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                <title>red - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अच्छाई की जीत का प्रतीक है होली का पर्व </title>
                                    <description><![CDATA[मान्यता है कि इस दिन अगर किसी को लाल रंग का गुलाल लगाया जाए तो सभी तरह के मनभेद और मतभेद दूर हो जाते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-festival-of-holi-is-a-symbol-of-victory-of-good--it-is-believed-that-if-red-colored-gulal-is-applied-to-someone-on-this-day--then-all-kinds-of-differences-and-differences-go-away/article-6313"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/holi5_new.jpg" alt=""></a><br /><p>बुराई पर अच्छाई की जीत की प्रतीक होली का सामाजिक महत्व भी है। यह एक ऐसा पर्व होता है जब लोग आपसी मतभेद भुलाकर एक हो जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन अगर किसी को लाल रंग का गुलाल लगाया जाए तो सभी तरह के मनभेद और मतभेद दूर हो जाते हैं।</p>
<p><br />क्योंकि लाल रंग प्यार और सौहार्द का प्रतीक होता है। इसलिए यह आपसी प्रेम और स्नेह बढ़ाता है। वहीं धार्मिक महत्व की बात करें तो इस दिन होलिका में सभी तरह की नकारात्मक शक्तियों का नाश हो जाता है और सकारात्मकता की शुरुआत होती है- होलिका दहन के दिन होली जलाकर  होलिका नामक दुर्भावना का अंत और भगवान द्वारा भक्त की रक्षा का जश्न मनाया जाता है।  होली का त्योहार प्रेम और सद्भावना से जुड़ा त्योहार है जिसमें अध्यात्म का अनोखा रूप झलकता है। इस त्योहार को रंग और गुलाल के साथ मनाने की परंपरा है।  होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है, जहां होलिका बुराई और भक्त प्रहलाद अच्छाई का प्रतीक है, व्यापक अर्थ में देखा जाए तो होली की अग्नि प्रज्ज्वलित करने में क्षुद्र सांसारिक इच्छाओं का दमन और आध्यत्मिक उन्नति के पथ पर बढ़ने का संकेत निहित है, इस दिन झूठे अहम् और शत्रुता को भूलकर लोग, एक दूसरे को गले लगाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Mar 2022 14:43:14 +0530</pubDate>
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                <title>सतरंगी सियासत</title>
                                    <description><![CDATA[देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के नेताओं की ओर से तीखी और बेसुरी बयानबाजी हो रही। सलमान खुर्शीद और राशिद अल्वी के बयानों के मायने क्या? मतलब यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ रहा। कोई कम नहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%A4/article-2413"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/qutub-minar,delhi,india1.jpg" alt=""></a><br /><p>देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के नेताओं की ओर से तीखी और बेसुरी बयानबाजी हो रही। सलमान खुर्शीद और राशिद अल्वी के बयानों के मायने क्या? मतलब यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ रहा। कोई कम नहीं। सलमान खुर्शीद की पुस्तक ‘सनराइज ओवर अयोध्या: नेशनहुड इन आवर टाइम्स’ आजकल चर्चा में। उन्होंने आरएसएस एवं हिन्ुत्व के बहाने आतंकी संगठन बोको हराम और आईएसआईएसआई