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                <title>mother lab - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>6 माह गुजरे जाने, नहीं खुल पाई मदर लैब</title>
                                    <description><![CDATA[कीमती मशीनें 4 महीने बाद भी पैकिंग से बाहर नहीं निकल सकीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/six-months-have-passed--yet-the--mother-lab--remains-unopened/article-159797"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(2)32.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कैथून में निर्माणाधीन सेंट्रल लैब पिछले छह महीनों से फाइलों में तो बनती नजर आ रही है। लेकिन धरातल पर इसके बिल्कुल उलट है। निर्माण विभाग के जिम्मेदार अधिकारी जहाँ काम को शत-प्रतिशत पूरा बताकर अगले 5-7 दिनों में इसे हैंडओवर करने का दावा कर रहे हैं, वहीं स्वास्थ्य विभाग (BCMO) के जमीनी फीडबैक ने अधिकारियों के इन दावों और झूठ की कलई खोलकर रख दी है। लैब की मशीनें आए 4 महीने बीत चुके हैं, लेकिन बिल्डिंग तैयार न होने से जाँच के सैंपल आज भी बूंदी भेजने पड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>न लाइट कनेक्शन, न पानी की टंकी फर्स्ट फ्लोर अधूरा</strong><br />जब इस संबंध में जमीनी हकीकत जानी गई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। ग्राउण्ड़ फ्लोर के हाल में भर काम बाकी है। जबकि पहली मंजिल के 30X30 के हाल में काफी काम होना है। लाइट और पानी का कनेक्शन अभी तक किये ही नहीं गये। अधिकारी जहाँ बिजली फिटिंग की बात कह रहे हैं, वहीं हकीकत यह है कि लैब के लिए अभी तक लाइट का परमानेंट कनेक्शन ही नहीं हुआ है, सिर्फ फाइल प्रोसेस में है। पानी का कनेक्शन भी नहीं हुआ है और न ही छत पर पानी की टंकियां रखी गई हैं।</p>
<p><strong>फर्स्ट फ्लोर और लेट-बाथ अधूरे</strong><br />लैब के फर्स्ट फ्लोर का काम अभी भी काफी बाकी है। वहाँ बने टॉयलेट (लेट-बाथ) का काम अधूरा पड़ा है।</p>
<p><strong>टीनशेड और रेलिंग गायब</strong><br />सीढ़ियों की रेलिंग और बाहर की तरफ जो टीनशेड बनना था, उसका काम अभी तक नहीं हुआ है।</p>
<p><strong>4 महीने से पैकिंग में पडी मशीनें,जाँच के लिए बाहर जा रहे सैंपल</strong><br />145 तरह की जटिल जांचें होंगी 24X7 निःशुल्कइस लैब में कैंसर मार्कर, बायोप्सी और हार्मोनल टेस्ट (HbA1C) जैसी 145 प्रकार की जटिल जांचें चौबीसों घंटे (24X7) बिल्कुल मुफ्त मिलेंगी। इसके लिए यहाँ ऑटोमैटिक बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर, कोबास C-801 और इलेक्ट्रोलाइट एनालाइजर जैसी विश्वस्तरीय मशीनें स्थापित होनी हैं। विडंबना यह है कि इस सेंट्रल लैब के लिए कीमती मशीनें आए 4 महीने से अधिक का समय गुजर जाने के बाद भी पैकिंग से बाहर नही निकल पाई। वहीं विभाग की तरफ से अभी बिल्डिंग में बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं न होने के कारण ये मशीनें इंस्टॉल नहीं हो पा रही हैं। वर्तमान में मरीजों के सैंपल कैथून सीएचसी पर कलेक्ट तो किए जा रहे हैं, लेकिन उनकी जाँच के लिए उन्हें बूंदी भेजा जा रहा है।<br /><strong>- शैलेन्द्र सुथार एक मरीज के परिजन</strong></p>
<p><strong>काम पूरा, बस हैंडओवर की तैयारी</strong><br />एनएचएम के अधिकारी जेपी सांखला ने बताया कि कैथून लैब का अंदरूनी काम पूरी तरह कंप्लीट हो चुका है। पुताई, खिड़की-दरवाजे, बिजली के बोर्ड और ग्रेनाइट मोल्डिंग का काम खत्म है। अधिकारी के मुताबिक, केवल बाहर की थोड़ी-बहुत सफाई और कुछ जगहों पर रेलिंग लगाना बाकी है। उन्होंने कहा कि उनके और एईएन के ट्रांसफर होने के कारण औपचारिक पत्र नहीं बना है, लेकिन अगले 5 से 7 दिनों में वे इस डबल स्टोरी बिल्डिंग को सीएमएचओ (CMHO) या उनके द्वारा नामित प्रभारी को हैंडओवर कर देंगे।</p>
<p><strong>सवाल? अब पद खाली तो कैसे होगा बाकि काम</strong><br />अधिकारियों का यह रवैया साफ दर्शाता है कि वे अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़कर केवल कागजी खानापूर्ति में जुटे हैं। एक तरफ अधिकारी का तबादला कृषि विभाग में हो चुका है और एईएन विजय नागर सांगोद पीडब्ल्यूडी में जा चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ कोटा में यह पद फिलहाल खाली है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर अधिकारी बिना काम पूरा किए जा रहे हैं, तो इस अटके हुए प्रोजेक्ट को गति कौन देगा?</p>
