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                <title>एआई और इंटरनेट दो धारी तलवार </title>
                                    <description><![CDATA[भारत में डॉक्टर्स की कमी बड़ा कारण, गूगल से पूछ कर हजारों खुद की कर रहे उपचार।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ai-and-the-internet--a-double-edged-sword/article-158105"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-600-px)-(3)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दैनिक नवज्योति द्वारा आयोजित मासिक परिचर्चा की श्रंखला में गुरूवार को एआई व इन्टरनेट स्वास्थ्य संबंधी जानकारी समझने के लिए बहुत उपयोगी हो सकते हैं लेकिन इलाज तय करने के लिए उस पर कितना निर्भर हो सकते हैं ( हाउ मच टू रिलाई ओन इंटरनेट एन्ड एआई फॉर ट्रीटमेंट आफ एनी एइलमेंट) विषय पर आयोजित किया गया। इसमें गवर्नमेंट कॉलेज के् डाक्टर्स,आयुर्वेद, होम्योपैथ,वकील टेक्नोलॉजी से जुडे विशेषज्ञों ने भाग लिया। परिचर्चा में कहा गया कि  इलाज तय करने के लिए केवल इंटरनेट या एआई पर पूरी तरह निर्भर होना उचित नहीं है। आॅनलाइन उपलब्ध जानकारी सामान्य होती है, जबकि हर व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, चिकित्सा इतिहास और लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। कई बार इंटरनेट पर अधूरी, पुरानी या भ्रामक जानकारी भी मिल सकती है, जिससे अनावश्यक चिंता बढ़ सकती है। डॉक्टर की शारीरिक जांच, परीक्षणों और चिकित्सकीय अनुभव का विकल्प नहीं है। इसलिए इंटरनेट और एआई को स्वास्थ्य जागरूकता तथा प्रारंभिक जानकारी के साधन के रूप में उपयोग करना चाहिए, जबकि सही निदान और उपचार के लिए योग्य चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है।<br />प्रस्तुत है टॉक शो के अंश...  </p>
<p><strong>AI</strong><br />- केवल दी गई जानकारी के आधार पर जवाब देता है।<br />-  इनकी प्रत्यक्ष जांच नहीं कर सकता।<br />- केवल लिखे या बताए गए लक्षणों को समझता है।    <br />- उपलब्ध डेटा और पैटर्न के आधार पर सुझाव देता है।  <br />- रिपोर्टों का सामान्य विश्लेषण कर सकता है।    <br />- उपचार लागू नहीं कर सकता।                        </p>
<p><strong>Doctor</strong><br />- मरीज की शारीरिक जांच कर सकता है।    <br />- नाड़ी, रक्तचाप, तापमान आदि स्वयं माप सकता है।    <br />- चेहरे के भाव, चलने-फिरने और व्यवहार का अवलोकन कर सकता है।    <br />- मेडिकल इतिहास और वर्तमान स्थिति को जोड़कर निर्णय लेता है।<br />- जांच रिपोर्टों की व्यावहारिक व्याख्या कर सकता है।<br />- आवश्यकता पड़ने पर तुरंत उपचार शुरू कर सकता है। </p>
<p><strong>एआई सहयोगी, पर टच  थैरेपी जरूरी</strong><br />समाज में जिस तरह का परिवर्तन हो रहा है। डॉक्टर भी उसी के अनुरूप स्वयं को ढाल रहे हैं। एआई के इस युग में जिस तरह की गम्भीर बीमारियां हो रही हैं उनका सही इलाज करने के लिए मशीनों का उपयोग जांच में किया जा रहा है। लेकिन एआई का मतलब कृत्रिम बुद्धिमता है उसे इंसान ने ही बनाया है। ऐसे में यह बीमारियों की जानकारी के लिए सहयोगी तो हो सकता है लेकिन डॉक्टर नहीं बन सकता। बीमारी का सही इलाज तो डॉक्टर मरीज व उनके लक्षण को देखकर ही कर सकते हैं। बीमारी के इलाज में यदि  हर कोई व्यक्ति एआई का उपयोग करने लगेगा तो उसे लाभ होने की जगह नुकसान होने की संभावना अधिक है। अमेरिका में बिना डॉक्टर के इलाज के दवाई नहीं मिलती। जबकि भारत में हर कोई एआई व गूगल से पूछकर ही  स्वयं बीमारियों का उपचार मेडिकल से दवाईयां लाकर कर रहे हैं। यह मरीज के लिए हानिकारक हो सकता है।  <br /><strong>- डॉ. एस.एन. गौतम, वरिष्ठ न्यूरो सर्जन गर्वनमेंट मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>एआई जिसके लिए बना है वही करे उपयोग</strong><br />बदलते समय के साथ ही जिस तरह से तकनीकी युग आया है। उसमें इससे दूर नहीं रहा जा सकता। तकनीक व एआई का उपयोग जानकारी के लिए किया जाना तो अच्छा है। लेकिन इसका उपयोग चिकित्सा के क्षेत्र में हर किसी के द्वारा किया जाना सही नहीं है। एआई जिसके लिए बना है यदि वही इसका उपयोग करेंगे तो उसका लाभ होगा। लेकिन गलत व्यक्ति द्वारा उसका उपयोग करने पर उससे नुकसान ही होगा। मसलन परमाणु सही हाथ में होता है तो उर्जा उत्पन्न करता है। गलत हाथों में वही विस्फोट भी करता है। अर्थात एआई का भी सही जगह पर उपयोग होना ठीक है। कई मरीज डॉक्टर के पास आने से पहले ही एआई से पूरी जानकारी लेकर आते हैं। ऐसे में उन्हें बीमारी के बारे में समझाना मुुश्किल होता है। कई बार वह  समझने को तैयार नहीं होत।  एआई जानकारी के लिए तो सही है लेकिन चिकित्सा के क्षेत्र में बीमारी के इलाज में डॉक्टर ही सही सलाह दे सकते हैं। <br /><strong>-डॉ. नीलेश जैन, प्राचार्य  गर्वनमेंट मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong> एआई पर नेगेटिव कंटेंट ज्यादा आते है</strong><br />मैं कोरोल पार्क में मेडिकल स्टोर का संचालन करती हूं। मेरे पास बहुत सी बार नीट के विद्यार्थी आते और बताते हैं कि हमे नींद नहीं आ रही है, गोली दे दो, स्टूडेंट उसके बारे में एआई पर सर्च करके खुद ही बोलते है कि यह गोली ही दो,  हम बहुुत सी बार उनको समझाते है।  लेकिन नहीं मानते है और एआई के हिसाब से वहां पढ़ाई के दौरान खुद ही इलाज के बारे में एआई से सलाह ले लेते है। एआई पर नेगेटिव कंटेंट ज्यादा आते हैं। मेरा मानना है कि एआई  डॉक्टर और मरीज के बीच रिश्ता खत्म करने का काम कर रहा हैं। <br /><strong>-सीमा प्रजापति, मेडिकल स्टोर संचालिका जिला अध्यक्ष मानवाधिकार सहयोग संगठन </strong></p>
