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                <title>होर्मुज में फंसे नाविकों को निकालेगा संयुक्त राष्ट्र : रुबियो ने टोल शुल्क के खिलाफ दी चेतावनी, अमेरिका और ईरान के बीच अब भी मतभेद</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद खाड़ी क्षेत्र में फंसे 11,000 से अधिक नाविकों को निकालने के लिए संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी IMO ने बड़ा अभियान शुरू किया है। इस बीच परमाणु निरीक्षण और समझौते की शर्तों पर अमेरिका-ईरान में मतभेद बरकरार हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर किसी भी तरह के टोल शुल्क का कड़ा विरोध किया।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/united-nations-will-rescue-sailors-stranded-in-hormuz-rubio-warns/article-157908"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-600-px)-(6)1.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लंदन। संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच हुए युद्ध के कारण खाड़ी क्षेत्र में फंसे 11,000 से अधिक नाविकों को निकालने की तैयारी कर रहा है। आईएमओ के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगुएज ने कहा कि यह बड़े पैमाने का अभियान ईरान, ओमान, अमेरिका, क्षेत्र के अन्य तटीय देशों और समुद्री उद्योग के सहयोग से चलाया जायेगा। डोमिंगुएज ने कहा, हमने आवश्यक सुरक्षा गारंटी प्राप्त कर ली हैं और इन अभियानों के समर्थन में सुरक्षित नौवहन की परिस्थितियों का पूरी तरह सत्यापन किया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए पिछले सप्ताह एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर किये गये थे, लेकिन समझौता ज्ञापन (एमओयू) के विभिन्न प्रावधानों को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच अब भी मतभेद बने हुए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अमेरिका का कहना है कि इस समझौते में यह गारंटी शामिल है कि ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम का निरीक्षण अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) करेगी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप<span>  </span>ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर लिखा, ईरान ने भविष्य में लंबे समय तक सर्वोच्च स्तर के परमाणु निरीक्षणों पर पूरी तरह सहमति व्यक्त कर दी है। इससे परमाणु ईमानदारी सुनिश्चित होगी। ट्रंप की इस पोस्ट से कुछ समय पहले ईरान ने कहा था कि पिछले वर्ष अमेरिका और इजरायल की ओर से बमबारी किये गये परमाणु स्थलों का निरीक्षण संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था नहीं कर पायेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">स्इसके जवाब में एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा, ईरानियों ने अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम के अवशेषों के सशक्त आईएईए निरीक्षण पर सहमति दी है। ईरानी शासन अपने घरेलू लोगों के लिए जो कहना चाहे, कह सकता है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने मंगलवार को पाकिस्तान यात्रा के दौरान कहा है कि ईरान Þकिसी भी परिस्थिति में अपनी रक्षा क्षमताओं पर किसी के साथ बातचीत नहीं करेगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पेजेशकियन के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बैलिस्टिक मिसाइलों पर कोई चर्चा नहीं हुई और यह मुद्दा'बातचीत की मेज पर था ही नहीं'।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने मंगलवार को संयुक्त अरब अमीरात से अपनी खाड़ी यात्रा शुरू की। वह कुवैत और बहरीन भी जायेंगे, जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं और ईरान के साथ हुए समझौते पर चर्चा करेंगे। <span> </span>रुबियो ने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य<span>  </span>से गुजरने वाले जहाजों पर कोई भी देश शुल्क नहीं लगा सकता। ईरान इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने की वकालत कर रहा है। उन्होंने कहा, यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है। किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर टोल या शुल्क लगाने की अनुमति नहीं है। यह मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कानून है। उन्होंने यह भी कहा , मुझे नहीं लगता कि इस मुद्दे पर हमें यहां किसी को समझाने की जरूरत है। मेरा मानना है कि इस क्षेत्र के सभी देश हमारे दृष्टिकोण से सहमत होंगे।Þ फंसे हुए नाविकों की निकासी इस बात पर निर्भर करती है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहे। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आईएमओ प्रमुख डोमिगुएज ने कहा कि नाविकों की सहायता के लिए हुआ यह समझौता'समुद्री सुरक्षा की बहाली और नागरिक जहाजरानी पर हो रहे अस्वीकार्य हमलों को समाप्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। उन्होंने कहा, हजारों निर्दोष नाविकों के महीनों के कष्ट और तनाव तथा पूरी दुनिया पर पड़े नकारात्मक प्रभाव के बाद, मैं अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का बड़े राहत के साथ स्वागत करता हूं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 11:36:50 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका और ईरान शांति समझौते से पटरी पर लौटेगा कोटा का व्यापार-उद्योग</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज स्ट्रेट खुलने की सम्भावना से समाप्त हुई आशंका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/us-iran-peace-agreement-set-to-put-kota-s-trade-and-industry-back-on-track/article-157133"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(2)19.