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                <title>Naval Blockade - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Naval Blockade RSS Feed</description>
                
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                <title>डोनालड ट्रंप की चेतावनी: ईरान जब तक परमाणु हथियार बनाने की जिद्द नहीं छोड़ता तब तक नाकेबंदी रहेगी जारी, ईरानी राष्ट्रपति का दावा-परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए और कुछ नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु शर्तों पर समझौता न करने पर नौसैनिक नाकेबंदी और आर्थिक दबाव बढ़ाने की चेतावनी दी है। इस तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड $125 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। ट्रंप ने इसे बमबारी से अधिक प्रभावी बताया है, जिससे एशियाई अर्थव्यवस्थाओं और ग्लोबल सप्लाई चेन पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/donald-trumps-warning-that-the-blockade-will-continue-until-iran/article-152199"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump4.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को ईरान को परमाणु समझौते की शर्तों पर सहमत होने की चेतावनी देते हुए कहा है कि ऐसा न होने पर अमेरिका उसके बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखेगा और आर्थिक दबाव बढ़ाएगा। ट्रंप ने दोहराया कि यदि ईरान परमाणु हथियार बनाना जारी रखता है, तो उसके साथ 'कभी कोई समझौता नहीं' होगा। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ईरान के ताजा प्रस्ताव पर चर्चा कर रही है, जिसमें ईरान ने पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और नाकेबंदी हटाने का सुझाव दिया है, जबकि परमाणु वार्ता को स्थगित करने की बात कही है। नाकेबंदी जारी रखने के ट्रंप के फैसले से वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' की कीमतें गुरुवार को 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गईं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि नाकेबंदी प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई से अधिक प्रभावी हो सकती है। उन्होंने ईरान से जल्द कार्रवाई करने का आग्रह किया और कहा कि अधिकारी जरूरत पड़ने पर महीनों तक नाकेबंदी जारी रखने के तरीके खोज रहे हैं।</p>
<p>अमेरिकी नीति निर्माताओं का मानना है कि लंबे समय तक लगे प्रतिबंध अंततः ईरान को तेल उत्पादन रोकने के लिए मजबूर कर सकते हैं। यह संघर्ष अब दसवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जबकि इसके चार से छह सप्ताह में सुलझने की उम्मीद थी। होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रतिबंधित रहने से वैश्विक आपूर्ति से प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल तेल कम हो रहा है। अमेरिका की इस लंबी नाकेबंदी की तैयारी से एशियाई अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। क्षेत्र के कई देश ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं और कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, प्लास्टिक तथा उर्वरकों की आपूर्ति में कमी महसूस की जा रही है।</p>
<p>इस बीच, पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें भी विफल रही हैं। ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान बातचीत करना चाहता है तो वह कॉल कर सकता है। उन्होंने बताया कि अभी टेलीफोन के माध्यम से बातचीत हो रही है। 'एक्सियोस' के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प नाकेबंदी को 'बमबारी से अधिक प्रभावी' मानते हैं। हालांकि, सूत्रों का यह भी कहना है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड बातचीत के गतिरोध को तोड़ने के लिए ईरान पर 'शक्तिशाली हमलों' की तैयारी कर रहा है लेकिन मंगलवार रात तक ट्रंप ने किसी हमले का आदेश नहीं दिया था। दूसरी ओर, ईरान ने संकल्प लिया है कि जब तक वह खतरा महसूस करेगा, होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात बाधित करना जारी रखेगा। संयुक्त राष्ट्र में ईरानी प्रतिनिधि ने अमेरिकी नाकेबंदी को 'समुद्री डकैती' करार दिया और चेतावनी दी कि इसका 'अभूतपूर्व' जवाब दिया जाएगा। हालांकि, ईरानी बलों ने कूटनीति को मौका देने के लिए अब तक संयम दिखाया है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:55:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ट्रंप की बड़ी घोषणा : युद्धविराम टूटा तो होर्मुज जलडमरूमध्य में होंगे लगातार हमले, नौकाओं, बारूदी सुरंग बिछाने वाले जहाजों और अन्य समुद्री संसाधनों को बनाएंगे निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान के विरुद्ध नई रणनीति तैयार की है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्री संसाधनों को निशाना बनाया जाएगा। