<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/agricultural/tag-7773" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>agricultural - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/7773/rss</link>
                <description>agricultural RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>असर खबर का.... मिली सौगात: भामाशाह मंडी विस्तार का रास्ता हुआ साफ, 96 हैक्टेयर में विस्तार को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[एशिया की सबसे बड़ी भामाशाहमंडी का परिसर छोटा पड़ने से किसानों और व्यापारियों को  परेशानियां आ रही थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-impact-of-reporting----a-welcome-boon--path-cleared-for-bhamashah-mandi-expansion--national-board-for-wildlife-approves-expansion-across-96-hectares/article-147031"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)37.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। देश की सबसे बड़ी कृषि उपज मंडियों में शामिल भामाशाह कृषि उपज मंडी के विस्तार को मंजूरी मिल गई है। वर्षों से लंबित मंडी के विस्तार को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की 89वीं स्थायी समिति की बैठक में महत्वपूर्ण मंजूरी मिलने के बाद पूरे क्षेत्र में हर्ष की लहर है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के निरन्तर प्रयासों से मिली सफलता से हाड़ौती क्षेत्र के किसानों, व्यापारियों और कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। भामाशाह मंडी के विस्तार से भंडारण, विपणन और परिवहन सुविधाएं बेहतर होंगी। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और व्यापारियों को आधुनिक ढांचा उपलब्ध होगा।</p>
<p><strong>जाम और लम्बे इंतजार से मिलेगी निजात</strong></p>
<p>भामाशाह मंडी में हाड़ौती के साथ मध्यप्रदेश से जुड़े क्षेत्रों से भी किसान उपज बेचने के लिए आते है। सीजन के दौरान मंडी में प्रवेश के लिए वाहनों की लम्बी कतारें लगने से किसानों को इंतजार के साथ परेशानी झेलनी पड़ती है। इसके साथ ही आवक के मुकाबले मंडी में पर्याप्त शेड नहीं होने से बारिश के समय किसानों की उपज खराब होने का खतरा रहता है। विस्तार के साथ ही मंडी में कारोबार में कई गुना की वृद्धि होगी, राष्ट्रीय राजमार्ग 27 से भी मंडी सीधी जुड़ जाएगी, इससे जाम की समस्या से भी निजात मिलेगी और किसानों को उपज बेचने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा।</p>
<p><strong>अरसे से अटका था मामला</strong></p>
<p>मंडी से जुड़े वन भूमि के कारण विस्तार का मामला वर्षो से लम्बित था। विस्तार की स्वीकृति मिली तो फिर वन क्षेत्र से गुजर रहे राजमार्ग के किनारे एक किमी तक पौधारोपण से जुड़े नियमों के कारण विस्तार फिर से अटक गया। दिल्ली में स्पीकर बिरला और केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव के बीच हुई बैठकों के बाद नियम में शिथिलता के लिए सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी (सीईसी) में आवेदन किया गया था। इसके बाद समिति द्वारा वर्ष 2007 में कोटा बाइपास निर्माण के दौरान निर्धारित ग्रीन बेल्ट से जुड़ी शर्तों में संशोधन कर स्वीकृति दे दी गई है, जिससे लगभग 96 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए लैंड डायवर्जन का मार्ग प्रशस्त हो गया है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong></p>
<p>एशिया की सबसे बड़ी भामाशाहमंडी का परिसर छोटा पड़ने से किसानों और व्यापारियों को आ रही परेशानियों के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए गए थे। इसमें बताया था कि सीजन में मंडी अनाज से ठसाठस भर जाती है। मंडी गेट से दो-तीन किलोमीटर लम्बी अनाज से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की कतार लग जाती है। काफी समय से मंडी के विस्तार की दरकार है। भामाशाहमंडी में खरीफ व रबी सीजन के पीक टाइम में रोजाना 2 लाख से 5 लाख बोरी कृषि जिंसों की आवक होती है। मंडी में राजस्थान ही नहीं देश के कई राज्यों से यहां अनाज आ रहा है। ऐसे में मंडी छोटी पड़ने के साथ ही मंडी प्रशासन की व्यवस्थाएं भी अब छोटी हो चुकी हैं। यार्ड फुल होने के बाद अब खुले में व सड़कों पर नीलामी करनी पड़ रही है।</p>
<p>भामाशाह मंडी का विस्तार हाड़ौती क्षेत्र के किसानों के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मंडी के विस्तार से किसानों को सुविधा के साथ व्यापार सुगम होगा साथ ही क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। आने वाले वर्षों में कोटा की भामाशाह मंडी देश की सबसे आधुनिक कृषि मंडियों में शामिल होगी और हाड़ौती के लाखों किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।</p>
<p><strong>- ओम बिरला, अध्यक्ष लोकसभा</strong></p>
<p>भामाशाह मंडी को विस्तार मिलने के बाद अब इसकी सुविधाओं में भी इजाफा होगा। जिसके चलते अब इसके टर्नओवर में करीब दो से तीन गुना वृद्धि होगी। वहीं अब मंडी एयरकनेक्टिीविटी से जुड़ने के साथ ही एटलेन व फोरलेन से सीधे जुड़ेगी। वहीं मंडी परिसर में रेल्वे ट्रैक का निर्माण होगा। जिससे अब माल का लदान यही से होगा। 20 टन के कांटे लगाने की योजना हैं जिससे लेबर लेस तुलाई होगी।</p>
<p><strong>-महेश खंडेलवाल, महामंत्री भामाशाह मंडी कोटा</strong></p>
<p>मंडी का विस्तार होने से जो सीजन के समय पर कतारें लगती थी। वह अब खत्म होगी। किसान दो से तीन दिन तक इंतजार करते थे। अब वह इंतजार खत्म होगा। साथ ही किसानों के माल की तुरंत नीलामी होगी। जिससे अब किसानों को नीलामी के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मंडी का विस्तार होने से विभिन्न सुविधाओं का विस्तार होगा।</p>
<p><strong>-मनोज मीणा, सचिव, भामाशाह मंडी कोटा</strong></p>
<p>भामाशाहमंडी में हाड़ौती के साथ मध्यप्रदेश से जुड़े क्षेत्रों से भी किसान उपज बेचने के लिए आते है। सीजन के दौरान मंडी में प्रवेश के लिए वाहनों की लम्बी कतारें लगने से किसानों को इंतजार के साथ परेशानी झेलनी पड़ती है। अब विस्तार के साथ ही मंडी में कारोबार में कई गुना की वृद्धि होगी।</p>
