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                <title>technology - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>स्टार्टअप स्केलिंग के लिए सिस्टम की पैचिदगियां बड़ी चुनौती, एकल विंडो की जरूरत, आइडिया, टैलेंट, फंड और मजबूत तकनीक जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ यूनिकार्न के लिए प्रबंधन, बाजार की समझ और वित्तीय अनुशासन प्रभावी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/systemic-complexities-pose-a-major-challenge-for-scaling-startups--a-single-window-system-is-needed--alongside-ideas--talent--funding--and-robust-technology/article-160693"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)86.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्टार्टअप को स्केल करने के लिए केवल फंडिंग ही पर्याप्त नहीं है। आइडिया, सही टीम, मजबूत तकनीक, प्रभावी प्रबंधन, बाजार की समझ और वित्तीय अनुशासन अपनाने पर ही स्टार्ट अप हाडौती में सफल हो सकते हैं और राष्ट्रीय स्तर पर अपना स्थान बना सकते हैं। यह बात उभर कर आई दैनिक नवज्योति की बुधवार को हुई मासिक परिचर्चा में। दैनिक नवज्योति कार्यालय में आयोजित इस टॉक शो का विषय था हाडौती में स्टार्टअप स्केलअप होने के लिए किस तरह की चुनौतियां हैं( चैलेंजज इन स्केलिंगअप स्टार्ट अप इन हाडौती) । इस टॉक शो में इंडस्ट्री,व्यापार,नये और पुराने स्टार्टअप के फाउंडर,कोटा व्यापार संघ से जुडे सदस्य,एसएसआई के मैंबर, आई स्टार्ट के मेंटोर,चार्टर एकाउंटेंट, कंपनी सैकेट्री, सरकारी और प्राइवेट एजेसियों से जुड़े लोगों  ने हिस्सा लिया। प्रस्तुत हैं टॉक शो के उसके अंश-</p>
<p><strong>यह हैं स्टार्टअप स्केलअप के चैलेंज</strong><br />- स्टार्टअप के विस्तार के लिए पूंजी की कमी<br />- टैलेंट और कर्मचारियों की कमी<br />-राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना आसान नहीं होता<br />- तकनीकी प्रणाली मजबूत नहीं होने पर सेवा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती <br />-मजबूत प्रबंधन टीम बनाने की आवश्यकता <br /> -नकदी प्रवाह का प्रबंधन<br /> -स्ट्रेटीजी तैयार हो, बाजार में बड़ी कंपनियां भी प्रवेश कर सकती हैं<br />- उत्पाद या सेवा की गुणवत्ता मेंग्राहक संतुष्टि बनाए रखना बड़ी चुनौती<br />- टैक्स, डेटा सुरक्षा, श्रम कानून, लाइसेंस और अन्य सरकारी नियमों का पालन बड़ी चुनौती<br />-सही समय पर, नियंत्रित और टिकाऊ विस्तार</p>
<p><strong>न्यूक्लियर पावर अपॉर्च्युनिटी</strong><br />हाड़ौती में न्यूक्लियर पावर की प्रचुरता है। इससे संबंधित स्टार्टअप पर फोकस कर उसे शुरू किया जाए तो उसका अधिकतम लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इस क्षेत्र में कोटा व हाड़ौती के स्टार्टअप पूरे देश में अपनी पहचान बना सकते हैं और यहां से विकसित राजस्थान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। लेकिन अधिकतर लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं है। साथ ही स्टार्टअप शुरू करने व इन्हें प्रोत्साहित करने के सरकारी नियम तो बने हुए हैं उसमें कई तरह की छूट का प्रावधान भी किया गया है लेकिन उनका वास्तविक रूप में लाभ नहीं मिल पा रहा है। यदि शत प्रतिशत लाभ मिलने लगे तो कोई कारण नहीं हैं कि स्टार्टअप स्केलअप नहीं कर सकें। साथ ही युवाओं को रोजगार व उनकी आय के साधन भी मिलने लगेंगे।<br /><strong>-गोविंद राम मित्तल, फाउंडर प्रेसिडेंट द एसएसआई एसोसिएशन</strong></p>
<p><strong>पूरी रिसर्च से शुरू करें स्टार्टअप</strong><br />स्टार्टअप शुरू करना किसी बिजनेस से कम नहीं है। इसके लिए पहले पूरी तैयारी करने की जरूरत होती है। किसी भी काम के बारे में पूरी जानकारी करने के बाद ही शुरू करने पर उसमें सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है। हालांकि सरकार की ओर से स्टार्टअप को प्रमोट करने के लिए नियम व नीतियां तो अच्छी बनाई गई हैं। लेकिन सरकारी सिस्टम में कई कमियां हैं जिनके कारण युवा चाहकर भी अपना स्टार्टअप शुरू करने के बाद उसे आगे नहीं बढ़ा पाते हैं। चीन में उद्योग बढने का कारण वहां सुुविधाएं अधिक है। जबकि तुलनात्मक रूप से भारत में उद्योग, व्यापार या स्टार्टअप को शुरू करने व आगे बढ़ाने में सुविधाएं बाधक बन जाती हैं।<br /><strong>-अशोक माहेश्वरी ,प्रेसिडंट होटल फेडरेशन आॅफ राजस्थान कोटा डिवीजन</strong></p>
<p><strong>स्टार्टअप की स्केल प्रोडक्ट पर निर्भर</strong><br />स्टार्टअप को शुरू हुए दस साल हो गए हैं। देशभर में अब तक दो लाख स्टार्टअप हो चुके हैं। हाड़ौती में 560 व कोटा में 490 स्टार्टअप हैं। नवम्बर 2025 के एक ही महीने में एक साथ 150 स्टार्टअप शुरू हुए थे। लेकिन बहुत कम स्टार्टअप ऐसे है जो व्यापक स्तर पर अपनी पहचान बना सके हैं। राजस्थान के दो ही स्टार्टअप देशभर में अपनी पहचान बना पाए हैं। स्टार्टअप स्केल की समस्या स्थानीय स्तर पर ही नहीं है पूरे देश की समस्या है। स्टार्टअप स्केल प्रोडक्ट पर निर्भर करता है। प्रोडक्ट की डिमांड अधिक होगी तो उसका मार्केट भी उतना ही बड़ा होगा। स्टार्टअप शुरू करने से पहले उससे संबंधित सभी पहलुओं की तैयारी करनी पड़ती है तभी सफलता संभव है।<br /><strong>-कोस्तुभ भट्टाचार्य, मेंटोर स्टार्टअप कंसलटेंट आई स्टार्ट राजस्थान</strong></p>
<p><strong>स्टार्टअप स्केलअपन में फंड मैनेजमेंट बड़ी समस्या</strong><br />स्टार्टअप का मतलब ही नए सिरे से किसी व्यवसाय को शुरू करना है। एक बार हिम्मत कर युवा स्टार्टअप शुरू कर भी देते हैं लेकिन उसे आगे बढ़ाने के लिए फंड की आवश्यकता होती है। जबकि फंडिंग ही नहीं होने से युवा अपने स्टार्टअप को आगे नहीं बढ़ा पाते। हालांकि स्टार्टअप को आगे बढ़ाने के लिए कनेक् शन भी होने चाहिए। उन्हें भी फंडिंग व कनेक् शन की समस्या का सामना करना पड़ा था लेकिन देर से ही सही समाधान भी मिला। अब वे गुजरात, मध्य प्रदेश व दिल्ली समेत कई जगह पर अपना काम कर रहे हैं।<br /><strong>-शुभम शर्मा फाउंडर सीबीएस प्लीवर स्टार्टअप</strong></p>
