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                <title>strategist - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>यूपी चुनाव से पहले कांग्रेस का सबसे बड़ा दांव, दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम को सौंपी यूपी की कमान</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस ने दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम को राष्ट्रीय महासचिव और यूपी प्रभारी नियुक्त किया है। अविनाश पांडे की जगह आए गौतम के जरिए पार्टी का लक्ष्य दलित और वंचित वोट बैंक को दोबारा साधना है। लोकसभा चुनाव 2024 के उत्साहजनक नतीजों के बाद कांग्रेस जमीन पर अपना आधार मजबूत करने में जुट गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congresss-biggest-bet-before-up-elections-handing-over-the-command/article-158310"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(7).png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में बड़ा सियासी दांव चला है। दलित नेता और पूर्व आप मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को कांग्रेस का महासचिव बनाकर यूपी का प्रभारी नियुक्त किया गया है। उन्होंने ब्राह्मण नेता अविनाश पांडे की जगह ली है। इसे संगठन में रुटीन बदलाव नहीं, बल्कि दलित और वंचित तबकों को साधने की आक्रामक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि भाजपा के सवर्ण वोटरों की तरफ झुकाव के बाद दलित वोट बैंक में जगह खाली हुई है। 1980 के दशक के अंत तक दलित कांग्रेस के कोर वोटर थे, बाद में बसपा ने इस पर कब्जा कर लिया। लेकिन पिछले 7-10 साल में बसपा सत्ता की गंभीर दावेदार नहीं रही।</p>
<p>एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "बसपा का ग्राफ गिरा है। हमें मौका दिख रहा है।" कांग्रेस को भरोसा 2024 लोकसभा नतीजों से मिला है। 2019 में सिर्फ रायबरेली सीट और 6.36% वोट शेयर के मुकाबले 2024 में कांग्रेस ने 17 में से 6 सीटें 9.46% वोट शेयर के साथ जीतीं। सपा-कांग्रेस गठबंधन ने भाजपा को यूपी में नंबर-2 पर धकेल दिया। भाजपा 2019 की 62 सीटों से घटकर 33 पर आ गई, सपा ने 37 सीटें जीतीं।</p>
<p>विधानसभा में कांग्रेस का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा। 2017 में सपा से गठबंधन में 105 में से 7 सीटें जीतीं। 2022 में अकेले 399 सीटें लड़कर सिर्फ 2 सीटें- रामपुर खास और फरेंदा जीतीं, जो अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन था। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा, "2024 में हमारा प्रदर्शन बेहतर रहा। सपा से गठबंधन की तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन संगठन मजबूत करके हम गठबंधन की चर्चा में अपनी स्थिति बेहतर करेंगे। हमारे पास जमीन पर काम करने के लिए 5 महीने हैं।"</p>
<p>राजेंद्र पाल गौतम का कांग्रेस में कद तेजी से बढ़ा है। सितंबर 2022 में कांग्रेस जॉइन की, जून 2025 में एससी कांग्रेस विंग के अध्यक्ष बने और जून 2026 में यूपी जैसे बड़े राज्य के प्रभारी। बसपा से आप होते हुए कांग्रेस में आए गौतम को दलित राजनीति और जमीनी मोबिलाइजेशन का अनुभव है। चार्ज लेने के बाद गौतम ने कहा, "मैं एक हफ्ते में यूपी आऊंगा और पार्टी की रणनीति पर चर्चा करूंगा।" पार्टी के एक पदाधिकारी ने कहा, "यह संकेत है कि कुछ हफ्तों में प्रदेश संगठन में और बदलाव हो सकते हैं।" भाजपा का मजबूत संगठन है और उसने गैर-जाटव दलितों व गैर-यादव ओबीसी में भारी निवेश किया है। वहीं सपा यूपी में मुख्य विपक्षी दल बनी हुई है। कांग्रेस को 2027 में बसपा के कमजोर होने और सपा से सीट बंटवारे के बीच अपना दलित बेस दोबारा खड़ा करना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 16:16:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ना IIT और ना IIM..फिर भी बने WhatsApp के नए CEO, जानें कौन हैं कुणाल शाह? </title>
                                    <description><![CDATA[मेटा ने CRED के संस्थापक कुणाल शाह को वॉट्सऐप का नया ग्लोबल हेड नियुक्त किया है। वह विल कैथकार्ट की जगह लेंगे। बिना IIT या IIM डिग्री के, अपनी व्यावसायिक समझ के दम पर फ्रीचार्ज और क्रेड जैसे सफल स्टार्टअप बनाने वाले शाह अब इस वैश्विक मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को नई दिशा देंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/neither-iit-nor-iim-yet-he-became-the-new-ceo/article-157930"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/kunal.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। मुंबई के उद्यमी और CRED के संस्थापक कुणाल शाह को मेटा ने WhatsApp का नया ग्लोबल हेड नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के साथ वे दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक WhatsApp की वैश्विक जिम्मेदारी संभालेंगे। उन्हें यह दायित्व लंबे समय से कंपनी का नेतृत्व कर रहे विल कैथकार्ट की जगह सौंपा गया है। टेक उद्योग में इसे भारतीय प्रतिभा के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।</p>
