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                <title>demise - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>हार्ट अटैक से पूर्व निशानेबाज जसपाल राणा का निधन : 49 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस, पीएम मोदी ने जताया दुख</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज और हाई-परफॉर्मेंस कोच जसपाल राणा का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। मनु भाकर जैसी चैंपियन को तराशने वाले 49 वर्षीय राणा म्यूनिख विश्वकप से लौटते समय बीमार हुए थे। पीएम मोदी ने इसे खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/former-shooter-jaspal-rana-passed-away-due-to-heart-attack/article-156754"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/rana.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पूर्व दिग्गज निशानेबाज एवं भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के हाई-परफॉर्मेस कोच जसपाल राणा का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनके निधन को खेल जगत के लिए बड़ी क्षति बताते हुए गहरा दुख व्यक्त किया है। भारतीय राष्ट्रीय रायफल संघ (एनआरएआई) ने जसपाल राणा के निधन की पुष्टि की है। वह 49 वर्ष के थे। उन्हें वर्ष 2020 में खेल जगत के सर्वोच्च कोचिंग सम्मान 'द्रोणाचार्य पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था।</p>
<p>जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्वकप से भारतीय दल की वापसी के दौरान फ्लाइट में जसपाल राणा की तबीयत बिगड़ गयी थी, वह असहज महसूस कर रहे थे। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान आज सुबह उनका निधन हो गया। जसपाल राणा भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में कार्यरत थे। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण और दो रजत सहित कुल चार पदक जीते।</p>
<p>सफल और गौरवशाली निशानेबाजी करियर के बाद जसपाल राणा ने जूनियर राष्ट्रीय टीम कोच और हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनर के रूप में भारतीय निशानेबाजी टीम को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाया। कोच के रूप में उनके योगदान में मनु भाकर को प्रशिक्षण देना शामिल है। उनकी देखरेख में मनु भाकर ने 2024 पेरिस ओलंपिक में दो पदक जीते थे। पीएम मोदी ने जसपाल राणा के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “जसपाल राणा जी के निधन से गहरा दुख हुआ है। उनका जाना भारतीय खेल जगत के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है। उन्होंने शूटिंग में अपनी असाधारण उपलब्धियों से देश का मान बढ़ाया। एक मेंटर के तौर पर भी उनका योगदान बहुत अहम रहा, उन्होंने पूरी लगन से युवा खिलाड़ियों को तराशा और उनका मार्गदर्शन किया। बेहतरीन प्रदर्शन, अनुशासन और खेल जगत की सेवा के प्रति उनकी अटूट निष्ठा के कारण उन्हें बहुत सम्मान मिला। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, दोस्तों और पूरे खेल जगत के साथ हैं। ओम शांति।”?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 12:14:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>मलयालम सिनेमा को बड़ा झटका: राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता सलीम कुमार का 56 वर्ष की उम्र में निधन, मुख्यमंत्री सतीसन ने जताया शोक </title>
                                    <description><![CDATA[दिग्गज मलयालम अभिनेता और हास्य कलाकार सलीम कुमार का 56 वर्ष की आयु में कोच्चि में निधन हो गया। करीब 300 फिल्मों में काम करने वाले सलीम कुमार को फिल्म 'अदामिन्ते मकान अबू' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। मुख्यमंत्री वी. डी. सतीसन सहित सिनेमा जगत ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/malayalam-actor-salim-kumar-died-due-to-fever-and-difficulty/article-156249"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/salim-kumar.png" alt=""></a><br /><p>कोच्चि। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता मलयालम अभिनेता सलीम कुमार का शनिवार देर रात यहां एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 56 वर्ष थे। अमृता हॉस्पिटल के मेडिकल बुलेटिन के अनुसार सलीम कुमार को कल बुखार और सांस लेने में तकलीफ एवं अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका गहन इलाज के बावजूद दिल का दौरा पड़ने से देर रात 10.43 बजे निधन हो गया। उनके परिवार में उनकी पत्नी सुनीता और दो बेटे, चंदू और आरोमल हैं। उनके पार्थिव शरीर को रविवार सुबह से अंतिम संस्कार से पहले लोगों के श्रद्धांजलि देने के लिए पारवूर टाउन हॉल में रखा जाएगा।</p>
