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                <title>Supreme Court में पहुंचा कोविशिल्ड से स्ट्रोक और हार्ट अटैक आने का मामला</title>
                                    <description><![CDATA[ लंदन में कोविशील्ड वैक्सीन बनाने वाली एस्ट्रोलॉजीका वैक्सीन निर्माता कंपनी ने कोर्ट में स्ट्रोक और हार्ट अटैक आने के खतरे को मानने के बाद यह मामला भारत में भी सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/case-of-stroke-and-heart-attack-due-to-covishield-reached/article-76403"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court--3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कोविशील्ड वैक्सीन के कथित दुष्प्रभावों की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक की अध्यक्षता में चिकित्सा विशेषज्ञों की एक कमेटी गठित करने का निर्देश देने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की गई है। </p>
<p>कोविशील्ड निर्माता की यूनाइटेड ङ्क्षकगडम में टीके के दुष्प्रभावों की स्वीकारोक्ति की रिपोर्ट सामने आने के बाद अधिवक्ता विशाल तिवारी ने यहां यह याचिका दायर की है। यह याचिका 2021 की लंबित एक जनहित याचिका के मद्देनजर दायर की गई है।</p>
<p>उन्होंने अपनी याचिका में दलील देते हुए केंद्र सरकार को उन नागरिकों के लिए टीका क्षति भुगतान करने और उसके लिए एक टीका क्षति प्रणाली स्थापित करने का निर्देश देने की मांग की है, जो कोविड-19 महामारी के दौरान टीकाकरण अभियान के परिणामस्वरूप गंभीर रूप से विकलांग हो गए या जिनकी मृत्यु हो गई है।</p>
<p>दलील देते हुए आवेदक ने आगे कहा कि सरकार द्वारा सुरक्षा के आश्वासन पर कोविड-19 वैक्सीन अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को कोविशील्ड की वैक्सीन दी गई।याचिका में कहा गया, Þकोविड-19 के टीके लेने के बाद दिल का दौरा पडऩे और अचानक बेहोश होने से मौत के मामले बढ़े हैं। यहां तक कि युवाओं में भी दिल का दौरा पडऩे के कई मामले सामने आए हैं।Þ</p>
<p>याचिका में यह भी कहा गया है, अब कोविशील्ड के डेवलपर द्वारा यूके की एक अदालत में दाखिल किए गए दस्तावेज के बाद हम भारत में बड़ी संख्या में नागरिकों को दी गई उस वैक्सीन के जोखिम और खतरनाक परिणामों के बारे में सोचने के लिए मजबूर हुए हैं। सरकार को इसके लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।</p>
<p> याचिका में कहा गया है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के इस मामले से केंद्र सरकार को प्राथमिकता के आधार पर निपटना होगा ताकि, भविष्य में भारत के नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन को लेकर कोई खतरा उत्पन्न न हो।</p>
<p> फार्मास्युटिकल कंपनी और वैक्सीन एस्ट्राजेनेका के डेवलपर ने कहा है कि कोविड-19 के खिलाफ उसका एजेडडी1222 वैक्सीन (जिसे भारत में कोविशील्ड के रूप में लाइसेंस के तहत बनाया गया था) कम प्लेटलेट काउंट और Þबहुत दुर्लभÞ मामलों में रक्त के थक्कों के गठन का कारण बन सकता है।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया है कि एस्ट्राजेनेका ने वैक्सीन और थ्रोम्बोसिस के बीच थ्रोम्बोसाइटोपेनिया ङ्क्षसड्रोम (टीटीएस) के साथ संबंध को स्वीकार किया है।यह एक चिकित्सीय स्थिति है। कोविशील्ड के निर्माण के लिए कोरोना वायरस महामारी के दौरान एस्ट्राजेनेका के वैक्सीन फॉर्मूले को पुणे स्थित वैक्सीन निर्माता सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई ) को लाइसेंस दिया गया था।</p>
