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                <title>season - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>घरेलू गैस सिलेंडर की किल्लत से उपभोक्ता परेशान, शादी के सीजन में हो रही कालाबाजारी</title>
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                        <![CDATA[ मजदूर वर्ग और गृहिणियां जरूरी कार्य छोड़कर बार-बार एजेंसी के चक्कर काटने को मजबूर हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/consumers-troubled-by-shortage-of-domestic-gas-cylinders--black-marketing-rampant-during-wedding-season/article-131811"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/ews-(2)17.png" alt=""></a><br /><p>रामगंजमंडी। रामगंजमंडी क्षेत्र में इन दिनों गैस एजेंसी से जुड़े उपभोक्ता घरेलू गैस सिलेंडर नहीं मिलने से बेहद परेशान हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि सिलेंडर प्राप्त करने के लिए उन्हें कई-कई बार एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ते हैं। जानकारी के अनुसार खैराबाद, मोड़क जैसे आसपास के गांवों से भी लोग सिलेंडर लेने के लिए रामगंजमंडी आते हैं। लेकिन कई बार उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। इससे आमजन में भारी नाराजगी देखी जा रही है। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि एजेंसी में कर्मचारियों द्वारा स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती। कभी कहा जाता है कि गाड़ी नहीं आई, तो कभी सप्लाई रुकी है, कहकर उपभोक्ताओं को टाल दिया जाता है। मजदूर वर्ग और गृहिणियां अपने जरूरी कार्य छोड़कर बार-बार एजेंसी के चक्कर काटने को मजबूर हैं।</p>
<p><strong>व्यावसायिक उपयोग के आरोप: </strong> स्थानीय नागरिकों ने एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि शादी समारोहों के चलते इन दिनों सिलेंडरों की कालाबाजारी बढ़ गई है। कई होटलों, ढाबों, रेस्टोरेंटों और चाय की थड़ियों पर घरेलू गैस सिलेंडरों का खुलेआम उपयोग किया जा रहा है। वहीं जानकारों का कहना है कि कानून के अनुसार घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग केवल घरेलू रसोई कार्यों के लिए ही किया जा सकता है। किसी भी व्यावसायिक स्थान पर इसका उपयोग पाए जाने पर एजेंसी का कनेक्शन रद्द किया जा सकता है तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई संभव है। </p>
<p><strong>लोगों ने की सख्त निगरानी की मांग </strong><br />स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब आम परिवारों को एक सिलेंडर के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है, तो होटलों और दुकानों को सिलेंडर इतनी आसानी से कैसे मिल रहे हैं? जनता की मांग है कि प्रशासन गैस एजेंसी की कार्यप्रणाली की नियमित निगरानी करे और जरूरतमंद घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता के साथ सिलेंडर उपलब्ध कराए।</p>
<p>रामगंजमंडी क्षेत्र के लिए प्रतिदिन 500 से 600 घरेलू सिलेंडर भेजे जा रहे हैं। कभी-कभी छुट्टी या ट्रक विलंब के कारण कमी हो जाती है। लेकिन स्थिति सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। यदि कोई व्यक्ति घरेलू सिलेंडर का व्यावसायिक उपयोग कर रहा है, तो यह नियम विरुद्ध है और ऐसे मामलों में कार्रवाई की जानी चाहिए।<br /><strong>-चेतन गोयल, प्रबंधक, गैस एजेंसी </strong></p>
<p>गैस एजेंसी रामगंजमंडी की सप्लाई व्यवस्था की जांच करवाई जाएगी। साथ ही घरेलू गैस का व्यावसायिक उपयोग करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे।<br /><strong>-चारु वर्मा, उपखंड अधिकारी, रामगंजमंडी </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Nov 2025 16:55:54 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा में पड़ेगी भारी सर्दी, पहाड़ों में बर्फबारी व उत्तरी हवाओं का रह सकता है प्रकोप</title>
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                        <![CDATA[आने वाले समय में भी यदि अधिकतम तापमान में कमी हुई तो सर्दी अधिक पड़ेगी। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-will-experience-severe-cold--with-snowfall-in-the-mountains-and-possible-northern-winds/article-130950"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(1)31.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । मानसून का सीजन समाप्त होने के बाद अब सर्दी आने वाली है। कोटा शहर समेत संभाग में इस बार सामान्य से अधिक सर्दी पड़ने की संभावना है। सर्दी का असर पहाड़ों में होने वाली बर्फबारी व उत्तरी हवाओं के कारण अधिक रहेगा। जबकि वर्तमान में हुई बरसात का दीर्घकालिक सर्दी पर असर नहीं पड़ेगा। प्रदेश के अधिकतर जिलों के साथ ही कोटा शहर व संभाग के अन्य जिलों में इस बार पिछले सालों की तुलना  में जहां गर्मी सामान्य से अधिक पड़ी। वहीं मानसून भी समय से पहले ही आ गया था। जून के दूसरे सप्ताह में आए मानसून की जोरदार बरसात पूरे सीजन में हुई। जिसके परिणाम स्वरूप कोटा में इस बार औसत से काफी अधिक बरसात हुई। उसे देखते हुए इस बार सर्दी का सीजन भले ही देर से शुरु हो रहा है लेकिन अचानक से तेज सर्दी शुरु होगी। जिसका असर आने वाले सर्दी के सीजन में तीन माह नवम्बर से जनवरी  तक रहेगा। </p>
<p><strong>भूजल स्तर बढ़ने से खत्म हुई उमस</strong><br />इस बार मानसून के सीजन में कोटा में औसत से अधिक बरसात होने व लगातार रिमझिम बरसात का दौर चला। जिससे नदी तालाब व बांध पूरी क्षमता से भर गए। वहीं भूजल स्तर भी बढ़ गया। ऐसे  में जमीन की नमी व उमस खत्म हो गई। जिससे आने वाले समय में ठंडी हवा चलने से मौसम में सर्दी का असर अधिक रहने की संभावना है। </p>