<p>10 अक्टूबर 1969 को एर्नाकुलम जिले के चिट्टट्टुकरा में गंगाधरन और कौशल्या के घर जन्मे सलीम कुमार ने मिमिक्री और स्टेज परफॉर्मेंस की दुनिया से मलयालम सिनेमा के सबसे सम्मानित अभिनेताओं में से एक बनने तक का सफर तय किया। सलीम कुमार ने 'इष्टमानु नूरु वट्टम' से फिल्मों में पर्दापण किया, लेकिन साल 2000 की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'थेनकासीपट्टनम' ने उनके करियर को बदल दिया। उनके अनोखे कॉमिक अंदाज़ और बेहतरीन टाइमिंग ने उन्हें मलयालम सिनेमा के सबसे पसंदीदा कॉमेडियन्स में से एक बना दिया। लगभग तीन दशकों के अपने करियर में, उन्होंने करीब 300 फ़िल्मों में काम किया और ‘कल्याणरमन’, ‘सीआईडी मूसा’, ‘मीशा माधवन’, ‘मायावी’, ‘तिलक्कम’, ‘पुलिवल कल्याणम’, ‘चथिकथा चंथु’ और ‘चेस’ जैसी फ़िल्मों में यादगार अभिनय किया। उन्होंने तमिल और ओडिया फ़िल्मों में भी काम किया।</p>
<p>शुरुआत में कॉमेडी से दर्शकों का दिल जीतने वाले सलीम कुमार ने बाद में खुद को एक ऐसे दमदार अभिनेता के तौर पर स्थापित किया जो जटिल और भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण भूमिकाएँ निभाने में सक्षम थे। ‘पेरुमझाक्कलम’, ‘अचनुरंगथा वीडु’, ‘ग्रामोफोन’ और ‘अदामिन्ते मकान अबू’ में उनके बेहतरीन अभिनय ने उन्हें मलयालम सिनेमा के सबसे अच्छे कलाकारों में से एक के तौर पर बड़ी पहचान दिलाई। ‘अदामिन्ते मकान अबू’ में अबू के किरदार के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार मिला; यह एक बड़ी उपलब्धि थी जिसने भारत के सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में उनकी जगह पक्की कर दी।</p>
<p>केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीसन ने रविवार को दिग्गज मलयालम अभिनेता सलीम कुमार के निधन पर शोक व्यक्त किया है। श्री सतीसन ने एक भावपूर्ण संदेश में कहा कि सलीम कुमार लोगों को हंसाने वाले व्यक्ति से कहीं बढ़कर थे। उन्होंने कहा, "उनका मेरे साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव था और वे हमारी धरती के लिए गर्व का स्रोत थे।" उन्होंने अभिनेता की मजबूत राजनीतिक सोच को याद करते हुए कहा कि सलीम कुमार ने अपनी बात खुलकर कहने में कभी संकोच नहीं किया और व्यक्तिगत नुकसान की परवाह किए बिना अपने रुख पर अडिग रहे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अभिनेता ने साहसपूर्वक खुद को कांग्रेस समर्थक के तौर पर पेश किया और सार्वजनिक रूप से अपनी राजनीतिक राय व्यक्त करने से कभी नहीं डरे। सतीसन ने अपने चुनाव अभियानों में सलीम कुमार की सक्रिय भागीदारी को भी याद किया। उन्होंने बताया कि अभिनेता चुनाव समिति के कार्यालयों का उद्घाटन करने पर जोर देते थे और पार्टी की जीत पर परिवार के सदस्य की तरह खुश होते थे। सतीसन ने कहा, "वे अपने एक हाव-भाव से लोगों को हंसा सकते थे और दूसरे से उनकी आंखों में आंसू ला सकते थे।" उन्होंने कहा कि मलयालम सिनेमा ने एक असाधारण प्रतिभा को खो दिया है, जबकि उन्होंने एक प्रिय साथी को खो दिया है। उन्होंने दिवंगत अभिनेता के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और उन्हें श्रद्धांजलि दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 12:01:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>संगीत के सुनहरे अध्याय का अंत: लता मंगेशकर को टक्कर देने वाली पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का निधन, 89 साल की उम्र में ली अंतिम सांस</title>
                                    <description><![CDATA[पद्म भूषण से सम्मानित मशहूर पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का रविवार को निधन हो गया। उन्होंने छह दशकों तक हिंदी, मराठी और बांग्ला सहित कई भाषाओं में मधुर गीत गाए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शरद पवार ने उनके निधन को संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए श्रद्धांजलि दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/trending-today/end-of-the-golden-chapter-of-music-playback-singer-suman/article-155579"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/suman.