<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/supreme-court/tag-772" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>Supreme Court - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/772/rss</link>
                <description>Supreme Court RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सशर्त दी अग्रिम जमानत : पुलिस के बुलाने पर थाने में होना होगा पेश, पढ़ें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को असम में दर्ज मामले में अग्रिम जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के मामलों में हिरासत में पूछताछ जरूरी नहीं है। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी की पीठ ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए खेड़ा की स्वतंत्रता को सुरक्षित किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-grants-conditional-anticipatory-bail-to-congress-leader-pawan/article-152334"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/supreme.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को असम पुलिस की ओर से दर्ज प्राथमिकी के मामले में शुक्रवार को अग्रिम जमानत दे दी। यह मामला मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा की शिकायत पर दर्ज किया गया था। पवन खेड़ा ने सीएम सरमा पर एक से अधिक पासपोर्ट रखने के आरोप लगाए थे।</p>
<p>न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने गौहाटी उच्च न्यायालय द्वारा खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर गुरूवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह फैसला शुक्रवार को जारी किया गया। इसमें उच्चतम न्यायालय ने कहा कि गौहाटी उच्च न्यायालय का अवलोकन "रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के उचित मूल्यांकन पर आधारित नहीं था और त्रुटिपूर्ण प्रतीत होता है, विशेष रूप से आरोपी पर बोझ डालने के मामले में।"</p>
<p>अदालत ने आगे कहा कि आरोप-प्रत्यारोप प्रथम दृष्टया राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित लगते हैं और हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता को उचित नहीं ठहराते। इसकी जांच मुकदमे के दौरान की जा सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियाँ केवल अग्रिम जमानत देने के प्रश्न तक सीमित हैं और आपराधिक कार्यवाही की योग्यता को प्रभावित नहीं करेंगी, जिसका निर्णय कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से किया जाएगा।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि पवन खेड़ा ने इस मामले में केस दर्ज होने के बाद सबसे पहले तेलंगाना उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसने 10 अप्रैल को उन्हें असम की संबंधित अदालत से राहत पाने के लिए एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने 15 अप्रैल को इस राहत पर रोक लगा दी थी, लेकिन स्पष्ट किया कि असम की सक्षम अदालत में दायर किसी भी अग्रिम जमानत याचिका पर स्वतंत्र रूप से निर्णय लिया जाना चाहिए।</p>
<p>बाद में गौहाटी उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि मामला केवल मानहानि तक सीमित नहीं है और दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है, जिसके बाद उन्होंने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-grants-conditional-anticipatory-bail-to-congress-leader-pawan/article-152334</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-grants-conditional-anticipatory-bail-to-congress-leader-pawan/article-152334</guid>
                <pubDate>Fri, 01 May 2026 15:40:42 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-05/supreme.png"                         length="1423509"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>20 हफ्ते प्रेग्नेंट नाबालिग को अबॉर्शन की इजाजत : सुप्रीम कोर्ट बोला-बलात्कार पीड़िताओं के लिए पुनर्विचार की जरूरत, डिलीवरी के लिए नहीं कर सकते मजबूर</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार पीड़िताओं के गर्भपात कानून में बदलाव की वकालत की है। अदालत ने कहा कि नाबालिगों के लिए 20 सप्ताह की सीमा न्याय में बाधा नहीं बननी चाहिए। पीड़िता के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनचाहा गर्भ किसी पर थोपा नहीं जा सकता और अंतिम निर्णय पीड़िता का होना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/abortion-allowed-to-20-weeks-pregnant-minor-supreme-court-said/article-152185"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/supreme_court__1_1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें एक 15 वर्षीय नाबालिग के 30 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति देने वाले दो न्यायाधीशों की पीठ के एक आदेश को चुनौती दी गयी थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ ने गर्भपात की अनुमति देते हुए एम्स को प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि एम्स अपना निर्णय (कि गर्भपात नहीं किया जाना चाहिए) मां पर नहीं थोप सकता और महिला के पास निर्णय लेने का विकल्प होना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की, "अवांछित गर्भ का बोझ महिला पर नहीं डाला जा सकता।"</p>
