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                <title>mobile - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>mobile RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>इमरजेंसी मोबाइल अलर्ट ट्रायल से लोगों के बीच चर्चा : अचानक मोबाइल पर तेज अलार्म और स्क्रीन पर फ्लैश से कुछ पल के लिए घबरा गए, बोले- थोड़ा डर लगने वाला रहा अनुभव</title>
                                    <description><![CDATA[एनडीएमए के इमरजेंसी मोबाइल अलर्ट ट्रायल ने लोगों को चौंका दिया। तेज अलार्म और फ्लैश मैसेज से कई लोग घबरा गए, हालांकि बाद में इसे ट्रायल समझ आया। विशेषज्ञों ने पहल को सराहा, लेकिन जागरूकता और स्थानीय भाषा की कमी सामने आई। सही उपयोग पर यह सिस्टम आपदा में बेहद कारगर साबित हो सकता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/emergency-mobile-alert-trial-creates-buzz-among-people/article-152492"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(7)1.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की ओर से 2 मई को देशभर में किए गए इमरजेंसी मोबाइल अलर्ट ट्रायल ने आम लोगों के बीच व्यापक चर्चा और मिश्रित प्रतिक्रियाएं पैदा कीं। इस परीक्षण का उद्देश्य आपदा या आपात स्थिति में लोगों तक त्वरित और प्रभावी सूचना पहुंचाने की व्यवस्था को परखना था, लेकिन इसका अनुभव अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग रहा। </span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लगा फोन में खराबी हो गई</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर जिले में कई लोगों ने बताया कि अचानक मोबाइल पर तेज अलार्म जैसी आवाज और स्क्रीन पर फ्लैश संदेश आने से वे कुछ पल के लिए घबरा गए। महात्मा गांधी अस्पताल के नर्सिंगकर्मी मोहित शर्मा ने कहा कि पहले तो लगा कि फोन में कोई बड़ी खराबी आ गई है या कोई गंभीर खतरा है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">थोड़ा डर लगने वाला रहा अनुभव</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बाद में समझ आया कि यह सिर्फ<span>  </span>ट्रायल है। आईटी एक्सपर्ट महेन्द्र शर्मा ने इसे जरूरी, लेकिन थोड़ा डराने वाला अनुभव बताया। </span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सकारात्मक रहा कदम</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शहरी इलाकों में तकनीक के जानकार लोगों ने इस पहल की सराहना की। टैक एक्सपर्ट प्रतापसिंह राठौड़ के अनुसार इस तरह की सेल ब्रॉडकास्ट प्रणाली विदेशों में पहले से है। भारत में इसका लागू होना सकारात्मक कदम है, हालांकि लोगों को पहले से जागरूक करना चाहिए था।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">स्थानीय भाषा में हो तो बेहतर होता</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिक्रिया थोड़ी अलग रही। बस्सी के कानड़वास गांव से किसान कन्हैयालाल ने बताया कि उन्हें संदेश समझने में दिक्कत हुई क्योंकि अलर्ट अंग्रेजी में भी था। आवाज बहुत तेज थी, लेकिन संदेश पूरी तरह समझ नहीं आया। अगर यह पूरी तरह स्थानीय भाषा में होता तो बेहतर रहता। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि बहुभाषी संचार इस तरह की प्रणालियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बाद में समझा कि अलर्ट मैसेज है</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर नगर निगम के निर्वतमान पार्षद रजत विश्नोई ने कहा कि इस मैसेज को देखकर वह एक बार तो बुरी तरह घबरा गया था। बाद में समझ आया कि इस पर रियक्ट नहीं करना है, यह अलर्ट मैसेज है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ट्रायल ने तकनीकी रूप से सिस्टम की क्षमता को साबित किया है, लेकिन जनजागरूकता की कमी साफ<span>  </span>दिखी। आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसे अलर्ट से पहले व्यापक सूचना अभियान चलाना चाहिए, ताकि लोग समझ सकें कि यह घबराने की नहीं बल्कि सतर्क रहने की सूचना है। कुल मिलाकर, यह इमरजेंसी मोबाइल अलर्ट ट्रायल एक अहम पहल साबित हुई, जिसने न केवल तकनीकी ढांचे की मजबूती को परखा बल्कि यह भी दिखाया कि आम लोगों को इस प्रणाली से जोड़ने के लिए जागरूकता और भाषा की पहुंच पर और काम करने की जरूरत है। लोगों ने सोशल मीडिया पर मजाकिया प्रतिक्रियाएं भी दीं। कई यूजर्स ने इसे अचानक हॉरर मूवी जैसा अनुभव बताया, कई लोगों ने कहा कि यह वास्तविक आपदा के समय उपयोग में लाया जाए तो यह जान बचाने में बेहद कारगर हो सकता है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 11:26:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा विभाग ने लांच किया माय करियर एडवाइजर मोबाइल ऐप : विद्यार्थियों को करियर की देगा सही दिशा, सेल्फ  रिव्यू और रिपोर्ट शेयर करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध</title>