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। भारतीय संगीत जगत की दिग्गज पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का रविवार को निधन हो गया। उनकी उम्र 89 वर्ष थी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि सुमन कल्याणपुर के निधन से भारतीय संगीत जगत की एक मधुर, सुरमयी और भावपूर्ण आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई। उन्होंने कहा कि छह दशकों से अधिक समय तक सुमनजी ने अपनी अनुपम गायकी से संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया। मराठी, हिन्दी, बांग्ला, ओड़िया समेत अनेक भाषाओं में गाए गए उनके अमर गीत संगीत जगत की अमूल्य धरोहर हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पद्म भूषण से सम्मानित सुमनजी ने अपनी जादुई आवाज से भारतीय संगीत को समृद्ध किया। उनके गीतों की मिठास और भावपूर्ण अभिव्यक्ति सदैव स्मृतियों में जीवित रहेगी। सीएम फडणवीस ने कहा कि उनका निधन संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने सुमनजी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने भी सुमन कल्याणपुर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अपनी मधुर, सुरमयी और भावपूर्ण आवाज से सुमनजी ने भारतीय संगीत जगत को समृद्ध किया। हिन्दी, मराठी और अनेक क्षेत्रीय भाषाओं में गाए गए उनके अमर गीत पीढ़ियों की भावनाओं पर राज करते रहेंगे।</p>
<p>शरद पवार ने कहा कि उनके निधन के साथ भारतीय शास्त्रीय और सुगम संगीत के स्वर्णिम युग का एक अध्याय समाप्त हो गया। उन्होंने सुमन कल्याणपुर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>Trending Today</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:34:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>साहित्य जगत में शोक की लहर: मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का निधन ; डिमेंशिया से थे पीड़ित, जानें कैसा रहा उनका जीवन?</title>
                                    <description><![CDATA[मोहब्बत और तन्हाई को खूबसूरत अल्फाज देने वाले प्रख्यात शायर डॉ. बशीर बद्र का बक़रीद के दिन 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से डिमेंशिया से पीड़ित थे। उनके जाने से साहित्य जगत में शोक की लहर है, लेकिन उनकी गजलें उर्दू अदब का गौरव बनी रहेंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/wave-of-mourning-in-the-literary-world-famous-poet-dr/article-155275"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/bashir.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। मोहब्बत, तन्हाई और जिंदगी को अपने अल्फाजों में नई पहचान देने वाले मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का बकरीद के दिन 91 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने अपने घर पर ही आखिरी सांस ली। उनके निधन की खबर से साहित्य जगत में शो की लहर छा गई पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, वे काफी लंबे समय से डिमेंशिया से पीड़ित थे। लंबी बीमारी के कारण हालत ये हो गई थी कि वे अपने करीबियों और परिचितों को पहचान भी नहीं पा रहे थे। बशीर बद्र ने उर्दू साहित्य को नई ऊंचाई दी और यही कारण है कि उनकी गजलें सिर्फ मुशायरों तक सीमित नहीं रहीं। </p>
<p><img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2021/01/07/bashirbadr26613968835x547-m_1609959067.jpg" alt="When Dr. Bashir Badr, a Padmashree poet of Bhopal wrote his PhD thesis, 87  lions of his own were included in it."></img></p>
<p>डॉ. बशीर बद्र (असल नाम सय्यद मुहम्मद बशीर) 15 फरवरी 1935 को कानपुर में पैदा हुए। उत्तर प्रदेश में उनका पैतृक स्थान फ़ैज़ाबाद ज़िले का मौज़ा बक़िया है। उनका वास्तविक नाम सैय्यद मोहम्मद बशीर था। उनके पिता सैय्यद मोहम्मद नजीर पुलिस विभाग में कार्यरत थे। प्रारंभिक शिक्षा कानपुर और इटावा में हुई। हाई स्कूल के बाद पिता के निधन के कारण उनकी पढ़ाई बाधित हो गई और उन्हें कम उम्र में ही 85 रुपए मासिक पर पुलिस विभाग में नौकरी करनी पड़ी। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने शिक्षा और साहित्य से अपना संबंध नहीं टूटने दिया।</p>
<p><img src="https://static.abplive.com/wp-content/uploads/sites/2/2021/01/06043521/basirbadra.jpg" alt="Urdu poet Bashir Badr received his PHD degree at the age of 85 | अज़ीम शायर बशीर  बद्र को 47 साल बाद मिली PHD की डिग्री"></img></p>
<p>बचपन से ही उन्हें शायरी का शौक था। सातवीं कक्षा में उनकी पहली गजल प्रतिष्ठित पत्रिका ‘निगार’ में प्रकाशित हुई थी। युवावस्था तक पहुंचते-पहुंचते उनकी गजलें भारत और पाकिस्तान की साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगीं। बाद में उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू की और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से स्नातक, स्नातकोत्तर तथा पीएचडी की उपाधियां प्राप्त कीं। उनका शोध विषय ‘आजादी के बाद उर्दू गजल का आलोचनात्मक अध्ययन’ था।</p>