<p><strong>मार्केट की स्वीकार्यता बड़ी चुनौती</strong><br />कोई भी स्टार्टअप शुरू करना तो आसान है। लेकिन उसकी मार्केट में एक्सेबिलिटी भी होनी चाहिए। युवाओं द्वारा जो प्रोडक्ट तैयार किया जा रहा है उसकी मार्केट में डिमांड होगी तो वह ग्रो करेगा वरना परेशानी होती है। हालत यह है कि कई स्टार्टअप इसलिए भी आगे नहीं बढ़ पाते कि उनके द्वारा जो प्रोडक्ट तैयार किया जाता है उसका प्रमोशन नहीं होने से मार्केट नहीं मिल पाता। आरएनडी भी बड़ी समस्या रहती है। मार्केट के साथ उसका प्रमोशन उतना ही जरूरी है।<br /><strong>-सिद्धार्थ गुप्ता ,ट्रेजरार डिवी. चैम्बर आॅफ कामर्स</strong></p>
<p><strong>बेस्ट टैलेंट की कमी</strong><br />कोटा में स्टार्टअप तो कई शुरू हो रहे हैं। लेकिन ऐसे स्टार्टअप जो देश में अपनी पहचान बनाएं ऐसा स्टार्टअप शुरू करने के लिए यहां तकनीकी विशेषज्ञ या इंजीनियर ही नहीं है। टेलेंट व काम करने वालों की कमी है। लोग स्टार्टअप शुरू तो कर देते हैं लेकिन उसे आगे बढ़ाने के लिए काम की गम्भीरता व जुनून भी होना चाहिए। बाहर से तकनीकी विशेषज्ञ मंगवाने पर उनकी कीमत अधिक चुकानी पड़ती है। साथ ही महिलाओं को स्टार्टअप शुरू करने या उनके प्रोडक्ट को मार्केट में पहचान दिलाने में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पडता है।<br /><strong>-नेहा गुप्ता फाउंडर गेन बुक स्टार्टअप</strong></p>
<p><strong>माकेर्टिंग और प्रमोशन के साथ रिसर्च की जरूरत</strong><br />स्टार्टअप शुरू करने से पहले जो भी प्रोडक्ट तैयार किया जाए उसकी पूरी जानकारी होनी चाहिए। प्रोडक्ट तैयार करने व उसकी माकेर्टिंग और प्रमोशन के लिए फंड की आवश्यकता होती है। लेकिन स्टार्टअप के सामने सबसे बड़ी समस्या ही फंड की रहती है। साथ ही जिस स्तर का स्टार्टअप होना चाहिए उसमें काम करने के लिए उस स्तर का टेलेंट नहीं मिल पाता है। जिससे स्टार्टअप एक सीमित दायरे तक ही रह जाते हैं। कोटा व हाड़ौती के स्टार्टअप को आगे बढ़ाने की जरूरत है। जिससे युवाओं को रोजगार के साथ ही उनके प्रोडक्ट की डिमांड भी बढ़े।<br /><strong>-सीए सुधांशु उपाध्याय सैकेट्री आईसीएआई</strong></p>
<p><strong>कई सरकारी औपचारिकताएं बाधक बन रही</strong><br />जिस तरह से कई विभागों में सीएसआर का फंड दिया जाता है। उसी तरह का फंड यदि स्टार्टअप को दिया जाए तो उन्हें आर्थिक सम्बल मिलेगा। स्टार्टअप को फंडिंग के लिए एक सिस्टम बनाने की आवश्यकता है। वहीं दूसरी तरफ स्टार्टअप शुरू करना तो आसान है लेकिन उसके ग्रो करने में कई सरकारी औपचारिकताएं बाधक बनती हैं। उन सिस्टम को सुधारने की जरूरत है। स्टार्टअप में प्रोडक्ट उत्पादन पर फोकस किया जाएगा तो अधिक लोगों को रोजगार भी दिया जा सकेगा।<br /><strong>-अमित सिंघल, डायरेक्टर इंडेक्सल इंजीनियरिंग</strong></p>
<p><strong>नई तकनीक पर आधारित स्टार्टअप ग्रो तेजी से करेंगे</strong><br />समय के साथ बदलाव बहुत जरूरी है। फिर चाहे व कोई प्रोडक्ट हो या शिक्षा का क्षेत्र। शिक्षा के क्षेत्र में भी नए-नए स्टार्टअप शुरू किए जा सकते हैं। लेकिन उनमें मेन पावर के साथ ही एआई का अधिक उपयोग किया जाएगा तो उनकी डिमांड व उपयोगिता अधिक होगी। एआई आधारित प्रोडक्ट की डिमांड अधिक होने से उस काम को करने वाले अधिक युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। नई तकनीक पर आधारित स्टार्टअप की कोटा व हाड़ौती में ही नहीं पूरे देश में डिमांड रहेगी तो स्टार्टअप ग्रो भी तेजी से करेंगे।<br /><strong>-सुदर्शन माथुर ,डायरेक्टर एलबीएस एजुकेशन ग्रुप</strong></p>
<p><strong>सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया जाए </strong><br />स्टार्टअप को प्रमोट करने के लिए नियम व नीतियां तो बनी हुई हैं लेकिन सिस्टम में कई कमियां हैं। माइंड सेट ही नहीं है। जिनके कारण स्टार्टअप शुरू करने वालों को कई परेशाननियों का सामना करना पड़ता है। सरकारी सिस्टम में सुधार करने की जरूरत है। साथ ही सिंगल विंडो सिस्टम को लागू किया जाए तो युवाओं को सुविधा होगी और स्टार्टअप अधिक सुगमता से काम कर पाएंगे।<br /><strong>-समीर सूद, सैकेट्री एसएसआई एसोसिएशन</strong></p>
<p><strong>स्टार्टअप पर वर्तमान हालात की मार</strong><br />देश दुनिया में जो हालात हैं उससे स्टार्टअप भी अछूते नहीं हैं। इन पर असर पड़ रहा है। मार्केट ग्रोथ में 40 फीसदी कमी आई है। मैने नोएड़ा में वर्क किया पर वहां पर काफी कर्मचारी कोटा सहित अन्य जगहों के कर्मचारी मेरे पास काम करते थे। जिसमे कुछ तो इंटर करने के लिए आते थे तो कुछ अपना टैलेंट एक्सप्लोर करने के लिए आते थे।मेरी मैंटलिटी हमेशा से रही है कि मैं कोटा में ही रहकर काम करूं, इसके लिए मेरे प्रयास हमेशा ही रहत ेथे कि अधिक से अधिक पैसा बाहर से लाने की कोशिश करता हूं। अभी युद्ध से सहित अन्य विभिन्न कारणों से स्टार्टअप फील्ड और अन्य फील्ड में करीब 40 प्रतिशत गिरावट र्दज की गई हैं। इसके चलते हमने बड़ी-बड़ी कंसल्टेंसी कंपनियों को अभी रूक रखा हैं।<br /><strong>-सिद्धार्थ वशिष्ठ ,फाउंडर रिपोर्टस एन्ड इनसाइज बिजनस रिसर्चर </strong></p>
<p><strong>पानी बिजली कोचिंग बड़ी संभावनाएं </strong><br />कोटा में भारी संभावना है। हाड़ौती में पानी, बिजली सहित अन्य व्यवस्था यहां पर हैं। यहां तीन लाख बच्चे आते हैं। इसे टैलेंट में बदलना होगा। यह एक  अपॉर्चुनिटी है। कुछ समय पहले हमारी एसोसिएशन ने हाड़ौती में रोजगार और बिजनेस को लेकर क्या संभावना हैं। साथ ही हाड़ौती के लिए क्या कुछ कर सकते हैंं पर गंभीर चर्चा की। रोजगार बढ़े और अधिक से अधिक से लोग लाभांवित हो इसके लिए क्या करना चाहिए। पैरेंटस यहां पर केवल मेडिकल की शिक्षा प्राप्त करने के लिए भेज रहे हैं। पर हमे कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे बच्चा यहां पर मेडिकल के साथ ही डिजिटल शिक्षा, स्किल डवलपमेंट सहित अन्य फील्ड में भी वहां शिक्षा प्राप्त कर सके। क्यो कि अभी पैरेंटस शहर में बच्चे को डर-डर के यहां पर भेज रहा हैं।<br /><strong>-राजेश गुप्ता , प्रेसिडंट डिवीजनल चैम्बर आॅफ कामर्स</strong></p>
