<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/supreme-court/tag-772" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>Supreme Court - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/772/rss</link>
                <description>Supreme Court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट का कलकत्ता हाईकोर्ट को निर्देश, TMC कार्यालय से बिलबोर्ड हटाने के मामले पर जल्द सुनवाई करने को कहा</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि वह तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यालय से कोलकाता नगर निगम द्वारा बिलबोर्ड हटाए जाने के खिलाफ याचिका पर शीघ्रता से फैसला सुनाए। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल बिलबोर्ड हटा दिए जाने से मामला निष्प्रभावी या समाप्त नहीं हो जाता।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-directs-calcutta-high-court-to-quickly-hear-the/article-164910"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/supreme-court-of-india.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय से कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस की उस याचिका पर जल्द सुनवाई करे जिसमें कोलकाता नगर निगम द्वारा पार्टी के कोलकाता स्थित कार्यालय से एक बिलबोर्ड हटाए जाने को चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की खंडपीठ तृणमूल कांग्रेस की उस विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो उच्च न्यायालय द्वारा इस मामले में अंतरिम राहत देने से इनकार करने के खिलाफ दायर की गई थी।</p>
<p>यह याचिका कोलकाता में कैमक स्ट्रीट पर तृणमूल कांग्रेस के दफ़्तर के ऊपर लगे एक बिलबोर्ड को कथित रूप से ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से हटाए जाने से जुड़ी है। पश्चिम बंगाल की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए, जबकि तृणमूल के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि बिना किसी नोटिस के बिलबोर्ड को हटा दिया गया था।</p>
<p>खंडपीठ ने कहा कि बिलबोर्ड हटाने से केस निरर्थक नहीं हो जाता और अगर उसे हटाना गैर-कानूनी सिद्ध होता है तो उसे फिर से लगाया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए दोनों पक्षों को उच्च न्यायालय के सामने अपनी दलीलें रखने की छूट दी और उच्च न्यायालय से सभी मुद्दों पर जल्द से जल्द फैसला करने का अनुरोध किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-directs-calcutta-high-court-to-quickly-hear-the/article-164910</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-directs-calcutta-high-court-to-quickly-hear-the/article-164910</guid>
                <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 16:48:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/supreme-court-of-india.png"                         length="957156"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रंप को बड़ा झटका, अमेरिकी न्यायाधीश ने लगाई जन्मसिद्ध नागरिकता सीमित करने पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी फेडरल न्यायाधीश डेबरा बोर्डमैन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए जन्म के आधार पर नागरिकता सीमित करने वाले नए कार्यकारी आदेश पर रोक लगा दी है। अदालत ने इसे असंवैधानिक और 14वें संशोधन का उल्लंघन करार दिया, जिससे अवैध या अस्थायी प्रवासियों के बच्चों को राहत मिली है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-blow-to-trump-american-judge-bans-limiting-birthright-citizenship/article-164595"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड्र ट्रंप को उस समय एक जोरदार झटका लगा जब अमेरिकी फेडरल न्यायाधीश डेबरा बोर्डमैन ने बुधवार को ट्रंप प्रशासन को जन्म के आधार पर नागरिकता को सीमित करने वाले नये कार्यकारी आदेश को लागू करने से रोक दिया। न्यायाधीश बोर्डमैन ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का यह आदेश संभवतः असंवैधानिक है और 14वें संशोधन का उल्लंघन करता है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी न्यायाधीश बोर्डमैन ने प्रवासियों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले संगठन द्वारा दायर मामले में प्रारंभिक रोक का आदेश दिया। इन संगठनों ने पिछले साल ट्रंप प्रशासन की उस प्रारंभिक कोशिश को भी चुनौती दी थी, जिसमें जन्म के समय स्वाभाविक रूप से नागरिकता पाने की पात्रता को सीमित करने की कोशिश की गई थी।</p>
