br />बस चालक और परिचालकों के खिलाफ एक माह में बिना टिकट यात्रा के पांच या इससे अधिक प्रकरण पाए गए, तो उन्हें निलंबित किया जाएगा। साथ ही उनके खिलाफ जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />यात्री रोडवेज बस स्टैंड से टिकट लेकर यात्रा करें, ताकि निरीक्षण के दौरान होने वाली कार्रवाई से बच सकें। अन्यथा बिना टिकट पाए जाने पर 10 गुना जुर्माना वसूल किया जाएगा।  जुर्माना देने से इनकार करने पर यात्री के खिलाफ संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। बस में कोई परिचालक टिकट नहीं देता है, तो बस में शिकायत नंबर पर तुरंत फोन कर रोडवेज अधिकारी को सूचना दें।<br /><strong>- अजयकुमार मीणा, मुख्य प्रबंधक आगार कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Dec 2024 18:34:21 +0530</pubDate>
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                <title>स्लीपर बसों में मुसाफिर की जान खतरे में</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति ने शुक्रवार को नयापुरा चौराहे पर खड़ी स्लीपर बसों की जांच की तो परिवहन विभाग की सतर्कता की पोल खुल गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/passenger-s-life-in-danger-in-sleeper-buses/article-64290"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/sleeper-buso-me-musafir-ki-jaan-khtre-me...kota-news-16-12-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्लीपर बसों में सफर करने वाले यात्रियों की जान भगवान भरोसे है। बसों में न तो आग बुझाने के उपकरण है और न ही  प्राथमिक उपचार के लिए फस्ट एड बॉक्स। जबकि, इनके बिना बसों को फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाता। इसके बावजूद इन बसों का सड़कों पर आना, परिवहन विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में आती है। विभागीय अधिकारियों की शह पर निजी बस आॅपरेटर यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं। हालात यह हैं, कोटा से बाहर जाने वाली व बाहर से शहर में आने वाली बसों की जांच तक नहीं की जाती।  हाल ही में गुरुवार को नयापुरा चौराहे पर हुए कंटेनर व स्लीपर बस हादसे के बाद भी विभाग नहीं चेता। यदि, बस में आग लग जाती या कोई यात्री जख्मी हो जाता तो प्राथमिक उपचार के लिए मेडिकल किट तक नहीं था। दैनिक नवज्योति ने शुक्रवार को नयापुरा चौराहे पर खड़ी स्लीपर बसों की जांच की तो परिवहन विभाग की सतर्कता की पोल खुल गई। यहां अधिकतर बसों में यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े उपकरण व जरूरी इंतजाम नहीं मिले। </p>
<p><strong>ड्राउजीनेस अलर्ट सिस्टम भी नहीं मिला </strong><br />स्लीपर बसों में ड्राउजीनेस अलर्ट सिस्टम भी नहीं मिला। बस मालिक इसकी उपयोगिता पर ध्यान नहीं देते और यात्रियों की सुरक्षा ड्राइवर के भरोसे रहती है। जबकि, ड्राउजीनेस अलर्ट सिस्टम नींद आने पर ड्राइवर को अलर्ट करता है। यह सिस्टम स्टीयरिंग के विभिन्न हिस्सों में लगे सेंसर और डैशबोर्ड पर कैमरे का उपयोग करता है। चालक के नींद या झपकी में आने का पता स्टीयरिंग पैटर्न, लेन में वाहन की स्थिति, चालक की आंखों, चेहरे और पैर की गति की निगरानी से लगाया जाता है। नींद आने की स्थिति में सिस्टम बीप की तेज आवाज सो रहे ड्राइवरों को सचेत करता है। </p>
<p><strong>परिवहन विभाग और ट्रैवल एजेंसी दोनों ही लापरवाह</strong><br />परिवहन विभाग व ट्रैवल एजेंसियों द्वारा यात्रियों की सुरक्षा के दावे किए जाते हैं, जो नवज्योति की जांच में खोखले साबित हुए। आरटीओ की निष्क्रियता से स्लीपर बसों में यात्रियों की जान भगवान भरोसे रहती है। निजी बस आॅपरेटरों द्वारा लंबी दूरी पर जाने वाली बसों को एक ही ड्राइवर के भरोसे भेजा जा रहा है। ऐसे में लगातार बस चलाने व नींद नहीं निकलने  से ड्राइवर को झपकी आ जाती है, जिसकी वजह से बस दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है। पूर्व में इस तरह के कई हादसे हो चुके हैं, कई लोग अकाल मौत का शिकार हो गए। इसके बावजूद परिवहन विभाग द्वारा ट्रैवल एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही। </p>
<p><strong>सर्वे में ड्राइवरों ने किया था स्वीकार</strong><br />जानकारी के अनुसार, सड़क परिवहन मंत्रालय ने वर्ष 2018 में 15 राज्यों में ड्राइवरों पर एक सर्वे किया था। इस सर्वे में शामिल करीब 25 ड्राइवरों ने स्वीकार किया था कि गाड़ी चलाते समय वे सो गए थे। ग्लोबल स्टडीज से यह भी पता चला है कि हाईवे और ग्रामीण सड़कों पर यात्रा करते समय ड्राइवरों के सो जाने की संभावना अधिक होती है। साथ ही आधी रात से सुबह 6 बजे के बीच इस तरह की घटनाएं होने की संभावना ज्यादा होती है।</p>