<p><strong> स्वास्थ्य के लिए एआई ठीक नहीं है</strong><br /> स्वास्थ्य के लिए एआई ठीक नहीं हैं। कई बार मरीज बिना डॉक्टर से परामर्श लिए गोलियां खा लेता है जिससे उनकी किडनी खराब होने की संभावना बनी रहती है। आमतौर पर देखा जाएं तो 60 साल के बाद इंसान में विभिन्न प्रकार के शारीरिक बदलाव आते है जिसमें कम सुनना, बार-बार किसी बात को बोलना, कम दिखाई देना सहित  अन्य बदलाव उसमें आते हैं। इस बारे में यदि आप एआई पर देखेंगे तो आपको विभिन्न प्रकार की बीमारी एआई दिखा देगा। पर ये लक्षण हर व्यक्ति में होते हैं, आयुर्वेद में भी साइट इफैक्ट होते हैं। आयुर्वेद में हर बीमारी  व इंसान के हिसाब से दवाई निर्धारित की जाती हैं। जो कि एआई नहीं कर सकता हैं।  हमारे पास सर्जरी,मेडिसन सहित अन्य के विद्यार्थी आते है जो कि एआई से जानकारी लेकर आते हैं पर उनको ये भी पता नहीं होता है कि इनका उपयोग कैसे करना हैं। रोगी को डॉक्टर से ही इलाज लेना चाहिए।  <br /><strong>- वैध नित्यानंद शर्मा, प्राचार्य राजकीय आयुर्वेद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय  </strong></p>
<p><strong>डाक्टर्स की कमी भी बड़ा कारण</strong><br />मेरा मानना है कि जब डॉक्टर के पास मरीज देखने का लोड़ अधिक होगा।  तब मरीज एआई का उपयोग करता हैं। और जब डॉक्टर पेशेंट के सवाल का जवाब नहीं दे पाता है तो मरीज एआई से बीमारी का समाधान सर्च करता है। एआई से यदि आप बीमारी के बारे में पूछते है तो वहां गलत जानकारी भी हो सकती है।  एआई एल्गोरिदम से चलता है। मरीज बार-बार एआई से पूछता है तो वहां कुछ भी बता सकता हैं। एआई पर  नेगेटिव कंटेंट ज्यादा वायरल होते हैं। एआई पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहिए। <br /><strong>- तरनदीप कौर, कॉ फाउंडर एन्ड सीईओ आइक्रा, आई स्टार्टअप</strong></p>
<p><strong>जानकारी ले सकते हैं उपचार नहीं</strong><br />एआई व गूगल के जमाने में आज हर व्यक्ति डॉक्टर बन रहा है। छोटी हो या बड़ी बीमारी होने पर खुद ही इन तकनीक का उपयोग कर इलाज व दवाई तलाश कर रहे हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से दवाईयां भी ले रहे हैं। जबकि एक दवाई का असर हर बीमारी में ऐसा जैसा नहीं हो सकता। हर व्यक्ति एआई का उपयोग कर स्यवं ही विशेषज्ञ बन रहा है।  एआई पर एलोपैथी से  होम्योपैथी व आयुर्वेदिक की जानकारी अधिक मिल रही है। इसमें कोई भी कुछ भी तथ्य डाल रहा है। इसमें साइड  इफेक्ट की संभावना कम है। जबकि डॉक्टर टच थैरेपी से मरीज का सही इलाज कर सकते हैं। एआई जानकारी दे सकता है सही इलाज नहीं कर सकता। <br /><strong>-महेश शारदा, इंजीनियर शारदा मेडिकल स्टोर</strong></p>
<p><strong>सोशल मीडिया के नुकसान भी और फायदे भी , सब बाजार का खेल</strong><br />एआई से स्वास्थ्य संबंधित प्रश्न पूछ सकते है पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। देखा जाए तो 2008 में एक साथ तीन चीजे बाजार में लॉंच हुई थी जिसमें बिटकॉइन सहित अन्य थी। एआई अभी मार्केट में आया है और इसको डवलप किया जा रहा हैं। जैसे की एक बार आप सोशल मीडिया पर किसी चीज के बारे में सर्च करेंगे तो आपको एफबी, इंस्ट्राग्राम सहित अन्य सोशल मीडिया  पर वे विज्ञापन दिनभर आते रहेंगे। बहुत सी बार हम एआई पर हम स्वास्थ्य संबंधित रिपोर्ट डालकर पूछते है तो वहां हमें जानकारी देता हैं। इसी तरह से हम अपनी जानकारी धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर शेयर करते जाते हैं। जिससे हमारी जानकारी हम सोशल मीडिया पर परोस रहे हैं।  पहले तो एफबी सहित अन्य सोशल मीडिया व रील से पता चलता था। पर अब एआई से पता चल रहा है कि अब किस के घर में क्या हो रहा हैं। मेरा मानना है कि टीनऐजर के लिए सोशल मीडिया ब्लॉक करना चाहिए। <br /><strong>- संजय कुमार विजय,एडवोकेट व स्कूल डायरेक्टर </strong></p>
<p><strong>बिना जानकारी स्वास्थ्य पर एआई का उपयोग हानिकारक</strong><br />परिवर्तन समाज का नियम है। पिछले कुछ समय में तकनीक के क्षेत्र में काफी तेजी से परिवर्तन हुआ है।  इस परिवर्तन में तकनीक जिसके लिए बनी है वही इसका उपयोग करे तो लाभ होगा। एआई का उपयोग करके ही कृषि के क्षेत्र में कई नवाचार किए हैं। एआई का उपयोग अलग-अलग कई क्षेत्रों में तो किया जा सकता है। लेकिन स्वास्थ्य पर इसका उपयोग बिना डॉक्टर की सलाह से करना गलत है। एआई बीमारी के उपचार में उतनी सही जानकारी नहीं दे सकता जितनी एक डॉक्टर मरीज को देखकर दे सकते हैं। इसलिए इलाज में तो एआई का उपयोग करना गलत होगा।  <br /><strong>- आर्यन सिंह, एआई एन्ड स्मार्ट टेक्नॉलॉजी विशेषज्ञ</strong></p>