                                    <description><![CDATA[कक्षा 9 से 12वीं के विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों, अभिभावकों और काउंसलर्स के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/education-department-launches-my-career-advisor-mobile-app-which-will/article-138282"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/shiksha-sankul.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर प्रदेश के विद्यार्थियों को भविष्य के लिए बेहतर तैयारी करने और सही करियर विकल्प चुनने में मदद के लिए पर्सनलाइज्ड करियर गाइडेंस मिलेगा। इस दिशा में शिक्षा विभाग ने माय करियर एडवाइजर मोबाइल एप लॉन्च किया है। यह नवाचार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विद्यार्थियों के लिए तैयारी के साथ जागरूकता बढ़ाने और बेहतर योजना बनाने में मददगार साबित होगा। कक्षा 9 से 12वीं के विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों, अभिभावकों और काउंसलर्स के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।</p>
<p><strong>सेल्फ  रिव्यू कर बना सकते हैं प्रोफाइल</strong><br />माय करियर एडवाइजर एप पर विद्यार्थी तीन प्रमुख मूल्यांकनों के माध्यम से अपना सेल्फ रिव्यू कर सकते हैं। इन परीक्षणों के आधार पर एप विद्यार्थियों को एआई आधारित करियर इनसाइट्स और मैच्ड रोल्स सुझाता है।</p>
<p><strong>बिना डिग्री के जॉब विकल्प उपलब्ध</strong><br />इस एप में कॉलेज डिग्री के साथ-साथ बिना डिग्री के जॉब ऑप्शन भी उपलब्ध हैं, जिससे हर प्रकार के विद्यार्थी को मार्गदर्शन मिल सके। इस एप के जरिए विद्यार्थी अपनी प्रोफाइल तैयार कर सकते हैं, पसंदीदा करियर विकल्प चुन सकते हैं और अपनी सेल्फ रिव्यू रिपोर्ट, मैच्ड रोल्स और फेवरिट्स को अभिभावकों, शिक्षकों और सलाहकारों के साथ साझा भी कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jan 2026 10:41:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मेले में मोबाइल नेटवर्क हो जाता जाम : परेशान होता हर आम, मेला समिति व अधिकारी करते वॉकी-टॉकी का उपयोग  </title>
                                    <description><![CDATA[मेला समिति ने मेला परिसर व उसके आस-पास टावर लगाने का किया निवेदन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mobile-network-congestion-occurs-at-the-fair--causing-inconvenience-to-everyone--and-the-fair-committee-and-officials-use-walkie-talkies/article-128515"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राष्ट्रीय दशहरा मेले का विधिवत शुभारम्भ तो हो गया है लेकिन पूरी तरह से मेला 2 अक्टूबर को दशहरे के दिन से होगा। उसी दिन से मेले में भीड़ के कारण मोबाइल नेटवर्क जाम होने की समस्या से आमजन को दोचार होना पड़ता है। ऐसे में परिजनों के बिछुड़ने पर उनसे आपस में सम्पर्क करनाा मुश्किल हो जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए मेला समिति व अधिकारी तो वॉकी-टॉकी का उपयोग करते हैं। निगम कोटा दक्षिण व उत्तर की ओर से आयोजित दशहरा मेला शुरु हो गया है। लेकिन अभी यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन नहीं होने व पूरी दुकानें भी नहीं लगने से लोग बहुत कम पहुंच रहे हैं। लेकिन जैसे ही 2 अक्टूबर को दशहरे के दिन रावण दहन होगा। उस दिन  से मेले में लोगों की भीड़ उमड़ना शुरु हो जाती है। भीड़ भी इतनी अधिक रहती है कि मेला परिसर में लोग एक दूसरे से सटकर चलते है। विशेष रूप से झूला मार्केट व फूड कोर्ट में सबसे अधिक भीड़ रहती है। वहीं  मेले के दौरान होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों और शनिवार व रविवार को अवकाश के दिन तो मेला परिसर में सांस लेना तक दूभर हो जाता है। इस बार दशहरे पर 215 फीट का विशाल रावण दहन होगा। ऐसे में उसे देखने के कारण भीड़ पहले से काफी अधिक रहने की संभावना है। </p>
