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                <title>gate - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>रेलवे अजमेरी गेट समपार फाटक  पर आरओबी बनाने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[ रेलवे अजमेरी फाटक ट्रेनों की आवाजाही के चलते करीब 15-16 घंटे बंद रहने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में सांभर सड़क पर ओवरब्रिज का निर्माण चलने पर मुख्य मार्ग को बंद करने से सभी लोगों को अजमेरी गेट पर स्थित इसी रेलवे फाटक से आवागमन करना पड़ रहा है। इस स्थिति में अजमेरी गेट समपार फाटक पर जन हित में शीघ्र ही आरओबी का निर्माण करवाया जाना जरूरी ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/demand-for-making-rob-at-railway-ajmeri-gate-level-crossing-gate/article-12920"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/aas-pass.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>फुलेरा।</strong> रेलवे अजमेरी फाटक ट्रेनों की आवाजाही के चलते करीब 15-16 घंटे बंद रहने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में सांभर सड़क पर ओवरब्रिज का निर्माण चलने पर मुख्य मार्ग को बंद करने से सभी लोगों को अजमेरी गेट पर स्थित इसी रेलवे फाटक से आवागमन करना पड़ रहा है। इस स्थिति में अजमेरी गेट समपार फाटक पर जन हित में शीघ्र ही आरओबी का निर्माण करवाया जाना जरूरी है। फुलेरा जंक्शन से अजमेर जा रही रेल लाइनों पर स्थित रेलवे समपार फाटक नं एलसी-1(टी) के अधिक समय तक बंद रहने से शहर की आधी जनता ठगा सा महसूस करने लगी है नगर पालिका के 25 वार्डो मे 9 वार्ड इसी क्षेत्र में आते हैं व करीब 17 हजार की आबादी भी इसी एरिया में निवास करती है।</p>
<p>फुलेरा की भौगोलिक स्थित ऐसी है जिसमें बीचों बीच रेल पटरियों का जाल बिछा रहने के साथ रेल के समपार फाटक बने हैं। मिली जानकारी अनुसार फुलेरा से अजमेर व अजमेर से फुलेरा के बीच प्रतिदिन करीब 32 ट्रेन सवारी व 20-20 माल गाड़ियों का आवागमन होता है, इस स्थिति में एक ट्रेन के निकलने में करीब 15-20 मिनट तक फाटक बंद रहने से लोगों को परेशानी होती है मृत लोगों की शव यात्रा को भी कई बार फाटक पर ठहरना पड़ता है। श्रीराम नगर व आसपास के हजारों लोगों को रोजी रोटी कमाने के लिए प्रतिदिन ट्रेनों में जयपुर अजमेर अप डाउन के लिए वाहनों से रेलवे स्टेशन तक आने जाने वाले मजदूर वर्ग के लोगों को परेशानी होती है कई बार फाटक के ज्यादा देर तक बंद रहने से मजदूरों की ट्रेन छूट जाती है व रोजी रोटी का संकट बनता है।</p>
<p>परीक्षा के समय स्कूल भवनो मे आने जाने के लिए विद्यार्थियों व्यापारी आमजन के लिए फाटक परेशानी का सबब बना हुआ है उस पार बने सभी सरकारी कार्यालय, पुलिस थाना सरकारी अस्पताल, केन्द्रीय विद्यालय, रेलवे स्टेशन, सरकारी स्कूलें, गार्डन, खेल मैदान, मोक्षधाम बने रहने से लोगों को इसी एक मात्र फाटक से आना जाना पड़ता है व फाटक के अधिकांशत बंद रहने से लोग परेशान हैं। फाटक पर आरओबी बनने के बाद ही रेलवे लाइन के दूसरे छोर पर रहने वाले हजारों लोगों को आवागमन में सुविधा मिल सकती है। लोग काफी समय इस समस्या के समाधान हेतु जन प्रतिनिधि व रेल प्रशासन से जन हित में फाटक पर आरओबी निर्माण करवाने की मांग कर रहे हैं पर आमजन की सुनवाई कब होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jun 2022 15:52:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title> नगर परिषद के गेट पर पार्षद ने जड़ा ताला, आयुक्त व पार्षद के बीच हुई नोंक-झोंक</title>
                                    <description><![CDATA[ नगर परिषद आयुक्त नवीन भारद्वाज ने नाराज पार्षद से समझाइश कर ताला खुलवाने का प्रयास किया मगर दोनों के बीच देखते ही देखते तीखी नोकझोंक हो गई। ऐसे में नगर परिषद आयुक्त नवीन भारद्वाज ने पार्षद द्वारा मुख्य गेट पर लगाए गए ताले तो तुड़वा दिया। आयुक्त द्वारा ताला तुड़वाने के बाद नाराज पार्षद नगर परिषद के मुख्य गेट पर ही धरना देकर बैठ गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/the-councilor-put-a-lock-on-the-gate-of-the-city-council--there-was-a-dispute-between-the-commissioner-and-the-councilor/article-11506"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/swm1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> सवाई माधोपुर।</strong> सवाई माधोपुर नगर परिषद में सोमवार को उस वक्त माहौल गरमा गया जब नगर परिषद के पार्षद फुरकान अली ने नगर परिषद अधिकारी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली से नाराज होकर नगर परिषद कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। नगर परिषद के मुख्य गेट पर तालाबंदी की सूचना पर नगर परिषद के अधिकारी कर्मचारी सकते में आ गए।</p>
<p><br />इस दौरान नगर परिषद आयुक्त नवीन भारद्वाज ने नाराज पार्षद से समझाइश कर ताला खुलवाने का प्रयास किया मगर दोनों के बीच देखते ही देखते तीखी नोकझोंक हो गई। ऐसे में नगर परिषद आयुक्त नवीन भारद्वाज ने पार्षद द्वारा मुख्य गेट पर लगाए गए ताले तो तुड़वा दिया। आयुक्त द्वारा ताला तुड़वाने के बाद नाराज पार्षद नगर परिषद के मुख्य गेट पर ही धरना देकर बैठ गया।</p>
<p>ऐसे में आयुक्त को मानटाउन थाना पुलिस बुलाना पड़ा पुलिस अधिकारियों द्वारा पार्षद से समझाइश की गई। मगर नाराज पार्षद नगर परिषद के मुख्य गेट पर धरने पर बैठा रहा और कड़ी मशक्कत के बाद धरने से उठा। पार्षद फु रकान अली का कहना है कि उनके कार्यकर्ताओं की दो पट्टे व रजिस्ट्रेशन की दो फाइलें नगर परिषद में है। दोनों फाइलों को लेकर वे पिछले 6 महीनों से नगर परिषद के अधिकारी कर्मचारियों के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन अधिकारी कर्मचारियों द्वारा कोई भी काम नहीं किया जा रहा। पार्षद का आरोप है कि नगर परिषद कार्मिकों द्वारा उनके कार्यकर्ताओं की फाइलों को ही गुम कर दिया गया। ऐसे में मजबूरन आज उन्हें नगर परिषद के गेट पर ताला लगाना पड़ा और धरने पर बैठना पड़ा, पार्षद का कहना है कि लोगों ने उन्हें जीता कर भेजा है अगर वो लोगों का काम ही नहीं करा करा सके तो पार्षद बनकर क्या फायदा।</p>
<p> पार्षद का कहना है कि अब भले ही उन्हें इस्तीफा देना पड़े या जेल जाना पड़े वे अपने कार्यकर्ताओं का काम करवाकर रहूंगा। वहीं नगर परिषद आयुक्त नवीन भारद्वाज का कहना है कि पार्षद बेवजह ही नाराज हो रहे है पार्षद के कार्यकर्ताओं की जिस कार्मिक के पास फÞ ाइल थी उसका तबादला हो चुका है। अभी तक किसी अन्य कार्मिक को चार्ज नहीं दिया गया है। जैसे ही अन्य कार्मिक को चार्ज दिया जाएगा पार्षद का कार्य भी हो जाएगा। आयुक्त ने कहा कि नगर परिषद से कोई भी फाइल गुम नहीं हुई है। गौरतलब है कि सवाई माधोपुर नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड है और नगर परिषद पर तालाबंदी करने वाला पार्षद फु रकान अली भी कांग्रेस के ही पार्षद हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jun 2022 13:22:24 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>'इंडिया गेट'</title>
