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                <title>राजधानी दिल्ली में आयोजित हुआ ग्राम-2026 रोड शो: सीएम भजनलाल ने किया निवेशकों को आमंत्रित, कृषि जगत की बड़ी हस्तियां रहीं मौजूद </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में 23-25 मई को होने वाले ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (GRAM) का निमंत्रण दिया। कृषि क्षेत्र में ₹44,000 करोड़ के एमओयू के साथ सरकार निवेश के प्रति गंभीर है। इस अंतर्राष्ट्रीय मंच पर विदेशी प्रतिनिधियों और निवेशकों के साथ आधुनिक खेती व नवाचार पर मंथन होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/gram-2026-road-show-was-organized-in-the-capital-delhi-cm/article-151523"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/bhajanlal-sharmma.pngg.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आगामी 23 से 25 मई के बीच जयपुर में ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (ग्राम)-2026 का आयोजन किया जाएगा। जिसमें किसानों, कृषि विशेषज्ञों, नीति निमातार्ओं और निवेशकों को एक मंच पर लाकर कृषि प्रौद्योगिकी के जरिए किसानों की मजबूती पर बल दिया जाएगा। यह बातें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को यहां आयोजित ग्राम-2026 इन्वेस्टर मीट को संबोधित करते हुई कहीं। इस दौरान उन्होंने सभी निवेशकों एवं उद्यमियों को ग्राम-2026 में भाग लेने के लिए आमंत्रण भी दिया।</p>
<p><strong>निवेश बढ़ाने को सरकार प्रतिबद्ध</strong></p>
<p>सीएम शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार उद्यमियों को निवेश अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।  राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन कर कृषि क्षेत्र में करीब 44 हजार करोड़ रुपए के एमओयू साइन किए गए। जिनमें से नौ हजार करोड़ से अधिक का निवेश धरातल पर उतर भी चुका है।</p>
<p><strong>सीएम ने विदेशी प्रतिनिधियों से की चर्चा</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ग्राम-2026 इन्वेस्टर मीट के तहत विभिन्न देशों के ट्रेड प्रतिनिधियों, विभिन्न उद्यमियों, स्टार्ट-अप्स ने वन-टू-वन चर्चा की। इस दौरान सीएम शर्मा ने कनाडा, रूस, ऑस्ट्रेलिया, इटली, ब्राजील, वियतनाम और अर्जेन्टीना के दूतावासों के वाणिज्यिक एवं कृषि प्रतिनिधियों से राजस्थान में कृषि निवेश बढ़ाने पर बातचीत की।</p>
<p><strong>कृषि जगत की बड़ी हस्तियां रहीं मौजूद</strong></p>
<p>कार्यक्रम के दौरान ग्राम- 2026 पर लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। इस अवसर पर राज्य के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत, सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार, राजस्थान किसान आयोग अध्यक्ष सी.आर. चैधरी, महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एम.एल. जाट, महासचिव फिक्की अनन्त स्वरूप सहित कृषि क्षेत्र से जुड़े उद्यमीगण, निवेशकगण, विशेषज्ञ एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>राजस्थान साहस और नवाचार की भूमि: चौधरी</strong></p>
<p>केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चैधरी ने कहा कि राजस्थान साहस और नवाचार की भूमि है। वैज्ञानिक प्रदेश की भौगोलिक आवश्यकतानुसार कृषि के लिए आवश्यक एवं सुलभ तकनीक विकसित करें।</p>
<p><strong>ग्राम- 2026 अंतर्राष्ट्रीय मंच साबित होगा: किरोड़ीलाल मीणा</strong></p>
<p>कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट के तहत अहमदाबाद, हैदराबाद एवं पुणे सहित देश के कई स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि देश के कृषकों को नई तकनीक की जानकारी देने के लिए आयोजित ग्राम- 2026 एकीकृत अंतर्राष्ट्रीय मंच साबित होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 10:49:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत और मिस्र ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के लिए जताई सहमति : उन्मुख भविष्य के लिए रूपरेखा तैयार, भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने हेलियोपोलिस युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की</title>
                                    <description><![CDATA[काहिरा में आयोजित 11वीं संयुक्त रक्षा समिति की बैठक में भारत और मिस्र ने 2026-27 के लिए रक्षा सहयोग योजना पर मुहर लगाई। दोनों देश अब रक्षा विनिर्माण में सह-उत्पादन और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेंगे। भारत ने अपनी $20 अरब की रक्षा निर्माण क्षमता का प्रदर्शन करते हुए रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-and-egypt-agree-on-plan-for-bilateral-defense-cooperation/article-151451"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/भारत-और-मिस्र.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और मिस्र ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को प्रगाढ बनाने के लिए द्विपक्षीय रक्षा सहयोग योजना पर सहमति व्यक्त की है। भारत–मिस्र संयुक्त रक्षा समिति ने बुधवार को काहिरा में संपन्न् तीन दिन की अपनी 11वीं बैठक के दौरान द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए सार्थक चर्चा की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संयुक्त सचिव (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) अमिताभ प्रसाद ने किया और इसमें रक्षा मंत्रालय तथा सशस्त्र बलों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल थे। मिस्र के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा बलों और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने किया।</p>
<p>रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि दोनों पक्षों ने पिछली संयुक्त रक्षा समिति बैठक के बाद हुई प्रगति की व्यापक समीक्षा की और रक्षा सहभागिता के लिए एक भविष्य उन्मुख रूपरेखा तैयार की। उन्होंने 2026-27 के लिए द्विपक्षीय रक्षा सहयोग योजना पर सहमति व्यक्त की, जिसमें संरचित सैन्य संपर्क तंत्र का विस्तार, संयुक्त प्रशिक्षण आदान-प्रदान को मजबूत करना, समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ाना, सैन्य अभ्यासों के दायरे और जटिलता को बढ़ाना तथा रक्षा उत्पादन और प्रौद्योगिकी में सहयोग को प्रोत्साहित करना शामिल है।</p>