<p> रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर, उच्च न्यायालय (यूके में) में 51 मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें पीड़तिों और दुखी रिश्तेदारों ने 100 (यूके पाउंड) मिलियन तक की अनुमानित क्षति की गुहार लगाई हैÞ।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 May 2024 15:32:23 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>लंदन में कोर्ट ने माना कोविशील्ड वैक्सीन से हो सकता है स्ट्रोक और हार्ट अटैक</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में केंद्र सरकार या कंपनी का अभी तक कोई बयान नहीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/court-in-london-admits-that-covishield-vaccine-can-cause-stroke/article-76277"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-06/covishield_vaccine.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। लंदन में कोविशील्ड वैक्सीन बनाने वाली एस्ट्रोलॉजी का वैक्सीन निर्माता कंपनी ने कोर्ट में माना है कि कुछ दुर्लभ मामलों में कोविशील्ड वैक्सीन से कोरोना का टीकाकरण करने वाले लोगों में थोमब्रोसाइटोपेनिया सिंड्रोम के साथ थ्रोंबोसिस का कारण हो सकता है जिसकी वजह से खून के थक्के बनने के कारण यह स्ट्रोक और हार्ट अटैक का कारण बन सकता है। यह वैक्सीन लंदन की कंपनी एस्ट्रोजेनिका और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने मिलकर तैयार की थी जिसका उत्पादन भारत की पुणे में स्थित सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता कंपनी सिरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया ने किया था। भारत में करोड़ों लोगों को यह वैक्सीन लगी थी वहीं राजस्थान में भी यह वैक्सीन करोड़ों लोगों को लगाई गई थी। वैक्सीन से टीकाकरण करने पर दुर्लभ मामलों में स्ट्रोक और हार्ट अटैक होने के कंपनी के द्वारा कोर्ट में अपनी पुष्टि करने के बाद भारत में भी इस वैक्सीन को लेकर हड़कंप मचा है। हालांकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय या फिर केंद्र सरकार के किसी बड़े अधिकारी का इसे लेकर अभी कोई बयान नहीं आया है। यह वैक्सीन चिंपांजी बंदर के शरीर से एडिनोवायरस का एमआरएनए लेकर बनाई गई थी।</p>
<p><strong>जयपुर के प्रसिद्ध मेडिकल एक्सपर्ट का यह है कहना</strong><br />जयपुर के प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर जीएल शर्मा का कहना है कि कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर को पहले से इसकी शंकाएं थीं लेकिन अब लंदन के हाईकोर्ट में कंपनी के द्वारा इसकी पुष्टि किए जाने के बाद उन्होंने कहा है कि भारत में युवाओं को भी यह वैक्सीन बड़ी तादाद में लगी थी। युवाओं में अचानक हार्ट अटैक के मामले बढ़े भी है ऐसे में उन्हें खासकर सावधान रहने की जरूरत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Apr 2024 13:33:35 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>न्यूरोइंटरवेंशन रेडियोलॉजी तकनीक बनी मरीजों के लिए वरदान </title>
                                    <description><![CDATA[शहर के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने आधुनिक न्यूरोइंटरवेंशन मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी तकनीक से बिना सर्जरी किए दिमाग की मुख्य नस में फंसे हुए क्लॉट को तार के जरिए निकालकर मरीज की जान बचाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/neurointervention-radiology-technology-became-a-boon-for-patients/article-13133"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/open.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। शहर के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने आधुनिक न्यूरोइंटरवेंशन मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी तकनीक से बिना सर्जरी किए दिमाग की मुख्य नस में फंसे हुए क्लॉट को तार के जरिए निकालकर मरीज की जान बचाई है। जयपुर निवासी 65 वर्षीय बुजुर्ग को अचानक बोलने में तकलीफ हुई और वे बेहोश हो गए, उन्हें तुरंत इटरनल अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। यहां उनका एमआरआई और एंजियोग्राफी कराई, जिसमें दिमाग की बड़ी मुख्य नस में ब्लॉकेज मिला।</p>