<p><strong>बर्फबारी पर निर्भर करेगी सर्दी</strong><br />मौसम विभाग जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि कोटा समेत प्रदेश में जिस तरह से गर्मी व बरसात का सीजन अच्छा बीता है। उसे देखते हुए अनुमान है कि आने वाला सर्दी का सीजन भी अच्छा ही होगा यानि इस बार सर्दी भी सामान्य से अधिक पड़ सकती है। लेकिन सर्दी का असर पहाड़ों पर होने वाली बर्फबारी व  उत्तरी हवाओं  पर निर्भर करेगा। यदि पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी होती है तो वहां से उठने वाली हवाओं का असर राज्य  पर भी पड़ेगा। यदि बर्फबारी जल्दी हो गई तो सर्दी तेज होगी।  उन्होंने बताया कि वर्तमान में जो पश्चिमी विक्षोभ के असर से बरसात हुई है उसका आने वाले सर्दी के सीजन पर उतना अधिक असर नहीं पड़ेगा। इस बरसात  व बादलों के कारण सर्दी का असर कुछ दिन तो रह सकता है लेकिन इसका दीर्घकालिक असर नहीं रहेगा। अधिकतम तापमान में कमी होने पर सर्दी अधिक होने की संभावना रहती है। जबकि न्यूनतम तापमान कम होने पर भी सर्दी का उतना असर नहीं पड़ता है।  शर्मा ने बताया कि वर्तमान में कोटा में मौसम में हुए बदलाव के चलते अधिकतम तापमान सामान्य से कम बना हुआ है। जिससे सर्दी का असर बढ़ा है। आने वाले समय में भी यदि अधिकतम तापमान में कमी हुई तो सर्दी अधिक पड़ेगी। लेकिन इसका सही आंकलन आगामी 4 से 5 दिन बाद ही लगाया जा सकता है।  </p>
<p><strong>दो दिन की बरसात ने बढ़ाई सर्दी</strong><br />कोटा शहर में तीन दिन पहले तक मौसम में गर्माहट बनी हुई थी। लेकिन जैसे ही पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ और 48 घंटे से अधिक समय तक लगातार बरसात हुई। साथ ही ठंडी हवा चली। उससे मौसम में अचानक से बदलाव हो गया। अधिकतम तापमान में दो दिन में 10 डिग्री की कमी हो गई। साथ ही न्यूनतम तापमान में भी कुछ कमी हुई है। जिससे अचानक से सर्दी बढ़ गई। रात के समय ही नहीं दिन में भी कूलर व पंखे बंद हो गए। अधिकतर लोगों ने गर्म कपड़े निकाल लिए। घर से बाहर निकलते ही लोग ठिठुरने लगे। इस ठंडक का असर आने वाले सर्दी के मौसम पर भी नजर आएगा। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 30 Oct 2025 16:04:03 +0530</pubDate>
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                <title>स्वदेशी से सजा कोटा का बाजार : दीपावली पर रहेगी मेक इन इंडिया की चमक, मिट्टी के दीयों की बढ़ी मांग</title>
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                        <![CDATA[स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती मांग से स्थानीय  कारीगरों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-s-markets-are-adorned-with-indigenous-products--the-make-in-india-glow-will-shine-this-diwali--with-increased-demand-for-earthen-lamps/article-129004"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(2)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। त्योहारों के इस मौसम में जब बाजार विदेशी वस्तुओं से भरे पड़े हैं, तब कोटा में स्वदेशी उत्पादों की मांग ने नई दिशा दिखाई है। मेक इन इंडिया की भावना को आगे बढ़ाते हुए शहर के बाजारों में देसी वस्तुएं ग्राहकों की पहली पसंद बन चुकी हैं। दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर स्वदेशी दीयों, देशी लाइटों और हस्तनिर्मित सजावट सामग्री के साथ कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स तक में स्वदेशी को लोग   प्राथमिकता में रख रहे हैं। लोगों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि देश में निर्मित वस्तुओं को अपनाने से स्थानीय उद्योगों को बल मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इस दीपावली पर कोटा के बाजारों में विदेशी नहीं, स्वदेशी दीयों व लाइट की रोशनी ज्यादा चमकेगी।</p>
<p><strong>मिट्टी के दीयों की चमक बरकरार</strong><br />कोटा के कुम्हारों के मोहल्ले में दीपावली से पहले मिट्टी के दीये बनाने का काम जोरों पर है। धनराज प्रजापत, जो पिछले 35 वर्षों से यह काम कर रहे हैं, बताते हैं कि हर दिन 500 से 1000 दीये बिक जाते हैं। ग्राहकों में दीयों के प्रति उत्साह इतना है कि बूंदी और नेमवा से कच्चा माल मंगवाना पड़ रहा है। छोटे-बड़े हर आकार के दीये तैयार कर रहे हैं। साथ ही करवा, कलश और मटकियों की बिक्री भी बढ़ी है।</p>
<p><strong>स्वदेशी उत्पादों से लोगों को मिल रोजगार</strong><br /> स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती मांग से स्थानीय उद्योगों और कारीगरों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। मिट्टी के दीये हो या हस्तनिर्मित तोरण और जैविक रंग—शहर के बाजारों में देसी उत्पादों की चमक बढ़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी की स्वदेशी अपनाओ मुहिम से प्रेरित होकर लोग अब देश में बने उत्पादों को अपनाने में गर्व महसूस कर रहे हैं।<br /><strong>-अशोक माहेश्वरी, व्यापार महासंघ </strong></p>
<p><strong>इलेक्ट्रॉनिक बाजारों में स्वदेशी उत्पादों का बोलबाला</strong><br />कोटा के इलेक्ट्रॉनिक बाजारों में इन दिनों दीपावली की रौनक देखते ही बनती है। दुकानदारों के अनुसार ग्राहक अब मेड इन इंडिया टैग वाले उत्पाद ही मांग रहे हैं। हमारे पास देसी और विदेशी दोनों तरह की लाइटें हैं, लेकिन ग्राहक अब स्वदेशी लाइटों को प्राथमिकता देते हैं। अहमदाबाद और इंदौर से मंगवाई गईं देसी लाइटें टिकाऊ और मरम्मत योग्य हैं, इसलिए लोग इन्हें पसंद कर रहे हैं।<br /><strong>-अभिषेक सोनी, इलेक्ट्रॉनिक व्यापारी</strong></p>
<p><strong>पानी वाले दीयों की मांग बढ़ी</strong><br />इस बार पानी वाले दीये, थ्री चीप सीरिज, 8 एमएम सीरिज और मल्टी रोप लाइटों की भारी मांग है। ग्राहक दस गुणा दस झरना और डिस्को बल्ब जैसे आकर्षक मॉडल भी खरीद रहे हैं। बाजारों में दीपावली को लेकर लोगों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। <br /><strong>-घनश्याम आहुजा, व्यापारी</strong></p>
