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                <title>treated - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>न्यूरोइंटरवेंशन रेडियोलॉजी तकनीक बनी मरीजों के लिए वरदान </title>
                                    <description><![CDATA[शहर के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने आधुनिक न्यूरोइंटरवेंशन मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी तकनीक से बिना सर्जरी किए दिमाग की मुख्य नस में फंसे हुए क्लॉट को तार के जरिए निकालकर मरीज की जान बचाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/neurointervention-radiology-technology-became-a-boon-for-patients/article-13133"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/open.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। शहर के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने आधुनिक न्यूरोइंटरवेंशन मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी तकनीक से बिना सर्जरी किए दिमाग की मुख्य नस में फंसे हुए क्लॉट को तार के जरिए निकालकर मरीज की जान बचाई है। जयपुर निवासी 65 वर्षीय बुजुर्ग को अचानक बोलने में तकलीफ हुई और वे बेहोश हो गए, उन्हें तुरंत इटरनल अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। यहां उनका एमआरआई और एंजियोग्राफी कराई, जिसमें दिमाग की बड़ी मुख्य नस में ब्लॉकेज मिला।</p>
<p>अस्पताल के न्यूरोइंटरवेंशन विशेषज्ञ डॉ. मदनमोहन गुप्ता ने डीएसए और मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी कर बिना चीरे टांके के कैथलेब में ले जाकर दिमाग की नस से क्लॉट निकाल दिया और मुख्य नस को भी खोल दिया। डॉ. गुप्ता ने बताया कि मरीज को तीन दिन बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया है। प्रोसीजर टीम में न्यूरोसाइंस विभाग के चेयरमैन डॉ. सुरेश गुप्ता, डॉ. सुरेन्द्र, डॉ. अरुण, डॉ. ताराचंद, आईसीयू के डॉ. अरुण शर्मा सहित अन्य स्टाफ मौजूद रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jun 2022 12:28:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दैनिक नवज्योति की खबर का असर: लावारिस मरीजों का उचित इलाज नहीं होने पर आयोग ने लिया प्रसंज्ञान</title>
                                    <description><![CDATA[मानवाधिकार आयोग ने जोधपुर में लावारिस मरीजों के इलाज का उचित प्रबंध नहीं होने के मामले में स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लिया है। दैनिक नवज्योति, जोधपुर ने सरकारी अस्पताल में लावारिस मरीजों का उचित इलाज नहीं होने का खुलासा किया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-commission-took-cognition-not-being-treated/article-8934"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/6546546465.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मानवाधिकार आयोग ने जोधपुर में लावारिस मरीजों के इलाज का उचित प्रबंध नहीं होने के मामले में स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लिया है। दैनिक नवज्योति, जोधपुर ने सरकारी अस्पताल में लावारिस मरीजों का उचित इलाज नहीं होने का खुलासा किया था। आयोग ने जोधपुर कलक्टर और मथुरादास अस्पताल के अधीक्षक से प्रकरण की जांच उच्च स्तर पर करवाकर तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने को कहा है। आयोग ने कहा है कि यदि तथ्यात्मक रिपोर्ट से आयोग संतुष्ट नहीं होगा, तो लावारिस मरीजों को एक-एक लाख रुपए का मुआवजा दिलाने के साथ ही दोषी चिकित्सकों पर कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को लिखा जाएगा</p>