<p>भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय रक्षा उद्योग की तेजी से बढ़ती विनिर्माण क्षमताओं पर प्रस्तुति दी। इसमें बताया गया कि भारत का रक्षा उत्पादन 20 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है और भारत 100 से अधिक देशों को लगभग 4 अरब डॉलर के उत्पाद निर्यात कर रहा है। दोनों पक्षों ने रक्षा उद्योग सहयोग योजना विकसित करने के लिए साथ मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की। रक्षा उद्योग सहयोग भारत–मिस्र रक्षा संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभर रहा है, जिसमें दोनों पक्ष रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में सह-विकास और सह-उत्पादन के अवसरों की तलाश कर रहे हैं।</p>
<p>बैठक के दौरान पहली बार नौसेना-से-नौसेना स्टाफ वार्ता भी आयोजित की गई। भारतीय नौसेना द्वारा हिंद महासागर क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता को बढ़ावा देने में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका की जानकारी दी गई और समुद्री सुरक्षा को प्रोत्साहित करने में भारत के सूचना संलयन केंद्र की प्रमुख भूमिका को रेखांकित किया गया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने मिस्र वायु सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अम्र अब्देल रहमान सक्र से भी मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच घनिष्ठ सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।</p>
<p>भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने हेलियोपोलिस युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और प्रथम तथा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय वीरों को श्रद्धांजलि दी। भारत–मिस्र रक्षा साझेदारी में सितंबर 2022 में रक्षा मंत्री की मिस्र यात्रा के दौरान रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था। वर्ष 2023 में द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया। 11वीं बैठक ने दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों की पुष्टि की और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा स्थिरता के प्रति उनकी पारस्परिक प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 15:02:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजनाथ सिंह ने जर्मनी को रक्षा उत्पादन क्षेत्र में सहयोग के विस्तार के लिए किया आमंत्रित : तकनीकी परिवर्तन ने स्थिति को बनाया जटिल, आज दुनिया नए सुरक्षा खतरों का कर रही सामना</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बर्लिन में जर्मनी के साथ रक्षा तकनीक के सह-निर्माण और नवाचार पर जोर दिया। उन्होंने "आत्मनिर्भर भारत" को वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के समाधान के रूप में पेश किया। पश्चिमी एशिया के तनाव और ऊर्जा सुरक्षा के बीच, दोनों देशों ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने का संकल्प लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rajnath-singh-invites-germany-to-expand-cooperation-in-defense-production/article-151268"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rajnath-singh-3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत और जर्मनी के बीच रक्षा प्रौद्योगिकी और साजो-सामान के संयुक्त विकास और निर्माण के महत्व पर बल दिया है। जर्मनी की तीन दिन की यात्रा पर गये राजनाथ सिंह ने कहा कि उनकी सरकार का “आत्मनिर्भर भारत" अभियान सह-निर्माण, सह-विकास और सह-नवाचार का निमंत्रण है। म्यूनिख होकर बर्लिन पहुंचे रक्षा मंत्री ने मंगलवार को जर्मनी के सांसदों को संबोधित करते हुए दोनों देशों के रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्रों के बीच सहयोग बढ़ाने की पुरजोर वकालत की। यात्रा के पहले दिन उन्होंने रक्षा एवं सुरक्षा संबंधी जर्मनी की संसद की स्थायी समिति को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया नए सुरक्षा खतरों का सामना कर रही है और तकनीकी परिवर्तन ने स्थिति को अत्यधिक जटिल बना दिया है। उन्होंने कहा कि बदलते परिवेश के अनुकूल ढलने की तत्परता के साथ एक नए दृष्टिकोण की आवश्यकता है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत रक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन देख रहा है और जर्मन उद्योग के साथ साझेदारी बढ़ाने से दोनों देशों को महत्वपूर्ण लाभ मिल सकते हैं। राजनाथ सिंह ने कहा, “हम जर्मनी के अग्रणी औद्योगिक उद्यमों की स्थापित क्षमताओं को पहचानते हैं। साथ ही उन्नत और उभरती प्रौद्योगिकियों में प्रसिद्ध जर्मन मिटेलस्टैंड (लघु एवं मध्यम आकार की कंपनियों) के जोश और गतिशीलता की सराहना करते हैं। भारत में भी हमारे स्टार्टअप और उद्यमशील निजी कंपनियां तेजी से हमारे बड़े और स्थापित रक्षा उद्यमों की क्षमताओं को बढ़ा रही हैं और उनका पूरक बन रही हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां भारत और जर्मनी स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे के पूरक हैं और हमारी साझेदारी और भी गहरी हो सकती है।”</p>
<p>आधुनिक वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए राजना​थ सिंह ने समन्वित प्रतिक्रियाओं और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारियों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विशेष बल दिया है। यूरोपीय संघ के स्तर पर भी विचारों में स्पष्ट एकरूपता दिखाई देती है और यह भारत के साथ उसके बढ़ते जुड़ाव में परिलक्षित होती है, जिसमें भारत-यूरोपीय संघ रक्षा और रणनीतिक साझेदारी भी शामिल है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने दोहराया कि भारत और जर्मनी न केवल रणनीतिक साझेदार हैं, बल्कि वर्तमान समय के वैश्विक विमर्श को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा, “हम स्थापित लोकतंत्र हैं जो साझा मूल्यों से बंधे हैं, और गतिशील अर्थव्यवस्थाएं हैं जो लचीलेपन, नवाचार और दृढ़ औद्योगिक भावना से संचालित हैं। सांसदों और समिति के सम्मानित सदस्यों के रूप में आपका मार्गदर्शन, राय और समर्थन हमारे रक्षा और रणनीतिक सहयोग के भविष्य को और मजबूत और समृद्ध बना सकता है।”</p>