<p><strong>खोया-पाया पर उद्घोषणा</strong><br />मोबाइल नेटवर्क जाम होने से फोन नहीं लगने पर कई लोग तो निगम की ओर से मुख्य प्रवेश द्वार श्रीराम द्वार के पास खोया-पाया केन्द्र पर सूचना देते हैं। वहां से बिछड़े लोगों व बच्चों के बारे में उद्घोषणा की जाती है। जिससे बड़ी संख्या में लोगों को आपस में मिलाने का काम किया जाता है। लेकिन मोबाइल से बात करके मिलना संभव नहीं हो पाता है। इस समस्या से कुछ लोग ही नहीं मेले में आने वाले अधिकतर लोगों को इस समस्या का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मेले में भीड़ के कारण मोबाइल नेटवर्क व फोन जाम होने की समस्या आती है। गत वर्ष भी इसका सामना करना पड़ा था। इसके लिए समिति सदस्यों व अधिकारियों ने वॉकी-टॉकी का उपयोग किया था। करीब 10 वॉकी-टॉकी से आपस में बातचीत व सम्पर्क करना सुविधाजनक रहा था। इस बार तीन मोबाइल कम्पनियों को पत्र लिखे गए हैं। समिति ने जिला कलक्टर के माध्यम से कम्पनियों को पत्र भेजकर मेला परिसर व उसके आस-पास टावर लगाने या अन्य व्ववस्था करने का निवेदन किया है जिससे लोगों को इस समस्या का सामना नहीं करना पड़े। संभावना है कि दशहरे तक इस समस्या का समाधान हो सकता है। <br /><strong>- विवेक राजवंशी, अध्यक्ष मेला समिति </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Oct 2025 15:04:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बना भारत : मेक इन इंडिया कार्यक्रम बढ़ा रहा है हमारी आत्मनिर्भरता, रोजगार भी हो रहे उत्पन्न</title>
                                    <description><![CDATA[मोबाइल फोन का विनिर्माण मूल्य वित्त वर्ष 2014 में 18,900 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 4,22,000 करोड़ रुपए हो गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-becomes-the-second-largest-mobile-manufacturer-in-the-world/article-103198"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer16.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री का मेक इन इंडिया दृष्टिकोण भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने में मदद कर रहा है। अपने शुरू होने के एक दशक के भीतर मेक इन इंडिया कार्यक्रम न केवल हमारी आत्मनिर्भरता को बढ़ा रहा है, बल्कि उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है और रोजगार भी पैदा कर रहा है। इस संबंध में डेटा साझा करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी, रेलवे और सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले दशक में भारत के मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन पर प्रकाश डाला।</p>
<p><strong>आयात से स्वतंत्रता तक - मोबाइल विनिर्माण में भारत का उदय</strong><br />भारत ने मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में उल्लेखनीय प्रगति की है और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल विनिर्माण देश बन गया है । 2014 में भारत में केवल 2 मोबाइल विनिर्माण इकाइयां थीं, लेकिन आज देश में 300 से अधिक विनिर्माण इकाइयां हैं  जो इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में महत्वपूर्ण विस्तार को रेखांकित करती हैं। 2014-15 में भारत में बिकने वाले सिर्फ़ 26% मोबाइल फोन भारत में बने थे, बाकी आयात किए जा रहे थे। गौरतलब है कि भारत में बिकने वाले 99.2% मोबाइल फोन भारत में ही बनते हैं।</p>
<p>मोबाइल फोन का विनिर्माण मूल्य वित्त वर्ष 2014 में 18,900 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में 4,22,000 करोड़ रुपए हो गया है। भारत में हर साल 325 से 330 मिलियन से ज्यादा मोबाइल फोन बनाए जा रहे हैं और औसतन भारत में लगभग एक बिलियन मोबाइल फोन उपयोग में हैं। भारतीय मोबाइल फोन ने घरेलू बाजार को लगभग परिपूर्ण कर दिया है और यही वजह है कि मोबाइल फोन के निर्यात में काफी वृद्धि हुई है। 2014 में निर्यात लगभग न के बराबर था, जो अब 1,29,000 करोड़ से ज्यादा हो गया है।</p>