<p><strong>-जगदीश कुमार, किसान नेता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-impact-of-reporting----a-welcome-boon--path-cleared-for-bhamashah-mandi-expansion--national-board-for-wildlife-approves-expansion-across-96-hectares/article-147031</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-impact-of-reporting----a-welcome-boon--path-cleared-for-bhamashah-mandi-expansion--national-board-for-wildlife-approves-expansion-across-96-hectares/article-147031</guid>
                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 14:09:12 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/1200-x-60-px%2937.png"                         length="1672361"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत को कृषि उत्पादन में बनाना है आत्मनिर्भर : निर्यात क्षमता भी है बढ़ानी, मोदी ने कहा- किसानों के कल्याण के लिए कर रहे मेहनत </title>
                                    <description><![CDATA[कार्यक्रम में उन्होंने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में 42,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं और योजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और लोकार्पण किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-has-to-be-self-reliant-in-agricultural-production-export-capacity/article-129417"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/6622-copy28.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत को कृषि उत्पादन में ना केवल आत्म निर्भर बनना है, बल्कि वैश्विक बाजार के लिए उत्पादन भी करना है। मोदी ने कहा कि हमें आयात कम करना है और निर्यात बढ़ाना है। मोदी  ने इस उद्येश्य की प्राप्ति में पीएम धन-धान्य कृषि योजना तथा दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। वह नयी दिल्ली में पूसा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) में आयोजित विशेष कृषि कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में उन्होंने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में 42,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं और योजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और लोकार्पण किया।</p>
<p>इनमें 24,000 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना और 11,440 करोड़ रुपये का दलहन में आत्मनिर्भरता मिशनÞ दो प्रमुख कार्यक्रम हैं। पीएम धन धान्य योजना का का उद्देश्य 100 जिलों में कृषि का कायाकल्प करना है। इसी तरह दलहन में आत्मनिर्भरता का मिशन दलहन खेती का रकबा बढ़ा कर और खरीद, प्रसंस्करण और वितरण जैसी मूल्य संवर्धन श्रृंखलाओं को मजबूत करके पूरा किया जाना है। कार्यक्रम को कृषि मंत्री शिवराज चौहान ने भी संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने कृषि उत्पादन में आत्म निर्भरता और निर्यात बढ़ाने के इन लक्ष्यों की प्राप्ति में पीएम धन-धान्य कृषि योजना तथा दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पीएम धन-धान्य योजना के लिए 100 जिलों का चयन किया गया है। इसमें एक खेती की उत्पन्नता क्या है, दूसरी एक खेत में एक साल में खेती कितनी बार होती है तथा किसानों को कर्ज या निवेश की सुविधा कैसी है। उन्होंने कहा कि दलहन आत्मनिर्भरता मिशन  सिर्फ दलहन उत्पादन बढ़ाने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि हमारी भावी पीढ़ी को सशक्त बनाने का अभियान भी है।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों की आय बढ़े इसके लिए पशुपालन, मधुमक्खी पालन पर बल  दिया जा रहा है।  इससे छोटे किसानों और भूमिहीन परिवारों को ताकत मिली है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका और महत्वपूर्ण हो रही है जहां गावों में नमो ड्रोन दीदिया खाद और  कीटनाशक छिड़काव के आधुनिक तरीकों का नेतृत्व कर रही हैं। मोदी ने कहा कि किसान, पशुपालक भाई-बहनों के कल्याण के लिए हम दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। इसी दिशा में आज दिल्ली से हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन-शिलान्यास मेरे लिए गर्व का क्षण है। हमने किसानों के हित में...बीज से लेकर बाजार तक सुधार किए हैं। प्रधानमंत्री ने पूसा के इसी मंच से  देश भर में जगह जगह कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में 5,450 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की परियोजनाओं का उद्घाटन और राष्ट्र लोकार्पण किया। उन्होंने लगभग 815 करोड़ रुपये की अतिरिक्त परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/india-has-to-be-self-reliant-in-agricultural-production-export-capacity/article-129417</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/india-has-to-be-self-reliant-in-agricultural-production-export-capacity/article-129417</guid>
                <pubDate>Sat, 11 Oct 2025 18:23:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-10/6622-copy28.jpg"                         length="39081"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृषि विकास दर 5 प्रतिशत बनाए रखना लक्ष्य, कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ : शिवराज</title>
                                    <description><![CDATA[ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि में शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार को अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ करार देते हुए कहा है कि सरकार का लक्ष्य कृषि विकास दर 5 प्रतिशत बनाए रखना है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/keeping-agricultural-growth-five-percent-target-the-backbone-of-agricultural/article-114799"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/shivraj-singh-chauhan1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि में शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार को अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ करार देते हुए कहा है कि सरकार का लक्ष्य कृषि विकास दर 5 प्रतिशत बनाए रखना है।</p>