<p>न्यायालय ने एम्स के डॉक्टरों को नाबालिग और उसके परिवार की काउंसलिंग करने तथा उन्हें प्रासंगिक मेडिकल रिपोर्ट और जानकारी साझा करने की स्वतंत्रता दी है, ताकि वे यह तय कर सकें कि गर्भावस्था को जारी रखना है या गर्भपात का विकल्प चुनना है।</p>
<p>इससे पहले 24 अप्रैल को न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने गर्भपात की अनुमति दी थी। कल बुधवार को इसी पीठ ने एम्स की समीक्षा याचिका को खारिज करते हुए कहा था, "यह अजीब है कि याचिकाकर्ता एम्स उच्चतम न्यायालय के आदेश को मानने को तैयार नहीं है और इसके बजाय नाबालिग के संवैधानिक अधिकारों को विफल करने के लिए अदालत के आदेश को ही चुनौती दे रहा है।"</p>
<p>उच्चतम न्यायालय की डांट खाने के बावजूद एम्स ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे और मामले में उपचारात्मक याचिका दायर कर दी। इसे मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष तत्काल रखा गया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि डॉक्टर अजन्मे बच्चे पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जबकि उस मां पर ध्यान नहीं दे रहे जो एक दर्द से गुजर रही है। उन्होंने कहा, "बच्चे पर बहुत अधिक ध्यान दिया जा रहा है और उस मां पर नहीं जिसने इतना कष्ट झेला है।"</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/abortion-allowed-to-20-weeks-pregnant-minor-supreme-court-said/article-152185</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/abortion-allowed-to-20-weeks-pregnant-minor-supreme-court-said/article-152185</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 14:08:05 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-11/supreme_court__1_1.jpg"                         length="225611"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली आबकारी नीति मामला : केजरीवाल के बाद मनीष सिसोदिया ने किया स्वर्णकांता की अदालत में पेश होने से इनकार, बोले-सत्याग्रह के अलावा कोई विकल्प नहीं </title>
                                    <description><![CDATA[अरविंद केजरीवाल के बाद अब मनीष सिसोदिया ने भी न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत का बहिष्कार किया है। उन्होंने पत्र लिखकर कार्यवाही में शामिल होने से इनकार करते हुए इसे 'अंतरात्मा और भरोसे' की लड़ाई बताया। सिसोदिया ने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष न्याय की उम्मीद में वे अब सत्याग्रह का मार्ग अपनाएंगे और उच्चतम न्यायालय का रुख करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/delhi-excise-policy-case-after-kejriwal-manish-sisodia-refused-to/article-151925"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/manish_sisodia_630x400.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल के बाद अब दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को पत्र लिखकर सूचित किया है कि न तो वह और न ही उनके वकील उनकी अदालत में पेश होंगे। मनीष सिसोदिया ने अपने पत्र और सोशल मीडिया 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि 'पूर्ण सम्मान के साथ', उनकी अंतरात्मा उन्हें वर्तमान परिस्थितियों में न्यायमूर्ति के समक्ष कार्यवाही में भाग लेना जारी रखने की अनुमति नहीं देती है। उन्होंने लिखा, "यह किसी व्यक्ति का सवाल नहीं है, बल्कि उस भरोसे का सवाल है जिस पर न्याय व्यवस्था टिकी है कि हर नागरिक को न केवल न्याय मिलना चाहिए, बल्कि न्याय होते हुए दिखना भी चाहिए।"</p>