<p><strong>ग्राहकी हुई दोगुनी</strong><br />कुन्हाड़ी रोड की 60 वर्षीय शायरादेवी बताती हैं कि दीपावली और करवा चौथ पर उनकी ग्राहकी दोगुनी हो गई है। बूंदी से तैयार माल मंगवाकर बेच रहे हैं। शाम को ग्राहकों की भीड़ रहती है। करवा की बिक्री भी जोर पर है। यह काम हमारी पुश्तैनी परंपरा का हिस्सा है।</p>
<p><strong>स्वदेशी लाइटों की डिमांड बढी</strong><br />शहर में दीपावली पर्व को लेकर मेक इन इंडिया के उत्पादों को क्रेज बढ़ रहा है। बाजार में इन दिनों चीनी उत्पाद भी मौजूद है जो काफी सस्ता है लेकिन आने वाले ग्राहक अधिकतर स्वदेशी उत्पाद को ही पसंद कर रहे है। पानी वाला दीया जो पानी से चलता है लोग काफी पसंद कर रहे है। वहीं मल्टी रोप लाइट को भी पसंद कर रहे है।<br /><strong>-मुकेश आहुजा, कोटा</strong></p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 16:07:19 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा उत्तर वार्ड नं. 13- राजपूत कॉलोनी में आता है नाले का गंदा पानी</title>
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                        <![CDATA[नाले की गंदगी, दूषित पानी और उपेक्षित सुविधाएं]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-no--13--dirty-drain-water-enters-rajput-colony/article-125569"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/1ne1ws-(630-x-400-px)-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के वार्ड नं. 13 की स्थिति इन दिनों बेहद दयनीय है। वार्डवासियों का कहना है कि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान की ओर जिम्मेदारों का कोई ध्यान नहीं है। राजपूत कॉलोनी के पास से गुजरने वाले नाले में वर्षों से कचरे का ढेर जमा है। सफाई के लिए की गई शिकायतों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। बरसात के दिनों में यही गंदा पानी कॉलोनीवासियों के घरों में घुस जाता है, जिससे लोगों का जीना दूभर हो जाता है। इसी वार्ड के कंसुआ अफोर्डेबल योजना में रहवासी स्वच्छ पेयजल के लिए तरस रहे हैं। रहवासियों का कहना है कि पानी की टंकी तो बना दी गई, लेकिन उसकी सफाई नहीं होने से गंदा व बदबूदार पानी आता है, जो पीने योग्य नहीं है। मजबूरीवश लोगों को बाहर से पानी भर कर लाना पड़ रहा है। वार्ड का सामुदायिक भवन भी बदहाल है और स्थानीय लोगों के अनुसार वह अब नशेड़ियों का अड्डा बन चुका है। चारों ओर फैली गंदगी और सुविधाओं की कमी से वार्डवासियों में गहरी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि वार्ड का कोई धणीधोरी नहीं है, सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा है।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />मल्टी मैटल, नागपाल बस्ती, राजपूत कॉलोनी का सम्पूर्ण भाग, झीरी के हनुमान मन्दिर का क्षेत्र, आजाद बस्ती कन्सुवां अफोर्डेबल, चन्द्रशेखर अफोर्डेबल, गत्ता फैक्ट्री रोड़ के आमने सामने का क्षेत्र शामिल है।</p>
<p><strong>कंसुआ अफोर्डेबल में मूलभूत सुविधाओं का अभाव</strong><br />कंसुआ अफोर्डेबल में रहवासी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। स्थानीय निवासी रश्मि सहित अन्य लोगों का कहना है कि पानी की टंकी की सफाई लंबे समय से नहीं होने के कारण घरों में गंदा और मटमैला पानी आ रहा है, जो पीने योग्य नहीं है। मजबूरन लोगों को बाहर से पानी भर कर लाना पड़ रहा है। इसके अलावा कॉलोनी में बने सामुदायिक भवन की हालत भी खराब है। भवन अब नशेड़ियों का अड्डा बन चुका है, जिससे महिलाओं और बच्चों को असुरक्षा का माहौल महसूस होता है। रहवासियों ने समस्या का समाधान शीघ्र कराने की मांग की है।</p>
<p><strong>राजपूत कॉलोनी में नाले का पानी, बढ़ी परेशानी</strong><br />वार्ड में स्थित राजपूत कॉलोनी के रहवासी लंबे समय से नाले की समस्या से जूझ रहे हैं। कॉलोनी से सटा नाला सालों से साफ नहीं होने के कारण कचरे से जाम हो चुका है। बारिश के समय नाले का गंदा पानी उफनकर कॉलोनी की गलियों और घरों में भर जाता है, जिससे लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। वार्डवासी दीपू बना ने बताया कि नाले की सफाई नहीं होने से स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। कई बार उच्च अधिकारियों को इस समस्या से अवगत करवाने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वार्ड पार्षद मंजू अग्रवाल ने बताया कि नाले की समस्या को दूर करने के लिए संबंधित विभाग को अवगत करवाया गया है। वहीं वार्ड के सामुदायिक भवन की स्थिति को भी शीघ्र ही सुधार दिया जाएगा।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Sep 2025 16:26:56 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा उत्तर वार्ड 4 - सुभाष सर्किल पर नहीं है कार पार्किंग सड़कें हो जाती है जाम</title>
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                        <![CDATA[बारिश के दिनों में नालियां ओवरफ्लो हो जाती है तथा पानी सड़कों पर फैल जाता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-4---there-is-no-car-parking-at-subhash-circle--roads-get-jammed/article-125224"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(6)37.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के कोटा उत्तर वार्ड 4 में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। वार्ड की अधिकांश कॉलोनियां संकरी होने की वजह से जाम की स्थिति बनी रहती है। वहीं पाटनपोल  की मुख्य बाजार सड़क पर शाम के  समय जाम रहता है। पाटनपोल स्थित मनसापूर्ण मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वार्ड में सुभाष सर्कल पर सड़क के दोनों तरफ रोड लाइट की सुचारू रूप से व्यवस्था नहीं है। वहां पर रात के समय में राहगीरों व वाहनचालकों के लिए परेशानी की सबब बनी हुई है। यहां रात्रि में वाहनचालकों के पीछे कुते भी दौड़ते रहते है, इसके चलते कई जनें घायल भी हो चुके है।  स्थानीय निवासी सलीम अंसारी का कहना है कि सुभाष सर्किल बाजारी क्षेत्र होने के कारण पार्किंग की बड़ी समस्या बनी हुई है। यहां आने वाली कारों के लिए पार्किंग नहीं होने से कही भी वाहन चालक वाहन लगा देते हैं जिसके चलते आवाजाही के साथ मुख्य सड़क पर जाम की स्थिति भी बन जाती है। वार्ड की अधिकांश नालियों में निकासी व्यवस्था सही नहीं है। बारिश के दिनों में नालियां ओवरफ्लो हो जाती है तथा पानी सड़कों पर फैल जाता है।</p>