<p>चौहान ने मंगलवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और आजीविका का भी सबसे बड़ा साधन है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 50 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है और सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) में 18 प्रतिशत कृषि क्षेत्र का योगदान है। आने वाले समय में भी खेती अर्थव्यवस्था के केंद्र में रहेगी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का निर्माण और विकसित भारत के लिए विकसित खेती और समृद्ध किसान सरकार का मूलमंत्र है।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने कृषि में शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार को अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ बताया और कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ाने और लागत घटाने में अनुसंधान की बहुत अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सभी संस्थानों को एक दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार कृषि विकास दर पांच प्रतिशत बनाए रखने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक कृषि-एक टीम’ के रूप में काम करने विचार किया जा रहा है। अगर कृषि के क्षेत्र में वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करना है तो 5 प्रतिशत की कृषि विकास दर को लगातार बनाए रखना होगा।</p>
<p>उन्होने कहा कि कुल रकबे के 93 प्रतिशत हिस्से में अनाज की बुआई होती है, लेकिन दलहन और तिलहन के मामले में विकास दर 1.5 प्रतिशत के आसपास है। उत्पादकता के लिहाज से भी अलग-अलग राज्यों में भिन्न-भिन्न है। पंजाब में, हरियाणा में, छत्तीसगढ़ में विभिन्नताएं हैं। मक्का की विकास दर तमिलनाडु में ज्यादा है तो उत्तर प्रदेश में कम है। इसमें समानता लाने का प्रयास किया जा रहा है। बहुत खराब और बहुत अच्छे उत्पादकता के अंतर को कम करके कम से कम औसत स्तर तक लाना लक्ष्य है। इसके लिए विभिन्न कृषि संस्थानों और विभागों की भूमिका तय करने पर विचार किया जा रहा है।</p>
<p> चौहान ने कहा कि अगर भारत को 5000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है तो एक हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था कृषि क्षेत्र को बनाना होगा। उसके हिसाब से लक्ष्य तय किए जा रहे हैं। अभी 6 प्रतिशत निर्यात होता है उसको बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक करने का प्रयास है। मधुमक्खी पालन, पशुपालन, मत्स्यपालन, बागवानी इत्यादि को भी बढ़ावा देने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस बार के बजट में एक और जीन बैंक बनाने का प्रावधान किया है। जिनोम एडिटिंग की पद्धति से हाल ही में धान की दो नई किस्में विकसित की गई हैं, इसी पद्धति से सोयाबीन, दलहन, उड़द, चना, तूअर इत्यादि का उत्पादन बढ़ाने को लेकर भी तेजी से काम चल रहा है। इसके अलावा प्रति हेक्टेयर कम पानी में ज्यादा उत्पादन करने जैसे मुद्दों पर भी गहराई से चिंतन और विचार-विमर्श किया जा रहा है। समय-सीमा तय करते हुए एक साल के भीतर किए जाने वाले कार्य और लंबी अवधि वाले लक्ष्यों के परिणाम अर्जित करने की दिशा में तत्परता से काम चल रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/keeping-agricultural-growth-five-percent-target-the-backbone-of-agricultural/article-114799</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/keeping-agricultural-growth-five-percent-target-the-backbone-of-agricultural/article-114799</guid>
                <pubDate>Tue, 20 May 2025 18:56:14 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-06/shivraj-singh-chauhan1.jpg"                         length="137167"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकार ने लगाई रोक, अनाज मंडियों में अब नहीं बिकेगा जहर</title>
                                    <description><![CDATA[कृषि उपज मंडियों में अब कीटनाशक और पेस्टीसाइड का कारोबार नहीं हो सकेगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/government-imposed-ban--poison-will-no-longer-be-sold-in-grain-markets/article-114641"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(2)58.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कृषि उपज मंडियों में अब कीटनाशक और पेस्टीसाइड का कारोबार नहीं हो सकेगा। कृषि विपणन निदेशालय ने कृषि जिंसों के बीच कीटनाशक और पेस्टीसाइड की बिक्री पर रोक लगा दी है। कृषि उपज मंडियों में आने वाले अनाज, दलहन और तिलहन से करोड़ों लोग पेट भरते हैं। इन खाद्य कृषि जिंसों के बीच जहर का भंडारण और बिक्री जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में कृषि विपणन निदेशालय ने इस मामले को गम्भीरता से लेते हुए अनाज मंडियों में कीटनाशक और पेस्टीसाइड का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया है। साथ ही इस कारोबार के लिए लाइसेंस जारी करने वाले कृषि विभाग को भी पत्र भेजकर लाइसेंस निरस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p><strong>मंडियों में सालभर होती है जिंसों की आवक</strong><br />हाड़ौती में भामाशाहमंडी सहित अन्य अनाज मंडियों में साल भर कृषि आवक होती है। सीजन के दौरान तो मंडियों में विभिन्न कृषि जिंसों की बम्पर आवक होती है। इस दौरान खरीदे गए माल को व्यापारियों द्वारा अपने दुकानों में रखा जाता है। मंडियों में कुछ व्यापारियों ने कीटनाशक और पेस्टीसाइड का लाइसेंस  भी ले रखा था। ऐसे में इन दुकानों पर कई बार अनाज के साथ ही कीटनाशक भी रख दिया जाता है। जिससे अनाज के प्रदूषित होने का खतरा हो सकता है। इस मामले की जानकारी सामने आने के बाद अब निदेशालय ने मंडियों में कीटनाशकों के कारोबार पर रोक लगा दी है।</p>
<p><strong>इसलिए उठाया कदम</strong><br />असल में पिछले कुछ सालों में कृषि विभाग और कृषि उपज मंडी समिति में रहे अधिकारियों से मिलीभगत कर कृषि जिंसों के व्यापार के लिए आवंटित दुकानों में कीटनाशक और पेस्टीसाइड बेचने की दुकानें खोल दी गई। अनाज मंडियों में कृषि जिंसों के भंडारण के लिए बने गोदामों में पेस्टीसाइड व कीटनाशक रखना शुरू कर दिया। कुछ जगह तो एक ही जगह पर कृषि जिंस और पेस्टीसाइड रखे जाने लगे। यह मामला जब कृषि विपणन निदेशालय तक पहुंचा तो अधिकारी हैरान रह गए। निदेशालय ने कृषि जिंसों के बीच इन पदार्थो का कारोबार होने को गम्भीर माना और खाद्य कृषि जिंसों के बीच जहर के कारोबार पर रोक लगाने के लिए मंडी सचिवों को निर्देश जारी किए।</p>
