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                <title>Delimitation Bill - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Delimitation Bill RSS Feed</description>
                
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                <title>सरकार परिसीमन की आड़ में देश का निर्वाचक मानचित्र बदलना चाहती है : राहुल गांधी</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने परिसीमन विधेयक का पुरजोर विरोध करते हुए इसे ओबीसी और दलितों के हितों पर हमला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आरक्षण के नाम पर जनता को भ्रमित कर रही है और चुनावी लाभ के लिए भारत का चुनावी नक्शा बदलना चाहती है। राहुल ने इसे 'मनुवाद' का प्रयास करार दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-government-wants-to-change-the-electoral-map-of-the/article-150845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/rahul-gandhi-on-mnerga.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार परिसीमन की आड़ में भारत का निर्वाचक मानचित्र बदल देना चाहती है लेकिन इससे महिलाओं का सशक्तीकरण नहीं होने वाला है। राहुल गांधी ने संसदीय सीटों के परिसीमन विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह 'देश द्रोह' है और विपक्ष इसे किसी कीमत नहीं होने देगा। राहुल गांधी ने परिसीमन विधेयक 2026, संविधान ( एक सौ इकतीसवां संशोधन ) विधेयक 2026 और संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर हो रही चर्चा में शामिल होते हुए यह भी कहा कि सरकार लोक सभा सीटों का परिसीमन और विधायिका में महिलाओं का आरक्षण जिस तरह से देना चाहती है, वह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) , दलितों और अल्पसंख्यकों के हितों पर हमला है। विपक्षी सदस्य इसका कड़ा विरोध करते हैं।</p>
<p>उन्होंने सत्ता पक्ष से कहा, "आप ओबीसी को, दलितों को हिन्दू तो कहते हैं लेकिन सत्ता में उन्हें स्थान नहीं देते। आप इन्हें हिन्दू तो कहते हैं, लेकिन इन्हें कोई स्थान नहीं देते। कार्पोरेट में ओबीसी, दलित कहां हैं, शिक्षा क्षेत्र में वंचित वर्ग कहां है, निजी क्षेत्र में ओबीसी-दलित कहां हैं। सार्वजनिक क्षेत्र से वंचित वर्गों को हटाया जा रहा है।" राहुल गांधी ने सरकार से कहा कि महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने वाला पुराना विधेयक लाइये, वह उसका समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि अतीत में ओबीसी, दलित और अल्पसंख्यकों के लोगों के साथ बहुत क्रूर बर्ताव किया गया। अब यह विधेयक लाकर उनके साथ बिल्कुल वही काम किया जा रहा है। ऐसा काम किया जा रहा है, जिससे पिछड़ों और दलितों के हाथ में सत्ता कभी न आने दी जाये। उन्होंने कहा, " मनुवाद संविधान पर हावी है। "</p>
<p>विपक्ष के नेता ने कहा कि सरकार जनता को भ्रमित करना चाहती है, वह जानती है कि संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं होगा। वह महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने के नाम पर चुनावी लाभ लेना चाहती है। अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी से कहा कि वह ऐसा कुछ नहीं कहें, जो सदन की गरिमा और मर्यादा के खिलाफ हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 18:06:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>विपक्षी दलों ने किया परिसीमन विधेयक का विरोध: लोकसभा सीटों में कमी होने की जताई आशंका, परिसीमन आयोग की रिपोर्ट को नकारा नहीं जा सकता</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में विपक्षी दलों ने परिसीमन विधेयक का कड़ा विरोध किया है। कनिमोझी और शशि थरूर ने तर्क दिया कि नई व्यवस्था से दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। उन्होंने महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग कर तुरंत लागू करने और सहकारी संघवाद के तहत छोटे राज्यों के हित सुरक्षित करने