<p><strong>मार्केट और सेल में खुद उतरना पड़ता है </strong><br />मैंने बिजनेस की शुरूआत पापड़ व मंगोड़ी बनाने सहित अन्य कार्य से की जिसमें घर-घर जाकर पापड़ बेचे। फिर शुरूआत में मेरे साथ एक महिला जुड़ी इस तरीके से मेरे साथ महिलाएं जुड़ती गई। अब करीब मेरे पास 80 महिलाएं काम करती हैं। शुरूआत में बिजनेस में लोन लेने के लिए भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ग्राहक भी प्रोडक्ट नहीं खरीदते थे उनको समझना पड़ता था। तब जाकर प्रोडक्ट कि सेल बढ़ी, उसके बाद मैंने लड्डू गोपाल कि पोशाक बनाना शुरू तो उसके बारे में इधर-उधर से जानकारी जुटाई और इस कार्य को आगे बढ़ाया। बहुत सी बार वर्कस को सुविधाएं देने के बाद भी वहां हमारे साथ कार्य नहीं करना चाहता है। तो इस दौरान हमको विभिन्न परेशानी का सामना करना पड़ता हैं।<br /><strong>- भावना करमचंदानी .बिजनस वुमन</strong></p>
<p><strong>सीएसआर फंडिंग का एक हिस्सा स्टार्टअप्स के लिए भी निर्धारित हो</strong><br />स्टार्टअप के लिए इकोसिस्टम भी तेजी से उभर रहा है। सरकार और विभिन्न संस्थाओं के प्रयासों से नवाचार को बढ़ावा मिला है। स्टार्टअप्स को बनाए रखने के लिए बेहतर प्रशिक्षण और उद्योग का एक्सपोजर देना होगा। सीएसआर फंडिंग का एक हिस्सा स्टार्टअप्स के लिए भी निर्धारित होना चाहिए, जिससे उन्हें शुरूआती स्तर पर अवसर मिल सके। सरकार को, उद्योग, निवेशकों, शिक्षण संस्थानों और स्टार्टअप्स से जोड़ने वाला एकीकृत डिजिटल पोर्टल विकसित किया जाना चाहिए, जहाँ अपनी समस्या साझा करें और स्टार्टअप्स के लिए समाधान प्रस्तुत कर सकें।<br /><strong>- आयुष त्यागी, मेंटोर आई स्टार्टअप राजस्थान</strong></p>
<p><strong>फंड राइजर्स के लिए प्रयास ज़रूरी<br /></strong>मैंने पिछले सालों में करीब तीस हजार लोगों को रोजगार दिया साथ ही कई कंपनियों के साथ हम कार्य करते हैं। इसके तहत एमएसएमई संस्था प्राय सरकारी योजनाओं की विभिन्न सूचनाएं सहित अन्य सूचनाएं उद्योगों को उपलब्ध करती हैं। साथ ही विभिन्न सरकारी कार्यालय और उद्योगों केबीच संस्था सेतु का काम करती हैं। साथ ही हमारा प्रयास है कि 18-25 वर्ष तक का बच्चा कोटा शहर में रहकर की कार्य करें। साथ ही एमएसएमई के माध्यम से शॉर्ट टैंक से बातचीत करके शहर के उद्योगों को शॉर्ट टैंक से रिवॉर्ड लेकर आ रहे हैं।<strong><br />-दीपक मेहता , एसएसई एसोसिएशन अध्यक्ष</strong></p>
<p><strong>फंड के लिए विश्वास हासिल करना चुनौती<br /></strong> देखा जाएं तो स्टार्टअप में बेसिकली सबसे ज्यादा समस्या फंडिग की आती है क्योकि एंट्ररप्रेन्योर अभी बिजनेस बिल्ड करना चाहते हैं जिसको लेकर उनको परेशानी का सामना करना पड़ता हैं।साथ ही जो पुरानी कंपनियां है फंडिग के लिए उनको प्राथमिकता मिलती हैं। जो पुराने बिजनेस करने वाले है वहां अपना कार्य का तरीका नहीं बदल पा रहे हैं। स्टार्टअप को फंड्स के लिए जल्द कोई तैयार नहीं होता। इस क्षेत्र में आप उतर रहे हैं तो मार्केट रिसर्च बहुत जरूरी है। टैलेंट और लिक्विट केपिटल पर भी ध्यान देना पड़ेगा।<strong><br />-दीक्षा दुग्गड़,कंपनी सचिव आईसीएसआई कोटा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 15:29:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>विकसित भारत के लिए राजनाथ सिंह का बड़ा आह्वान, उद्योगों से कहा- बनें इस राष्ट्रीय संकल्प के भागीदार</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विकसित भारत के निर्माण में क्षेत्रीय उद्योगों, नवाचार और आत्मनिर्भरता की अहम भूमिका बताई। उन्होंने कहा कि आर्थिक मजबूती, तकनीकी क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा देश की प्रगति के तीन प्रमुख स्तंभ हैं। गुजरात के उद्योगों और स्टार्टअप्स से राष्ट्रीय विकास, रक्षा विनिर्माण और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rajnath-singhs-big-call-for-developed-india-asked-industries-to/article-158508"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/rajnath-singh1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विकसित भारत को आर्थिक रूप से समृद्ध, प्रौद्योगिकी में सक्षम और सामाजिक रूप से सशक्त देश का संकल्प बताते हुए क्षेत्रीय उद्योगों से इस यात्रा में भागीदार बनने का आह्वान किया है। सिंह ने मंगलवार को वडोदरा में वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन के दौरान उद्योगपतियों, उद्यमियों, युवा नवोन्मेषकों और शिक्षाविदों को संबोधित करते हुए कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने में क्षेत्रीय उद्योगों की भूमिका महत्वपूर्ण है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "विकसित भारत सिर्फ़ आर्थिक विकास का लक्ष्य नहीं है, बल्कि आर्थिक रूप से समृद्ध, तकनीकी रूप से सक्षम और सामाजिक रूप से सशक्त देश बनाने का संकल्प है और क्षेत्रीय उद्योगों को इस यात्रा में भागीदार बनना चाहिए जिससे क्षेत्रीय ताकतों को राष्ट्रीय क्षमताओं में, स्थानीय नवाचारों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में और औद्योगिक विकास को रणनीतिक ताकत में बदला जा सके। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल , केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह और गुजरात सरकार में महिला और बाल विकास मंत्री डॉ. मनीषा वकील भी मौजूद थीं।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि तेज़ी से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए, भारत की आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता और सामूहिक संकल्प आने वाले दशकों में वैश्विक मंच पर उसकी भूमिका तय करेगा। उन्होंने कहा, "इतिहास हमें सिखाता है कि महान देश तीन ज़रूरी स्तंभों पर खड़े होते हैं: आर्थिक ताकत, तकनीकी कौशल, और राष्ट्रीय सुरक्षा ।आर्थिक खुशहाली और टेक्नोलॉजी में तरक्की से देश की सुरक्षा मज़बूत होती है, जबकि सुरक्षित देश वह स्थिरता देता है जिससे उद्योग और नवाचार फलते-फूलते हैं।" उन्होंने सुरक्षित सीमा और मज़बूत अर्थव्यवस्था वाला देश बनाने के लिए बेहतर सहयोग की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।</p>