<p><strong>सर्वे कर सूची कृषि विभाग को भेजी</strong><br />कृषि निदेशालय का निर्देश मिलने के बाद कृषि उपज मंडी समिति के सचिवों ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अनाज मंडी में अनुमत कृषि जिंसों के अलावा अन्य कोई सामान या पेस्टीसाइड आदि बेचने या दुकानें संचालित करने वालों का सर्वे किया। इस सर्वे की सूची मंडी समिति की ओर से कृषि विभाग को भेजी गई थी। इसके बाद कृषि विभाग की ओर से अनाज मंडियों में नियम विरुद्ध जारी पेस्टीसाइड बेचने के लाइसेंस रद्द करने के लिए सम्बंधित व्यापारियों को पत्र भेजा गया, जिसमें आगामी कुछ दिनों में अनाज मंडी से पेस्टीसाइड, कीटनाशक, खाद-बीज की दुकानों को हटाने के लिए संबंधित दुकानदारों को निर्देश दिए गए हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />अनाज मंडियों में पेस्टीसाइड व कीटनाशक के भंडारण और कारोबार से  किसानों और आमजन का जीवन का खतरे में आ सकता है। इस सम्बंध में गत दिनों कृषि विभाग के अधिकारियों को अवगत कराकर रोक लगाने की मांग की गई थी।<br /><strong>- जगदीश कुमार, किसान नेता</strong></p>
<p>पहले जारी गैर कृषि जिंसों खाद, बीज, पेस्टीसाइड के व्यवसाय की अनुमतियों को रद्द कर दिया है। इनकी सूची कृषि विभाग को भेज कर अवगत करवा दिया है। अब चूंकि मंडी परिसर में अनुमति नहीं है, ऐसे में इनके लाइसेंस रद्द करने होंगे।<br /><strong>- शशिशेखर शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि विपणन विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/government-imposed-ban--poison-will-no-longer-be-sold-in-grain-markets/article-114641</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/government-imposed-ban--poison-will-no-longer-be-sold-in-grain-markets/article-114641</guid>
                <pubDate>Mon, 19 May 2025 17:17:52 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-05/rtrer-%282%2958.png"                         length="512592"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डॉ. किरोड़ी ने कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड के कृषि मंत्री ने की मुलाकात, कहा- सोलर पम्प स्थापना में राजस्थान देश के प्रथम तीन राज्यों में एक</title>
                                    <description><![CDATA[कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि सोलर पम्प संयंत्र स्थापना में हमारा प्रदेश देश के प्रथम तीन राज्यों में से एक है और मिलेट्स उत्पादन में भी सर्वोपरि है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/to-promote-agricultural-products-dr-kirori-said-that-the-agriculture/article-113632"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/news-(1)17.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि सोलर पम्प संयंत्र स्थापना में हमारा प्रदेश देश के प्रथम तीन राज्यों में से एक है और मिलेट्स उत्पादन में भी सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम से कम करने के साथ ही नैनो यूरिया और डीएपी के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। </p>
<p>पंत कृषि भवन में उत्तराखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी से मुलाकात के दौरान कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. मीणा ने बताया कि सरकार की ओर से अधिक से अधिक कृषि उत्पादों को जीआई टैग दिलाए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे किसानों को जीआई टैग प्राप्त फसलों का उचित मूल्य मिल सकेगा और प्रदेश का कृषक आर्थिक रूप से मजबूत बन सकेगा। इस दौरान दोनों राज्यों के कृषि मंत्रियों ने एग्रो प्रोसेसिंग यूनिट, ऑर्गेनिक खेती, बीज उत्पादन, जीआई टैग, जैतून और मिलेट्स उत्पादन पर चर्चा की। उत्तराखंड कृषि मंत्री जोशी ने बताया कि वहां नेचुरल फार्मिंग, औषधिय पौधे, सुगंधित फूल, शहद और ड्रेगन, नट फू्रट आदि की अच्छी पैदावार होती है, जिनमें से जलवायु अनुकूल पौधों की किस्मों को राजस्थान में भी लगाया जा सकता है। उन्होंने राजस्थान से एक<strong> </strong>प्रतिनिधि मंडल को उत्तराखंड<strong> </strong>और उत्तराखंड से एक प्रतिनिधि मंडल को राजस्थान में भेजने का भी प्रस्ताव रखा। प्रतिनिधि मंडल एक दूसरे राज्य की योजनाओं व उत्पादित की जा रही फसलों व फलों का अध्ययन कर अपने-अपने राज्य में जनकल्याणकारी योजनाओं को अपनाकर किसान हित में कार्य कर सकेंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/to-promote-agricultural-products-dr-kirori-said-that-the-agriculture/article-113632</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/to-promote-agricultural-products-dr-kirori-said-that-the-agriculture/article-113632</guid>
                <pubDate>Sat, 10 May 2025 11:42:11 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-05/news-%281%2917.png"                         length="532624"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कागजों में कार्रवाई, निर्देश हो रहे धुआं-धुआं </title>
                                    <description><![CDATA[फसल कटाई के बाद अवशेषों को जला रहे किसान।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/action-on-paper--instructions-going-up-in-smoke/article-112535"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer-(1)111.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कृषि अवशेषों में आग लगाने के मामलों में यूं तो राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने संबंधित किसानों पर सख्ती से कार्रवाई के निर्देश जारी कर रखे हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर इन निर्देशों की पालना नहीं हो रही है। खेतों की सफाई के नाम पर आए दिन किसान खेतों की नौलाइयों (फसल अवशेष) में आग लगा रहे है। जिससे दमकलकर्मियों के साथ पुलिस एवं प्रशासन की भी मशक्कत बढ़ रही है। पूर्व में ऐसे मामलों में प्रशासन ने काफी सख्ती दिखाई थी, अब कार्रवाई ठंडे बस्ते में है। ऐसे में किसानों द्वारा धड़ल्ले से नौलाइयां जलाई जा रही है। नौलाइयों का धुआं स्वच्छ वायु को भी प्रदूषित कर रहा है। इस पर रोक लगाने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>खेत खाली होते ही लगा रहे आग</strong><br />जिले में इस समय गेहूं फसल की कटाई के बाद अधिकांश खेत खाली हो चुके हैं। खेत खाली होते ही किसान नौलाइयों को आग के हवाले कर रहे हैं। जिससे वायु प्रदूषण तेजी से फैल रहा है। जबकि एनजीटी की सेंट्रल बैंच ने सख्ती से आदेश जारी कर खेतों में फसल के अवशेषों में आग लगाने के मामले में संबंधित किसानों पर सख्ती से कार्रवाई के निर्देश जारी कर रखे है, लेकिन जिले में इसकी सख्ती से पालना नहीं होने से खेतों में आग लगने की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। </p>