<p>राजनाथ सिंह ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता को अब क्षेत्रीय मामला नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि इसके परिणाम वैश्विक स्तर पर हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थानीय अशांति नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए दूरगामी प्रभावों वाले गंभीर घटनाक्रम है। साथ ही इससे होने वाली मानवीय क्षति को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “भारत जैसे विकासशील देश के लिए, जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के एक महत्वपूर्ण हिस्से के लिए पश्चिम एशियाई क्षेत्र पर निर्भर है, होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान कोई दूर की घटना नहीं है, बल्कि यह एक कड़वी सच्चाई है जिसका हमारी सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर सीधा प्रभाव पड़ता है।”</p>
<p>रक्षा मंत्री ने जर्मनी के सांसदों को बताया कि पश्चिम एशिया पर गठित मंत्रियों का समूह लगातार बदलती स्थिति का आकलन कर रहा है और इसके प्रभाव को कम करने के लिए समयोचित उपाय सुझा रहा है। उन्होंने कहा, “प्रमुख मंत्रालयों को एक साथ लाकर की गयी हमारी चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखना, मुद्रास्फीति के दबाव को नियंत्रित करना और नागरिकों के साथ-साथ उद्योगों को बाहरी व्यवधानों से बचाना है। यह वैश्विक संकटों का सामना शांति, दूरदर्शिता और प्रभावी संस्थागत समन्वय के साथ करने की भारत की क्षमता को दर्शाता है।”</p>
<p>जर्मनी के सांसद और सांसदीय समिति के अध्यक्ष थॉमस रोवेकैंप ने बैठक में श्री सिंह का स्वागत किया। इससे पहले, रक्षा मंत्री ने बर्लिन पहुंचने पर हम्बोल्ट विश्वविद्यालय परिसर में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को पुष्पांजलि अर्पित की। रक्षा मंत्री के आगमन पर बर्लिन हवाई अड्डे पर उनका सैन्य सम्मान के साथ स्वागत किया गया। म्यूनिख से बर्लिन की उनकी यात्रा के दौरान लड़ाकू विमानों की सुरक्षा में उन्हें जर्मन वायु सेना के एक विशेष विमान में ले जाया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 13:23:16 +0530</pubDate>
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                <title>भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों में नई उम्मीद : भारत परस्पर सम्बन्धों को 'भविष्योन्मुखी साझेदारी' में बदलने पर सहमत, हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर भी दोनों देशों का दृष्टिकोण समान</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने द्विपक्षीय संबंधों को 'भविष्योन्मुखी साझेदारी' में बदलने का संकल्प लिया। डिजिटल सेतु की घोषणा के साथ, दोनों देशों ने 2030 तक व्यापार को $50 अरब तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है। यह सहयोग सेमीकंडक्टर, एआई और जहाज निर्माण जैसे क्षेत्रों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता को मजबूत करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/new-hope-in-india-south-korea-relations-india-agrees-to-transform/article-151121"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने सोमवार को यहां द्विपक्षीय मुद्दों पर व्यापक वार्ता कर दोनों देशों के संबंधों को 'भविष्योन्मुखी साझेदारी' में बदलने का संकल्प लिया और कहा कि भारत तथा दक्षिण कोरिया के बीच ये संबंध प्रौद्योगिकी, व्यापार और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा रणनीतिक हितों पर आधारित होंगे। बैठक के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि आठ वर्ष बाद दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की यह भारत यात्रा, अत्यंत महत्वपूर्ण है और दोनों देशों के बीच के गहरे तालमेल को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्य, बाजार अर्थव्यवस्था और कानून के शासन के प्रति सम्मान दोनों देशों की मूल पहचान का हिस्सा है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर भी दोनों देशों का दृष्टिकोण समान है। भविष्य की रूपरेखा को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देश 'विश्वसनीय साझेदारी' को 'भविष्योन्मुखी साझेदारी' में बदलने को तैयार हैं। इन सबके आधार पर, पिछले एक दशक में हमारे संबंध अधिक गतिशील और व्यापक हुए हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, “ चिप्स से जहाज निर्माण, प्रतिभा से प्रौद्योगिकी और मनोरंजन से ऊर्जा तक हम सभी क्षेत्रों में सहयोग के नये अवसरों को साकार करेंगे। आज हम अगले दशक की सफलता की कहानियों की नींव रख रहे हैं।” बैठक की प्रमुख उपलब्धियों का विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें 'भारत-कोरिया डिजिटल सेतु' की घोषणा महत्वपूर्ण है, जिसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमी कंडक्टर और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना है। दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को उन्नत कर 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया, जो पिछले वर्ष 25.7 अरब डॉलर था।</p>
<p>आधिकारिक सूचना के अनुसार यह बैठक श्री मोदी और श्री ली के बीच तीसरी आमने-सामने की मुलाकात थी, जो द्विपक्षीय संबंधों में तेजी को दर्शाती है। इस दौरान जहाज निर्माण, उभरती प्रौद्योगिकियों और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये गये। वैश्विक चुनौतियों के संदर्भ में श्री मोदी ने कहा कि यह साझेदारी व्यापक महत्व रखती है और दोनों देश मिलकर शांति और स्थिरता का संदेश देते हैं। उन्होंने दक्षिण कोरिया के अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और हिंद-प्रशांत महासागर पहल में शामिल होने के निर्णय का स्वागत किया।</p>