<p>राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र का विकास सिर्फ़ हथियारों और प्रौद्योगिकी तक ही सीमित नहीं है, यह एक बड़े आर्थिक इकोसिस्टम को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि भारत तेज़ी से विनिर्माण और निर्यात में एक अहम देश के तौर पर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी प्लेटफॉर्म की सफलता, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी, और नवोन्मेषकों तथा स्टार्ट-अप के जोश ने मिलकर देश में एक मज़बूत रक्षा इकोसिस्टम बनाने में योगदान दिया है। </p>
<p>रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता का मतलब अलग-थलग होना नहीं है, इसका मतलब है एक ऐसा देश जो अपने पैरों पर मज़बूती से खड़ा हो और दुनिया के साथ एक बराबर के साझीदार के तौर पर जुड़े। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को पाने में गुजरात की अहम भूमिका है क्योंकि राज्य के पास एक मजबूत औद्योगिक आधार, कुशल कार्यबल और उद्यमिता की भावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 17:21:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>डेटा ट्रांसमिशन में मिली चीन को बड़ी कामयाबी, नया संचार उपग्रह सफलतापूर्वक लॉन्च</title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने हैनान के वेनचांग स्पेस लॉन्च साइट से संशोधित लॉन्ग मार्च-7 रॉकेट के जरिए एक नया संचार प्रौद्योगिकी परीक्षण उपग्रह सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया। यह उपग्रह मुख्य रूप से सैटेलाइट संचार, रेडियो-टीवी प्रसारण, डेटा ट्रांसमिशन सेवाओं और संबंधित तकनीकी परीक्षणों के लिए उपयोग किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-gets-great-success-in-data-transmission-launches-new-communication/article-157853"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/018.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने मंगलवार को हैनान प्रांत में वेनचांग अंतरिक्ष प्रक्षेपण स्थल से एक नया संचार प्रौद्योगिकी परीक्षण उपग्रह अंतरिक्ष में भेजा। स्थानीय मीडिया के अनुसार, लॉन्ग मार्च-7 रॉकेट के एक संशोधित संस्करण के जरिए प्रक्षेपित किया गया यह उपग्रह सफलतापूर्वक अपनी कक्षा में प्रवेश कर गया है।</p>
<p>इस उपग्रह का उपयोग मुख्य रूप से उपग्रह संचार, रेडियो व टेलीविजन प्रसारण और 'डेटा ट्रांसमिशन' जैसी सेवाओं के साथ-साथ संबंधित प्रौद्योगिकी परीक्षण के लिए किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 15:10:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बिहार में खरीफ महाभियान-2026 का आगाज: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिखाई किसान जागरूकता वाहनों को हरी झंडी; योजनाओं, तकनीक और अनुदान की जानकारी गांव-गांव पहुंचेगी</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में शारदीय (खरीफ) महाभियान-2026 का शुभारंभ किया। उन्होंने किसान जागरूकता और कृषि ज्ञान वाहनों को हरी झंडी दिखाई। यह वाहन किसानों को डिजिटल क्रॉप सर्वे, अनुदानित योजनाओं, उन्नत तकनीकों और फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक कर उनकी आय बढ़ाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/kharif-maha-abhiyan-2026-started-in-bihar-chief-minister-samrat-choudhary/article-156965"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/samrat1.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को 01 अणे मार्ग से किसान जागरूकता वाहनों को हरी झंडी दिखाकर शारदीय (खरीफ) महाभियान-2026 का शुभारंभ किया।श्री चौधरी ने इस दौरान शारदीय (खरीफ) महाभियान-2026 से संबंधित दो कृषि ज्ञान वाहन सहित सभी जिलों के लिए किसान जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सीएम चौधरी ने बताया कि किसान जागरूकता वाहन द्वारा किसानों को खरीफ मौसम से संबंधित सभी योजनाओं की जानकारी देते हुए उन्हें जागरूक किया जाएगा। किसानों को खरीफ फसलों की तकनीकी जानकारी दी जायेगी। उन्होंने कहा कि शारदीय (खरीफ) मौसम में कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं तथा खरीफ में अनुदानित दर पर उपादान वितरण की जानकारी दी जायेगी। उन्होंने कहा कि किसानों का आय बढ़ाने, डिजिटल क्रॉप सर्वे / फार्मर रजिस्ट्री के बारे में अवगत कराने के साथ-साथ कृषि उपकरण की भी जानकारी दी जायेगी।</p>
<p>सीएम चौधरी ने बताया कि अभियान के दौरान प्रशिक्षण एवं विस्तार सेवाओं के बारे में किसानों को अवगत कराया जायेगा। साथ ही खेत बचाओ अभियान, प्रकृति तथा संतुलित उर्वरक की जानकारी एवं फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति किसानों को जागरुक किया जायेगा। कार्यक्रम में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ.वीरेन्द्र प्रसाद यादव, पटना प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक जितेन्द्र राणा, कृषि विभाग के निदेशक सौरभ सुमन यादव, निदेशक, उद्यान अभिषेक कुमार सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 18:47:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मसूद पेज़ेशकियन का ईरान के रक्षा ढांचे को आधुनिक बनाने का आग्रह, चेतावनी देते हुए कहा- शत्रु ने हासिल की नई तकनीकें और उपकरण</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने सैन्य कमांडरों से रक्षा ढांचे को आधुनिक बनाने और तकनीकी बढ़त हासिल करने का आह्वान किया। उन्होंने चेतावनी दी कि खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी मौजूदगी सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है। पेज़ेशकियन ने सेना को राजनीति से दूर रहकर राष्ट्रीय हितों के प्रति प्रतिबद्ध रहने के लिए सराहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/masoud-pezeshkian-urges-to-modernize-irans-defense-structure-warns-that/article-155064"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/masood.