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे दबाव के बीच, अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी और विशिष्ट सैन्य ठिकानों पर हमलों पर विचार कर रहा है। क्षेत्र में तनाव चरम पर है क्योंकि ईरान की मिसाइल क्षमता अब भी सक्रिय है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-announcement-if-the-ceasefire-is-broken-there-will/article-151582"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/होर्मुज-जलडमरू.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के सैन्य अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि मौजूदा संघर्षविराम समाप्त होता है तो ईरान की उपस्थिति को लक्ष्य बनाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों की नयी योजनाएं तैयार की जा रही हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित योजनाएं पहले की रणनीति से अलग हैं, जिसमें हमले मुख्य रूप से ईरान के अंदरूनी क्षेत्रों तक सीमित थे। नई रणनीति में जलमार्गों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, विशेष रूप से तेज गति वाली नौकाओं, बारूदी सुरंग बिछाने वाले जहाजों और अन्य समुद्री संसाधनों को निशाना बनाने पर जोर दिया जा रहा है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान द्वारा जलडमरूमध्य को बंद किए जाने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है और इससे अमेरिका की आर्थिक नीतियों पर भी दबाव बढ़ा है। सात अप्रैल से लागू युद्धविराम अभी औपचारिक रूप से कायम है। सूत्रों के अनुसार, केवल हवाई हमलों के जरिए जलमार्ग को शीघ्र खोल पाना कठिन हो सकता है, क्योंकि ईरान की तटीय रक्षा प्रणाली का बड़ा हिस्सा अब भी सक्रिय है और उसके पास पर्याप्त संख्या में छोटी नौकाएं मौजूद हैं।</p>
<p>इसके साथ ही अमेरिकी योजनाकार ईरान के ऊर्जा ढांचे और अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर हमलों की संभावना पर भी विचार कर रहे हैं, जिसे संभावित रूप से स्थिति को और गंभीर बना देने वाला कदम माना जा रहा है। एक अन्य विकल्प के तहत कुछ विशिष्ट सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाने पर भी विचार किया जा रहा है, जिनमें अहमद वाहिदी का नाम शामिल बताया गया है।</p>
<p>अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हाल ही में स्वीकार किया था कि युद्धविराम के दौरान ईरान ने अपनी कुछ सैन्य क्षमताओं को पुनर्स्थापित किया है, जिन्हें समझौता विफल होने की स्थिति में निशाना बनाया जा सकता है। अमेरिकी आकलनों के अनुसार, ईरान की लगभग आधी मिसाइल प्रक्षेपण क्षमता और बड़ी संख्या में हमलावर ड्रोन अभी भी सुरक्षित हैं। वर्तमान में क्षेत्र में अमेरिका के 19 नौसैनिक पोत तैनात हैं, जिनमें दो विमानवाहक पोत शामिल हैं, जबकि हिंद महासागर में सात अन्य पोत मौजूद हैं।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, 13 अप्रैल से अमेरिकी बल ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर रहे हैं और कई जहाजों को रोका या उनकी जांच की गई है। विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के ईरान के कदम का आकलन पहले कम किया गया था, जबकि यह स्थिति क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 16:33:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान ने रूस और कई अन्य देशों को होर्मुज़ जलडमरूमध्य के शुल्क में दी छूट, मुझे नहीं पता भविष्य में क्या होगा : जलाली</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने रणनीतिक हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए रूस जैसे सहयोगी देशों को शुल्क में छूट दी है। अमेरिकी नाकेबंदी के बीच ईरान ने सुरक्षा लागत के नाम पर पहली बार राजस्व जुटाया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और एलपीजी आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिस पर फिलहाल तनाव बरकरार है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-exempted-russia-and-many-other-countries-from-the-strait/article-151528"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/kajem-jalali.