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                <title>Central Forces - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कांग्रेस ने की त्रिपुरा के चुनावी एडीसी क्षेत्रों में सीएपीएफ की तैनाती की मांग: प्रदेश में राजनीतिक हिंसा में वृद्धि, कानून-व्यवस्था बिगड़ने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[त्रिपुरा कांग्रेस अध्यक्ष आशीष कुमार साहा ने एडीसी चुनाव से पहले बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कमालपुर हिंसा का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक हमलों से मतदाताओं में डर है। साहा ने निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनावी क्षेत्रों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल तैनात करने की पुरजोर मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-demanded-deployment-of-capfs-in-electoral-adc-areas-of/article-148949"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/tripur-congress.png" alt=""></a><br /><p>अगरतला। त्रिपुरा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष आशीष कुमार साहा ने राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया है कि स्वायत्त जिला परिषद (एडीसी) चुनाव नजदीक आने के साथ ही हालात धीरे-धीरे अस्थिर होते जा रहे हैं। साहा ने राज्य चुनाव आयोग से चुनावी क्षेत्रों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल तैनात करने और मतदाताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने वर्तमान स्थिति का हवाला देते हुए रेखांकित किया कि लगभग हर दिन हिंसा की खबरें आ रही हैं लेकिन पुलिस उन अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रही है जो खुलेआम हथियारों का प्रदर्शन कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कमालपुर की एक हालिया घटना पर प्रकाश डाला, जहां कथित तौर पर टिपरा मोथा के कार्यकर्ताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक मनोज कांति देब और एडीसी उम्मीदवार अनंत देववर्मा पर हमला किया और हमले में पुलिस अधिकारी भी घायल हो गये। उन्होंने दावा किया कि ऐसी घटनाओं ने मतदाताओं के मन में डर पैदा कर दिया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, प्रदेश में राजनीतिक हिंसा में वृद्धि हो रही है और सत्तारूढ़ दल चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर करने की कोशिश कर रहा है।</p>
<p>आशीष कुमार साहा ने कहा, "पूरे राज्य में माहौल तनावपूर्ण है और विपक्षी दलों को दबाव का सामना करना पड़ रहा है।" उन्होंने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुये कहा कि पुलिस स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर रही है। उन्होंने संकेत दिया कि कमालपुर की घटना कानून प्रवर्तन की प्रभावशीलता में गिरावट का प्रतीक है, जो जनता के विश्वास को कमजोर कर सकती है। उन्होंने तनाव और बढ़ने की चेतावनी देते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की गारंटी के लिये केंद्रीय बलों की पर्याप्त तैनाती की आवश्यकता पर बल दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 15:58:12 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: न्यायिक अधिकारियों पर हमले को लेकर हाईकोर्ट ने लगाई अधिकारियों को फ़टकार, एसआईआर से जुड़ा है मामला</title>
                                    <description><![CDATA[मालदा में मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया। मुख्य न्यायाधीश ने इसे कोर्ट के अधिकार को चुनौती और मनोबल गिराने वाला 'दुस्साहसिक प्रयास' बताया। अदालत ने निर्वाचन आयोग को भविष्य में अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/west-bengal-assembly-election-high-court-reprimands-officials-for-attack/article-148835"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/court-hammer04.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान ड्यूटी पर तैनात न्यायिक अधिकारियों पर हुए हमले और घेराव की घटना पर कड़ा संज्ञान लेते हुए गुरुवार को इसे ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के मनोबल को प्रभावित करने का एक 'दुस्साहसिक प्रयास' और न्यायालय के अधिकार को चुनौती करार दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पांचोली की पीठ ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के एक गाँव में न्यायिक अधिकारियों के घेराव और उन पर हुए हमले के बाद इस मामले पर तत्काल सुनवाई की, हालांकि यह मामला आज की कार्यसूची में सूचीबद्ध नहीं था।</p>
<p>न्यायालय ने राज्य में कल हुई घटनाओं के संबंध में कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से मिले खत के आधार पर इस मामले को बेहद जरूरी बताते हुए संज्ञान में लिया। पत्र के अनुसार, तीन महिला अधिकारियों सहित 7 न्यायिक अधिकारी मालदा जिले के एक गाँव में एसआईआर न्यायिक-निर्णय संबंधी कार्यों को पूरा कर रहे थे, तभी ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया। इन अधिकारियों को दोपहर 3:30 बजे से आधी रात तक बंधक बनाकर रखा गया और कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा राज्य प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपील किए जाने के बाद ही उन्हें मुक्त कराया जा सका।</p>
<p>पीठ ने इस घटना पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारियों की तैनाती का सभी पक्षों द्वारा स्वागत किया जाना चाहिए, क्योंकि वे तटस्थ एजेंट के रूप में कार्य करते हैं, लेकिन अब उन्हें भी हमलों से नहीं बख्शा जा रहा है। न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वह न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की मांग करे। मुख्य न्यायाधीश ने पूर्व में यह भी टिप्पणी की थी कि पश्चिम बंगाल को छोड़कर अन्य सभी राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया पूरी तरह सुचारू रूप से संपन्न हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 17:46:37 +0530</pubDate>
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