<p><strong>जुर्माना राशि बढ़ाई, फिर भी नहीं डर</strong><br />कृषि अवशेषों में आग लगाने के मामलों में अब सरकार ने सम्बंधित किसानों पर जुर्माना राशि दोगुना कर दी है। इसके बावजूद किसानों को कार्रवाई का डर नहीं है। खेतों में फसलों के अवशिष्ट (चारा, भूसा, लकडी के डंठल) को जलाने पर कृषि विभाग ने प्रतिबंध लगा रखा है।  बढ़ते प्रदूषण की वजह से यह निर्णय किया गया है। अब सरकार ने 2 एकड़ से कम जमीन वाले किसानों पर जुर्माना राशि 2500 से बढ़ाकर 5000,  2 से 5 एकड़ वालों पर 5000 से बढ़ाकर 10000 और इससे अधिक रकबा वाले किसानों पर 15000 से बढ़ाकर 30000 कर दी गई, लेकिन सख्त कार्रवाई नहीं होने से खेतों में आग लगाने की घटनाओं पर रोक नहीं लग पा रही है।</p>
<p><strong>दो साल से नहीं हो पाई कार्रवाई</strong><br />कोटा सम्भाग में पिछले तीन साल में पराली में आग लगाने की घटनाएं तो ज्यादा हुई है, लेकिन विभाग के पास रिकॉर्डेड केवल 16 घटनाएं ही है। साल 2021 में 4 घटनाओं पर 10 हजार, साल 2022 में 7 घटनाओं पर 20 हजार रुपए किसानों से जुर्माना वसूला गया था। साल 2023 में भी 5 घटनाएं सामने आई थी, लेकिन मामला जांच तक ही सीमित रह गया और सम्बंधित किसानों से जुर्माना वसूल नहीं हो पाया। दो साल से एक भी कार्रवाई नहीं हो पाई है। जिससे खेतों में आग लगाने की घटनाएं जारी हैं।</p>
<p><strong>खेतों को ही नुकसान</strong><br />कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसारखेत में आग लगाने से हानिकारक गैस मीथेन, कार्बन मोनो आॅक्साइड, सल्फर डाईआॅक्साइड, नाइट्रस आॅक्साइड उत्सर्जन होता है। इस गैसों के निकलने से वातारण तो प्रभावित होता ही है। साथ ही, कैंसर, अस्थमा व प्रदूषण संबंधित बीमारियां पनपती हैं। फसल के अवशेषों को जलाने से भूमि के मित्र कीट और केंचुआ नष्ट हो जाते हैं, जिसके  कारण कीटों व फफूंद को नियंत्रित करने के लिए जहरीले कीटनाशकों का उपयोग करना पड़ता है। इससे मिट्टी प्रदूषित होकर किसानों पर उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है।</p>
<p>इस बार चारे का संकट होने के कारण कई किसानों ने गेहूं की कटाई के बाद शेष डंठलों को मशीन से भूसा बनाने के काम में लिया है। हालांकि कुछ किसान नौलाइयों को जला रहे हैं। इस सम्बंध में किसानों को खुद ही जागरूक होना होगा, ताकि पर्यावरण को नुकसान नहीं हो।<br /><strong>- गोरधनलाल मीणा, किसान</strong></p>
<p>खेतों में नौलाइयां जलाने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इस सम्बंध में जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी भी रखी जा रही है। अन्य जिलों की तुलना में यहां के किसान फसल अवशेषों को भूसा बनाने के काम में ज्यादा लेते हैं। फिर भी यदि नौलाइयां जलाने की जानकारी मिलेगी तो कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- आतिश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग </strong></p>
<p>खेतों में आग लगाने की घटनाओं से वायु प्रदूषित हो जाती है। इससे मीथेन गैस, कार्बन मोनो आॅक्साइड, सल्फर डाईआॅक्साइड, नाइट्रस आॅक्साइड का तेजी से उत्सर्जन होता है। जिससे आसपास के क्षेत्र की हवा प्रदूषित हो जाती है और वायु प्रदूषण का ग्राफ तेजी से बढ़ता है। <br /><strong>- राजू गुप्ता, पर्यावरणविद्</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/action-on-paper--instructions-going-up-in-smoke/article-112535</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/action-on-paper--instructions-going-up-in-smoke/article-112535</guid>
                <pubDate>Wed, 30 Apr 2025 14:31:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-04/rtrer-%281%29111.png"                         length="330904"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृषि स्टार्टअप और प्राकृतिक खेती पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता, शिवराज चौहान ने कहा- कृषि की चुनौतियों के समाधान में आगे आए छात्र</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा और विस्तार गतिविधियों से कृषि उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि को निरंतर गति प्रदान की है। इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और रामनाथ ठाकुर शामिल रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/need-to-pay-special-attention-to-agricultural-startups-and-natural/article-108330"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/6622-copy171.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शोध और नवाचार, कृषि स्टार्टअप तथा प्राकृतिक खेती पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा है कि कृषि छात्रों को भारतीय कृषि की चुनौतियों के समाधान में आगे आना चाहिए। चौहान ने यहां भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के 63वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि हरित क्रांति के अग्रदूत आईएआरआई ने अपने उत्कृष्ट शोध, शिक्षा और विस्तार गतिविधियों से कृषि उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि को निरंतर गति प्रदान की है। इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और रामनाथ ठाकुर शामिल रहे। इस अवसर पर गेहूं, मक्का, चना, मूंग और आम सहित विभिन्न फसलों की नयी किस्मों का विमोचन किया। साथ ही तीन प्रमुख प्रकाशनों का भी अनावरण किया  गया।</p>
<p>चौहान ने कहा कि भारत की कृषि विकास दर पांच प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अनंत शक्तियों का भंडार हैं और उन्हें सकारात्मक ऊर्जा के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान और किसानों की मेहनत से देश अन्न भंडारों से समृद्ध हुआ है। उन्होंने कहा कि छात्रों को भारतीय कृषि की चुनौतियों के समाधान में आगे आना चाहिए। साथ ही, शोध और नवाचार, कृषि स्टार्टअप और प्राकृतिक खेती पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारत को कृषि क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए अनुसंधान को और सशक्त करना होगा।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शिक्षा के लिए कौशल आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार, कृषि उद्यमिता, और स्टार्टअप की दिशा में आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भारत में लघु एवं सीमांत किसानों की संख्या अधिक है, इसलिए ऐसे नवाचार आवश्यक हैं जो छोटे किसानों की आय में वृद्धि करें। सतत कृषि, जलवायु-लचीली खेती, और जैविक तथा प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि की विकसित तकनीकों को प्रयोगशालाओं से खेतों तक तेजी से पहुंचाना आवश्यक है, ताकि किसानों को अधिक लाभ मिल सके। उन्होंने कृषि यंत्रों, स्मार्ट फार्मिंग और उन्नत डिजिटल तकनीकों को अपनाने की भी सलाह दी।  </p>