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। ईरान ने रूस सहित कई देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने के लिए लगने वाले ट्रांज़िट शुल्क में छूट दी है। रूस में ईरान के राजदूत काज़ेम जलाली ने न्यूज एजेंसी स्पूतनिक को यह जानकारी दी। गौरतलब है कि ईरान की संसद के प्रथम उपाध्यक्ष हामिद रज़ा हाजी बाबाई ने गुरुवार को बताया था कि ईरान को पहली बार होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने के शुल्क से राजस्व प्राप्त हुआ है और यह राशि देश के केंद्रीय बैंक में जमा कर दी गयी है।</p>
<p>वहीं जलाली से जब पूछा गया कि क्या ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के शुल्कों में कोई छूट दी है, तो उन्होंने कहा, "हमने फिलहाल कुछ देशों को छूट दी है, लेकिन मुझे नहीं पता कि भविष्य में क्या होगा। हालांकि, हमारा विदेश मंत्रालय अभी उन छूटों को लागू करने की कोशिश कर रहा है, जो रूस जैसे मित्र देशों के लिए सोची गयी हैं।" उल्लेखनीय है कि अमेरिका और इज़रायल के हमले के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने में आने वाली लागत का हवाला देते हुए, शुल्क लगाने की योजना की घोषणा की थी। अब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को तब तक के लिए बंद कर दिया है, जब तक कि अमेरिका द्वारा लगाई गयी नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह से हटा नहीं ली जाती।</p>
<p>ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़रायल की आक्रामकता ने होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से अवरुद्ध कर दिया है। यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी के देशों से वैश्विक बाजारों तक तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलपीजी) की आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है, और इस अवरोध ने इस क्षेत्र में तेल के निर्यात और उत्पादन पर भी असर डाला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 16:16:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान ने ट्रंप के युद्धविराम विस्तार को 'चाल' बताकर किया खारिज: कहा-हमने कभी इसकी मांग नहीं की, नौसैनिक नाकेबंदी की निंदा की </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप के एकतरफा युद्धविराम विस्तार को 'धोखा' करार देते हुए खारिज कर दिया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को 'युद्ध की कार्रवाई' बताया। ईरान का स्पष्ट रुख है कि जब तक नाकेबंदी खत्म नहीं होती, कोई वार्ता संभव नहीं है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद रहेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-rejected-trumps-ceasefire-extension-as-a-ploy-said/article-151300"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran6.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम को एकतरफा बढ़ाने की घोषणा पर शक जाहिर करते हुए कहा है कि यह एक 'चाल' है और उसने कभी इसके लिए दरख्वास्त नहीं की थी। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान ने 'धमकियों के साये' में युद्धविराम विस्तार या नयी बातचीत की कोई गुजारिश नहीं की है। श्री अराघची ने ईरानी बंदरगाहों की जारी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की निंदा करते हुए इसे 'युद्ध की कार्रवाई' और मौजूदा युद्धविराम सिद्धांतों का उल्लंघन करार दिया। उन्होंने कहा, “ईरान जानता है कि दबंगई का मुकाबला कैसे करना है।”</p>
<p>ईरानी संसद के अध्यक्ष बगर गालिबाफ के वरिष्ठ सलाहकार महदी मोहम्मदी ने युद्धविराम विस्तार को खारिज करते हुए कहा कि ईरान के नजरिये से इसका 'कोई मतलब नहीं' है और इसकी 'कोई वास्तविक अहमियत' नहीं है। उन्होंने इस कदम को 'अचानक हमले' के लिए वक्त हासिल करने की रणनीति बताया और दलील दी कि जो पक्ष इस तरह के दबाव का सामना कर रहा हो, वह शर्तें तय नहीं कर सकता।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत आमिर सईद इरावानी ने इस बात पर जोर दिया कि इस्लामाबाद में किसी भी औपचारिक शांति वार्ता में शामिल होने के लिए नौसैनिक नाकेबंदी को खत्म करना ईरान की अनिवार्य शर्त है।इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से जुड़ी ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर (एमएनए) ने कहा कि ईरान ने युद्धविराम बढ़ाने की मांग नहीं की है। एजेंसी ने ताकत के दम पर अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ने की धमकियों को फिर दोहराया।</p>
