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                <title>vice - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>बहाल होंगे हटाए गए ठेकाकर्मी कुलपति ने दी सैद्धांतिक सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[आश्वासन के बावजूद ठेका कर्मचारियों को बहाल करने का आदेश जारी नहीं करने के विरोध में ठेकाकर्मियों ने गुरुवार को वेटरनरी विश्वविद्यालय बीकानेर के कुलपति कार्यालय में सत्याग्रह पर बैठ गए। राजस्थान राज्य संयुक्त कर्मचारी एकीकृत के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष भंवर पुरोहित नेतृत्व में जलदाय तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश उपाध्याय के साथ विश्वविद्यालय के सभी ठेका कर्मियों ने सत्याग्रह किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bikaner/the-removed-contract-workers-will-be-reinstated-the-vice-chancellor/article-13364"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/b-1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बीकानेर।</strong> आश्वासन के बावजूद ठेका कर्मचारियों को बहाल करने का आदेश जारी नहीं करने के विरोध में ठेकाकर्मियों ने गुरुवार को वेटरनरी विश्वविद्यालय बीकानेर के कुलपति कार्यालय में सत्याग्रह पर बैठ गए। राजस्थान राज्य संयुक्त कर्मचारी एकीकृत के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष भंवर पुरोहित नेतृत्व में जलदाय तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश उपाध्याय के साथ विश्वविद्यालय के सभी ठेका कर्मियों ने सत्याग्रह किया। कुलपति सतीश के. गर्ग की विश्वविद्यालय के अधिकारियों की मौजूदगी में सैद्धांतिक सहमति के बाद सत्याग्रह से उठे।</p>
<p>इस दौरान आंदोलनकारियों ने बताया कि वेटरनरी विश्वविद्यालय से निकाले गये ठेका कर्मचारियों को बहाल करने के लिए वेटरनरी विश्वविद्यालय बीकानेर के कुलपति बार-बार आश्वासन दे रहे थे, लेकिन कोई आदेश नहीं करने के कारण सतयाग्रह करना पडा। सत्याग्रहियों के अनुसार कुलपति गर्ग ने कहा है कि दो भागों में सभी निकाले गये कर्मचारियों को दो से तीन दिनों में बहाल कर दिया जाएगा। इस अवसर पर सेवा प्रदाता कर्मचारी संघ के हनुमान गहलोत, भैरू रतन औझा, मान सिंह, विक्रम सौलंकी, विजय सिंह, धनराज जावा, अविनाश, उमेश पाण्डे, ऋषिराज, जुबेर खान, प्रवीण स्वामी, विनोद गहलोत, दिगविजय आहुजा, राजेश भादाणी, रोनक चागरा, जितेन्द्र वालमिकी, विष्णु टॉक, दयाशंकर बारासा, नवीन शर्मा आदि मौजूद रहे।    <br />फोटो-30बीकेएन पीएच-3</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बीकानेर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Jul 2022 13:07:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सुविवि: कुलपति ने बढ़ाई छुट्टी, 40 दिन में तीसरा कार्यवाहक</title>
                                    <description><![CDATA[कॉमर्स कॉलेज के डीन प्रो.पीके सिंह को यह जिम्मा सौंपा दिया है, क्योंकि कुलपति प्रो. अमेरिकासिंह ने 10 जून तक अवकाश ले लिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/-vice-chancellor---extended---leave--third-caretaker--40-days/article-10875"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/mohanlal-sukhadia-university.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>उदयपुर।</strong> सुखाड़िया विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार 40 दिनों में तीन कार्यवाहक कुलपति बनाए गए हैं। इस बार कॉमर्स कॉलेज के डीन प्रो.पीके सिंह को यह जिम्मा सौंपा दिया है, क्योंकि कुलपति प्रो. अमेरिकासिंह ने 10 जून तक अवकाश ले लिया है।  कुलपति प्रो. सिंह ने पहली बार कुलाधिपति को अवकाश लेने के कारणों का उल्लेख करते हुए प्रो. पीके सिंह को कार्यवाहक कुलपति बनाने की सूचना दी है। कुलपति प्रो. सिंह ने सोमवार को राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा कि ‘वे हृदय रोगी हैं। दो बार स्टंट लग चुके हैं। चिकित्सकों ने बेड रेस्ट करने और यात्रा नहीं करने का परामर्श दिया है। इस अवधि में प्रो. पीके सिंह जिम्मेदारी संभालेंगे। विशेष परिस्थितियों में प्रो. सिंह आॅनलाइन या मौखिक स्वीकृति देंगे।’ इस जानकारी रजिस्ट्रार सीआर देवासी को नहीं दी गई, जबकि विवि के परीक्षा, प्रवेश और अन्य मामलों में कई नीतिगत निर्णय के लिए रजिस्ट्रार उनके लौटने के इंतजार में हैं।</p>