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने देश के रक्षा ढांचे को आधुनिक बनाने का आह्वान किया है और यह चेतावनी भी दी कि शत्रु ने नई तकनीकें और उपकरण हासिल कर लिए हैं। उन्होंने सैन्य कमांडरों को संबोधित करते हुए कहा कि इस क्षेत्र के देशों ने यह निष्कर्ष निकाल लिया है कि खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सेना की मौजूदगी 'उनकी स्थायी सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है और सुरक्षा के लिए अमेरिका पर भरोसा करना एक अवास्तविक और अप्रभावी विचार रहा है'।</p>
<p>ईरान के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, पेज़ेशकियन ने ईरान के रक्षा ढांचे को आधुनिक बनाने का भी आह्वान किया और चेतावनी दी कि शत्रु ने नई तकनीकें और उपकरण हासिल कर लिए हैं। बयान में कहा गया कि सशस्त्र बलों को विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिक केंद्रों और ज्ञान-आधारित कंपनियों के अधिक उपयोग के माध्यम से 'तकनीकी बढ़त हासिल करने और रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने' का प्रयास करना चाहिए।</p>
<p>पेज़ेशकियन ने 'पेशेवर कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्धता और राजनीतिक एवं दलीय मुद्दों से दूर रहने' के लिए सेना का आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय हितों पर आधारित यह पेशेवर और जिम्मेदारी भरा दृष्टिकोण देश और व्यवस्था के लिए एक मूल्यवान संपत्ति है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 18:38:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान में दुर्लभ खनिजों का महाभंडार: सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स बनेगा देश की सामरिक सुरक्षा का नया केंद्र</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिमी राजस्थान के बालोतरा स्थित सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में रेयर अर्थ एलिमेंट्स और क्रिटिकल रेयर मेटल्स के विशाल भंडार की पुष्टि हुई है। 750 वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र से रक्षा, परमाणु ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कच्चा माल मिलेगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने परियोजना के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/balotras-sivana-ring-complex-will-become-the-new-center-of/article-154867"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(2)71.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पश्चिमी राजस्थान का बालोतरा स्थित सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स देश की सामरिक, औद्योगिक और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रहा है। यहां रेयर अर्थ एलिमेंट्स, हैवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स और क्रिटिकल रेयर मेटल्स के विशाल भंडार मिलने से भारत को रक्षा, परमाणु ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और हाईटेक उद्योगों के लिए जरूरी कच्चा माल उपलब्ध हो सकेगा।</p>
<p>केन्द्रीय खान मंत्रालय की टेक्निकल कम कॉस्ट कमेटियों की संयुक्त बैठक में सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स के तीन ब्लॉक्स में दुर्लभ खनिजों के बड़े भंडार होने की पुष्टि की गई है। इन ब्लॉक्स के तकनीकी मूल्यांकन का कार्य तीन कंपनियों को आवंटित किया गया है। करीब 750 वर्ग किलोमीटर में फैले इस ज्वालामुखीय क्षेत्र के सर्वेक्षण में नियोबियम, जिरकोनियम और हाफनियम जैसे महत्वपूर्ण रेयर अर्थ एलिमेंट्स पाए गए हैं। इन खनिजों का उपयोग एयरोस्पेस इंजनों के सुपरअलॉय, सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट, चिकित्सा उपकरणों और वैज्ञानिक अनुसंधान में किया जाता है।</p>
<p>इसके अलावा परमाणु रिएक्टर, इलेक्ट्रिक कार, मिसाइल तकनीक, रोबोटिक्स, माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक्स और रासायनिक प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में भी इन दुर्लभ खनिजों की बड़ी भूमिका है। विशेषज्ञों के अनुसार ये खनिज देश की सामरिक सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।</p>
<p>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स और सिवाना ग्रेनाइट क्षेत्र में रेयर अर्थ एवं हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स की उपलब्धता राजस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने अधिकारियों को परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने तथा केंद्र सरकार के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p>राज्य सरकार दुर्लभ खनिजों के अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए रेयर अर्थ एक्सीलेंस सेंटर की स्थापना भी कर रही है। इसके लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टरेट फॉर एक्सप्लोरेशन एंड रिसर्च, आईआईटी हैदराबाद और आईआईटी आईएसएम धनबाद जैसे संस्थानों के साथ साझेदारी की जा रही है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (एनसीएमएम) शुरू किया है। इस मिशन के तहत ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए रणनीतिक खनिजों की खोज और विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 May 2026 17:14:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ब्लड सप्लाई रुकने से पैर कटने की नौबत, जयपुर के डॉक्टरों ने सर्जरी कर बचाई जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के मणिपाल हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने एंडोवेस्कुलर तकनीक से जटिल वैस्कुलर सर्जरी कर मरीज खातुम बानू का पैर कटने से बचा लिया। ब्लड सप्लाई रुकने से पैर की उंगलियां काली पड़ चुकी थीं। वैस्कुलर सर्जन डॉ. गोविन्द प्रसाद दुबे की टीम ने एंजियोप्लास्टी कर ब्लॉकेज हटाए और रक्त संचार बहाल किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/due-to-stoppage-of-blood-supply-doctors-of-jaipur-saved/article-154665"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/manipal.