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                <title>Legal Profession - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बीसीआई लॉ छात्रों के व्यवहार को रेगुलेट नहीं कर सकती, नालसार छात्रों पर जारी दोनों नोटिफिकेशन रद्द</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के पास कानून के छात्रों के आचरण को नियंत्रित करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। अदालत ने हैदराबाद स्थित नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों के खिलाफ जारी बीसीआई की अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-decision-of-supreme-court-bci-cannot-regulate-the-behavior/article-164594"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्यों की बार काउंसिलों के पास विधि के छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे अनुशासनात्मक अधिकार केवल छात्र के मूल संस्थान या संस्थान को संचालित करने वाले नियमों अथवा उप-नियमों के तहत निर्धारित प्राधिकारी के पास निहित होते हैं। बार काउंसिल किसी व्यक्ति पर अनुशासनात्मक अधिकार क्षेत्र केवल तभी हासिल करती है जब वह एक अधिवक्ता के रूप में नामांकित हो जाता है।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के 13 अगस्त को जारी निर्देशों को कानूनी रूप से अमान्य करार दिया। उल्लेखनीय है कि बीसीआई अध्यक्ष ने नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के वर्ष 2026 के स्नातक बैच के नामांकन पर रोक लगाने और उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अभियान चलाने को लेकर छात्रों व संकाय सदस्यों के खिलाफ जांच की मांग की थी, जिसे भारी सार्वजनिक विरोध के बाद स्वयं बीसीआई ने वापस ले लिया था।</p>
<p>शीर्ष अदालत नालसर के दो पूर्व छात्रों, मिहिरा सूद और अभिषेक तिवारी की एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बीसीआई अध्यक्ष के जारी इन विवादित निर्देशों को चुनौती दी गई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 15:52:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>25 PIL दाखिल करने वाले वकील को सुप्रीम कोर्ट की फटकार : याचिकाओं पर सुनवाई से इंकार, पढ़ें पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने एक वकील द्वारा दायर 25 जनहित याचिकाओं को सुनने से इनकार करते हुए कड़ी फटकार लगाई। न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने याचिकाकर्ता को "पीआईएल की दुकान" बंद कर वकालत पर ध्यान देने की सलाह दी। अदालत ने तुच्छ मुद्दों और बिना गहराई के दायर मुकदमों पर नाराजगी जताते हुए संवेदनशीलता बरतने की हिदायत दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/lawyer-who-filed-25-pil-got-a-shock-from-the/article-149870"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/supreme-court--2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को एक ही याचिकाकर्ता की ओर से व्यक्तिगत रूप से दायर 25 जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पांचोली की पीठ ने याचिकाकर्ता वकील सचिन गुप्ता को जनहित याचिकाएं दायर करने के बजाय अपनी वकालत पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा। न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने टिप्पणी की, "पेशे पर ध्यान केंद्रित करें। जब सही समय होगा, हम मामलों पर भी विचार करेंगे। लेकिन पहले संवेदनशील बनें और मुद्दों को गहराई से समझें।"</p>
<p>अदालत के समक्ष पेश याचिकाओं में कई तरह की मांगें की गयी थीं। इनमें देश में प्रचलित सभी भाषाओं और बोलियों के शब्दों को मिलाकर भारत में एक सामान्य संपर्क भाषा विकसित करने की नीति, टेलीविजन पर कानूनी जागरूकता कार्यक्रम के लिए नीति और साबुनों में रसायनों के उपयोग पर नीति बनाना शामिल था। इसके अलावा साबुनों में केवल ऐसे रसायनों की अनुमति देने की मांग की गयी थी, जो हानिकारक बैक्टीरिया को मारते हों न कि त्वचा के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बैक्टीरिया को। याचिकाओं में अखिल भारतीय स्तर पर खाद्य/एफएसएसएआई पंजीकरण अभियान के लिए नीति बनाने जैसी मांगें भी शामिल थीं।</p>
<p>याचिकाकर्ता ने याचिकाओं को वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे पीठ ने मंजूर कर लिया। पीठ ने उन लोगों की भी आलोचना की, जो 'पीआईएल की दुकानें' चला रहे हैं। अदालत का इशारा तुच्छ मुद्दों पर बड़ी संख्या में दायर की जाने वाली जनहित याचिकाओं की ओर था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 14:54:36 +0530</pubDate>
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