<p>पूर्व उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका और संविधान में उनकी आस्था 'अटल' है लेकिन जब मन में गंभीर संदेह पैदा होते हैं, तो केवल औपचारिक भागीदारी उचित नहीं होती। उन्होंने कहा, "इसलिए, मेरे पास सत्याग्रह के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।" यह कदम केजरीवाल द्वारा इसी तरह का रुख अपनाने के कुछ ही समय बाद आया है, जिन्होंने अपनी रिक्यूजल याचिका (न्यायाधीश को मामले से हटने की अर्जी) खारिज होने के बाद अदालत में पेश होने से इनकार कर दिया था। ये घटनाक्रम एक दुर्लभ और तीखे टकराव को दर्शाते हैं, जिसमें आम आदमी पार्टी (आप) के दोनों वरिष्ठ नेताओं ने अदालती कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला किया है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया है कि वे उच्चतम न्यायालय के समक्ष कानूनी उपाय अपनायेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/delhi-excise-policy-case-after-kejriwal-manish-sisodia-refused-to/article-151925</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/delhi-excise-policy-case-after-kejriwal-manish-sisodia-refused-to/article-151925</guid>
                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 14:34:23 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-04/manish_sisodia_630x400.jpg"                         length="195708"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से झटका : अदालत ने ठुकराई ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की अर्जी, असम सीएम की पत्नी पर की थी आपत्तिजनक टिप्पणी</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की अर्जी ठुकरा दी है। असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर विवादास्पद टिप्पणी और पासपोर्ट संबंधी आरोपों के मामले में खेड़ा को अब असम की अदालत में पेश होना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह स्थानीय अदालत की कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/shock-to-pawan-kheda-from-the-supreme-court-the-court/article-150802"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/01.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा झटका देते हुए उनकी ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की अर्जी ठुकरा दी है। यह मामला असम पुलिस द्वारा असम के मुख्यमंत्री सरमा की पत्नी की शिकायत पर दर्ज की गई एक प्राथमिकी से जुड़ा है। पवन खेड़ा का आरोप था कि सीएम सरमा की पत्नी के पास अलग-अलग देशों के कई पासपोर्ट हैं।</p>
<p>पवन खेड़ा की उस अर्जी को भी अदालत ने ठुकरा दिया जिसमें उन्होंने ट्रांजिट जमानत को अगले मंगलवार तक बढ़ाने की मांग की थी ताकि वह सोमवार को असम की अदालत में पेश हो सकें। यह घटनाक्रम शीर्ष अदालत द्वारा उनकी अग्रिम जमानत पर रोक लगाने के दो दिन बाद सामने आया है। यह अग्रिम जमानत उन्हें तेलंगाना उच्च न्यायालय ने दी थी। न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और अतुल एस चांदुरकर की पीठ ने टिप्पणी की कि यदि संबंधित अदालत काम नहीं कर रही है, तो मामले की सुनवाई के लिए अनुरोध किया जा सकता है, जिस पर मौजूदा चलन के अनुसार विचार किया जा सकता है।</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न तो वह और न ही तेलंगाना उच्च न्यायालय असम की उस अदालत के काम में कोई दखल देगा जो पवन खेड़ा के खिलाफ मामले की सुनवाई करेगी। गौरतलब है कि 5 अप्रैल को एक संवाददाता सम्मेलन में पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि सीएम सरमा के पास कई पासपोर्ट हैं और कई देशों में उनकी संपत्तियां हैं, जिनका जिक्र असम के मुख्यमंत्री ने अपने चुनावी हलफनामे में नहीं किया था। मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को खारिज कर दिया, जिसके बाद पवन खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/shock-to-pawan-kheda-from-the-supreme-court-the-court/article-150802</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/shock-to-pawan-kheda-from-the-supreme-court-the-court/article-150802</guid>
                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:01:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/01.png"                         length="1139283"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्य मतदान की मांग वाली याचिका खारिज की : कहा-मतदान एक संवैधानिक अधिकार और लोकतांत्रिक कर्तव्य, किसी पर थोपा नहीं जा सकता</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने अनिवार्य मतदान लागू करने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में नागरिकों को वोट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और न ही सुविधाएं रोकी जा सकती हैं। पीठ के अनुसार, मतदान एक संवैधानिक अधिकार है, जिसे जागरूकता से बढ़ावा देना चाहिए, दमनकारी नीतियों से नहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-rejected-the-petition-demanding-compulsory-voting-and-said/article-150650"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को अनिवार्य मतदान लागू करने के निर्देश देने की मांग वाली एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता ने कहा था कि जो लोग मतदान करने से इनकार करते हैं, उन्हें सरकारी सुविधाओं से वंचित कर देना चाहिए और उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। न्यायालय ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि चुनावों में भागीदारी को दमनकारी या बाध्यकारी उपायों से लागू नहीं कर सकते।