                                    <description><![CDATA[पर्दे के पीछे की खबरें जो जानना चाहते है आप....]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/know-what-is-special-in-india-gate/article-10304"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/india-gate021.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अभी नहीं तो...</strong><br />तो कांग्रेस मान चुकी। साल 2024 का आम चुनाव उसके लिए जीवन मरण का। सो, उदयपुर में लिए गए फैसलों पर तेजी से आगे बढ़ रही। इसके लिए दिल्ली में ताबडतोड बैठकें हुईं। प्रियंका गांधी ने भी मौजूदगी दर्ज करवाई। अब तो पार्टी नेता भी कहने लग गए। अभी नहीं तो कभी नहीं। उदयपुर में तय किए गए रोडमैप से पीछे हटे तो मानो खत्म हो जाएंगे। आगे के रास्ते खत्म हो जाएंगे। वैसे भी पार्टी के लिए इन दिनों सिर मुंडाते ही ओले पड़ने जैसे हालात। चिंतन शिविर के दौरान ही जहां सुनील जाखड़ ने पार्टी को बाय-बाय कहा। जले पर नमक छिड़कने वाली बात तो यह कि वह भाजपा में शामिल हो गए। फिर गुजरात में चुनाव आ रहे। वहां के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल भी कांग्रेस छोड़ गए। उसी दिन शाम होते-होते डूंगरपुर से पार्टी विधायक गणेश गोगरा ने भी विधायक पद छोड़ा। मतलब कोढ़ में खाज जैसे हालात। अभी शिविर खत्म हुए एक हफ्ता ही बीता। फिर यह सब क्या?</p>
<p><br /><strong>नजरें इनायत... !</strong><br />आजकल भाजपा और कांग्रेस की मरुभूमि पर नजरें इनायत हो रहीं। जहां कांग्रेस ने उदयुपर में चिंतन शिविर किया। तो भाजपा ने भी राष्ट्रीय पदाधिकारियों की तीन दिनी बैठक कर डाली। अब दोनों ही दलों में आरोप प्रत्यारोप भी। सीएम गहलोत बोले, यह सब उदयपुर के जवाब में। भाजपा ने कहा, यह महज संयोग। योजना बहुत पहले ही बन गई थी। फिर आखिर ऐसी क्या बात जो राजस्थान पर कांग्रेस-भाजपा पर इतना फोकस। असल में, दोनों ही दलों में गुटबजी और मतभेद का आलम सार्वजनिक। कांग्रेस में गहलोत एवं पायलट की अदावत जगजाहिर। तो इधर, वसुंधरा राजे और सतीश पूनिया के बीच रस्साकशी के खेल की खबरें। सीएम अशोक गहलोत ने उदयपुर में सफल बैठक का आयोजन करवाकर खुद को साबित करने की कोशिश की। तो भाजपा की बैठक भी शांतिपूर्ण संपन्न हो गई। अब गुजरात के विधानसभा चुनाव की प्रतिक्षा। जैसे यूपी, वैसे ही गुजरात के नतीजे पर बहुत कुछ निर्भर। खासकर भाजपा, राजस्थान को लेकर बड़ा फैसला लेने जा रही।</p>
<p><br /><strong>हम पर ही बरस पड़े...</strong><br />तो पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का दर्द बाहर आ गया और वह छलक ही पड़ा। उन्होंने इसके लिए दिग्गज नेता भैंरांसिंह शेखावत से संबंधित एक कार्यक्रम को चुना। शायरना अंदाज में उन्होंने अल्फाज जाहिर किए। कहा, जिनको सांसें दी, उनकी जुबां खुली तो हम पर ही बरस पड़े। मतलब सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। लेकिन कहां? पार्टी के भीतर या संगठन के कामकाज के स्तर पर? या फिर इससे भी इतर कोई और बात? राजे गुट की लगातार मांग कर रहा। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजे को सीएम चेहरा बनाया जाए। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया। कमल का फूल और पीएम मोदी का चेहरा ही काफी। लेकिन अभी भी अंतिम फैसला होना बाकी। तब तक चीजें ठहरी हुईं। जो दावेदार। वह भी इंतजार कर रहे। लेकिन राजे गुट इसके मूड में नहीं। क्योंकि फिर चुनावी तैयारियों का समय कम बचेगा। लेकिन यह तो नेतृत्व भी सोच रहा होगा। फिर फैसला कहां अटका हुआ?</p>
<p><br /><strong>नकल या रोडमैप?</strong><br />कांग्रेस भी अब जमीनी स्तर पर वही करने का प्रयास कर रही। जो बरसों से भाजपा करती रही। वैसे भी भाजपा ने बूथ पर काम करके कांग्रेस को भी सोचने को मजबूर किया। अब कांग्रेस में भी पूर्णकालीन कायकर्ता का फंडा। करीब 6500 पार्टी कार्यकतार्ओं की देशभर में नियुक्ति का संकल्प। यह लोग जमीन पर बिल्कुल वैसे ही काम करेंगे। जैसे भाजपा में ग्रास रूट का कार्यकर्ता करता है। योजना के अनुसार यह होल टाइम वर्कर लोकसभा एवं विधानसभावार काम करेंगे।यह लोग अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को किनारे रखेंगे। किसी को टिकट देने की पैरवी भी नहीं करेंगे। क्षेत्र के मंदिरों एवं पुजारियों, पान, नाई एवं चाय की दुकान की सूचियां बनाएगें। क्षेत्र में सामाजिक समीकरणों का बारीकी से अध्ययन करेंगे। लेकिन इतनी जमीनी बातें क्या कांग्रेस में संभव? क्या पार्टी इन सब फैसलों को जमीन पर उतार पाएगी? क्या कांग्रेस में कार्यकतार्ओं एवं नेताओं की वैचारिक ट्रेनिंग का तौर तरीका ऐसा ही? क्या इसके लिए वह तैयार रहते हैं? यह सब कौन देखेगा?</p>
<p><br /><strong>सतह पर हलचल!</strong><br />बिहार में भाजपा-जदयू गठबंधन की राजनीतिक हलचल सतह पर। केन्द्रीय मंत्री आरसीपी सिंह को नितिश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामित नहीं किया। बल्कि उन्होंने जार्ज फर्नाडिस के लंबे समय तक सहयोगी रहे अनिल हेगड़े को आगे किया। इससे कई तरह के कयास। फिर आरसीपी सिंह मंत्री कैसे रहेंगे? असल में, आरसीपी सिंह के बजाए लल्लन सिंह को ही जदयू कोटे से मंत्री बनना था। लेकिन मौका आरसीपी सिंह पा गए। बाद में आरसीपी भाजपा नेतृत्व के करीब चले गए। वहीं, लल्लन सिंह ने पार्टी अध्यक्ष के नाते आरसीपी को अलग थलग करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। कहा तो यहां तक जा रहा। नितिश को लाइन पर लाने के लिए भाजपा आरसीपी को प्रवोक कर रही। ताकि जदयू में झगड़े का लाभ भाजपा उठा सके। हालांकि भाजपा अपनी ओर से नितिश को छोड़ने के मूड में नहीं। जबकि नितिश इस बार भाजपा के मुकाबले विधायकों का संख्या बल कम होने से सहज नहीं। अब राज्यसभा चुनाव के बहाने ही हलचल।</p>
<p><br /><strong>काशी के बहाने ...</strong><br />यूपी एक बार फिर चर्चा में। बिल्कुल अयोध्या की तर्ज पर। बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर का विवाद सुप्रीम कोर्ट होते हुए निचली अदालत में पहुंच गया। इससे पहले मंदिर परिसर में हुुए सर्वे के बाद वहां बाबा के मिलने का दावा। तो दूसरा पक्ष इसे खारिज कर रहा। अब इसे लेकर बयानबाजी, दावे-प्रतिदावे और विवाद की स्थिति। साथ में, तर्क और कुतर्क भी। इसी चक्कर में एक डीयू के पढ़े लिखे महाशय लपेटे में आ गए। यूपी में विधानसभा चुनाव निपट चुके। हां, अगले ही साल से लोकसभा चुनाव। चूंकि यूपी देश का सबसे बड़ा सूबा। जहां 80 लोकसभा सीटें। स्वाभाविक है कि यहां भाजपा का फोकस रहेगा। भाजपा का लक्ष्य 75 पार का। तो सपा के भी इस बार लगभग दो गुने से ज्यादा विधायक। ऐसे में कड़ी टक्कर की नौबत तो रहेगी। लेकिन इन सबमें बाबा विश्वनाथ बीच में कहां? इसी बीच, अब तो मथुरा की भी चर्चा। अलग-अलग विषयों को लेकर कई लोग कोर्ट की शरण में जा रहे।<br /><strong>-दिल्ली डेस्क</strong> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 May 2022 16:56:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>'इंडिया गेट'</title>
                                    <description><![CDATA[पर्दे के पीछे की खबरें जो जानना चाहते है आप....]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/know-what-is-special-in-india-gate/article-8070"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/india-gate9.jpg" alt=""></a><br /><p>दरकता सपाई कुनबा!<br />यूपी में सपा विधानसभा चुनाव क्या हारी। अखिलेश यादव लगातार कमजोर होते दिख रहे। पार्टी संरक्षक मुलायम सिंह की आयु जवाब दे रही। जिससे समस्याएं घटने के बजाए बढ़ रहीं। चुनाव से पहले अपर्णा यादव ने सपा छोड़ी। अब चाचा शिवपाल यादव का अखिलेश के तौर तरीकों से मोहभंग हो रहा। चर्चा यह भी कि कई क्षेत्रों में यादवों ने भी सपा को वोट नहीं दिया। अब मुस्लिम वोट भी दरक रहे। पहले संभल से सांसद शफीकुर्रहमान ने तेवर दिखाए। अब आजम खान कैंप से भी नाराजगी के संकेत। मतलब अगले आम चुनाव से पहले ही ऐसे हालात बन रहे। मानो सपा की हालत भी बसपा जैसे होने की नौबत। यूपी में मतदान के आंकड़ों के जरिए संभावना जताई जा रही। यदि 70 फीसदी से ज्यादा आम चुनाव में मतदान हुआ। तो सपा का साफ होना तय। ऐसे में अखिलेश का क्या होगा? इसीलिए वह समझ गए। जब तक प्रदेश में मजबूत नहीं रहेंगे। केन्द्र यानी दिल्ली में कोई पूछने वाला नहीं!</p>