<p><br /><strong>कमेटी दे सकती है अंतिम मौका</strong></p>
<p>योग्यता जांच मामले में संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में गठित कमेटी कुलपति प्रो. सिंह अंतिम मौका दे सकती है। सूत्रों की मानें तो कमेटी सदस्यों ने लखनऊ से प्रो.सिंह की योग्यता एवं सेवा संबंधित दस्तावेज जुटा लिए हैं तथा उनका मूल्यांकन भी कर लिया गया है। इसके चलते कुलपति प्रो. सिंह को उनका पक्ष रखने के लिए अंतिम अवसर प्रदान करने का निर्णय लिया जा रहा है, ताकि रिपोर्ट में उनका पक्ष भी शामिल किया जा सके।</p>
<p><strong>नाराज छात्रसंघ अध्यक्ष बोला, सस्पेंड करो</strong></p>
<p>इधर, सुविवि के पूर्व केंद्रीय छात्रसंघ अध्यक्ष निखिलराज सिंह ने सोमवार को रजिस्ट्रार सीआर देवासी को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर मांग की कि वे प्रो.सिंह को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड करें क्योंकि वे 40 दिनों से अवकाश पर है और नियम विरुद्ध जाकर कार्यवाहक कुलपति बना रहे हैं। ऐसे में तुरंत प्रभाव से प्रो. सिंह को हटाकर विवि संविधान के अनुसार नए कुलपति की नियुक्ति होनी चाहिए। <br /><br /><strong>यह है मामला</strong><br />कुलपति प्रो. सिंह पर सीकर के गुरुकुल विवि के भौतिक सत्यापन में गलत रिपोर्ट पेश करने का आरोप है। साथ ही उन पर आरोप है कि उनकी योग्यता नहीं होने के बावजूद वे कुलपति बने हंै। इसका आधार उनके द्वारा प्रस्तुत भ्रामक व झूठे दस्तावेज प्रस्तुत करना है। इसके अलावा महिला प्रोफेसरों के साथ भी अभद्रता का आरोप है जिसकी शिकायत राजभवन में की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 May 2022 14:23:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कुलपतियों के सलेक्शन में पॉलिटिकल कनेक्शन : चयन के लिए प्रदेश में सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में अलग-अलग एक्ट</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों में कुलपति तय करने के लिए सर्च कमेटी और चयन प्रक्रिया में पॉलिटिकल खामियों के चलते योग्यता के पैमाने चरमरा गए हैं। चयन में राजनीतिक पक्ष ज्यादा मजबूत होने से कई बार गलत चयन विश्वविद्यालय के तीन अकादमिक साल को दांव पर लगा देता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A5%89%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8---%E0%A4%9A%E0%A4%AF%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%85%E0%A4%B2%E0%A4%97-%E0%A4%85%E0%A4%B2%E0%A4%97-%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F/article-4114"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/whatsapp-image-2022-01-22-at-16.08.07.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कुलपति चयन के लिए मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में जहां समान एक्ट हैं, वहीं राजस्थान में सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में अलग-अलग। कई राज्यों में गवर्नर तो कई में मुख्यमंत्री कुलपति के नाम को मंजूरी देते हैं।  राजस्थान में राज्यपाल और मुख्यमंत्री कुलपति तय करते हैं। राजस्थान में कुलपति सर्च कमेटी में चार सदस्य होते हैं। इसमें विवि सिंडीकेट कमेटी, राज्य सरकार, राज्यपाल और यूजीसी के मेम्बर होते हैं। कमेटी में अप्रत्यक्ष रूप से दो राज्य और दो केन्द्र के प्रतिनिधि होते हैं। कमेटी पांच नाम राज्यपाल के पास भेजती है, जो मुख्यमंत्री से चर्चा कर एक को फाइनल करते हैं।