की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/opposition-parties-opposed-the-delimitation-bill-expressed-fear-of-reduction/article-150823"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/shashi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोक सभा में शुक्रवार को विपक्षी दलों ने परिसीमन विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि विधेयक के इस रूप में पारित होने से दक्षिण और छोटे राज्यों का लोकसभा में प्रतिनिधित्व कम होगा और उनके हक़ मारे जाने की आशंका बनी रहेगी। सदन में परिसीमन विधेयक 2026, संविधान ( 137वां संशोधन ) विधेयक 2026 और संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर अधूरी रही चर्चा की शुरुआत करते हुए द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की कनिमोझी ने आज कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने परिसीमन के बाद राज्यों की बढ़ने वाली लोक सभा की सीटें बढ़ाने का जो सूत्र बताया है उसे भविष्य में बदला जा सकता है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि परिसीमन के मामले में सरकार अपना एजेंडा लागू कर सकती है। परिसीमन आयोग की रिपोर्ट को नकारा भी जा सकता है। ऐसी स्थिति में न्याय कहां मिलेगा। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की द्रमुक सरकार सहकारी संघवाद मानती है। द्रमुक सरकार ने महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने के लिए केन्द्र को पत्र लिखा था, द्रमुक की महिला मोर्चा ने इसके लिए दिल्ली में रैली की थी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार भारतीय महिलाओं को शील्ड के रूप में इस्तेमाल कर रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आंकड़े दर्शाते हैं कि इस सरकार ने सदन में किये गये 80 से 90 प्रतिशत आश्वासनों को पूरा नहीं किया है। सरकार सहकारी संघवाद की भावना का पालन नहीं कर रही है। उन्होंने महिलाओं को आरक्षण देने का विधेयक तुरंत लागू करने की मांग की। उन्होंने परिसीमन विधेयक को ऐसी संसदीय समिति को भेजने की मांग की जो सभी दलों के सदस्यों से सलाह-मशविरा करके अपनी रिपोर्ट दे। इस मामले में जल्दबाजी न करें और पूरी प्रक्रिया को कम से कम तीन महीने तक जनता के समक्ष रखे और सबकी राय के बाद ही महिला आरक्षण को लागू किया जाये।</p>
<p>कांग्रेस के शशि थरूर ने कहा कि विधायिका में महिला आरक्षण की व्यवस्था को तुरंत लागू किया जाये, इसे परिसीमन से जोड़कर क्यों रखा जा रहा है।उन्होंने कहा कि राज्यों की बढ़ने का जो सूत्र बताया गया है, उसे बदला भी जा सकता है। थरूर ने कहा कि लोक सभा में 850 सीटें हो जाने से यह बड़ी बोझिल हो जायेगी, कार्यवाही का संचालन बहुत दुष्कर हो जायेगा। प्रश्न काल और शून्य काल में सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का मौका कैसे मिलेगा। उन्होंने कहा,"हमें ऐसा सूत्र बनाना चाहिए जिससे छोटे-छोटे राज्य भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व कर सकें। हितधारकों और राज्यों के साथ व्यापक परामर्श करके सीटों का निर्धारण किया जाना चाहिए। ऐसी क्रियाविधि अपनायी जाये जिससे नया भारत आपस में विभाजित न हो।" उन्होंने कहा कि केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिण के राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में महती योगदान दिया है और ये राज्य केन्द्र को तुलनात्मक रूप से अधिक राजस्व देते हैं जिससे केन्द्र सरकार चलती है।</p>
<p>ऐसी स्थिति में इन राज्यों के साथ लोक सभा सीटों के मामले में अन्याय न हो, इसके विधायी प्रावधान किये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि वह सरकार से कहते हैं, "कृपया देश हित में दूरदृष्टि रखें, छोटे-छोटे लाभ न देखें।" वाईएसआरसीपी के पी वी मिधुन रेड्डी ने चर्चा में शामिल होते हुए कहा कि परिसीमन प्रक्रिया में सभी दलों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। विपक्षी दलों को नुकसान पहुंचाने का कार्य नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों के लिए कड़े कानून बनाये जायें। महिलाओं का सशक्तीकरण तभी हो सकता है जब उनकी सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाये जायेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 17:34:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>विधायिका में महिलाओं को आरक्षण देने से किसी राज्य का सीटों का नुकसान नहीं होगा ; जो दल विरोध करेंगे, चुनावों में भुगतना पड़ेगा खामियाजा : पीएम मोदी </title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में आश्वासन दिया कि महिला आरक्षण और परिसीमन से किसी राज्य या दल का नुकसान नहीं होगा। उन्होंने विरोध करने वाले दलों को चुनावी नतीजों की चेतावनी देते हुए इसे राजनीति से ऊपर रखने की अपील की। पीएम ने इसे लैंगिक समानता और राष्ट्र विकास के लिए 'प्रायश्चित और गौरव' का क्षण बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/by-giving-reservation-to-women-in-the-legislature-no-state/article-150719"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/modi10.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को लोक सभा में कहा कि महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने से किसी राज्य का नुकसान नहीं होगा और जो दल इसका विरोध करेंगे, उन्हें चुनावों में खामियाजा भुगतना पड़ेगा। पीएम मोदी ने आश्वासन दिया कि महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने से न तो पुरुषों के लिए सीटें कम होंगी और न ही किसी राज्य को सीटों के लिहाज से कोई नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि वह सदन में 'गारंटी' देने का तैयार हैं कि किसी दल या राज्य को इससे कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि देश की महिलायें सब देख रही हैं और जो दल महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने का विरोध करेंगे, उन्हें चुनावों में इसका नुकसान उठाना ही पड़ेगा</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,"मैं जिम्मेदारी से कह रहा हूं कि दक्षिण, उत्तर, पूरब हो या छोटे-बड़े राज्य हों, यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भेदभाव नहीं करेगी। किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी। वह गारंटी देते हैं कि किसी राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा। वह इसका वादा करते हैं।" उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि 'गारंटी' के लिए तमिल भाषा में कोई शब्द हो तो वह उसे भी यहां बोलने के लिए तैयार हैं। पीएम मोदी ने परिसीमन विधेयक, 2026 संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक 2026 और संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर सदन में एक साथ हो रही चर्चा के दौरान कहा कि महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने में पहले ही बहुत देरी हो चुकी है और अब यह क्षण आये हैं, जो राजनीतिक दल तकनीकी और अन्य बहानों से इसका विरोध करेंगे, उनका चुनावों में नुकसान होना तय है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों ने हालांकि इसका सैद्धांतिक विरोध नहीं किया है लेकिन सदन में विभिन्न कारण पेश करते हुए इसका समर्थन नहीं करते। वे चुनावों में हालांकि इसका खामियाजा भी भुगतते रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2023 में नारी वंदन विधेयक जब सदन में लाया गया तो सभी दलों ने इसका समर्थन किया, जिससे 2024 के आम चुनावों के दौरान यह मुद्दा-विषय ही नहीं बना। पीएम मोदी ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने देखा है कि महिलाएं जिन-जिन क्षेत्रों में नेतृत्वकारी भूमिका में रहीं, वहां बेहतर काम हुए। उन्होंने कहा कि पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण देने से लाखों महिलायें नेता बन चुकी हैं। उन्हें अब और आगे बढ़ाने का वक्त आ गया है। जो दल इसका विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि एक बार महिलाओं को लोक सभा और विधानसभा में आने तो दीजिए, वे निर्णय करेंगी कि आगे क्या करना है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि नारी शक्ति देश का गौरव बढ़ाने वाली है। वह विपक्षी