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों से मताधिकार प्रयोग करने की अपेक्षा होती है, लेकिन राज्य किसी व्यक्ति को वोट देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। याचिकाकर्ता के वकील ने सुझाव दिया था कि अदालत चुनाव आयोग को अनिवार्य मतदान के लिए दिशानिर्देश बनाने और बिना वैध कारण वोट न देने वालों पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दे। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि मताधिकार के प्रति जन जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए, लेकिन हम इसके लिए मजबूर नहीं कर सकते।</p>
<p>न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उठाए गए मुद्दे नीतिगत दायरे में आते हैं और इन पर उचित विधायी और कार्यकारी अधिकारियों (संसद और सरकार) द्वारा विचार किया जाना ही सबसे बेहतर है। पीठ ने दोहराया कि मतदान एक संवैधानिक अधिकार और लोकतांत्रिक कर्तव्य है, लेकिन इसे किसी पर थोपा नहीं जा सकता।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-rejected-the-petition-demanding-compulsory-voting-and-said/article-150650</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-rejected-the-petition-demanding-compulsory-voting-and-said/article-150650</guid>
                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 14:35:28 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-04/supreme-court1.jpg"                         length="212578"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असम CM हिमंता की पत्नी पर विवादित टिप्पणी मामला : सुप्रीम कोर्ट से पवन खेड़ा को बड़ा झटका, अंतरिम जमानत पर स्टे</title>
                                    <description><![CDATA[असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर विवादित टिप्पणी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अंतरिम जमानत पर रोक लगा दी है। अदालत ने उन्हें राहत के लिए असम कोर्ट जाने का निर्देश दिया है। इस फैसले से खेड़ा की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/controversial-comment-on-assam-cm-himantas-wife-case-big-blow/article-150487"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pawan-kheraa1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को ट्रांजिट अग्रिम जमानत देने के तेलंगाना उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगा दी। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा की एक शिकायत से संबंधित है। न्यायालय का यह आदेश असम पुलिस की एक अपील पर आया है। इसमें असम पुलिस ने कहा था कि तेलंगाना उच्च न्यायालय के पास इस मामले में सुनवाई का क्षेत्राधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने यह अंतरिम आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया कि श्री खेड़ा असम की उचित अदालत से राहत मांगने के लिए स्वतंत्र हैं। पीठ ने कहा कि अगर श्री खेड़ा असम की अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो उच्चतम न्यायालय के इस आदेश का उस आवेदन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।</p>
<p>गौरतलब है कि यह पूरा मामला गत पांच अप्रैल को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान श्री खेड़ा के लगाए उन आरोपों से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि श्रीमती सरमा के पास कई पासपोर्ट हैं और उन्होंने विदेशी संपत्तियों का खुलासा नहीं किया है। इससे पहले 10 अप्रैल को तेलंगाना उच्च न्यायालय ने खेड़ा को एक सप्ताह की अग्रिम जमानत देते हुए गुवाहाटी उच्च न्यायालय जाने का निर्देश दिया था। अब उच्चतम न्यायालय के इस पर रोक लगाए जाने के बाद श्री खेड़ा को असम की संबंधित अदालत से ही राहत लेनी होगी। फिलहाल उच्चतम न्यायालय ने इस याचिका पर नोटिस जारी कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/controversial-comment-on-assam-cm-himantas-wife-case-big-blow/article-150487</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/controversial-comment-on-assam-cm-himantas-wife-case-big-blow/article-150487</guid>
