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                <title>SC - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अनुसूचित जाति एवं जनजाति के आरक्षण के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं: ग्यारसी लाल मीना</title>
                                    <description><![CDATA[न्यायमूर्ति ग्यारसी लाल मीना ने बताया कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के आरक्षण के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/gyarsi-lal-meena-will-not-tolerate-tampering-with-the-reservation/article-91313"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/427rtrer-(4)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जवाहर सर्किल सिद्धार्थ नगर स्थित एक होटल में अनुसूचित जनजाति संयुक्त संस्थान की ओर से अध्यक्ष भागचंद मीना के नेतृत्व में आदिवासी समुदाय के उत्थान का कार्यक्रम हुआ। मुख्य अतिथि लोकसभा सांसद बांसवाड़ा राजकुमार रोत, विशिष्ट अतिथि पूर्व लोकसभा सांसद पुलिन वासवा, न्यायमूर्ति डी टी गरासिया, न्यायमूर्ति न्यायालय जिला उपभोक्ता आयोग जयपुर ग्यारसी लाल मीना सहित अन्य थे।</p>
<p>बाबा साहब भीमराव आंबेडकर व भगवान जयपाल मुंडा की तस्वीर पर दीप प्रज्ज्वलित कर पुष्प अर्पित किए गए। अध्यक्ष भागचन्द मीना ने बताया कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के साथ भेदभाव किया जाता है। तभी तो क्रीमीलेयर के आधार पर वर्गीकरण, अनूसूचित जनजाति की जनसंख्या की 2011 जनगणना, बैकलॉव व पदोन्नति में पक्षपात हो रहा है। न्यायमूर्ति ग्यारसी लाल मीना ने बताया कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के आरक्षण के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। सभी एकजुट होकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से वार्तालाप कर सरकारी नौकरी में प्रमोशन बैकलॉग से संबंधित समस्याओं को दूर कराने का आग्रह करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Sep 2024 11:56:19 +0530</pubDate>
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                <title>मालेगांव विस्फोट के आरोपी कुलकर्णी की याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव शहर में एक मोटरसाइकिल से बंधे बम फटने से छह लोग मारे गए थे और लगभग 100 लोग घायल हो गए थे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/plea-of-%E2%80%8B%E2%80%8Bmalegaon-blast-accused-kulkarni-rejected/article-87050"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार समीर कुलकर्णी की याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और अरविंद कुमार की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कुलकर्णी का पक्ष रख रहे अधिवक्ता से कहा कि वह बॉम्बे उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं है।</p>
<p>उच्च न्यायालय ने आरोपी कुलकर्णी की याचिका खारिज कर दी थी। गौरतलब है कि महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव शहर में एक मोटरसाइकिल से बंधे बम फटने से छह लोग मारे गए थे और लगभग 100 लोग घायल हो गए थे। शीर्ष अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) यूएपीए की धारा 45(2) के तहत मंजूरी नहीं ली है। उन्होंने दलील दी कि इस पृष्ठभूमि में यूएपीए के तहत आरोप कायम नहीं रह सकते। उन्होंने दावा किया कि यूएपीए के तहत केंद्र सरकार से एनआईए द्वारा अभियोजन के लिए मंजूरी नहीं मिली थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Aug 2024 15:36:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए बड़ा दखल, SC ने केंद्र से 4 सप्ताह में मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[ कोर्ट ने कहा कि मामले में विचार-विमर्श के दौरान यह बात सामने आई कि जिन क्षेत्रों को ऐसे प्रदूषणकारी उत्पादों से मुक्त रखा जाना है, वहां प्लास्टिक का व्यापक उपयोग हो रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-intervention-to-save-rivers-from-pollution-sc-seeks-reply/article-87046"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/supreme-court--2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए बड़ा दखल दिया है। जस्टिस ऋषिकेश राय की अध्यक्षता वाली बेंच ने पर्यावरण की अनियंत्रित क्षति पर चिंता जताते हुए नदियों के कचरे को गंभीर पर्यावरणीय गिरावट बताते हुए इस मुद्दे से तत्काल निपटने को कहा। कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह में नदियों के प्रदूषण को लेकर हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया।</p>
<p>एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि नदियों को प्लास्टिक कचरे से मुक्त किया जाए क्योंकि जब तक नदियों को प्लास्टिक कचरे से मुक्त नहीं किया जाता है तब तक सफाई के प्रयास भ्रामक और निरर्थक हैं। कोर्ट ने कहा कि मामले में विचार-विमर्श के दौरान यह बात सामने आई कि जिन क्षेत्रों को ऐसे प्रदूषणकारी उत्पादों से मुक्त रखा जाना है, वहां प्लास्टिक का व्यापक उपयोग हो रहा है। इसके अलावा प्लास्टिक डंपिंग से पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है और देश में नदियों के किनारों और जल निकायों में जलीय जीवन पर भी इसका असर पड़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Aug 2024 10:33:11 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदेश में पिछड़े, एससी-एसटी और अल्पसंख्यक पिछड़े हुए: यादव</title>