<p><br />पाक में नया निजाम!<br />तो तमाम तरह की ड्रामेबाजी होने और राजनीति की चैसर पर चली गईं शह मात के खेल के बाद पाक में नया निजाम आ गया। शहबाज शरीफ ने पाक की कमान भी संभाल ली। तो अब पूर्व पीएम इमरान उनसे सड़कों पर लड़ेंगे। शहबाज पूर्व पीएम नवाज शरीफ के छोटे भाई। जो इन दिनों इलाज के लिए लंदन में। वह जल्द ही पाक लौटेंगे। खैर, बात पाक के नए पीएम की। जिन्होंने कश्मीर राग तो छेड़ा ही। साथ में चीन को भी सुख दुख का साथी भी बता दिया। इधर, महबूबा मुफ्ती का भी पाक प्रेम उमड़ रहा। वह हमेशा कश्मीर मसले पर पाक से वार्ता की हिमायती। लेकिन मोदी सरकार न उनको, न पाक को भाव दे रही। शहबाज शरीफ ने भी कश्मीर मसले के हल तक शांति की बात या भारत के साथ सामान्य संबंधों के कयास को खारिज कर डाला। सो, भारत को लेकर बात वहीं की वहीं। मतलब ढाक के तीन पात। पाक में चलेगी सेना की ही।</p>
<p><br />डीएमके की दस्तक?<br />तो द्रविड़ पार्टी डीएमके ने दिल्ली में भव्य महलनुमा पार्टी आॅफिस बनाकर दस्तक दे दी। इसके शुभारंभ के अवसर पर डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने मंशा भी जता दी। वह उत्तर भारत में पार्टी का विस्तार करेंगे। साथ में गैर भाजपाई दलों को भी इस मिशन में साथ लेंगे। असल में, राज्य में उनकी प्रबल प्रतिद्वंदी एआईएडीएमके के सितारे आजकल गर्दिश में। पार्टी संस्थापक जयललिता कभी की दिवंगत हो गईं। चले तो एम. करुणानिधि भी गए। लेकिन स्टालिन के पास अच्छा खासा पॉलिटिकल विजन। राजनीति में वह सीढ़ी दर सीढ़ी आगे बढ़े। समय रहते करुणनिधि ने उन्हें पार्टी की कमान भी सौंप दी। जबकि अम्मा की पार्टी में वर्चस्व एवं कब्जे की लड़ाई दूसरी पांत के नेताओं में जारी। ऐसे में डीएमके नेतृत्व अब तमिलनाडु से बाहर अपनी पार्टी के विस्तार का मन बना रहा। इसमें कुछ गलत भी नहीं। जब केजरीवाल की ह्यआपह्ण अच्छा प्रदर्शन कर सकती है। तो डीएमके क्यों नहीं? फिर भाजपा को छोड़कर सब दल उसके लाइक माइंडेड!</p>
<p><br />महाराष्ट्र में दंगल!<br />महाराष्ट्र में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा। नेताओं एवं दलों की बयानबाजी तीखी और कसेली हो रही। एमएनएस के राज ठाकरे बेहद आक्रामक नजर आ रहे। तो एमवीए सरकार में भी सब कुछ शुरू से ही ठीक नहीं। शेतकारी संगठन सरकार से बाहर आ गया। तो नवाब मलिक पर ईडी का शिकंजा लगातार कसता जा रहा। इन सभी घटनाक्रमों के बीच कांग्रेस की चुप्पी रहस्यमयी। वहीं, सत्ताधारी शिवसेना एवं एनसीपी में बराबर हलचल हो रही। विपक्षी भाजपा, सरकार और विशेषकर शिवसेना एवं सीएम उद्धव ठाकरे के प्रति तल्ख हो रही। मानो इस बार आर पार ही होगा। असल में, मुंबई महानगर पालिका के चुनाव की हलचल। कोरोना एवं वार्डों के पुर्नगठन गठन के चलते इसमें कुछ समय की देरी हुई। इन चुनावों में कांग्रेस के मौन से शिवसेना परेशान। तो भाजपा पूरी तरह उससे दो-दो हाथ करने को आमादा। शिवसनो के लिए बीएमसी कितना महत्वपूर्ण। यह किसी से छुपा नहीं। जिसे भाजपा छुड़ाने को लालायित। सो, दंगल जैसा माहौल बनना लाजमी!</p>
<p><br />आइना दिखाया!<br />विकसित और यूरोपीय देशों का मानवाधिकार मानो प्रिय शगल। तीसरी दुनियां या अविकसित देशों को डराने एवं दबाने का यह जरिया। इसमें लोकतंत्र, पारदर्शी शासन एवं जलवायु परिवर्तन जैसे मसले भी योगदान करते रहे। गरीब देश भी इनके बहाने बड़े देशों की धौंस पट्टी में आते रहे। लेकिन अब वक्त बदल गया। पिछले दिनों अमरीका ने भारत को मानवाधिकारों पर ज्ञान दे डाला। तो भारत ने भी उसी की धरती पर बिना समय गवाएं पलटवार कर डाला। कहा, पहले अपनी गिरेबांन में देखें। फिर भारत जैसे देश पर अंगुली उठाएं। भारत ने तो आगे बढ़कर यहां तक कह दिया। उसकी भी अमरीका में मानवाधिकारों पर नजर। कुछ दशकों पहले तक अमरीका पर इस तरह के जवाब की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। यह ठीक वैसे ही। मानो रूस के सामने यूक्रेन ने अभी तक घुटने नहीं टेके। मतलब भारत जैसे देश दुनियां के फलक पर नई इबारत लिखने की तैयारी कर रहे। भारत द्वारा अमरीका को आइना दिखाना, उसी का संकेत।</p>
<p><br />एका या कोशिश?<br />बीते शनिवार को 13 विपक्षी दलों ने एक संयुक्त बयान जारी किया। मानो बहती गंगा में हाथ धोना। देशभर में बढ़ रही सांप्रदायिक तनाव की घटनाओं पर चिंता जताई गई। जैसे यह 2024 के आम चुनाव के लिए विपक्षी एकता का सुर। सरकार और पीएम मोदी अपना काम कर रहे। सो, विपक्ष को भी करना पड़ेगा। लेकिन यह एकता का राग कागजों तक ही? पांच राज्यों के चुनाव नतीजों ने विपक्ष को खासा निराश किया। लग रहा मानो आम चुनाव भी भारी पड़ेगा। लेकिन उसी दिन आए विभिन्न उपचुनावों के नतीजों ने विपक्षी नेताओं को राहत दी। लेकिन बात विपक्षी एकता की और अगले आम चुनाव में साथ-साथ उतरने की। जो अभी तक दूर की कौड़ी। क्योंकि कई नेताओं के मन में पीएम पद की हिलौरें मार रहीं। बात चाहे ममता बनर्जी की हो या अरविंद केजरीवाल की। फिर आखिर कांग्रेस क्यों पीछे रहे? टीआरएस के केसीआर आजकल काफी आक्रामक। लगता है कोई तगड़ी चोट लगी हो और बता नहीं पा रहे!<br />-<strong>श्रीनाथ मेहरा, पत्रकार</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Apr 2022 14:37:06 +0530</pubDate>
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                <title>'इंडिया गेट'</title>
                                    <description><![CDATA[पर्दे के पीछे की खबरें जो जानना चाहते है आप....]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/know-what-is-special-in-india-gate/article-6484"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/india-gate.jpg" alt=""></a><br /><p>‘एम-वाय’... समीकरण!<br />यूपी की राजनीति में ‘एम-वाय‘ प्रचलित समीकरण। इसे राज्य की राजनीति में ‘मुस्लिम-यादव’ गठजोड़ से जोड़कर देखा जाता रहा। इसे खासतौर से मुलायम सिंह यादव ने सपा के प्रभाव को बढ़ाने के लिए ईजाद किया। लेकिन इस बार के चुनाव में सपा प्रमुख अखिलेश ने इसकी नई परिभाषा गढ़ दी। कहा, ‘एम-वाय’ का मतलब ‘मुस्लिम-यादव’ नहीं। बल्कि ‘महिला एवं युवा’ का गठजोड़। लेकिन जब नतीजे आए तो भाजपा द्वारा एक नया अर्थ ईजाद किया गया। ‘एम-वाय’ मतलब ‘मोदी-योगी’ की जोड़ी। इस बार यूपी चुनाव में ‘मोदी-योगी’ की जोड़ी हिट रही। तमाम पूर्व धारणाएं ध्वस्त हुईं। यहां तक कि एक नए वर्ग की ‘लाभार्थी वर्ग’ की चर्च। जिसको केन्द्र एवं राज्य सरकार की योजनाओ का लाभ मिला। मोदी-योगी की जोड़ी इसे साधने एवं अपने पक्ष में मतदान करवाने में सफल रही। इसने भारतीय राजनीति की दशकों से चली आ रहीं बेड़ियों को तोड़ दिया। यह सभी राजनीति के जानकर मान रहे। दावा किया गया। सरकार ने बिना किसी भेदभाव के इस वर्ग तक सरकारी योजनाएं सफलतापूर्वक पहुंचाईं!</p>
<p><br /><strong>ढाक के तीन पात!</strong><br />कांग्रेस नेतृत्व एक बार फिर से जोखिम लेने से कतरा गया। बल्कि सीडब्ल्यूसी की बैठक में हुआ वही, जिसका पूवार्नुमान। सोनिया गांधी की अगुवाई में पार्टी आगे बढ़ेगी। वह कोई भी बदलाव करने को स्वतंत्र। संसद सत्र के बाद एक चिंतन शिविर में मंत्रणा की योजना। लेकिन कांग्रेस द्वारा जब इस प्रकार के शिविर किए गए। तब से देश की राजनीति में कई आयाम स्थापित हो चुके। ऐसे में चिंतन शिविर कितना सार्थक होगा? न सत्ताधारी भाजपा वैसी पार्टी बची। वहां अब बहुत प्रेफेशनल तरीके से राजनीतिक एवं चुनावी अभियानों को अंजाम दिया जाता है। जवाब में कांग्रेस अपनी खुद की मशीनरी ऐसी नहीं बना सकी। सो, सफलता में संदेह। फिर कांग्रेस लगातार ढलान पर। सिर्फ दो राज्यों में पूर्ण बहुमत की और दो में गठबंधन सरकारें बची हुईं। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में आंतरिक कलह कम नहीं। कब कोई बखेड़ा खड़ा हो जाए, पता नहीं। ऐसे में सीडब्ल्यूसी में पांच घंटे की कवायद कहीं ढाक के तीन पात तो साबित नहीं होगी?</p>