<p>कुणाल शाह ने मुंबई में पले-बढ़े एक साधारण परिवार से निकलकर स्टार्टअप जगत में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने 2010 में डिजिटल पेमेंट कंपनी FreeCharge की स्थापना की, जिसे बाद में Snapdeal ने खरीद लिया। इसके बाद 2018 में उन्होंने फिनटेक प्लेटफॉर्म CRED शुरू किया, जिसने तेजी से लोकप्रियता हासिल की। कुणाल शाह कई सफल स्टार्टअप्स में निवेशक और सलाहकार भी रहे हैं। अब WhatsApp की कमान संभालने के बाद उनसे प्लेटफॉर्म को नई दिशा देने और वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाने की उम्मीद की जा रही है।</p>
<p>आमतौर पर देखा जाता है कि किसी बड़े कॉर्पोरेट पदों पर रहने वाला व्यक्ति IIT या IIM जैसे इंस्टीट्यूट से पढ़ा लिखा होता है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि कुणाल शाह के पास में ये दोनों ही डिग्रीयां नहीं है। जी हां, कुणाल शाह ने न तो इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और ना ही उनके पास MBA की कोई डिग्री है। उन्होंने सिर्फ BA किया है मगर इसके बावजूद उन्होंने अपनी सोच, अनुभव और बिजनेस समझ के दम पर इतना बड़ा स्टार्टअप खड़ा किया और उनकी मेहनत रंग लाई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 13:25:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर का बयान, अगले कई दशकों तक बीजेपी कहीं नहीं जाने वाली...</title>
                                    <description><![CDATA[जनता पीएम मोदी को उखाड़ फेंकेगी तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं होने वाला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%9A%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B5-%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8B%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8--%E0%A4%85%E0%A4%97%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%88-%E0%A4%A6%E0%A4%B6%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80-/article-1984"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/prashant-kishor.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली</strong>। आज से करीब 6 महीने पहले। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के प्रचार का शोर अपने शबाब पर था। बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह हर रैली, हर इंटरव्यू, हर रोडशो में जोर-शोर से दावा कर रहे थे कि उनकी पार्टी 200 से ज्यादा सीटें जीतने जा रही है। तब चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने डंके की चोट पर कहा था कि बंगाल में बीजेपी दहाई अंकों में सिमटने जा रही है, ऐसा नहीं हुआ तो वह ट्विटर भी छोड़ देंगे और चुनाव रणनीति बनाना भी। जब नतीजे आए तो पीके की बात सच निकली। अब वही पीके यूपी समेत 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर बहुत बड़ी बात कही है। ऐसी बात जो विपक्ष का मनोबल तोड़ सकती है और बीजेपी समर्थकों में नया जोश भर सकती है।<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>क्या कहा है पीके ने?</strong></span></span><br /> प्रशांत किशोर ने गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि बीजेपी कई दशकों तक कहीं नहीं जाने वाली है। भारतीय राजनीति में आज उसका रुतबा वही है जो आजादी के बाद के शुरूआती 40 सालों तक कांग्रेस का था। पीके ने कहा कि जो लोग यह सोचते हैं कि लोगों में नाराजगी है और जनता पीएम मोदी को उखाड़ फेंकेगी तो ऐसा बिल्कुछ भी नहीं होने वाला है। हो सकता है कि लोग मोदी को उखाड़ फेंके भी लेकिन बीजेपी कहीं नहीं जाने वाली है।<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>टीएमसी के लिए हवा बनाने की रणनीति या राजनीति</strong></span></span><br /> हाल में जब जेएनयू के चर्चित पूर्व छात्र नेता कन्हैया कुमार ने कांग्रेस का दामन थामा और गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी ने पार्टी की विचारधारा पर चलने की शपथ ली तब इसके पीछे प्रशांत किशोर को माना गया था। तब पीके के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें परवान चढ़ रही थीं। पीके की टीएमसी के साथ बढ़ती नजदीकी से यह भी अटकलें लगती हैं कि ममता उन्हें राज्यसभा भेज सकती हैं। बंगाल में जीत की हैट्रिक लगाने के बाद जिस तरह से ममता बनर्जी राष्ट्रीय स्तर पर टीएमसी को बीजेपी के विकल्प के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रही हैं, उसके पीछे भी प्रशांत किशोर का दिमाग माना जा रहा है। कहीं ऐसा तो नहीं कि कांग्रेस को चुभने वाले पीके के बयान उसी नैरेटिव को सेट करने की कोशिश है कि मोदी का मुकाबला ममता ही कर सकती हैं। हालांकि, प्रशांत किशोर जिस तरह बहुत तौलकर, पूरी गंभीरता और दृढ़ता से अपनी बात कहते हैं, उसे देखते हुए विपक्षी दल उनकी बातों को नजरअंदाज करने का जोखिम नहीं ले सकते। जब प्रतिद्वंद्वी मजबूत हो तो टक्कर के लिए मेहनत भी बहुत कड़ी करनी पड़ती है। पीके की बातों का सार भी यही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Oct 2021 12:54:14 +0530</pubDate>
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