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते और होर्मुज स्ट्रेट खुलने की संभावना से उद्योग जगत की आशंका समाप्त हो गई है। इससे अब देश के अन्य राज्यों के साथ ही कोटा का उद्योग-वयापर फिïर से पटरी पर लौटेगा। एक बार फिर से आयात व निर्यात को बढ़ावा मिलने से कोटा स्टोन व मसाला उद्योग को बल मिलेगा। वहीं डीजल पेट्रोल पर्याप्त मात्रा में मिलने से कीमतों में आए उछाल से राहत मिलने की संभावना है।</p>
<p>अमेरिका और ईरान व इजराइल के बीच लम्बे समय तक चले युद्ध ने पूरे देश में हाहाकार मचा दिया था। वहीं युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया गया था। जिससे कोटा समेत अन्य स्थानों से ईरान व अमेरिका को होने वाला निर्यात व वहां से होने वाला आयात सब अटक गया था। यहां तक की पेट्रोलियम गैस व तेल तक की सप्लाई बंद हो गई थी। ऐसे में पूरे देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढऩे के साथ ही एक ओर जहां उद्योग व व्यापार प्रभावित हुआ था। वहीं बाजार में हर वस्तु की कीमत आसमान छूने लगी। खाद्य पदार्थ से लेकर सोने-चांदी तक लोहे व स्टील से लेकर एल्यूमीनियम तक और कैमिकल व फर्टिलाइजर्स तक का उद्योग प्रभावित हुआ। इनकी सप्लाई नहीं होने से कीमतें काफी अधिक बढ़ गई थी। वहीं कोटा से विदेशों को निर्यात होने वाला कोटा स्टोन, मसाला, कैमिकल, धनिया और आटे का निर्यात एक तरह से ठप सा हो गया था। वहीं विदेशों से आने वाला प्लास्टिक सामान से लेकर अन्य आवश्यक वस्तुओं का आयात भी बंद हो गया था। जिससे बाजार में हर वस्तु की कीमतें बढ़ गई थी।वहीं हाल ही में अमेरिका व ईरान के बीच शांति समझौते का डील डन ड्राफ्ट सामने आने के बाद न केवल शेयर मार्केट में उछाल आया है। वरन् व्यापार उद्योग को भी फिर से बूस्टअप मिला है।</p>
<p><strong>उद्योग जगत की आशंका समाप्त, कीमतें होंगी नियंत्रित</strong><br />कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव व होटल फैडरेशन के कोटा संभाग अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट खुलने की संभावना से लम्बे समय से व्यापार उद्योग जगत में बनी आशंका समाप्त होगी। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से आयात व निर्यात अटका हुआ था। कोटा से बड़ी मात्रा में कोटा स्टोन, चावल, धनिया, मसाले व आटे समेत अन्य वस्तुओं का विदेशों को निर्यात होता है। लेकिन होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से यह माल निर्यात नहीं हो रहा है। जहाजों में माल अटका होने से खराब हो गया या वापस लौट आया। जिससे व्यापार व उद्योग जगत को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा था। वहीं कैमिकल व फर्टिलाइजर्स भी कोटा में नहीं आ पा रहा था। लेकिन अब होर्मुज स्ट्रेट खुलने से इन सभी उद्योग व व्यापार से जुड़े व्यापारियों व उद्योगपतियों की आशंका समाप्त हो गई है। साथ ही ये सभी उद्योग फिर से पटरी पर लौट आए़ंगे। पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल-डीजल व गैस मिलने से कीमतें भी नियंत्रित हो जाएंगी।</p>
<p><strong>नुकसान की भरपाई में समय लगेगा</strong><br />दी एसएसआई एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष व उद्योगपति गोविंद राम मित्तल ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से भारत को काफी नुकसान हुआ है। इससे तेल व पेट्रोलियम की सप्लाई बाधित होने के कारण इससे जुड़े सभी उद्योग व व्यापार प्रभावित हुए। आयात निर्यात बंद हो गया था। ऐसे में पेट्रोल-डीजल व कैमिकल से जुड़े उद्योगपतियों ने आशंका के चलते नए उद्योग नहीं लगाए। जिनके लगे हुए उद्योग से उन्हें माल की सप्लाई नहीं हो सकी। उद्योगों में तैयार माल का निर्यात नहीं हो सका था। जिससे हजारों-करोड़ रुपए का नुकसान भारत को उठाना पड़ा। वहीं कोटा में भी तेल की कीमतें बढऩे से महंगाई बढ़ गई। हर व्यक्ति उससे प्रभावित हुआ। अब तक जितना नुकसान हुआ है। उसकी भरपाई करने में ही एक से दो साल का समय लग जाएगा। हालांकि अब होर्मुज स्ट्रेट खुलने की संभावना से उद्योग व व्यापार को एक उम्मीद जगी है। जिस तरह से कैंसर रोग में कीमो थैरेपी काम करती है उसी तरह की राहत मिलने की संभावना है। वहीं इससे ईरान में रोजगार के अवसर खुलने से कोटा व देश से वहां जाने वालों को लाभ होगा।</p>
<p><strong>तेल की पर्याप्त सप्लाई से स्थिति होगी सामान्य</strong><br />कोटा पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष तरूमीत सिंह बेदी ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से सबसे अधिक प्रभाव पेट्रोलियम व तेल पर पड़ा था। लेकिन अब इसके खुलनी की संभावना से स्थिति सामान्य हो जाएगी। जब देश में पर्याप्त मात्रा में तेल व गैस की सप्लाई होने लगेगी तो उद्योगों को पर्याप्त तेल मिल सकेगा। साथ ही तेल की कीमतें बढऩे से प्राइवेट पेट्रोल पम्पों पर तेल महंगा हो गया था। ऐसे में लोग सरकारी पम्पों पर जा रहे थे। वहां तेल की राशनिंग हो रही थी। लेकिन होर्मुज स्ट्रेट खुलने से जब तेल की सप्लाई होने लगेगी तो इससे जुड़ी सभी उद्योग व व्यापार को भी पर्याप्त सप्लाई हो सकेगी। प्राइवेट पम्पों को भी तेल मिलने लगेगा। जिससे वहां भी कीमतें कम हो जाएगी। साथ ही हर वस्तल की कीमत कम होने पर स्थिति सामान्य हो जाएगी। होर्मुज स्ट्रेट से बंद होने से देश के अन्य प्रदेशों के साथ ही इसका असर कोटा पर भी पड़ रहा था। लेकिन अब कोटा में भी सभी सामान्य हो जाएगा।</p>