का जिक्र कर डाला। सीधा कहें तो तुलना कर डालीं। सो, चुनावी सियासत में उबाल आना ही है। साल 1984 के सिख विरोधी दिल्ली दंगों के बाद उनके द्वारा लिखी एक पुस्तक के कुछ पन्ने भी आजकल चर्चा में। इसके बाद एक और पार्टी नेता राशिद अल्वी ने जय श्रीराम बोलने वालों को राक्षस बता डाला। मतलब दोनों ही ओर से चुनाव में ध्रुवीकरण की साफ कोशिश! यानी आ गए वहीं के वहीं। उसी की गर्मीं दिल्ली से लेकर सभी ओर बढ़ रही। लेकिन क्या इसका फायदा किसी को मिलेगा? हां, नुकसान किसका होगा, यह बताने की जरुरत नहीं।</p>
<p><br /> <strong>कितनी चर्चा बाकी?</strong><br /> राजस्थान में मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों का मसला एक बार फिर चर्चा में। सीएम गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम पायलट पार्टी आलाकमान से खुलकर गुफ्तगू जो कर चुके। हां, अभी शायद राहुल गांधी से चर्चा बाकी। ऐसे संकेत। इस बारे में प्रियंका गांधी भी जोर आजमाइश कर चुकीं। फिर केसी वेणुगोपाल एवं अजय माकन तो कई बार दिल्ली से लेकर जयपुर तक दौड़ लगा चुके। गहलोत एवं पायलट कांग्रेस आलाकमान का निर्णय मोनेंगे। ऐसा दावा। वैसे, पंजाब में कैप्टन अमरिन्दर सिंह भी सोनिया गांधी से वार्ता होने के बाद बाहर आकर यही बोले थे। बाद में रायता इतना फैला कि संभाले नहीं संभल रहा। हालांकि मरुधरा में फिलहाल ऐसी कोई संभावना नहीं। फिर भी भविष्य में क्या होगा? इसे लेकर कोई आश्वस्त नहीं। हां, हर दिन नए-नए कयास, चर्चाएं, बातें, फार्मूले। मतलब सभी चकरघन्नी हुए जा रहे। अब कौन किसकी फिरकी ले रहा। आशार्थियों की समझ से परे। फिर भी उनकी उम्मीदें कायम। यही राजनीति। पिुर भी एक ही सवाल। और कितनी चर्चा बाकी?</p>
<p><br /> <strong>भारत का रूआब..</strong><br /> भारत का दुनियां के फलक पर कूटनीतिक रूआब लगातार बढ़ रहा। अफगानिस्तान के मसले पर हालिया ‘दिल्ली डायलॉग’ इसका पुख्ता संकेत एवं संदेश। दुनियां की बड़ी ताकतें अब भारत की पहल को नजरअंदाज करने की हैसियत में नहीं। रूस के एनएसए की मौजूदगी इसका प्रमाण। जबकि चीन ने भी इसमें हिस्सा लेने से सीधे इनकार नहीं किया। हां, पाक से उम्मीद भी क्या? लेकिन ईरान के एनएसए ने ‘दिल्ली डायलॉग’ में भाग लेकर भारत के सामने पाक को जरुर उसकी हैसियत बता दी। बची खुची कसर तालिबान ने पूरी कर दी। कहा, कोई आपत्ति नहीं, भारत का प्रयास अच्छा। उसे भारत से मदद की आस। फिर पांच मध्य एशियाई देशों की चर्चा में उपस्थिति भारत के प्रभाव की बानगी एवं प्रमाण। फिर इन सभी का पीएम मोदी से शिष्टाचार भेंट करना। अपने आप में नई कहानी बता रहा। वैसे भी अगुवाई अगर अजित डोभाल करें। तो कहीं शक की कोई गुंजाईश नहीं। बात सुरक्षा एवं आतंकवाद की ही नहीं। भारत की कूटनीतिक आभा की भी।</p>
<p><strong><br /> बढ़ रहा सियासी कद!</strong><br /> जब से योगीजी यूपी के सीएम बने। अपने अभिनव कामों से वह राष्ट्रीय सुर्खियां बटोरते रहे। खासकर उन्होंने कानून व्यवस्था के मामले में जो नजीर पेश की। उसके कई कायल। अब संगठन के भीतर भी उनका कद बढ़ रहा। पार्टी में उन्हें भविष्य का नेता बताया जा रहा। हालांकि उनकी तमाम चर्चाओं पर विराम लगाने की कोशश। कहा, उनकी कोई राष्टÑीय महत्वाकांक्षा नहीं। वह यूपी में ही काम करके ही खुश। लेकिन परिस्थितियां कहां किसी के रोकने से