<p><strong>इंटरनेट बुरा नहीं बस उपयोग कितना और कैसे  करें </strong><br />मेरे नजरिया से एआई बुरा नहीं है। यह हमनें कई तरह की जानकारी देता है। हमें प्रारंभिक सूचना और जानकारी मुहैया कराता है। लेकिन मामला निर्भरता का है। विश्वास करने का है। कई बार तकनीक पर निर्भरता रोग के लेवल तक पहुंच जाती है। एआई कीवर्ड के हिसाब से सूचना देता है। सूचना लेने या जानकारी के बाद डॉक्टर के पास जरूर जाना चाहिए। घर पर आॅक्सीमीटर से यदि आप प्लस नाप लें और ब्लड़ की आॅक्सीजन का पता लगा ले पर अंत में डॉ. से जरूर सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर की तरह  एआई इलाज नहीं कर सकता हैं। मात्र आपके कीवर्ड से आपको सलाह दे सकता है। <br /><strong>-जनार्दन राय, रिटायर्ड कमांडेंट बीएसएफ </strong></p>
<p><strong> गूगल व एआई का खिलाड़ी अधिक कर रहे उपयोग</strong><br />एआई व गूगल का उपयोग आज हर क्षेत्र में जानकारी के लिए तो किया ही जा रहा है। अब तो लोग इससे अपनी बीमारियों का भी इलाज करने लगे हैं। खिलाड़ी चाहे वह किसी भी खेल का है उसे चोट लगने या बीमार होने पर वह एआई व गूगल से ही उसका उपचार व दवाई तलाशकर उसका उपयोग कर रहा है। जिससे सबसे अधिक स्ट्रॉराइड का उपयोग किया जा रहा है। यह खिलाड़ी व उनके शरीर के लिए नुकसान दायक है। ऐसे में कई खिलाड़ी तत्काल तो राहत पा रहे हैं लेकिन भविष्य में यह उनके लिए हानिकारक हो रहा है। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। बीमारी या चोट में इलाज और दवाई तो डॉक्टर की सलाह से ही लेना बेहतर है। <br /><strong>-अशोक औदिच्य,सचिव बॉडी बिल्डिंग</strong></p>
<p><strong>इंटरनेट पर  गलत या अधूरी जानकारी हो सकती है</strong><br />मान लीजिए किसी व्यक्ति को साधारण सिरदर्द हुआ। वह इंटरनेट पर खोज करता है। वह माइग्रेन, ब्रेन ट्यूमर या अन्य गंभीर बीमारियों की जानकारी देखकर  डर जाता है और बार-बार खोज करने लगता है। इससे उसकी चिंता और बढ़ जाती है। एआई  बीमारी के बारे में सामान्य जानकारी देने, संभावित कारणों को समझाने के लिए,दवाओं, जांचों और रिपोर्टों को समझाने के लिए तो ठीक है लेकिन एआई आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री नहीं जानता, बॉडी की  जांच नहीं कर सकता, कई बीमारियों के लक्षण एक जैसे होते हैं। इंटरनेट पर गलत या अधूरी जानकारी हो सकती है। कभी-कभी गलत निष्कर्ष भी दे सकता है। ऐसे में डाक्टर की सलाह पर ही पूरा भरोसा करना चाहिए। <br /><strong>-डॉ. केवल कृष्ण डंग, वरिष्ठ श्वांस रोग विशेषज्ञ</strong></p>
<p><strong>डॉक्टर की जगह नहीं ले सकता एआई</strong><br />एआई का उपयोग आज की आवश्यकता है। इससे बिना नहीं रहा जा सकता। लेकिन हर जगह इसका उपयोग नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से स्वास्थ्य के क्षेत्र में बिना डॉक्टर की सलाह के एआई का उपयोग करना नुकसान दायक हो सकता है। हर बीमारी के कई इलाज हो सकते हैं लेकिन हर इलाज हर व्यक्ति के लिए सही हो यह जरूरी नही हैं। ऐसे में जो काम डॉक्टर का है वह डॉक्टर को ही करने देना चाहिए। एआई सलाह व जानकारी दे सकता है लेकिन डॉक्टर की जगह नहीं ले सकता। <br /><strong>- चेतन सैनी, निदेशकसुमंगलम ग्रुप</strong></p>
<p><strong>इलाज में विश्वसनीय तो डॉक्टर ही है</strong><br />एआई सूचनाओं का भंडार है।  एआई का उपयोग करके जानकारी प्राप्त की जा सकती है। वहां एक बीमारी के कई इलाज हो सकते हैं। लेकिन वह इलाज हर बीमारी व व्यक्ति पर अलग-अलग काम कर सकता है। ऐसे में एआई का उपयोग बीमारी के इलाज में व्यक्ति को स्वयं नहीं करना चाहिए। साइब्रर कांड्रीरिया की स्थिति बहुत खतरनाक है। इससे एंजाइटी बढ़ती है। जो रोग का रूप ले लेती है। एआई वही बताता है जो उसमें फीड किया हुआ है उसका अपना कोई निर्णय नहीं होता है। बीमारी में डॉक्टर का इलाज ही सही रहता है। इलाज में डॉक्टर ही विश्वसनीय है। <br /><strong>-आशुतोष माथुरिया, प्रिंसीपल, महात्मा गांधी मल्टीपरपज स्कूल गुमानपुरा</strong></p>
<p><strong>विकसित देश के लिए तकनीकी  जरूरी</strong><br />अभी की युवा पीढ़ी एआई का उपयोग कर रही हैं और हेल्थ सहित अन्य विभिन्न मामलों में एआई से सलाह ले रही है जो कि गलत हैं। वर्मा के अनुसार इंसान कितनी भी तरक्की कर ले पर उसको अपनी जड़े नहीं छोड़नी चाहिए। यदि आजकल के युवा तकनीकी पर निर्भर रहेंगे तो दिक्कत आएंगी। अब रोबोटिक सर्जरी हो रही हैं। यदि किसी की तबीयत खराब है तो वहां एआई से सलाह लेने के बजाय डॉक्टर के पास जावे और इलाज लेंवे। वहीं हम अभी   इसी फील्ड़ में कार्य कर रहे है संभवतया 2027 तक हम जो डॉक्टर ओपीडी मे मरीज देखते है उनके लिए भी कुछ तकनीकी लेकर आ रहे हैं। उदाहरण देकर समझाया कि हमारे साथी को पीलिया के लक्षण दिखा रहे थे हमने जब डॉक्टर को दिखाया तो वहां अलग ही बीमारी निकाली। फिर हमने डॉक्टर की सलाह से इलाज करवाया। वहीं इसमें पारिवारिक संस्कार भी  महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तकनीक का सहारा लेमना चाहिए। तभी हम विकास कर सकेंगे। लेकिन स्वास्थ्य  संबंधित मामलों में केवल चेट जीपीटी या इंटरनेट पर ही भरोसा करना नुसान पहुंचा सकता है। <br /><strong>-जितेंद्र वर्मा, स्टार्टअप आर्किटेक्ट एन्ड प्रोजेक्ट राइटर(एआई)  </strong></p>