                                    <description><![CDATA[उन्होंने कहा कि राजस्थान  में पिछड़ा वर्ग एवं एससी एवं आदिवासी तथा अल्पसंख्यक शिक्षा के एवं रोजगार के क्षेत्र में काफी पिछड़े हुए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/backward-sc-st-and-minorities-yadav-are-backward-in-the-state/article-83363"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/z.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दिल्ली के अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष एवं एनयूबीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश यादव दो दिवसीय यात्रा पर जयपुर आए। यादव ने कहा कि एससी एसटी एवं अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक वर्ग समाज की मुख्य धुरी है। इन वर्गों के विकास के बिना देश एवं प्रदेश की प्रगति संभव नहीं है। मुख्य धारा में लाने के लिए शिक्षा, रोजगार एवं आर्थिक रूप से संबल प्रदान करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राजस्थान  में पिछड़ा वर्ग एवं एससी एवं आदिवासी तथा अल्पसंख्यक शिक्षा के एवं रोजगार के क्षेत्र में काफी पिछड़े हुए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jul 2024 10:52:44 +0530</pubDate>
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                <title>मोदी-3 सरकार में राजस्थान से चार मंत्री : राजपूत-एससी-यादव चेहरे रिपीट, कैलाश हारे तो उनकी जगह जाट चेहरा भागीरथ शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश को मिली पूरी तवज्जो, 25 की जगह 14 ही सीटें जीती, लेकिन मोदी-3 सरकार के मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मोदी-2 सरकार की तरह बरकरार ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-modi-3-government-four-ministers-from-rajasthan-rajput-sc-yadav-faces-repeat/article-80973"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/ministers.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में भले ही भाजपा ने इस बार 25 की जगह 14 ही सीटों पर जीत हासिल की हो, लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार-3 में प्रदेश से भाजपा का प्रतिनिधित्व कम नहीं किया गया है। जातिगत समीकरण भी मोदी-2 सरकार में जिस तरह से साधे गए थे, उसी तरह इस बार भी राजपूत, एससी, यादव (ओबीसी) और जाट वर्ग से ही मंत्री बनाए गए हैं। भाजपा राजस्थान से लोकसभा सांसद बने जोधपुर के गजेन्द्र सिंह शेखावत, राज्यसभा सांसद भूपेन्द्र यादव केबिनेट मंत्री, बीकानेर सांसद अर्जुनराम मेघवाल राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और बाड़मेर से कैलाश चौधरी राज्यमंत्री मंत्री थे। वहीं इस बार भी भाजपा ने गजेन्द्र, भूपेन्द्र को पिछली बार की ही भांति केबिनेट मंत्री और अर्जुनराम को मंत्रिमंडल राज्यमंत्री का स्वतंत्र प्रभार दिया है। बाड़मेर से कैलाश चौधरी चुनाव हार गए। ऐसे में उनकी जगह जाट वर्ग से ही अजमेर लोकसभा चुनाव से जीतकर आए भागीरथ चौधरी को राज्य मंत्री बनाया है।  </p>
<p><strong>जाट बैल्ट की 6, एससी की 4 में से 1-1 ही जीत सके, जीते दोनों सांसद मंत्री</strong><br />भाजपा को लोकसभा चुनावों में राजस्थान की जाट बैल्ट की छह सीटों चूरू, नागौर, सीकर, झुंझुनूं, बाड़मेर, अजमेर में से पांच सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है। केवल अजमेर सीट पर भाजपा के भागीरथ चौधरी दूसरी बार जीतकर आए हैं। ऐसे में प्रदेश में जाट वर्ग को साधने के लिए भागीरथ को राज्यमंत्री बनाया गया है, क्योंकि इस बैल्ट से केवल वे ही चुनाव जीतकर आए हैं। वहीं एससी वर्ग की राजस्थान की चार सीटों में करौली-धौलपुर, भरतपुर, बीकानेर, गंगानगर में से भी भाजपा केवल बीकानेर पर ही अर्जुनराम मेघवाल चुनाव जीतकर आ सके हैं। ऐसे में एससी वर्ग को साधने के लिए भाजपा ने मेघवाल को फिर से मंत्रिमंडल में शामिल किया है। </p>
<p><strong>परम्परागत राजपूत वर्ग को साधा</strong> <br />राजपूत वर्ग भाजपा का प्रदेश में परम्परागत वोट बैंक रहा है। लोकसभा चुनावों में इस वर्ग के वोट बैंक से भी भाजपा को सेंधमारी की आशंका है। ऐसे में परम्परागत वोट को साधने के लिए भाजपा ने फिर से राजपूत वर्ग के बडेÞ चेहरे जोधपुर लोकसभा सीट से जीते गजेन्द्र सिंह शेखावत को फिर से केबिनेट मंत्री बनाकर इस वर्ग को तवज्जो दी है। </p>
<p><strong>राजस्थान के साथ हरियाणा के सियासी समीकरण साध रहे यादव </strong><br />दूसरी बार केन्द्रीय मंत्री बने अलवर के लोकसभा सांसद भूपेन्द्र यादव को भाजपा ने मोदी-3 सरकार में भी केबिनेट मंत्री बनाया है। मूलत: अजमेर के रहने वाले यादव प्रदेश की यादव बैल्ट के साथ ही हरियाणा में भी खासी पकड़ रखते हैं। यूपी में भी इस वर्ग के सियासी समीकरण बनाने के लिए उन्हें मंत्री बनाया गया है। यादव मोदी-2 सरकार में राज्यसभा कोटे से केबिनेट मंत्री बने थे।  </p>
<p><strong>गजेन्द्र की मंत्रिमंडल में हैट्रिक, यादव-मेघवाल दूसरी बार, भागीरथ का पहला टर्म </strong><br />मोदी की लगातार तीसरी सरकार में जोधपुर सांसद गजेन्द्र सिंह शेखावत मंत्री बने हैं। वहीं भूपेन्द्र यादव और अर्जुनराम मेघवाल दूसरी बार मंत्री बने हैं। हालांकि मेघवाल मोदी-1 सरकार में लोकसभा में मुख्य सचेतक भी रहे हैं। दूसरी बार सांसद बने भागीरथ चौधरी पहली बार मंत्री बने हैं। </p>
