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                <title>Inclusive Governance - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पीएम मोदी ने जगजीवन राम को अर्पित की श्रद्धांजलि : समानता तथा सामाजिक न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को किया याद, बोले-राष्ट्र के लिए उनका अमूल्य योगदान हमेशा याद रखा जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व उप-प्रधानमंत्री जगजीवन राम की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। 'बाबूजी' के नाम से प्रसिद्ध जगजीवन राम को सामाजिक न्याय और समानता के प्रति उनके अटूट समर्पण के लिए याद किया गया। राष्ट्र निर्माण, रक्षा और कृषि क्षेत्रों में उनके अमूल्य योगदान को पीएम ने समावेशी शासन की प्रेरणा बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pm-modi-paid-tribute-to-jagjivan-ram-and-remembered-his/article-149162"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/modi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और समानता तथा सामाजिक न्याय के प्रति उनकी जीवनभर की प्रतिबद्धता को याद किया। प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम को उनकी जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि। उन्होंने अपना जीवन समानता और सामाजिक न्याय के उद्देश्य के लिए समर्पित कर दिया। राष्ट्र के लिए उनका अमूल्य योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।"</p>
<p>वर्ष 1908 में जन्मे जगजीवन राम को लोग प्यार से 'बाबूजी' कहकर पुकारते थे। उन्होंने न केवल स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, आजादी के बाद भी जीवन भर सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष करते रहे। उन्होंने आजादी के बाद रक्षा, कृषि और श्रम सहित कई प्रमुख मंत्रालय संभाले और उप-प्रधानमंत्री के रूप में भी काम किया। अपने कार्यों से वह जनसेवा और सुधार की एक स्थायी विरासत छोड़ गये। उन्होंने कहा कि हाशिए पर रहने वाले समुदायों के अधिकारों की वकालत के लिए जाने जाने वाले जगजीवन राम ने सामाजिक असमानताओं को दूर करने और समावेशी शासन को मजबूत करने के लिए अथक प्रयास किया। नीति निर्धारण और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को राजनीतिक हलकों में व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी की श्रद्धांजलि भारत के लोकतांत्रिक और सामाजिक ढांचे पर जगजीवन राम के स्थायी प्रभाव को दर्शाती है। इस अवसर पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के नेताओं ने भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की और समाज में समानता, न्याय और सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने में बाबूजी की भूमिका को याद किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 15:08:11 +0530</pubDate>
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                <title>प्रधानमंत्री बालेन शाह का बड़ा फ़ैसला : दलितों पर सदियों से हो रहे अत्याचार के लिए मांगेंगे माफ़ी, सामाजिक संगठनों ने की भेदभाव-विरोधी कानूनों को सख्ती से लागू करने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने दलित समुदाय पर सदियों से हुए अत्याचारों के लिए औपचारिक माफी का ऐलान किया है। सरकार की 100-सूत्रीय कार्ययोजना के तहत 15 दिनों में विशेष सुधार कार्यक्रम शुरू होंगे। सामाजिक संगठनों ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया है, हालांकि जाति-आधारित भेदभाव को जड़ से मिटाने के लिए अभी सख्त कानूनी क्रियान्वयन की चुनौती बरकरार है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/prime-minister-balen-shahs-big-decision-will-apologize-for-centuries/article-149015"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/balen-shah.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। नेपाल में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के देश के दलितों पर सदियों से हो रहे अत्याचार को लेकर माफी मांगने के ऐलान का आम लोगों, सामाजिक संगठनों ने दिल खोल कर स्वागत किया है। गौरतलब है कि नेपाल में दलित समुदाय को दशकों से देश की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संरचनाओं से व्यवस्थित रूप से बाहर रखा गया है। उनको पीढ़ियों से, सामाजिक जगहों और सरकारी तंत्र, दोनों में ही गंभीर अन्याय और अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ा है।</p>
<p>सदियों से चले आ रहे इस उत्पीड़न को स्वीकार करते हुए, प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली नयी सरकार ने अपने 100-सूत्रीय कार्ययोजना के हिस्से के तौर पर, दलितों और ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर पड़े समुदायों से औपचारिक रूप से माफी मांगने और 15 दिनों के भीतर उनके उत्थान के लिए विशेष सुधार कार्यक्रमों की घोषणा करने का फैसला किया। उनके इस ऐलान का दलित समुदाय के नेताओं, समाज सुधार के लिए काम करने वाले संगठनों ने खुशी का इजहार किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि यह सही दिशा में उठाया गया कदम है लेकिन यह अपने आप में पर्याप्त नहीं है।</p>
<p>स्थानीय मीडिया काठमांडू पोस्ट ने लिखा है कि यह एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण क्षण है। फिर भी, वास्तविक बदलाव लाकर इस माफी को सार्थक बनाना, कहने में जितना आसान है, करने में उतना ही मुश्किल है। उल्लेखनीय है कि नेपाल ने 1963 में एक नए राष्ट्रीय कानून के ज़रिए छुआछूत को खत्म कर दिया था, लेकिन इसके कमज़ोर क्रियान्वयन के कारण हाशिए पर पड़े समूहों के साथ भेदभाव जारी रहा। बाद में, 1990 के संविधान ने छुआछूत को फिर से गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध घोषित किया। साल 2006 की अंतरिम संसद ने भी नेपाल को छुआछूत-मुक्त देश घोषित किया।</p>
<p>इसके अलावा, 2011 में, सरकार ने 'जाति-आधारित भेदभाव और छुआछूत अधिनियम' पेश किया। 2015 के संविधान ने अनुच्छेद 40 के तहत उनके अधिकारों की गारंटी दी, जिसमें सभी सरकारी निकायों में उनके प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के साथ-साथ कानूनी सुरक्षा के प्रावधान भी शामिल थे। ये कानून महत्वपूर्ण और आवश्यक थे। फिर भी, इन कानूनी सुधारों के बावजूद, दलितों की स्थिति में बड़े पैमाने पर कोई बदलाव नहीं आया।</p>
<p>अखबार ने यह भी लिखा है कि यह बेहद खराब स्थिति सरकार से सिर्फ़ एक दिखावटी कदम से कहीं ज़्यादा की मांग करती है—खासकर उस सरकार से जिसे हाल के चुनावों में सुधारों के लिए लोगों का ज़बरदस्त समर्थन मिला है। सरकार के पास हाशिए पर पड़े समूहों का जीवन बेहतर बनाने की बहुत बड़ी ताकत है। इसलिए, भेदभाव-विरोधी कानूनों को सख्ती से लागू करना, हाशिए पर पड़े समूहों की शिक्षा और रोज़गार के बाज़ारों तक पहुँच बढ़ाना, और जाति-आधारित हिंसा के लिए ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराना बहुत ज़रूरी है। इसका मतलब यह भी है कि राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाए। लेकिन, बदकिस्मती से, मौजूदा सरकार के मंत्रिमंडल में भी सिर्फ़ एक दलित सदस्य है और संसद में सिर्फ़ 17 दलित सांसद हैं, जबकि 134 सांसद 'खास' समुदाय से हैं, जो ऐतिहासिक रूप से एक दबदबा रखने वाला समूह रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 18:42:04 +0530</pubDate>
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