<p><strong>आधी-अधूरी जानकारी में खुद ही उलझ जाते हैं</strong><br />बच्चे आज कल घरवालों से बात नहीं करते और घर वाले भी बच्चों से सीधे संपर्क में नहीं रहते है। जिससे अभिभावक  बच्चों के बारे में समझ नहीं पाते और उनकी समस्याओं को भी नहीं समझ पाते।  बाद में डॉक्टरों से समाधान पूछते हैं। उसके बाद एआई पर समाधान पूछने के बाद डॉक्टर के पास पहुंचते है और अपना अनुभव बताते हैं। जिसके बाद एआई से परामर्श लेते है जो मरीज को उल्टा उलझा देता हैं। अंत में डॉक्टर के पास जाते हैं और एआई से आधी-अधूरी जानकारी लेकर लोग खुद ही उलझ जाते है। <br /><strong>-वंदना योगी, वाईस प्रिंसिपल गवर्नमेंट गर्ल्स स्कूल वल्लभनगर</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 11:02:29 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान में इंटरनेट सेवाओं पर रोक : ऑफलाइन मोड में देश, साइबर हमले के बाद किया यह उपाय</title>
                                    <description><![CDATA[राजनीतिक दृष्टिकोण व्यक्त करने की आम जनता की क्षमता के साथ साथ उनके स्वतंत्र संवाद और सुरक्षा चेतावनी के पालन की संभावना कम होती है।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ban-on-internet-services-in-iran-this-remedy-was-taken/article-118115"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/ban.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान में कथित तौर पर इंटरनेट सेवाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है और पूरा देश लगभग ऑफलाइन मोड में चला गया है। ईरान इंटरनेशनल ने ये खबर दी है। इंटरनेट सेवाओं पर नजर रखने वाले संगठन नेटब्लॉक्स के मुताबिक ईरान में राष्ट्रीय स्तर पर इंटरनेट पर रोक लगा दी गयी है। नेटब्लॉक्स ने रिपोर्ट में कहा कि ईरान 60 घंटों से ऑफलाइन है। आंकड़ों के मुताबिक इंटरनेट सेवाएं बंद होने से इजरायल के साथ युद्ध के दौरान राजनीतिक दृष्टिकोण व्यक्त करने की आम जनता की क्षमता के साथ साथ उनके स्वतंत्र संवाद और सुरक्षा चेतावनी के पालन की संभावना कम होती है।  </p>
<p>रिपोर्ट की पुष्टि अन्य अंतरराष्ट्रीय नेट निगरानी समूहों, जैसे कि आईओडीए ने भी की है। जिन्होंने कहा कि ईरान में  नेट ट्रैफ़िम का स्तर एक सप्ताह पहले की तुलना में 97 फीसदी कम है। यह उपाय देश के क्रिप्टो एक्सचेंज पर हैकर्स द्वारा साइबर हमले के  बाद किए गए हैं, जिसने ईरान के शेयरों को बुरी तरह प्रभावित किया है। ईरान के अधिकारियों ने पहले कहा था कि यदि आवश्यक हुआ, तो इजरायल द्वारा उसके साइबरस्पेस पर हमलों के कारण आम जनता के  लिए इंटरनेट तक पहुँच को प्रतिबंधित किया जा सकता है। इजरायल के मनोवैज्ञानिक युद्ध से गलत सूचना को रोकने के लिए वैश्विक नेटवर्क को  पूरी तरह से बंद करने के उपायों पर भी विचार किया गया है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Jun 2025 16:32:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>अब छात्राओं व वर्किंग वूमन को कोटा में मुफ्त मिलेगा कमरा, बिजली और इंटरनेट</title>
                                    <description><![CDATA[छात्राओं को न केवल किराये बल्कि बिजली बिल व इंटरनेट के महंगे खर्चों से निजात मिल सकेगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-girls-and-working-women-will-get-free-room--electricity-and-internet-in-kota/article-102512"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/78-(2)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दूर दराज के गांव-कस्बों व हाड़ौती के अन्य जिलों से कोटा में कमरा लेकर पढ़ने वाली छात्राओं व कामकाजी महिलाओं के लिए खुश खबरी है। अब उन्हें शहर के बीचोंबीच रहने को कमरा, बिजली-पानी और इंटरनेट तक की सुविधा मुफ्त मिल सकेगी। वहीं, शाम के वक्त टहलने व खेलने के लिए ग्राउंड भी मिलेगा। इतना ही नहीं, महिलाओं व छात्राओं की सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इससे छात्राओं को न केवल किराये बल्कि बिजली बिल व इंटरनेट के महंगे खर्चों से निजात मिल सकेगी।  दरअसल, कोटा संभाग के सबसे बड़े गर्ल्स कॉलेज  जेडीबी में शुरू होने जा रही है। पिछले 5 साल से बंद कन्या छात्रावास फिर से शुरू होने जा रहा है। जिसमें जेडीबी साइंस व आर्ट्स कॉलेज में अध्ययनरत छात्राओं को तो हॉस्टल में कमरा मिलेगा ही साथ ही शहर के अन्य शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत छात्राएं भी हॉस्टल में रह सकेंगी। इसके अलावा कॉलेज प्रशासन द्वारा शहर में नौकरी-पेशा करने वाली महिलाओं को भी हॉस्टल में रहने को कमरा देगी। कॉलेज प्राचार्य प्रोफेसर अजय विक्रम सिंह चंदेल की यह अनूठी पहल बालिका शिक्षा में मील का पत्थर साबित होगी। </p>
<p><strong>छात्रावास में नि:शुल्क मिलेगा प्रवेश</strong><br />जेडीबी साइंस कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर अजय विक्रम सिंह चंदेल ने बताया कि दिसम्बर 2023 से ही गुगल फॉर्म के जरिए आवेदन आमंत्रित कर लिए गए थे। आॅनलाइन 30 से ज्यादा आवेदन आए थे। लेकिन,  भौतिक रूप से 10 छात्राएं ही आवेदन जमा करवाने कॉलेज आई हैं। ऐसे में संख्या कम होने और कमरे अधिक होने के चलते जेडीबी साइंस व आर्ट्स की छात्राओं के अलावा अन्य कॉलेज में अध्ययनरत छात्राओं को भी हॉस्टल में प्रवेश दिए जाएंगे। वहीं, वर्किंग वुमन को भी यह सुविधा दी जाएगी। उन्हें कमरा, बिजली-पानी व वाईफाई की सुविधा हॉस्टल में नि:शुल्क दी जाएगी।</p>