रूकतीं। हालात अपने आप बदलते चले जाते। दिल्ली में हाल में संपन्न बीजेपी की राष्टÑीय कार्यकारिणी में सीएम योगी आदित्यनाथ ने राजनीतिक प्रस्ताव पेश किया। कहा जा रहा योगीजी पीएम मोदी की राह पर। करीब दो दशक पहले मोदीजी ने भी ऐसे ही राजनीतिक प्रस्ताव रखा था। सो, इसके मायने निकाले जा रहे। क्योंकि ऐसी बैठकों में यह काम पार्टी के राष्टÑीय नेता करते रहे। लेकिन योगीजी को इस काम के लिए आगे करना। अपने आप में संकेत। यानी योगीजी भाजपा की टॉप लीडरशिप में शुमार।</p>
<p><br /> <strong>क्यों हो रहे लाल-पीले?</strong><br /> महामहिम सत्यपाल मलिक आजकल खासे लाल पीले हो रहे? इसी फेर में संवैधानिक पद की मर्यादा भी लांध रहे। लेकिन महत्वाकांक्षा क्या से क्या न करवाए! वह कैसी भी हो सकती है। ऐसा लग रहा, कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना। यूपी चुनाव नजदीक। और किसान आंदोलन के नेता टिकैत भी उसी क्षेत्र के निवासी जहां से मलिक। फिर दोनों ही जाट समुदाय से। मलिक की पृष्ठभूमि समाजवादी। तिस पर कश्मीर के राज्यपाल रह चुके। सो, सरकार और पीएम मोदी को घुड़की देते नहीं मान रहे। लेकिन इन सबमें असल बात क्या? हां, वह कभी लोकसभा सांसद रह चुके। राज्यसभा की भी शोभा बढ़ा चुके। कहीं ऐसा तो नहीं? राजभवन में अब मन नहीं लग रहा हो। यदि परेशान होकर सरकार ही पद से हटा दे तो शहीद कहलाएंगे। इसीलिए सरकार भी बर्दाश्त कर रही! आखिर ऐसी बयानबाजी का क्या मतलब? लेकिन लाल पीले होने से भी तो बात नहीं बनेगी न। किसान आंदोलन अपनी जगह। आखिर संवैधानिक पद और उसकी मर्यादा का क्या?</p>
<p><strong><br /> एक चर्चा यह भी!</strong><br /> बस कयास, सुगबुगाहट, आशंका, अनुमान...! राजस्थान में भाजपा के फिर से सक्रिय होने की चर्चा। असल में, कांग्रेस सरकार में संभावित बदलाव के बाद विधायकों में बगावत की आशंका जताई जा रही। सो, भाजपा फिर से ताक में! यानी ‘ऑपरेशन लोटस पार्ट टू’। पिछले साल भी भाजपा ने कोशिश की थी। ऐसा आरोप कांग्रेस का। जबकि भाजपा ने इससे इनकार किया था। पर अफवाह कब सच हो जाए। कोई कुछ नहीं कह सकता। प्रभारी प्रदेश भी तफरी लेने आए बताए। लेकिन बात कहां तक पहुंचेगी। अभी भविष्य के गर्भ में। आखिर इन सबमें कौन लाभ में? जिनको पद प्रतिष्ठा चाहिए वह या जो इसे रोके हुए। फिर इधर का हाल भी उपचुनाव के बाद ठीक नहीं। हो सकता है उसकी कसर अब पूरी हो जाए। इस बार चूकने का मौका भी दोनों ओर से नहीं रहेगा। आखिर इधर-उधर तैरती चर्चाओं को कौन रोके? धुंआं भी तभी उठता। जब कहीं आग लगती है। लेकिन यह लगी किधर है? इसका भी इंतजार किया जाना चाहिए!     <strong>-दिल्ली डेस्क</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Nov 2021 16:48:47 +0530</pubDate>
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                <title>राममंदिर निर्माण को राजस्थान देगा रफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[जिन खास पत्थरों की कमी थी, वह अब गहलोत सरकार भरपूर देगी : निर्माण को भरतपुर के बंशी पहाड़पुर में दबे गुलाबी-लाल पत्थर की हुई थी मांग लेकिन खनन की नहीं थी अनुमति]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/617b831047ca4/article-1978"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/gehlot_rammandir.