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                <title>US Iran Conflict - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>US Iran Conflict RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ट्रंप का बड़ा ऐलान, बोले- होर्मुज जलडमरूमध्य अब कहलाएगा ट्रंप जलडमरूमध्य, ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका जीत रहा है</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेक्सास में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए दावा किया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध जीत रहा है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर उनका नियंत्रण है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब इसे 'ट्रंप जलडमरूमध्य' कहेगा। साथ ही उन्होंने नतांज परमाणु ठिकाने के पास पिकएक्स पहाड़ पर हलचल दिखने पर ईरान को चेतावनी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trumps-big-announcement-strait-of-hormuz-will-now-be-called/article-165220"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/trump1.png" alt=""></a><br /><p>टेक्सास। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि अमेरिका अब होर्मुज जलडमरूमध्य को ट्रंप जलडमरूमध्य कहेगा क्योंकि अमेरिका ईरान के खिलाफ इस युद्ध को जीत रहा है। ट्रंप ने कहा, ईरान के खिलाफ युद्ध में हमारी जीत होते ही तेल के दाम नीचे आएंगे। हम इसे जीतेंगे, बल्कि जीत ही रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य पर हमारा नियंत्रण है। मुझे लगता है कि हमें इसे ट्रंप जलडमरूमध्य बुलाना चाहिए। मुझे इससे कुछ तो मिलना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा, देवियों और सज्जनों, मैं एक ऐलान करना चाहता हूं। हम उसे ट्रंप जलडमरूमध्य कहेंगे। मुझे यकीन है कि ईरानी नेताओं को यह जानकर बहुत खुशी होगी। ट्रंप ने कहा कि ईरान धराशाई हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका ईरान के नतांज परमाणु ठिकाने वाले पिकएक्स पहाड़ पर हमला कर सकता है, क्योंकि वहां कुछ हलचल देखने को मिली है। उन्होंने कहा कि अमेरिका क्षेत्र में हर हलचल से वाकिफ है। </p>
<p>उन्होंने कहा, हम जानते हैं कि क्या हो रहा है। मैं ईरान को सलाह दूंगा कि वे कुछ कोशिश न करें, क्योंकि फिर हमें उन पर करारा प्रहार करना पड़ेगा। हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है। हम ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने दे सकते। उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने 22 जून 2025 को ईरान के नतांज परमाणु ठिकाने पर हमला किया था और दावा किया था कि इस हमले में ईरान की परमाणु इकाई तबाह हो गयी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Sep 2026 18:00:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान के मिसाइल हमलों के जवाब में अमेरिका की बड़ी कार्रवाई, तीन ईरानी तेल टैंकरों को किया निष्क्रिय</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी सेना ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) द्वारा अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों पर मिसाइल दागने के बाद तीन ईरानी तेल टैंकरों पर हमला कर उन्हें नष्ट कर दिया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इसे ईरान के आर्थिक ताने-बाने पर कड़ा हमला बताते हुए चेतावनी दी है कि अमेरिकी जहाजों पर हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/major-action-by-america-in-response-to-irans-missile-attacks/article-164842"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/iran1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने तीन ईरानी कच्चे तेल के टैंकरों पर उस समय हमला किया जब ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने क्षेत्रीय जलक्षेत्र में गश्त कर रहे अमेरिकी नौसेना के दो युद्धपोतों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इस घटना से फारस की खाड़ी और उसके आसपास के क्षेत्रों में नौवहन और ज्यादा बाधित हो सकती है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा कि एक अमेरिकी विमानवाहक पोत और निर्देशित-मिसाइल विध्वंसक ने ईरान के कई अकारण हमलों से सफलतापूर्वक बचाव किया और किसी भी अमेरिकी कर्मी को नुकसान नहीं पहुंचा।</p>
<p>सेंटकॉम ने कहा कि ईरान के नाकाम हमलों के बाद, सेंटकॉम ने खार्ग द्वीप के पास और जास्क के पास आईआरजीसी के कच्चे तेल के टैंकरों को हमेशा के लिए बेकार कर दिया। अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में बिना लदे कच्चे तेल के टैंकर को भी नष्ट कर दिया। चालक दल को जहाज छोड़ने का निर्देश देने के बाद, जहाज को बेकार करने के लिए कई अहम जगहों पर हमला किया गया। सेंटकॉम ने आगे कहा "ईरान के ये तीन कच्चे तेल के टैंकर एक ऐसे अरबों डॉलर के 'शैडो नेटवर्क' का हिस्सा हैं, जो आईआरजीसी और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को फंड देता है। ईरान के पास इनकी सुरक्षा का कोई माध्यम नहीं है।"</p>