<p><strong>शिपिंग और बीमा लागत घटने से व्यापार की रफ्तार बढ़ेगी</strong><br />मिडिल ईस्ट में संघर्ष का असर भारत के व्यापार पर भी पड़ा था। मिडिल ईस्ट के देशों को होने वाला निर्यात प्रभावित हुआ था। इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, कपड़ा, खाद्य सामग्री और केमिकल जैसे सेक्टर्स को झटका लगा था। अब हालात सामान्य होने की उम्मीद के साथ निर्यातकों को राहत मिल सकती है। शिपिंग और बीमा लागत घटने से व्यापार की रफ्तार फिर बढ़ सकती है। उद्योग जगत का मानना है कि मिडिल ईस्ट में स्थिरता आने से भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर भी खुलेंगे।<br /><strong>-अनिल मूूंदड़ा, जिलाध्यक्ष कैट कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 14:18:06 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रंप के सहयोगियों के हवाले से खबर, पश्चिमी एशिया में सैन्य कार्रवाई फिर शुरू करने पर विचार कर रहे राष्ट्रपति</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के अड़ियल रुख और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से राष्ट्रपति ट्रंप का धैर्य जवाब दे गया है। कूटनीति विफल होने पर अमेरिका अब लक्षित बमबारी और बड़े सैन्य अभियान पर विचार कर रहा है। ट्रंप की चीन यात्रा से पहले पश्चिमी एशिया में तनाव चरम पर है, जिससे क्षेत्र में युद्ध के बादल फिर मंडराने लगे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/news-quoting-trumps-aides-president-considering-resuming-military-action-in/article-153541"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पश्चिमी एशिया में फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। ट्रम्प के सहयोगियों के हवाले से यह जानकारी दी। ट्रम्प ने कहा कि संघर्ष को सुलझाने के लिए हो रही बातचीत में ईरान के रुख से लगातार निराशा हाथ लगी है और अब वह बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान फिर से शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने से अमेरिकी राष्ट्रपति का धैर्य जवाब दे रहा है और उनका यह भी मानना है कि ईरानी नेतृत्व के भीतर मतभेद हैं।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन के भीतर अब कई समूह बन गए हैं, जिनमें से कुछ बल प्रयोग के पक्ष में हैं और ईरान की स्थिति को कमजोर करने के लिए उस पर लक्षित बमबारी जारी रखने का प्रस्ताव दे रहे हैं, जबकि अन्य समूह संघर्ष को सुलझाने के लिए कूटनीतिक साधनों पर जोर दे रहे हैं।</p>
<p>अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका अमेरिका के लिए एक अलग मुद्दा बनी हुई है। अमेरिकी सरकार को यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान कितनी स्पष्टता से अमेरिका का पक्ष ईरान तक पहुँचा रहा है और वह ईरान के दृष्टिकोण को कितनी निष्पक्षता से बता रहा है। पश्चिमी एशिया संघर्ष में अमेरिका क्या रुख अपनाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है और राष्ट्रपति ट्रम्प की 13 से 15 मई तक प्रस्तावित चीन यात्रा से पहले किसी फैसले की संभावना कम है।</p>
<p>गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किए थे, जिसमें 3,000 से अधिक लोग मारे गए थे। अमेरिका और ईरान ने सात अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा की थी। इसके बाद इस्लामाबाद में हुई वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई और अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 15:28:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अगर होर्मुज में गतिरोध लगातार जारी रहा, तो वैश्विक तेल बाजार में संकट 2027 तक जारी रहेगा: अमीन नासिर</title>
                                    <description><![CDATA[अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य एक महीने में नहीं खुला, तो तेल बाजार 2027 तक सामान्य नहीं होगा। दुनिया पहले ही 1 अरब बैरल तेल खो चुकी है। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच यह मार्ग बंद होने से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/if-the-standoff-in-hormuz-continues-the-crisis-in-the/article-153501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/अमीन-नासिर.png" alt=""></a><br /><p>दोहा। सऊदी अरब की कंपनी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमीन नासिर ने कहा है कि यदि एक महीने के भीतर होर्मुज जलडमरुमध्य में जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू नहीं होती, तो अगले साल तक वैश्विक तेल बाजार सामान्य स्थिति में नहीं लौटेगी। अरामको के पहली तिमाही के परिणामों पर चर्चा करने के लिए आयोजित एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान श्री नासिर ने कहा कि आपूर्ति में व्यवधान जितने लंबे समय तक जारी रहेगा, तेल बाजार को स्थिर होने में उतना ही अधिक समय लगेगा। उन्होंने कहा कि यदि जलडमरुमध्य में गतिरोध जून के मध्य तक बना रहता है, तो यह संकट 2027 तक जारी रह सकता है।</p>