<p><strong>वार्ड में नहीं है पार्क व सामुदायिक भवन</strong><br />स्थानीय निवासी सलीम अंसारी ने बताया कि इस वार्ड में ना तो पार्क की व्यवस्था है और ना ही सामुदायिक भवन बना हुआ है। बच्चों को शरीरिक एक्टिवीटी के लिए अन्यत्र जाना पड़ता है। वहीं सीनियर सिटीजन को भी घूमने में दिक्कत आती है। वार्ड के रहवासियों के लिए सामाजिक व धार्मिक आयोजनों के लिए सामुदायिक भवन भी बना हुआ नहीं है। छोटे-मोटे कार्यक्रमों के लिए भी होटलों का सहारा लेना पड़ता है। </p>
<p><strong>सड़कें सीसी लेकिन डिवाइडर बहुत ऊंचे</strong><br />वार्ड में सड़के तो सीसी बनी हुई है लेकिन यहां डिवाइडर भी बहुत ऊंचे बने है। सुभाष सर्किल की ओर जाने वाले मार्ग पर डिवाइडर काफी ऊंचा बना हुआ है। इससे वहां से गुजरने वाले चौपहिया व दुपहिया वाहनों को काफी परेशानी होती है। बरसात के दिनों में डिवाइडर के दोनों तरफ जलभराव की स्थिति बन जाती है।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया </strong><br />गंधी जी की पूल, लक्ष्मी होटल, भैरू गुदडी, चित्तौड़ों का स्कूल, होनी का खूट, ज्ञानचन्द सोनी जी का मकान, गजेश्वर महादेव, टिप्पन की चौकी, बम्बूलिया चौक, रण्डी पाडा, लुहारों का मन्दिर का क्षेत्र शामिल है।</p>
<p><strong>वार्ड की मुख्य सड़कों परनहीं जलती रोड लाइटें</strong><br />वार्ड का क्षेत्र बाजारी होने के कारण 24 घंटे आवाजाही बनी रहती है इसके लिए सड़क के दोनों और रोड लाइटें जरूरी है। रात्रि के समय अंधेरे में काफी परेशानी होती है। वहीं वाहन चालकों के पीछे कुते भी भागते रहते हैं। मुख्य सड़कों पर अंधेरा की वजह से हादसों की संभावना बनी रहती है।<br /><strong>- सलीम अंसारी, वार्डवासी</strong></p>
<p><strong>हमारी कॉलोनी में आते है पार्षद</strong><br />वार्ड में स्थित किशोर सोमानी का कहना है कि वार्ड में पार्षद आते है तथा समस्याओं का निवारण भी करते है। वहीं गलियां संकरी होने की वजह से जाम की समस्या अब आम हो गई है।</p>
<p><strong>हमारी कॉलोनी में नहीं आते पार्षद</strong><br /> वार्ड में निवास करने वाले 65 वर्षीय मोहम्मद यासीन ने बताया कि हमारी कॉलोनी में पार्षद नहीं आते हैं। हमारी कॉलोनी में नालियों में पानी की निकासी व्यवस्था सही नहीं है। नालियां कई जगह ढकी हुई तथा कहीं जगह खुली होने से कचरा आ जाता है जिससे नालियां अवरूद्ध हो जाती है।  पाटनपोल की मुख्य सड़क बाजारी क्षेत्र है यहां आए दिन जाम की स्थिति रहती है। त्योहार के दिनों में लंबा जाम भी लग जाता है। यहां आने वाले श्रद्धलुओं को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />पार्किंग की समस्या तो काभी सालों से बनी हुई है, रोड़ लाइटे लगाने का काम चल रहा है। समय समय पर वार्ड में सफाई करवाई जाती है। <br /><strong>- अजय कुमार सुमन, वार्ड पार्षद </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Aug 2025 14:03:28 +0530</pubDate>
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                <title>बिल्डिंग जर्जर, डर के साये में बच्चों की पढ़ाई</title>
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                        <![CDATA[स्कूल आने वाले विद्यार्थी डर के साये  में इनके नीचे से ही गुजरते  है जिसे हादसा होने का अंदेशा बना रहता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-building-is-dilapidated--children-study-in-the-shadow-of-fear/article-119527"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/rt112roer-(3)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के कुन्हाड़ी के नांता में संचालित राजकीय उच्च माध्यमिक विघालय नांता महल के स्कूल भवन को शिक्षा भवन ने जर्जर घोषित कर रखा है साथ ही भवन भी जर्जर अवस्था में पिछले साल ही इसमें राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विघालय इसमें नांता महल में मर्ज जिसे सत्र 2025 -26 में करीब इसमें 600 विद्यार्थी अध्ययन करते है। किंतु अभी तक विद्यालय में करीब 15 बच्चों का एडमिशन हुआ साथ ही बच्चें एडमिशन के लिए आ रहे है। साथ ही हमारे विद्यालय के  अध्यापक स्कूल में एडमिशन बढ़ाने के लिए घर-घर जाकर बच्चों को मोटिवेट कर रहे है। </p>
<p><strong>विघालय की बिल्डिंग जगह-जगह से जर्जर</strong><br />विघालय की बिल्डिंग जगह - जगह से जर्जर हो चुकी नांता में रहने वाले कुछ अभिभावकों ने बताया कि यहां इमारत करीब सौ से ढाई सौ साल पुरानी है। जिसे जगह इमारत के छज्जे बंदरों के कूदने व बारिश के समय बिजली कड़कने से क्षतिग्रस्त हो चुके है। वहीं करीब स्कूल आने वाले विद्यार्थी डर के साये  में इनके नीचे से ही गुजरते  है जिसे हादसा होने का अंदेशा बना रहता है।</p>
<p><strong>बारिश से दीवारों में सीलन </strong><br />बारिश होने से अभी विद्यालय की बिल्डिंग के कक्षा-कक्ष में जगह -जगह से सीलन आ रही है जिसे बदबू आ रही है। </p>
<p><strong>जगह-जगह उगी झाड़ियां </strong><br />बिल्डिंग परिसर में जगह - जगह पर झाड़िया उगी हुई है जिसे बारिश के मौसम विद्यार्थियों को  जहरीले जंतु के कटने का डर रहता है। साथ ही कई बार जहरीले जंतु विद्यालय की बिल्डिंग में आ जाते है जिसे भय का माहौल बना रहता है। </p>
<p><strong>टूटे छज्जों को टीनशेड से करेंगे सुरक्षित</strong><br />प्रधानाचार्य ने बताया कि जहां पर छज्जे टूटे हुए उनके नीचे चद्दर के टीनशेड लगाएं जाएं जिसे कभी छज्जा टूटता भी है तो वहां टीनशेड़ के ऊपर आकर गिरेगा जिसे कोई दुर्घटना नहीं हो सकेगी। साथ ही टूटे छज्जों के स्थान पर विद्यार्थियों को जाने से रूकने के लिए उनके नीचे रस्सी बांध दी गई साथ ही बावडी में पानी भरा होने से उसके आसपास भी तार की जालियां लगा दी गई है। </p>