<p><strong>भोजन का खर्चा स्वयं को करना होगा वहन</strong><br />प्राचार्य अजय चंदेल ने बताया कि हॉस्टल में छात्राओं को कमरा, बिजली, पानी और वाईफाई इंटरनेट की सुविधा मुफ्त दी जाएगी। हालांकि, उन्हें भोजन, सिक्योरिटी गार्ड व हॉस्टल में रहने वाली मेट का मामूली खर्चा  स्वयं वहन करना होगा। छात्राओं की संख्या बढ़ने पर हॉस्टल में इवनिंग स्पोर्ट्स गेम्स भी करवाए जाएंगे।  इसके लिए बेडमिंटन व हैंडबॉल कोर्ट भी बनवाए जाएंगे। हॉस्टल में सौलर जनरेटर भी लगे हुए हैं। </p>
<p><strong>दो मंजिला हॉस्टल, 40 से ज्यादा कमरे</strong><br />जेडीबी कॉलेज में गर्ल्स हॉस्टल दो मंजिला है। जिसमें 90 छात्राएं रह सकती हैं। हॉस्टल में करीब 40 से 45 कमरे हैं। इसमें कीचन, 2 बड़े हॉल व 1 कॉमन रूम है। इसके अलावा बड़ा आंगन हैं, जिसमें गेम्स खेल सकती हैं। कॉलेज प्रशासन ने अपने लेवल पर हॉस्टल की साफ-सफाई व मेंटिनेंस से संबंधित तैयारियां शुरू कर दी हैं। यह हॉस्टल 5 फरवरी से शुरू कर दिया जाएगा। छात्राओं के आवदेन भी आ चुके हैं। वहीं, सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। </p>
<p><strong>5 साल बाद फिर से खुल रहा</strong><br />जानकारी के अनुसार, कोविड से पहले तक कॉलेज कैम्पस में हॉस्टल संचालित होता था। जिसमें जेडीबी साइंस, कॉमर्स व आर्ट्स की छात्राएं रहती थीं। लेकिन, सितम्बर 2020 में कोरोना महामारी के बाद से हॉस्टल संचालन बंद कर दिया गया था। तब से अब तक छात्रावास पर ताले लगे हैं। जिसे फिर से शुरू करने के लिए कॉलेज आयुक्तालय से परमिशन मिल चुकी है। ऐसे में कॉलेज प्रशासन 5 फरवरी से हॉस्टल का संचालन किया जाएगा। </p>
<p><strong>मेंटिनेंस के लिए 31.31 लाख का बजट स्वीकृत</strong><br />जेडीबी महाविद्यालय में स्थित दो मंजिला कन्या छात्रावास  के मेंटिनेंस के लिए कॉलेज आयुक्तालय  द्वारा 31.31 लाख रुपए का बजट स्वीकृत कर दिया गया है। जिससे छत व टॉयलेट रिपेयरिंग, रंगाई पुताई,  वाटर कूलर, आरओ, बिजली वायरगिं, पंखे लगवाने व फ्लोरिंग सहित कई आवश्यक कार्य करवाएं जाने हैं।  </p>
<p>हॉस्टल, सभी कॉलेज छात्राओं के लिए खुला रहेगा।  हालांकि, प्राथमिकता जेडीबी साइंस व आर्ट्स की छात्राओं की है लेकिन, सीटें खाली होने से अन्य कॉलेजों में अध्ययनरत उन छात्राओं को भी एडमिशन दिए जाएंगे जो बाहर किराए पर कमरा लेकर रहती हैं। उनसे हॉस्टल में कोई किराया नहीं लिया जाएगा। बल्कि कमरा, बिजली-पानी और वाईफाई इंटरनेट की सुविधा भी नि:शुल्क दी जाएगी। लेकिन, छात्राओं को भोजन, सिक्योरिटी गार्ड व मेट का मामूली खर्चा स्वयं वहन करना होगा। वहीं, वर्किंग वुमन भी छात्रावास में रह सकेंगी। छात्राओं की संख्या बढ़ने पर हॉस्टल में इवनिंग गेम्स भी करवाए जाएंगे। शाम 6-7 बजे के बाद छात्राओं  का हॉस्टल से बाहर जाने पर रोक रहेगी। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। <br /><strong>- प्रो. अजय विक्रमसिंह चंदेल, प्राचार्य जेडीबी साइंस कॉलेज</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jan 2025 15:52:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंटरनेट की बढ़ती स्पीड से कम होता प्रजनन दर</title>
                                    <description><![CDATA[सीआईईडी के संस्थापक कुणाल ने एक परिकल्पना पेश की कि एक विकसित होता परिदृश्य जन्म दर में कमी का कारण है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/fertility-rate-decreases-due-to-increasing-internet-speed--says-kunal/article-95775"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6633-copy155.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत में प्रति महिला प्रजनन दर 2.01 है। प्रजनन दर का अर्थ है-महिला द्वारा जन्म दिए गए बच्चों की औसत संख्या। जबकि इस सम्बंध में आदर्श औसत दर 2.1 होता है। इस तरह यह इस आदर्श आंकड़े से कम है। यद्यपि वर्ष 2024 में भारत दुनिया में सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है। इसकी कुल जनसंख्या 1.45 अरब है। फिर भी इसकी प्रजनन दर और बच्चों के जन्म लेने की दर में लगातार कमी आ रही है। इंटरनेट की बढ़ती तेजी से जन्म दर में कमी आने की बात कही जा रही है। कुछ लोगों को लगता है कि जन्म दर में कमी के कारण भारत को भूजनसांख्यिकी फायदे हो रहे हैं। </p>
<p>सीआईईडी के संस्थापक कुणाल ने एक परिकल्पना पेश की कि एक विकसित होता परिदृश्य जन्म दर में कमी का कारण है। कुणाल ने एक पोस्ट में कहा है कि देश का इंटरनेट स्पीड बढ़ रहा है और यही जन्म दर में कमी का कारण है।  यही कारण है कि भारत की जनसंख्या वृद्धि की दर में कमी का कारण इंटरनेट की स्पीड बढ़ना है।  जैसा कि पहले ही कहा जा चुका है भारत जनसंख्या के मामले में विश्व का सबसे बड़ा देश है। वर्ल्ड ओ मीटर के अनुसार भारत की जनसंख्या 1,456,100,990 है। यह दुनिया की कुल जनसंख्या का 17.78 प्रतिशत है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Nov 2024 09:56:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी स्कूलों में फ्री टेबलेट के साथ अब 2 साल तक मिलेगा मुफ्त इंटरनेट</title>