<p>युद्धविराम विस्तार की यह घोषणा युद्ध में हुए कई बड़े घटनाक्रमों के बाद हुई है। हमलों पर रोक के बावजूद ट्रंप ने अमेरिकी सेना को नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखने का निर्देश दिया है, जो ईरान के लिए विवाद का मुख्य मुद्दा बना हुआ है। ट्रंप ने दावा किया कि यह विस्तार आंशिक रूप से ईरानी सरकार में 'गहरी दरार' होने के कारण किया गया है। ईरानी अधिकारियों ने इस आख्यान को खारिज कर दिया है और स्थायी शांति के लिए खुद की '10-सूत्रीय योजना' पर कायम हैं।</p>
<p>मेहर समाचार एजेंसी ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप, जो पिछले कुछ दिनों से बार-बार दावा कर रहे थे कि वह ईरान के साथ युद्धविराम नहीं बढ़ायेंगे, उन्होंने एकतरफा रूप से युद्धविराम विस्तार की घोषणा कर दी। एजेंसी के मुताबिक, ट्रंप को एकतरफा युद्धविराम की घोषणा करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जबकि उन्होंने पहले खुले तौर पर जोर दिया था कि वह किसी भी हाल में युद्धविराम नहीं बढ़ायेंगे और ईरान को इस्लामाबाद वार्ता में हिस्सा लेना ही होगा।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की थी कि अमेरिकी प्रतिनिधि बातचीत के लिए पाकिस्तान जा रहे हैं और अगर ईरान सहमत नहीं हुआ तो युद्ध फिर से शुरू हो जायेगा। ईरानी अधिकारियों ने हालांकि चुप्पी साधे रखी है और बातचीत में शामिल होने या न होने के संबंध में किसी आधिकारिक रुख की घोषणा नहीं की है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका ने युद्धविराम का उल्लंघन किया है। एक अन्य अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी, तस्नीम ने अज्ञात अधिकारियों के हवाले से यह भी कहा कि ईरान ने युद्धविराम के विस्तार का अनुरोध नहीं किया था, और ट्रंप की घोषणा के कई मायने हो सकते हैं।</p>
<p>"पहला मतलब यह है कि ट्रंप युद्ध हार चुके हैं। उन्होंने युद्ध के दौरान सभी संभावित परिदृश्यों का परीक्षण और कार्यान्वयन कर लिया है।" इसमें कहा गया है कि श्री ट्रंप जानते हैं कि युद्ध के जरिये उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा, इसलिए वह युद्ध से बाहर निकलने को ही अपने लिए सबसे अच्छा रास्ता मानते हैं। अगर वह युद्ध जारी भी रखते हैं, तब भी उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा। तस्नीम ने कहा कि हालांकि इस युद्ध में अमेरिका के लिए कोई उपलब्धि नहीं है, लेकिन ट्रंप हर मुमकिन हथकंडे से धोखा देने सहित कुछ भी कर सकते हैं, जिनमें युद्धविराम का विस्तार भी शामिल है। इसमें कहा गया है कि ट्रंप युद्धविराम बढ़ाने का दावा कर सकते हैं, लेकिन फिर वही अमेरिकी प्रशासन या इजरायल 'आतंकवादी कदम' उठा सकते हैं। एजेंसी ने कहा कि ईरान ऐसे परिदृश्य को कम कर नहीं आंकता और इस तरह की संभावना पर करीब से नजर रख रहा है।</p>
<p>इसमें कहा गया है कि अमेरिका युद्ध से पीछे हट जायेगा और इजरायल लेबनान में युद्धविराम के उल्लंघन के बहाने इस जंग में बना रहेगा।अमेरिकी अधिकारियों को हालांकि पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है कि अमेरिका एकतरफा रूप से युद्ध से भाग नहीं सकता और इजरायल को लड़ाई में बनाये नहीं रख सकता। नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहने का मतलब है कि शत्रुता जारी है। जब तक नौसैनिक नाकेबंदी लागू रहेगी, तब तक ईरान कम से कम होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोलेगा और अगर जरूरी हुआ तो ताकत के बल पर इस नाकेबंदी को तोड़ देगा।</p>