<p>इससे पहले 19 से 21 अप्रैल तक की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुंचे राष्ट्रपति ली का राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और पीएम मोदी ने औपचारिक स्वागत किया। उन्होंने राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। यह यात्रा भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बहुआयामी साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक पूरकता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक सहयोग पर आधारित है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 18:40:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>इसरो की ‘स्पेस ऑन व्हील्स’ से जशपुर में विज्ञान की नई उड़ान : सीएम विष्णुदेव साय ने किया अवलोकन, विज्ञान और तकनीक विकास की आधारशिला</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर में इसरो की मोबाइल प्रदर्शनी "स्पेस ऑन व्हील्स" का अवलोकन किया। इस पहल के तहत ग्रामीण छात्रों को चंद्रयान, मंगलयान और रॉकेट तकनीक की जानकारी दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने 17 मेधावी छात्रों को सम्मानित किया। इस अभियान से जिले के 10,000 से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/new-flight-of-science-in-jashpur-from-isros-space-on/article-150817"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/isro.png" alt=""></a><br /><p>जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित “स्पेस ऑन व्हील्स” कार्यक्रम ने बच्चों में नई ऊर्जा भर दी है। रणजीता स्टेडियम, जशपुर में आज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की इस विशेष मोबाइल प्रदर्शनी बस का आगमन हुआ, जिसका अवलोकन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया। मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी में प्रदर्शित रॉकेट, उपग्रह और अंतरिक्ष मिशनों से जुड़े विभिन्न मॉडलों का अवलोकन करते हुए विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान शासकीय महारानी लक्ष्मी बाई उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं-अंशु पासवान, भूमिका डाहरे और सारिका साहनी ने आत्मविश्वास के साथ चंद्रयान, मंगलयान, पीएसएलवी और जीएसएलवी सहित विभिन्न अंतरिक्ष तकनीकों की कार्यप्रणाली को सरल भाषा में समझाया।</p>
<p>मुख्यमंत्री साय ने बच्चों की वैज्ञानिक समझ और आत्म विश्वास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम दूरस्थ क्षेत्रों में विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक आज विकास की आधारशिला हैं और “स्पेस ऑन व्हील्स” जैसे प्रयास ग्रामीण बच्चों में नवाचार और जिज्ञासा को बढ़ावा देते हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जिले में स्पेस ऑन व्हील्स के माध्यम से जागरूकता फैलाने वाले 17 विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए और “द मैजिक ऑफ नाइट स्काई” पुस्तिका का वितरण भी किया।</p>
<p>मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप “अन्वेषण” कार्यक्रम के तहत इस पहल का आयोजन किया जा रहा है। कलेक्टर रोहित व्यास की पहल और विज्ञान भारती के सहयोग से यह कार्यक्रम जिले के सभी विकासखंडों में संचालित होगा। 7 अप्रैल से प्रारंभ यह अभियान 14 दिनों तक विभिन्न विद्यालयों में चल रहा है और प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान की जानकारी दी जा रही है। इस अभियान से 10,000 से अधिक विद्यार्थी प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे।</p>
<p>“स्पेस ऑन व्हील्स” इसरो की एक अत्याधुनिक मोबाइल प्रदर्शनी है, जिसे विशेष रूप से एक बस के रूप में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष विज्ञान को सीधे छात्रों और आमजन तक पहुंचाना है, खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में। इसमें रॉकेट, उपग्रह, रिमोट सेंसिंग, कम्युनिकेशन और नेविगेशन तकनीकों के मॉडल, ऑडियो-विजुअल डिस्प्ले और इंटरएक्टिव पैनल के माध्यम से जानकारी दी जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 18:01:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच राजनाथ ​सिंह का बड़ा बयान: बोले-ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता जरूरी, विकसित भारत के लक्ष्य को पाने के लिए नई प्रौद्योगिकियों को अपनाना आवश्यक</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन' में भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने रणनीतिक स्वायत्तता के लिए MSMEs और स्टार्टअप्स को AI व रोबोटिक्स जैसी उन्नत तकनीक अपनाने पर जोर दिया। इस अवसर पर 'अदिति' और 'iDEX' चुनौतियों के नए संस्करण भी लॉन्च किए गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/amidst-the-west-asia-crisis-rajnath-singhs-big-statement-said/article-147099"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajnath-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत को मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को देखते हुए रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने, रक्षा तैयारी को सुदृढ़ करने तथा देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनने के मिशन मोड में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नई प्रौद्योगिकियों को अपनाना आवश्यक है। </p>
<p>राजनाथ सिंह ने रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा आयोजित दो दिन के राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में गुरुवार को 'उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियां' विषय पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, नव-उद्यमों, रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार विजेताओं, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों, निजी रक्षा कंपनियों, नवोन्मेषकों, नीति निर्माताओं और शिक्षाविदों को संबोधित किया। उन्होंने वर्तमान भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को देखते हुए रणनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित करने, रक्षा तैयारी को सुदृढ़ करने तथा देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ड्रोन उत्पादन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर ईरान और इजराइल के बीच तनाव तक चल रहे संघर्ष इस बात के प्रमाण हैं कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन और प्रतिरोधी ड्रोन प्रौद्योगिकियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी और ड्रोन निर्माण में आत्मनिर्भरता केवल उत्पाद स्तर पर ही नहीं बल्कि कलपुर्जे के स्तर पर भी आवश्यक है। उन्होंने कहा, ड्रोन के ढांचों से लेकर उसके सॉफ्टवेयर, इंजन और बैटरियों तक, सब कुछ भारत में ही निर्मित होना चाहिए। यह कोई आसान कार्य नहीं है। अधिकांश देशों में जहां ड्रोन बनाए जाते हैं, वहां अनेक महत्वपूर्ण कलपुर्जे वर्तमान में चीन से आयात किए जाते हैं।</p>