                                    <description><![CDATA[योजना का मकसद यह है कि टेबलेट के साथ इंटरनेट फ्री मिलने से बच्चों को आॅनलाइन पढ़ाई में सहूलियत मिल सकेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/govt-schools-will-now-get-free-internet-for-2-years/article-81479"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/shiksha-sankul.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के सरकारी स्कूलों के प्रतिभावान बच्चों के लिए राज्य सरकार अब टेबलेट के साथ तीन साल का फ्री इंटरनेट कनेक्शन भी देने जा रही है। इसमें 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा के मेरिटोरियस छात्रों को यह फ्री इंटरनेट सिम उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके लिए शिक्षा विभाग 55 हजार 800 सिम खरीदने जा रहा है। सिम में बच्चों को तीन साल तक प्रतिदिन एक जीबी डाटा नि:शुल्क मिलेगा। राज्य सरकार की ओर से अब तक प्रदेश के 8वीं, 10वीं और 12वीं की परीक्षा में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले बच्चों को अब तक सिर्फ टेबलेट ही दिए जाते थे, लेकिन अब विभाग की ओर से टेबलेट के साथ ही तीन साल का इंटरनेट भी दिया जाएगा। योजना का मकसद यह है कि टेबलेट के साथ इंटरनेट फ्री मिलने से बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई में सहूलियत मिल सकेगी।</p>
<p><strong>55 हजार 800 सिम खरीदेंगे</strong><br />माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इसके लिए पहले चरण में करीब 55 हजार 800 सिम खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए योजना पर करीब 18 करोड़ रुपए सरकार खर्च करने जा रही है। शिक्षा विभाग के अनुसार इसी महीने के अंत तक यह खरीद प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी और आने वाले सत्र में बच्चों को टेबलेट के साथ ही तीन साल का फ्री इंटरनेट भी मिल सकेगा। इसके तहत प्रतिदिन एक जीबी डेटा यानी प्रतिमाह तीस जीबी डेटा मिल सकेगा और काम न आने पर यह डेटा अगले माह जुड़ सकेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Jun 2024 10:31:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंटरनेट पर बेटियां रखें खास खयाल, निजी फोटो न करें साझा</title>
                                    <description><![CDATA[यह डे 2004 में ईयू सेफबॉर्डर्स परियोजना के तहत शुरू हुआ। सुरक्षित इंटरनेट दिवस अब दुनिया भर के करीब 170 देशों में मनाया जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/daughters-take-special-care-on-the-internet-do-not-share-photo/article-69259"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/photo-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। वर्तमान में इंटरनेट सबकी जरूरत बन गया है। इसके कई छोटे से लेकर बड़े लाभ हैं, लेकिन यदि इंटरनेट का उपयोग करते समय सावधानियां नहीं बरती जाएं तो बड़ी घातक स्थिति पैदा हो सकती है। खासकर छात्र-छात्राएं इंटरनेट का उपयोग करते समय पूरी सतर्कता बरतें और बेटियां अपनी जीवन से जुड़ी जानकारियों को किसी भी सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर नहीं करें। किसी के भी झांसे में नहीं आएं। सभी के लिए, विशेषकर बच्चों और युवाओं के लिए सुरक्षित और बेहतर इंटरनेट के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल छह फरवरी को सुरक्षित इंटरनेट दिवस मनाया जाता है। यह डे 2004 में ईयू सेफबॉर्डर्स परियोजना के तहत शुरू हुआ। सुरक्षित इंटरनेट दिवस अब दुनिया भर के करीब 170 देशों में मनाया जाता है।</p>
<p><strong>क्या है सेफ इंटरनेट</strong><br />आज बच्चे, छात्र-छात्राएं, युवा और वृद्ध सभी इंटरनेट का उपयोग करते हैं। इंटरनेट के जितने फायदे हैं उसके नुकसान भी उतने ही हैं। इंटरनेट के इस्तमाल से कई तरह के अपराध भी होते हैं। इनमें ऑनलाइन फ्रॉड भी शामिल है। ऐसे में लोगों को इंटरनेट पर होने वाले साइबर क्राइम से बचाने और इंटरनेट के बारे में जागरूक करने के लिए हर साल सेफ  इंटरनेट डे मनाया जाता है।</p>
<p>आज बच्चे, छात्र-छात्राएं, युवा और वृद्ध सभी इंटरनेट का उपयोग करते हैं। इंटरनेट के जितने फायदे हैं उसके नुकसान भी उतने ही हैं। इंटरनेट के इस्तमाल से कई तरह के अपराध भी होते हैं। इनमें आॅनलाइन फ्रॉड भी शामिल है। ऐसे में लोगों को इंटरनेट पर होने वाले साइबर क्राइम से बचाने और इंटरनेट के बारे में जागरूक करने के लिए हर साल सेफ  इंटरनेट डे मनाया जाता है।</p>
<p><strong>साइबर बुलिंग बड़ा खतरा</strong><br />साइबर बुलिंग एक आॅनलाइन रैगिंग है। यह इंटरनेट के माध्यम से होने वाला शोषण है। इसमें किसी को धमकी देना, उसके खिलाफ  अफवाह फैलाना, भद्दे कमेंट, अश्लील भाषा, फोटो का गलत इस्तेमाल करना शामिल है। आॅनलाइन गेम के जाल में फंसा कर रुपए ऐंठना भी बुलिंग का नया प्रचलित तरीका है। </p>
<p><strong>न भूलें लॉगआउट करना </strong><br />हम कई बार अकाउंट को लॉगिन करने के बाद लंबे समय तक उपयोग न होने के बावजूद उसे लॉग आउट नहीं करते। ऐसे में लॉग आउट ना होने की स्थिति में अवैध गतिविधियां बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है।</p>