<p>न्यायाधीश बोर्डमैन ने 35 पन्नों के अपने फैसले में लिखा कि नया निर्देश "प्रमाणित वर्ग पर लागू होने के मामले में लगभग निश्चित रूप से असंवैधानिक" है। उन्होंने जून में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें ट्रंप के कार्यकाल के पहले दिन जारी कार्यकारी आदेश को खारिज कर दिया गया था। न्यायाधीश बोर्डमैन, जो राष्ट्रपति जो. बाइडेन द्वारा नियुक्त न्यायाधीश हैं, ने लिखा, "इस अदालत को एक बार फिर राष्ट्रपति द्वारा उनसे नागरिकता का अधिकार छीनने के सबसे हालिया प्रयास के अमल पर प्रारंभिक रोक लगानी होगी। जिसके तहत लोगों से नागरिकता का अधिकार छीनने की कोशिश की गई है।" उनका आदेश प्रशासन को 19 फरवरी, 2025 के बाद जन्म लिये किसी भी ऐसे बच्चे पर नयी पाबंदी लागू करने से रोकता है, जिसके माता-पिता में से कोई एक या दोनों उस समय देश में कानूनी रूप से मौजूद नहीं थे।</p>
<p>न्यायाधीश बोर्डमैन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह तय कर चुका है कि अमेरिका में पैदा होने वाले बच्चे जन्म से ही नागरिक हो जाते हैं, भले ही उनके माता-पिता देश में गैर-कानूनी या अस्थायी रूप से रह रहे हों। उन्होंने अपने 35 पृष्ठों के फैसले में लिखा, "सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है-मान्यता प्राप्त समूह में शामिल बच्चे 'जन्म से नागरिक' हैं।" यह फैसला अमेरिका में पैदा हुए लोगों के लिए नागरिकता की संवैधानिक गारंटी को सीमित करने की ट्रंप की कोशिशों के लिए एक और झटका है। न्यायाधीश बोर्डमैन के फैसले ने प्रशासन को उस सीमित नियम को लागू करने से रोक दिया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा जन्म के आधार पर नागरिकता खत्म करने की ट्रंप की व्यापक कोशिश को खारिज करने के बाद जारी किया गया था। अदालत ने हालांकि फेडरल एजेंसियों को इस बात पर दिशा-निर्देश तैयार करने की इजाजत दी है कि इस आदेश को कैसे लागू किया जाएगा।</p>
<p>यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा जन्म के आधार पर नागरिकता खत्म करने की प्रशासन की प्रारंभिक कोशिश को खारिज किए जाने के लगभग दो महीने बाद आया है। न्यायाधीश बोर्डमैन ने शुरू में छह अगस्त को ट्रम्प के हस्ताक्षरित आदेश को रोकने से मना कर दिया था लेकिन उन्होंने अप्रवासी अधिकारों के लिए काम करने वाले समूहों को अपने मामले में बदलाव करने की इजाजत दे दी। ऐसा उन्होंने इस बात पर विचार करने से पहले किया कि क्या उस आदेश के खिलाफ कोई प्रारंभिक रोक लगाई जाए, जिसे उन्होंने 'अभूतपूर्व' बताया था।</p>
<p>न्यायाधीश बोर्डमैन ने बुधवार को अपने फैसले में कहा कि "राष्ट्रपति ने कार्यकारी आदेश के जरिए हमारे देश में लंबे समय से चली आ रही जन्मसिद्ध नागरिकता की परंपरा को बदलने और बड़ी संख्या में अमेरिकियों से जन्म के आधार पर नागरिकता के अधिकार को खत्म करने का प्रयास किया है। यह अधिकार संविधान के 14वें संशोधन के नागरिकता संबंधी प्रावधान में निहित है।" उनके आदेश के तहत संघीय सरकार को "अवैध रूप से या अस्थायी रूप से अमेरिका में रह रहे विदेशी नागरिकों से जन्मे बच्चों की नागरिकता में हस्तक्षेप करने, उसे अस्वीकार करने या उसे मान्यता न देने के लिए कोई अन्य कार्रवाई करने" से रोक दिया गया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि 30 जून को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को देखते हुए यह कार्यकारी आदेश "लगभग निश्चित रूप से असंवैधानिक" है। राष्ट्रपति ट्रम्प का तर्क है कि जन्मसिद्ध नागरिकता का 'मजाक बना दिया गया है।" सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने कल मीडिया को बताया कि कार्यकारी आदेश को सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। अटॉनी जनरल ब्लैंच ने कहा, "हमें उम्मीद नहीं थी कि न्यायाधीश हमारे पक्ष में बात करेंगी, इसलिए यह हमारे लिए कोई हैरानी की बात नहीं है।" उन्होंने बाद में कहा, "अगर हमें सुप्रीम कोर्ट वापस जाना पड़ा, तो हम जाएंगे।" इस नए कार्यकारी आदेश का मकसद मौजूदा कानूनों को सख्त करना और जन्मसिद्ध नागरिकता के लिए मान्यता प्राप्त अपवादों को सीमित करना था। यह सिद्धांत 14वें संशोधन में शामिल है, जो आम तौर पर अमेरिकी धरती पर पैदा हुए लोगों को-उनके माता-पिता के आप्रवासन स्थिति की परवाह किए बिना अमेरिकी नागरिकता देता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/big-blow-to-trump-american-judge-bans-limiting-birthright-citizenship/article-164595</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/big-blow-to-trump-american-judge-bans-limiting-birthright-citizenship/article-164595</guid>