                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 13:03:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/pawan-kheraa1.png"                         length="882640"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एमएसपी तय करने की मांग वाली याचिका को लेकर उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को भेजा नोटिस, एमएसपी उत्पादन लागत से 50 प्रतिशत होना चाहिए अधिक </title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने एमएसपी निर्धारण को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में मांग की गई है कि फसलों का दाम उत्पादन लागत (C2) से 50% अधिक तय हो। वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि कम एमएसपी और अधूरी खरीद नीति किसानों के संकट और आत्महत्या का मुख्य कारण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-sent-notice-to-the-central-government-regarding-the/article-150215"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/superme-court.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया, जिसमें सरकार को उचित तरीके से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करने के लिए निर्देश देने की मांग की गयी है। महाराष्ट्र के किसान प्रकाश गोपालराव पोहरे, पुरुषोत्तम गावड़े और विशाल ओमप्रकाश रावत द्वारा संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में मांग की गई है कि फसलों पर एमएसपी उत्पादन लागत से कम से कम 50 प्रतिशत अधिक होना चाहिए। इसे तय करते समय संबंधित राज्य सरकारों द्वारा प्रस्तावित खेती की वास्तविक लागत (सी2) को प्रभावी महत्व देना चाहिए।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने इन दलीलों पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि यह मुद्दा देश भर के किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एमएसपी की कमी के कारण बड़ी संख्या में किसानों नेआत्महत्याएं की हैं। भूषण ने कहा कि एमएसपी अक्सर खेती की व्यापक लागत से भी कम दर पर तय किया जाता है और एमएसपी पर खरीद केवल गेहूं और चावल जैसी फसलों के लिए ही महत्वपूर्ण है, जिससे अन्य फसलें उगाने वाले किसान अत्यधिक संकट में हैं। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वर्तमान एमएसपी पद्धति मुख्य रूप से ए2 एफएल (लागत और पारिवारिक श्रम) पर आधारित है, जबकि इसमें भूमि की लागत और कार्यशील पूंजी पर ब्याज को छोड़ दिया जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-sent-notice-to-the-central-government-regarding-the/article-150215</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-court-sent-notice-to-the-central-government-regarding-the/article-150215</guid>
                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 18:00:28 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/superme-court.png"                         length="1375391"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लैंड फॉर जॉब केस : उच्चतम न्यायालय से लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका, निचली अदालत में पेश होने की छूट</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने 'जमीन के बदले नौकरी' मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को निचली अदालत में पेशी से व्यक्तिगत छूट दे दी है। न्यायालय CBI जांच की कानूनी वैधता और अनिवार्य मंजूरी की चुनौती वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है। यह मामला 2004-2009 के रेल मंत्री कार्यकाल के दौरान हुई कथित ग्रुप-डी नियुक्तियों से जुड़ा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/land-for-job-case-big-blow-to-lalu-prasad-yadav/article-150209"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/lalu-yadav.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद को 'जमीन के बदले नौकरी' मामले की कार्यवाही के दौरान निचली अदालत में पेश होने से छूट दे दी है। न्यायालय प्रसाद की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के मामले को चुनौती दी गई है। इसमें सक्षम प्राधिकारी से अनिवार्य पूर्व मंजूरी के बिना कथित तौर पर नई पूछताछ और जांच शुरू करने के कदम को भी चुनौती दी गई है।</p>