<p>दुनिया की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनी के प्रमुख के अनुसार, उत्पादन या परिवहन की कमी के कारण बाजार पहले ही एक अरब बैरल तेल गंवा चुका है और जब तक यह मार्ग बंद रहेगा, बाजार को हर हफ्ते लगभग 10 करोड़ बैरल तेल का नुकसान होता रहेगा। उन्होंने याद दिलाया कि पहले होर्मुज से प्रतिदिन लगभग 70 जहाज गुजरते थे। फारस की खाड़ी में तेल उत्पादक देशों पर हमलों और ईरान द्वारा होर्मुज को प्रभावी ढंग से बंद करने से उत्पादन और निर्यात पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने से पहले, इस जलमार्ग के माध्यम से प्रतिदिन लगभग दो करोड बैरल तेल बाजार में आता था।</p>
<p>गौरतलब है कि सात अप्रैल को अमेरिका और ईरान ने दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की थी। इसके बाद इस्लामाबाद में हुई वार्ता बेनतीजा रही थी, लेकिन फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक 'एकीकृत प्रस्ताव' के साथ आने का समय देने के लिए युद्धविराम को आगे बढ़ा दिया था। तीन मई को ट्रंप ने होर्मुज में फंसे जहाजों की सहायता के लिए 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' की घोषणा की थी। फिर ट्रंप ने पांच मई को कहा कि उन्होंने यह देखने के लिए थोड़े समय के लिए ऑपरेशन को रोकने का फैसला किया है कि क्या ईरान के साथ शांति समझौता हो सकता है। हालांकि सोमवार को उन्होंने अमेरिकी शांति प्रस्तावों पर ईरान की प्रतिक्रिया को पूरी तरह से 'अस्वीकार्य' बताया।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 11:55:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>क्या फिर शुरू होगा युद्व! ईरान ने खारिज किया अमेरिकी शांति प्रस्ताव, तेहरान ने पेश किया अपना 10-सूत्रीय प्लान, जानें क्या रखी शर्ते?</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को अत्यधिक मांगें बताकर खारिज कर दिया है। तेहरान ने बदले में युद्ध क्षतिपूर्ति, संपत्तियों को मुक्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण की मांग रखी है। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा इसे "अस्वीकार्य" बताने के बाद, खाड़ी में तनाव और बंदरगाहों की नाकाबंदी ने शांति की उम्मीदों को मुश्किल बना दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/will-war-start-again-iran-rejected-american-peace-proposal-tehran/article-153382"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/mojtaba.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरान ने अमेरिका को दिए अपने जवाब में अमेरिकी शांति प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इसका मतलब अमेरिकी सरकार की अत्यधिक मांगों के आगे झुकना होगा। ईरानी समाचार एजेंसी ने पहले बताया था कि अमेरिकी संदेश पर ईरान की प्रतिक्रिया युद्ध समाप्त करने और फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संघर्ष समाधान के लिए अमेरिकी प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया।</p>
<p>प्रेस टीवी के अनुसार, ईरान की प्रतिक्रिया योजना में इस बात पर जोर दिया गया है कि अमेरिका को इस्लामिक गणराज्य को युद्ध क्षतिपूर्ति का भुगतान करना होगा। मई की शुरुआत में ईरानी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि तेहरान को इस्लामिक गणराज्य के नए 14 सूत्री प्रस्ताव के संबंध में पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका से जवाब मिला है। समाचार एजेंसी ने रविवार को बताया कि अमेरिका के साथ बातचीत के लिए ईरान के प्रस्तावों का पाठ, जिसे तेहरान ने वाशिंगटन को भेजकर जवाब दिया था, में प्रतिबंध हटाने, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का पूर्ण नियंत्रण और विदेशों में ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने के प्रावधान शामिल हैं।</p>
<p>28 फरवरी को, अमेरिका और इज़रायल ने ईरान में लक्ष्यों पर हमले शुरू किए, जिसमें 3,000 से अधिक लोग मारे गए। वाशिंगटन और तेहरान ने 8 अप्रैल को दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की। इस्लामाबाद में बाद की बातचीत बेनतीजा रही, शत्रुता के फिर से शुरू होने की कोई खबर नहीं मिली, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी। मध्यस्थ बातचीत के एक नए दौर का आयोजन करने का प्रयास कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 14:05:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दबाव बनाया तो हमेशा के लिए बंद हो जाएगा होर्मुज जलडमरूमध्य : मिसाइल और ड्रोन इकाइयों ने अपने लक्ष्यों को पहले ही कर लिया है लॉक, मौसवी ने कहा- केवल आदेश का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[तेहरान में तनाव चरम पर: ईरान ने चेतावनी दी है कि दबाव या हमले की स्थिति में होर्मुज जलडमरूमध्य स्थायी रूप से बंद किया जा सकता है। आईआरजीसी ने दावा किया कि मिसाइलें, ड्रोन और पनडुब्बियां ‘ट्रिगर-रेडी’ हैं। ईरान ने अमेरिकी ठिकानों और जहाजों को निशाने पर बताते हुए कहा—किसी भी कार्रवाई का करारा जवाब दिया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/if-pressure-is-applied-the-strait-of-hormuz-will-be/article-153351"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/6622-copy42.