<p><strong>जोधपुर, अजमेर, अलवर, बीकानेर संभाग से मंत्री </strong><br />राजस्थान मे जोधपुर संभाग से गजेन्द्र, अजमेर संभाग से भागीरथ, बीकानेर संभाग से मेघवाल और अलवर संभाग से भूपेन्द्र को मंत्री बनाया गया है। </p>
<p><strong>अश्विनी वैष्णव मूलत: राजस्थान के, पूर्व की भांति उड़ीसा कोटे से मंत्री बने </strong><br />मोदी-2 सरकार में रेल मंत्री रहे राज्यसभा सांसद अश्विनी वैष्णव भी मूलत: राजस्थान के जोधपुर के रहने वाले हैं। हालांकि वे उड़ीसा में आईएएस रहे और फिर भाजपा में आए। वहीं से मोदी-2 सरकार में केबिनेट मंत्री बने। हालांकि चुनावों से पहले उनकी राजस्थान में भी सक्रियता प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय रही। कयास लगाए गए कि वे 2024 के लोकसभा चुनावों में राजस्थान की राजनीतिक में लैंड कराए जा सकते हैं, लेकिन चुनाव पूर्व उनकी सक्रियता प्रदेश में ना दिखने पर इस कयास पर विराम लग गया था। </p>
<p><strong>ओम लोकसभा अध्यक्ष थे, पद पर फैसला अभी बाकी</strong><br />कोटा सांसद ओम बिरला मोदी-2 सरकार में लोकसभा अध्यक्ष रहे हैं। अभी उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। इस बार लोकसभा अध्यक्ष पद गठबंधन की राजनीति में फंसा है। हालांकि लोकसभा अध्यक्ष का पद रूलिंग पार्टी के सबसे बड़े दल के लिए अति महत्वपूर्ण होता है, लेकिन टीडीपी के चन्द्रबाबू नायडू की पार्टी के इसकी डिमांड की चर्चा राजनीति हलकों में है। बिरला का फिर से पदासीन होने पर संशय है। मोदी-3 सरकार का लोकसभा का पहला सत्र संभवत: इसी माह शुरू हो सकता है। ऐसे में जून माह में ही पद की तस्वीर साफ हो जाएगी। बिरला रिपीट हुए तो राजस्थान में भाजपा के 11 सीटों के नुकसान के बावजूद प्रतिनिधित्व मोदी-2 सरकार की तरह ही बरकरार रहेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jun 2024 09:41:49 +0530</pubDate>
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                <title>नुपूर मामले में सुप्रीम सुनवाई: 10 अगस्त तक गिरफ्तारी पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने पैगंबर मोहम्मद पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में कई राज्यों में अपराधिक मुकदमों का सामना कर रही निलंबित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता नूपुर शर्मा को मंगलवार को 10 अगस्त तक गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-hearing-in-nupur-case-stay-on-arrest-till-august-10/article-15316"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/sc.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने पैगंबर मोहम्मद पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में कई राज्यों में अपराधिक मुकदमों का सामना कर रही निलंबित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता नूपुर शर्मा को मंगलवार को 10 अगस्त तक गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी।</p>
<p><br />न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला की पीठ ने पैगंबर मोहम्मद विवाद से संबंधित मुकदमों के मामले में नूपुर की नयी याचिका पर सुनवाई करते हुए राहत दी। पीठ ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 10 अगस्त की तारीख मुकर्रर करते हुए तब तक नूपुर पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश संबंधित राज्य सरकारों/पक्षों को दिया। पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील मनिंदर सिंह द्वारा पश्चिम बंगाल में मुकदमा दर्ज होने की जानकारी देने पर यह भी स्पष्ट कर किया कि अब तक दर्ज मुकदमों के साथ-साथ इससे संबंधित आगे दर्ज होने वाले मुकदमा/ मुकदमों (यदि हो) के मामले में भी नूपुर को दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम राहत मिलेगी।<br /><br />शीर्ष न्यायालय ने  उनकी उस याचिका पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र ,तेलंगाना और कर्नाटक तथा अन्य राज्यों को नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने उन राज्यों में (पैगंबर मोहम्मद पर की गई विवादास्पद टिप्पणियों से संबंधित) अपने खिलाफ दर्ज अपराधिक मुकदमों को रद्द करने या उन्हें दिल्ली स्थानांतरित करने का अनुरोध किया था। पीठ ने संबंधित पक्षों को दस्ती एवं संबंधित वकीलों के माध्यम से  अगली सुनवाई से पहले याचिकाकर्ता नूपुर की याचिका की मूल प्रति उपलब्ध कराने का निर्देश (याचिकाकर्ता) को दिया। पीठ ने कहा कि संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है, ताकि वह मुकदमों को एक जगह स्थानांतरित करने की संभावनाओं पर अगली तारीख पर  विचार कर सके।न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला की अवकाशकालीन पीठ ने एक जुलाई को सख्त टिप्पणियों के साथ उनकी उस याचिका को खारिज कर दी थी, जिसमें उनके खिलाफ विभिन्न राज्यों में दर्ज मुकदमों को रद्द करने या उन्हें दिल्ली  स्थानांतरित करने की गुहार लगाई गयी थी।</p>