<p>रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी देश के रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण बड़े उद्योगों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, नव-उद्यमों और नवोन्मेषकों के योगदान पर निर्भर करता है, साथ ही सरकार की स्पष्ट नीतिगत दिशा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है, जो देश की विशिष्ट रक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप हो। उन्होंने निजी क्षेत्र से सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया और सरकार के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया ताकि भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाया जा सके।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने रक्षा भारत नव-उद्यम चुनौती के 14वें संस्करण और आईडेक्स ढांचे के अंतर्गत 'अदिति चुनौतियों' के चौथे संस्करण का शुभारंभ किया। रक्षा बलों, भारतीय तटरक्षक बल और रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी से प्राप्त कुल 107 समस्या विवरण जारी किए गए, जिनमें 82 रक्षा भारत नव-उद्यम चुनौती के अंतर्गत और 25 अदिति चुनौतियों के अंतर्गत शामिल हैं, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में क्रांतिकारी नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके।</p>
<p>रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों से संबंधित 101 नवाचार चुनौतियों की एक नई पहल भी शुरू की गई, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों तथा नव-उद्यमों द्वारा डिजाइन-आधारित नवाचार को प्रोत्साहित करना है। इन चुनौतियों को रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा और विजेता नव-उद्यमों को मार्गदर्शन, परीक्षण सुविधाएँ तथा उनकी आपूर्ति श्रृंखला में संभावित एकीकरण के अवसर प्रदान किए जाएँगे।</p>
<p>राजनाथ सिंह ने आईडेक्स और अदिति को परिवर्तनकारी पहल बताते हुए कहा कि इनके माध्यम से नव-उद्यमों, नवोन्मेषकों और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को रक्षा बलों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप नवीन समाधान विकसित करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 तक लगभग 676 नव-उद्यम, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम तथा व्यक्तिगत नवोन्मेषक रक्षा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ चुके हैं। अब तक 548 अनुबंध किए जा चुके हैं और 566 चुनौतियाँ शुरू की गई हैं। इनमें से 58 प्रतिरूपों को लगभग 3853 करोड़ रुपये के मूल्य पर खरीद के लिए स्वीकृति मिल चुकी है। इसके अतिरिक्त लगभग 2326 करोड़ रुपये के 45 खरीद अनुबंध पहले ही किए जा चुके हैं। ये आँकड़े दर्शाते हैं कि नवाचार धीरे-धीरे ठोस उत्पादों और प्रौद्योगिकियों में परिवर्तित हो रहा है।</p>
<p>राजनाथ सिंह ने कहा कि आज सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिकी, स्वचालन और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जो एक बड़ा सकारात्मक परिवर्तन है। उन्होंने इन उद्यमों और नव-उद्यमों से इन प्रौद्योगिकियों को अपनाने और समेकित करने का आह्वान किया ताकि संसाधनों और क्षमताओं का सर्वोत्तम उपयोग हो सके। उन्होंने कहा कि स्वचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिकी और संयोगात्मक विनिर्माण जैसी प्रौद्योगिकियां वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र को नया रूप दे रही हैं, जबकि डिजिटल ट्विजन और उन्नत अनुकरण उपकरण नई संभावनाओं को खोल रहे हैं। डिजिटल ट्विजन का अर्थ वास्तविक प्रणाली का आभासी मॉडल तैयार करना है, जिससे जटिल प्रणालियों को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है और अधिक सटीक निर्णय लिए जा सकते हैं।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सुदृढ़ करने के लिए कई पहलें की हैं। इस वर्ष के केंद्रीय बजट में इन्हें इक्विटी, तरलता और व्यावसायिक समर्थन प्रदान करने के लिए तीन स्तरीय दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिससे ये अग्रणी उद्यम बन सकें। इसका उद्देश्य इनके विकास को तेज करना और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से सरकार इस महत्वपूर्ण क्षेत्र के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। पंजीकरण और पहचान को सरल बनाने के लिए उद्यम पोर्टल और उद्यम सहायक पोर्टल जैसे डिजिटल मंच शुरू किए गए हैं, ताकि छोटे उद्योगों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल किया जा सके और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि देश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की संख्या 2012-13 में लगभग 4.67 करोड़ थी, जो अब बढ़कर लगभग 8 करोड़ हो गई है। यह वृद्धि उद्यमिता की बढ़ती भावना को दर्शाती है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि नव-उद्यम अपने अनूठे विचारों के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन के उत्प्रेरक बन रहे हैं और कई अल्प समय में ही यूनिकॉर्न का दर्जा प्राप्त कर रहे हैं। निकट भविष्य में और भी ऐसे उद्यम सामने आएँगे। इसके लिए निरंतर प्रयास, धैर्य और समर्पण आवश्यक है। उन्होंने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों तथा नव-उद्यमों से नवाचार करने, नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने और आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने का आह्वान किया।</p>
<p>रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना तथा डिजाइन, विकास और निर्माण से लेकर संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के एकीकरण को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि 200 समस्या विवरण इन उद्यमों, उद्योगों, नव-उद्यमों और युवा नवोन्मेषकों को आधुनिक उत्पाद विकसित करने और अपने कौशल को बढ़ाने का अवसर देंगे।</p>
<p>उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 को सुधार वर्ष के रूप में मनाते हुए मंत्रालय ने कई कदम उठाए हैं, जिनमें अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल बनाना, गुणवत्ता प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करना तथा परीक्षण प्रयोगशालाओं को सशक्त बनाना शामिल है। रक्षा क्षेत्र में कार्यरत उद्योगों का एक डिजिटल डाटाबेस 'सृजन दीप' भी बनाया गया है, जिसमें 40,000 से अधिक उद्योग सूचीबद्ध हैं, ताकि अनुसंधान और विकास को बढ़ावा मिल सके।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने रक्षा उत्पादन विभाग के पाँच प्रकाशनों का विमोचन भी किया, जिनका उद्देश्य नीतिगत पहलों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, रक्षा निर्यात को प्रोत्साहित करना और उद्योग हितधारकों के लिए व्यापार सुगमता सुनिश्चित करना है। इसके अतिरिक्त रक्षा मंत्री ने एक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया, जिसमें 20 बड़ी रक्षा कंपनियों ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को भागीदार, आपूर्तिकर्ता और नवोन्मेषक के रूप में शामिल करने के लिए अपने कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया। इसके साथ ही 24 भारतीय और विदेशी कंपनियां उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियों जैसे स्वचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिकी, संयोगात्मक विनिर्माण और स्मार्ट सामग्री का प्रदर्शन कर रही हैं।</p>
