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                <title>Darjeeling - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पश्चिम बंगाल चुनाव : पहले चरण में 16 निर्वाचन क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक, 23 अप्रैल को होगी वोटिंग</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान से पूर्व चुनाव आयोग के आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है। 16 विधानसभा क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज में महिलाओं का अनुपात सबसे ज्यादा है। विश्लेषकों का मानना है कि इस बार महिला वोटर ही चुनाव परिणामों में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/in-the-first-phase-of-west-bengal-elections-the-number/article-151097"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/west-bengal-election.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से पूर्व चुनाव आयोग की ओर से जारी आंकड़ों में यह तथ्य सामने आया है कि राज्य की 152 में से कम से कम 16 विधानसभाओं में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा है। ये विधानसभाएं दार्जीलिंग, जलपाइगुड़ी, अललिपुरद्वार और मुर्शिदाबाद के बीच फैली हुई हैं। चुनाव आयोग के क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में कुल 3,60,77,171 मतदाता हैं, जिनमें 1,84,99,496 पुरुष और 1,75,77,210 महिलाएं हैं। 465 मतदाता थर्ड जेंडर के हैं। पहले चरण में मतदान करने वाले क्षेत्रों में मुर्शिदाबाद जिले के शमशेरगंज में महिलाओं का अनुपात सबसे ज्यादा है। यहां महिला मतदाताओं की संख्या 83,430 है, जबकि पुरुष मतदाता केवल 78,004 हैं। यानी पुरुषों की तुलना में 5,426 अधिक महिला मतदाता हैं।</p>
<p>दूसरी ओर दार्जिलिंग ज़िले के सिलीगुड़ी में 99,920 पुरुष मतदाताओं के मुकाबले 1,00,844 महिला मतदाता हैं। यानी सिर्फ़ 924 मतदाताओं का मामूली अंतर। जिन निर्वाचन क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से अधिक है, उनमें से कई उत्तरी बंगाल और उससे सटे क्षेत्रों के हैं। इनमें कालचीनी (एसटी) भी शामिल है, जहां महिला मतदाताओं (1,11,742) की संख्या पुरुष मतदाताओं (1,09,713) से अधिक है। सूची में मदारीहाट (एसटी) का नाम भी है, जहां 96,262 पुरुष मतदाताओं की तुलना में 97,695 महिला मतदाता हैं।</p>
<p>इसी तरह, नागराकाटा (एसटी) में महिलाओं को स्पष्ट बढ़त हासिल है, जहां 1,07,824 पुरुष मतदाताओं के मुकाबले 1,12,292 महिला मतदाता हैं। दार्जिलिंग ज़िले के विधानसभा क्षेत्रों, जैसे कि दार्जिलिंग, कर्सियांग, मातिगारा-नक्सलबाड़ी (एससी) और सिलीगुड़ी में महिला मतदाताओं की संख्या अधिक है। आयोग के आंकड़ों से पता चलता है कि दार्जिलिंग में 1,03,033 पुरुष मतदाताओं की तुलना में 1,04,681 महिला मतदाता हैं, जबकि कर्सियांग में यह अंतर और भी अधिक है, जहाँ 1,06,014 पुरुष मतदाताओं के मुकाबले 1,10,135 महिला मतदाता हैं। मातिगारा-नक्सलबाड़ी में यह अंतर कम है, लेकिन फिर भी महत्वपूर्ण है। यहां 1,34,906 महिला मतदाताएं 1,33,571 पुरुष मतदाताओं से अधिक हैं।</p>
<p>विश्लेषकों का कहना है कि इन चुनाव क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाने की संभावना है, खासकर इसलिए क्योंकि पार्टियां महिला वोटरों को ध्यान में रखकर बनायी गयी कल्याणकारी योजनाएं और संदेश के ज़रिए अपील करने के लिए अपने अभियान को तेज़ी से बदल रही हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से काफी नाम हटाये गये हैं, लेकिन चलन बताता है कि पुरुषों के नाम हटाने की संख्या थोड़ी ज़्यादा रही है।</p>
<p>एक विश्लेषक ने कहा, "ज़ाहिर है, कुछ ऐसे निर्वाचन क्षेत्र हैं जहां आने वाले चुनावों में महिला मतदाता एक निर्णायक कारक के रूप में उभरी हैं। हटाये गये नामों के सटीक आंकड़े अलग-अलग ज़िलों में अलग-अलग हैं, लेकिन व्यापक रुझान चुनावी सूचियों में लिंग अनुपात के धीरे-धीरे संतुलित होने की ओर इशारा करता है।" जैसे-जैसे मतदान के दिन से पहले चुनाव प्रचार तेज़ हो रहा है, पर्यवेक्षकों का मानना है कि जिन निर्वाचन क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की संख्या अधिक है, वहां सामाजिक कल्याण, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा और वित्तीय सहायता योजनाओं जैसे मुद्दों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 17:57:41 +0530</pubDate>