<p>सेंटकॉम कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा, "आईआरजीसी को यह साफ़ संदेश जाना चाहिए कि अगर आप हमारे दो जहाज़ों पर गोली चलाते हैं, तो हम आपके तीन जहाज़ों को नष्ट करके आप पर और भी भारी आर्थिक बोझ डालेंगे। हम अमेरिकी सेना की रक्षा करने में पीछे नहीं हटेंगे और ज़रूरत पड़ने पर ईरान के सीमित और खुले तेल बेड़े को नष्ट कर देंगे।" अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर कहा कि अगर ईरान ने अमेरिकी जहाजों पर हमला किया तो अमेरिका ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाना जारी रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना मध्य पूर्व या हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ईरानी टैंकरों पर हमला कर सकती है।</p>
<p>ईरान ने इन हमलों की निंदा करते हुए इन्हें गैर-कानूनी और आक्रामक बताया और कहा कि इनसे यूएन चार्टर का उल्लंघन हुआ है और अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए खतरा उत्पन्न हुआ है। सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने कहा कि देश इन हमलों का जवाब देगा। रिपोर्ट के अनुसार खार्ग द्वीप के पास एक टैंकर पर अमेरिका के चार प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। तस्नीम ने बताया कि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ।</p>
<p>नवीनतम हमले होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर बढ़े तनाव के बीच हुए हैं जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक प्रमुख नौवहन मार्ग है। ईरान ने जलडमरूमध्य के रास्ते नौवहन को प्रतिबंधित करने की कोशिश की है जबकि अमेरिका ने ईरानी नौवहन पर दबाव बढ़ा दिया है। ईरानी तट से दूर स्थित खार्ग द्वीप एक प्रमुख कच्चे तेल का निर्यात टर्मिनल है और संघर्ष के दौरान इसे निशाना बनाया गया है। सीएनएन द्वारा उद्धृत नौवहन डेटा और उपग्रह तस्वीरों से संकेत मिलता है कि दर्जनों ईरानी टैंकर अभी भी फारस की खाड़ी में और उसके आसपास मौजूद हैं।</p>
<p>अमेरिका और ईरान ने इस सप्ताह की शुरुआत में हमला किया किए जो एक महीने से अधिक समय में उनके बीच पहला प्रत्यक्ष सैन्य हमला था। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि इस टकराव को ज़रूरी नहीं है कि युद्ध कहा जाए और बताया कि उस समय कोई गोलीबारी नहीं हो रही थी। उन्होंने टकराव खत्म होने के लिए कोई समय-सीमा नहीं बताई और कहा कि ईरान लड़ाई को खत्म करने के लिए कदम उठा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Sep 2026 18:05:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सेंटकॉम का दावा: ईरान पर हमला होर्मुज जलडमरूमध्य में बारुदी सुरंग बिछाने से रोकने के लिए था और कुछ नहीं !</title>
                                    <description><![CDATA[अमरीकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने स्पष्ट किया है कि ईरान पर हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य आईआरजीसी को होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग बिछाने से रोकना था। सेंटकॉम ने ईरान के आक्रामकता के दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए की गई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/centcom-claims-the-attack-on-iran-was-to-stop-it/article-164246"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/untitled-design-(1).png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमरीकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने दावा किया है कि ईरान पर हालिया हमले का उद्देश्य ईरानी सेना को होर्मुज जलडमरूमध्य में बारुदी सुरंग बिछाने से रोकना था। सेंटकॉम ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए हमले "आक्रामकता की कार्रवाई" थे। सेंटकॉम ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "दावा: ईरान के आईआरजीसी ने हाल ही में एक बयान में दावा किया कि आईआरजीसी को होर्मुज जलडमरूमध्य में बारुदी सुरंग बिछाने से रोकने के लिए अमेरिकी सेना द्वारा किए गए हमले 'आक्रामकता की कार्रवाई' थे। यह दावा पूरी तरह से गलत है।"</p>
<p>सेंटकॉम ने एक्स पर कहा "तथ्य: अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तत्काल खतरा पैदा करने वाली आईआरजीसी की सुरंग बिछाने वाली सेना के खिलाफ सीमित और सटीक कार्रवाई की। असल में, ईरान ने खतरा पैदा किया और अमेरिकी सेना ने नागरिक नाविकों, व्यापारिक जहाजों और वैश्विक व्यापार के निर्बाध प्रवाह की रक्षा के लिए इसे खत्म कर दिया।" कमांड का दावा है कि हमले का उद्देश्य व्यापारिक परिवहन और व्यापार के निर्बाध प्रवाह की रक्षा करना था।</p>