<p>इस अवसर पर प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा अध्यक्ष डॉक्टर समीर वी कामत सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 18:37:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कर्नाटक सीएम सिद्दारमैया ने की अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात की, द्विपक्षीय संबंधों पर हुई चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ व्यापार, प्रौद्योगिकी और निवेश पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने कावेरी निवास पर द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/karnataka-cm-siddaramaiah-met-us-ambassador-sergio-gore-and-discussed/article-143533"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/karnataka-cm.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने बेंगलुरु दौर पर आए भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर के साथ चर्चा की है। यह बैठक मुख्यमंत्री के आधिकारिक निवास कावेरी में आयोजित की गई, जहाँ दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने सहित आपसी हित के मामलों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।</p>
<p>बातचीत के दौरान, मंत्री एम सी सुधाकर, मुख्य सचिव शालिनी रजनीश और मुख्यमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। यह बातचीत भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते जुड़ाव की पृष्ठभूमि में हुई है, जिसमें आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक साझेदारी पर ध्यान केंद्रित किया गया है। </p>
<p>मुख्यमंत्री कार्यालय ने वैश्विक साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कर्नाटक की प्रतिबद्धता पर जोर दिया है। इससे पहले  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद तेजस्वी सूर्या ने राजदूत का बेंगलुरु में स्वागत किया जहाँ दोनों के बीच अनौपचारिक बातचीत के दौरान व्यापार, प्रौद्योगिकी और नवाचार पर  चर्चा हुईं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 15:36:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ मुंबई दौरे पर होंगे पीएम मोदी, भारत-फ्रांस नवाचार 2026 का करेंगे उद्घाटन</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी मंगलवार को मुंबई में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात करेंगे। दोनों नेता रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करेंगे और 'भारत-फ्रांस नवाचार 2026' का उद्घाटन कर स्टार्टअप्स को संबोधित करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-will-be-on-mumbai-tour-with-french-president/article-143338"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(7)2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार को मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात करेंगे। पीएम मोदी और इमैनुएल मैक्रो इस दौरान भारत-फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा भी करेंगे और क्षेत्रीय तथा वैश्विक महत्व के मुद्दों पर विचार साझा करेंगे। दोनों नेता इस दौरान भारत-फ्रांस नवाचार 2026 का उद्घाटन करेंगे।</p>
<p>राष्ट्रपति मैक्रों पीएम मोदी के निमंत्रण पर 17 से 19 फरवरी तक भारत के औपचारिक दौरे पर रहेंगे। वह भारत में हो रहे एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और मुंबई में प्रधानमंत्री के साथ एक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में भी शामिल होंगे। यह राष्ट्रपति मैक्रों का भारत का चौथा और मुंबई का पहला दौरा होगा। पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों 17 फरवरी को अपराह्न सवा तीन बजे मुंबई के लोक भवन में द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगे और दोनों देशों के बीच चल रही रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे।</p>
<p>उनकी चर्चा रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने और इसे नये तथा उभरते क्षेत्रों में और विस्तारित करने पर केंद्रित होगी। पीएम मोदी और श्री मैक्रों क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर भी विचार साझा करेंगे। आधिकारिक सूचना के अनुसार दोनों नेता मंगलवार शाम 5.15 बजे भारत-फ्रांस नवाचार 2026 का उद्घाटन करेंगे और दोनों देशों के व्यावसायिक नेताओं, स्टार्ट-अप, शोधकर्ताओं और अन्य नवोन्मेषकों के एक सम्मेलन को संबोधित करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 12:20:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे सीबीआई की साइबर अपराध डैशबोर्ड का शुभारंभ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग पर होगी चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[गृह मंत्री अमित शाह ने सीबीआई की नई साइबर अपराध शाखा और राष्ट्रीय साइबर डैशबोर्ड लॉन्च किया, साइबर धोखाधड़ी से निपटने की क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/union-home-minister-amit-shah-will-launch-cbis-cyber-crime/article-142618"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/amit-shah.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक नई साइबर अपराध शाखा का उद्घाटन और एक प्रमुख राष्ट्रीय साइबर अपराध डैशबोर्ड का शुभारंभ करने वाले हैं। गृह मंत्री भारत मंडपम में साइबर-सक्षम धोखाधड़ी से निपटना और इकोसिस्टम को खत्म करना विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण देंगे। यहाँ वह सीबीआई अधिकारियों के लिए एक अलंकरण समारोह की अध्यक्षता करेंगे और नई सीबीआई साइबर अपराध शाखा का उद्घाटन करेंगे तथा भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) का एस4सी डैशबोर्ड का भी शुभारंभ करेंगे।</p>