<p>इसमें कहा गया है कि अमेरिका ईरान पर युद्ध का साया बनाये रखना चाहता है और ईरान की अर्थव्यवस्था और राजनीति को अधर में रखना चाहता है। तस्नीम ने अज्ञात अधिकारियों के हवाले से कहा, "अमेरिका का मानना है कि ईरान की स्थिति वैसी ही है, जैसी 12 दिवसीय युद्ध के बाद थी। वर्तमान काल में हालांकि एक मौलिक अंतर है और वह है होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण। अगर अमेरिका युद्ध का साया बनाये रखना चाहता है, तो उसे यह जान लेना चाहिए कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से बंद रहेगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 18:01:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका ने बढ़ाया युद्धविराम, ट्रंप बोले-ईरानी नेतृत्व बातचीत के लिए एक &quot;एकीकृत प्रस्ताव&quot; पेश नहीं करता, तब तक नहीं होगी कोई आक्रामक कार्रवाई </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान की अपील पर ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाने और सैन्य हमला स्थगित करने की घोषणा की है। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि नौसैनिक नाकेबंदी और सैन्य तैयारी जारी रहेगी। अब तक 4,000 मौतों के बाद, यह कदम कूटनीति को एक आखिरी मौका देने के रूप में देखा जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trump-extends-ceasefire-says-no-offensive-action-unless-iranian/article-151271"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/chatgpt-image-apr-22,-2026,-11_56_00-am.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की कि अमेरिका ने ईरान के साथ जारी युद्ध में युद्धविराम की अवधि बढ़ा दी है और प्रस्तावित सैन्य हमले को फिलहाल टाल दिया गया है। व्हाइट हाउस द्वारा भारतीय समयानुसार देर रात के बाद जारी बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के नेतृत्व की अपील पर ईरान पर नियोजित सैन्य हमले को स्थगित करने और युद्धविराम को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि ईरान के भीतर "गंभीर रूप से विभाजित" स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, जिससे ईरान की ओर से एकजुट बातचीत की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p>बयान के अनुसार, युद्धविराम बढ़ाने का अनुरोध पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने किया था। अमेरिका ने कहा है कि जब तक ईरानी नेतृत्व बातचीत के लिए एक "एकीकृत प्रस्ताव" पेश नहीं करता, तब तक कोई आक्रामक कार्रवाई नहीं की जाएगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "मैंने अपनी सेना को निर्देश दिया है कि वे नाकेबंदी जारी रखें और पूरी तरह तैयार रहें।" इसका मतलब है कि सक्रिय सैन्य कार्रवाई भले ही टाल दी गई हो लेकिन ईरान पर दबाव बना रहेगा।</p>
<p>बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि युद्धविराम तब तक प्रभावी रहेगा जब तक ईरान अपना प्रस्ताव पेश नहीं करता और वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती "चाहे जो भी परिणाम हो।" इससे यह संकेत मिलता है कि कूटनीति विफल होने पर सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू हो सकती है। यह कदम क्षेत्रीय संकट के बीच कूटनीति के लिए एक अस्थायी अवसर के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ के रूप में एक अहम भूमिका निभाने के तौर पर उभर रहा है। अमेरिका के हालांकि नाकेबंदी जारी रहने से यह भी स्पष्ट है कि तनाव अभी कम नहीं हुआ है और बातचीत विफल होने पर स्थिति फिर से बिगड़ सकती है।</p>
<p>इससे पहले ईरान ने संयुक्त राष्ट्र से अपील करते हुए अमेरिका द्वारा ईरानी जहाज "तौस्का " को जब्त करने की निंदा की थी और इसे "समुद्री डकैती" करार दिया था। अमेरिका-ईरान दोनों देशों के बीच संघर्षविराम रुकने तक लगभग 4,000 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकतर मौतें मिसाइल हमलों और ड्रोन हमलों के कारण हुई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 12:31:11 +0530</pubDate>
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                <title>ईरानी स्पीकर ग़ालिबाफ़ का बड़ा बयान : अगर उन्होंने जरा सी गलती की तो हम करारा...', नाकेबंदी और संघर्ष-विराम का उल्लंघन करके  भ्रम में जी रहे ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी को खारिज करते हुए इसे ट्रंप का 'भ्रम' बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान आत्मसमर्पण नहीं करेगा और युद्ध के मैदान में अपने नये पत्ते खोलने को तैयार है। वार्ता तभी संभव है जब अमेरिका दबाव के हथकंडे छोड़े और नाकेबंदी हटाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-statement-by-iranian-speaker-ghalibaf-if-he-makes-a/article-151165"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran4.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने धमकी के दबाव में अमेरिका के साथ बातचीत करने से इनकार किया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगर ग़ालिबाफ़ ने ईरान को समझौता करने के लिए मजबूर करने के मकसद से अमेरिका की ओर से अपनाये जा रहे हथकंडों (जिसमें नौसैनिक नाकेबंदी भी शामिल है) की कड़ी निंदा की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध के मैदान में अपने नये पत्ते खोलने के लिए पूरी तरह तैयार है।</p>