<p>नूपुर ने एक निजी टीवी चैनल पर चर्चा के दौरान कथित तौर पर पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। इसके बाद उनके खिलाफ दर्ज विभिन्न राज्यों में नौ प्राथमिकियां दर्ज की गई थीं। उन्होंने अदालत में पुन: याचिका दायर कर सभी मुकदमों को रद्द करने या दिल्ली स्थानांतरित करने तथा इस मामले में गिरफ्तारी पर रोक लगाने की गुहार अदालत से लगाई थी। आरोपी नूपुर ने अपनी नई याचिका में तर्क दिया था कि शीर्ष अदालत द्वारा उसके खिलाफ पहले की कड़ी टिप्पणियों के बाद उसे नए सिरे उन्हें धमकियां दी गईं।  बलात्कार और जान से मारने तक की धमकियों का उन्हें सामना करना पड़ा।<br /><br />शीर्ष अदालत की इसी पीठ ने पिछली सुनवाई के दौरान भाजपा नेता नूपुर शर्मा को  कड़ी फटकार लगाई थी और कहा था कि उनकी अनुचित टिप्पणियों से देश का माहौल खराब हुआ। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा था कि देश में जो हो रहा है ( पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणियों के बाद कई जगहों पर दंगे और हिंसक झड़पें हुई थीं) उसके लिए वह अकेले ही जिम्मेदार है। पीठ ने कहा था कि उनकी गैरजिम्मेदाराना टिप्पणियों से पता चलता है कि वह जिद्दी और घमंडी हैं। उच्चतम न्यायालय ने तब उसकी याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्हें अपनी याचिका वापस लेनी पड़ी थी।<br /><br /> नुपूर को 27 मई को एक टीवी चर्चा के दौरान उनकी कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद विवाद बढऩे के बाद भाजपा से निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं और देश भर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। नूपुर पर दिल्ली, मुंबई और कोलकाता सहित विभिन्न स्थानों पर मुकदमे दर्ज किए गए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Jul 2022 19:00:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लखीमपुर हिंसा: मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को करना होगा आत्मसमर्पण, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय से मिली जमानत को किया रद्द, SC ने HC से नये सिरे से विचार करने को कहा</title>
                                    <description><![CDATA[पीठ ने जमानत रद्द करने का आदेश पारित करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय ने कई अप्रासंगिक तथ्यों पर विचार किया और जल्दबाजी में अपना फैसला लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/lakhimpur-violence--main-accused-ashish-mishra-will-have-to-surrender--supreme-court-cancels-bail-granted-by-allahabad-high-court--sc-asks-hc-to-reconsider/article-8067"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/supreme-court2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। बड़ी खबर लखीमपुर खीरी हिंसा मामले से है। जहां सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के पुत्र और लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से मिली जमानत सोमवार को रद्द करते हुए उसे (आशीष को) एक सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया। मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमन, न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने आशीष की जमानत रद्द करने तथा उसे आत्मसमर्पण करने का आदेश देने के साथ ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय से कहा कि वह नये सिरे से विचार करे कि उसे (आशीष को) जमानत दी जानी चाहिए या नहीं। <br /><br />पीठ ने जमानत रद्द करने का आदेश पारित करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय ने कई अप्रासंगिक तथ्यों पर विचार किया और जल्दबाजी में अपना फैसला लिया। पीड़तिों को प्रथम दृष्टया आरोपी की जमानत याचिका का विरोध करने के लिए पर्याप्त समय दिए बिना ही अपना आदेश पारित कर दिया। पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद चार अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।<br /><br />गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में तीन अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के एक कार्यक्रम का विरोध करने के  दौरान हिंसक घटनाएं हुई थी। इस हिंसा में केंद्र के तत्कालीन तीन कृषि कानूनों (अब रद्द कर दिए गए) के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन कर रहे चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गयी थी। मामले के मुख्य आरोपी आशीष को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 10 फरवरी को जमानत दी थी। पुलिस ने आशीष को नौ अक्टूबर को गिरफ्तार किया था।  <br /><br />जमानत के खिलाफ मृतक किसानों के परिजनों एवं अन्य ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। जमानत रद्द करने की मांग वाली उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पीठ ने जमानत के'आधार" पर कई सवाल खड़े किए थे। शीर्ष अदालत द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने उत्तर प्रदेश सरकार को आशीष की जमानत के खिलाफ अपील करने की सिफारिश की थी, लेकिन सरकार ने उसे नजरअंदाज कर दिया था। एसआईटी ने 30 मार्च को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसने मुख्य आरोपी की जमानत के खिलाफ अपील दायर करने के संबंध में प्रदेश सरकार से सिफारिश की थी।<br /><br />मुख्य आरोपी आशीष की जमानत का विरोध कर रहे याचिकाकर्ताओं ने गवाहों को धमकाने तथा सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका के भी आरोप लगाए थे हालांकि, राज्य सरकार का पक्ष रख रहे वकील महेश जेठमलानी ने पीठ के समक्ष दलील देते हुए कहा था कि मामले से संबंधित गवाहों को पूरी सुरक्षा प्रदान की जा रही है। किसी को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने शीर्ष अदालत को बताया था कि एसआईटी ने गवाहों पर खतरे की आशंका के कारण आशीष की जमानत के खिलाफ अपील दायर करने की सिफारिश की थी, लेकिन राज्य सरकार ने सभी गवाहों को पुलिस सुरक्षा प्रदान करने का दावा करते हुए एसआईटी के विचार  से अपनी असहमति व्यक्त की थी।