<p><br /><strong>फिर वही गलती!</strong><br />आजकल ‘द कश्मीर फाइल्स’ नाम की मूवी काफी चर्चा में। इसकी कहानी को लेकर। पीएम मोदी द्वारा भाजपा संसदीय दल की बैठक में इसकी चर्चा की गई। जब पीएम मोदी किसी पर बोलें। तो कांग्रेस का बोलना लाजमी। वही हुआ भी। इसके अलावा कहा जा रहा। इसको सिनेमा के पर्दे पर दिखाने एवं प्रमोशन को लेकर कई रोड़े अटकाए गए। लेकिन जनता के जबरदस्त समर्थन से यह मूवी कई रिकार्ड कायम कर रही। ऐसे में, संभव हो भाजपा अपने अभियान में सफल रहे। लेकिन कांग्रेस द्वारा इसका उसी अंदाज में काउंटर करना। समझ से परे। यह लड़ाई एक प्रकार से नेरेटिव एवं परसेप्शन की भी। कांग्रेस ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ के विरोध को जायज ठहराया। केरल की कांग्रेस इकाई और कुछ अन्य पार्टी नेताओं द्वारा नब्बे के दशक में कश्मीर घाटी में हुए नरसंहार एवं पलायन को नकार दिया गया। जो आम प्रचलित धारणा के एकदम विपरीत। लगता है कांग्रेस पांच राज्यों में इतनी करारी हार के बावजूद सबक सीखने को तैयार नहीं।</p>
<p><br /><strong>चुनावी तैयारी!</strong><br />मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव करवाने की ओर बढ़ रही? राज्य परिसीमन आयोग द्वारा राजनीतिक दलों से आपत्तियां मांग ली गई। अब घाटी एवं जम्मू रीजन में सीटें बढ़ने के साथ संख्या गणित भी बदल जाएगा। जिस प्रकार से गतिविधियां राज्य में आकार ले रहीं। वह जल्द चुनाव होने की ओर इशारा कर रहीं। सबसे ज्यादा माहौल बनाने में भाजपा जुटी हुई। असल में, पीएम मोदी ने भाजपा ससदीय दल की बैठक में चर्चित मूवी ‘द कश्मीर फाइल्स’ का जिक्र कर दिया। मतलब विरोधियों की नजर में एक प्रकार से इसकी ‘ब्रॉडिंग और मार्केटिंग’ कर डाली। इसे देशभर में जनता का जबरदस्त रेस्पांस मिल रहा। इसकी चर्चा चर्चा भारत में ही नहीं। विदेशों में भी हो रही। कश्मीर समस्या को लेकर जो धारणा बना दी गई। उसके ठीक विपरीत एक कड़वा तथ्य एवं सच पर्दे के जरिए सामने आ रहा। जिससे दुनियां भी परिचित हो रही। सो, जब राज्य में विधानसभा चुनाव होगा। देशज ही नहीं वैश्विक नजरिया भी इस बार अलग ही होगा!</p>
<p><br /><strong>योगी नए पावर सेंटर...</strong><br />यूपी में योगी आदित्यनाथ ने दो तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कर ली। साल 2017 में भाजपा बिना किसी सीएम चेहरे के सामूहिक नेतृत्व में चुनावी मैदान में उतरी थी। बल्कि पीएम मोदी की अगुवाई में चुनाव लड़ा गया। लेकिन इस बार चेहरा सीएम योगी का। उन्हीं की अगुवाई में चुनावी अभियान चलाया गया। भाजपा के सत्तारूढ़ होते ही। अब यह भी तय हो गया। सीएम योगी अब पार्टी में एक नए पावर सेंटर। कोई भी चाहकर उनकी अनदेखी नहीं कर सकता। पार्टी को 2024 में आम चुनाव में जाना है। योगीजी देशभर में अब पार्टी के स्टार प्रचारक होंगे। पार्टी उनसे पहले भी देशभर में चुनावी प्रचार करवाती रही है। लेकिन इस बार बात अलग। क्योंकि वह यूपी जैसे महत्वपूर्ण एवं बड़े सूबे को तमाम बाधाएं पार करके जीतकर आए। जहां 80 लोकसभा सीटें। अब भाजपा को उनकी जरुरत। चर्चा यह भी। वह जल्द ही भाजपा संसदीय बोर्ड में होंगे। मतलब योगीजी का भाजपा में कद बढ़ना भी तय।</p>
<p><br /><strong>लाचार बाइडेन...</strong><br />अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन न वैश्विक फलक पर और न अमरीकी नागरिकों पर खास छाप छोड़ पा रहे। बल्कि उनकी साख और लगातार खराब हो रही। खासकर रूस-यूक्रेन संघर्ष में वह अमरीकी हनक और रुआब के अनुसार कुछ सार्थक एवं परिणामकारी करते हुए नजर नहीं आ रहे। वह लगातार रूस को धमका तो रहे। लेकिन जमीन पर कुछ नहीं कर पा रहे। अमरीकियों को तो अब उनके पूर्ववर्ती डोनाल्ड ट्रंप याद आ रहे। जो कई मामलों में सीधा सपाट बोलने और दो टूक फैसला लेने में विश्वास करते थे। अब बाइडेन चीन को भी रूस के साथ खड़ा होने पर धमका रहे। लेकिन चीन बहुत पहले समझ चुका। अब अमरीका उतना ताकतवर नहीं रहा। जितना पहले कभी हुआ करता था। रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन यह साबित कर भी चुके। सो, चीन कहां पीछे रहने वाला? उसकी महत्वाकांक्षा अब किसी से छुपी नहीं। ऐसे में बाइडेन ‘रूस-चीन’ गठजोड़ के आगे लाचार नजर आ रहे! मतलब बकौल मोदीजी, हम नए वर्ल्ड आर्डर की ओर बढ़ रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Mar 2022 15:45:53 +0530</pubDate>
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                <title>रेल पथ निर्माण कार्य के कारण बंद रहेगा फाटक </title>
                                    <description><![CDATA[रेल पथ निर्माण कार्य के कारण समपार फाटक संख्या-205 (पालावाला फाटक) 12 से 20 मार्च तक बंद रहेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/gate-will-be-closed-due-to-construction-work/article-5973"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/railway-p-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। रेल पथ निर्माण कार्य के कारण समपार फाटक संख्या-205 (पालावाला फाटक) 12 से 20 मार्च तक बंद रहेगा। उत्तर पश्चिम रेलवे के प्रवक्ता के अनुसार जयपुर मण्डल के बस्सी-कानोता स्टेशनो के मध्य समपार फाटक संख्या-205 (पालावाला फाटक) रेल पथ मरम्मत कार्य के लिए 12 मार्च को सुबह 6 बजे से 20 मार्च तक बंद रहेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Mar 2022 15:35:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> दो शिक्षकों के बीच झगड़ा, विद्यालय बना अखाड़ा, परिजनों ने स्कूल के लगाया ताला</title>
                                    <description><![CDATA[सिकराय उपखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत कालाखोह-अम्बाड़ी में राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल अम्बाडी में दो शिक्षकों के बीच झगड़ने की बात को लेकर परिजनों ने स्कूल गेट पर ताला जड़ दिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dausa/in-the-government-upper-primary-school-ambadi-in-the-gram-panchayat-kalakhoh-ambadi-of-sikrai-subdivision-area--the-family-members-locked-the-school-gate-over-the-matter-of-a-quarrel-between-two-teachers/article-5063"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/10_new.jpg" alt=""></a><br /><p>दौसा/सिकराय। सिकराय उपखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत कालाखोह-अम्बाड़ी में राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल अम्बाडी में दो शिक्षकों के बीच झगड़ने की बात को लेकर परिजनों ने स्कूल गेट पर ताला जड़ दिया। ताला जड़ देने की सूचना पर पहुंचे शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों से समझाइश कर ताला खुलवाया। इस दौरान एक अध्यापक के खिलाफ एपीओ की कार्रवाई की गई।<br /><br />राजकीय स्कूल अम्बाडी में दो शिक्षकों के बीच रोज-रोज हो रहीं लड़ाई से परेशान होकर परिजनों ने स्कूल भवन पहुंचकर प्रवेश द्वार पर ताला जड़ दिया। इस दौरान ग्रामीणों ने एक अध्यापक को स्कूल से हटाने की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल के 2 अध्यापक रामकिशन व मिथिलेश मीना के बीच हो रही लड़ाई से स्कूल में पढ़ने वाले बालक-बालिकाओं में गलत प्रभाव रहा है। पहले भी इसी तरह का मामला होने पर अध्यापक मिथिलेश मीना को किसी अन्यत्र जगह पर लगाया गया था। अब फिर से विद्या के मंदिर को अखाड़ा बना रहे हैं। स्कूल पर ताला जड़ने की सूचना पर पहुंचे सीबीईओ मोहनलाल बैरवा, पीईओ रामसिंह बैरवा, राजेश मीणा, चेतराम मीना ने पहुंचकर ग्रामीणों से समझाइश कर ताला खुलवाया गया। एक अध्यापक खिलाफ एपीओ कीकार्रवाई की गई। सरपंच नरेश बैरवा, रमेश महावर, कैलाश शर्मा आदि मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>दौसा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Feb 2022 15:38:03 +0530</pubDate>