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                <title>खराब मौसम के कारण दार्जीलिंग रैली में नहीं पहुंच पाए अमित शाह: गोरखा मुद्दे पर साधा ममता सरकार पर निशाना, बोले-इस बार होगा परिवर्तन</title>
                                    <description><![CDATA[खराब मौसम के कारण अमित शाह ने वीडियो संदेश के जरिए दार्जीलिंग में चुनावी रैली को संबोधित किया। उन्होंने ममता बनर्जी पर गोरखा मुद्दों की अनदेखी और 'पुलिस राज' का आरोप लगाया। शाह ने वादा किया कि 5 मई को भाजपा सरकार बनते ही गोरखाओं के संवैधानिक अधिकारों और लंबित समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/amit-shah-could-not-reach-darjeeling-rally-due-to-bad/article-150550"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/amit-shah2.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लंबे समय से चले आ रहे गोरखा मुद्दे के स्थायी समाधान का बुधवार को आश्वासन दिया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। अमित शाह खराब मौसम के कारण रैली स्थल पर नहीं पहुंच सके और वीडियो संदेश के माध्यम से उत्तर बंगाल के पर्वतीय इलाके के लोगों को संबोधित किया। वह दार्जीलिंग में निर्धारित चुनावी रैली को संबोधित करने के लिए वहां नहीं पहुंच सके थे, इसलिए उन्होंने मालदा से एक वीडियो संदेश के जरिए पहाड़ी क्षेत्र के मतदाताओं से संवाद किया।</p>
<p>अमित शाह को दार्जीलिंग और कुर्सियोंग विधानसभा क्षेत्रों से भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में दार्जीलिंग के लेबोंग में अपनी पहली रैली को संबोधित करना था, लेकिन खराब मौसम के कारण बागडोगरा हवाई अड्डे पर उनके विमान को उतरने की अनुमति मिल सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार ने पूरे दार्जीलिंग में पुलिस राज स्थापित कर दिया है। ममता बनर्जी की सरकार पर्वतीय इलाकों में जिस तरह का पुलिस शासन चला रही है, भाजपा के सत्ता में आते ही उसे उखाड़ फेंका जाएगा और गोरखाओं के साथ हुए अन्याय काे समाप्त किया जाएगा।</p>
<p>गोरखा मुद्दा अब तक अनसुलझा रहने का कारण बताते हुए अमित शाह ने मुख्यमंत्री पर इसकी अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ साल में उन्होंने पहाड़ी मुद्दों पर तीन बार बैठकें बुलाईं, लेकिन ममता बनर्जी न तो खुद शामिल हुईं और न ही उन्होंने दिल्ली में अपना कोई प्रतिनिधि भेजा। उन्होंने कहा कि उनके पश्चिम बंगाल दौरों के दौरान भी चर्चा के प्रयास सफल नहीं हुए, क्योंकि राज्य सरकार ने इसके लिए समय नहीं दिया। अमित शाह ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी पर्वतीय इलाकों में शांति या गोरखा समुदाय के लिए संवैधानिक अधिकारों की बहाली नहीं चाहतीं।</p>
<p>मतदाताओं को आश्वस्त करते हुए उन्होंने कहा कि पांच मई को बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद उनका पहला काम गोरखाओं के लंबे समय से लंबित मुद्दों का स्थायी समाधान खोजना होगा। केन्द्रीय गृह मंत्री ने व्यक्तिगत रूप से रैली में शामिल न हो पाने के लिए माफी भी मांगी और एक नयी अभियान तिथि की घोषणा की। उन्होंने बताया कि वह मतदाताओं को सीधे संबोधित करने के लिए 21 अप्रैल को सुकना का दौरा करेंगे। अमित शाह ने कहा कि पूरे राज्य में राजनीतिक परिवर्तन की लहर चल रही है। उन्होंने दावा किया कि घुसपैठ रोकना, सिंडिकेट प्रणाली को समाप्त करना और कानूनविहीनता पर अंकुश लगाना भाजपा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताएं होंगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 17:33:04 +0530</pubDate>
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