<p>दीक्षांत समारोह में पांच एम.एससी. और पांच पीएचडी विद्यार्थियों को पदक से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, आईएआरआई बेस्ट स्टूडेंट अवार्ड (नाबार्ड)-2024 - डिवीजन ऑफ एंटोमोलॉजी के पीएचडी छात्र रुद्र गौड़ा को प्रदान किया गया। सर्वश्रेष्ठ एम.एससी. छात्र पुरस्कार डिवीजन ऑफ एग्रोनॉमी की एम.एससी. छात्रा स्नेहा भारद्वाज को दिया गया। डॉ. एच.के. जैन मेमोरियल यंग साइंटिस्ट अवार्ड-2024-डिवीजन ऑफ जेनेटिक्स के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विग्नेश मुथुसामी को दिया गया। इसके अलावा 28वां हुकर पुरस्कार (2022-23) डॉ. ज्ञान प्रकाश मिश्रा, प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख, एसएसटी, आईएआरआई, नई दिल्ली को दिया गया।  चौथा वां नाबार्ड रिसर्चर ऑफ द ईयर-2024 डिवीजन ऑफ एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन के वैज्ञानिक डॉ. गिरीश ङ्क्षसह महरा को प्रदान किया गया। समारोह में कुल 399 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट की उपाधियाँ प्रदान की गईं, जिनमें विदेशी छात्र भी शामिल है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/need-to-pay-special-attention-to-agricultural-startups-and-natural/article-108330</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/need-to-pay-special-attention-to-agricultural-startups-and-natural/article-108330</guid>
                <pubDate>Sat, 22 Mar 2025 16:56:24 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-03/6622-copy171.jpg"                         length="123276"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अतिरिक्त कृषि ऋण की सीमा बढ़ाकर 2 लाख रुपए</title>
                                    <description><![CDATA[यह सुनिश्चित करना कि उनके पास अपनी कृषि  आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन हों। आरबीआई ने कहा है कि दो लाख रुपए तक के ऋण के लिए किसी गारंटी की आवश्यकता नहीं होगी।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/additional-agricultural-loan-limit-increased-to-rs-2-lakh/article-97679"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/6633-copy93.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने कृषि संबंधी सहायक कार्यों के अतिरिक्त कृषि ऋण की सीमा 1.6 लाख रुपए से बढ़ाकर 2 लाख रुपए करने की घोषणा की है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि इसका उद्देश्य किसानों को बेहतर वित्तीय पहुंच प्रदान करना है।</p>
<p>यह सुनिश्चित करना कि उनके पास अपनी कृषि  आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन हों। आरबीआई ने कहा है कि दो लाख रुपए तक के ऋण के लिए किसी गारंटी की आवश्यकता नहीं होगी।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/additional-agricultural-loan-limit-increased-to-rs-2-lakh/article-97679</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/additional-agricultural-loan-limit-increased-to-rs-2-lakh/article-97679</guid>
                <pubDate>Sun, 15 Dec 2024 14:39:58 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-12/6633-copy93.jpg"                         length="183406"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डब्ल्यूटीओ में कृषि वार्ता फिर से शुरू करने के लिए नियुक्त किए जाने वाले फैसिलिटेटर का 3 देश कर रहे विरोध</title>
                                    <description><![CDATA[फैसिलिटेटर विभिन्न विषयों पर चर्चा का मार्गदर्शन करेंगे। भारत का मानना है कि ऐसी प्रक्रिया मंत्रिस्तरीय आदेशों को कमजोर करती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/countries-are-opposing-the-facilitator-appointed-to-restart-agricultural/article-96960"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(2)7.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विश्व व्यापार संगठन में कृषि वार्ता पर गतिरोध बना हुआ है। भारत, श्रीलंका और पाकिस्तान ने फैसिलिटेटर की नियुक्ति का विरोध किया है। इन देशों का मानना है कि यह प्रक्रिया डब्ल्यूटीओ के सर्वसम्मति के सिद्धांत के खिलाफ है। उन्होंने पारदर्शी और समावेशी प्रक्रिया के तहत कृषि वार्ता फिर से शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। तीनों ही देशों ने डब्ल्यूटीओ में कृषि वार्ता को फिर से शुरू करने के लिए नियुक्त किए जाने वाले फैसिलिटेटर पर चिंता जताई है। बुधवार को कृषि समिति की बैठक में भारत ने इस फैसिलिटेटर-आधारित प्रक्रिया को अस्वीकार कर दिया। यह डब्ल्यूटीओ के सर्वसम्मति के सिद्धांत के बजाय कन्वर्जेंस पर आधारित है। भारत का कहना है कि कृषि वार्ता आगे नहीं बढ़ने का मुख्य कारण भरोसे की कमी है। इस प्रक्रिया के तहत कृषि वार्ता के अध्यक्ष की ओर से नियुक्त फैसिलिटेटर विभिन्न विषयों पर चर्चा का मार्गदर्शन करेंगे। भारत का मानना है कि ऐसी प्रक्रिया मंत्रिस्तरीय आदेशों को कमजोर करती है।</p>
<p><strong>तीनों देशों के एक सुर</strong><br />संगठन के एक अधिकारी के अनुसार, भारत, श्रीलंका और पाकिस्तान ने सदस्यों के बीच स्पष्ट सहमति के अभाव का हवाला देते हुए फैसिलिटेटर-आधारित प्रक्रिया पर चिंता जताई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सदस्य औपचारिक बातचीत के माध्यमों का पालन करें। पिछले महीने डब्ल्यूटीओ को भेजे गए एक पत्र में तीनों देशों ने प्रस्ताव दिया कि स्थायी भंडारण, विशेष सुरक्षा तंत्र और कपास जैसे अनिवार्य मुद्दों पर कृषि वार्ता कृषि समिति में होनी चाहिए। यह एक खुली, समावेशी और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से जल्द निर्णय और अपनाने के लिए एक त्वरित समय सीमा में होनी चाहिए, जैसा कि आदेश में दिया गया है।</p>