                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 18:39:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/trump.png"                         length="790718"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बीसीआई लॉ छात्रों के व्यवहार को रेगुलेट नहीं कर सकती, नालसार छात्रों पर जारी दोनों नोटिफिकेशन रद्द</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के पास कानून के छात्रों के आचरण को नियंत्रित करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। अदालत ने हैदराबाद स्थित नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों के खिलाफ जारी बीसीआई की अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-decision-of-supreme-court-bci-cannot-regulate-the-behavior/article-164594"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्यों की बार काउंसिलों के पास विधि के छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे अनुशासनात्मक अधिकार केवल छात्र के मूल संस्थान या संस्थान को संचालित करने वाले नियमों अथवा उप-नियमों के तहत निर्धारित प्राधिकारी के पास निहित होते हैं। बार काउंसिल किसी व्यक्ति पर अनुशासनात्मक अधिकार क्षेत्र केवल तभी हासिल करती है जब वह एक अधिवक्ता के रूप में नामांकित हो जाता है।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के 13 अगस्त को जारी निर्देशों को कानूनी रूप से अमान्य करार दिया। उल्लेखनीय है कि बीसीआई अध्यक्ष ने नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के वर्ष 2026 के स्नातक बैच के नामांकन पर रोक लगाने और उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अभियान चलाने को लेकर छात्रों व संकाय सदस्यों के खिलाफ जांच की मांग की थी, जिसे भारी सार्वजनिक विरोध के बाद स्वयं बीसीआई ने वापस ले लिया था।</p>
<p>शीर्ष अदालत नालसर के दो पूर्व छात्रों, मिहिरा सूद और अभिषेक तिवारी की एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बीसीआई अध्यक्ष के जारी इन विवादित निर्देशों को चुनौती दी गई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-decision-of-supreme-court-bci-cannot-regulate-the-behavior/article-164594</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-decision-of-supreme-court-bci-cannot-regulate-the-behavior/article-164594</guid>
                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 15:52:29 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-02/supreme-court.jpg"                         length="212578"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद CJP का बड़ा फैसला: 5 सितंबर का दिल्ली मार्च वापस, सरकार ने छात्रों को दिया भरोसा</title>
                                    <description><![CDATA[कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को दिल्ली में आयोजित होने वाले अपने प्रस्तावित मार्च को वापस ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा सरकार के वादे पूरा करने का आश्वासन मिलने के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास ने मार्च वापसी की पुष्टि की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/after-the-hearing-in-the-supreme-court-cjp-took-a/article-164382"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को दिल्ली में होने वाले मार्च को वापस लेने का फ़ैसला किया है। इस बात की पुष्टि सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान की।</p>
<p>कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीजेपी और सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार जल्द ही छात्रों से किए अपने वादे पूरे करेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/after-the-hearing-in-the-supreme-court-cjp-took-a/article-164382</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/after-the-hearing-in-the-supreme-court-cjp-took-a/article-164382</guid>
                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 15:02:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-04/supreme-court1.jpg"                         length="212578"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने CJP के 5 सितंबर दिल्ली मार्च पर रोक से किया इनकार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 5 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि प्रदर्शन से अप्रिय स्थिति होने का कोई ठोस आधार नहीं है। CJP अपनी मांगों को लेकर इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकालेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-refuses-to-ban-cjps-5th-september-delhi-march/article-164307"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/cjp.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से 5 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ऐसा मानने के लिए फिलहाल कोई ठोस आधार नहीं है कि प्रदर्शन से अनिवार्य रूप से अप्रिय स्थिति पैदा होगी। अदालत ने प्रशासन से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शन से जुड़े सभी पक्षों से नियमों के दायरे में रहने की अपेक्षा जताई।</p>