<br /><br />जमानत का विरोध कर रहे कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने गवाहों को धमकी दिए जाने के मुद्दे को जोरशोर से पीठ के समक्ष उठाया था। उन्होंने कहा कि एक गवाह को भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश में सत्ता में लौटने का जिक्र करते हुए धमकी दी गई थी। श्री दवे ने पीठ के समक्ष उक्त गवाह की शिकायत पढ़ते हुए कहा था, अब बीजेपी सत्ता में है। देखना तेरा क्या हाल करता हूं।Þ उन्होंने सवाल किया कि क्या इस तरह की धमकी गंभीर मामला नहीं है?</p>
<p> </p>
<p>किसानों के परिजनों से कुछ दिन पहले अधिवक्ता सी एस पांडा और शिव कुमार त्रिपाठी ने भी जमानत के खिलाफ सर्वोच्च अदालत में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। इन वकीलों की याचिका पर ही शीर्ष न्यायालय ने मामले की जांच के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति राकेश कुमार जैन के नेतृत्व में एसआईटी गठित की थी। कथित रूप से कार से कुचलकर चारा किसानों की मृत्यु होने के बाद भड़की ङ्क्षहसा में दो भाजपा कार्यकर्ताओं के अलावा एक अन्य कार चालक एवं एक पत्रकार की मृत्यु हो गई थी। किसानों की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाये गये हैं कि उत्तर प्रदेश में उसी पार्टी की सरकार है, जिस पार्टी की सरकार में आरोपी आशीष के पिता केंद्र में राज्य मंत्री हैं।  शायद इसी वजह से प्रदेश सरकार ने जमानत के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दायर नहीं की थी।<br /><br />केंद्रीय राज्य मंत्री के पुत्र आशीष की जमानत को चुनौती देने वाली याचिकाओं के जवाब में उत्तर प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि जमानत का प्रभावी ढंग से विरोध नहीं करने के उस पर लगाए गए आरोप  Þपूरी तरह से गलत एवं असत्य हैं। सरकार ने कहा था कि उच्च न्यायालय द्वारा आशीष को जमानत देने के आदेश को चुनौती देने का निर्णय संबंधित अधिकारियों के समक्ष विचाराधीन है। गवाहों को सुरक्षा प्रदान करने के शीर्ष अदालत के आदेश पर सरकार ने कहा था कि उसने घटना से संबंधित 98 गवाहों को सुरक्षा प्रदान की जा रही है। सभी की सुरक्षा का जायजा  नियमित रूप से लिया जाता है। टेलीफोन के माध्यम से पुलिस ने उनसे बातचीत की थी। गवाहों ने 20 मार्च को अपनी सुरक्षा पर संतोष व्यक्त किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Apr 2022 13:24:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सौम्य गुर्जर को &quot;सुप्रीम राहत&quot;, मेयर निलंबन मामले में SC ने दी अंतरिम राहत</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले पर लगाया स्टे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>नई दिल्ली। सौम्या गुर्जर को सुप्रीम राहत मिली है। दरअसल सौम्या गुर्जर को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। निलंबित मेयर मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने निलंबन मामले में राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगाया है।  न्यायिक जांच होने तक सुप्रीम कोर्ट ने फैसला प्रभावी रहने का आदेश दिया है। ग्रेटर नगर निगम से मेयर सौम्य गुर्जर को मिली इस राहत के बाद से ही उनके आवास पर उनके समर्थक ढोल-नगाड़ो के साथ पहुंचे और फैसले के बाद जश्न मनाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Feb 2022 13:20:06 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दागियों का मामला</title>
                                    <description><![CDATA[राजनीति में अपराधिकरण को रोकने की पैरवी हर राजनीतिक दल करता है, लेकिन चुनावों की घोषणा होते ही वे दल दागी छवि वाले प्रत्याशियों को मैदान में उतारते दिखते हैं। इससे अंदाज लगता है कि राजनीति में अपराधिकरण को रोकना कोई आसान काम नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A4%BE/article-4092"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/sc1.jpg" alt=""></a><br /><p>राजनीति में अपराधिकरण को रोकने की पैरवी हर राजनीतिक दल करता है, लेकिन चुनावों की घोषणा होते ही वे दल दागी छवि वाले प्रत्याशियों को मैदान में उतारते दिखते हैं। इससे अंदाज लगता है कि राजनीति में अपराधिकरण को रोकना कोई आसान काम नहीं है। दागी प्रत्याशियों में कुछ तो ऐसे हैं, जिन पर संगीन किस्म के आरोप हैं तो कुछ ऐसे हैं, जिन पर दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं और वे भी हत्या, लूट और जमीन कब्जाने से लेकर धोखाधड़ी और दंगा कराने तक को ऐसे आपराधिक रिकार्ड वाले लोग तब प्रत्याशी बनाए जा रहे हैं, जब चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने मना कर रखा है। चुनाव आयोग ने चुनावों की घोषणा करते वक्त यह कहा था कि राजनीतिक दलों को ऐसे दागी प्रत्याशियों को मैदान में उतारने से पहले न केवल इसका कारण बताना होगा, बल्कि उसकी सूचना समाचार पत्रों और अन्य मीडिया माध्यमों के जरिए सार्वजनिक करनी होगी। पश्चिमी उत्तरप्रदेश में आयोग के निर्देश को दर-किनार कर दागियों को प्रत्याशी घोषित कर दिया गया है। यह सर्वविदित है कि चुनाव आयोग के पास ऐसे कानून