<p><strong>सीसीटीवी लगाए हुए</strong><br />प्रधानाचार्य नेबताया कि पहले विद्यालय में पीछेकी तरह से दीवार टूटी होने के कारण आएं दिन चोरियां होती थी जिसे कई बार विद्यालय का सामान भी चोरी हो गया। जिसे बचाने के लिए विद्यालय स्टॉफ  के सहयोग से चार कैमरे लगाए है। </p>
<p><strong>विघालय में आर्ट्स संकाय संचालित </strong><br />विद्यालय में अभी केवल आर्टस संकाय चलता है जिसमें जिसमें राजनीति विज्ञान, भूगोल, हिंदी साहित्य संचालित हो रहा है। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />भवन तो जर्जर पर बारिश के समय बच्चो को सुरक्षित स्थान पर ही बैठाया जाता है। और छज्जों के नीचे हमनें बेरिकेड्स लगा रखा है। ताकि कोई घटना नहीं हो। <br /><strong>- डॉ. मोहम्मद शरीफ, प्रधानाचार्य </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Jul 2025 16:01:23 +0530</pubDate>
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                <title>फरवरी तपाने लगी, फिर भी सामान्य ही रहेगा गर्मी और बरसात का मौसम</title>
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                        <![CDATA[अधिक तापमान रबी की फसल के लिए नुकसान दायक। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/february-started-getting-hot--still-summer-and-rainy-season-will-remain-normal/article-104580"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/6546.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। फरवरी का आधा महीना बीतने के साथ ही गर्मी ने भी अपना रंग दिखाना शुरु कर दिया है। इस बार सर्दी के मौसम में पश्चिमी विक्षोभ का असर कम होने से तापमान अधिक बढ़ रहा है। जिससे  गर्मी की शुरुआत सामान्य से जल्दी आने  के संकेत है। लेकिन इस बढ़ते तापमान से आने वाली गर्मी और बरसात के मौसम पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। दोनों मौसम के सामान्य रहने की संभावना है। कोटा में शनिवार को अधिकतम तापमान में 2 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है। जिससे दिन का पारा 32 डिग्री के पार पहुंच  गया। गर्मी का यह तेवर अभी जारी रहेगा। अधिक तापमान आने वाली रबी की फसल के लिए नुकसान दायक है। वर्तमान में सामान्य से 4 से 5 डिग्री तापमान अधिक है।  मौसम विभाग जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि इस बार सर्दी के सीजन में पश्चिमी   विक्षोभ का असर कम रहा और पहाड़ों पर बर्फबारी कम होने से ड्राई कंडीशन बनी हुई है। जिससे कोटा समेत प्रदेश के अधिकतर जिलों में तापमान अधिक हो रहा है। तापमान बढ़ने का क्रम अभी जारी रहेगा। वैसे फरवरी में जिस तरह से गर्मी पड़ रही है। उस हिसाब से यह सामान्य से 4 से 5 डिग्री तापमान अधिक है। शर्मा ने बताया कि तापमान बढ़ना रबी की फसल के लिए नुकसान दायक है। लेकिन इस बढ़ते तापमान का आने वाले गर्मी और बरसात के मौसम पर फिलहाल कोई विपरीत प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। दोनों  मौसम के सामान्य रहने की संभावना है। </p>
<p><strong>चलने लगे पंखे</strong><br />गर्मी का असर शुरु होने के साथ ही अब पंखे चलने लगे हैं। ये दिन के समय तो चल ही रहे हैं। अधिकतर घरों में रात के समय भी पंखे चलने लगे हैं। हालांकि कूलर अभी चलना शुरु नहीं हुए हैं। इधर गर्मी से बचने के लिए लोग अब पेड़ की छांव में बैठने लगे हैं। </p>
<p><strong>32 डिग्री के पार पहुंचा पारा</strong><br />मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोटा में एक दिन पहले जहां अधिकतम तापमान 30.1 डिग्री और न्यूनतम तापमान 12.3 डिग्री था। वहीं शनिावार को अधिकतम तापमान में 2 डिग्री की बढ़ोतरी होने से यह 32.9 डिग्री हो गया। वहीं न्यूनतम तापमान में 1 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है। जिससे यह बढ़कर 13.4 डिग्री हो गया। हवा की गति 6 कि.मी. प्रति घंटा रही।  मौसम विभाग जयपुर के निदेशक राधेशयाम शर्मा ने बताया कि कोटा समेत प्रदेश के अधिकतर जिलों में ड्राई कंडीशन बनी हुई है। तापमान में बढ़ोतरी का यह क्रम अभी जारी रहेगा। वर्तमान में सामान्य से अधिक तापमान है। वहीं 18 से 20 फरवरी के बीच पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से बरसात की संभावना है। लेकिन उसका असर कोटा संभाग पर नहीं पड़ेगा। </p>
<p><strong>गर्मी ने दी जल्दी दस्तक</strong><br />प्रदेश के अधिकतर जिलों में मौसम में अचानक से बदलाव हुआ है। कुछ दिन पहले तक कड़ाके की सर्दी से शहर वासी कांप रहे थे। वहीं अब एक दम से सूरज की तपन अधिक हो गई है। वह भी इतनी अधिक कि फरवरी के महीने में ही अप्रैल सी गर्मी का अहसास होने लगा है। तापमान में भी एक दो डिग्री की नहीं वरन् एक साथ 5 से 8 डिग्री की बढ़ोतरी हो रही है। वहीं मौसम में बदलाव का असर दिन के समय ही नहीं रात के समय भी पड़ रहा है। शहर में शनिवार को सुबह से ही सूरज में तेजी का असर रहा। यह असर देर शाम तक बना रहा। दिन के समय सूरज की तपन काफी अधिक थी। मौसम में हुए बदलाव का असर लोगों के पहनावे पर भी दिखने लगा है। अधिकतर लोगों ने गर्म कपड़े पहनना कम कर दिया है। वहीं नल और टंकी का पानी भी पहले से गर्म आने लगा है।  जिस तरह से तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रही है उसे देखते हुए इस बार गर्मी की शुरुआत जल्दी होगी। </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Feb 2025 16:07:56 +0530</pubDate>
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                <title>जर्जर आंगनबाड़ी में कैसे खिलेंगे नौनिहाल</title>
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                        <![CDATA[ग्राम पंचायत सरपंच को इस विषय में कई बार अवगत कराया फिर भी कोई समाधान नहीं हुआ।]]>