<p>स भी को इंटरनेट का उपयोग करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। हमारी एक गलती हमारा बड़ा नुकसान करा सकती है। बिना वेरिफिाई किए किसी भी लिंक को ओपन नहीं करें और ना ही किसी को अपनी जानकारी शेयर करें। <br /><strong>- डॉ. रवि प्रकाश मेहरड़ा, डीजी साइबर क्राइम</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Feb 2024 11:44:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मेघालय में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध को बढ़ाया गया</title>
                                    <description><![CDATA[असम पुलिस की 22 नवंबर को वेस्ट जैनतिया हिल्स जिले के मुखरोह गांव में की गयी गोलीबारी में मेघालय के 5 लोग और एक असम का वनरक्षक मारा गया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ban-on-mobile-internet-services-extended-in-meghalaya/article-30833"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/int-ban.jpg" alt=""></a><br /><p>शिलांग। मेघालय सरकार ने राज्य के पूर्वी 7 जिलों में लगाए गए मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध को सुबह 10:30 बजे से 48 घंटों के लिए बढ़ा दिया है। सरकार ने गत 24नवंबर को यह प्रतिबंध लगाया था। एक अधिकारी ने बयान में कहा कि शांति और कानून बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया है। गौरतलब है कि असम पुलिस की 22 नवंबर को वेस्ट जैनतिया हिल्स जिले के मुखरोह गांव में की गयी गोलीबारी में मेघालय के 5 लोग और एक असम का वनरक्षक मारा गया था।</p>
<p>राज्य के प्रमुख गृह सचिव शकील पी अहमद ने कहा कि राज्य के 7 जिलों में 27 नवंबर सुबह 10:30 बजे तक मोबइल इंटरनेट सेवा प्रतिबंधित रहेगी, जिसमें यह जिले वेस्ट जैनतिया हिल्स, ईस्ट जैनतिया हिल्स, ईस्ट खासी हिल्स, री-भोई, इस्टर्न वेस्ट खासी हिल्स, वेस्ट खासी हिल्स और साउथ वेस्ट खासी हिल्स है। सातों जिलों में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार दूसरी बार इंटरनेट सेवा प्रतिबंध को बढ़ाया गया  है।</p>
<p>अहमद ने कहा कि पुलिस मुख्यालय से ईस्ट खासी हिल्स और राज्य के अन्य जिलों में नागरिकों पर हमले, आगजनी और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की रिपोर्ट प्राप्त हुई हैं।गृह मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि संदेश भेजने वाली एप्लिकेशन व्हाट्सएप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब आदि के जरिए सूचनाओं और तस्वीरों एवं वीडियो को भेजा जा सकता है जिससे कानून एवं व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है। मुख्य सचिव डोनाल्ड फिलिप्स वाहलांग ने अन्य सरकारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ राज्य में हिंसा की घटनाओं पर समीक्षा करते हुए सुरक्षा इंतजामों पर चर्चा की।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Nov 2022 19:42:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>करौली में दंगे के बाद 80 KM दूर मेहंदीपुर बालाजी में इंटरनेट बंद होने से श्रद्धालुओं सहित लोग है परेशान </title>
                                    <description><![CDATA[आस्थाधाम मेहंदीपुर बालाजी में 6 दिनों से इन्टरनेट बंद है, जिससे श्रद्धालुओं सहित लोग परेशान है। करौली में नव संवत्सर के दिन 2 अप्रैल को बाइक रैली पर पथराव के बाद हिंसा व आगजनी से पूरे जिले में इंटरनेट बंद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dausa/peoples-are-disturbing-due-to-internet-closed/article-7517"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/46546546.jpg" alt=""></a><br /><p>मेहंदीपुर बालाजी। आस्थाधाम मेहंदीपुर बालाजी में 6 दिनों से इन्टरनेट बंद है, जिससे श्रद्धालुओं सहित लोग परेशान है। करौली में नव संवत्सर के दिन 2 अप्रैल को बाइक रैली पर पथराव के बाद हिंसा व आगजनी के बाद से पूरे जिले में इंटरनेट बंद है। इसका असर दौसा जिले के मेहंदीपुर बालाजी कस्बे में भी देखने को मिल रहा है। इंटरनेट बंद होने से स्थानीय लोगों समेत श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।</p>
<p>श्रद्धालुओं को रिजर्वेशन व बैकिंग सुविधाओं के लिए भटकना पड़ रहा है। लोगों ने इंटरनेट बहाली की मांग की है। गौरतलब है कि मेहंदीपुर बालाजी कस्बा दौसा व करौली जिले में बंटा हुआ है। ऐसे में यहां पहाड़ व मेहंदीपुर गांव में लगे मोबाइल टॉवर करौली जिले की राजस्व सीमा में आते है, जिन्हें करौली जिला प्रशासन ने अग्रिम आदेशों तक बंद किया हुआ है। इसके चलते पूरे बालाजी कस्बे में नेटबंदी से लोग परेशान है। दौसा जिले के क्षेत्र में बैंकिंग व ई-मित्र सेवाओं पर विपरीत असर पड़ रहा है। श्रद्धालुओं को रेल-बस रिजर्वेशन के लिए समस्या का सामना करना पड़ रहा है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>दौसा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Apr 2022 11:27:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>अब इंटरनेट बंद करने से पहले जनता को देनी होगी सूचना</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार ने संभागीय आयुक्तों को दी दोबारा से पावर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%85%E0%A4%AC-%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE/article-2676"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/internet-explorer-logo.