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर के सीकर रोड स्थित मणिपाल हॉस्पिटल जयपुर में डॉक्टरों ने एक जटिल वैस्कुलर सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर मरीज का पैर बचाने में सफलता हासिल की। खातुम बानू को अचानक लेफ्ट पैर में ब्लड सप्लाई रुकने के कारण तेज दर्द हो रहा था और पैर की उंगलियां नीली व काली पड़ने लगी थीं। यह स्थिति क्रिटिकल लिम्ब इस्कीमिया का संकेत थी। मरीज को इमरजेंसी में भर्ती कर तुरंत सी टी एंजियोग्राफी जांच की गई, जिसमें पैर बचने की संभावना बेहद कम बताई गई। इसके बाद वैस्कुलर सर्जन डॉ. गोविन्द प्रसाद दुबे की टीम ने एंडोवेस्कुलर तकनीक से उपचार शुरू किया।</p>
<p>पहले ब्लॉकेज हटाने के लिए लिसिस प्रक्रिया की गई और अगले दिन एंजियोप्लास्टी कर ब्लड सप्लाई बहाल कर दी गई। डॉक्टरों के अनुसार अब मरीज स्वस्थ हैं, दर्द में राहत है और वह सामान्य रूप से चल पा रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 18:31:48 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>राघव चड्ढा की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई: आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा, भ्रामक AI कंटेंट गंभीर विषय</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट ने भाजपा सांसद राघव चड्ढा की डीपफेक वीडियो और आपत्तिजनक पोस्ट हटाने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पार्टी बदलने पर राजनीतिक आलोचना जायज है, लेकिन फर्जी आवाज और भ्रामक एआई (AI) कंटेंट बेहद गंभीर विषय है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/hearing-in-delhi-high-court-on-raghav-chadhas-petition-criticism/article-154601"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/raghav-chadda.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट में बीजेपी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की उस याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित डीपफेक वीडियो, मॉर्फ्ड तस्वीरों और आपत्तिजनक पोस्ट हटाने की मांग की थी। राघव चड्ढा का कहना है कि एआई तकनीक के जरिए उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।</p>
<p>सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी नेता के राजनीतिक फैसले की आलोचना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी बदलने के फैसले पर व्यंग्य या आलोचना को सीधे पर्सनालिटी राइट्स का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। हालांकि, अदालत ने फर्जी वीडियो,नकली आवाज और भ्रामक एआई कंटेंट को गंभीर विषय बताया। अदालत ने फिलहाल मामले में फैसला सुरक्षित रखा है। इस याचिका में अज्ञात सोशल मीडिया अकाउंट्स और प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/hearing-in-delhi-high-court-on-raghav-chadhas-petition-criticism/article-154601</link>
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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 17:48:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला ने की मोदी से मुलाकात, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोम में इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, सांस्कृतिक संबंधों के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), महत्वपूर्ण खनिज, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर अहम बातचीत हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/italian-president-sergio-mattarella-met-modi-and-discussed-various-aspects/article-154492"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/italy.png" alt=""></a><br /><p>रोम। इटली की दो दिन की यात्रा पर गये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को यहां इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के बारे में बातचीत की। उन्होंने कहा ,"मैंने रोम में राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला से मुलाकात की। हमने भारत और इटली के बीच मित्रता से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की, जिसमें व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक संबंध शामिल हैं।</p>
<p>हमने इस बारे में बात की कि हमारे देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता, महत्वपूर्ण खनिज, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रो में सहयोग कैसे बढा सकते हैं। "राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद मोदी इटली की राष्ट्रपति जॉर्जिया मेलोनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके बाद उनका स्वदेश लौटने का कार्यक्रम है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 18:34:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजनाथ सिंह ने की वियतनाम के राष्ट्रपति से मुलाकात, हिन्द-प्रशांत में स्थिरता और नौवहन की स्वतंत्रता की जताई प्रतिबद्धता</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वियतनाम के रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ हनोई में द्विपक्षीय बैठक की। दोनों देशों ने AI और क्वांटम प्रौद्योगिकी पर समझौते किए। साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, सैन्य प्रशिक्षण और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/rajnath-singh-met-the-president-of-vietnam-expressed-commitment-to/article-154357"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rajnath-singh1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और वियतनाम ने हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को वियतनाम की राजधानी हनोई में उप प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों मंत्रियों ने वर्चुअल माध्यम से वियतनाम के वायु सेना अधिकारी महाविद्यालय में भाषा प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। भारत एवं वियतनाम ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। रक्षा मंत्री ने न्हा त्रांग स्थित दूरसंचार विश्वविद्यालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रयोगशाला की स्थापना की घोषणा की।</p>