<p><strong>इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में रोजगार सृजन का एक दशक</strong><br />इस क्षेत्र का विस्तार रोजगार का एक प्रमुख स्रोत भी रहा है जिसने पिछले दशक में लगभग 12 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा किए हैं। इन रोजगार अवसरों ने न केवल कई परिवारों की आर्थिक स्थिति को ऊपर उठाया है, बल्कि देश के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने में भी योगदान दिया है। इन मील के पत्थरों को हासिल करने में मेक इन इंडिया पहल की अहम भूमिका रही है। इसने चार्जर, बैटरी पैक, सभी प्रकार के मैकेनिक्स, यूएसबी केबल जैसे महत्वपूर्ण कलपुर्जों और उप-असेंबली के घरेलू उत्पादन को सक्षम बनाया है और लिथियम आयन सेल, स्पीकर और माइक्रोफोन, डिस्प्ले असेंबली और कैमरा मॉड्यूल जैसे अधिक जटिल घटकों का उत्पादन किया है। भविष्य में मूल्य श्रृंखला में और अधिक गहराई से आगे बढ़ने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। विशेष रूप से कलपुर्जों और अर्धचालकों के उत्पादन में। यह बदलाव आत्मनिर्भरता बढ़ाने और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में पंक्ति में पहले स्थान पर  स्थापित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।</p>
<p><strong>मूल्य शृंखला को गहन बनाना: भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को आगे बढ़ाना</strong><br />अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अब मूल्य श्रृंखला में और गहराई से आगे बढ़ने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है जिसमें बढ़िया कलपुर्जों और सेमीकंडक्टर उत्पादन पर अधिक जोर दिया जा रहा है जिससे इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जे पारिस्थितिकी तंत्र का स्वदेशी विकास सुनिश्चित हो सके। इससे वैश्विक स्तर पर एक अग्रणी इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार के रूप में भारत की स्थिति मजबूत होगी। 1950 से 1990 के बीच प्रतिबंधात्मक नीतियों ने विनिर्माण को बाधित किया। हालांकि मेक इन इंडिया मूल्य श्रृंखला में गहराई से प्रवेश करके और घटकों और चिप्स के उत्पादन को बढ़ाकर इस प्रवृत्ति पलट रहा है। देश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण आधार स्थापित करना मेक इन इंडिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, जिसे भारत छह दशकों से हासिल करने का प्रयास कर रहा है। भारत सेमीकंडक्टर मिशन के शुभारंभ और स्वीकृत की गई पांच प्रमुख परियोजनाओं के साथ, माइक्रोन से शुरू होकर, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की दो परियोजनाएं, सीजी पावर की एक परियोजना और कीन्स की अंतिम परियोजना, इस देश में सेमीकंडक्टर का वास्तविक विनिर्माण आधार भारत में स्थापित किया जा रहा है।</p>
<p><strong>मेक इन इंडिया नए आर्थिक युग को आकार दे रहा है</strong><br />खिलौनों से लेकर मोबाइल फोन, रक्षा उपकरणों से लेकर ईवी मोटरों तक, उत्पादन भारत में वापस आ रहा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मेक इन इंडिया विजन भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना है। मेक इन इंडिया कार्यक्रम आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रहा है, उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है और रोजगार पैदा कर रहा है, जिससे देश की आर्थिक मजबूती में महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Feb 2025 11:25:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परिचित ने दिया मोबाइल सही करने का झांसा, अपहरण कर लूट लिए 25 हजार रुपए</title>
                                    <description><![CDATA[ऐसे में उसने परिचित यशपाल शेखावत से बात की, तो उसने किसी के नंबर देकर परकोटे में भेज दिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/an-acquaintance-give-the-promise-of-repairing-the-mobile/article-95237"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/kidnap.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ब्रह्मपुरी थाना इलाके में एक युवक को परिचित ने मोबाइल सही करने का झांसा देकर कालवाड़ रोड से बुलाकर अपहरण कर लिया। पुलिस ने बताया कि पीड़ित मुकेश कुमार निवासी मंगलम सिटी ने रिपोर्ट दी है कि कुछ समय पहले उसका मोबाइल खराब हो गया। ऐसे में उसने परिचित यशपाल शेखावत से बात की, तो उसने किसी के नंबर देकर परकोटे में भेज दिया। </p>