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तेहरान। होर्मुज जलडमरूमध्य के संबंध में संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के प्रस्ताव को बहरीन एवं अन्य देशों का समर्थन मिलने की रिपोर्टों के बीच ईरानी सैन्य अधिकारियों तथा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्र्स (आईआरजीसी) ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान पर दबाव जारी रहा तो होर्मुज को स्थायी रूप से बंद किया जा सकता है। आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल माजिद मौसवी ने कहा कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन इकाइयों ने अपने लक्ष्यों को पहले ही लॉक कर लिया है और केवल आदेश का इंतजार कर रही हैं। उन्होंने कहा, मिसाइलें और एयरोस्पेस ड्रोन दुश्मन पर लॉक हैं और हम फायरिंग आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी ठिकानों और आक्रामक दुश्मन के जहाज ईरानी हथियारों की जद में हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आईआरजीसी नौसेना कमांडर सईद सियाह-सरानी ने कहा कि यदि इस्लामी गणराज्य ईरान पर हमला होता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य से किसी भी तेल खेप को गुजरने नहीं दिया जाएगा। ईरानी नौसेना प्रमुख शहराम ईरानी ने कहा कि स्वदेशी हल्की पनडुब्बियां पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य में तैनात हैं और ट्रिगर-रेडी स्थिति में हैं। उनके अनुसार ये पनडुब्बियां समुद्र तल पर लंबे समय तक स्थिर रहकर दुश्मन के जहाजों पर नजर रख सकती हैं और आदेश मिलते ही उन्हें निशाना बना सकती हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ईरानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता अबोलफजल शेखार्ची ने भी चेतावनी दी कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने वाले किसी भी देश को निर्णायक जवाब मिलेगा। स्थानीय मीडिया के अनुसार एक अन्य सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका के प्रतिबंध लागू करने वाले देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। आईआरजीसी नौसेना कमान ने कहा कि ईरानी तेल टैंकरों या वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई का जवाब क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और दुश्मन जहाजों पर भारी हमले के रूप में दिया जाएगा। आईआरजीसी ने यह भी दावा किया कि उसके विशेष बलों ने दक्षिणी बंदरगाह जास्क के निकट अमेरिकी विध्वंसक जहाजों पर जवाबी कार्रवाई की थी। इसमें एंटी-शिप बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ विस्फोटक ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। ईरान ने इसे अमेरिकी युद्धविराम उल्लंघन बताया। </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 17:56:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रूस-सऊदी अरब ने ईरान तथा अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने का किया समर्थन, होर्मुज में जहाजों का आवागमन किया जाए बहाल : लावरोव</title>
                                    <description><![CDATA[रूस के विदेश मंत्री लावरोव और सऊदी समकक्ष फैसल बिन फरहान ने फोन पर वार्ता कर ईरान और अरब देशों के बीच संबंध सुधारने का समर्थन किया। दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने और क्षेत्रीय संकट के स्थायी राजनयिक समाधान पर जोर दिया, ताकि खाड़ी में शांति बनी रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-saudi-arabia-support-normalization-of-relations-between-iran-and-arab/article-153245"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/sergey.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और उनके सऊदी समकक्ष फैसल बिन फरहान अल सऊद के बीच फोन पर बातचीत में दोनों पक्षों ने ईरान और अरब राजतंत्रों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों का समर्थन किया। रूसी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "ईरान और अरब देशों के बीच लंबे समय के लिए रिश्ते सुधारने और सामान्य बनाने की कोशिशें दोबारा शुरू करना सही माना गया है। "मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों का आवागमन संघर्ष-पूर्व की स्थितियों में बहाल किया जाना चाहिये। उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र के संकट के सभी पहलुओं के स्थायी और दीर्घकालिक समाधान निकालने के लिए जारी राजनयिक संपर्कों को बनाए रखा जाना चाहिये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:58:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>होर्मुज जलडमरूमध्य हालात फिर तनावपूर्ण: दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी के बाद भी युद्धविराम बरकरार, ट्रंप ने कहा- ईरान ने हमसे खिलवाड़ किया</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच भारी गोलीबारी के बावजूद युद्धविराम कायम है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी हमलों को "बचकाना" बताते हुए कड़ी जवाबी कार्रवाई की पुष्टि की। अमेरिका ने आत्मरक्षा में मिसाइल ठिकानों को ध्वस्त किया, जबकि ईरान ने इसे समझौते का उल्लंघन बताया। तनाव के बीच शांति वार्ता पर खतरा मंडरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/situation-in-the-strait-of-hormuz-is-tense-again-ceasefire/article-153112"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/uni.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि गुरुवार देर रात अमेरिका और ईरान दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी के बाद भी युद्धविराम बरकरार है। अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि पहले गोली किसने चलाई। रिपोर्ट के अनुसार ईरान के शीर्ष सैन्य कमान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर आ रहे एक ईरानी तेल टैंकर और एक अन्य पोत को निशाना बनाया और कई तटीय क्षेत्रों पर "हवाई हमले" किए। इस बीच अमेरिका ने कहा कि उसने जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना के निर्देशित मिसाइल विध्वंसक पोतों पर ईरानी हमलों का जवाब "आत्मरक्षा" के तौर पर दिया। ट्रम्प ने कहा कि ईरान ने "आज हमसे खिलवाड़ किया"।</p>