<p>इस कार्यक्रम से पहले, गृह मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, साइबर अपराध आज दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा है। हमारी सरकार नागरिकों को इससे सुरक्षित रखने के लिए संकल्पित है। आज, भारत की साइबर अपराध से लडऩे की क्षमता को मजबूत करने के लिए सीबीआई द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करूँगा।</p>
<p>गृह मंत्रालय के तहत आई सी के सहयोग से सीबीआई द्वारा आयोजित यह दो दिवसीय सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल उपयोग के साथ-साथ नये जोखिम भी पैदा हुए हैं, जिनका अपराधी फायदा उठा रहे हैं। इसका उद्देश्य रोकथाम, जांच और समन्वय को मजबूत करके एक एकीकृत राष्ट्रीय रणनीति बनाना है।</p>
<p>इस कार्यक्रम में केंद्र और राज्य की एजेंसियों के वरिष्ठ कानून प्रवर्तन अधिकारी, दूरसंचार और वित्तीय क्षेत्रों के नियामक, सार्वजनिक और निजी बैंक, फिनटेक कंपनियां, दूरसंचार सेवा प्रदाता और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों सहित विभिन्न हितधारक भाग लेंगे। इसके प्राथमिक उद्देश्यों में साइबर धोखाधड़ी के प्रति एक साझा समझ बनाना, धोखाधड़ी इकोसिस्टम के महत्वपूर्ण स्तंभों (वित्तीय,दूरसंचार और मानव संसाधन) की जांच करना और अंतर-एजेंसी सहयोग को मजबूत करना शामिल है। सम्मेलन में जांच और पीड़ित सुरक्षा तंत्र को बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग पर भी चर्चा की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 16:25:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साल भर की पढ़ाई ही दिलाएगी सफलता, घबराएं नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[एग्जाम टिप्स: टीचर बोले पढ़ाई के दौरान आधुनिक तकनीक एआई का भी लिया जाता सहारा ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/only-year-long-study-will-lead-to-success--don-t-panic/article-142588"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(9).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बोर्ड परीक्षाओं की पदचाप के बीच विद्यार्थियों में बढ़ते तनाव को देखते हुए शिक्षा विशेषज्ञों ने सफलता के मूल मंत्र साझा किए हैं।वहीं दैनिक नवज्योति की खास रिपोर्ट में पढ़िए शिक्षकों ने कहा कि बोर्ड परीक्षा कोई हौवा नहीं है; इसमें वहीं सवाल पूछे जाते हैं। जो छात्रों ने वर्षभर अपनी कक्षाओं में शिक्षकों से पढ़े हैं। उन्होंने जोर दिया कि नई अध्ययन सामग्री के पीछे भागने के बजाय छात्र अपने शिक्षकों द्वारा पढ़ाए गए पाठ्यक्रम और विषयवस्तु पर ही पूरा भरोसा रखें और उसी का गहन अभ्यास करें। समय प्रबंधन और छोटे लक्ष्यों से हासिल होगी जीत परीक्षा के दौरान समय का सही नियोजन ही सफलता की कुंजी है। वहीं टीचरों ने बताया कि समय-समय पर डिजिटल क्लास रूम में बच्चों को बैठकर आधुनिक तकनीकी से रूबरू करवाया जाता व पढ़ाई करवाई जाती।</p>
<p><strong>लिखकर याद करने का फॉमूर्ला </strong><br />अक्सर छात्र कठिन विषयों को देखकर तनाव में आ जाते हैं। इसके समाधान के लिए कठिन विषय वस्तुओं का बार-बार दोहरान करना आवश्यक है। जो हिस्से याद करने में कठिन लगें, उन्हें छोटे-छोटे नोट्स के रूप में हाथ से लिखकर याद करें। हाथ से लिखे नोट्स मस्तिष्क में लंबे समय तक स्थायी रहते हैं।</p>
<p><strong>संवाद और आत्मविश्वास है जरूरी </strong><br />पढ़ाई के पाठ्यक्रम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटें और कठिन विषयों को पहले निपटाएं। पढ़ाई के बीच 5-10 मिनट का ब्रेक लें। पौष्टिक भोजन करें, पर्याप्त पानी पीएं। परीक्षा की रात अच्छी नींद लें, क्योंकि यह एकाग्रता और सोचने की क्षमता को बेहतर बनाती है। खुद पर विश्वास रखें और अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित करें। परिणाम के बारे में चिंता न करें। यदि तनाव हावी हो रहा है,तो दोस्तों,परिवार या शिक्षकों से बात करें। वहीं पढ़ाई के दौरान आधुनिक तकनीकों का भी सहारा लिया जाता हैं।<br /><strong>-सुनीता मेहरा, प्रिंसिपल महा. गांधी गवर्नमेंट स्कूल, महावीर नगर फर्स्ट कोटा </strong></p>
<p><strong> वर्षभर जो पढ़ा उसमें से ही प्रश्न पूछे जाते</strong><br />बोर्ड परीक्षा की तैयारी करने के दौरान ये याद रखें कि जो आपने वर्षभर पढ़ा उस में से ही प्रश्न आते। अत: जो शिक्षकों ने पढ़ाया है उन्ही विषयवस्तुओं को आप अच्छे से पढ़ें। परीक्षा में कोई भी प्रश्न अनुत्तरित ना छोड़े। परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन अतिमहत्वपूर्ण है। प्रतिदिन विषयवार छोटे-छोटे उद्देश्य बनायें, उनको प्राप्त करें। जिससे आपका विषय पूर्ण रूप से तैयार हो जाएगा।कठिन विषयवस्तुओं का दोहरान करें। जो याद नहीं हो पा रहा उसे छोटे छोटे नोट्स के रूप में हाथ से लिखें। मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखें।वहीं समय-समय पर आधुनिक तकनीक जिसमे एआई समेत अन्य तकनीकों का सहारा लिया जाता।<br /><strong>- रूपेश गुप्ता, विज्ञान विषय, महा. गांधी राज. विद्या.,मल्टीपर्पज, गुमानपुरा</strong></p>
<p><strong> संस्कृत व्याकरण का जुलाई से ही शुरू हो जाता है अभ्यास </strong><br />बोर्ड परीक्षा के नाम से छात्र-छात्राओं में भय व्याप्त हो जाता है। हम छात्रों को सत्र के प्रारंभ से ही बोर्ड पाठ्यक्रम के अनुसार अध्यापन और प्रश्नोत्तर की तैयारी करवाते हैं। तीनों परख व प्री बोर्ड के प्रश्नों की संभावित बोर्ड प्रश्नों को आधार बनाकर प्रश्न पत्र तैयार करते हैं। संस्कृत विषय में व्याकरण महत्वपूर्ण है।जुलाई माह से ही पिछली कक्षाओं के व्याकरण को दोहराते हुए बोर्ड के निर्धारित पाठ्यक्रम पर ध्यान केंद्रित कर अधिक से अधिक बार पाठ्यक्रम को दोहराने का प्रयास करवाया जाता हैं। जिससे विद्यार्थी आत्मविश्वास से पूर्ण, विद्यार्थी तनाव मुक्त होकर परीक्षा देते हैं।<br /><strong>- नरेन्द्र कन्सूरिया, व्याख्याता संस्कृत, राउमावि, शिवपुरा</strong></p>