<p>उन लोगों ने उसे रामगढ़ मोड़ के पास एक मोबाइल की दुकान पर बुलाया, जहां से कई लोगों ने थार गाड़ी में बैठाकर साइड में ले लिया। इसके बाद रास्ते में मारपीट करते हुए उसे कालवाड़ रोड ले गए। इसके बाद पीड़ित के घर से बाइक, मोबाइल और 25 हजार रुपए लूट लिए। इस दौरान आरोपियों ने उसके साथ मारपीट करने का वीडियो भी बना लिया। पीड़ित ने अगले दिन ब्रह्मपुरी थाने पहुंचकर रिपोर्ट दी। पीड़ित की रिपोर्ट पर पुलिस जांच कर रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Nov 2024 12:41:47 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मोबाइल छीनने के हादसों में हो रही है बढ़ोतरी</title>
                                    <description><![CDATA[दूसरी वारदात भी एक सितम्बर को हुई। वादी रामस्वरूप जाट सिरसा गोविन्दगढ़ जयपुर ग्रामीण ने रिपोर्ट में बताया कि रोड नम्बर 13 वीकेआई से फोन पर बात करता हुआ जा रहा था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-incidents-of-mobile-theft-are-increasing/article-89998"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/1rtrer-(3)10.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर में मोबाइल पर बात करते हुए पैदल जाते हुए लोगों के हाथों से मोबाइल छीन कर फरार होने की घटनाओं में तेजी से वृद्धि हुई है। बदमाश बाइक पर आते हैं और हाथ से मोबाइल छीनकर फरार हो जाते हैं। पीड़ित रेणु कंवर बालनाथ नगर वीकेआई विश्वकर्मा ने रिपोर्ट में दी है कि एक सितम्बर को रामेश्वर मंदिर केपास रोड नम्बर 17 से अपराह्र सवा 4 बजे मोबाइल पर बात करती हुई जा रही थी। इसी दौरान बाइक पर 3 आए बदमाश मोबाइल छिनकर फरार हो गए।</p>
<p>दूसरी चोरी की वारदात भी एक सितम्बर को हुई। वादी रामस्वरूप जाट सिरसा गोविन्दगढ़ जयपुर ग्रामीण ने रिपोर्ट में बताया कि रोड नम्बर 13 वीकेआई से फोन पर बात करता हुआ जा रहा था। तभी बाइक पर आए तीन बदमाश मोबाइल छिनकर फरार हो गए। लोगों का कहना है कि मोबाइल लूट की वारदात बाइक पर एक साथ आने वाले तीन युवक अंजाम दे रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Sep 2024 12:39:11 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मोबाइल चार्ज करते समय युवक की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[अचानक हाई वॉल्टेज  के कारण युवक के चपेट में आने से हुआ हादसा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/young-man-dies-while-charging-mobile/article-73332"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/ph-(7)9.png" alt=""></a><br /><p>हिंडोली। बूंदी जिले के हिंडोली थाना क्षेत्र के पायरा गांव में गुरुवार को एक युवक अपने घर पर मोबाइल चार्ज करने के लिए लाइट बोर्ड में लग रहा था कि करंट से उसकी मौत हो गई। दरअसल घर के समीप ही 11 हजार केवी लाइन और ट्रांसफार्मर से अचानक हाई वॉल्टेज के कारण युवक के चपेट में आने से यह हादसा हो गया। थाना अधिकारी पवन कुमार मीणा ने बताया कि गुरुवार सुबह 9 बजे हुए इस हादसे में पायरा गांव निवासी रंजीत उम्र 22 वर्ष पुत्र उदयलाल गुर्जर की मौत हो गई। वह अपने मोबाइल को घर पर लाइट बोर्ड में चार्ज के लिए लगा रहा था कि घर के पास ही 11 हजार की हाईटेंशन लाइन के कारण हाई वॉल्टेज होने से मोबाइल चार्ज करते हुए वह चपेट में आ गया। करंट का जोरदार झटका लगने से वह नीचे गिर गया। परिजन उसे हिंडोली अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पुलिस हिंडोली चिकित्सालय पहुंची शव का  पोस्टमार्टम करा कर परिजनों को सौंप दिया है।<br /> <br /><strong>गांव में छाया रहा मातम , नहीं जले चूल्हे</strong><br />पायरा गांव में रंजीत की मौत का ऐसा सन्नाटा पसरा कि गांव में  चूल्हे नहीं जले। युवक मिलनसार और व्यावहारिक था।  परिवार सहित समाज और गांव की अन्य लोगों की आंखों से आंसू नहीं रोक पाए। रंजीत का गमगीन माहौल में दाह संस्कार किया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Mar 2024 13:25:19 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>युवक का मोबाइल छीनकर बदमाश फरार</title>