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                <title>जानें इंडिया गेट में क्या है खास</title>
                                    <description><![CDATA[पर्दे के पीछे की खबरें जो जानना चाहते है आप....]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%B8/article-4437"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/qutub-minar,delhi,india.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>फैल रहा रायता...</strong><br />पंजाब में कांग्रेस लगातार कमजोर हो रही। चरणजीत सिंह चन्नी को भावी सीएम फेस घोषित करने के बाद से नवजोत सिंह सिद्धू बिल्कुल बैमन। खुद अपनी ही सीट पर फंस गए, वह अलग। इधर, सुनील जाखड़ ने राजनीति ही छोड़ने का ऐलान कर डाला। वह भी आलाकमान से नाराज दिख रहे। अब स्टार प्रचारकों की सूची में नाम नहीं होने से मनीष तिवारी दु:खी। कहा, अगर सूची में नाम होता तो आश्चर्य होता। मतलब वह इसके लिए तैयार बैठे थे। वह ‘जी-23’ के सदस्य भी। तिवारी कई बार नेतृत्व को असहज कर चुके। वैसे ही कैप्टन जैसे दिग्गज नेता पार्टी से बाहर हो चुके। तो क्या ऐन मौके पर कांग्रेस का रायता फैल रहा? विधानसभा चुनाव के लिए मतदान के लिए एक सप्ताह बचा हुआ। किसान आंदोलन से अच्छा खास मूवमेंट बना था। जो चुनाव आने तक धीेर धीरे दरक गया। फिर किसानों ने ही अलग पार्टी बनाकर सब कुछ पर पानी फेर दिया। अब बचा क्या?</p>
<p><strong><br />अब आगे क्या?</strong><br />मरुधरा की कांग्रेस सरकार में बहुप्रतिक्षित राजनीतिक नियुक्तियों का काम हो गया। कुछ पद बचाकर इसीलिए रखे गए। ताकि असंतोष के सुर दबाए जा सकें। अभी विरोध का इंतजार हो रहा। फिलहाल तो शांति सी लगी रही। जिस ओर से आपत्ति संभावित थी। वह भी कह बैठे। चलो, कुछ नहीं से कुछ तो हुआ। इधर या उधर के खेमे से कोई नहीं। सभी नियुक्ति पाने वाले पार्टी के ही कार्यकर्ता। कहीं यह तूफान के पहले की शांति तो नहीं? वैसे भी पायलट साहब यूपी चुनाव में व्यस्त। धुआंधार चुनावी प्रचार कर रहे। गांधी परिवार ने उन्हें भरोसे में लिया हुआ। इसीलिए देश के सबसे बड़े सूबे के चुनावी प्रचार में सक्रिय। आखिर नेतृत्व ने उन्हें क्या आश्वासन दिया होगा? वैसे, उधर से संकेत यह कि वह छोटी लड़ाई में नहीं उलझेंगे। इससे बड़ा लक्ष्य प्रभावित होगा। सो, बड़ा लक्ष्य तो एक ही होगा। लेकिन इसके लिए 2023 या इससे पहले? फिलहाल तो सभी को दस मार्च का इंतजार!</p>
<p><br /><strong>पीएम के दो भाषण?</strong><br />संसद के बजट सत्र का पहला भाग खत्म हो गया। इस बार चर्चा में रहे पीएम के दो भाषण। लोकसभा एवं अगले दिन राज्यसभा में जो पीएम बोले। वह लंबे समय तक याद रखने के दावे। आखिर पीएम ने कांग्रेस के खिलाफ  चुन चुनकर जवाब दिए। लेकिन एक सवाल! कहीं पीएम मोदी संसद के जरिए चुनावी अभियान तो नहीं साध रहे थे। क्योंकि सिख दंगों से लेकर गोवा की आजादी का भी उन्होंने जिक्र किया। आखिर पीएम कांग्रेस के प्रति इतने तल्ख लहजे का उपयोग क्यों कर गए? इससे पहले राहुल गांधी देश को रा’यों का समूह बता गए। जिससे सत्ताधारी दल बुरी तरह चिढ़ गया। भाजपा को ‘राष्टÑ’ शब्द बेहद प्रिय। इसीलिए पीएम ने जवाब देना एवं विरोध करना उचित समझा। कांग्रेस न होती तो क्या होता? इस पर पीएम ने जो लंबी फेहरिश्त सुनाई। तो कांग्रेस सांसद राज्यसभा से बाहर हो लिए। पूर्व योजना थी या सुन ही नहीं पाए? यह मार्के का सवाल।</p>
<p><br /><strong>‘रीट’ कहां ले जाएगी?</strong><br />राज्य सरकार के लिए ‘रीट’ मामला गले की हड्डी बनता जा रहा? विधानसभा सत्र में विपक्षी भाजपा बेहद आक्रामक। वह हर लोकतांत्रिक तरीके से कांग्रेस सरकार और आम जनता का ध्यान आकर्षित कर रही। करे भी क्यों नहीं। पूरे 26 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा जो दी हुई। प्रदेश की ऐसी कोई ग्राम पंचायत नहीं बची होगी। जहां के परीक्षार्थी ने यह परीक्षा नहीं दी होगी। फिर मामला भी रोजगार का। जो सीधे जनता से जुड़ा हुआ। फिर रही सही कसर इस मामले के संसद में उठ जाने से पूरी हो गई। भाजपा के रा’यवर्धन सिंह राठौड़ ने इसे लोकसभा में उठाया। मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने की मांग हो रही। भाजपा अड़ी हुई। ऐसे में रीट मामला आखिर कहां तक जाएगा? कहीं ऐसा तो नहीं? कई बड़े लपेटे में आ जाएं और बात आगे निकल जाए। वैसे, भाजपा जल्द ही राज्य में आंदोलनों की शुरुआत करने जा रही। जो चुनाव तक चलेंगे। यही चर्चा।</p>
<p><strong><br />भारत की साख!</strong><br />दुनियां के फलक पर भारत की साख बढ़ रही। बात चाहे अफगानिस्तान के मसले पर मध्यस्त की हो या फिर चीन से आर्थिक पंगा लेने का मामला। यूक्रेन विवाद में भारत ने किसी भी पक्ष की ओर झुकाव नहीं दिखाया। इजराइल एवं फिलीस्तीन विवाद में भी भारत ने दशकों से चले आ रहे रुख में बदलाव किया। भारत लगातार विरोध एवं आपत्ति के बावजूद अमरीका और रुस हथियार खरीद रहा। जबकि दोनों ही देशों की चाहत। सिर्फ  उसी से हथियारों का सौदा हो। असल में, भारत ने दोनों ही ताकतों को सलीके से समझा दिया। उसे जो ठीक लगेगा, वही करेगा। वह किसी भी खेमेबाजी में नहीं पड़ेगा। अब तो ईरान से भी रिश्ते सामान्य अवस्था की ओर बढ़ रहे। तमाम प्रयासों के बावजूद पाक इस्लामिक वर्ल्ड में भारत को अलग-थलग नहीं कर सका। वहीं, जबकि खाड़ी के देशों से लगातार संबंध प्रगाढ़ हो रहे। यानी दुनियां में भारत के लगातार ताकतवर एवं मजूबत होने का संकेत।</p>
<p><br /><strong>रामगोपाल यादव कहां?</strong><br />सपा नेता रामगोपाल यादव की चर्चा नहीं हो रही। जबकि अवसर यूपी में चुनावी। मुलायम सिंह उम्रदराज हो गए। इसीलिए असक्रिय। शिवपाल यादव सपा से गठबंधन करके पछता रहे। जबकि अर्पणा यादव सपाई कुनबा छोड़कर भाजपा में चली गईं। डिम्पल यादव मैदान में नहीं उतरीं। लेकिन रामगोपाल यादव कहीं नजर नहीं आ रहे। याद है न। जब 2016 में जब यादव कुनबे में झगड़ा चरम पर था। तो रामगोपाल यादव की काफी चर्चा हुई थी। शिवपाल यादव ने सार्वजनिक तौर पर उन पर गंभीर आरोप लगाए थे। यहां तक कहा गया। अखिलेश वही कर रहे। जो रामगोपाल समझा रहे। लेकिन अब वह चुनावी मौके पर गायब से। आखिर इसका मतलब क्या? कहीं, यह चुनाव बाद के हालात का संकेत तो नहीं? रामगोपाल यादव कहीं असफलता का ठीकरा अपने सिर तो नहीं फुड़वाना चाहते। इसीलिए सबसे दूरी बनाए हुए। या सार्वजनिक चर्चा से दूर रहकर चुपचाप पर्दे के पीछे पार्टी का काम कर रहे? सवाल तो बनता है!<br /><strong>-दिल्ली डेस्क</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Feb 2022 11:41:27 +0530</pubDate>
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                <title>जानें इंडिया गेट में क्या है खास</title>