<p>ग़ालिबाफ़ ने मंगलवार को सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर लिखा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाकेबंदी करके और संघर्ष-विराम का उल्लंघन करके एक तरह के भ्रम में जी रहे हैं। उन्होंने कहा, "ट्रंप नाकेबंदी करके और संघर्ष-विराम का उल्लंघन करके बातचीत की मेज को आत्मसमर्पण की मेज में बदलना चाहते हैं, या फिर से युद्ध भड़काने की अपनी मंशा को सही ठहराना चाहते हैं।" उन्होंने कहा कि दबाव बनाने के इन हथकंडों से बातचीत की मेज पर कोई नतीजा नहीं निकलने वाला है।</p>
<p>ग़ालिबफ़ ने कहा, “ हम धमकियों के साये में बातचीत स्वीकार नहीं करेंगे... पिछले दो हफ़्तों के दौरान हमने खुद को युद्ध के मैदान में अपने नये पत्ते खोलने के लिए तैयार कर लिया है।” ईरानी नेता की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आयी हैं, जब ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली शांति वार्ता का दूसरा दौर अभी भी अनिश्चितता के घेरे में है। ईरान ने अब तक इन वार्ताओं में शामिल होने से इनकार कर दिया है, और उसने बातचीत शुरू करने से पहले नाकेबंदी हटाने की शर्त रखी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 13:51:18 +0530</pubDate>
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                <title>ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी में भी व्यापार की इजाजत नहीं, अमेरिकी नाकेबंदी जारी रही तो हम लाल सागर में रास्ते रोक देंगे: ईरान</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि उसके बंदरगाहों की नाकाबंदी नहीं हटी, तो वह बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य को बंद कर देगा। इससे दुनिया का 30% तेल पारगमन रुक सकता है। एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप कूटनीतिक सफलता का दावा कर रहे हैं, वहीं ईरान ने झुकने से साफ इनकार कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trade-is-not-allowed-even-in-the-gulf-of-oman/article-150598"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trujp.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के केंद्रीय सैन्य कमान ‘खतम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय’ के प्रमुख मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही अलीआबादी ने बुधवार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका फारस की खाड़ी में ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखता है और ईरान के वाणिज्यिक जहाजों एवं तेल टैंकरों के लिए असुरक्षा पैदा करता है, तो ईरान लाल सागर के महत्वपूर्ण ‘बाब-अल-मंडेब’ जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर देगा। ईरानी सरकारी मीडिया में जारी संदेश में अलीआबादी ने स्पष्ट किया कि ईरान की शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और लाल सागर में किसी भी प्रकार के आयात या निर्यात को जारी रखने की अनुमति नहीं देंगी। </p>
<p><strong>ईरान का बाब-अल-मंडेब पर काफी प्रभाव </strong></p>
<p>ईरान का बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर काफी प्रभाव है, जो लाल सागर का दक्षिणी प्रवेश द्वार और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु है। ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों का लाल सागर की सीमा से लगे एक बड़े हिस्से पर नियंत्रण है। यह जलडमरूमध्य पश्चिमी एशिया से निर्यात होने वाले प्राकृतिक गैस और तेल उत्पादों के लिए एक अनिवार्य मार्ग है, जो कुल वैश्विक ऊर्जा पारगमन का 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभालता है। </p>
<p><strong>...तो दुनिया में और बिगड़ सकते हैं हालात </strong></p>