                                    <description><![CDATA[पीड़ित ने बताया कि वह अपने कमरे पर जा रहा था। तभी बाइक पर सवार तीन बदमाश आए और उन्होंने उसके हाथ पर झपट्टा मारकर मोबाइल छीन लिया और फरार हो गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-miscreant-snatched-the-young-man-s-mobile-and-absconded/article-70680"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/transfer-(18)3.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। आरके पुरम थाना क्षेत्र में अपने घर जा रहे एक युवक से तीन बाइक सवार बदमाशों ने मोबाइल छीन लिया। इस मामले में पीड़ित प्रशांत गुप्ता ने मामला दर्ज कराया है। पीड़ित ने बताया कि सोमवार शाम को रावतभाटा से कोटा आया था और बस से उतरकर आरएसी ग्राउंड के सामने से होते हुए अपने कमरे पर जा रहा था। तभी बाइक पर सवार तीन बदमाश आए और उन्होंने उसके हाथ पर झपट्टा मारकर मोबाइल छीन लिया और फरार हो गए। तीनों आरोपियों की उम्र करीब 16 से 20 साल के बीच है। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों की तलाश के लिए टीम बना दी हैं और उनकी तलाश की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Feb 2024 18:18:03 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>इंदिरा गांधी स्मार्ट फोन योजना में मिले मोबाइल में लगी आग</title>
                                    <description><![CDATA[ राज्य सरकार की इंदिरा गांधी स्मार्ट फोन योजना के तहत मिले एक मोबाइल फोन में शुक्रवार को अचानक शॉर्ट सर्किट होने से आग लग गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/mobile-found-in-indira-gandhi-smart-phone-scheme-catches-fire/article-57234"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/igms.png" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अजमेर। राज्य सरकार की इंदिरा गांधी स्मार्ट फोन योजना के तहत मिले एक मोबाइल फोन में शुक्रवार को अचानक शॉर्ट सर्किट होने से आग लग गई। इससे मोबाइल व उसके चार्जर सहित 21 हजार रुपए की नगदी और अलमारी में रखे कुछ कपड़े भी जल गए। पीड़ित परिवार का कहना है कि मुफ्त में मिला मोबाइल बहुत महंगा पड़ गया। फिलहाल वह हादसे से हुए नुकसान के मुआवजे की मांग कर रहे है। </p>
<p style="text-align:justify;">हादसा महाराणा प्रताप नगर, कोटड़ा निवासी अन्नू देवी यादव पत्नी राजपाल सिंह के घर हुआ है। उसने बताया कि पिछले माह 23 अगस्त को उन्हें राज्य सरकार की इंदिरा गांधी स्मार्ट फोन योजना के तहत जवाहर रंगमंच में मोबाइल फोन मिला था। जिसे पाकर वह बहुत खुश हुई थीं। वह फोन को बड़े ही संभालकर रखती थीं। आज भी जब काम पर गई तो मोबाइल फोन व उसका चार्जर अलमारी में रखकर गर्इं थीं। कुछ समय बाद में अलमारी से तेजी से धुआं निकल रहा था। उस दौरान अन्नू का बेटा अनुराग घर में था। उसने तुरंत मां को फोन कर अलमारी से धुआं निकलने की जानकारी दी। कुछ देर में अन्नू ने घर पहुंच कर अलमारी खोलकर देखा तो अन्दर आग लग रही थी। तुरंत परिजन ने मिलकर पानी फेंक कर कुछ देर में आग पर काबू पा लिया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने देखा तो मोबाइल जला हुआ था। उसका चार्जर भी जल गया था। आग लगने के कारण मोबाइल के पास ही अलमारी में रखी 21 हजार रुपए की नगदी व कुछ कीमती कपड़े भी जलकर खराब हो गए।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरकार से मुआवजे की मांग  </strong></p>
<p style="text-align:justify;">अन्नू के देवर गोविन्द यादव ने सरकार से मांग की है कि मोबाइल हादसे से गरीब विधवा महिला का जो नुकसान हुआ है। सरकार उसकी भरपाई करे। साथ ही मोबाइल कंपनी से मोबाइलों को अच्छे से चैक कराए। जिससे किसी और गरीब के साथ कोई हादसा नहीं हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Sep 2023 12:44:33 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पर्यटक का मोबाइल लौटाया</title>
                                    <description><![CDATA[रेंजर नितिन शर्मा ने बताया कि नाहरगढ़ जैविक उद्यान में कार्यरत वनरक्षक श्रीराम चौधरी, होमगार्ड अजीम खान, वनरक्षक हनुमान गढ़वाल ने इसमें अहम भूमिका निभाई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/staff-returned-tourist-mobile/article-49831"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-(4)26.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नाहरगढ़ जैविक उद्यान घूमने आए पर्यटकों का मोबाइल खो गया। ऐसे में जैविक उद्यान के स्टाफ ने कार्रवाई करते हुए पर्यटकों को मोबाइल लौटाया। पर्यटकों ने स्टाफ की ईमानदारी को सराहा। रेंजर नितिन शर्मा ने बताया कि नाहरगढ़ जैविक उद्यान में कार्यरत वनरक्षक श्रीराम चौधरी, होमगार्ड अजीम खान, वनरक्षक हनुमान गढ़वाल ने इसमें अहम भूमिका निभाई। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jun 2023 11:03:44 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान में 6.34 करोड़ और जयपुर में 70 लाख मोबाइल धारक</title>