<p>ईरानी सरकारी मीडिया ने शुरू में होर्मुज जलडमरूमध्य में "विस्फोटों" की सूचना दी, जिसे "शत्रुता" के साथ "गोलीबारी" बताया गया। इस बीच, स्थानीय मीडिया ने तेहरान में विस्फोटों की आवाजें सुनने की सूचना दी। इसके कुछ ही समय बाद, ईरान के शीर्ष सैन्य कमान के एक बयान में कहा गया कि अमेरिकी "हवाई हमलों" ने बंदर खमीर, सिरिक और केशम द्वीप के तटों को निशाना बनाया। ईरान ने कहा कि उसने अमेरिकी सैन्य जहाजों पर तत्काल हमला करके जवाबी कार्रवाई की, जिससे "काफी नुकसान" हुआ, और अमेरिका पर "युद्धविराम का उल्लंघन" करने का आरोप लगाया।</p>
<p>अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने ईरान के हमलों को "बिना किसी उकसावे के" बताया और कहा कि जब अमेरिकी नौसेना के निर्देशित मिसाइल विध्वंसक जलडमरूमध्य से गुजर रहे थे, तब ईरानी सेना ने कई मिसाइलों, ड्रोन और छोटी नौकाओं से हमले किये। सेंटकॉम ने कहा कि उसने "आने वाले खतरों को खत्म कर दिया है और अमेरिकी सेना पर हमला करने के लिए जिम्मेदार ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जिनमें मिसाइल और ड्रोन लॉन्च स्थल; कमान और नियंत्रण केंद्र; और खुफिया, निगरानी और टोही केंद्र शामिल हैं।" बयान में कहा गया, "सेंटकॉम तनाव बढ़ाना नहीं चाहता है लेकिन अमेरिकी सेना की रक्षा के लिए हर समय तैनात और तैयार है।"ट्रुथ सोशल पर पोस्ट  करते हुए श्री ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ने कई छोटी नौकाओं को नष्ट कर दिया जो "वह उसी तरह से समुद्र में गिर गईं, जैसे कोई तितली गिरती है!"</p>
<p>उन्होंने कहा, "ईरानी हमलावरों को भारी नुकसान पहुँचाया गया है।" अमेरिकी राष्ट्रपति ने शांति समझौते को लेकर अपनी चेतावनी दोहराई, "जिस तरह हमने आज उन्हें फिर से करारा जवाब दिया है, अगर वे जल्द से जल्द समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं, तो हम भविष्य में उन्हें और भी बुरी तरह और हिंसक तरीके से हराएँगे!" एक इजरायली सूत्र ने बीबीसी को बताया कि इन हमलों में इजरायल की कोई संलिप्तता नहीं है। यह तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में कहा था कि ईरान में युद्ध "जल्द ही समाप्त हो जाएगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 12:17:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डोनाल्ड ट्रंप का यूटर्न : ''प्रोजेक्ट फ्रीडम'' पर लगाई रोक, बोले-होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ शांति समझौते में बड़ी प्रगति का दावा किया है। ट्रंप ने घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन के लिए शुरू किए गए 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को फिलहाल रोक दिया गया है। यह निर्णय आपसी सहमति और पाकिस्तान सहित अन्य देशों के अनुरोध पर समझौते को अंतिम रूप देने के लिए लिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trumps-ban-on-u-turn-project-freedom-said-a/article-152837"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ शांति समझौते की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उन्होंने यह भी घोषणा किया कि उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रोजेक्ट फ्रीडम को स्थगित करने का निर्णय लिया है ताकि यह आकलन किया जा सके कि शांति समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है या नहीं।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "पाकिस्तान और अन्य देशों के अनुरोध, ईरान के खिलाफ अभियान के दौरान मिली जबरदस्त सैन्य सफलता और इसके अलावा, ईरान के प्रतिनिधियों के साथ पूर्ण एवं अंतिम समझौते की दिशा में हुई महत्वपूर्ण प्रगति के आधार पर, हमने पारस्परिक रूप से सहमति व्यक्त की है कि नाकाबंदी पूरी तरह से लागू रहेगी लेकिन प्रोजेक्ट फ्रीडम को थोड़े समय के लिए रोक दिया जाएगा ताकि यह देखा जा सके कि समझौता अंतिम रूप दिया जा सकता है या नहीं।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 12:31:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका ने फिर किया सीज़फायर का उल्लंघन: ईरानी नौकाओं पर ड्रोन हमला, फुजैराह तेल बंदरगाह पर लगी भीषण आग </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य में सात ईरानी नौकाओं को नष्ट करने का दावा किया है। यूएई के तेल बंदरगाह पर हमलों के बाद तनाव चरम पर है। जहां अमेरिका फंसे हुए 2,000 जहाजों को निकालने का प्रयास कर रहा है, वहीं ईरान ने इसे 'सैन्य विफलता' करार देते हुए कड़ा विरोध जताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-again-violates-ceasefire-drone-attack-on-iranian-boats-massive/article-152697"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(5)8.