अधिकार नहीं है, जिसके तहत वह निर्देशों की अवहेलना करने वाले दलों के खिलाफ कोई कार्रवाई कर सकें। सवाल है कि भारत में चुनावी लोकतंत्र के सामने एक बड़ी चुनौती के रूप में मौजूद होने के बावजूद इस समस्या को लेकर देश के राजनीतिक क्षेत्र में कोई चिंता क्यों नहीं दिखाई देती है। आखिर क्या वजह है कि आज भी आम नागरिकों को इस मामले में राजनीतिक दलों से कोई उम्मीद नहीं है और राजनीति को दागियों से मुक्त कराने के लिए उन्हें अदालत का दरवाजा ही खटखटाना पड़ता है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर चुनाव तक उन राजनीतिक दलों का पंजीकरण रद्द करने की मांग की गई है, जो चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों की अनदेखी कर दागियों को प्रत्याशी घोषित कर रहे हैं। यह स्वागत योग्य है कि अदालत ने बिना देर किए याचिका को मंजूर कर लिया है। पिछले साल भी सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक इतिहास के प्रकाशन से संबंधित निर्देशों के उल्लंघन के लिए अदालत की अवमानना के लिए आठ राजनीतिक दलों को दोषी ठहराया था। अदालत ने राजनीति से अपराधियों को दूर रखने की वजह से ही चुनावों में दागियों को प्रत्याशी बनाने से पहले उनका पुराना आपराधिक रिकार्ड सार्वजनिक करने के निर्देश दिए थे। कहना मुश्किल है अदालत याचिका की सुनवाई करते समय किस नतीजे पर पहुंचेगी, लेकिन चुनाव आयोग को ठोस अधिकार नहीं दिए गए तो दागी छवि वालों को चुनाव मैदान में उतरने से रोकना मुश्किल ही होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Jan 2022 16:30:59 +0530</pubDate>
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                <title>PM मोदी सुरक्षा चूक मामला, SC के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में होगी जांच, कमेटी गठित</title>
                                    <description><![CDATA[पीठ ने केंद्र और राज्य सरकारों से कहा कि वे अपनी-अपनी जांच नहीं करें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pm-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%9A%E0%A5%82%E0%A4%95-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A4%BE--sc-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5-%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A5%80%E0%A4%B6-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9A--%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A4%A0%E0%A4%BF%E0%A4%A4/article-3925"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/sc_modi1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।  उच्चतम न्यायालय (SC) ने सोमवार को कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे के दौरान कथित सुरक्षा चूक मामले की जांच शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक कमेटी से कराई जाएगी। मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना और न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने याचिकाकर्ता एनजीओ'लॉयर्स वॉइस', केंद्र सरकार और पंजाब सरकार की दलीलें सुनने के बाद यह जांच के लिए पैनल गठित करने का आदेश दिया।</p>
<p><br /> मुख्य न्यायाधीश रमना ने कहा कि पूरे मामले की जांच के लिए शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक पैनल से जांच कराने का आदेश देता हूँ। पीठ ने जांच पैनल में सदस्य के तौर पर चंडीगढ़ के डीजीपी, राष्ट्रीय जांच एजेंसी के आईजी,  पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय रजिस्ट्रार जनरल और पंजाब एडीजीपी (सुरक्षा)  नियुक्त करने का संकेत दिया। पीठ ने यह भी कहा है कि वह पैनल से कम से कम समय में अपनी रिपोर्ट उसे सौंपने को कहेगी। पीठ ने केंद्र और राज्य सरकारों से कहा कि वे अपनी-अपनी जांच नहीं करें।<br /> <br /> राज्य सरकार ने इस मामले में 'स्वतंत्र जांच' गठित करने की गुहार पीठ के समक्ष  लगाई थी। पीठ ने सुनवाई के दौरान मोदी के 05 जनवरी के पंजाब दौरे के दौरान कथित सुरक्षा चूक के मामले में राज्य के आला पुलिस अधिकारियों को केंद्र सरकार की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी करने पर नाराजगी व्यक्त की। मुख्य न्यायाधीश  रमना ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, ''अगर आप राज्य के अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करना चाहते हैं तो इस अदालत को क्या करना बाकी है?''<br /> <br /> मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने दिल्ली के एक एनजीओ की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान शुक्रवार को केंद्र और राज्य सरकारों को सोमवार 10 जनवरी तक अपनी ओर से किसी प्रकार की जांच नहीं करने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके केंद्र सरकार की ओर से राज्य के आला पुलिस अधिकारियों को कथित सुरक्षा चूक पर कारण बताओ नोटिस जारी कर किये गये थे।<br /> <br /> शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को प्रधानमंत्री की गत 05 जनवरी को भङ्क्षठडा की एक दिवसीय यात्रा से संबंधित सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के आदेश दिए थे। इसके साथ ही राज्य और केंद्र सरकार की संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को साक्ष्य जुटाने में रजिस्ट्रार जनरल की मदद करने के निर्देश दिए थे। शीर्ष अदालत के समक्ष आज की सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से राज्य के एडवोकेट जनरल डी.