                                    <description><![CDATA[बातें पर्दे के पीछे की.....]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%B8/article-3911"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/qutub-minar,delhi,india1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सेल्फ गोल?</strong><br /> क्या कांग्रेस ने पंजाब में पीएम मोदी की सुरक्षा के मुद्दे पर ‘कभी इधर, कभी उधर’ वाली बात करके सेल्फ गोल कर लिया? क्योंकि कांग्रेस यहां सत्ता में। एक रैली को संबोधित करने पंजाब गए पीएम मोदी का काफीला किसानों द्वारा रोका गया। तो देशभर में हंगामा मच गया। कांग्रेस के कछ नेताओं ने पहले तो मानो इसे हल्के से लिया। बाद में मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए खुद सोनिया गांधी ने सीएम सीएस चन्नी से बात करके ताकीद किया। दोषियों की जवाबदेही तय की जाए। तो युवक कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास ने ‘हाउ इज द जोश’ का ट्वीट करके पीएम से कैफियत पूछ ली। वहीं, रणदीप सुरजेवाला ने दावा किया। यह किसानों का आक्रोश। इसी बीच, मामला सर्वोच्च न्यायालय में पहुंच गया। खुद पीएम मोदी राष्ट्रपति कोविंद से मिल आए। बचा खुचा काम पंजाब कांग्रेस के कछ नेताओं ने कर दिया। मनीष तिवारी, सुनील जाखड़ और प्रताप सिंह बाजवा ने इसे गंभीर मामला बताया। क्या कांग्रेस ने सच में ‘सेल्फ गोल’ कर लिया?</p>
<p><br /> <strong>चुनावी जंग...</strong><br /> पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की जंग का ऐलान हो चुका। देशभर में कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन का संक्रमण बढ़ रहा। सो, चुनाव आयोग द्वारा पाबंदियों के साथ मतदान का संकल्प। बड़ी रैलियां करने पर फिलहाल रोक। लेकिन चुनाव समय पर करवाना चुनाव आयोग की संवैधानिक बाध्यता। मानकर चलिए, इन चुनावों के परिणाम का असर राष्ट्रीय फलक पर होने वाला। इसकी जद मे सबसे ज्यादा भाजपा, कांग्रेस। अपनी मरूधरा में भी दोनों दलों को बेसब्री से इंतजार। आखिर ऊंट किस करवट बैठेगा। इसकी जानकारी दस मार्च को मिलेगी। लेकिन किसके सितारे चमकेगे और किसके डूबेंगे। यह भी तय हो जाएगा। यूपी में योगीजी की भगवा लहर चलेगी? पंजाब में राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दा बनेगा? उत्तराखड एवं गोवा में भाजपा सत्ता बचा पाएगी? और क्या मणिपुर में हिमंता अबके ठीक से कमाल करेगे? या फिर कांग्रेस अपने एजेंडे में कामयाब होगी। मतलब किसान, बेरोजगारी एवं महंगाई को आम जनता प्राथमिकता देगी? सो, यह तय। साल 2024 में होने वाले आम चुनाव की नींव भी यहीं से पड़ेगी!</p>
<p><br /> <strong>सुरक्षा बनेगा मुद्दा!</strong><br /> पीएम मोदी का पंजाब के हुसैनीवाला स्थित राष्ट्रीय स्मारक जाते समय रास्ते में काफीला रूका। तो यह तय हो गया। राज्य के विधानसभा चुनाव में सुरक्षा एक अहम मुद्दा बनेगा। राज्य में चनाव के वक्त खालिस्तानी तत्व सिर उठा रहे। बीच-बीच में कई स्थानों से धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी की खबरें अचानक बढ़ सी गईं। फिर एक जिला अदालत में बम विस्फोट हो गया। अरबों रूपए के अवैध नशे का कारोबार राज्य में बहुत बड़ी समस्या। वैसे सुरक्षा का मद्दा भाजपा के लिए मुफिद। क्योंकि वह इस पर हमेशा आक्रामक रहती। तो उसके साथ आए पूर्व सीएम कैप्टन अमरिन्दर सिंह भी इस बारे में गहरी चिंता जता चुके। जबकि इसके उलट कांग्रेस हमेशा डिफेंसिव रहती आई। फिलहाल पार्टी को किसानों का मुद्दा सूट कर रहा। लेकिन पीएम की सुरक्षा मे सेंध लगने के बाद। मानो यह नेपथ्य में चला गया। जो चुनावी लिहाज से कांग्रेस के लिए मुफिद नहीं। भाजपा हमलावर रहेगी। देशभर में पीएम मोदी की दीघार्यु की कामना इसी का हिस्सा!</p>
<p><br /> <strong>उपेक्षा.. अरूचि...!</strong><br /> राहुल गांधी नए साल की छुट्टियां मनाने विदेश गए। हालांकि वह पार्टी के स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में मौजूद रहे। लेकिन पंजाब के मोगा में उनकी तीन जनवरी को रैली तय थी। जिसे ऐन मौके पर रद्द किया गया। इससे पार्टी कार्यकर्ता निराश हुए। असल में, राहुल गांधी ऐसा कई बार कर चुके। जब कई अहम मौकों पर वह नदारद रहे। जिससे कांग्रेस की काफी फजीहत हुई। हर बार एक ही जवाब। उनका भी व्यक्तिगत जीवन। लेकिन मोगा की पूर्व में निर्धारित जनसभा का क्या? जिसकी तैयारी में अच्छी खासी मेहनत लगी होगी। लेकिन सवाल राहुल गांधी की राजनीति के प्रति बेरूखी या अरूचि का। सवाल उनकी प्राथमिकता का भी। मतलब, राजनीति और कांग्रेस के प्रति। जबकि पार्टी नेतृत्व का साफ संकेत। भविष्य में राहुल गांधी ही कांग्रेस के अगुवा होंगे। पार्टी उन्हीं के इर्द गिर्द चलेगी। लेकिन पीएम मोदी जैसे खांटी राजनीतिज्ञ से मुकाबले के लिए क्या यह रवैया ठीक? जो ‘24 इंटु सेवन’ की राजनीति ही करते। फिर अपेक्षित परिणाम कैसे संभव?</p>
<p><br /> <strong>विजय संकल्प!</strong><br /> भाजपा ने प्रदेशभर के करीब 11 सौ सांगठनिक मंडलों में एक साथ बैठकें कर डाली। साथ में, निधि संग्रह अभियान भी। फिर माह के अंत में जयपुर में बड़ी रैली की तैयारी। जिसमें दिल्ली से अध्यक्ष जेपी नड्डा या अमित शाह के आने की संभावना। कोरोनाकाल में प्रदेश की टीम ने बेहतरीन काम किया। इसकी पीएम मोदी ने भी तारीफ की। पंचायत चुनाव के परिणाम भी इतने बुरे नहीं। हां, विधानसभा उपचुनाव ने निराश जरुर किया। लेकिन प्रत्याशी चयन में हुई गलती मान ली गई। स्थानीय समीकरणों का ध्यान नहीं रखा गया। इस बीच, पार्टी के भीतर सीएम पद के एक साथ कई दावेदार बताए जा रहे। लेकिन सभी एक सुर में बोल रहे। पार्टी संसदीय बोर्ड तय करेगा नाम। यानी दिल्ली से किसका भाग्य खुलेगा। अभी इसका इंतजार। अभी तो सभी को साथ मिलकर चलना होगा। अमित शाह फरमान। प्रदेश अध्यक्ष कह चुके। मुखिया होने के नाते। वह संगठन को इतनी मजबूती देना चाहेंगे कि भाजपा बार-बार सत्ता में आए। ऐसा विजयी संकल्प।</p>
<p><br /> <strong>महज संयोग?</strong><br /> मरूधरा की राजनीति में अंदरखाने बहुत कछ चल रहा। मानो यह साल 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव की खदबदाहट हो। बात चाहे सत्ताधारी कांग्रेस की हो। या विपक्षी भाजपा की। देखिए न। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रभारी महासचिव अजय माकन दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से कोरोना संक्रमित हो गए। इसके चलते दोनों ही पृथक आवास में। अब इसका असर यह हो रहा कि राजनीतिक नियुक्तियों की आस लगाए नेताओ को और इंतजार करना पड़ रहा। बड़ी मुश्किल से तो बात पटरी पर आ रही थी। अब मार्च माह में लॉटरी खुलने की बताया जा रहा। इसी प्रकार, भाजपा में पूर्व मुखिया अशोक परनामी जी अमित शाह से मिल आए। बकायदा फोटो जारी हुआ। लेकिन इसके ज्यादा कोई जानकारी नहीं। तभी से कयासों का दौर। वहीं, अध्यक्ष जी कह चुके। उन पर शीर्ष नेतृत्व को भरोसा। इसीलिए यह बड़ी जिम्मेदारी दी गई। ऐसे में प्रदेश संगठन तो वही चलाएंगे। इसका भी मतलब एकदम साफ। क्या दोनों ही ओर बहुत कुछ पक रहा? और क्या यह महज संयोग?<br /> <strong>-दिल्ली डेस्क</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jan 2022 12:41:48 +0530</pubDate>
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                <title>जानें इंडिया गेट में क्या है खास</title>
                                    <description><![CDATA[चर्चा से गायब मायावती!, लाइन पर पवार!, अशगुन तो नहीं?, घुड़की तो नहीं?, भंवर में अखिलेश?  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%B8/article-3747"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/qutub-minar,delhi,india.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>चर्चा से गायब मायावती!</strong></p>