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                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/how-will-the-children-blossom-in-a-dilapidated-anganwadi/article-89692"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/pze-(4)5.png" alt=""></a><br /><p> चौमहला। चौमहला क्षेत्र के गांव चोरबर्डी में आंगनबाड़ी भवन क्षतिग्रस्त हो रहा है । बरसात के  दिनों में इसकी छत जगह- जगह से टपकती रहती है, नन्हे नन्हे बच्चें हादसे के साए में अक्षर ज्ञान सीख रहे है। क्षेत्र के गांव चोरबर्डी में आंगनबाड़ी केंद्र का भवन काफी क्षतिग्रस्त हो रहा है, जगह जगह से बरसात में पानी टपकता है, दरवाजे खिड़की भी खराब हो रहे है। नीचे का फर्श भी जमीन में धंस रहा है, हमेशा भय बना रहता है, पोषाहार भी खराब हो जाता है। महिला व बच्चों के कुपोषण को लेकर सरकार तरह-तरह की योजनाएं चला रही है और हर वर्ष करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन अभी भी आंगनबाड़ी भवन की सुरक्षा व्यवस्था की ओर ध्यान नहीं है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भावना चौहान ने बताया कि आंगनबाड़ी भवन की छत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। बरसात में चारों तरफ से पानी टपकता है, पोषाहार भी गीला हो जाता है, आए दिन हादसों का भी डर बना रहता है। वही आंगनबाड़ी के दोनों तरफ पास में बने गड्ढे जिसमें बारिश का पानी भर जाने से आंगनबाडी में भी पानी आ जाता है। ग्राम पंचायत सरपंच को इस विषय में कई बार अवगत कराया फिर भी कोई समाधान नहीं हुआ। ग्रामीण गजराव सिंह, कचरूसिंह, कृपाल सिंह पाटीदार, दिलीप सिंह,कमलेश टेलर, नारायण सिंह,राम लाल बारेट आदि ग्रामीणों ने शीघ्र नया भवन बनाने की मांग की है।</p>
<p>बच्चों को बारिश के समय बैठने में काफी समस्या होती है, लेकिन किसी का इस और  ध्यान नहीं है। समस्या का समाधान कर शीघ्र नया भवन बनाया जाए।<br /><strong>- दिलीप सिंह ग्रामीण</strong></p>
<p>गांव का आंगनबाड़ी भवन बरसात के दिनों पानी टपकता है, पोषाहार भी गीला हो जाता है। पढ़ाने वाले व बच्चों को काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। जर्जर अवस्था के चलते माता पिता बच्चों के आंगनबाड़ी भी नहीं भेजते है।<br /><strong>- गजराव सिंह ग्रामीण</strong></p>
<p>काफी दिनों से आंगनबाड़ी की छत से पानी टपक रहा है, लेकिन संबंधित अधिकारी की नजर इस ओर नहीं गई है। समस्या का समाधान होना चाहिए। <strong>- कचरू सिंह ग्रामीण</strong></p>
<p>आंगनबाड़ी भवन क्षतिग्रस्त हो रहा है, बरसात में पानी टपकता है, दरवाजे खिड़की भी क्षतिग्रस्त है( उच्च अधिकारियों को अवगत करा रखा है।<br /><strong>- भावना चौहान, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता</strong></p>
<p> इसका प्रस्ताव बनाकर उच्च अधिकारियों को भिजवाया जाएगा तथा समस्या का जल्द से जल्द समाधान करवाया जाएगा। <br /><strong>- रमेश चंद्र वर्मा, महिला बाल विकास अधिकारी, डग</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Sep 2024 17:00:39 +0530</pubDate>
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                <title>हर साल सीजन में 18,000 टन आम खा जाते हैं कोटा वासी</title>
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                        <![CDATA[जानकारों के अनुसार इन छह माह में प्रतिदिन औसत 100 टन से अधिक आम कोटा संभाग में बेचा जाता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-residents-eat-18-000-tonnes-of-mangoes-every-year-in-season/article-53302"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/630-400-size-की-कॉपी.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। आम फलों का ही नहीं कोटा वालों के दिल का भी राजा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर सीजन में प्रतिदिन में 100 से 125 टन आम की बिक्री यहां होती है। कोटा की प्रमुख फल-सब्जी मंडी में पूरे सीजन में 9 से 10 वैरायटी के आम आते हैं। अलग-अलग समय में देश के विभिन्न क्षेत्रों की मशहूर किस्मों की आवक यहां होती है, जो 50 रुपए से 250 रुपए प्रति किलो तक के भाव में बिकते हैं। कोटा में फरवरी माह से आम आना शुरू हो जाते हैं और जुलाई माह तक इनकी आवक जारी रहती है। वहीं अप्रैल से जून माह तक सीजन में जमकर आम खाए जाते हैं। </p>
<p><strong>प्रतिदिन 100 टन से अधिक बिक्री</strong><br />जानकारों के अनुसार इन छह माह में प्रतिदिन औसत 100 टन से अधिक आम कोटा संभाग में बेचा जाता है। ऐसे में पूरे सीजन में 18000 टन आम लोग खा जाते हैं। कोटा में सर्वाधिक बिक्री बादाम, तोतापुरी और हापुस की होती है। हमारे यहां आम की आवक कर्नाटक, महाराष्टÑ, केरल,आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु व उत्तरप्रदेश से होती है।</p>
<p><strong>आम की लजीज डिशेज की भी डिमांड</strong><br />कोटा में आम से बनी डिशेज की काफी डिमांड बढ़ी है।  विभिन्न आयोजनों में मैंगो ज्यूस, मैंगो आइसक्रीम, मैंगो श्री, मैंगो केसर लस्सी, मैंगो आॅफर और मैंगो शेक को काफी पसंद किया जा रहा है। अब तो वैवाहिक आयोजनों में आम की डिशेज को शामिल किया जाने लगा है।</p>
<p><strong>सबसे ज्यादा इनकी होती है बिक्री</strong><br />फल व्यवसायी बताते हैं कि कोटा संभाग में सबसे ज्यादा बादाम, तोतापुरी और हापुस आमों की बिक्री होती है। सीजन में इन किस्मों को ज्यादा पसंद किया जा रहा है। इसके अलावा बारिश के मौसम यानि जुलाई माह में लंगड़ा, दशहरी व चौसा किस्म के आम आते हैं।</p>
<p><strong>देशी आम के शौकीन भी कम नहीं</strong><br />कोटा के लोग देसी आम को भी काफी पसंद करते हैं। यहां की फल मंडी में बारां, झालावाड़ और कोटा के ग्रामीण क्षेत्रों से विभिन्न किस्म के देसी आम बिकने के लिए आते हैं। देसी आम भी अपने स्वाद के लिए काफी मशहूर हैं और सीजन के दौरान इनकी भी काफी बिक्री होती है।</p>