<p>रक्षा मंत्रालय ने बताया कि दोनों मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी की समीक्षा की और समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग, प्रशिक्षण एवं क्षेत्रीय स्थिरता में सहयोग को और गहरा करने के उपायों पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने पारस्परिक हितों से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा, संरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने सैन्य प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग सहयोग, समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण, संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना, साइबर सुरक्षा तथा उच्च स्तरीय आदान-प्रदान सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने नियमित संवाद, संयुक्त अभ्यासों और विनिमय कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों देशों की रक्षा सेनाओं के बीच सहयोग को बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने वियतनाम के साथ भारत की उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के ढांचे के अंतर्गत वियतनाम के रक्षा आधुनिकीकरण और क्षमता वृद्धि पहलों के समर्थन में भारत के संकल्प को पुनः व्यक्त किया।जनरल फान वान जियांग ने भारत के निरंतर समर्थन की सराहना की और दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक मित्रता तथा बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 16:04:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चंद्रयान-3 के &quot;हॉप&quot; प्रयोग ने चंद्रमा के छिपे रहस्यों को किया उजागर, वैज्ञानिकों को दक्षिणी ध्रुव पर मिली 'रेगोलिथ हेटेरोजेनिटी'</title>
                                    <description><![CDATA[इसरो के चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर द्वारा किए गए 'हॉप' प्रयोग से चंद्रमा की सतह (लूनर रेगोलिथ) की जटिल संरचना और तापीय गुणों का खुलासा हुआ है। चास्टे (ChaSTE) उपकरण के विश्लेषण से पता चला है कि चांद की ऊपरी परत अत्यधिक छिद्रयुक्त और चिपचिपी है, जो भविष्य के मानव आवास और जल-बर्फ खोज के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/chandrayaan-3s-hop-experiment-exposed-the-hidden-secrets-of-the-moon/article-154352"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/isro-harikota.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। भारत के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर द्वारा किए गए 'हॉप' प्रयोग ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव से जुड़े कई छिपे रहस्यों का खुलासा किया है। वैज्ञानिकों ने इस प्रयोग के जरिए चंद्र सतह की रेगोलिथ विषमता (रेगोलिथ हेटेरोजेनिटी) का पता लगाया है, जो भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन निष्कर्षों से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में सतही अभियानों को लेकर नई जानकारी मिली है। वैज्ञानिकों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर सतह की विविधता को समझना भविष्य में चंद्रमा पर वैज्ञानिक आधार और आवास निर्माण की योजनाओं के लिए आवश्यक है। यह अध्ययन इस प्रकार का पहला अनूठा उदाहरण है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतरा था। करीब 10 पृथ्वी दिवस तक चंद्र सतह, निकट-सतही प्लाज्मा और भू-कंपनों से जुड़े प्रयोग करने के बाद, दो सितंबर 2023 को लैंडर ने बचा हुआ ईंधन इस्तेमाल कर 'हॉप' प्रयोग किया था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने मंगलवार को कहा कि यह 'हॉप' भविष्य में चंद्रमा से नमूने पृथ्वी पर लाने वाले अभियानों के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी क्षमता साबित हुआ है। इसरो ने कहा कि जिसे सामान्य तौर पर 'चंद्र मिट्टी' कहा जाता है, उसका सही वैज्ञानिक नाम 'लूनर रेगोलिथ' है। यह दरअसल चट्टानों के टूटे हुए अत्यंत महीन, नुकीले और कांच जैसे कणों से बना होता है, जो बेहद खुरदरे होते हैं और स्थैतिक विद्युत की तरह हर चीज से चिपक जाते हैं। इसरो के अनुसार चंद्र रेगोलिथ के तापीय और भौतिक गुणों को समझना वैज्ञानिक और तकनीकी दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके ताप-भौतिक गुण यह समझने में मदद करते हैं कि चंद्रमा सूर्य से प्राप्त ऊष्मा को किस प्रकार अवशोषित और अंतरिक्ष में विकिरत करता है।</p>
<p>इसी उद्देश्य से विक्रम लैंडर पर 'चंद्रा सरफेस थर्मोफिजिकल एक्सपेरिमेंट' (चास्टे) उपकरण लगाया गया था। यह एक नुकीला, छड़नुमा उपकरण था, जिसमें तापमान मापक सेंसर और अग्रभाग पर हीटर लगाया गया था, जो चंद्र रेगोलिथ में प्रवेश कर उसके गुणों का अध्ययन करता था। लैंडर के 'हॉप' के दौरान चास्टे ने दूसरे स्थान पर भी विश्लेषण किया और यह देखा कि इंजन की गैसों के दबाव से चंद्र सतह किस प्रकार प्रभावित हुई। इससे वैज्ञानिकों को चंद्रमा के 'ट्वाइलाइट' यानी सांध्यकाल के दौरान भी मापन करने का अवसर मिला। इसरो ने कहा कि चंद्रमा पर एक दिन-रात चक्र पृथ्वी के लगभग एक महीने के बराबर होता है। ऐसे में वहां का सांध्यकाल कुछ मिनटों का न होकर कई घंटों तक चलता है, जिससे वैज्ञानिकों को सतह के धीरे-धीरे ठंडा होने की प्रक्रिया का अध्ययन करने का अवसर मिलता है। भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) के वैज्ञानिकों ने इन आंकड़ों के आधार पर चंद्रमा के उच्च अक्षांशीय क्षेत्र की रेगोलिथ परत के ताप-भौतिक और भू-तकनीकी गुणों का विश्लेषण किया।</p>