<p>मार्च पर रोक की मांग सेवानिवृत्त दिल्ली पुलिस अधिकारी राजेंद्र सिंह की याचिका में की गई थी। याचिकाकर्ता ने आगामी BRICS सम्मेलन का हवाला देते हुए राजधानी में बड़े प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने की मांग की थी। CJP का कहना है कि सरकार ने आंदोलन के दौरान उठाई गई चार मांगों में से तीन अब तक पूरी नहीं की हैं। इनमें छात्रों के परिवारों को मुआवजा, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेना और पुलिस-RAF की कार्रवाई पर माफी शामिल है। संगठन ने इन्हीं मुद्दों को लेकर 5 सितंबर को फिर मार्च निकालने का ऐलान किया है।</p>
<p>प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाएगा। इसमें कथित NEET अनियमितताओं के बाद जान गंवाने वाले छात्रों के परिजनों के शामिल होने की भी बात कही गई है। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि प्रदर्शन से जुड़ी FIR वापस लेने के लिए अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट में आवेदन किया गया है। इससे पहले 20 जुलाई के प्रदर्शन में पुलिस कार्रवाई के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट पांच सदस्यीय समिति गठित कर चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-refuses-to-ban-cjps-5th-september-delhi-march/article-164307</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-refuses-to-ban-cjps-5th-september-delhi-march/article-164307</guid>
                <pubDate>Mon, 31 Aug 2026 16:30:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-08/cjp.png"                         length="1871067"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वीर सावरकर मामले में राहुल गांधी को राहत: SC ने रद्द की लखनऊ कोर्ट की कार्रवाई, कहा- अदालत ने यूपी सरकार से नहीं ली जरूरी कानूनी अनुमति </title>
                                    <description><![CDATA[वीर सावरकर पर दिए बयान से जुड़े मानहानि मामले में उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को राहत देते हुए लखनऊ अदालत की आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार से अनिवार्य कानूनी मंजूरी के बिना यह कार्रवाई शुरू की गई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-relief-to-rahul-gandhi-in-veer-savarkar-case-supreme/article-162932"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/rahul-gandhi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वीर सावरकर पर कथित विवादित टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने लखनऊ की अदालत में चल रही आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से जरूरी कानूनी अनुमति नहीं ली गई थी। ऐसे में बिना अनिवार्य मंजूरी के शुरू की गई कार्रवाई को आगे जारी नहीं रखा जा सकता।</p>
<p>राहुल गांधी ने लखनऊ अदालत के समन और उनके खिलाफ शुरू हुई कार्यवाही को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने पूरा मामला रद्द करने की मांग की थी। यह मामला 2022 का है, जब राहुल गांधी महाराष्ट्र में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सावरकर को लेकर दिए गए बयान के कारण विवादों में आए थे। इसके बाद लखनऊ में उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई गई थी और मजिस्ट्रेट अदालत ने उन्हें समन जारी किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/big-relief-to-rahul-gandhi-in-veer-savarkar-case-supreme/article-162932</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/big-relief-to-rahul-gandhi-in-veer-savarkar-case-supreme/article-162932</guid>
                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 19:02:49 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-08/rahul-gandhi.png"                         length="407943"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पीड़ित परिवारों को अनुकंपा नौकरी देने पर मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें करूर भगदड़ त्रासदी के पीड़ितों के परिवारों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के तमिलनाडु सरकार के फैसले को रद्द कर दिया गया था। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए मामले में आगे की सुनवाई तय की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-courts-big-decision-in-karur-stampede-case-stay-on/article-162930"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/superme-court.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें करूर भगदड़ त्रासदी के पीड़ितों के परिवारों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के तमिलनाडु सरकार के फैसले को रद्द कर दिया गया था। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली राज्य सरकार और अन्य की याचिका पर नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश के अमल पर अंतरिम रोक लगा दी है।</p>