<p>इससे पहले 24 मार्च को, दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में सीबीआई की प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने श्री यादव के उस तर्क को खारिज कर दिया था जिसमें कहा गया था कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत पूर्व मंजूरी के अभाव में यह कार्यवाही कानूनी रूप से उचित नहीं है। यह मामला 2004 से 2009 के बीच प्रसाद के रेल मंत्री के कार्यकाल के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर में भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र में की गई कथित 'ग्रुप डी' नियुक्तियों से संबंधित है। जांचकर्ताओं का आरोप है कि उम्मीदवारों को उन जमीन के टुकड़ों के बदले नियुक्त किया गया था जो लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों या सहयोगियों के नाम पर उपहार में दिए गए थे या स्थानांतरित किए गए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/land-for-job-case-big-blow-to-lalu-prasad-yadav/article-150209</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/land-for-job-case-big-blow-to-lalu-prasad-yadav/article-150209</guid>
                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 14:57:55 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/lalu-yadav.png"                         length="1151513"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>25 PIL दाखिल करने वाले वकील को सुप्रीम कोर्ट की फटकार : याचिकाओं पर सुनवाई से इंकार, पढ़ें पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने एक वकील द्वारा दायर 25 जनहित याचिकाओं को सुनने से इनकार करते हुए कड़ी फटकार लगाई। न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने याचिकाकर्ता को "पीआईएल की दुकान" बंद कर वकालत पर ध्यान देने की सलाह दी। अदालत ने तुच्छ मुद्दों और बिना गहराई के दायर मुकदमों पर नाराजगी जताते हुए संवेदनशीलता बरतने की हिदायत दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/lawyer-who-filed-25-pil-got-a-shock-from-the/article-149870"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/supreme-court--2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को एक ही याचिकाकर्ता की ओर से व्यक्तिगत रूप से दायर 25 जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पांचोली की पीठ ने याचिकाकर्ता वकील सचिन गुप्ता को जनहित याचिकाएं दायर करने के बजाय अपनी वकालत पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा। न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने टिप्पणी की, "पेशे पर ध्यान केंद्रित करें। जब सही समय होगा, हम मामलों पर भी विचार करेंगे। लेकिन पहले संवेदनशील बनें और मुद्दों को गहराई से समझें।"</p>
<p>अदालत के समक्ष पेश याचिकाओं में कई तरह की मांगें की गयी थीं। इनमें देश में प्रचलित सभी भाषाओं और बोलियों के शब्दों को मिलाकर भारत में एक सामान्य संपर्क भाषा विकसित करने की नीति, टेलीविजन पर कानूनी जागरूकता कार्यक्रम के लिए नीति और साबुनों में रसायनों के उपयोग पर नीति बनाना शामिल था। इसके अलावा साबुनों में केवल ऐसे रसायनों की अनुमति देने की मांग की गयी थी, जो हानिकारक बैक्टीरिया को मारते हों न कि त्वचा के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बैक्टीरिया को। याचिकाओं में अखिल भारतीय स्तर पर खाद्य/एफएसएसएआई पंजीकरण अभियान के लिए नीति बनाने जैसी मांगें भी शामिल थीं।</p>
<p>याचिकाकर्ता ने याचिकाओं को वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे पीठ ने मंजूर कर लिया। पीठ ने उन लोगों की भी आलोचना की, जो 'पीआईएल की दुकानें' चला रहे हैं। अदालत का इशारा तुच्छ मुद्दों पर बड़ी संख्या में दायर की जाने वाली जनहित याचिकाओं की ओर था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/lawyer-who-filed-25-pil-got-a-shock-from-the/article-149870</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/lawyer-who-filed-25-pil-got-a-shock-from-the/article-149870</guid>
                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 14:54:36 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-05/supreme-court--2.jpg"                         length="195864"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सबरीमाला मंदिर : सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने किया महिलाओं के प्रवेश प्रतिबंध का समर्थन, मुस्लिम-पारसियों से भी सामने आया कनेक्शन</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट में धार्मिक आस्था बनाम मौलिक अधिकारों पर सुनवाई शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने हलफनामा दायर कर सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक का समर्थन किया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे धार्मिक स्वायत्तता का विषय बताते हुए कहा कि लैंगिक भेदभाव की विदेशी अवधारणाएं भारतीय परंपराओं पर थोपी नहीं जानी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/central-government-supported-womens-entry-ban-in-sabarimala-temple-supreme/article-149492"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/sabrimala-mandir.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान बेंच ने मंगलवार से धार्मिक आस्था बनाम मौलिक अधिकार और सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश देने के मामले पर सुनवाई शुरु कर दी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली संविधान बेंच के समक्ष चल रही सुनवाई के समक्ष केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि सबरीमाला मंदिर में माहवारी से जुड़े आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर रोक धार्मिक आस्था और स्वायतता का मामला है।</p>