<p>अस्पताल के न्यूरोइंटरवेंशन विशेषज्ञ डॉ. मदनमोहन गुप्ता ने डीएसए और मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी कर बिना चीरे टांके के कैथलेब में ले जाकर दिमाग की नस से क्लॉट निकाल दिया और मुख्य नस को भी खोल दिया। डॉ. गुप्ता ने बताया कि मरीज को तीन दिन बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया है। प्रोसीजर टीम में न्यूरोसाइंस विभाग के चेयरमैन डॉ. सुरेश गुप्ता, डॉ. सुरेन्द्र, डॉ. अरुण, डॉ. ताराचंद, आईसीयू के डॉ. अरुण शर्मा सहित अन्य स्टाफ मौजूद रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jun 2022 12:28:46 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सर्द मौसम ने बढ़ाया हृदय रोगों और स्ट्रोक का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[सर्दियों में सिकुड़ जाती है रक्त वाहिकाएं, विशेषज्ञों की राय, बचाव ही है उपाय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6-%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%B8%E0%A4%AE-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A5%9D%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%AF-%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%BE/article-3694"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/heart-n-stroke.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सर्दियों को केवल सर्दी-जुकाम, बुखार, वायरल, इन्फेक्शन से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसी मौसम में स्ट्रोक और हृदय रोग जैसे गंभीर रोगों का खतरा भी बहुत तेजी से बढ़ जाता है। खासकर बुजुर्ग और पहले से स्ट्रोक एवं हृदय रोग की समस्या से जूझ रहे लोगों को अतिरिक्त रूप से सचेत रहने की आवश्यकता है। सर्दियों में रक्त वाहिकाओं के सिकुड़ने से यह समस्याएं पैदा होती है।  नारायणा हॉस्पिटल के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. पृथ्वी गिरी ने बताया कि सर्दी के मौसम में ओपीडी में स्ट्रोक से सम्बंधित समस्याओं का आंकड़ा तकरीबन 10 से 15 फीसदी बढ़ जाता है। आमतौर पर स्ट्रोक के दो प्रकार होते हैं। एक नस का बंद होना और दूसरा नस का फटना यानि ब्रेन हेमरेज। इसकी मुख्य वजह है कि सर्दियों में रक्त वाहिकाएं संकुचन तो करती ही हैं साथ ही व्यक्ति के सर्दी के संपर्क में आने पर बीपी शूट आउट करता है, जिसके कारण हेमरेज का जोखिम बहुत बढ़ जाता है।<br /> <br /> <strong>स्ट्रोक से ऐसे बचें</strong><br />     दिन में कम से कम आधा घंटा धूप सेकें, शारीरिक व्यायाम करें ताकि रक्त वाहिकाओं का संकुचन कुछ कम हो। <br />     स्ट्रोक के मरीज अपना बीपी नियमित रूप से चेक करते रहें।<br />     शुगर को भी नियंत्रण में रखें।<br /> <br /> <strong>सिम्पेथेटिक सिस्टम एक्टिव होने से बढ़ता है हार्ट का खतरा</strong><br /> नारायणा हॉस्पिटल के कंसल्टेंट इंटरवेंशन कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अंशुल पटोदिया ने बताया कि सर्दियों में तापमान गिरने के साथ हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से सिम्पेथेटिक सिस्टम एक्टिव हो जाता है जो शरीर का तामपान बढ़ा देता है। इस प्रक्रिया का मूल काम शरीर का सर्दी से बचाव करना होता है, लेकिन इसके साथ बीपी और हार्ट रेट बढ़ जाते हैं। इन दिनों ऐसे मरीजों की संख्या लगभग 20 से 30 फीसदी तक बढ़ जाती है। <br /> <br /> <strong>ऐसे करें बचाव</strong><br />     बीपी को नियंत्रण में रखने की कोशिश <br />     डाइट और सक्रिय जीवनशैली का ध्यान रखें।<br />     सर्दी से बचें और नियमित व्यायाम करें। पहले से हार्टअटैक की समस्या से जूझ चुके लोग अपना विशेष ध्यान रखें, जरूरी होने पर डॉक्टर से सलाह लें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Dec 2021 15:05:43 +0530</pubDate>