<p>तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और मुकुल रोहतगी ने संविधान के अनुच्छेद 162 के तहत करूर भगदड़ पीड़ितों के परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति देने के राज्य के फैसले का बचाव किया। सिंघवी ने मद्रास उच्च न्यायालय के दखल पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की नीति को किसी ने चुनौती नहीं दी थी। वहीं, एक राजनीतिक दल की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ए. वेलन ने हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार की इस नीति का विरोध किया।</p>
<p>सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पारदीवाला ने इस आपत्ति पर सवाल उठाया और पूछा कि सरकार किसी पीड़ित के जीवित आश्रितों को रोजगार क्यों नहीं दे सकती, खासकर तब जब मृतक ही परिवार का एकमात्र कमाने वाला व्यक्ति रहा हो। इसके साथ ही, न्यायमूर्ति चंद्रन ने इस मामले में राजनीति को बीच में लाने से बचने की चेतावनी दी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले मद्रास उच्च न्यायालय ने इन नियुक्तियों को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि ये संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करती हैं। उच्च न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की थी कि इस तरह के फैसले से भविष्य में ऐसे दावों की बाढ़ आ सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-courts-big-decision-in-karur-stampede-case-stay-on/article-162930</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-courts-big-decision-in-karur-stampede-case-stay-on/article-162930</guid>
                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 18:24:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/superme-court.png"                         length="1375391"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रदर्शनकारियों की डिजिटल निगरानी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, माकपा सांसद ए.ए. रहीम की याचिका पर सुनवाई को मिली मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों की फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक तथा बायोमेट्रिक निगरानी को चुनौती देने वाली माकपा सांसद ए.ए. रहीम की याचिका पर सुनवाई की सहमति दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि निजी कंपनियों के जरिए यह डेटा संग्रह निजता के अधिकार का उल्लंघन है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-matter-of-digital-surveillance-of-protesters-reached-the-supreme/article-162857"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/supreme-court--31.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने प्रदर्शन स्थलों पर पुलिस द्वारा फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी और अन्य बायोमेट्रिक निगरानी उपायों की तैनाती को चुनौती देने वाली मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्यसभा सांसद ए.ए. रहीम की रिट याचिका पर सुनवाई करने पर गुरुवार को सहमति व्यक्त की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस याचिका को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आयोजित हालिया छात्र विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ने का निर्देश दिया।</p>
<p>याचिकाकर्ता ए.ए. रहीम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मेनका गुरुस्वामी ने पीठ के समक्ष दलील दी कि यह याचिका जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की निगरानी के लिए दिल्ली पुलिस के कथित रूप से डिजिटल उपकरणों का उपयोग करने के संदर्भ में दायर की गई है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने इस निगरानी कार्य के लिए दो निजी संस्थाओं, आदित्य इन्फोटेक लिमिटेड और डायमेंशन एनएक्सजी प्राइवेट लिमिटेड की सेवाएं ली हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के डेटा का संग्रह, प्रसंस्करण और भंडारण डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रावधानों का उल्लंघन करके किया गया।</p>
<p>याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली पुलिस ने बिना किसी स्पष्ट कानूनी अधिकार के नागरिक प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों और अन्य लोगों की बायोमेट्रिक निगरानी की। इसमें दावा किया गया है कि उनकी तस्वीरों और फुटेज को एकत्र करने व प्रोसेस करने के लिए सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन और अन्य प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल किया गया। याचिका में उच्चतम न्यायालय के 2017 के ऐतिहासिक पुट्टास्वामी फैसले का हवाला देते हुए तर्क दिया है कि इस तरह की निगरानी निजता के अधिकार का उल्लंघन करती है, जब तक कि इसे कानून का समर्थन प्राप्त न हो और इसे आवश्यक व समुचित न ठहराया जाए। इसके साथ ही याचिका में शामिल की गई प्रौद्योगिकियों, डेटाबेस और निजी विक्रेताओं के विवरण का खुलासा करने तथा प्रभावित व्यक्तियों को अपने डेटा तक पहुंचने और उसे हटाने की प्रणाली प्रदान करने की भी मांग की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-matter-of-digital-surveillance-of-protesters-reached-the-supreme/article-162857</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-matter-of-digital-surveillance-of-protesters-reached-the-supreme/article-162857</guid>