<p>चुनाव सिर पर हो और नेता चर्चा में न हो। तो थोड़ा अटपटा लगेगा। लेकिन आजकल बसपा प्रमुख मायावती पर यह बात लागू हो रही। मानो वह सीन से गायब सी। राजनीतिक गलियारे में उनकी चर्चा ज्यादा नहीं हो रही। जबकि उनके प्रतिद्वंदी सीएम योगी आदित्यनाथ, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी मैदान में तगड़ी दौड़ धूप कर रहे। लेकिन मायावती अभी तक मैदान में नहीं उतरीं। यहां तक कि गृह मंत्री अमित शाह ने तंज भी कस दिया। कहा, बहन जी आखिर चुनाव हैं। जरा घर से बाहर भी आइए। तो मायावती ने भी उसी अंदाज में जवाब दिया... मेरे कार्यकर्ताओं के पास रैली करने के पैसे नहीं। असल में, दलित वर्ग में जबरदस्त पैठ रखने वालीं बहनजी की गैर मौजूदगी अन्य नेताओं और दलों को भी अखर रही और उन्हें हैरान कर रही। हालांकि अंदरखाने उनकी चुनावी तैयारियां और यूपी के सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति पर काम बराबर हो रहा। सोशल इंजीनियरिंग में वैसे भी उन्हें महारथ।</p>
<p><strong><br />लाइन पर पवार!</strong><br />महाराष्ट्र में साल 2019 के विधानसभा चुनाव में मराठा क्षत्रप शरद पवार ने भाजपा को करारा झटका दिया था। आखिर इतनी बड़ी रणनीतिक चूक जो हुई थी। रात के अंधेरे में बनी सरकार 80 घंटे भी नहीं चल पाई। पवार ने अपने दांव से सबको चित कर दिया। लेकिन अब पवार बदले-बदले से। पीएम मोदी की तारीफ कर रहे। उन्हें सबसे अलग हटकर मेहनती और काम को अंजाम तक पहुंचाने वाला नेता बता रहे। आखिर पीएम की तारीफ का राज क्या? पवार के करीबी रिश्तेदारों द्वारा कई सहकारी समितियों एवं कंपनियों का संचालन दशकों से हो रहा। तिस पर सीएम ठाकरे बीमार। मुंबई नगर निगम के चुनाव सिर पर। इधर, सरकार में शामिल कांग्रेस का एकला चलो का राग। सो, पवार को पुरानी बातें याद आ रहीं। माना जा रहा। मोदी-शाह ने अबके ठीक से शिकंजा कसा। हजारों करोड़ के सहकारी बैंक और समितियां पर नए मंत्रालय के गठन के बाद नियंत्रण कसने का डर। फिर गठबंधन सरकार की स्थिरता पर हमेशा संशय।</p>
<p><br /><strong>अशगुन तो नहीं?</strong><br />कांग्रेस के 136वें स्थापना दिवस पर पार्टी का झंडा क्या गिरा। मानो यह अपशगुन हो गया हो। हालांकि यह मानवीय चूक से ज्यादा कुछ नहीं। शायद संबंधित पार्टी कार्यकर्ताओं ने पूर्व में ठीक से तैयार न की हो। लेकिन इस घटना से एकायक सोनिया गांधी हक्की बक्की रह गईं। हालांकि झंडा नीचे जमीन पर नहीं गिरा। बल्कि सेवादल कार्यकर्ता के कंधे पर जा गिरा। असहज हुई स्थिति को तुरंत संभाला गया। असल में, कांग्रेस का देशभर में लगातार राजनीतिक ग्राफ नीचे गिर रहा। हर राज्य में पार्टी मानो संकट के दौर से गुजर रही। गुटबाजी और अनिश्चितता वाला माहौल। पार्टी शासित राज्यों राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। तो चुनावी राज्य पंजाब में सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और पीसीसी चीफ नवजोत सिंह सिद्धू के बीच कुछ न कुछ चल ही रहा। ऐसे में पार्टी की रणनीति प्रभावित होने की संभावना बनी रहती। इसी बीच, स्थापना दिवस पर पार्टी का झंडा गिरना। उसके हितचिंतकों को अपशगुन का संकेत लग रहा।</p>
<p><br /><strong>और कितना नीचे?</strong><br />कांग्रेस, पीएम मोदी और भाजपा के विरोध में उस पड़ाव तक पहुंच गई। जो किसी भी गतिशील राजनीतिक संगठन की सेहत के लिए ठीक नहीं। जैसे राजधानी दिल्ली में। आप को पार्टी ने 2013 में एक बार समर्थन क्या दिया। कांग्रेस शून्य पर आ गई। फिर आप पंजाब में भी प्रमुख विपक्षी दल बन बैठी। इसी तरह बंगाल में कांग्रेस की हालत दिनोंदिन दयनीय हो रही। अब बात सरवाइवल की नहीं। बल्कि मानो अस्तित्व पर आ रही। हाल ही में कोलकाता नगर निगम के चुनाव में कांग्रेस शून्य पर आ गई। इससे पहले विधानसभा में भी वामदलों के साथ शून्य पर रही। अब राज्य में मुख्य मुकाबला केवल टीएमसी और भाजपा के बीच रह गया। राज्य में कांग्रेस और वामदल करीब 65 साल राज कर चुके। अगर ऐसा ही चलता रहा। तो कांग्रेस कार्यकर्ता के पास विकल्प सिमित ही बचेंगे। इन सबके बावजूद पार्टी नेतृत्व शायद सावचेत नहीं हो रहा। जो बेहद चिंताजनक। क्योंकि अगली बारी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की। तो आगे क्या उम्मीद बचेगी?</p>
<p><br /><strong>घुड़की तो नहीं?  </strong><br />हरीश रावत ने कांग्रेस आलाकमान की ऐन चुनावी मौके पर घुड़की देकर मुसीबत बढ़ा दी। उपर से पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर ही सवाल। हालांकि एक दिन बाद ही देवभूमि का यह दिग्गज नेता पलटी मार गया। राहुल गांधी से मिलकर गिले शिकवे भी दूर कर लिए। लेकिन जो नुकसान होना था। वह हो गया। असल में, रावत की चाहत चुनाव में फ्रिहैंड की। क्योंकि प्रदेश अभियान समिति के मुखिया की जिम्मेदारी उनके कंधों पर। अब पार्टी का चुनावी चेहरा भी बनने की चाह। पार्टी नेताओं से सहयोग नहीं मिलने की शिकायत सार्वजनिक रुप से कर दी। कांग्रेस अपने इस नेता को खोना नहीं चाहती। क्योंकि देशभर से कई नेता कांग्रेस से किनारा कर रहे। फिर रावत के बहाने भाजपा को बैठे ठाले कांग्रेस को घेरने का मुद्दा मिल गया। जबकि वह खुद कुछ समय के अंतराल में दो सीएम बदल चुकी। मतलब वहां भी सब कुछ ठीक नहीं। लेकिन भाजपा में समय रहते चीजें और हालात दुरुस्त करने में कांग्रेस से ज्यादा चुस्ती।</p>
<p><strong><br />भंवर में अखिलेश?</strong><br />सपा प्रमुख अखिलेश यादव की बयानबाजी से लग रहा। उनके लिए आगे आने वाला समय आसान नहीं। उनके शब्दों की आक्रामकता और बॉडी लैंग्वेज से ऐसा ही प्रतीत हो रहा। विधानसभा चनाव का रण सामने। पिछली बार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन था। तो लोकसभा में बसपा के साथ। हालांकि दोनों ही बार अपेक्षित परिणाम नहीं मिला। लेकिन इस बार चाचा शिवपाल यादव की पार्टी से गठबंधन की नौबत आ गई। मतलब सपा कमजोर हालत में। इसी बीच, अखिलेश के करीबी माने जाने वाले व्यापारियों पर आईटी के ताबड़तोड़ छापे। बड़ी मात्रा में नकदी और सोना-चांदी मिलने की खबरें। घेरा बढ़ता ही जा रहा। जिसे अखिलेश छुपा नहीं पा रहे। जानकार कह रहे। साल 2016 में हुई नोटबंदी ने बसपा को करारा झटका दिया। जिससे वह आज तक नहीं उभर पाई। अबकी बारी सपा की। अखिलेश चारों तरह से भंवर में फंसे हुए नजर आ रहे। आखिर सच क्या? किसी को पता नहीं। लेकिन परसेप्शन की लड़ाई में पिछड़ते दिखाई दे रहे।    -दिल्ली डेस्क</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Jan 2022 12:38:16 +0530</pubDate>
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                <title>जानें इंडिया गेट में क्या है खास</title>
                                    <description><![CDATA[सतरंगी सियासत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%B8/article-3563"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/qutub-minar,delhi,india2.jpg" alt=""></a><br /><p>पंजाब में हौचपोच!<br /> चुनावी राज्य पंजाब में राजनीतिक ही नहीं। कानून व्यवस्था को लेकर भी चिंता में डालने वाले हालात बन रहे। अचानक बेअदबी की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं सामने आ रहीं। वहीं, कोर्ट में हुए बम विस्फोट ने आम जनता को आशंकित कर दिया। ज्यों-ज्यों चुनावी माहौल बन रहा। सामाजिक तानेबाने को कसैला करने की कोशिशें हो रहीं। कहां तो सत्ताधारी कांग्रेस, आप और अकाली दल-बसपा गठबंधन पर बात हो रही थी। लेकिन अब भाजपा के पूर्व सीएम अमरिन्दर सिंह के साथ हुए गठबंधन ने भी दिलचस्पी बढ़ा दी। इससे पहले, अकाली दल और भाजपा का गठबंधन टूटा। तो नए समीकरण बनते दिखाई दिए। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन खत्म हुआ। तो करीब दो दर्जन किसान संगठनों ने नया दल बनाकर विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। इससे आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। नेता, कार्यकर्ता, दलों के लिए पूरे पांच साल में चुनावी मौका आता। हर कोई कमर कस रहा। तिस पर ओमिक्रॉन का प्रभाव बढ़ रहा। मतलब, कुल मिलाकर हौचपोच जैसे हालात बन रहे।  </p>