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सात ईरानी नौकाओं पर हमला किया है, क्योंकि वाशिंगटन लगभग बंद जलमार्ग के माध्यम से खाड़ी में फंसे जहाजों को बाहर निकालने का प्रयास कर रहा है। संयुक्त अरब अमीरात और दक्षिण कोरिया दोनों ने सोमवार को महत्वपूर्ण जलमार्ग में जहाजों पर हमले की सूचना दी। संयुक्त अरब अमीरात ने यह भी कहा कि ईरानी हमले के बाद फुजैराह के तेल बंदरगाह पर आग लग गई।</p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि जलडमरूमध्य में हुई घटनाओं से यह स्पष्ट हो गया है कि राजनीतिक संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है। उन्होंने आगे कहा, "प्रोजेक्ट फ्रीडम प्रोजेक्ट डेडलॉक है।" फरवरी में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर हवाई हमले शुरू करने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य बहुत हद तक अवरुद्ध रहा है। तेहरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को अवरुद्ध कर दिया जिससे होकर दुनिया के 20 प्रतिशत तेल एवं द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है।</p>
<p>अप्रैल की शुरुआत में, अमेरिका और ईरान ने युद्धविराम की घोषणा की, जिसके तहत ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात सहित खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले बंद कर दिए, लेकिन तब से कुछ ही जहाज जलडमरूमध्य से गुजर पाए हैं। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नाकाबंदी भी लगा दी है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा, "हमने सात छोटी नौकाओं को मार गिराया है या जैसा कि वे उन्हें 'तेज़' नौकाएं कहते हैं। अब उनके पास बस यही बची हैं।" अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने नौकाओं पर हमला करने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया गया।</p>
<p>बाद में ईरानी सरकारी मीडिया ने ट्रम्प के इस दावे का खंडन किया कि अमेरिका ने तेज नौकाओं पर हमला किया। सैन्य सूत्रों का हवाला देते हुए, तसनीम समाचार एजेंसी ने बताया कि इसके बजाय दो छोटे मालवाहक जहाजों को निशाना बनाया गया जिनमें पांच नागरिकों की मौत हो गई। इससे पहले अमेरिका ने कहा था कि नौसेना के विध्वंसक पोत और अमेरिकी ध्वज वाले व्यापारिक जहाज सोमवार को जलडमरूमध्य से गुजरे थे। ईरान ने इन दावों को पूरी तरह से झूठा करार दिया और कहा कि उसकी सेना ने एक अमेरिकी युद्धपोत पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं। अमेरिकी सेना ने इस बात से इनकार किया।</p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय नेताओं ने यूएई अवसंरचना पर हुए हमलों की निंदा की है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉ ने कहा कि ये हमले अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर ने कहा कि ब्रिटेन खाड़ी में अपने साझेदारों की रक्षा के लिए अपना समर्थन जारी रखेगा।पड़ोसी देश कतर ने टैंकर पर हुए हमले की निंदा करते हुए जलडमरूमध्य को बिना शर्त फिर से खोलने की मांग की। रविवार को राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा था कि अमेरिका "प्रोजेक्ट फ्रीडम" के तहत फंसे हुए जहाजों को समुद्री मार्ग से बाहर निकालने में मदद करना शुरू करेगा। फरवरी में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अनुमानित 20,000 नाविक 2,000 जहाजों पर फंसे हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 11:24:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरानी सेना की ट्रंप को चेतावनी: अमेरिकी सेना ने होर्मुज में किया प्रवेश तो होगी कड़ी कार्रवाई ; जलडमरूमध्य ईरान के नियंत्रण में है, पूरी ताकत से की जाएगी इसकी सुरक्षा </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिका के 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' पर कड़ी चेतावनी देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में विदेशी सेना के प्रवेश का विरोध किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फंसे जहाजों को निकालने के लिए 15,000 सैनिकों का मिशन शुरू कर रहे हैं। ईरान का कहना है कि यह क्षेत्र उसके पूर्ण नियंत्रण में है और बिना अनुमति प्रवेश पर सैन्य कार्रवाई की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-armys-warning-to-trump-if-us-army-enters-hormuz/article-152635"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/trump.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरानी सेना ने अमेरिकी को चेतावनी दी है कि उसकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य में दाखिल होने की कोशिश न करे। यह चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस ऐलान के बाद आई है जिसमें उन्होंने जलमार्ग से जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' अभियान शुरू करने की बात कही है। अमेरिकी सेना ने साफ किया है कि यह कोई औपचारिक 'एस्कॉर्ट मिशन' नहीं है। इस 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को सफल बनाने के लिए गाइडेड मिसाइल, 100 से अधिक विमान, ड्रोन प्लेटफॉर्म और 15,000 सैनिकों की मदद ली जाएगी।</p>
<p>जवाब में ईरान के सशस्त्र बलों की एकीकृत कमान के प्रमुख मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने कहा कि ईरान इस इलाके में आने वाली 'किसी भी विदेशी सेना' और खास तौर पर 'आक्रामक अमेरिकी सेना' को निशाना बनाएगा। उन्होंने साफ कहा कि यह जलडमरूमध्य ईरान के नियंत्रण में है और इसकी सुरक्षा पूरी ताकत से की जाएगी। अब्दुल्लाही ने कहा कि हम होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा का प्रबंधन मजबूती से कर रहे हैं। हम सभी व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों को सलाह देते हैं कि वे यहाँ तैनात हमारी सेना के साथ तालमेल बिठाए बिना यहाँ से न गुजरें, अन्यथा उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।</p>