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में परीक्षाओं के दौरान अब इंटरनेट बंद करने से पहले आमजन को सूचना देनी होगी। इस संबंध में राज्य सरकार ने नए सिरे से संभागीय आयुक्तों को शक्तियां दी है। गृह विभाग ने आदेश जारी कर सभी संभागीय आयुक्तों को निर्देश दिए हैं कि इंटरनेट बंद करने से पहले लोगों को बताना होगा।   <br /><br /><strong>वेबसाइट पर अपलोड करेंगे आदेश</strong><br />आदेश में संभागीय आयुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि इन शक्तियों का प्रयोग करने पर कोई आदेश पारित किया जाता है तो उसे जनसामान्य के लिए सार्वजनिक किए जाए तथा उसे वेबसाइट पर अपलोड किया जाए। इस सम्बंध में दूरसंचार मंत्रालय को भी आदेश की प्रति भेजी गई है।  </p>
<p><br /><strong>आमजन में है असंतोष</strong><br />प्रदेश में इंटरनेट बंद करने को लेकर लोगों में असंतोष फैला हुआ है। प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान नकल और अन्य गड़बड़ियां रोकने के लिए इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया जाता है। हालात यह है कि पिछले कुछ समय में इंटरनेट बंद करने के मामले ज्यादा बढ़ गए हैं। कई मौकों पर चार दिन तक सुबह से शाम तक इंटरनेट सेवा बंद कर दी जाती है। इससे परीक्षा के दौरान नकल पर लगाम लगी या नहीं, लेकिन लोगों को आवश्यक कामों के लिए भी परेशानी जरूर उठानी पड़ी है।<br /><br /><strong>हाईकोर्ट में दायर है पीआईएल</strong><br />इंटरनेट बंद करने को लेकर जोधपुर हाईकोर्ट में एक और जयपुर हाईकोर्ट में दो पीआईएल दायर की गई है। इन पर कोर्ट में सुनवाई चल रही है। राज्य सरकार की ओर पक्ष रखने के लिए गृह विभाग ने संभागीय आयुक्तों को नए सिरे से इंटरनेट बंद करने की शक्तियां देने के आदेश जारी किए हैं।<br /><br /></p>
<p><strong>केवल पब्लिक इमरजेंसी  के लिए इंटरनेट बंद</strong><br />प्रमुख शासन सचिव गृह की ओर से मंगलवार को जारी आदेश में कहा गया है कि दूरसंचार अस्थाई सेवा निलम्बन (लोक आपात या लोक सुरक्षा)(नियम 2017 के नियम 2;1) के आधार पर संभागीय आयुक्त जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, भरतपुर, अजमेर तथा बीकानेर को दूरसंचार सेवाओं के अस्थाई निलम्बन की शक्तियां दी गई हैं। आदेश में कहीं भी परीक्षा के  दौरान इंटरनेट बंद करने का जिक्र नहीं किया गया है, केवल संभागीय आयुक्तों को उनके क्षेत्राधिकार में लोक आपात और लोक सुरक्षा की स्थिति में दूरसंचार सेवाओं के अस्थाई निलम्बन की शक्तियां देने की बात कही है।  <br /><br /><strong>पूर्व के आदेशों पर अतिक्रमण</strong><br />प्रमुख सचिव गृह की ओर से जारी आदेशों में विभाग की ओर से दो सितम्बर 2017 और 22 अक्टूबर 2018 एवं 24 सितम्बर 2021 तथा 22 अक्टूबर को जारी एडवाइजरी को अतिलंघित किया है। यानी ये आदेश नए आदेशों को प्रभावित नहीं करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Nov 2021 10:53:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नेटबंदी के खिलाफ दायर याचिकाओं को सुनवाई के लिए सीजे को भेजा</title>
                                    <description><![CDATA[नेटबंद मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AB-%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B0-%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AD%E0%A5%87%E0%A4%9C%E0%A4%BE/article-1993"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/hc8.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित कराने के दौरान राज्य सरकार द्वारा नकल रोकने के लिए मोबाइल इंटरनेट बंद करने के खिलाफ दायर याचिकाओं को सुनवाई के लिए सीजे के पास भेजते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। जस्टिस एमएम श्रीवास्तव और जस्टिस फरजंद अली की खंडपीठ ने यह आदेश नीरज कुमार यादव सहित अन्य की जनहित याचिकाओं पर दिए। मामले की सुनवाई के दौरान एजी ने अदालत से जवाब के लिए समय मांगा। महाधिवक्ता ने कहा कि नेटबंदी के मुद्दे पर एक याचिका मुख्यपीठ, जोधपुर में भी लंबित हैं और उस पर नवंबर के अंतिम सप्ताह में उनमें सुनवाई होनी है। इसलिए इन सभी याचिकाओं की सुनवाई एक साथ करनी चाहिए।</p>
<p><br /> याचिकाओं में कहा गया कि प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन के दौरान आए दिन मोबाइल इंटरनेट को बंद किया जाता है। नकल रोकने के आधार पर रोके गए इंटरनेट से आमजन को काफी परेशानी होती है। नेटबंदी होने से मोबाइल के जरिए होने वाले सभी तरह के ऑन लाइन ट्रांजेक्शन रुक जाते हैं। साथ ही लोग कैब इत्यादि परिवहन सुविधाओं का उपयोग भी नहीं कर पाते। वहीं बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं भी प्रभावित होती हैं। ऑनलाइन व्यापार रुकने से सरकार को राजस्व हानि भी होती है। इसलिए नेटबंदी को अवैध व असंवैधानिक घोषित किया जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Oct 2021 15:23:23 +0530</pubDate>
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