<p>एक्सियोस के पत्रकार बराक राविद ने एक अज्ञात अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिका ने लराक द्वीप पर ईरानी मिसाइल लॉन्चरों पर हमला किया था। इससे पहले, होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी द्वीप लराक पर कई धमाकों की आवाज सुनी गई थी। इसके बाद, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी जहाजों और पश्चिमी एशिया में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी थीं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 14:02:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>होर्मुज समझौते के बाद भी नहीं खुलेगा जलडमरूमध्य, ईरान ने कहा- मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ओमान के साथ समझौता होने के बावजूद इसे तुरंत नहीं खोला जाएगा। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बताते हुए कहा कि सात मील चौड़ा अस्थायी दोतरफा मार्ग बनाया गया है, लेकिन जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, दक्षिणी मार्ग बंद रहेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/strait-will-not-open-even-after-hormuz-agreement-iran-said/article-163892"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के उप विदेश मंत्री (कानूनी एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों) काजेम गरीबाबादी ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान के बीच में हुए समझौते की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि इस समझौते का मतलब यह नहीं है कि जलडमरूमध्य तत्काल खोल दिया जाएगा।  गरीबाबादी के अनुसार ओमान के साथ हुए समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना दो अलग-अलग मुद्दे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 58 वर्षों से जहाज ओमान की ओर के जलक्षेत्र से गुजरते रहे हैं, जिससे ईरान को गंभीर नुकसान हुआ है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अब होर्मुज ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय है और जहाजों के प्रवेश तथा निकास मार्गों में बुनियादी बदलाव किए जाने जरूरी हैं। दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत फारस की खाड़ी में प्रवेश का मार्ग ईरानी जलक्षेत्र से होकर गुजरेगा, जबकि निकास मार्ग ओमान के क्षेत्रीय जल से होकर जाएगा। हालांकि, दोनों मार्गों पर जहाज ईरानी जलक्षेत्र से होकर गुजरेंगे। उप विदेश मंत्री ने नए मार्ग को "दोतरफा राजमार्ग" जैसा बताते हुए कहा कि इसकी कुल चौड़ाई करीब सात मील होगी। उन्होंने बताया कि यह मार्ग अस्थायी है। ईरान और ओमान अगले 30 से 60 दिनों में स्थायी मार्ग तय करने के लिए बातचीत करने की उम्मीद है, जो पिछली समुद्री यातायात व्यवस्था का स्थान लेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरुमध्य से होकर जाने वाला दक्षिणी मार्ग बंद रहेगा और इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) को सूचित किया जाएगा। यदि ईरान की मांगें पूरी नहीं होती हैं तो होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा। गरीबाबादी ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका द्वारा बनाया गया अवैध दक्षिणी मार्ग उसके अपने समझौता ज्ञापन के तहत किए गए दायित्वों का उल्लंघन था। उन्होंने दावा किया कि ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरुमध्य को बंद किए जाने के कारण अमेरिका को अपने पूर्व के रुख से पीछे हटना पड़ा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 Aug 2026 18:20:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान के साथ विवाद सुलझाने के लिए समय-सीमा तय करना मुश्किल : राष्ट्रपति ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया है कि ईरान के साथ सैन्य तनाव सुलझाने के लिए समय-सीमा तय करना कठिन है। उन्होंने ईरान को एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी बताते हुए कहा कि पूर्व में हुआ संघर्ष विराम अब प्रभावी नहीं है, हालांकि विशेष वार्ताकारों की टीम के माध्यम से कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/president-trump-finds-it-difficult-to-set-a-deadline-to/article-161639"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/trump1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ विवाद को सुलझाने के लिए समय-सीमा तय करना मुश्किल है। ट्रंप ने शुक्रवार को 'रियल अमेरिकाज़ वॉयस' से कहा, "यह हमेशा मुश्किल होता है। हमने वेनेजुएला का मामला एक दिन से भी कम समय में निपटा लिया था। उसमें हमारा कोई नुकसान नहीं हुआ था। ईरान के मामले में, परिभाषाओं के आधार पर कहें तो, 16-18 लोग (प्रभावित हुए हैं)।"</p>