<p><img src="https://staticimg.amarujala.com/assets/images/2017/06/11/bashir-badr_1497170073.jpeg?w=750&amp;dpr=1.0" alt="Padmshri Dr Bashir Badr; A Most Popular Shayer - Amar Ujala Kavya -  पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र:सिर्फ़ शायर ही नहीं एक नज़रिया भी हैं..."></img></p>
<p>वर्ष 1967 में उन्होंने पुलिस सेवा छोड़ दी और साहित्य तथा शिक्षण को अपना जीवन समर्पित कर दिया। वर्ष 1974 में पीएचडी पूरी करने के बाद वे मेरठ विश्वविद्यालय से संबद्ध मेरठ कॉलेज में उर्दू विभाग में व्याख्याता नियुक्त हुए। वर्ष 1974 से 1990 के बीच उनकी शायरी ने नई ऊंचाइयां हासिल कीं और वे देश-विदेश के मुशायरों में लोकप्रिय शायर बन गए। डॉ. बशीर बद्र ने उर्दू गजल को पारंपरिक फारसी और अरबी प्रभाव से निकालकर बोलचाल की भाषा से जोड़ा। उन्होंने गजल में ऐसे शब्दों और अनुभवों को शामिल किया, जिन्हें पहले उर्दू शायरी का हिस्सा नहीं माना जाता था। उनकी शायरी में गांव की मिट्टी की खुशबू भी है और शहर की जिंदगी की तल्ख सच्चाइयां भी।</p>
<p><img src="https://resize.indiatv.in/resize/newbucket/1200_-/2026/05/bashir-badr-1779961586.webp" alt="मशहूर शायर बशीर बद्र का निधन, 91 की उम्र में कहा दुनिया को अलविदा, आखिरी  दिनों में भूल गए थे खुद के शेर - India TV Hindi"></img></p>
<p>उनकी गजलें मोहब्बत, दर्द, अकेलेपन, रिश्तों और बदलते समाज की संवेदनाओं को बेहद सहज ढंग से प्रस्तुत करती हैं। उनके कई शेर आज भी लोगों की जुबां पर हैं। ‘उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए’ और ‘लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में’ जैसे शेर उन्हें आम जनमानस से जोड़ते हैं।</p>
<p><img src="https://images.bhaskarassets.com/thumb/1200x900/web2images/521/2020/11/24/orig_35_1606165508.jpg" alt="Bashir Badr no longer recognizes even his wife, Iarshad-Irshad is said when  someone misses a Mushaira."></img></p>
<p>वर्ष 1987 के मेरठ दंगों में उनका घर जल गया था। इसके बाद वे भोपाल आकर बस गए। उन्होंने बाद में डॉ. राहत सुल्तान से विवाह किया। बढ़ती उम्र के साथ उनकी स्मरण शक्ति कमजोर होती गई और वे लंबे समय से डिमेंशिया बीमारी से पीड़ित थे। डॉ. बशीर बद्र को साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए। भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया। उनके प्रमुख गजल संग्रहों में ‘इकाई’, ‘इमेज’, ‘आमद’, ‘आस’, ‘आसमान’ और ‘आहट’ शामिल हैं। उर्दू गजल में नए प्रयोगों, सरल भाषा और मानवीय संवेदनाओं के कारण डॉ. बशीर बद्र को आधुनिक उर्दू शायरी का महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है। उनकी शायरी आने वाली पीढ़ियों को भी लंबे समय तक प्रेरित करती रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/wave-of-mourning-in-the-literary-world-famous-poet-dr/article-155275</link>
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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 14:59:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस कार्यकर्ता मोहब्बत सिंह के घर पहुंचे CM गहलोत, मोहब्बत सिंह की दी श्रद्धांजलि</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/617a6e1934e46/article-1969"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/cm-pali.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर/पाली। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को कांग्रेस कार्यकर्ता मोहब्बत सिंह के असामयिक निधन पर निंबोल गांव, जैतारण (पाली) स्थित उनके निवास पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की और शोकाकुल परिजनों से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया। ईश्वर से प्रार्थना है उन्हें संबल दें एवं दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें। दरअसल, मुख्यमंत्री की धरियाबाद में धरियावद में चुनावी सभा के दौरान हार्टअटैक से कांग्रेस कार्यकर्ता मोहब्बत सिंह का असामयिक निधन हो गया था। वे धरियावद में कांग्रेस के चुनाव प्रचार का मोर्चा संभाले हुए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>पाली</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Oct 2021 16:06:23 +0530</pubDate>
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