<p>सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य के साथ-साथ बाब-अल-मंडेब को भी बाधित करने में सफल होता है, तो इससे दुनिया के कुल तेल पारगमन का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा रुक जाएगा। यह कदम पहले से ही अस्थिर वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक विनाशकारी झटका साबित हो सकता है। </p>
<p><strong>ईरान को झुकाने की कोशिश नाकाम होगी : पेजेशकियान</strong></p>
<p>इस बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने घोषणा की है कि ईरान को ‘आत्मसमर्पण’ के लिए मजबूर करने की अमेरिका या इजरायल की किसी भी कोशिश का ‘विफल होना तय’ है। उन्होंने कहा कि ईरान के लोग किसी हाल में इसे स्वीकार नहीं करेंगे। ईरान ने कभी युद्ध या अस्थिरता नहीं चाही है। वह अन्य देशों के साथ निरंतर संवाद और रचनात्मक जुड़ाव का पक्षधर रहा है। अमेरिका का नाम लिये बिना राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय व्यवहार में ‘दोहरे मानदंडों’ की आलोचना की और संप्रभु राष्ट्रों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की निंदा की। </p>
<p><strong>ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने के करीब: ट्रंप </strong></p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि ईरान के साथ संघर्ष ‘समाप्त होने के करीब’ है। उन्होंने एक संभावित कूटनीतिक सफलता का संकेत भी दिया है। ट्रंप ने संकेत दिया कि रुकी हुई बातचीत पाकिस्तान में कुछ ही दिनों में फिर से शुरू हो सकती है, जिससे युद्धविराम समाप्त होने से पहले किसी समझौते की उम्मीद जगी है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर अपनी पकड़ काफी सख्त कर दी है। सेना ने पुष्टि की है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से घेराबंदी लागू करते हुए ईरानी समुद्री व्यापार को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के प्रमुख ब्रैड कूपर ने कहा कि इस अभियान ने 36 घंटों से भी कम समय में ईरान की व्यापारिक जीवन रेखा को पंगु बना दिया है। ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी पूरी तरह से लागू कर दी गई है। ईरान की लगभग 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार पर निर्भर है, जो अब प्रभावी रूप से प हो गई है। इज़रायल-लेबनान वार्ता के बाद हिज्बुल्लाह पर सहमति के संकेत</p>
<p>इजरायल और लेबनान के बीच हुई प्रत्यक्ष वार्ता के बाद दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने हिज्बुल्लाह के मुद्दे पर समान सोच उभरने के संकेत दिए हैं और दक्षिणी लेबनान में जारी संघर्ष के समाधान की इच्छा जताई है। अमेरिका में इजरायल के राजदूत येचियल लेइटर ने कहा कि वार्ता में हिज्बुल्लाह के प्रभाव को समाप्त करने को लेकर रुख में समानता देखने को मिली। लेबनान सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह हिज्बुल्लाह के प्रभुत्व से बाहर निकलना चाहती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:08:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान : ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने के करीब, कूटनीतिक सफलता का दिया संकेत</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष समाप्त होने का संकेत देते हुए पाकिस्तान में दोबारा शांति वार्ता शुरू होने की घोषणा की है। अमेरिकी सेना द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की प्रभावी नाकाबंदी से ईरान का 90% समुद्री व्यापार ठप हो गया है। अमेरिका ने यूरेनियम संवर्धन रोकने और परमाणु केंद्रों को नष्ट करने की कड़ी शर्त रखी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/donald-trumps-big-announcement-indicates-diplomatic-success-as-war-with/article-150525"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trumpp.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि ईरान के साथ संघर्ष 'समाप्त होने के करीब' है। उन्होंने एक संभावित कूटनीतिक सफलता का संकेत भी दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि रुकी हुई बातचीत पाकिस्तान में कुछ ही दिनों में फिर से शुरू हो सकती है, जिससे युद्धविराम समाप्त होने से पहले किसी समझौते की उम्मीद जगी है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर अपनी पकड़ काफी सख्त कर दी है। सेना ने पुष्टि की है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से घेराबंदी लागू करते हुए ईरानी समुद्री व्यापार को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया है।</p>