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                <title>सर्दी में 35 % तक बढ़ जाते हैं स्ट्रॉक</title>
                                    <description><![CDATA[अल्कोहल, धूम्रपान, जंकफूड के कारण 40 से कम उम्र के लोग भी हो रहे स्ट्रोक से पीड़ित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-35---%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%AC%E0%A5%9D-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%89%E0%A4%95/article-3501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/stroke.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जैसे-जैसे सर्दी बढ़ेगी वैसे-वैसे आमजन को बीमारियां जकड़ना शुरू कर देंगी। कड़ाके की ठंड बुजुर्गों के लिए घातक होती है। इस मौसम में खासतौर पर 60 साल से अधिक की आयु वाले लोगों को स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है। वहीं मोटापा, शुगर और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को भी स्ट्रोक का खतरा रहता है। सर्दियों में स्ट्रोक से होने वाली मौतों के मामले 25 से 35 फीसदी तक बढ़ जाते हैं। वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. पंकज सिंह ने बताया कि सर्दी में शरीर के तापमान में कमी और विटामिन-डी के स्तर में कमी और रक्त के गाढ़ेपन में वृद्धि स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा देती है। वहीं ठंडी तेज हवा शरीर के तापमान को और कम कर देती है। इस कारण ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाता है, जिससे स्ट्रोक का खतरा ज्यादा रहता है। खून की धमनियों में सिकुड़न या क्लॉटिंग  से मस्तिष्क में खून का प्रवाह बाधित होने पर स्ट्रोक पड़ता है, जबकि मस्तिष्क के भीतर खून की धमनियां फटने पर ब्रेन हैमरेज होता है।<br /> <br /> <strong>30 फीसदी युवाओं में स्ट्रोक</strong><br /> डॉ. सिंह ने बताया कि युवाओं में बढ़ते अल्कोहल, धूम्रपान, जंकफूड के चलन के कारण आज बुजुर्गों के साथ युवा भी स्ट्रोक की चपेट में आने लगे हैं। स्ट्रोक के कुल पीड़ितों में 30 फीसदी युवा हैं, जिनकी उम्र 40 से कम है। साल दर साल यह आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। इन युवाओं में 80 फीसदी पुरुष हैं।<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>ऐसे बचें</strong></span></span><br /> जहां तक हो सके गुनगुना पानी पीएं। सुबह जल्दी सैर या मॉर्निंग वॉक करें। ठंड से बचने के लिए शरीर को पूरी तरह से खासतौर से सिर को ढांक कर रखें। ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल व मधुमेह के मरीज नियमित दवा खाएं और इन्हें कंट्रोल में रखें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Dec 2021 15:09:50 +0530</pubDate>
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                <title>विश्व स्ट्रोक दिवस आज :देश में हर साल 18 लाख से ज्यादा नए मरीज, समय पर इलाज नहीं तो मरीज हो जाता है लकवाग्रस्त</title>
                                    <description><![CDATA[युवाओं में बढ़े स्ट्रोक के मामले, राज्य में रोजाना 400 शिकार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%95-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B8-%E0%A4%86%E0%A4%9C--%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2-18-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%96-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%8F-%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%9C--%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%AF-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%87%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%9C-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%9C-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4/article-1987"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/world-stroke-day-story.