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> राजस्थान की गहलोत सरकार की राम मंदिर के तेज गति से निर्माण में अहम भागीदारी होने जा रही है। मंदिर के निर्माण में जिन गुलाबी-लाल पत्थरों की कमी से रामजन्म भूमि मंदिर निर्माण ट्रस्ट जूझ रही थी, वह अब राजस्थान से दिसम्बर-2021 से भरपूर मात्रा में सप्लाई हो सकेंगे। भरतपुर के बंशी पहाड़पुर इलाके में इन पत्थरों के अथाह भंडार दबे थे, लेकिन वन भूमि होने के कारण खनन मुमकिन नहीं था। गहलोत सरकार ने पिछले दिनों इस जरुरत को समझा और केन्द्रीय वन पर्यावरण व जलवायु मंत्रालय से इस क्षेत्र को वन एरिया से अलग कराने का प्रस्ताव भिजवाया। जिसे 11 जून 2021 को मंजूरी मिल गई। राजस्थान ने 398 हैक्टेयर खनन क्षेत्र विकसित कर लिया है। अब इस क्षेत्र में पहले चरण में 230.64 हैक्टेयर में 39 खनन ब्लॉकों की नीलामी शुरू हो गई है। पहले फेज में 135.94 हैक्टेयर क्षेत्र में 30 ब्लॉक 24 नवम्बर तक और दूसरे फेज में 94.70 हैक्टेयर क्षेत्र के 9 खनन ब्लॉक 3 दिसम्बर तक नीलाम कर दिए जाएंगे। खनन शुरू होते ही पत्थरों की डिमांड राममंदिर के लिए पूरी हो सकेगी।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>पहले अवैध खनन था, ना डिमांड पूरी और ना ही राजस्व था</strong></span></span><br /> वन क्षेत्र होने से पहले यहां चोरी-छिपे खनन माफिया अवैध खनन करते थे। इसी में से कुछ पत्थर मंदिर के लिए अयोध्या सप्लाई होता था। लेकिन डिमांड के अनुसार आपूर्ति नहीं थी। गहलोत सरकार के संज्ञान में यह आया था तो मंदिर की डिमांड के साथ वैध खनन में बदलने का फैसला किया गया। मंदिर निर्माण को भरपूर पत्थर सप्लाई के साथ राजस्थान सरकार को अब 300 करोड़ की राजस्व प्राप्ति और करीब 10 हजार लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार इससे मिल सकेगा।</p>
<p><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>राममंदिर निर्माण के लिए सेंड स्टोन डिमांड को देखते हुए सरकार संवेदनशील रही</strong></span></span></p>
<p>‘राममंदिर निर्माण के लिए सेंड स्टोन डिमांड को देखते हुए सरकार संवेदनशील रही। सीएम अशोक गहलोत के खुद अथक प्रयास कर बारेठा वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र से बंशी-पहाडपुर को अलग करवाया। जून में वन मंत्रालय से वन भूमि के डायवर्जन की मंजूरी ली। अब खनन ब्लॉक नीलाम हो रहे हैं। सेंड स्टोन मंदिर को पूर्ण मात्रा में उपलब्ध हो सकेंगे।’<br /> <strong>-डॉ.सुबोध अग्रवाल, एसीएस, खान विभाग</strong><br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> सीएम धन्यवाद के पात्र</strong></span></span><br /> अयोध्या से मंदिर निर्माण में जुटे लोग आए थे। सीएम से मिलकर पत्थरों की आवश्यकता की बात रखी थी। मैं खुद भी सीएम से उनके साथ मिला था। केन्द्र व राज्य सरकार दोनों का इसमें रोल रहा। राज्य सरकार ने प्रस्ताव भेजा और केन्द्रीय वन मंत्रालय ने मंजूरी दी। सीएम का पॉजिटिव रुख रहा। इसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं। <br /> <strong>- गुलाब चंद कटारिया, नेता प्रतिपक्ष</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>भरतपुर</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Oct 2021 12:23:15 +0530</pubDate>
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