दलों से अपील करते हैं कि इस विषय को राजनीति के तराजू से न तौलिए। उन्होंने कहा, " नारी शक्ति हमारे निर्णय देखेगी, निर्णय से ज्यादा हमारी नीयत देखेगी। यदि इसका विरोध करते हैं, तो नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी। यह समय की मांग है, ज्यादा विलंब न करें। "पीएम मोदी ने कहा कि जब नीयत साफ हो तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, " हम भ्रम में न रहें, हम अहंकार में न रहें। नारी शक्ति देख रही है। उसका हक है, हमने कई दशक तक उसे रोककर रखा है। इससे प्रायश्चित करके, उससे मुक्ति का यह समय है।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "बहानेबाजी और तकनीकी बातों काे अब छोड़ दें, तीन दशक तक हम इसे नहीं कर पाये, अब तो करें। हमें क्रेडिट नहीं चाहिए। सर्वसम्मति से इसे पारित करें। नारी शक्ति की राष्ट्र के विकास में सहभागिता सुनिश्चित करें। हम आग्रह करते हैं कि सर्वसम्मति से इस पर आगे बढ़ें। हम इसे राजनीतिक तराजू में न तौलें। इसे पारित करने से अतिरिक्त शक्ति जुड़ेगी और किसी का हक नहीं मारा जायेगा।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 18:43:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अखिलेश यादव ने साधा निशाना : संविधान संशोधन विधेयक के सहारे सत्ता की राजनीति कर रही सरकार, एसआईआर के जरिए वोट काटने का लगाया आरोप </title>
                                    <description><![CDATA[सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लोकसभा में सरकार पर तीखा हमला करते हुए महिला आरक्षण को परिसीमन लागू करने की 'साजिश' बताया। उन्होंने जातिगत जनगणना और मुस्लिम व पिछड़ी महिलाओं के लिए 'कोटे में कोटा' की मांग की। अखिलेश ने आरोप लगाया कि सरकार वोट बैंक के लिए संवैधानिक संशोधन का सहारा ले रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/akhilesh-yadav-targeted-the-government-which-is-doing-power-politics/article-150711"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/akhilesh-yadav2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। समाजवाद पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा है कि केंद्र सरकार सत्ता में बने रहने के लिए संविधान में 131वें संशोधन के जरिए वह महिला आरक्षण विधेयक के सहारे परिसीमन संबंधी विधेयक को पारित करवाना चाहती है। अखिलेश यादव ने गुरुवार को लोकसभा में "संविधान 131 वां संशोधन विधेयक 2026" पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि केंद्र सरकार आरक्षण विरोधी है इसलिए वह एसआईआर के जरिए घपले करवा कर सत्ता में बना रहना चाहती है। एसआईआर के माध्यम से वोट काटे जा रहे हैं और जब पकड़े जा रहे हैं तो फिर नयी तरकीब लगा कर वोट काटे जा रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकार एसआईआर के जरिए लोगों के वोट कटवा रही है और ऐसा कर केंद्र सरकार चुनाव आयोग के साथ मिलकर वोट बैंक सुरक्षित करने की राजनीति कर रही है। उनका यह भी कहना था कि उत्तर प्रदेश में एसआईआर के जरिये वोट काटे गए और जब पकड़े गए तो फॉर्म 7 लेकर उसमें नकली दस्तखत करवाए गये लेकिन इसमें भी पकड़े गए तो फॉर्म 7 का इस्तेमाल ही बंद करवा दिया गया। अब केंद्र सरकार महिला आरक्षण विधेयक के जरिए महिलाओं के वोट पाकर सत्ता में बना रहना चाहती है और अपने खोए वोट को वापस पाना चाहती है लेकिन उसे मालूम होना चाहिए कि देश की महिलाएं महंगाई से त्रस्त हैं और अब एलपीजी सिलेंडर ने उनकी नाराजगी और बढ़ा दी है इसलिए महिलाओं को रिझाकर उनका वोट हासिल करने का उनका षड्यंत्र भी बेकार हो गया है।</p>
<p>सपा नेता ने कहा कि अगर केंद्र सरकार महिलाओं के प्रति संवेदनशील है तो उसे मेरठ और नोएडा की आंदोलन कर रही महिलाओं की समस्याओं की समस्या के समाधान के लिए कदम उठाने चाहिए और इस तरह का संकट महिलाओं के सामने फिर ना आए विधेयक में इसकी व्यवस्था करनी चाहिए। उनका कहना था कि सरकार महिला आरक्षण के सहारे रणनीतिक तरीके से राजनीतिक लाभ पाने के लिए परिसीमन के वास्ते संविधान संशोधन विधयेक लेकर आई है।</p>