<p><strong>क्या है एशियाई देशों का कहना</strong><br />तीनों देशों ने कहा है कि अक्टूबर में हुई अनौपचारिक प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों या औपचारिक व्यापार वार्ता समिति की बैठकों में फैसिलिटेटर नियुक्त करने के प्रस्ताव पर कोई सहमति नहीं बनी थी। 22 अक्टूबर के डब्ल्यूटीओ के पत्र का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कृषि वार्ता में फैसिलिटेटर-आधारित प्रक्रिया शुरू करने से डब्ल्यूटीओ के कामकाज के लिए एक चिंताजनक मिसाल कायम होती है। सदस्यों से फैसिलिटेटर के लिए नामांकन मांगे गए थे। इससे पहले अफ्रीकी समूह ने कहा था कि कृषि वार्ता में फैसिलिटेटर-आधारित प्रक्रिया शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए डब्ल्यूटीओ के सदस्यों की आम सहमति आवश्यक है। यह मामला डब्ल्यूटीओ के भीतर चल रही बहस का हिस्सा है कि कैसे कृषि वार्ता को आगे बढ़ाया जाए, जो कई वर्षों से रुकी हुई है। विकासशील देशों का तर्क है कि उन्हें अपने किसानों की रक्षा के लिए खाद्य सुरक्षा के लिए स्थायी भंडारण जैसे उपायों की जरूरत है। जबकि विकसित देशों का कहना है कि ऐसे उपाय व्यापार को खराब करते हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/countries-are-opposing-the-facilitator-appointed-to-restart-agricultural/article-96960</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/countries-are-opposing-the-facilitator-appointed-to-restart-agricultural/article-96960</guid>
                <pubDate>Sat, 07 Dec 2024 11:56:07 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-12/257rtrer-%282%297.png"                         length="510349"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृषि उत्पादों की चुनौतियों का समाधान करेगी बायो पेस्टीसाइड्स</title>
                                    <description><![CDATA[पहला तो यह कि भारतीय मसालों की छवि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत चुनौतीपूर्ण हो गई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/biopesticides-will-solve-the-challenges-of-agricultural-products/article-77882"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(3)19.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हिंदुस्तान इंसेक्टीसाईड्स लि. के प्रबंध निदेशक कुलदीप सिंह ने देश के कृषि जिंस उत्पादक किसानों को सुझाया है कि शुद्ध उत्पादन के लिए बायो-खाद एवं पेस्टीसाइड्स का उपयोग करें। वे आरतिया कार्यालय आये थे। उन्होंने कहा कि हाल ही सिंगापुर, अमेरिका और यूरोपीय देशों ने भारतीय मसालों की जांच उपरांत इनमें हानिकारक रसायन पाये जाने का जो घटनाक्रम हुआ है, उससे दो बड़े नुकसान दृष्टिगत हुए हैं, पहला तो यह कि भारतीय मसालों की छवि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत चुनौतीपूर्ण हो गई है। </p>
<p>कुलदीप सिंह का स्वागत मुख्य चेयरमैन कमल कंदोई, मुख्य संरक्षक आशीष सर्राफ, कार्यकारी अध्यक्ष प्रेम बियाणी, आरतिया के पदाधिकारी कामटेक एसोसियेट्स के अजय गुप्ता,  नियाम के पुर्व निदेशक रमेश मित्तल, फिक्की के पूर्व निदेशक ज्ञान प्रकाश, उपाध्यक्ष कैलाश शर्मा, उपाध्यक्ष विनोद शर्मा व कैलाश खंडेलवाल, तकनीकी विशेषज्ञ तरुण सारडा और पेस्टीसाईड्स व्यवसायी अशोक शर्मा ने किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/biopesticides-will-solve-the-challenges-of-agricultural-products/article-77882</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/biopesticides-will-solve-the-challenges-of-agricultural-products/article-77882</guid>
                <pubDate>Tue, 14 May 2024 10:20:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-05/t21rer-%283%2919.png"                         length="406703"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बोली में तय दाम नहीं देकर व्यापारी कर रहे किसानों का शोषण</title>
                                    <description><![CDATA[बहुत सारे ऐसे किसान हैं जो इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/traders-are-exploiting-farmers-by-not-paying-fixed-price-in-bid/article-73544"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/boli-me-tay-dam-nhi-dekr-vyapari-kr-rhe-kisano-ka-shoshan...ramganjmandi,-kota-news-23-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>रामगंजमंडी। रामगंजमंडी कृषि उपज मंडी में व्यापारियों के किसानों का शोषण करने का मामला सामने आया है। जाकरकारी के अनुसार रामगंजमंडी कृषि उपज मंडी समिति विशिष्ट श्रेणी की मंडी समिति है। यहां दूर-दूर से कृषक कृषि उपज बेचने आते हैं। जिंस बिकने के बाद भी बोली में तय दाम नहीं मिलने पर किसान दर-दर भटक कर इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही। ताजा मामला पिड़ावा तहसील से आए किसान भेरूसिंह का है। जिसको एक व्यापारी की मनमानी के कारण तीन दिन से परेशान होना पड़ रहा है। इंसाफ के लिए वह दर-दर भटक रहा है लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। बोली में तय दाम से भी व्यापारी कम दाम पर खरीदने की कह कर चक्कर दे रहा है। पिड़ावा तहसील के मैनपुर गांव से किसान भेरूसिंह 40 क्विंटल धनिया बेचने आया था। 4 दिन पूर्व उसकी जिंस नीलामी बोली में 8650 रुपए प्रति क्विंटल में तय करके माल पर व्यापारी ने पर्ची लगा दी थी। बाद में वह पर्ची व्यापारी के मुनीम ने फाड़ दी और कम दाम में बेचने की बात कही तो किसान ने मना कर दिया। दूसरे दिन फिर उसी उपज की बोली नरेंद्र ट्रेडर्स नामक फर्म ने 8650 रुपए लगा दी। जिसकी पर्ची किसान ने अपने पास रख ली। नरेंद्र ट्रेडर्स ने इस उपज को रमन मणि फर्म को बेच दी। किसान का कहना है कि व्यापारी कम रेट में माल खरीदना चाहता है। जबकि पर्ची पर 8650 रुपए लिखे हैं। अगर कम दाम पर बेचता है तो उसे 15 हजार का नुकसान हो रहा है। व्यापारी दोनों व्यापारियों के यहां भटकता रहा। उसने मंडी समिति सचिव को भी मामले से अवगत करवाया। लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। भेरूसिंह ने बताया कि ऐसे बहुत सारे किसान हैं जो इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहे हैं। व्यापारी बोली में तय दाम नहीं देकर कृषकों का शोषण कर रहे हैं।</p>