<p>चास्टे द्वारा दर्ज तापमान और प्रवेश बल के आंकड़ों से संकेत मिला कि लैंडर इंजनों के दोबारा प्रज्वलन से रेगोलिथ की ऊपरी कुछ सेंटीमीटर परत प्रभावित हुई और उसकी ऊपरी मुलायम परत हट गयी। यह परिवर्तन प्रत्यक्ष रूप से चास्टे के मापों में दर्ज हुआ, जिसे अन्यथा देख पाना संभव नहीं था। इसके अलावा, चंद्रयान-2 के ओएचआरसी उच्च-रिजॉल्यूशन आंकड़ों पर आधारित त्रि-आयामी मॉडलिंग से यह भी पता चला कि रेगोलिथ की संरचना अत्यंत जटिल है और उसके भू-तकनीकी तथा तापीय गुण विशिष्ट हैं। अध्ययन में पाया गया कि रेगोलिथ की ऊपरी दो से छह सेंटीमीटर परत अत्यधिक चिपचिपी और अत्यधिक छिद्रयुक्त है, जो तापीय कंबल की तरह कार्य कर सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह परत उप-सतह में जल-बर्फ अणुओं के संरक्षण तथा भविष्य में चंद्रमा पर वैज्ञानिक केंद्र और आवास निर्माण के लिए उपयुक्त स्थलों के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 15:03:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत और नॉर्वे के बीच ‘ग्रीन स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ की नई शुरुआत: 9 समझौतों पर हुए हस्ताक्षर, तीन महत्वपूर्ण पहलों की भी घोषणा </title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नॉर्वे के पीएम जोनास गाहर स्टोरे के बीच द्विपक्षीय वार्ता के बाद 9 समझौतों और 3 पहलों की घोषणा की गई। दोनों देशों ने 'ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' को अपनाया है, जिसके तहत अंतरिक्ष, स्वास्थ्य, डिजिटल विकास, समुद्री सहयोग और हरित प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/new-beginning-of-green-strategic-partnership-between-india-and-norway/article-154320"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modii.png" alt=""></a><br /><p>ओस्लो। भारत और नॉर्वे ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देते हुए अपने संबंधों को "ग्रीन स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप" के स्तर तक उन्नत करने के साथ-साथ समुद्री सहयोग, हरित प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य, डिजिटल विकास और वैज्ञानिक अनुसंधान सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से नौ समझौतों और तीन पहलों की घोषणा की है। दोनों देशों ने "ग्रीन स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप" के संबंध में एक संयुक्त वक्तव्य को अपनाया।</p>
<p>नार्वे की दो दिन की यात्रा पर गये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे के बीच सोमवार को द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने समुद्री सहयोग, हरित प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य, डिजिटल विकास और वैज्ञानिक अनुसंधान सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से अनेक समझौतों और पहलों की घोषणा की। नार्वे ने भारत की हिन्द प्रशांत महासागर पहल में शामिल होने की घोषणा की, जबकि भारत वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले "नॉर शिपिंग" कार्यक्रम में भारतीय मंडप के साथ भाग लेगा।</p>
<p>दोनों देशों के बीच सरकार-से-सरकार के स्तर पर तीन प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और नार्वें की अंतरिक्ष एजेंसी के बीच बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग और अन्वेषण में सहयोग के लिए रूपरेखा समझौता, भारत और नॉर्वे के विदेश मंत्रालयों के बीच डिजिटल विकास साझेदारी पर समझौता ज्ञापन तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग के लिए नॉर्वे के स्वास्थ्य एवं देखभाल सेवा मंत्रालय और भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के बीच समझौता शामिल है।</p>
<p>व्यापार और संस्थागत सहयोग के तहत भी कई महत्वपूर्ण समझौतों को अंतिम रूप दिया गया। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और नॉर्वेजियन जियोटेक्निकल संस्थान के बीच सुरंग निर्माण, ढलान स्थिरता और क्षमता निर्माण से संबंधित विशेष परामर्श सेवाओं के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा भारत के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग और नॉर्वे की अनुसंधान परिषद के बीच प्रौद्योगिकी सहयोग पर समझौता हुआ।</p>
<p>वैज्ञानिक अनुसंधान और हरित प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत की वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद और नॉर्वे की सिंटेफ संस्था के बीच वर्ष 2026 से 2029 तक की गतिविधियों के क्रियान्वयन के लिए सहयोग समझौता किया गया। दोनों पक्षों ने समुद्री ऊर्जा, जिसमें अपतटीय पवन ऊर्जा भी शामिल है, पर संयुक्त कार्य कार्यक्रम के लिए एक परियोजना-विशिष्ट कार्यान्वयन समझौते पर भी हस्ताक्षर किए।</p>
<p>इसके अलावा वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद तथा वैज्ञानिक एवं नवाचार अनुसंधान अकादमी ने नॉर्वे के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के साथ हरित परिवर्तन के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सहयोग पर संयुक्त आशय घोषणा को अपनाया। हैदराबाद स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान और नॉर्वे की एमराल्ड जियोमॉडलिंग एएस के बीच वैज्ञानिक और व्यावसायिक सहयोग के लिए भी एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इन घोषणाओं और समझौतों को भारत और नॉर्वे के बीच हरित विकास, समुद्री सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान आधारित साझेदारी को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 14:31:25 +0530</pubDate>
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