<p>केंद्र सरकार ने कोर्ट से इस प्रतिबंध को बरकरार रखने की मांग की है और कहा है कि ऐसे मामलों में न्यायिक समीक्षा की सीमा सीमित होनी चाहिए। आज सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि भारत ने हमेशा महिलाओं को न सिर्फ बराबरी दी है, बल्कि कई बार उन्हें ऊंचा स्थान दिया है। उन्होंने कहा कि कुछ हालिया फैसलों में पितृसत्ता और जेंडर स्टीरियोटाइप जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन ये अवधारणाएं भारतीय सभ्यता के मूल में नहीं रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे विचार बाहर से आए हैं और भारत की सांस्कृतिक परंपरा से मेल नहीं खाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/central-government-supported-womens-entry-ban-in-sabarimala-temple-supreme/article-149492</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/central-government-supported-womens-entry-ban-in-sabarimala-temple-supreme/article-149492</guid>
                <pubDate>Wed, 08 Apr 2026 11:55:21 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/sabrimala-mandir.png"                         length="1019612"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी ठेकों के मामले में अरूणाचल सीएम खांडू का सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका : सीबीआई जांच के आदेश, पढ़ें पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनके परिवार से जुड़ी कंपनियों को 1,270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके देने के आरोपों की CBI जांच का निर्देश दिया है। 2015 से 2025 के बीच हुई अनियमितताओं की जांच 16 हफ्तों में पूरी होगी, जिससे राज्य की राजनीति में हड़कंप मच गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/arunachal-pradesh-cm-khandu-gets-a-big-blow-from-the/article-149260"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/pema-khandu.png" alt=""></a><br /><p>अरूणाचल प्रदेश। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू पर मुश्किलों के बादल मंडराने लगे है क्योंकि सरकारी ठेका आवंटन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उनको बड़ा झटका दिया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने उनके परिवार से जुड़ी कंपनियों को सरकारी ठेके देने के आरोपों की जांच के लिए सीबीआई को निर्देश जारी किए हैं। बता दें कि यह विवाद करीब 1,270 करोड़ रुपये के ठेकों में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसमें सीएम पेमा खांडू परिवार की चार कंपनियों के शामिल होने का आरोप है। </p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने और जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करने का आदेश जारी किया है और साथ ही मुख्य सचिव को समन्वय के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का भी आदेश दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी तरह का रिकॉर्ड नष्ट नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, सीबीआई नवंबर 2015 से 2025 के बीच दिए गए ठेकों और उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया की भी शुरूआत से जांच करेगी। कोर्ट ने आगे कहा कि इस दौरान सीबीआई विशेष रूप से उन मामलों की पड़ताल करेगी, जिनमें याचिकाकर्ताओं ने अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। </p>
<p>इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर आदेश का पालन करने का भी आदेश जारी किया है। याचिका में दावा किया गया है कि इस अवधि में करीब 1,245 करोड़ रुपये के ठेके मुख्यमंत्री की पत्नी, माता और भतीजे से जुड़ी फर्मों को बिना उचित प्रक्रिया के दिए गए। इस याचिका में तवांग से विधायक त्सेरिंग ताशी की कंपनी का भी नाम शामिल है। कोर्ट ने सीबीआई को 16 सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा है, जिससे यह तय किया जा सके कि आगे स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है या नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/arunachal-pradesh-cm-khandu-gets-a-big-blow-from-the/article-149260</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/arunachal-pradesh-cm-khandu-gets-a-big-blow-from-the/article-149260</guid>