<p>  <br />कागजों में दौड रही लावारिसों के लिए उपचार की सुविधाएं, लेकिन धरातल पर सब फिसड्डी‘ शीषर्क से समाचार प्रकाशित किया था, जिसमें बताया कि एक लावारिस मरीज के पैर की नसों में खून का बहाव बंद होने के कारण उसका पैर सड़ गया था। एमडीएम अस्पताल में दिखाने पर उसे दवा देकर रवाना कर दिया। वहीं पूछने पर डॉक्टर ने कहा कि इसका पैर तो काटना पडेÞगा तो कभी भी काट देंगे। अभी इसे दवा देकर काम चलाओ। समाचार में बताया गया था कि मरीज का पैर पहले पंजों से काला पड़ना आरंभ हो गया था और यदि समय पर मरीज का पैर नीचे से नहीं काटा गया, तो उसे काटना पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 May 2022 11:19:47 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जहां गूंजती थी शेरों और बाघों की दहाड़, अब वहां बघेरे और जरख का हो रहा इलाज  </title>
                                    <description><![CDATA[नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क स्थित रेस्क्यू सेंटर में साल 2002-03 से 2020 तक बाघों और शेरों की दहाड़ गूंजती थी। आखिरी बची शेरनी की बीमारी से मृत्यु के बाद रेस्क्यू सेंटर खाली हो गया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/treated-of-baghere-being-in-rescue-center/article-7445"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/baghera-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क स्थित रेस्क्यू सेंटर में साल 2002-03 से 2020 तक बाघों और शेरों की दहाड़ गूंजती थी। आखिरी बची शेरनी की बीमारी से मृत्यु के बाद रेस्क्यू सेंटर खाली हो गया था। अब रेस्क्यू सेंटर में प्रतापगढ़, अचरोल और जयपुर से रेस्क्यू कर लाए गए 6 बघेरों और 3 जरखों की दहाड़ सुनाई देती है। यहां इनमें से बीमार बघेरे और जरख का इलाज किया जा रहा है। सबसे उम्रदराज बघेरे की उम्र 18 और सबसे छोटे की उम्र 10 माह है।</p>
<p><strong>बिना दांतों वाला बघेरा</strong><br />प्रतापगढ़ से रेस्क्यू कर लाए बघेरे की उम्र करीब 18 साल है। खास बात ये है कि इसके दांत नहीं है।<br /> रेस्क्यू कर लाए बघेरों में यहीं सबसे उम्रदराज है। इसने प्रतापगढ़ में इंसानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। अब रेस्क्यू सेंटर में समय बीता रहा है। इसे खाने में सॉफ्ट मीट दिया जाता है।</p>
<p><strong>अचरोल रेंज से आया था शिवा</strong><br />25 मई, 2021 को अचरोल रेंज से 10 दिन के शावक को रेस्क्यू कर यहां लाया गया। जानकारी के अनुसार ये अपनी मां से बिछुड़ गया था। अब ये 10 महीने का हो गया है। वन विभाग के स्टाफ ने ही इसका लालन-पालन कर इसका नाम ‘शिवा’ रखा है।  नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरविंद माथुर ने बताया कि 9 जनवरी, 2022 को अचरोल से 4 साल के बीमार बघेरे को रेस्क्यू कर लाए गया था, जिसका इलाज किया जा रहा है। इसे स्टाफ ने माधव नाम दिया है। इससे पहले 2016-17 में सरिस्का से एक मादा (10 वर्षीय), एक नर (13 वर्षीय) और 2018 में जयपुर स्थित नाहरसिंह बाबा मंदिर से 5 साल के बघेरे को रेस्क्यू कर यहां लाए थे। इसके अतिरिक्त नाहरगढ़ रेस्क्यू सेंटर में 2 नर और एक मादा बीमार जरख का इलाज चल रहा है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Apr 2022 10:43:02 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>विश्व स्ट्रोक दिवस आज :देश में हर साल 18 लाख से ज्यादा नए मरीज, समय पर इलाज नहीं तो मरीज हो जाता है लकवाग्रस्त</title>
                                    <description><![CDATA[युवाओं में बढ़े स्ट्रोक के मामले, राज्य में रोजाना 400 शिकार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%95-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B8-%E0%A4%86%E0%A4%9C--%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2-18-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%96-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%8F-%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%9C--%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%AF-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%87%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%9C-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%9C-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4/article-1987"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/world-stroke-day-story.