<p>केन्द्र सरकार के इस प्रोजेक्ट की टाईम लाईन को बार बार टाला जा रहा है। जनता के स्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर विषयाें पर लापरवाही सही नहीं है। जिम्मेदार केवल नोटिस देकर भूल रहे है जबकि प्राथमिकता से यह कार्य पूरा करना चाहिए।<br /><strong>- हरिओम पुरी पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कैथून</strong></p>
<p>मेरा डेपुटेशन खत्म हो गया है, ऐसे में मुझे वापस मेरे मूल विभाग में जाना पडेगा हमारे द्वारा काम लगभग पुरा हो गया है बाहर से थोडी फिनीशिंग का काम चल रहा है। जैसे ही फाइनल वर्क इंसपेक्शन हो जायेगा उसके बाद हैण्ड ओवर के लिये चिठ्ठी लिखी जायेगी।<br /><strong>- जेपी सांखला एक्सईएन एनआरएचएम कोटा</strong></p>
<p>जब तक बिल्डींग तैयार नही होती तब तक हमारे द्वारा सीएचसी की लैब में जांचे की जा रही है बडी जांचों के लिये हमारे यहां से सेम्पल कलेक्शन करके बूंदी भेजे जा रहे है।<br /><strong>- तिलक मीणा लैब इंचार्ज सेन्ट्रल मदर लैब कैथून</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jul 2026 14:24:23 +0530</pubDate>
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                <title>सीएचसी में मदर लैब शुरू नहीं होने से मरीज परेशान, नहीं मिल रहा उन्नत जांच सुविधाओं का लाभ </title>
                                    <description><![CDATA[मदर लैब के लिए मशीनें सीएचसी पहुंची लेकिन भवन अधूरा होने से  स्थापित नहीं की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/patients-inconvenienced-as--mother-lab--fails-to-launch-at-chc--denied-access-to-advanced-diagnostic-facilities/article-150420"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(16).png" alt=""></a><br /><p>कैथून। कैथून सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वीकृत बीपीएचयू भवन का निर्माण तय समय पर पूरा नहीं होने से मदर लैब शुरू नहीं हो सकी है, जिससे मरीजों को मुफ्त जांच सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जानकारी के अनुसार कैथून सीएचसी में बीपीएचयू यूनिट वर्ष 2023 में स्वीकृत हुई थी, जिसके लिए 75 लाख रुपए मंजूर किए गए थे। योजना के अनुसार वर्ष 2024 तक भवन निर्माण पूरा कर हैंडओवर होना था, लेकिन अब तक निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। इसके चलते मदर लैब शुरू नहीं हो सकी और क्षेत्र के हजारों मरीज उन्नत जांच सुविधाओं से वंचित हैं। कैथून सीएचसी में आसपास के गांवों से सैकड़ों मरीज रोजाना उपचार के लिए आते हैं। भवन तैयार नहीं होने से कैंसर मार्कर, बायोप्सी और हार्मोनल टेस्ट सहित 145 प्रकार की जटिल जांचें शुरू नहीं हो पा रही हैं।</p>
<p><strong>मशीनें पहुंचीं, लेकिन स्थापना रुकी</strong><br />जानकारी के अनुसार मदर लैब के लिए ऑटोमैटिक बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर, कोबास C-801 और इलेक्ट्रोलाइट एनालाइजर जैसी मशीनें सीएचसी पहुंच चुकी हैं, लेकिन भवन अधूरा होने के कारण इन्हें स्थापित नहीं किया जा सका। योजना के तहत पीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से सैंपल लेकर मदर लैब भेजे जाने थे और रिपोर्ट ऑनलाइन मरीजों को उपलब्ध कराई जानी थी।</p>
<p><strong>विधायक से लगाई गुहार</strong><br />भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष हरिओम पुरी और देवेंद्र शर्मा ने मदर लैब शुरू कराने को लेकर विधायक कल्पना देवी से चर्चा की। इस पर विधायक ने संबंधित अधिकारियों को जल्द निर्माण कार्य पूरा कर लैब शुरू कराने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p><strong>शिफ्टिंग की चर्चा से बढ़ी चिंता</strong><br />स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि मदर लैब को कैथून के बजाय कोटा में कहीं अन्य स्थान पर शिफ्ट किया जा सकता है। इस पर हरिओम पुरी ने लैब को कैथून में ही संचालित रखने और मशीनों को अन्यत्र नहीं भेजने की मांग की है। साथ ही लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि लैब को कहीं और स्थानांतरित किया गया तो इसका विरोध किया जाएगा।</p>
<p>ठेकेदार द्वारा समय पर कार्य पूरा नहीं करने से परियोजना रुकी हुई है। ठेकेदार को कई बार मौखिक रूप से निर्देश दिए गए हैं और उच्च अधिकारियों को पत्र भी भेजे गए हैं। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिला कलक्टर को भी इस स्थिति से अवगत कराया जा चुका है।<br /><strong>-डॉ. राजेश सामर, चिकित्सा अधिकारी प्रभारी, सीएचसी, कैथून</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 17:43:52 +0530</pubDate>
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