<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>गलत चयन से ये नुकसान</strong></span></span><br /> राजनीतिक दखल के चलते योग्यता और मापदंडों को दरकिनार कर कई बार बिना विषय विशेषज्ञ को कुलपति बना दिया जाता है, जिससे विवि का अकादमिक स्तर गिरता है। राज्यपालों के भी अपने गृह राज्यों से लोगों को तवज्जो देने के मामले सामने आते रहे हैं। सर्च कमेटी में शामिल लोग आवेदक के दस साल के प्रोफेसर या अनुभव और आपराधिक मामले न होने के एफिडेविड आदि पर चयन करते हैं, लेकिन राजनीतिक दखल से फाइनल होने वाले नामों के बाद सर्च कमेटी के चार लोगों की काबिलियत पर भी सवाल उठते हैं। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>प्रोसेस सही पालना ठीक नहीं</strong></span></span><br /> विशेषज्ञों की मानें तो अधिकांश एक्ट में यूजीसी के हिसाब से चयन प्रक्रिया तय है। विज्ञापन के बाद प्रक्रिया तो सही चलती है, लेकिन पालना में कई बार बेईमानी होती है। कई विवि के विज्ञापनों में योग्यता के प्रोफेसर या अनुभव को स्पष्ट नहीं किया जाता। टेक्नीकल, मेडिकल, इंजीनियरिंग आदि सेक्टर में विषय विशेषज्ञ का कई बार ध्यान नहीं रखा जाता। सही चयन करने के लिए सर्च कमेटी के कई मापदण्डों में समय रहते बदलाव भी हों। कमेटी सदस्यों की काबिलियत की भी जांच हो, ताकि अन्य राज्यों के लोग प्रदेश के काबिल लोगों का हक न छीनें। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>योग्यता के पैमाने चरमराए<br /> ऐसे-ऐसे भी बने कुलपति</strong></span></span><br /> <br /> <strong>केस 01 : </strong>एमडीएस यूनिवर्सिटी अजमेर के तत्कालीन कुलपति आरपी सिंह निजी कॉलेज के एफिलेशन के लिए एनओसी के बदले रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने पर सात सितम्बर, 2020 में जेल गए।<br /> <br /> <strong>केस 02 : </strong>अनुभव योग्यता पर कोर्ट में केस के बाद राजस्थान विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति जेपी सिंघल को 2016 में कोर्ट आदेशों से हटाया गया था।<br /> <br /> <strong>केस 03 : </strong>कहते हैं, एक बार सुखाड़िया विवि उदयपुर में तत्कालीन कुलपति का चयन लगभग हो चुका था। अचानक एक नाम भेजा गया जिसे निरस्त कर दिया गया। आला स्तर पर नाराजगी हुई और नाम निरस्त करने वाली सर्च कमेटी ही निरस्त कर दी गई। आखिरी क्षणों में जो नाम छूटा था, उसका ही चयन हुआ। <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> विवि की स्थिति</strong></span></span><br /> सरकारी विवि    23<br /> प्राइवेट विवि    52<br /> डीम्ड विवि    8<br /> सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी    01<br /> देशभर में सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी    54<br /> स्टेट यूनिवर्सिटी    442<br /> डीम्ड यूनिवर्सिटी    126<br /> प्राइवेट यूनिवर्सिटी    397<br /> <strong>यूजीसी की रिपोर्ट के अनुसार</strong><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> सर्च कमेटी बन गई है सलेक्शन कमेटी</strong></span></span><br /> कुलपति चयन के लिए जब सर्च कमेटी का प्रावधान बना तो कमेटी को यूनिवर्सिटी की गरिमा के हिसाब से देशभर से व्यक्ति तलाशने का जिम्मा था, लेकिन धीरे-धीरे यह कमेटी सलेक्शन कमेटी बन गई। काम था योग्य की तलाश का, सिमट गया विज्ञापन से आवेदन लेकर एक को चुन लेने तक।<br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>राजनीतिक दखल से कमेटी बन गई कठपुतली</strong></span></span><br /> सूत्रों की मानें तो पात्र लोगों की तलाश की ये कमेटियां केवल कठपुतली बनकर रह गईं। राजनीतिक रसूख के चलते योग्यताओं का दमन करने से भी नहीं चूका जाता। प्रदेश की एक बहुचर्चित यूनिवर्सिटी में जब सर्च कमेटी के पास एक आवेदन कुलपति बनने के लिए पहुंचा तो कमेटी ने आवेदन को ही खारिज कर दिया। राजनीतिक दबाव इस कदर हावी था कि सर्च कमेटी को ही भंग कर दिया गया। दूसरी कमेटी बनाकर सिफारिशी को कुलपति बना दिया गया। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>इनका कहना है...</strong></span></span><br /> टेक्नीकल, मेडिकल,इंजीनियरिंग और अन्य विषयों के  विवि में कुलपति चयन के लिए बदले हुए नियम लागू होने चाहिए। चयन में अनुभव के विवाद से विवि में अध्ययनरत छात्र और स्टाफ प्रभावित होते हैं।