<p>उन्होंने माना कि चल रहे विवाद के दौरान ईरान उनकी पिछली सोच की तुलना में कहीं ज़्यादा कड़ा प्रतिद्वंद्वी साबित हुआ है। कैंप डेविड से बात करते हुए श्री ट्रंप ने कहा, "उनके पास न तो नौसेना है और न ही वायुसेना। ज़्यादातर लोग हार मान लेते। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, इसलिए मैं उन्हें इसका श्रेय देता हूं।" उनसे पूछा गया था कि इस्लामिक रिपब्लिक की क्षमताओं को कमज़ोर करने के लिए और कितने हमले करने होंगे।</p>
<p>उन्होंने आगे कहा, "वे बहुत सख्त माने जाते हैं। वे वाकई सख्त हैं।" ट्रंप ने उन अधिकारियों के नाम बताए जो अभी ईरान के साथ बातचीत में शामिल हैं, जिनमें विशेष दूत स्टीव विटकोफ और जेरेड कुशनर, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो शामिल हैं। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, "स्टीव बात कर रहे हैं, जेरेड... जेडी बहुत मज़बूती से शामिल हैं... मार्को भी शामिल हैं।" पेंटागन के 'डिफेंस कैजुअल्टी एनालिसिस सिस्टम' के अनुसार, 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' में मारे गए सैनिकों की संख्या 14 है। पेंटागन ने यह भी बताया कि "विदेशी अभियानों" में चार सैनिक मारे गए।</p>
<p>तेहरान और वॉशिंगटन ने 18 जून की रात एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें 28 फरवरी से शुरू हुए विवाद को खत्म करने की बात कही गई थी। हालांकि, 8 जुलाई के बाद से अमेरिकी सेना ने ईरान पर कई बार हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों के खिलाफ ईरान की कार्रवाई के जवाब में किए गए थे। ईरानी सेना ने मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर हमले करके जवाब दिया। ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक के बीच हुआ संघर्ष-विराम अब मान्य नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 18:31:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>क्या टल गया तीसरे विश्व युद्ध का खतरा? अमेरिका-ईरान ने तनाव घटाने पर जताई सहमति, तकनीकी वार्ता जारी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव के बाद फिलहाल दोनों पक्ष पीछे हटने पर सहमत हुए हैं। ट्रंप प्रशासन के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन जारी रखने के लिए अंतरिम व्यवस्था लागू की गई है। हालांकि, क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता और तनाव अभी भी बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/has-the-threat-of-third-world-war-been-averted-america-iran/article-158362"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/12200-x-600-px)9.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य हमलों के बाद दोनों पक्षों ने फिलहाल तनाव कम करने पर सहमति जतायी है। ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को कहा कि दोनों पक्ष "फिलहाल पीछे हटेंगे" और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही जारी रहेगी। इस संबंध में ईरान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच एक अंतरिम व्यवस्था लागू है और जहाजों की आवाजाही में बाधा नहीं आएगी। </p>
<p>होर्मुज में वास्तविक स्थिति अभी भी सामान्य नहीं दिख रही है, जिससे वाणिज्यिक जहाजों के संचालकों और चालक दल के बीच अनिश्चितता और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं। उल्लेखनीय है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने दावा किया कि अमेरिका द्वारा ईरानी ठिकानों पर हमले किये जाने के बाद उसने कुवैत और बहरीन सहित पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इससे पहले होर्मुज में आवाजाही के कारण अमेरिका-ईरान के बीच हमलों का आदान-प्रदान हुआ था।</p>
<p>एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ईरान के साथ तकनीकी स्तर की वार्ता निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले चेतावनी दे चुके हैं कि यदि ईरान की ओर से हमले जारी रहे तो अमेरिका और सैन्य कार्रवाई करेगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि क्षेत्र के देशों को अपनी भूमि अथवा सुविधाओं का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए नहीं होने देना चाहिये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 13:04:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कच्चा तेल फिर 95 डॉलर के करीब, जानें दाम बढ़ने के कारण, थोक मुद्रास्फीति मार्च में बढ़कर 3.88 प्रतिशत पर पहुंची</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी हस्तक्षेप और ईरान वार्ता विफल होने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने की आशंका से दाम $95 प्रति बैरल के पार पहुंचने की कगार पर हैं। वैश्विक तनाव और ताज़ा प्रतिबंधों ने ऊर्जा बाज़ार में अस्थिरता बढ़ा दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/crude-oil-again-close-to-95-dollars-due-to-increase/article-150472"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/crude.