                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 17:25:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-01/supreme-court--31.jpg"                         length="206029"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'कॉकरोच जनता पार्टी' से जुड़ी गतिविधियों और फर्जी वकीलों की याचिका पर Supreme Court ने केंद्र से मांगा जवाब, CBI को नोटिस जारी</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने फर्जी लॉ डिग्री, अदालती टिप्पणियों के व्यावसायिक दुरुपयोग और 'कॉकरोच जनता पार्टी' से जुड़ी गतिविधियों की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र, बीसीआई और सीबीआई को नोटिस जारी किया है। याचिका में कोर्टरूम की कार्यवाही के मीम्स और व्यावसायिक उपयोग पर कार्रवाई की मांग की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-seeks-response-from-center-on-the-activities-related/article-162703"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने फर्जी वकीलों, फर्जी लॉ डिग्री और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) से जुड़ी गतिविधियों की केंद्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) से जांच की मांग को लेकर पेश याचिका पर मंगलवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने वकील राजा चौधरी की ओर से दायर जनहित याचिका पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय , बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) और सीबीआई को नोटिस जारी किया।</p>
<p>याचिकाकर्ता राजा चौधरी ने खुद अदालत में अपना पक्ष रखा। याचिका में गत 15 मई की अदालती कार्यवाही के दौरान की गयी मौखिक टिप्पणियों के कथित 'व्यावसायिक शोषण' और उनसे पैसे कमाने के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गयी है। याचिका में कहा गया है कि कोर्टरूम में हुई बातचीत के कुछ हिस्सों को चुन-चुनकर काटा गया और बाद में मीम्स, वीडियो, मिमिक्री, राजनीतिक ब्रांडिंग और व्यावसायिक सामग्री के लिए इस्तेमाल किया गया।</p>
<p>याचिका में सक्षम अधिकारियों को उन लोगों/संस्थाओं के खिलाफ कानून के अनुसार जांच और कार्रवाई करने के निर्देश देने की मांग की गयी ,जो कथित तौर पर व्यावसायिक शोषण, ट्रेडमार्क के दुरुपयोग, पैसे कमाने के लिए प्रसार या न्यायालय के समक्ष कार्यवाही से उत्पन्न मौखिक अदालती टिप्पणियों और प्रतीकात्मक अभिव्यक्तियों के अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग में शामिल हैं तथा जिसमें सीजेपी से जुड़ी गतिविधियां भी शामिल हैं। याचिका में विवाद की जड़ 15 मई की कार्यवाही को बताया गया है, जिस दौरान अदालती प्रक्रियाओं के कथित दुरुपयोग, वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा देने और कानूनी पेशे में पेशेवर मानकों के गिरने पर चिंता जतायी गयी थी।</p>
<p>याचिका में कहा गया है कि कार्यवाही के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक रूप से टिप्पणी की थी - "कॉकरोच जैसे युवा हैं जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। कुछ सोशल मीडिया पर हैं, कुछ आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं।" उन्होंने यह भी कहा था, "समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो सिस्टम पर हमला करते हैं और आप उनके साथ हाथ मिलाना चाहते हैं?" इन टिप्पणियों के बाद विवाद खड़ा हो गया, जिसके बाद मुख्य न्यायाषीश ने स्पष्ट किया कि उनकी बातें उन लोगों के लिए थीं जो फर्जी योग्यता और डिग्री के आधार पर नौकरी या प्रोफेशन में आते हैं, न कि आम तौर पर बेरोजगार भारतीय युवाओं के लिए।</p>
<p>याचिकाकर्ता ने हालांकि स्पष्ट किया कि इस जनहित याचिका का मकसद न्यायपालिका की आलोचना, लोकतांत्रिक असहमति, व्यंग्य या संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अपनी बात रखने की आज़ादी पर रोक लगाना नहीं है। मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणियों पर हुए विवाद के बाद अमेरिका के बोस्टन में रहने वाले अभिजीत दिपके ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' का गठन किया। यह ऑनलाइन प्लेटफार्म बेरोजगारी, संस्थागत जवाबदेही और मीडिया की आज़ादी जैसे मुद्दों पर टिप्पणी करने के लिए राजनीतिक व्यंग्य का इस्तेमाल करता है। इसके बाद सीजेपी ने नीट-यूजी प्रश्न पत्र लीक मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन किया और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। इस आंदोलन का समापन 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर 'संसद चलो' विरोध प्रदर्शन के साथ हुआ, जिसमें पुलिस की कार्रवाई हुई और प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप लगे। इसके बाद श्री प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-seeks-response-from-center-on-the-activities-related/article-162703</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-seeks-response-from-center-on-the-activities-related/article-162703</guid>