<p>हमारी फर्म ने कृषि उपज की बोली लगाई है। वह रमण मणि फर्म को बेच दी है। वह फर्म बारदाना देकर माल उठाए। कृषि उपज मंडी में शिकायत करें। हमारी कोई गलती नहीं है।<br /><strong>-नरेंद्र कुमार, नरेंद्र ट्रेडर्स</strong></p>
<p>किसान की कृषि उपज की तय बोली के दाम नहीं मिलने की शिकायत सामने आई है। दोनों व्यापारिक फर्मों को नोटिस देकर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।<br /><strong>- दिवाकर दाधीच, सचिव, कृषि उपज मंडी, रामगंजमंडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/traders-are-exploiting-farmers-by-not-paying-fixed-price-in-bid/article-73544</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/traders-are-exploiting-farmers-by-not-paying-fixed-price-in-bid/article-73544</guid>
                <pubDate>Sat, 23 Mar 2024 19:44:29 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-03/boli-me-tay-dam-nhi-dekr-vyapari-kr-rhe-kisano-ka-shoshan...ramganjmandi%2C-kota-news-23-03-2024.jpg"                         length="594481"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अनाज मंडियों में किसानों की जगह अफसर राज</title>
                                    <description><![CDATA[बोर्ड नहीं होने से सबसे ज्यादा खामियाजा लाखों किसानों को भुगतना पड़ रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/officers-rule-instead-of-farmers-in-grain-markets/article-71274"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/transfer-(4)15.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्रदेश की कृषि उपज मण्डियों में संचालन मण्डल के सदस्यों एवं अध्यक्षों की कुर्सियां पिछले आठ साल से खाली पड़ी हैं। इनमें कोटा की भामाशाहमंडी भी शामिल है। इस अवधि में ना तो भाजपा सरकार मंडी संचालन मण्डल के चुनाव करा पाई और ना ही कांग्रेस सरकार ने ध्यान दिया। वर्तमान में भामाशाहमंडी सहित प्रदेश में 173 कृषि उपज मंडियों में प्रशासकों का ही राज चल रहा है। मंडियों में जो संचालक मण्डल चुना जाता है, वह मंडी समिति में होने वाले वार्षिक बजट का ब्यौरा देखता है। इसमें से मंडी इलाके में योजनाओं पर कितना बजट पारित करना है व कितना खर्च करना है, यह भी तय करता है। प्रदेश में कृषि उपज मण्डियों में 2011 में संचालन मण्डल के चुनाव हुए थे, जिनका कार्यकाल 2016 में ही पूरा हो गया। उसके बाद संचालन मंडल के चुनाव नहीं हुए हैं।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />- 2011 में हुए थे कृषि उपज मण्डियों में संचालन मण्डल चुनाव<br />- 2016 में पूरा हो गया था संचालन मण्डल का कार्यकाल<br />- 173 कृषि उपज मण्डियों में प्रशासकों का राज<br />- 8 वर्ष से संचालन मण्डल सदस्यों व अध्यक्षों की कुर्सियां खाली</p>
<p><strong>किसानों को भुगतना पड़ रहा नुकसान</strong><br />किसान नेता दशरथ कुमार ने बताया कि अनाज मंडियों में लोकतांत्रिक व्यवस्था से चुने किसान, मजदूर, व्यापारी प्रतिनिधियों के बोर्ड के हाथ में व्यवस्था होती है। बोर्ड नहीं होने से सबसे ज्यादा खामियाजा लाखों किसानों को भुगतना पड़ रहा है। निर्वाचित किसान प्रतिनिधि (बोर्ड सदस्य) नहीं होने से उनकी आवाज कोई नहीं उठाता। इस व्यवस्था से व्यापारियों और मंडी श्रमिकों के अधिकारों पर भी कुठाराघात हो रहा है। इनके प्रतिनिधि भी बोर्ड में शामिल होते हैं।</p>
<p><strong>विकास कार्य भी होतेहैं प्रभावित</strong><br />कृषि उपज मण्डियों में सात वर्ष से चुनाव नहीं होने के कारण इनके संचालन मण्डल का चुनाव नहीं हो पाया है। इससे मण्डियों में विकास नहीं हो पाया है और किसानों को भी लाभ से वंचित होना पड़ रहा है। मण्डियों के संचालन का काम प्रशासकों के हाथों में है। अधिकांश कृषि उपज मण्डियों में प्रशासक ही नियुक्त हैं। मण्डी समिति बोर्ड का गठन कृषक, व्यापारी, सरकार द्वारा मनोनीत सदस्य व स्थानीय विधायक मिलकर करते हैं। </p>
<p><strong>प्रकिया शुरू हुई, लेकिन चुनाव ने अटकाई</strong><br />मण्डी संचालन मण्डल के चुनाव के लिए वर्ष 2016 में कार्यकाल खत्म होने के बाद वर्ष 2017 में चुनाव प्रक्रिया के लिए अध्यक्ष पदों पर लॉटरी भी निकाली गई थी। वार्डों का गठन भी हो गया था, लेकिन 2018 विधानसभा चुनावी वर्ष होने के कारण मण्डी चुनाव खटाई में पड़ गए, जिस पर अभी तक अमल नहीं हो सका।</p>
<p><strong>सभी वर्ग की होती है भागीदारी</strong><br />संचालन मंडल में सभी वर्ग की भागीदारी होती है। यह मंडल ही मंडी प्रशासन के साथ मिलकर अनाज मंडी के विकास, वित्तीय और अन्य निर्णय करता है। मंडल में किसानों के आठ निर्वाचित सदस्य होते हैं। साथ ही स्थानीय विधायक, व्यापारियों के दो सदस्य, तुलाईदार या मंडी श्रमिकों का एक सदस्य, सहकारी विपणन सोसायटी का एक सदस्य होता है। राज्य सरकार दो सदस्यों को मनोनीत करती है। संबंधित स्थानीय निकाय का एक सदस्य भी बोर्ड में शामिल रहता है। अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण की व्यवस्था है।</p>
<p>मण्डियों में संचालक मण्डल के चुनाव 2011 में हुए थे, जिनका कार्यकाल वर्ष 2016 में ही खत्म हो गया था। इसके बाद सरकार ने चुनाव नहीं कराए। चुनाव का निर्णय सरकार करती है। मण्डियों में इस समय संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त कर रखा है।<br /><strong>-जवाहरलाल नागर, सचिव, भामाशाह कृषि उपजमंडी </strong></p>
<p>निर्वाचित बोर्ड होगा तो किसानों के प्रतिनिधि होंगे। वह किसान की बात रखेगा। ठीक से प्रावधानों को लागू करवा पाएंगे। अभी प्रशासक का झुकाव व्यापारी की तरफ ज्यादा रहता है। व्यापारी हित में किसान का अहित हो जाता है। इसमें संतुलन के लिए निर्वाचित बोर्ड और अध्यक्ष होने जरूरी हैं।<br /><strong>-लक्ष्मीचंद नागर, किसान नेता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/officers-rule-instead-of-farmers-in-grain-markets/article-71274</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/officers-rule-instead-of-farmers-in-grain-markets/article-71274</guid>
                <pubDate>Tue, 27 Feb 2024 15:53:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-02/transfer-%284%2915.jpg"                         length="54704"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        