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल बुधवार को 95 डॉलर प्रति बैरल करीब पहुंच गया। हार्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका हस्तक्षेप के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला की बहाली में एक बार फिर संशय पैदा हो गया है। इससे इसके दामों पर काफी असर पड़ा। अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता विफल होने के बाद कच्चे तेल के दामों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद लगाई जा रही है। अमेरिका की ताजा घोषणा से तनाव बढ़ने के कारण कच्चा तेल फिर 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकलने की संभावना है। </p>
<p>कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण मार्च में थोक मूल्य आधारित मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 3.88 प्रतिशत पर पहुंच गयी। पिछले साल मार्च में यह आंकड़ा 2.25 प्रतिशत और इस साल फरवरी में 2.13 प्रतिशत था। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च में कच्चे तेल की कीमत सालाना आधार पर 51.57 प्रतिशत बढ़ी। कच्चे तेल में जबरदस्त उछाल के कारण प्राथमिक वस्तु वर्ग में थोक महंगाई की दर 6.36 प्रतिशत दर्ज की गयी।</p>
<p>थोक मुद्रास्फीति में सबसे अधिक 64 प्रतिशत का भारांश रखने वाले विनिर्मित वस्तुओं के वर्ग में भी मुद्रास्फीति एक साल पहले के 3.21 प्रतिशत से बढ़कर 3.39 प्रतिशत पर पहुंच गयी। तिलहनों के थोक दाम भी सालाना आधार पर 22.81 प्रतिशत बढ़े और महंगाई बढ़ाने में इनका भी योगदान रहा।पेट्रोल और डीजल के दाम में साल-दर-साल क्रमशः 2.50 प्रतिशत और 3.26 प्रतिशत की वृद्धि हुई। एलपीजी की थोक कीमत हालांकि एक साल पहले के मुकाबले 1.54 प्रतिशत कम रही।</p>
<p>खाने-पीने की वस्तुओं में अनाजों के दाम 2.51 प्रतिशत कम हुए हैं। सब्जियों की मुद्रास्फीति 1.45 प्रतिशत दर्ज की गयी है। फलों के दाम 2.11 प्रतिशत और दूध के 2.62 प्रतिशत बढ़े हैं। अंडा, मांस और मछली की महंगाई दर 6.63 प्रतिशत रही। गत 28 फरवरी को शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल के दाम में तेज उछाल देखा गया है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इस संकट से पहले कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब है। इससे देश में भी थोक महंगाई बढ़ी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 13:23:08 +0530</pubDate>
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                <title>प्रमोद तिवारी ने किया अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम का स्वागत: स्थायी शांति की अपील, विश्व शांति के लिए एक सकारात्मक कदम</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच 15 दिवसीय युद्धविराम का स्वागत किया है। हालांकि, उन्होंने शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद को चुने जाने और इसमें चीन की भूमिका पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इसे भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती बताते हुए स्थायी शांति की प्रार्थना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pramod-tiwari-welcomed-the-ceasefire-between-america-and-iran-appealed/article-149493"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pramod-tiwari.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस राज्यसभा सांसद और उप नेता प्रमोद तिवारी ने अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हुए दो सप्ताह के युद्धविराम का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय विश्व शांति के लिए एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने बुधवार को ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा कि सभी पक्षों को सद्बुद्धि मिले और यह 15 दिनों का अस्थायी युद्धविराम स्थायी शांति समझौते में परिवर्तित हो। प्रमोद तिवारी ने कहा एक भारतीय होने के नाते उन्हें यह पीड़ा भी है कि आगे की शांति वार्ता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में प्रस्तावित है, जिसमें चीन की भी महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। उनके अनुसार, यह स्थिति भारत की कूटनीतिक एवं राजनीतिक दृष्टि सेचिंताजनक है। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह के संघर्ष विराम को लेकर सहमति बनी है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 10:56:06 +0530</pubDate>
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