<p><strong>कहां से आता है कौनसा आम</strong><br />-हापुस: फरवरी से जून तक महाराष्टÑ व कर्नाटक से<br />-केसर: मार्च से जून तक गुजरात से<br />-तोतापुरी: फरवरी से जुलाई तक कर्नाटक व तमिलनाडु से<br />-सिंदुरी: फरवरी से मई तक कर्नाटक से<br />-नीलम: फरवरी से मई तक कर्नाटक व आंध्रप्रदेश से <br />-बादाम: फरवरी से मई तक कर्नाटक, केरल व आंध्रप्रदेश से<br />-लंगड़ा, दशहरी व चोसा: जून से अगस्त तक उत्तरप्रदेश से </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />आम का स्वाद काफी पसंद आता हैं। इस कारण सीजन के दौरान आम की पेटी खरीद कर लाता था। उसका संयुक्त परिवार हैं। ऐसे में आम की ज्यादा जरूरत होती थी। बड़ों से लेकर बच्चों तक इसके स्वाद के दीवाने रहते हैं। इसलिए पूरे सीजन में वह आम खरीदकर लाता है।<br /><strong>- मुकेश गर्ग, ग्राहक</strong></p>
<p>छह माह के सीजन में अप्रैल से जुलाई तक प्रतिदिन कोटा संभाग में 100 से 125 टन आम की खपत होती है। इस दौरान त्यौहार और शादियां होने के कारण आम की बिक्री और बढ़ जाती है। कोटा की फल मंडी में देश के विभिन्न राज्यों से आम की आवक होती है। यहां की मंडी से माल कोटा संभाग के अन्य जिलों में भेजा जाता है। सीजन में आम की हजारों टनों की बिक्री होती है। <br /><strong>- शब्बीर वारसी, फल व्यवसायी, फल सब्जीमंडी कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Aug 2023 13:28:13 +0530</pubDate>
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                <title>बूढ़ी नहरें हो रही घायल, प्रवाह में बाधा बन रही कागजी सफाई</title>
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                        <![CDATA[सीएडी ने अधूरी मरम्मत व बिना साफ-सफाई के नहरों में जल प्रवाहित कर दिया। ग्रामीण क्षेत्र में नहर की ब्रांचें व माइनर झाड़िय़ों से अटी पड़ी हैं। माइनरों की टूटी दीवारों की मरम्मत तक नहीं हुई। इससे टेल क्षेत्र के किसानों को पानी मिल पाएगा या नहीं, इसकों लेकर किसानों को चिंता सताने लगी है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/old-canals-are-getting-injured--paper-cleaning-is-obstructing-the-flow/article-28509"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/budhi-nahare-ho-rahi-ghayal.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। रबी सीजन की फसलों को जीवनदान देने के लिए चम्बल की नहरों में जलप्रवाह किया जा रहा है। सोमवार को दोनों नहरों में जलप्रवाह बढ़ा दिया गया है, लेकिन झाड़-झंखाड़, घास-फूस व कचरे-गंदगी से अटी नहरें जलप्रवाह में बाधा बन रही है। ऐसी स्थिति में आगामी दिनों में जिले के टेल (अंतिम छोर) तक समय पर पानी पहुंचने में संशय बना हुआ है। फिलहाल दायीं नहर में ढाई हजार और बायीं नहर में 800 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। आगामी दिनों में किसानों की मांग आने पर पानी की मात्रा को धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। चंबल में पानी की मात्रा भरपूर होने से चारों बांधों लबालब भरे हुए हैं। वर्तमान में सिंचाई के लिए बांध की दायीं व बायीं नहरों में जलप्रवाह किया जा रहा है। रविवार को दायीं नहर में 750 क्यूसेक और बायीं नहर में 400 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। अब सोमवार को पानी की मात्रा बढ़ाकर दायीं नहर में 2550 और बायीं नहर में 800 क्यूसेक कर दिया गया है। </p>
<p><strong>बिना साफ-सफाई किए छोड़ा पानी</strong><br />सीएडी ने अधूरी मरम्मत व बिना साफ-सफाई के नहरों में जल प्रवाहित कर दिया। ग्रामीण क्षेत्र में नहर की ब्रांचें व माइनर झाड़िय़ों से अटी पड़ी हैं। माइनरों की टूटी दीवारों की मरम्मत तक नहीं हुई। इससे टेल क्षेत्र के किसानों को पानी मिल पाएगा या नहीं, इसकों लेकर किसानों को चिंता सताने लगी है। किसानों का कहना है कि पहले अतिवृष्टि ने मेहनत पर पानी फेर दिया। अब रबी सीजन की फसल में किसान मेहनत कर बुवाई कर रहे हैं, लेकिन सीएडी प्रशासन की ओर से क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत व साफ-सफाई केवल कागजों में ही करवाने से टेल क्षेत्र तक पानी के लिए तरसना पड़ेगा। फिलहाल पानी की ज्यादा जरूरत नहीं है, लेकिन आगामी दिनों में आवश्यकता होने पर नहरी पानी नहीं मिला तो किसानों के सामने परेशानी हो जाएगी।</p>
<p><strong>यहां भी वितरिकाएं हो रही जर्जर</strong><br />किसान नेता विकास कुमार ने बताया कि दायीं मुख्य नहर से ग्रामीण क्षेत्र में निकलने वाली ब्रांचों, माइनरों व वितरिकाओं के बुरे हाल हैं। किशनपुरा ब्रांच दुर्दशा की शिकार है। मरम्मत के नाम पर सीएडी  ने लीपापोती कर दी। थेगड़ा से बोरखेड़ा तक नहर के दोनों हिस्सों की टूटी दीवारों की मरम्मत के नाम पर कुछ माह पहले सीएडी ने काम शुरू किया, लेकिन कुछ स्थानों पर मरम्मत कर बाकी जगह टूटी पड़ी दीवारों को ऐसे ही छोड़ दिया। नहर में कचरे के ढेर लगे है। नहर में कचरे व मलबे की ट्रॉलियां तक खाली कर रखी है। </p>
<p><strong>मरम्मत के  नाम पर खानापूर्ति</strong><br />अयाना के किसान जानकीलाल धाकड़ ने बताया कि दायीं मुख्य नहर की इटावा केनाल ब्रांच की सफाई नहीं हो पाई है। इस कारण केनाल में जगह जगह मिट्टी जमा हो रही है। वहीं इसकी वितरिका व माइनरों की हालत भी ठीक नहीं है। यह जगह-जगह से टूटी पड़ी हैं या इनमें झाडिय़ां व घास उग आई है। जोरावरपुरा वितरिका की माइनर भी क्षतिग्रस्त हालत में है। उसमें झाड़ झंखाड़ उग रहे हंै। अयाना ब्रांच की मुख्य केनाल में भी घासफूस तथा मलबा जमा है। इस कारण इनमें जलप्रवाह के आगे बढ़ने में परेशानी आएगी।</p>
<p><strong>चंबल का नहरी तंत्र</strong><br /><strong>- दार्इं मुख्य नहर</strong><br />6600 क्यूसेक जल प्रवाह क्षमता<br />124  किलोमीटर राजस्थान में<br />248  किलोमीटर मध्यप्रदेश में<br />1.27  लाख हैक्टेयर भूमि राजस्थान में सिंचित<br />3.70  लाख हैक्टेयर भूमि मध्यप्रदेश में सिंचित</p>
