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                <title>Bab-el-Mandeb - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी में भी व्यापार की इजाजत नहीं, अमेरिकी नाकेबंदी जारी रही तो हम लाल सागर में रास्ते रोक देंगे: ईरान</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि उसके बंदरगाहों की नाकाबंदी नहीं हटी, तो वह बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य को बंद कर देगा। इससे दुनिया का 30% तेल पारगमन रुक सकता है। एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप कूटनीतिक सफलता का दावा कर रहे हैं, वहीं ईरान ने झुकने से साफ इनकार कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trade-is-not-allowed-even-in-the-gulf-of-oman/article-150598"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trujp.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के केंद्रीय सैन्य कमान ‘खतम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय’ के प्रमुख मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही अलीआबादी ने बुधवार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका फारस की खाड़ी में ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखता है और ईरान के वाणिज्यिक जहाजों एवं तेल टैंकरों के लिए असुरक्षा पैदा करता है, तो ईरान लाल सागर के महत्वपूर्ण ‘बाब-अल-मंडेब’ जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर देगा। ईरानी सरकारी मीडिया में जारी संदेश में अलीआबादी ने स्पष्ट किया कि ईरान की शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और लाल सागर में किसी भी प्रकार के आयात या निर्यात को जारी रखने की अनुमति नहीं देंगी। </p>
<p><strong>ईरान का बाब-अल-मंडेब पर काफी प्रभाव </strong></p>
<p>ईरान का बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर काफी प्रभाव है, जो लाल सागर का दक्षिणी प्रवेश द्वार और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु है। ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों का लाल सागर की सीमा से लगे एक बड़े हिस्से पर नियंत्रण है। यह जलडमरूमध्य पश्चिमी एशिया से निर्यात होने वाले प्राकृतिक गैस और तेल उत्पादों के लिए एक अनिवार्य मार्ग है, जो कुल वैश्विक ऊर्जा पारगमन का 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभालता है। </p>
<p><strong>...तो दुनिया में और बिगड़ सकते हैं हालात </strong></p>
<p>सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य के साथ-साथ बाब-अल-मंडेब को भी बाधित करने में सफल होता है, तो इससे दुनिया के कुल तेल पारगमन का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा रुक जाएगा। यह कदम पहले से ही अस्थिर वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक विनाशकारी झटका साबित हो सकता है। </p>
<p><strong>ईरान को झुकाने की कोशिश नाकाम होगी : पेजेशकियान</strong></p>
<p>इस बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने घोषणा की है कि ईरान को ‘आत्मसमर्पण’ के लिए मजबूर करने की अमेरिका या इजरायल की किसी भी कोशिश का ‘विफल होना तय’ है। उन्होंने कहा कि ईरान के लोग किसी हाल में इसे स्वीकार नहीं करेंगे। ईरान ने कभी युद्ध या अस्थिरता नहीं चाही है। वह अन्य देशों के साथ निरंतर संवाद और रचनात्मक जुड़ाव का पक्षधर रहा है। अमेरिका का नाम लिये बिना राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय व्यवहार में ‘दोहरे मानदंडों’ की आलोचना की और संप्रभु राष्ट्रों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की निंदा की। </p>
<p><strong>ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने के करीब: ट्रंप </strong></p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि ईरान के साथ संघर्ष ‘समाप्त होने के करीब’ है। उन्होंने एक संभावित कूटनीतिक सफलता का संकेत भी दिया है। ट्रंप ने संकेत दिया कि रुकी हुई बातचीत पाकिस्तान में कुछ ही दिनों में फिर से शुरू हो सकती है, जिससे युद्धविराम समाप्त होने से पहले किसी समझौते की उम्मीद जगी है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर अपनी पकड़ काफी सख्त कर दी है। सेना ने पुष्टि की है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से घेराबंदी लागू करते हुए ईरानी समुद्री व्यापार को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के प्रमुख ब्रैड कूपर ने कहा कि इस अभियान ने 36 घंटों से भी कम समय में ईरान की व्यापारिक जीवन रेखा को पंगु बना दिया है। ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी पूरी तरह से लागू कर दी गई है। ईरान की लगभग 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार पर निर्भर है, जो अब प्रभावी रूप से प हो गई है। इज़रायल-लेबनान वार्ता के बाद हिज्बुल्लाह पर सहमति के संकेत</p>
<p>इजरायल और लेबनान के बीच हुई प्रत्यक्ष वार्ता के बाद दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने हिज्बुल्लाह के मुद्दे पर समान सोच उभरने के संकेत दिए हैं और दक्षिणी लेबनान में जारी संघर्ष के समाधान की इच्छा जताई है। अमेरिका में इजरायल के राजदूत येचियल लेइटर ने कहा कि वार्ता में हिज्बुल्लाह के प्रभाव को समाप्त करने को लेकर रुख में समानता देखने को मिली। लेबनान सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह हिज्बुल्लाह के प्रभुत्व से बाहर निकलना चाहती है। </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:08:11 +0530</pubDate>
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