एस. पटवालिया ने केंद्र सरकार की नोटिस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी।<br /> <br /> केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल श्री मेहता ने पीठ के समक्ष कहा कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा चूक पंजाब सरकार के 'खुफिया तंत्र' की विफलता का नतीजा है। इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। न्यायाधीश रमना ने सुनवाई के दौरान कहा,''हमें कल रात 10 बजे अनुपालन रिपोर्ट प्राप्त हुई।''<br /> <br />  याचिकाकर्ता दिल्ली के एनजीओ की ओर से वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह पंजाब के भटिंडा में बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी के दौरान सुरक्षा  चूक से जुड़े मामले को अत्यावश्यक  बताते शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाई थी। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को करने के लिए सहमत हुई थी। याचिका में भविष्य में प्रधानमंत्री की 'सुरक्षा चूक' की पुनरावृत्ति से बचने के लिए पूरे प्रकरण की 'कुशल और पेशेवर' जांच की मांग की गई है। याचिका में शीर्ष अदालत से भटिंडा के जिला न्यायाधीश  को सुरक्षा उल्लंघन से संबंधित पूरे रिकॉर्ड को अपने कब्जे में लेने का निर्देश देने की गुहार लगाई थी।<br /> <br /> गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दिन प्रदर्शनकारियों द्वारा नाकेबंदी किए जाने के कारण बुधवार को मोदी का काफिला पंजाब के एक फ्लाईओवर पर फंसा गया था।  इस घटना ने मोदी को अपनी रैली और राज्य में अपने पूर्व निर्धारित  कार्यक्रमों को रद्द करना पड़ा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <title>PM मोदी की सुरक्षा चूक पर 'SC' सख्त : पंजाब-हरियाणा HC के रजिस्ट्रार को सभी रिकॉर्ड रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना और न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हेमा कोहली की पीठ में हुई सुनवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/pm-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%9A%E0%A5%82%E0%A4%95-%E0%A4%AA%E0%A4%B0--sc--%E0%A4%B8%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%A4---%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AC-%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%BE-hc-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%B0%E0%A4%96%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6/article-3857"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/sc.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। SC ने शुक्रवार को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले दिनों पंजाब दौरे से संबंधित सभी रिकॉर्ड  सुरक्षित और संरक्षित करने का शुक्रवार को निर्देश दिये है। मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना और न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हेमा कोहली की पीठ ने रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश के साथ ही मोदी की पिछले दिनों पंजाब यात्रा के दौरान सुरक्षा में कथित चूक मामले में केंद्र और पंजाब द्वारा गठित दो अलग-अलग कमेटियों को याचिका पर अगली सुनवाई सोमवार तक के लिए जांच नहीं करने का निर्देश दिया।</p>
<p><br /> शीर्ष अदालत ने चंडीगढ़ के महानिदेशक और एनआईए और एसपीजी सहित विभिन्न केंद्रीय जांच एजेंसियों के अन्य शीर्ष अधिकारियों से कहा है वे प्रधानमंत्री की यात्रा से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध  कराने में उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल  की आवश्यक सहयोग करें। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ प्रधानमंत्री की सुरक्षा में कथित चूक के खिलाफ एनजीओ 'लॉयर्स वॉयस' की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते ये निर्देश दिया। यह याचिका गुरुवार को दायर की गई थी और इस मामले में विशेष उल्लेख के तहत शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाई गई थी।<br /> <br /> उच्चतम न्यायालय पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक पर सवाल खड़े करने वाली याचिका पर शीघ्र सुनवाई  की गुहार वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने लगाई थी। उन्होंने पंजाब के भटिंडा में गत बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी के दौरान सुरक्षा चूक से जुड़े मामले को अत्यावश्यक बताते शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाई थी। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले की सुनवाई आज (शुक्रवार को) करने के लिए सहमत हुई थी।<br /> <br /> याचिका में भविष्य में प्रधानमंत्री की'सुरक्षा चूक' की पुनरावृत्ति से बचने के लिए पूरे प्रकरण की 'कुशल और पेशेवर' जांच की मांग की गई है। याचिका में शीर्ष अदालत से भटिंडा के जिला न्यायाधीश  को सुरक्षा उल्लंघन से संबंधित पूरे रिकॉर्ड को अपने कब्जे में लेने का निर्देश देने की गुहार लगाई थी। गौरतलब है कि फिरोजपुर में प्रदर्शनकारियों द्वारा नाकेबंदी किए जाने के कारण बुधवार को मोदी का काफिला फ्लाईओवर पर फंसा गया था। जिसके कारण मोदी को अपनी रैली और पंजाब में होने वाले अन्य कार्यक्रमों को रद्द करना पड़ा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Jan 2022 14:17:46 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदूषण पर कोर्ट की केंद्र और दिल्ली सरकार को 'सुप्रीम' फटकार</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%82%E0%A4%B7%E0%A4%A3-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B--%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AE--%E0%A4%AB%E0%A4%9F%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0/article-2889"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/sc.