<p>सपा नेता ने कहा कि पहले जाति के आधार पर जनगणना आवश्यक है यदि जनगणना होती है तो उसके आधार पर आरक्षण की व्यवस्था की जा सकती है लेकिन सरकार आरक्षण नहीं देना चाहती इसलिए वह जनगणना जाति के आधार पर नहीं करना चाहती है। वह अल्पसंख्यकों और खासकर मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण का लाभ नहीं देना चाहती है। यदि जनगणना जाति के आधार पर होती है तो पिछड़े वर्ग तथा अल्पसंख्यक महिलाओं को इसका वाजिब लाभ मिल सकता है।</p>
<p>अखिलेश यादव ने कहा कि यदि सरकार जनगणना जाति के आधार पर नहीं करती है तो फिर महिला आरक्षण विधेयक धोखा है। उनका कहना था कि विधेयक में महिलाओं के हित के लिए कोई व्यवस्था ही नहीं है और पिछड़े अल्पसंख्यक महिलाओं को आरक्षण मिले बिना आरक्षण विधेयक का कोई मतलब नहीं रह जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 18:19:33 +0530</pubDate>
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                <title>महिला आरक्षण विधेयक के साथ परिसीमन विधेयक को जोड़ना केंद्र की बड़ी साजिश : कविता की चेतावनी-राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कम करने वाले कदम से जन आंदोलन का होगा जन्म </title>
                                    <description><![CDATA[तेलंगाना जागृति अध्यक्ष के. कविता ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने को केंद्र की 'बड़ी साजिश' बताया है। उन्होंने चिंता जताई कि इससे तेलंगाना का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। कविता ने चेतावनी दी कि यदि राज्य के हकों से समझौता हुआ, तो तेलंगाना के गठन जैसा एक और जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/linking-the-delimitation-bill-with-the-womens-reservation-bill-is/article-150618"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/kalvakuntla-kavitha.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। तेलंगाना जागृति पार्टी की अध्यक्ष कलवकुंतला कविता ने गुरुवार को आरोप लगाया कि प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को महिला आरक्षण विधेयक के साथ जोड़ना केंद्र की एक 'बड़ी साजिश' है। उन्होंने चेतावनी दी कि तेलंगाना के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कम करने वाला कोई भी कदम राज्य में एक और जन आंदोलन को जन्म दे सकता है। बंजारा हिल्स स्थित तेलंगाना जागृति कार्यालय से जारी एक वीडियो बयान में कविता ने कहा कि हालांकि संसद में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है लेकिन इसे परिसीमन के साथ जोड़ने का प्रयास भ्रामक और राजनीति से प्रेरित है।</p>
<p>कविता ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन दो अलग-अलग मुद्दे हैं। उन्होंने केंद्र पर परिसीमन के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए 'महिलाओं को ढाल के रूप में उपयोग करने' का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने टिप्पणी की, "वे प्रभावी रूप से महिलाओं के कंधे पर रखकर बंदूक चला रहे हैं।" कविता ने संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने के प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हालांकि यह निष्पक्ष लग सकता है लेकिन इसका तेलंगाना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बिहार जैसे राज्यों की तुलना में तेलंगाना की सीटों की हिस्सेदारी असमान रूप से कम हो सकती है, जिससे उसका राजनीतिक महत्व कम हो जाएगा।</p>
<p>जागृति नेता ने जोर देकर कहा कि वर्तमान में संसद में तेलंगाना का प्रतिनिधित्व 3.13 प्रतिशत है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि परिसीमन के बाद भी यह हिस्सा अपरिवर्तित रहे, चाहे कोई भी मानदंड अपनाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी, "यदि तेलंगाना के राजनीतिक महत्व को कम किया गया, तो राज्य के गठन के आंदोलन जैसा ही एक और आंदोलन अनिवार्य हो जाएगा।" कविता ने देय धनराशि जारी न करने और प्रमुख राज्य पहलों को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा न देने के लिए भी केंद्र की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक महत्व में और कमी आने से स्थिति और खराब हो जाएगी। जागृति नेता ने कहा कि परिसीमन को महिला आरक्षण विधेयक से जोड़ने के बजाय, केंद्र को वास्तविक सामाजिक न्याय प्राप्त करने के लिए महिला कोटे के भीतर पिछड़े वर्गों (बीसियों) के लिए उप-कोटा सुनिश्चित करना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:49:42 +0530</pubDate>