                                    <description><![CDATA[1994 में हुआ आमजन के लिए संचार क्रांति धमाका: देशभर में अब कहीं पर भी किसी भी जगह से मोबाइल फोन के जरिए बात करने की सुविधा 1994 से शुरू हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/634-crore-in-rajasthan-and-70-lakh-mobile-holders-in/article-45772"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/88.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मोबाइल के 1996 में आगमन के साथ ही प्रदेश में आज तक करीब 6.34 करोड़ मोबाइल धारक हो गए। सबसे ज्यादा मोबाइल ग्राहकों की बढ़ोतरी इंटरनेट के साथ पिछले दस सालों में हुई। पिछले दस सालों में मोबाइल बिल में पांच सौ फीसदी तक कमी आई। जयपुर में 70 लाख मोबाइल धारक है। एक व्यक्ति दो या चार मोबाइल नम्बर रखता है। राजस्थान में आठ लाख 24 हजार 536 टेलिफोन(लैण्डलाइन) धारक है। <br />सबसे पहले 1850 में कोलकाता में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने इलेक्ट्रिक टेलिग्राफ सुविधा शुरू की थी। 1854 में यह सुविधा आमजन के लिए शुरू हुई। इसके लिए अलग से विभाग का गठन किया गया। आगरा, मुंबई, चेन्नई और बेंगलूरू में यह सुविधा शुरू हुई। 1880 में दो टेलिफोन कंपनियां आई। ओरियंटल टेलिफोन कंपनी और एंग्लो इंडियन टेलिफोन कंपनी। फिर 1881 में कोलकाता, मुंबई, चेन्नई और अहमदाबाद में औपचारिक शुरुआत हुई। </p>
<p>1994 में हुआ आमजन के लिए संचार क्रांति धमाका: देशभर में अब कहीं पर भी किसी भी जगह से मोबाइल फोन के जरिए बात करने की सुविधा 1994 से शुरू हुई। करीब 45 हजार रुपए का मोबाइल हैण्डसेट और 17 रुपए प्रति मिनट की आउटगोइंग और इनकमिंग कॉल के शुल्क के साथ सुविधा शुरू हुई। उस समय मोबाइल होना बड़ा स्टेटस सिम्बल माना जाता था। </p>
<p><strong>1996 में राजस्थान में मोबाइल आया</strong><br /> मरुप्रदेश में पेजर के बाद 1996 में मोबाइल का आगमन हुआ था, जो राजस्थान के कुछ जिलों में शुरुआत हुई थी। सिर्फ दो कंपनियों से शुरुआत हुई थी। आज बीएसएनएल, जियो, वोडाफोन और एयरटेल मोबाइल आपरेटर कंपनियां है। </p>
<p><strong>जीवन जीने का अभिन्न साधन बना मोबाइल</strong><br />अब सिर्फ बात करने का साधन नहीं, भुगतान करने, बुकिंग करवाने, स्टडी करने और मनोरंजन के अन्य सुविधाओं का उपयोग जरिए इंटरनेट किया जाता है। </p>
<p><strong>ये हैं दूरसंचार दिवस का इतिहास </strong><br />विश्व दूरसंचार दिवस, अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) की स्थापना और 1865 में पहले अंतरराष्ट्रीय टेलीग्राफ  सम्मेलन पर हस्ताक्षर करने की याद दिलाता है। यह 17 मई को हर साल मनाया जाता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 May 2023 10:34:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>बच्चों में कुपोषण और मोबाइल संस्कृति</title>
                                    <description><![CDATA[आज माता-पिता में संयम और धैर्य का अभाव पूरी तरह से घर कर चुका है। बच्चों की परवरिश में भी अभिभावक सरल और शॉर्ट कट ढूंढ़ते  हैं। ऊपर वर्णित घटनाक्रम में ऐसा ही कुछ हुआ था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/malnutrition-and-mobile-culture-in-children/article-29116"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/q-54.jpg" alt=""></a><br /><p>पिछले दिनों एक रेस्टोरेंट में परिवार के साथ खाना खाने के लिए जाना हुआ, हमारी टेबल के सामने की टेबल पर भी एक परिवार भोजन करने आया हुआ था। उनके परिवार में एक छोटी बच्ची भी थी जिसकी आयु शायद 5 या 6 वर्ष की  होगी। जैसे ही वेटर ने उन्हें भोजन परोसा, उस बच्ची की मां ने अपना मोबाइल उस बच्ची को देते हुए कहा, इससे खेल लो। जो बच्ची अभी तक चंचलता और जिज्ञासा से  इधर-उधर चीजों को उठा-उठा कर