<p>मेजर जनरल ने कहा कि यह पूरा समुद्री रास्ता ईरानी सेना के दायरे में आता है। अमेरिका की कोई भी 'आक्रामक हरकत' यहाँ के हालात को और खराब करेगी और जहाजों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा करेगी। उन्होंने यह भी दोहराया कि सुरक्षित आवाजाही के लिए 'हर हाल में' ईरानी सेना से संपर्क करना जरूरी है। दूसरी ओर, ट्रंप ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' के तहत सोमवार से फंसे हुए व्यापारिक जहाजों को बाहर निकालने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि कई देशों ने अपने जहाजों को मुक्त कराने के लिए अमेरिका से मदद मांगी है, जो इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं। उन्होंने इन जहाजों को निर्दोष और इस विवाद से पूरी तरह अलग बताया है।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना इन तटस्थ देशों के जहाजों को प्रतिबंधित जलमार्ग से सुरक्षित बाहर लाएगी, ताकि वे अपना व्यापारिक कामकाज फिर से शुरू कर सकें। उन्होंने दावा किया कि इस पहल से अमेरिका के साथ-साथ ईरान और पूरे क्षेत्र को फायदा होगा। घोषणा के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिनिधियों को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित देशों को सूचित कर दें कि अमेरिका उनके जहाजों और चालक दल की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगा।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई कि सोमवार सुबह से शुरू होने वाली 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' प्रक्रिया के लिए ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत चल रही है। उन्होंने इसे एक मानवीय मिशन बताते हुए कहा कि कई जहाजों पर भोजन और जरूरी सामान खत्म हो रहा है, जिससे वहाँ के कर्मियों की हालत चिंताजनक है। हालाँकि, ट्रंप ने सख्त चेतावनी भी दी कि इस मानवीय काम में कोई भी रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर इस प्रक्रिया में किसी ने दखल दिया, तो उससे पूरी ताकत के साथ निपटा जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 14:58:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान की चेतावनी : अमेरिका ने अगर बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखी, तो वह फिर बंद कर देगा होर्मुज</title>
                                    <description><![CDATA[बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रही तो होर्मुज जलडमरूमध्य फिर बंद किया जाएगा। संसद अध्यक्ष गालिबाफ ने स्पष्ट किया कि आवाजाही ईरान की अनुमति से होगी। आईआरजीसी ने नया आदेश जारी कर नागरिक जहाजों के लिए तय मार्ग अनिवार्य किया, जबकि सैन्य जहाजों पर प्रतिबंध बरकरार रहेगा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/irans-warning-that-america-will-close-hormuz-again-if-it/article-150888"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)19.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तेहरान। ईरान ने शनिवार को चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने उसके बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखी तो वह एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर देगा। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने एक्स पर कहा कि इस जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले यातायात का संचालन ईरान की अनुमति से ही किया जायेगा। ईरान की यह चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के उस बयान के कुछ घंटों बाद आयी है, जिसमें उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुला और व्यापार के लिए तैयार है, लेकिन ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने कहा कि ईरान ने भी यह घोषणा की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुला है और पूर्ण आवागमन के लिए तैयार है। ट्रम्प ने कहा था, होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुला है और व्यापार एवं पूर्ण आवागमन के लिए तैयार है, लेकिन जहां तक ईरान का संबंध है, नौसैनिक नाकेबंदी तब तक प्रभावी और लागू रहेगी, जब तक ईरान के साथ हमारा लेनदेन शत-प्रतिशत पूरा नहीं हो जाता। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्र्स (आईआरजीसी) की नौसेना ने बयान जारी कर इस जलडमरूमध्य से जहाजों के गुजरने के संबंध में नया आदेश घोषित किया है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आदेश के अनुसार, नागरिक जहाज केवल ईरान की ओर से निर्धारित मार्ग से ही गुजरेंगे। सैन्य जहाजों के जलडमरूमध्य से गुजरने पर अब भी प्रतिबंध रहेगा। आवाजाही केवल आईआरजीसी नौसेना की अनुमति से ही संभव होगी और कोई भी गतिविधि युद्ध क्षेत्र में शांति की अवधि के समझौते और लेबनानी संघर्ष विराम के कार्यान्वयन के अनुरूप ही होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>
<p class="MsoNormal"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 14:05:30 +0530</pubDate>
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