<p><strong>बसों में नहीं मिले आग बुझाने के यंत्र</strong><br />नवज्योति टीम शुक्रवार दोपहर 2.30 बजे नयापुरा चौराहे पर पहुंची। यहां यात्रियों से भरी बस मध्यप्रदेश जाने के लिए खड़ी थी। बस का इंटीयर चकाचक था लेकिन आग बुझाने के यंत्र नहीं थे। ड्राइवर से पूछा तो उसने बताया कि अंदर एक दराज में रखे हुए हैं, इस पर दिखाने को कहा तो मना कर दिया। जबकि, जिला परिवहन अधिकारी का कहना है कि फायर इंस्टीब्यूशन बस में ऐसी जगह लगा होता है, जहां लोगों को आसानी से नजर आ सके। ताकि, आगजनी जैसे हादसों पर तुरंत कट्रोल किया जा सके। </p>
<p><strong>मेडिकल किट भी नहीं मिले</strong><br />नयापुरा चौराहे पर खड़ी निजी ट्रैवल कम्पनियों की स्लीपर बसों का अवलोकन किया तो कहीं भी फस्टएड बॉक्स नहीं मिले। ड्राइवर-कंडेक्टर से पूछा तो  संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। जबकि, बस मालिक यात्रियों से किराया पूरा वसूलते हैं। कोटा से इंदौर जाने के लिए सिटिंग सीट का 400 तथा स्लीपर सीट के 500 रुपए चार्ज करते हैं। इसके बावजूद यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े जरूरी उपकरण व मेडिकल किट की सुविधा नहीं है। इसके बावजूद  परिवहन विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।</p>
<p>परिवहन विभाग द्वारा लगातार बसों की फिटनेस व सुरक्षा उपकरणों की जांच करती है। हर बस में आग बुझाने के यंत्र व प्राथमिक उपचार के लिए फस्टएड बॉक्स होना अनिवार्य है। इसके बिना वाहन मालिक को फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं दिया जाता। फायर इंस्टीब्यूशन व फस्टएड बॉक्स नहीं होने पर 5 हजार व लंबी दूरी की बसों में एक ड्राइवर होने पर 10 हजार का जुर्माना किया जाता है। यदि, किसी बसों में यह जरूरी उपकरण नहीं तो जांच का दायरा बढ़ाकर उचित कार्रवाई करेंगे।  <br /><strong>- प्रमोद लोधा, जिला परिवहन अधिकारी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Dec 2023 15:11:48 +0530</pubDate>
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                <title>यात्री ने को-पैसेंजर पर फ्लाइट में किया पेशाब</title>
                                    <description><![CDATA[मामला रविवार रात का है। दो महीने के अंदर अमेरिकन एयरलाइंस की इस फ्लाइट में पेशाब करने की यह दूसरी घटना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/passenger-pees-on-co-passenger-in-flight/article-43744"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/air.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट में नशे में धुत एक भारतीय ने दूसरे यात्री के ऊपर पेशाब कर दिया। यह विमान न्यूयॉर्क से दिल्ली आ रहा था। मामला रविवार रात का है। दो महीने के अंदर अमेरिकन एयरलाइंस की इस फ्लाइट में पेशाब करने की यह दूसरी घटना है। इससे पहले 3 मार्च को भी इसी विमान में नशे में धुत एक भारतीय छात्र ने अमेरिकी यात्री के ऊपर पेशाब कर दिया था। नशे में धुत यात्री और उसके को-पैसेंजर के बीच किसी बात को लेकर बहस हुई थी। इसके बाद आरोपी ने उसके ऊपर पेशाब कर दिया। एयरलाइंस ने लैंडिंग से पहले मामले की सूचना दिल्ली एयरपोर्ट को दी। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान के उतरने पर आरोपी को हिरासत में ले लिया। दोनों को बाद में दिल्ली पुलिस को सौंप दिया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Apr 2023 10:20:20 +0530</pubDate>
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                <title>उड़ते विमान में मेडिकल इमरजेंसी</title>
                                    <description><![CDATA[विमान जयपुर से हैदराबाद के लिए रवाना हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--medical-emergency-in-flying-plane--the-health-of-the-deteriorating-passenger-in-the-plane-was-made-safe-landing/article-8200"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/jaipur-airport.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। किशनगढ़ से हैदराबाद जा रहे विमान की जयपुर एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। स्पाइसजेट की फ्लाइट किशनगढ़ से हैदराबाद के लिए उड़ान भरी थी। इस दौरान उसमें सवार यात्री की तबियत बिगड़ गई। इस पर फ्लाइट के पायलट ने एटीसी से विमान को जयपुर एयरपोर्ट पर लैंडिंग करने की अनुमति मांगी। अनुमति मिलने के बाद इमरजेंसी में जयपुर एयरपोर्ट पर विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराया गया। इसके बाद यात्री को उतारकर एंबुलेंस की सहायता से निजी अस्पताल भेजा गया। अब विमान जयपुर से हैदराबाद के लिए रवाना हुआ।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Apr 2022 12:24:19 +0530</pubDate>
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