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                <title>‘महिला आरक्षण’ को लेकर संसद में टकराव संभव : विशेष सत्र में सरकार-विपक्ष होंगे आमने-सामने, महिला आरक्षण के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना गलत </title>
                                    <description><![CDATA[संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और सीटों की संख्या बढ़ाकर 815 करने वाले विधेयकों पर घमासान तय है। मोदी सरकार जहाँ इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष और दक्षिण भारतीय राज्य परिसीमन के प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। किरेन रिजिजू ने आश्वस्त किया है कि यह बदलाव संतुलित और आनुपातिक विकास सुनिश्चित करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/clash-possible-in-parliament-over-womens-reservation-government-opposition-will-face/article-150602"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)11.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। संसद के 16 से 18 अप्रैल तक बुलाए गए विशेष सत्र में महिला आरक्षण को लेकर जोरदार सियासी टकराव देखने को मिल सकता है। मोदी सरकार जहां ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत 33% महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष ने इसके कई प्रावधानों पर कड़ा विरोध जताया है। विपक्ष का कहना है कि वे महिला आरक्षण के विरोध में नहीं हैं, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना गलत है।</p>
<p>विशेष सत्र में मोदी सरकार तीन विवादास्पद विधायी प्रस्तावों को पारित कराने की कोशिश कर रही है, जिनके लिए संविधान संशोधन आवश्यक है, इन विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 815 करना, महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना और इस विस्तार के दायरे में केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल करना है। ये तीन विधेयक हैं, संविधान (131वां संशोधनद्ध विधेयक)परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक जिसे विपक्ष के रजामंदी के बिना संसद में पास करना मुमकिन नहीं है। कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विधेयक का उद्देश्य स्पष्ट नहीं है और इससे संसदीय लोकतंत्र को नुकसान हो सकता है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार की नीयत ठीक नहीं है। </p>
<p><strong>परिसीमन के मुद्दे पर कई गैर-बीजेपी मुख्यमंत्री खिलाफ</strong></p>
<p>वहीं, दक्षिण भारत के कई गैर-बीजेपी मुख्यमंत्रियों ने परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चेतावनी दी कि यदि राज्य के हितों को नुकसान पहुंचा या उत्तरी राज्यों का राजनीतिक प्रभाव बढ़ाया गया, तो तमिलनाडु में व्यापक आंदोलन होगा। </p>
<p><strong>किसी राज्य के साथ नहीं होगा अन्याय: रिजिजू </strong></p>
<p>केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा सीटों के परिसीमन से दक्षिण के राज्यों को नुकसान होने की आशंका सिरे से खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 किए जाने से दक्षिणी राज्यों को लाभ होगा, क्योंकि निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या में आनुपातिक वृद्धि की जाएगी। संविधान संशोधन विधेयक पूरी तरह से संतुलित, सुविचारित है और प्रत्येक समुदाय, क्षेत्र और राज्य की आकांक्षाओं का ध्यान रखेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:13:36 +0530</pubDate>
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