<p><strong>- बार्इं मुख्य नहर</strong><br />1500 क्यूसेक जलप्रवाह क्षमता<br />178  किलोमीटर राजस्थान में<br />1.02  लाख हैक्टेयर भूमि सिंचित</p>
<p>रबी फसलों की सिंचाई के लिए दायीं व बायीं नहर में जलप्रवाह किया जा रहा है। किसानों की मांग के अनुसार पानी छोड़ा जा रहा है। जलप्रवाह से पहले से नहरों और माइनरों की साफ-सफाई करवा दी गई थी। टेल क्षेत्र में समय पर नहरी पानी पहुंच जाएगा।<br /><strong>- लखनलाल गुप्ता, अधीक्षण अभियंता, सीएडी कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Nov 2022 16:20:43 +0530</pubDate>
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                <title>ग्लोरियस फैशन वीक सीजन का लुक लॉंच </title>
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                        <![CDATA[परनावम सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयोजित किए जा रहे नेशनल लेवल डिजाइनर फैशन वीक ग्लोरियस फैशन वीक सीजन का लुक लांच किया गया।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-look-launch-of-fashion-week-season/article-13812"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/46546546542.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। परनावम सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयोजित किए जा रहे नेशनल लेवल डिजाइनर फैशन वीक ग्लोरियस फैशन वीक सीजन का लुक लॉंच किया गया। इसमें राजस्थान की सभ्यता, संस्कृति और पहनावे को मॉडल्स ने शोकेस किया। शो डायरेक्टर नविता पंवार, मनोज कुमार और कृष्ण कुमार ने बताया कि एथनिक थीम को मिलाकर इस लुक लांच को एक भव्य रूप दिया गया है।</p>
<p>सम्पन्न हुए इस प्रोमो शूट व लुक लांच का उद्देश्य ट्रेडिशन, कल्चर व वुमन एम्पावरमेंट को प्रमोट करना है। इस लुक लांच में डिजाइनर ड्रेसेज को फैशन डिजाइनर संजय शर्मा और दीपा भाटी द्वारा रिप्रेजेंट किया गया है। फिनाले इवेंट में 18 से अधिक की 100 से अधिक मॉडल्स इस फैशन वीक में भाग लेगी। ग्रैंड इवेंट से पहले सभी को मेडिटेशन, योगा, फिटनेस, स्टाइल, रैम्प वॉक और पर्सनेलिटी डेवलपमेंट आदि की ट्रेनिंग दी जाएगी। <br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Jul 2022 15:02:10 +0530</pubDate>
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                <title>स्वास्थ्य से खिलवाड़: घटिया व मिलावटी खाद्य पदार्थ एवं सडे-गले फलों की बिक्री जारी </title>
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                        <![CDATA[करौली। तेज गर्मी का मौसम चल रहा है और उसमें शुद्ध खाद्य पदार्थ एवं ताजा फल-सब्जी तथा अन्य वस्तुयें भी ताजा मिलनी चाहिए किंतु जिला मुख्यालय करौली के बाजारों में घटिया व मिलावटी खाद्य पदार्थ एवं सडे-गले फलों की बिक्री धडल्ले से होती देखी जा सकती है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/karauli/playing-with-health-sale-of-substandard-and-adulterated-food-items-and-rotten-fruits-continues/article-11875"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/62.jpg" alt=""></a><br /><p>करौली। तेज गर्मी का मौसम चल रहा है और उसमें शुद्ध खाद्य पदार्थ एवं ताजा फल-सब्जी तथा अन्य वस्तुयें भी ताजा मिलनी चाहिए किंतु जिला मुख्यालय करौली के बाजारों में घटिया व मिलावटी खाद्य पदार्थ एवं सडे-गले फलों की बिक्री धडल्ले से होती देखी जा सकती है। आम आदमी अब यहाँ पर घटिया एवं मिलावटी खाद्य पदार्थो की शिकायत करते हुए मिल रहा है। सबसे ज्यादा दूधियाओं की मनमानी चल रही है जो कि शुद्ध तो बेचना ही नहीं चाहते। पानी मिला एवं क्रीम निकला दूध यहाँ खूब बिक रहा है</p>
<p>गांवों से मोटर साईकिलों पर एवं अन्य साधनों से दूधियां दूध लाते है वह पहले उनकी क्रीम निकलवाते है इसके बाद लोगों को दूध देते है। दूधियां कभी आधा प्योर और आधा फिल्टर दूध (क्रीम निकला हुआ) मिलाकर दूध बेचते है तो कभी प्योर दूध में पानी मिलाकर बेचते है इस प्रकार जन स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड रहा है। देशी घी की तो बाजार में इतनी ब्रांडों के वाजार में है कि उनमें असली कौनसी और नकली कौनसी इसका भेद ही नहीं हो पा रहा है। देशी घी 200-250 तथा 300से 400 और पांच सौ रूपये तक का मिल रहा है यह समझ में नहीं आता कि यह अलग-अलग भाव क्यों है। करौली में देशी घी बेचने वाले जो कि बाहर अन्य प्रांत से देशी घी लाकर बेचते है</p>
<p>वह बगैर लेखा जोखा के बगैर बिल के ही काम कर रहे है। ऐसे में सरकार को राजस्व का चूना भी लगा रहे हैं। करौली में जब मिलावटी एवं घटिया खाद्य पदार्थो एवं सडे-गले फलों की बिक्री की बात लोगों द्वारा उठाई जाती है तो जिले के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा महज खानापूर्ति शुरू की जाती है चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हर बार केवल हिदायत देना और चेतावनी देकर ही अपना कर्तव्य पूरा मान लेते हेैं जबकि सैम्पलिंग भी होनी चाहिए वह भी वहाँ से जहाँ की थोक में वस्तुएं लोग बेचते है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी एवं खाद्य निरीक्षक यह तो कहते है कि करौली जिले में मिलावटी खाद्य वस्तुओं, रंगदार मिठाई, नमकीन, सडे-गले फलों के उपभोक्ताओं को खाने के बाद बीमारियां बढ जाती है इन्हें रोकने के लिए कार्रवाई की जाती है किंतु कितने सैम्पल हुए और उनमें पिछले समय के जो सैम्पल लिए और जो जांच में मिलावट होना पाया गया उन मिलावटियों या अन्य के खिलाफ क्या कार्यवाही हुई क्या पुलिस में मामला दर्ज कराया गया इन सब प्रश्नों को वह गोलमोल कर जाते है। <br /><br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>करौली</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jun 2022 12:24:18 +0530</pubDate>
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