                <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 13:00:24 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-04/supreme-court2.jpg"                         length="212578"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>NEET-UG प्रदर्शन पर दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: छात्रों पर नहीं होगी कार्रवाई, आपराधिक रिकॉर्ड वालों पर सख्ती जारी रहेगी</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली सरकार ने नीट-यूजी प्रदर्शन से जुड़े मामलों में राहत देते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया है। प्रशासन ने कहा कि मामलों की समीक्षा के बाद पात्र प्रदर्शनकारियों की रिहाई की प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-decision-of-delhi-government-on-neet-ug-protest-no-action/article-161481"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/rekha-gupta1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों पर दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ आगे कोई प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, जिन लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड है या जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि दर्ज है, उन्हें इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार के अनुसार, 29 जुलाई 2026 तक इन प्रदर्शनों के संबंध में दिल्ली पुलिस ने 13 एफआईआर दर्ज की थीं। </p>
<p>अब इन मामलों की समीक्षा कर गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। यह निर्णय 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुरूप उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद लिया गया है। दिल्ली सरकार ने कहा कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और इस प्रकरण को समाप्त माना जाएगा। वहीं, आपराधिक रिकॉर्ड वाले आरोपियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/big-decision-of-delhi-government-on-neet-ug-protest-no-action/article-161481</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/big-decision-of-delhi-government-on-neet-ug-protest-no-action/article-161481</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 17:49:23 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-07/rekha-gupta1.png"                         length="1034162"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>SC ने उठाए पैलेट गन के इस्तेमाल के खिलाफ याचिका पर सवाल, घायल प्रदर्शनकारियों के इलाज का दिया निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने भीड़ नियंत्रण में पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक की मांग वाली याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए इसे स्पष्ट करने की आवश्यकता बताई। अदालत ने घायल लोगों के उचित इलाज, साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और मामले में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने पर संबंधित पक्षों को निर्देश दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/delhi-high-court-raised-questions-on-the-petition-against-the/article-161423"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/supreme-court--3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने भीड़ को काबू में करने के लिए कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने वाली याचिका को 'अस्पष्ट' कहा। गौरतलब है कि मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा वी. मोहना की पीठ भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी यशोवर्धन आजाद और 20 जुलाई के 'संसद चलो' विरोध-प्रदर्शन के दौरान घायल हुए दो लोगों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इन लोगों का दावा था कि त्वरित कार्रवाई बल द्वारा चलाई गई धातु की गोलियों (पैलेट) से वे घायल हुए थे।</p>
<p>पीठ ने गौर किया कि पुलिस नियम खास हालात में पैलेट गन के इस्तेमाल की इजाजत देते हैं, जबकि याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उनके शरीर से धातु की गोलियां (पैलेट) मिली थीं। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने तर्क दिया कि पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े नियम आसानी से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से इन नियमों को रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश देने की मांग की ताकि याचिका में उचित बदलाव किए जा सकें।</p>