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर।</strong> युवाओं में स्ट्रोक (लकवे) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। देश में हर साल 18 लाख से ज्यादा ब्रेन स्ट्रोक के नए मरीज आते हैं। अकेले राजस्थान में प्रतिदिन लगभग 400 मरीज अस्पतालों में स्ट्रोक का इलाज कराने आ रहे हैं। स्ट्रोक के बाद ब्रेन की प्रति मिनट 20 लाख कोशिकाएं मरने लगती हैं। शुरुआती कुछ घंटो के भीतर इलाज नहीं किया जाए तो मरीज हमेशा के लिए लकवाग्रस्त हो सकता है।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>ये हैं लक्षण</strong></span></span><br />     चेहरा टेढ़ा हो जाना। <br />     हाथों-पैरों में सूनापन या कंपन होना।<br />     आवाज बदलाना। <br />     शरीर के एक हिस्से में कमजोरी के साथ ताकत कम हो जाना आदि।<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>ऐसे करें बचाव</strong></span></span><br />     रक्तचाप को नियंत्रण में रखना। <br />     तंबाकू और सिगरेट का सेवन न करना। <br />     शारीरिक व्यायाम, योगा सहित पौष्टिक आहार और खानपान पर संयम बरतें।<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong>सर्दियों में बढ़ते है स्ट्रोक के मामले, कोरोना से रिकवर लोगों में खतरा ज्यादा</strong></span></span></span><br /> सर्दियों में स्ट्रोक होने की संभावना बढ़ जाती है। रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने लगती हैं। दिमाग में कम मात्रा में आॅक्सीजन सप्लाई का भी खतरा होता है। यदि कोई व्यक्ति पहले से ही डायबिटीज या बीपी से पीड़ित हो या उसकी रक्त वाहिकाओं में पहले से ही वसा का जमाव हो तो मुमकिन है कि उनमें पहले से कोई जमा क्लॉट स्ट्रोक में तब्दील हो जाए। <br /> -<strong>डॉ. पृथ्वी गिरि, न्यूरोलॉजिस्ट, नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल जयपुर</strong><br /> <br /> गलत और अनुचित खानपान की आदत, जीवनशैली में बदलाव और शारीरिक निष्क्रियता के कारण आज युवाओं में भी स्ट्रोक के मामले बढ़ने लगे हैं। शुरूआती लक्षणों में ही विशेषज्ञ डॉक्टर्स से परामर्श और उपचार से कई हद तक बीमारी पर काबू पाया जा सकता है और स्ट्रोक की गंभीरता पर उपचार के लिए ऑपरेशन या सर्जरी की जा सकती है। <br /> -<strong>डॉ. एसपी पाटीदार न्यूरोलॉजिस्ट और डॉ. पंकज सिंह न्यूरो सर्जन</strong><br /> <br /> कोविड संक्रमण में थ्रोम्बोसिस यानी खून जमने का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए स्ट्रोक व अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। पोस्ट कोविड रिकवरी के दौरान किसी भी मामूली लक्षण को नजरअंदाज न करें। <br /> -<strong>डॉ. केके बंसल, सीनियर न्यूरो सर्जन, नारायणा अस्पताल</strong><br /> <br /> स्ट्रोक बहुत गंभीर बीमारी है। दुनिया में होने वाली मौतों में स्ट्रोक दूसरा प्रमुख कारण है जबकि विकलांगता होने के मामलों में स्ट्रोक तीसरा प्रमुख कारण है। बचाव के लिए रक्तचाप को नियंत्रण में रखना जरूरी है। नियमित योगा करना चाहिए। <br /> -<strong>डॉ. सोमदेव बंसल, न्यूरो सर्जन</strong><br /> <br /> रिस्क फेक्टर का मैनेजमेंट करके स्ट्रोक की दर को कम किया जा सकता है। स्ट्रोक मस्तिष्क के एक हिस्से में होने वाली वह क्षति है जो रक्त प्रवाह में रुकावट के कारण होता है। स्टोक से चेहरा टेढ़ा हो जाता है। <br /> -<strong>डॉ. श्रवण कुमार चौधरी,  कंसल्टेंट न्यूरोलॉजी, मणिपाल हॉस्पिटल</strong><br /> <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Oct 2021 13:08:12 +0530</pubDate>
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