देख रही थी, बिल्कुल शांत हो गई और कुछ ही देर में वो अपने आसपास के माहौल से बेखबर हो, मोबाइल में पूरी तरह डूब गई। परिवार के अन्य सभी सदस्य, स्वादिष्ट भोजन का आनंद उठाने में व्यस्त हो गए। <br />बच्ची की मां को बीच-बीच में जब ख्याल आता तो रोटी का निवाला बच्ची के मुंह तक ले जाती, परंतु बच्ची की तवज्जो न पाकर वह रोटी का  निवाला वापस आकर  मां के मुंह में समा जाता। परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य का आंकलन करने से महसूस हुआ की बच्ची, किसी कुपोषण का शिकार लग रही थी, जबकि बच्ची की मां अतिपोषण का शिकार लग रही थी। अर्थात ओबेसिटी (मोटापे) से ग्रस्त थी।<br /><br />यह एक ऐसी मोबाइल सभ्यता और संस्कृति का उद्घोष है, जिसमें मोबाइल से निकलने वाली विकिरण से सेहत पर कोई कुप्रभाव पड़े या न पड़े, पर मोबाइल का आकर्षण ही परिवार के बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहा है। परिवार के वयस्क, समझदार सदस्य ही इस संस्कृति को उन्नत करने में लगे हुए हैं। आज माता-पिता में संयम और धैर्य का अभाव पूरी तरह से घर कर चुका है। बच्चों की परवरिश में भी अभिभावक सरल और शॉर्ट कट ढूंढ़ते  हैं। ऊपर वर्णित घटनाक्रम में ऐसा ही कुछ हुआ था। माता- पिता, बिना किसी हस्तक्षेप के शांति से रेस्टोरेंट के स्वादिष्ट भोजन का आनंद उठाना चाहते थे। ऐसे में छोटी बच्ची को प्यार और संयम से खाना कौन खिलाए? और अगर बच्ची को खाना खिलाने बैठेंगे तो अपना भोजन ठंडा और बेस्वाद हो जाता। ऐसे में बच्ची की मां ने बच्ची को व्यस्त करने का सबसे सरल तरीका निकाला और अपना मोबाइल बच्चे को गेम खेलने के लिए पकड़ा दिया। आजकल यह एक चलन बन चुका है, आप ब्यूटी पार्लर गई हैं बच्चा परेशान कर रहा है, उसे अपना मोबाइल देकर व्यस्त कर दिया जाता है। घर पर कोई काम है और बच्चा पिता को परेशान कर रहा है या बाहर खेलने की जिद कर रहा है तो पिता भी अपना मोबाइल निकाल कर देता है और  बच्चे को व्यस्त कर देता है। बिना यह जाने की बच्चे के शरीर और मस्तिष्क पर इसका क्या प्रभाव होगा।<br /><br />बच्चा नासमझ है, अपरिपक्व है, अपना भला बुरा नहीं जानता, उसे नहीं पता होता की उसे एक ऐसे उपकरण का आदी बनाया जा रहा है, जो उसके शारीरिक विकास में एक बड़ा अवरोधक है। जो उसकी शारीरिक शक्ति को धीरे-धीरे क्षीण करता जा रहा है। बच्चे को व्यस्त करने के इस सरल और शॉर्ट कट तरीके के परिणाम बच्चे और उसके परिवार के सदस्यों के लिए घातक सिद्ध हो सकते हैं। मोबाइल का अत्यधिक प्रयोग जब व्यस्कों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है तो बच्चों की संवेदनशील कोशिकाओं पर रेडिएशन का क्या प्रभाव पड़ता होगा, अनुमान लगाया जा सकता है। बच्चा निरंतर मोबाइल पर व्यस्त रहता है, शारीरिक खेलों से दूर होता जाता है। मोबाइल व्यवस्ता के कारण उसे भोजन एक दैनिक औपचारिकता से ज्यादा कुछ नहीं लगता अर्थात शारीरिक आवश्यकता से कम भोजन करना उसकी आदत बनती जा रही है। सूर्य के प्रकाश से दूर होना, बाहर की ताजी हवा से संपर्क खत्म हो जाना और भोजन के प्रति उदासीनता, बच्चे के स्वास्थ्य को बर्बाद करने के लिए काफी है।<br /><br />आधुनिक माता-पिता ने एक ऐसी संस्कृति को विकसित कर दिया है, जिसमें बच्चों और अभिभावकों के मध्य  दूरियां दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही हैं। पारिवारिक तानाबाना छिन्न-भिन्न होने के कगार पर खड़ा है। अगर हम अब भी नहीं संभले तो समय दूर नहीं जब बच्चे बड़े होने से पहले ही अभिभावक को भूल बैठेंगे। बच्चों को मोबाइल की नहीं, माता-पिता के प्यार और समय की जरूरत है । बच्चा चाहता है कि उसके अभिभावक उसे सुने, उससे बातचीत करें, उसके साथ पार्क में खेलें, डाइनिंग टेबल पर उसके साथ भोजन करें, सारा दिन की स्कूल की गतिविधियों, जो बच्चा बताना चाहता है, उसे धैर्य से सुने। अगर अभिभावक आज अपने बच्चे के लिए समय निकालेंगे, तो कल वे अपने अभिभावकों के लिए समय निकालेंगे। वरना आज बच्चा अकेलेपन का शिकार हो रहा है, कल आप अकेले रह जाएंगे। बच्चों को मोबाइल संस्कार और संस्कृति देने के स्थान पर पारिवारिक संस्कार और संस्कृति देने की ज्यादा आवश्यकता है।<br /><br />-राजेंद्र कुमार शर्मा<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Nov 2022 10:55:45 +0530</pubDate>
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