<p><strong>चार्ट और क्लास टेस्ट से होती है तैयारी </strong><br />कृषि विज्ञान में बोर्ड परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त करने के लिए विषयों का विस्तृत अध्ययन करे। उसके बाद घर में पुन: पढ़कर नोट्स बनाने को कहा जाता हैं। साथ ही समय-समय पर बच्चों के क्लास टेस्ट लिए जाते हैं। कृषि विज्ञान में विभिन्न फसलों जैसे खाद्यान्न फसलों दलहनी फसलों तिलहनी फसलों तथा विभिन्न सब्जियों की खेती की संपूर्ण जानकारी विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान दी जाती हैं। ताकि विद्यार्थी आसानी से याद कर सकें। वैसे विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान विषय दैनिक जीवन की जरूरतों से जोड़कर पढ़ाया व समझाया जाता हैं। समय-समय पर विद्यार्थियों को चार्टस बनाकर विभिन्न जानकारी दी जाती हैं।<br /><strong>- तृप्ति पालीवाल व्याख्याता, कृषि विज्ञान रा.उ.मा.बि, दादाबाड़ी</strong></p>
<p><strong>स्व-चिंतन' से सुधारें अपनी गलतियां</strong><br />विज्ञान वर्ग की में अध्यापिका होने के चलते में ये ही कहूंगी की परीक्षा में बैठने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा में अच्छे मार्क्स स्कोर करने के लिये आत्मविश्वास सर्वोपरि है। पूर्व बोर्ड परीक्षा के सॉल्व प्रश्नों को हल करके स्व-चिंतन करते हुए गलतियों को सुधार करने का प्रयास करें। मुख्य विषय वस्तु के शॉर्ट नोट्स का दोहरान मन मे करते रहे। तनाव रहित रहे, पर्याप्त नींद लें। रात को पढ़े गए का सुबह उठ कर दोहरान करे।<br /><strong>-नेहा गुप्ता विज्ञान अध्यापक, कोटा शहर</strong></p>
<p><strong>पूर्व परीक्षा के प्रश्नों को हल करे</strong><br /> स्टूडेंट को ्रपूरे साल ही सिलेबस को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर पढ़ने की सलाह देते है। परीक्षा नजदीक आने के दौरान ज्यादा से ज्यादा रिवीजन करे। दिमाग को शांत रखे एवं आसपास का माहौल व्यवस्थित रखने की कोशिश करे। पढ़ाई के साथ साथ अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है।<br />पूर्व वर्ष के परीक्षा प्रश्न पत्र हल करे जिससे परीक्षा से पहले स्वयं के आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।<br /><strong>- दीपिका चाँदसिन्हा,वरिष्ठ अध्यापक हिन्दी,राजकीय उच्च मा.वि. सकतपुरा</strong></p>
<p><strong>एकाग्रता और स्वयं के नोट्स से मिलेगी सफलता </strong><br />परीक्षा माध्यम से ही विद्यार्थी वर्षभर की मेहनत का फल प्राप्त करना है। सतर्क रहते हुए विषयवस्तु का अध्ययन करना इस समय विद्यार्थियों को सिर्फ अपने अध्ययन पर ही ध्यान केन्द्रित करना है। नियमित निंद्रा लें, और समय का ध्यान रखें।इस समय एकान्त में एवं एकाग्रचित्त होकर अध्ययन करें। स्वयं के बनाये नोट्स पढ़ें। बड़े उत्तरों को याद करने के लिए मुख्य-मुख्य बिन्दु याद रखें। साथ ही परीक्षा के हॉल में समय का भी ध्यान रखें।<br /><strong>- महेश सुमन,वरिष्ठ अध्यापक संस्कृत</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 14:55:49 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>स्वामी बालमुकुंदाचार्य ने कहा-संस्कृत केवल भाषा ही नहीं बल्कि भारत की जीवन दृष्टि भी है, जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह को किया संबोधित</title>
                                    <description><![CDATA[हवामहल विधायक स्वामी बालमुकुंदाचार्य ने कहा कि संस्कृत भारतीय जीवन-दृष्टि और सांस्कृतिक चेतना का आधार है, जिसे संरक्षित कर शोध, तकनीक और आधुनिक शिक्षा से जोड़ना आवश्यक है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/swami-balmukundacharya-said-sanskrit-is-not-only-a-language/article-142317"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(10)5.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हवामहल विधानसभा क्षेत्र के विधायक स्वामी बालमुकुंदाचार्य ने कहा है कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की जीवन-दृष्टि, ज्ञान-परंपरा और सांस्कृतिक चेतना का मूल स्रोत है। सनातन संस्कृति की आधारशिला संस्कृत भाषा है बालमुकुंदाचार्य शनिवार को  जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। </p>
<p>उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा को संरक्षित करना और भावी पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने त्रिवेणी महाराज के संकल्प के अनुरूप वैदिक परंपरा को आगे बढ़ाना, प्राचीन नक्षत्र व्यवस्था, अश्वमेघ यज्ञ परंपरा तथा प्राचीन ग्रंथों और लेखों के संरक्षण एवं प्रचार का कार्य आज के समय में अत्यंत आवश्यक है। </p>
<p>मुख्य अतिथि के रूप में हरिद्वार स्थित उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय ने कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा के संवाहक हैं। आवश्यकता है कि संस्कृत को शोध, तकनीक और आधुनिक विषयों से जोड़ते हुए वैश्विक मंच पर स्थापित किया जाए, ताकि इसकी सार्वकालिक उपयोगिता सिद्ध हो सके। कुलपति प्रो.मदनमोहन झा ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल शास्त्रों का अध्ययन नहीं, बल्कि संस्कृत ज्ञान को समकालीन संदर्भों से जोड़कर समाजोपयोगी बनाना है। संस्कृत शिक्षा के माध्यम से नैतिकता, अनुशासन और समन्वय की भावना विकसित होती है, जो राष्टÑ निर्माण में सहायक है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
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                <title>गुम हुए मोबाइल फिर से मिले तो खिले चेहरे, पुलिस ने 83 फोन असली मालिकों को सौंपे</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में जवाहर नगर थाना पुलिस ने सीईआईआर पोर्टल से दो माह में 83 गुम मोबाइल तलाशकर मालिकों को सौंपे। करीब 15 लाख रुपये मूल्य के मोबाइल रिकवर किए गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/faces-lit-up-when-lost-mobiles-were-found-again-police/article-141753"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(6).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जवाहर नगर थाना पुलिस ने गुम हुए मोबाइलों को तलाशकर जब उनके मालिकों को सौंपे तो उनके चेहरे खुशी से खिल उठे। पुलिस ने सईआईआर पोर्टल की मदद से दो माह में 83 मोबाइलों को तलाशा, जिनकी कीमत करीब 15 लाख रुपए है। </p>
<p>एसीपी आदर्श नगर लक्ष्मी सुथार ने बताया कि थानाधिकारी जवाहर नगर महेश चन्द्र गुर्जर के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया।  सीईआईआर पोर्टल पर हर दिन अपडेशन चैक कर उपयोगकर्ताओं को समझाइश कर दो माह में 83 मोबाइल रिकवर किए गए हैं। रिकवर किए गए मोबाइल वर्ष 2024 के 14 और 2025 के 66 मोबाइल है। वहीं वर्ष 2026 के तीन मोबाइल हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 11:22:34 +0530</pubDate>
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