<p>उन्होंने एक घायल याचिकाकर्ता के लिए अपर्याप्त इलाज का मुद्दा भी उठाया और गोला-बारूद के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग की। केंद्र ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वह सहयोग करेगा और जांच के लिए जरूरी सभी सामग्री सुरक्षित रखेगा। पीठ ने कहा कि जब विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो जाते हैं, तो पुलिस को स्थिति के हिसाब से कदम उठाने पड़ सकते हैं। पीठ ने मामले की सुनवाई टाल दी और इस बीच दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह घायल याचिकाकर्ताओं और इसी तरह प्रभावित अन्य लोगों के लिए उचित इलाज सुनिश्चित करे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/delhi-high-court-raised-questions-on-the-petition-against-the/article-161423</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/delhi-high-court-raised-questions-on-the-petition-against-the/article-161423</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 16:27:54 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-02/supreme-court--3.jpg"                         length="206029"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सशर्त दी अग्रिम जमानत : पुलिस के बुलाने पर थाने में होना होगा पेश, पढ़ें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को असम में दर्ज मामले में अग्रिम जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के मामलों में हिरासत में पूछताछ जरूरी नहीं है। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी की पीठ ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए खेड़ा की स्वतंत्रता को सुरक्षित किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-grants-conditional-anticipatory-bail-to-congress-leader-pawan/article-152334"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/supreme.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को असम पुलिस की ओर से दर्ज प्राथमिकी के मामले में शुक्रवार को अग्रिम जमानत दे दी। यह मामला मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा की शिकायत पर दर्ज किया गया था। पवन खेड़ा ने सीएम सरमा पर एक से अधिक पासपोर्ट रखने के आरोप लगाए थे।</p>
<p>न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने गौहाटी उच्च न्यायालय द्वारा खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर गुरूवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह फैसला शुक्रवार को जारी किया गया। इसमें उच्चतम न्यायालय ने कहा कि गौहाटी उच्च न्यायालय का अवलोकन "रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के उचित मूल्यांकन पर आधारित नहीं था और त्रुटिपूर्ण प्रतीत होता है, विशेष रूप से आरोपी पर बोझ डालने के मामले में।"</p>
<p>अदालत ने आगे कहा कि आरोप-प्रत्यारोप प्रथम दृष्टया राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित लगते हैं और हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता को उचित नहीं ठहराते। इसकी जांच मुकदमे के दौरान की जा सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियाँ केवल अग्रिम जमानत देने के प्रश्न तक सीमित हैं और आपराधिक कार्यवाही की योग्यता को प्रभावित नहीं करेंगी, जिसका निर्णय कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से किया जाएगा।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि पवन खेड़ा ने इस मामले में केस दर्ज होने के बाद सबसे पहले तेलंगाना उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसने 10 अप्रैल को उन्हें असम की संबंधित अदालत से राहत पाने के लिए एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने 15 अप्रैल को इस राहत पर रोक लगा दी थी, लेकिन स्पष्ट किया कि असम की सक्षम अदालत में दायर किसी भी अग्रिम जमानत याचिका पर स्वतंत्र रूप से निर्णय लिया जाना चाहिए।</p>
<p>बाद में गौहाटी उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि मामला केवल मानहानि तक सीमित नहीं है और दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है, जिसके बाद उन्होंने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-grants-conditional-anticipatory-bail-to-congress-leader-pawan/article-152334</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-grants-conditional-anticipatory-bail-to-congress-leader-pawan/article-152334</guid>
                <pubDate>Fri, 01 May 2026 15:40:42 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-05/supreme.png"                         length="1423509"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        