<p>अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के प्रमुख ब्रैड कूपर ने कहा कि इस अभियान ने 36 घंटों से भी कम समय में ईरान की व्यापारिक जीवन रेखा को पंगु बना दिया है। ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी पूरी तरह से लागू कर दी गई है। ईरान की लगभग 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार पर निर्भर है, जो अब प्रभावी रूप से ठप हो गई है। शक्ति प्रदर्शन के बावजूद मुख्य गतिरोध अभी भी बने हुए हैं। अमेरिका ईरान के यूरेनियम संवर्धन को तत्काल रोकने और प्रमुख परमाणु केंद्रों को नष्ट करने की मांग कर रहा है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की भी मांग कर रहा है। हालांकि, दोनों पक्षों द्वारा समझौते पर सहमति नहीं बन पाने के कारण 10 अप्रैल को हुई पहले दौर की बातचीत के बाद मुख्य मुद्दे अनसुलझे रह गए हैं।</p>
<p>अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दोनों पक्षों के बीच गहरी अविश्वास की भावना को स्वीकार किया लेकिन एक सतर्क आशावादी रुख भी अपनाया। उन्होंने कहा, "आप इस समस्या को रातों-रात हल नहीं करने जा रहे हैं।" जेडी वेंस ने हालांकि यह भी जोड़ा कि ईरानी वार्ताकार समझौता करने के इच्छुक दिख रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम जहाँ हैं, उसे लेकर मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूँ।" डोनाल्ड ट्रंप ने सुझाव दिया कि सप्ताहांत की चर्चाओं के विफल होने और घेराबंदी लागू होने के बाद, अगले 48 घंटों के भीतर पाकिस्तान में अगले दौर की बातचीत हो सकती है, जो बढ़ते दबाव के बीच एक नए कूटनीतिक प्रयास का संकेत है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने भी जोर देकर कहा कि किसी भी समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी के लिए 'बेहद विस्तृत' सत्यापन तंत्र शामिल होना चाहिए। बातचीत के अगले चरण में यह प्रमुख मुद्दा हो सकता है। इस बीच, पूरे क्षेत्र में तनाव और कूटनीति का असर दिख रहा है। इजरायल और लेबनान ने 14 अप्रैल को दशकों में पहली बार अपनी पहली सीधी बातचीत की, जिसमें दोनों पक्ष जुड़ाव जारी रखने पर सहमत हुए। हालांकि, इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में युद्धविराम के लिए प्रतिबद्धता नहीं जताई, जो ईरान-अमेरिका गतिरोध से जुड़ा एक और संवेदनशील मुद्दा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 16:26:19 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रम्प ने फिर दी चेतावनी : होर्मुज खोलने के लिए ईरान के पास सिर्फ 48 घंटे, फिर कहर बरपेगा</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) खोलने के लिए ईरान को दी गई 10 दिन की मोहलत खत्म होने से पहले 48 घंटे का आखिरी अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि समझौता न होने पर ईरान पर 'कहर' टूटेगा। इस मार्ग के बंद होने से वैश्विक तेल और एलएनजी आपूर्ति ठप हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-again-warns-that-iran-has-only-48-hours-to/article-149151"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/donald-trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए ईरान को दिया गया 10 दिन का समय खत्म होने में अब सिर्फ 48 घंटे बचे हैं। ईरान-अमेरिका के बीच समझौता न होने या होर्मुज न खुलने की स्थिति में ईरान पर कहर टूट पड़ेगा।  उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, याद है जब मैंने ईरान को समझौता करने या होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए 10 दिन का समय दिया था। समय निकलता जा रहा है। सिर्फ 48 घंटे बाद ईरान पर कहर टूट पड़ेगा। गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनियाभर में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और कच्चे तेल का निर्यात प्रभावित हुआ है। ईरान ने कहा है कि वह अमेरिका, इजरायल और इनके सहयोगियों के जहाजों को होर्मुज से पार नहीं होने देगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 13:37:56 +0530</pubDate>
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