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर।</strong> युवाओं में स्ट्रोक (लकवे) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। देश में हर साल 18 लाख से ज्यादा ब्रेन स्ट्रोक के नए मरीज आते हैं। अकेले राजस्थान में प्रतिदिन लगभग 400 मरीज अस्पतालों में स्ट्रोक का इलाज कराने आ रहे हैं। स्ट्रोक के बाद ब्रेन की प्रति मिनट 20 लाख कोशिकाएं मरने लगती हैं। शुरुआती कुछ घंटो के भीतर इलाज नहीं किया जाए तो मरीज हमेशा के लिए लकवाग्रस्त हो सकता है।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>ये हैं लक्षण</strong></span></span><br />     चेहरा टेढ़ा हो जाना। <br />     हाथों-पैरों में सूनापन या कंपन होना।<br />     आवाज बदलाना। <br />     शरीर के एक हिस्से में कमजोरी के साथ ताकत कम हो जाना आदि।<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>ऐसे करें बचाव</strong></span></span><br />     रक्तचाप को नियंत्रण में रखना। <br />     तंबाकू और सिगरेट का सेवन न करना। <br />     शारीरिक व्यायाम, योगा सहित पौष्टिक आहार और खानपान पर संयम बरतें।<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong>सर्दियों में बढ़ते है स्ट्रोक के मामले, कोरोना से रिकवर लोगों में खतरा ज्यादा</strong></span></span></span><br /> सर्दियों में स्ट्रोक होने की संभावना बढ़ जाती है। रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने लगती हैं। दिमाग में कम मात्रा में आॅक्सीजन सप्लाई का भी खतरा होता है। यदि कोई व्यक्ति पहले से ही डायबिटीज या बीपी से पीड़ित हो या उसकी रक्त वाहिकाओं में पहले से ही वसा का जमाव हो तो मुमकिन है कि उनमें पहले से कोई जमा क्लॉट स्ट्रोक में तब्दील हो जाए। <br /> -<strong>डॉ. पृथ्वी गिरि, न्यूरोलॉजिस्ट, नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल जयपुर</strong><br /> <br /> गलत और अनुचित खानपान की आदत, जीवनशैली में बदलाव और शारीरिक निष्क्रियता के कारण आज युवाओं में भी स्ट्रोक के मामले बढ़ने लगे हैं। शुरूआती लक्षणों में ही विशेषज्ञ डॉक्टर्स से परामर्श और उपचार से कई हद तक बीमारी पर काबू पाया जा सकता है और स्ट्रोक की गंभीरता पर उपचार के लिए ऑपरेशन या सर्जरी की जा सकती है। <br /> -<strong>डॉ. एसपी पाटीदार न्यूरोलॉजिस्ट और डॉ. पंकज सिंह न्यूरो सर्जन</strong><br /> <br /> कोविड संक्रमण में थ्रोम्बोसिस यानी खून जमने का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए स्ट्रोक व अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। पोस्ट कोविड रिकवरी के दौरान किसी भी मामूली लक्षण को नजरअंदाज न करें। <br /> -<strong>डॉ. केके बंसल, सीनियर न्यूरो सर्जन, नारायणा अस्पताल</strong><br /> <br /> स्ट्रोक बहुत गंभीर बीमारी है। दुनिया में होने वाली मौतों में स्ट्रोक दूसरा प्रमुख कारण है जबकि विकलांगता होने के मामलों में स्ट्रोक तीसरा प्रमुख कारण है। बचाव के लिए रक्तचाप को नियंत्रण में रखना जरूरी है। नियमित योगा करना चाहिए। <br /> -<strong>डॉ. सोमदेव बंसल, न्यूरो सर्जन</strong><br /> <br /> रिस्क फेक्टर का मैनेजमेंट करके स्ट्रोक की दर को कम किया जा सकता है। स्ट्रोक मस्तिष्क के एक हिस्से में होने वाली वह क्षति है जो रक्त प्रवाह में रुकावट के कारण होता है। स्टोक से चेहरा टेढ़ा हो जाता है। <br /> -<strong>डॉ. श्रवण कुमार चौधरी,  कंसल्टेंट न्यूरोलॉजी, मणिपाल हॉस्पिटल</strong><br /> <br />  </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 29 Oct 2021 13:08:12 +0530</pubDate>
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