-प्रो. नरेश दाधीच, पूर्व कुलपति, कोटा विवि <br /> <br /> करीब 14 कुलपति यूपी और उत्तराखंड जैसे राज्यों से बने हैं। यहां भी एक्ट अलग-अलग नहीं, कॉमन हों। -प्<strong>रो. अरुण चतुर्वेदी, उदयपुर</strong><br /> <br /> कुलपति चयन के लिए योग्यता और मापदंड की प्रक्रिया सुनिश्चित होनी चाहिए। कमेटी में शामिल लोगों के अलावा राज्यपाल और मुख्यमंत्री स्तर पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए। विज्ञापन में स्पष्ट हो कि वह उसी फील्ड का व्यक्ति हो। -प्रो.संजय लोढ़ा, अजमेर <br /> <br /> प  श्चिम बंगाल में सीएम ने कुलपति चयन में राज्यपाल की भूमिका समाप्त कर दी तो यूपी में सीएम का हस्तक्षेप नहीं है। तमिलनाडु में कोशिश है कि सीएम ही कुलाधिपति हो।-<strong>प्रो.बीएम शर्मा, जयपुर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Jan 2022 16:21:50 +0530</pubDate>
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                <title>वाइस एडमिरल हरि कुमार होंगे नए नौसेना प्रमुख</title>
                                    <description><![CDATA[वाइस एडमिरल आर हरि कुमार अभी पश्चिमी नौसेना कमान के प्रमुख हैं और वह 30 नवंबर को नए नौसेना प्रमुख का कार्यभार संभालेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B8-%E0%A4%8F%E0%A4%A1%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%B2-%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%8F-%E0%A4%A8%E0%A5%8C%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96/article-2228"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/vice_admiral_r._hari_kumar.jpg" alt=""></a><br /><p> दिल्ली। सरकार ने वाइस एडमिरल आर हरि कुमार को नया नौसेना प्रमुख नियुक्त किया है।  वह मौजूदा नौसेना प्रमुख एडमिरल कर्मबीर सिंह का स्थान लेंगे, जो आगामी 30 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। वाइस एडमिरल आर हरि कुमार अभी पश्चिमी नौसेना कमान के प्रमुख हैं और वह 30 नवंबर को नए नौसेना प्रमुख का कार्यभार संभालेंगे। वाइस एडमिरल आर हरि कुमार का जन्म 12 अप्रैल, 1962 को हुआ था और उन्हें एक जनवरी, 1983 को नौसेना की एग्जीक्यूटिव ब्रांच में कमीशन मिला था। नौसेना में 39 वर्ष के अपने लंबे और विशिष्ट सेवाकाल में उन्होंने कमान, स्टाफ और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। वाइस एडमिरल आर हरि कुमार को उत्कृष्ट तथा उल्लेखनीय सेवा के लिए परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया जा चुका है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Nov 2021 12:25:42 +0530</pubDate>
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                <title>प्रो. अनिल शुक्ला महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यपाल एवं कुलाधिपति  कलराज मिश्र ने जारी किए आदेश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B--%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B2-%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BF-%E0%A4%A6%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%A6-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4/article-1996"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/kalraj-mishra.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर</strong>। राज्यपाल एवं कुलाधिपति कलराज मिश्र ने शुक्रवार को एक आदेश जारी कर महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में  प्रो. अनिल कुमार शुक्ला को कुलपति पद पर नियुक्त किया है।  मिश्र ने राज्य सरकार के परामर्श से यह नियुक्ति  प्रदान की है। राज्यपाल मिश्र ने शुक्ला को यह निुयक्ति कुलपति कार्यभार ग्रहण करने से तीन वर्ष अथवा सत्तर वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक, जो भी पहले हो, के लिए प्रदान की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Oct 2021 16:00:21 +0530</pubDate>
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