                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 14:28:53 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/pema-khandu.png"                         length="1433268"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ट्रिब्यूनल का बड़ा फैसला, कांग्रेस उम्मीदवार मेहताब शेख का नाम मतदाता सूची में बहाल करने का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[एसआईआर ट्रिब्यूनल ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुर्शिदाबाद के कांग्रेस उम्मीदवार मेहताब शेख का नाम मतदाता सूची में जोड़ने का आदेश दिया है। दस्तावेजों की जांच के बाद ट्रिब्यूनल ने चुनाव आयोग को रविवार शाम तक नाम शामिल करने का निर्देश दिया। इस फैसले से शेख के लिए 6 अप्रैल को नामांकन दाखिल करने का रास्ता साफ हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-decision-of-tribunal-order-to-restore-the-name-of/article-149182"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/west-bengal1.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में एसआईआर ट्रिब्यूनल ने अपने गठन के बाद पहले ही फैसले में कांग्रेस उम्मीदवार मेहताब शेख का नाम मतदाता सूची में बहाल करने का निर्देश दिया है। यह मामला मुर्शिदाबाद के फरक्का विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान शेख का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था, जिसके चलते वह नामांकन दाखिल नहीं कर पा रहे थे, जबकि उन्हें कांग्रेस का आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया जा चुका था। एसआईआर ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष. एस. शिवग्नानम , ने आदेश दिया कि शेख का नाम तुरंत प्रभाव से मतदाता सूची में फिर से जोड़ा जाए।</p>
<p>चुनाव आयोग ने 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की थी, जिसमें 60 लाख से अधिक मतदाताओं को शामिल किया गया था। उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर न्यायिक अधिकारियों ने विवादित प्रविष्टियों की जांच और समाधान की प्रक्रिया शुरू की थी। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा था कि जिन लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, वे राहत के लिए ट्रिब्यूनल का रुख कर सकते हैं। मतदाता सूची से नाम हटने और ट्रिब्यूनल के कामकाज में देरी के कारण शुरुआत में वहां नहीं जा पाने पर, शेख ने तुरंत राहत के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अदालत के निर्देश पर उन्होंने बाद में बिजन भवन स्थित ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की।</p>
<p>सुनवाई के दौरान शेख ने आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और अपने बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिनमें उनका नाम दर्ज था। उनके वकील फिरदौस शमीम और सुश्री गोपा बिस्वास ने पक्ष रखा, जबकि सुश्री दिव्या मुरुगेसन ने निर्वाचन आयोग की ओर से दलीलें पेश कीं। ट्रिब्यूनल ने पाया कि शेख के पिता के विवरण से संबंधित विसंगतियों के कारण नोटिस जारी किया गया था, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि इससे शेख की पात्रता पर कोई असर नहीं पड़ता। ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया कि रविवार शाम 8 बजे तक उनका नाम पूरक मतदाता सूची में शामिल किया जाए।</p>
<p>इससे पहले शेख ने कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया था, लेकिन अदालत ने एसआईआर से जुड़े मामलों पर उच्चतम न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का हवाला देते हुए सुनवाई से इनकार कर दिया था। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने उन्हें ट्रिब्यूनल जाने की अनुमति दी और निर्वाचन आयोग को सहयोग करने का निर्देश दिया। फरक्का में मतदान के पहले चरण की तारीख नजदीक होने और नामांकन की अंतिम तिथि 6 अप्रैल तय होने के बीच, ट्रिब्यूनल के इस आदेश से श्री शेख के लिए नामांकन दाखिल करने का रास्ता साफ हो गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/big-decision-of-tribunal-order-to-restore-the-name-of/article-149182</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/big-decision-of-tribunal-order-to-restore-the-name-of/article-149182</guid>
                <pubDate>Sun, 05 Apr 2026 15:59:54 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/west-bengal1.png"                         length="1073559"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        