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली और केंद्र सरकार को गुरुवार को फिर फटकार लगाई और कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वो गंभीरतापूर्वक विचार कर वायु प्रदूषण स्तर कम करने का उपयुक्त उपाय करें  तथा शुक्रवार सुबह 10 बजे तक उनके बारे में अवगत कराएं, अन्यथा वह कोई 'निर्देश' पारित करेगा। हांलाकि दिल्ली सरकार ने इस फटकार के बाद शुक्रवार से स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है। <br /> <br /> उल्लेखनिय है कि मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने दिल्ली में स्कूलों खोले जाने पर नाराजगी व्यक्त की। इसके अलावा वायु प्रदूषण फैलाने वाले प्रमुख कारकों औद्योगिक इकाइयों और वाहनों पर  पर्याप्त कार्रवाई नहीं किए जाने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। शीर्ष अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार के उन दावों को खारिज कर दिया जिनमें प्रदूषण कम करने के तमाम उपाय किए जाने के दावे किए गए हैं। अदालत ने सवालिया लहजे में कहा कि जब तमाम उपाय किए जा रहे हैं तो प्रदूषण का स्तर क्यों बढ़ रहा है। पीठ ने नौकरशाहों के कामकाज के तरीकों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े किए ये। शीर्ष अदालत ने केंद्र, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार और अन्य पक्षकारों से कहा है कि हम आपको 24 घंटे का समय दे रहे हैं।  हम चाहते हैं कि आप इस पर गंभीरता से विचार करें और इसका समाधान निकालें।<br /> <br /> मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्य खंडपीठ ने कहा, ''हम कल सुबह 10 बजे 30 मिनट के लिए सुनवाई कर सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश ने दिल्ली सरकार से पूछा कि प्रदूषण के मद्देनजर जब व्यस्कों  को घर से काम करने की इजाजत है तो तीन-चार साल तक के बच्चों को स्कूल जाने पर मजबूर क्यों किया जा रहा है? इस पर दिल्ली सरकार का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि विशेषज्ञों की राय पर स्कूल खोले गए हैं, जिसमें बताया था कि स्कूल नहीं जाने की वजह से बच्चों के सीखने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।<br /> <br /> इसपर अदालत ने फिर से पूछा कि प्रदूषण कम करने के उपायों का क्या हुआ? सिंघवी ने कहा कि नवंबर में  प्रदूषण फैलाने वाले 1500 वाहन जब्त किए गए हैं। सरकार के दावों से असंतुष्ट पीठ ने कहा कि हमें लगता है कि जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हो रहा है, क्योंकि प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। अदालत ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि हमें लगता है कि हम अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।<br /> <br /> न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने कहा कि पर्यावरण के नाम पर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के प्रयास नजर आ रहे हैं। 'पर्यावरण बचाओ' के बैनर लेकर लोग सड़कों दिखाई देते हैं लेकिन प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है।<br /> <br /> याचिकाकर्ता स्कूली छात्र आदित्य दुबे  का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील विकास ङ्क्षसह ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य जारी रहने पर एक बार फिर आपत्ति दर्ज कराते हुए  कहा कि लोगों के स्वास्थ्य की कीमत पर विकास नहीं हो सकता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब हम इंडिया गेट पर जाते हैं तो चारों ओर धूल उड़ रही होती है। ऐसे में निर्माण गतिविधियों पर अदालती रोक के आदेश का क्या मतलब हैं? उन्होंने कहा कि आज दिल्ली का वायु प्रदूषण स्तर 500 एक्यूआई है।<br />  <br /> पीठ ने केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से हरियाणा में प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई किए जाने पर सवाल पूछे।<br /> <br /> गौरतलब है कि दिल्ली और केंद्र सरकार की ओर से लगातार शीर्ष अदालत में ये दावे किए जा रहे हैं कि वो राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण कम करने के लिए लगातार ठोस प्रयास कर रही है। केंद्र सरकार की ओर से बुधवार को शीर्ष अदालत में एक हलफनामा दायर कर कहा गया था कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में निर्माण गतिविधियों के मद्देनजर प्रदूषण कम करने के तमाम एहतियाती  उपाय किए जा रहे हैं और निर्माण कार्य की कार्यों की वजह से प्रदूषण नहीं फैल रहा है। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय महत्व कार्य बताते हुए केंद्र सरकार ने कहा था कि यहां प्रदूषण रोकने के तमाम ऐतिहासिक उपाय किए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
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