<p><br /> योगी.. उपयोगी, अनुपयोगी!<br /> पीएम मोदी यूपी चुनाव के बरक्स ताबड़तोड़ दौरे कर रहे। साथ में कई परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास का दौर भी। हालांकि ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों को देखते हुए कोर्ट का सिमित रैलियों का आग्रह। मतलब चुनावी अभियान को झटका। इसी बीच, पीएम मोदी ने कह दिया। योगी यूपी के लिए उपयोगी। तो, सपा ने तुरंत उन्हें अनुपयोगी बता दिया। अखिलेश विपक्षी नेता। सो, इसमें कोई आश्चर्य भी नहीं। लेकिन पीएम की बात से स्पष्ट। भाजपा की पूरी चुनावी बिसात में योगी ही केन्द्र में रहेंगे। आखिर वह पांच सीएम भी तो रहे। हां, इतना जरुर। सपा नेता के करीबियों पर छापे की कार्रवाई। बड़ी मात्रा में नकदी एवं संदिग्ध कागजात मिलने की खबरें। यानी चुनाव से पहले ही सपा की रसद पर सीधा एक्शन। ऐसे में अखिलेश की चुनावी तैयारियां प्रभावित होंगी। इसीलिए ईडी और सीबीआई आने की बात कही। लेकिन योगी यूपी के लिए ही नहीं। भाजपा के लिए भी उपयोगी! आखिर मोदी को 2024 के आम चुनाव में भी जाना है।</p>
<p><br /> अल्पमत... बहुमत...<br /> संसद के शीतकालीन सत्र में सत्तापक्ष ने विपक्ष, खासतौर से कांग्रेस को राज्यसभा में खूब छकाया। पहले ही दिन 12 सांसदों के निलंबन को विपक्ष एक-दो दिन तक तो समझ ही नहीं पाया। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह बात सत्र के अंतिम दिन स्वीकारी। खड़गे का आरोप। सरकार महत्वपूर्ण विषयों से चर्चा, बहस से भाग गई। सांसदों को निलंबित कर सदन में अल्पमत को बहुमत में बदला। इधर, सरकार ने दावा, वह तैयार थी। लेकिन सवाल माफी का। सरकार निलंबित सांसदों की माफी पर अड़ी रही। तो विपक्ष बिना शर्त निलंबन वापसी पर। नेता सदन पीयूष गोयल ने पांच दलों की बैठक भी बुलाई। लेकिन ‘माफी’ मानो नाक का सवाल बन गई। इसीलिए पूरा सत्र हंगामें में निकल गया। सरकार ने चुनाव सुधार समेत कई महत्वपूर्ण बिल बिना चर्चा के पारित करवा लिए। यह कांग्रेस का दर्द। मतलब सरकार ने विपक्ष को उलझाए भी रखा और सदन में अपना काम भी करवा लिया। फिर विपक्ष को मिला क्या? हां, राहुल गांधी सड़क पर उतरे।</p>
<p><br /> इंतजार यूपी का!<br /> राजस्थान की राजनीति भविष्य में कैसी होगी। यूपी चुनाव तक इसका इंतजार। असल में, भाजपा और कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व यूपी चुनाव निपट जाने का इंतजार कर रहा। कांग्रेस में जहां अभी बदलाव पूरी तरह से आकार नहीं ले सका। खुद सीएम गहलोत इशारा कर चुके। वह 2022 के मध्य में एक और मंत्रिमंडल विस्तार करेंगे। मतलब नॉन परफारर्मर मंत्री बाहर होंगे! कांगे्रस में सचिन पायलट की भूमिका भी तय होना बाकी। इसी प्रकार, भाजपा 2023 के विधानसभा चुनाव वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष की अगुवाई में उतरेगी या बदलाव होगा। इसके कयास और चर्चे भी शुरू हो गए। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे मैदान में उतरकर थोड़ा पीछे हटीं हैं। चर्चा यह कि उनके समर्थकों को भी यूपी परिणाम में भाजपा की परफारमेंस का इंतजार। अमित शाह कह चुके। अगला चुनाव भाजपा कमल के निशान और मोदी के चेहरे पर लड़ेगी। मतलब सीएम का चुनाव परिणाम के बाद होगा। जबकि राजे की कोशिश। चुनाव से पहले चेहरा घोषित हो। मतलब चुनाव यूपी में और इंतजार राजस्थान में।</p>
<p><br /> उलटबांसी!<br /> जम्मू-कश्मीर में परिसीमन आयोग का काम तेजी से चल रहा। जिस पारदर्शिता और वैज्ञानिक तरीके से विधानसभा सीटों का पुनर्गठन का प्रस्ताव। उससे लग रहा कि उलटबांसी होने वाली। महबूबा मुफ्ती के बयानों की भाषा से दिख रहा। जम्मू में छह और घाटी में एक सीट बढ़ाने का प्रस्ताव। मतलब अब अंतर महज चार सीट का रहेगा। घाटी एवं जम्मू क्षेत्र के गांवों को एक दूसरे की सीटों में जोड़े जाने का प्रस्ताव भी। मतलब पीडीपी और एनसी का सारा समीकरण गड़बड़ाने वाला। इतना ही नहीं। मुख्य धारा से बाहर तक होने की आशंका बन रही। इसीलिए दिल्ली में परिसीमन आयोग की बैठक में फारुख अब्दुल्ला मौजूद रहे। उन्होंने पंचायत समिति चुनाव का बहिष्कार करके खामियाजा भुगत लिया। फिर मजबूरी में गुपकार अलायंस के साथ डीडीसी के चुनाव में आना पड़ा। फिर यह तो विधानसभा चुनाव। जोखिम नहीं ले सकते। नए समीकरणों में एनसी और पीडीपी का छोड़ो। छोटे दल चुनाव बाद किधर रुख करेंगे। यह आंकड़ों पर निर्भर। डीडीसी चुनाव में ऐसा हो चुका।</p>
<p><br /> फोकस सहकारिता पर!<br /> केन्द्र सरकार में एक नया सहकारिता मंत्रालय बन चुका। उसका ढांचा धीरे-धीरे आकार ले रहा। मंत्रालय का जिम्मा भी अमित शाह को। मतलब इस क्षेत्र को लेकर पीएम मोदी काफी गंभीर। जब शाह कमान संभालें। तो समझ लें। वह होगा, जो अब तक नहीं हुआ। सो, सहकारिता मंत्रालय में ऐसा ही कुछ होने जा रहा। इस क्षेत्र में अभी तक आरक्षण का प्रावधान नहीं रहा। अब तकनीक का इस्तेमाल भी भरपूर होगा। मतलब कामकाज में पारदर्शिता लाने की कोशिश। इसके लिए आईआईई जैसे संस्थानों की मदद ली जा रही। आखिर करीब आठ लाख सहकारी समितियां देशभर में सक्रिय। करीब 40 करोड़ किसान इनसे जुड़े हुए। ग्रामीण क्षेत्र और उसकी अर्थव्यवस्था इसकी जद में। जीडीपी में भी इसका ठीकठाक योगदान। इतने महत्वपूर्ण क्षेत्र को भाजपा कैसे छोड़ देगी? वैसे भी भाजपा का विश्व की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा। लेकिन गांव छूट जाएं। तो सर्वस्पर्शी, समग्रता और व्यापकता वाला भाव नहीं आएगा। वैसे, मराठा क्षत्रप शरद पवार सरकार के कदमों से सबसे ज्यादा परेशान।<br /> <strong>-श्रीनाथ मेहरा<br /> (ये लेखक के अपने विचार हैं) </strong></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 27 Dec 2021 12:59:13 +0530</pubDate>
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                <title>रेलवे ने बंद कर दिया फाटक, जनता परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[कलेक्टर के आदेश का दिया हवाला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/618cc54ba5878/article-2261"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/railway-fatak.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कलेक्टर के आदेश के बाद रेलवे की ओर से खातीपुरा फाटक को स्थाई रूप से बंद कर दिया। इसके चलते हजारों लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे की ओर से अब यहां पर अंडरपास बनाया जाएगा, जिसका अगले साल से कार्य शुरू होगा। रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशि किरण के अनुसार खातीपुरा स्टेशन के पास आरओबी का निर्माण कराया गया है। रेलवे ने जिला कलेक्टर के आदेश के बाद फाटक को बंद किया है। इसके चलते यहां आसपास की कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने अंडरपास बनाने के बाद इस फाटक को बंद करने की मांग की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 11 Nov 2021 13:29:02 +0530</pubDate>
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