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                <title>Treaty - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Treaty RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>ईरानी राष्ट्रपति का दावा, बोले- अमेरिका के साथ समझौते के बावजूद ईरान किसी भी स्थिति के लिए तैयार, अंतिम समझौता बाकी </title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अमेरिका के साथ हुए शांति समझौते को युद्ध रोकने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम समझौता होना अभी बाकी है और ईरान हर स्थिति के लिए तैयार है। इस ऐतिहासिक समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iranian-president-claims-despite-agreement-with-america-iran-is/article-157113"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(2)18.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि ईरान-अमेरिका समझौता युद्ध खत्म करने की दिशा में एक अहम कदम है लेकिन ईरान किसी भी स्थिति के लिए तैयार है। पेज़ेशकियन ने एक्स पर कहा, "जिस बात पर सहमति बनी है वह युद्ध रोकने और बातचीत शुरू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है लेकिन अभी अंतिम समझौता होना बाकी है। ईरान का इस्लामिक गणराज्य सभी विकल्पों के लिए तैयार है।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार अमेरिका के साथ अंतिम समझौते के बिना भी या उसके साथ लोगों की सेवा करेगी। पेज़ेशकियन ने बताया कि अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन तैयार करने में ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अहम भूमिका निभाई। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, "ईरान के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने वाली धाराओं को शामिल करने में सम्मानित सर्वोच्च नेता के मार्गदर्शन की सबसे बड़ी भूमिका रही है और हम इसके लिए उनके आभारी हैं।"</p>
<p>15 जून को, ईरान और अमेरिका ने उस ज्ञापन के पूरा होने की पुष्टि की, जिस पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने हैं। ईरानी पक्ष ने बताया कि इस ज्ञापन में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई खत्म करने की बात कही गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को पुष्टि किया कि ईरान के साथ ज्ञापन पर वास्तव में हस्ताक्षर हो चुके हैं। ईरान ने कहा कि ज्ञापन के बाद, दोनों पक्ष एक अंतिम समझौते पर बातचीत शुरू करेंगे, जिससे ईरान के परमाणु मुद्दे और तेहरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का समाधान हो सकेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 16:21:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी का बड़ा बयान : अमेरिका-ईरान सहमति से क्षेत्र में स्थिरता और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा, युद्धविराम का भारत ने किया स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 107 दिनों से जारी इस संघर्ष की समाप्ति से वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी। होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से क्षेत्र में स्थिरता आएगी और मुक्त व्यापार सुनिश्चित होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modis-big-statement-america-iran-agreement-will-boost-stability-and/article-157032"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम होगी। पीएम मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "मैं पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के संबंध में अमेरिका और ईरान के बीच हुई समझ का स्वागत करता हूँ, जिसने विश्व भर में गंभीर आर्थिक व्यवधान उत्पन्न किया है और अनेक देशों में जनहानि का कारण बना है।" उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति से क्षेत्र में शांति स्थापित होगी और नौवहन तथा व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी।<br /> <br />प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत को आशा है कि इस समझ के कार्यान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता की पुनर्स्थापना में सहायता मिलेगी तथा नौवहन और व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी। हम आशा करते हैं कि शेष मुद्दों पर विचार-विमर्श एक टिकाऊ अंतिम समझौते तक पहुँचेगा।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि अमेरिका और ईरान ने पश्चिम एशिया में पिछले 107 दिनों से चले आ रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक समझौते पर सहमति व्यक्त की है। अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की बात कही है। दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तत्काल और स्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:27:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जे.डी. वेंस का बड़ा बयान, बोले- ईरान न तो परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करेगा और न ही खरीदने की, अमेरिका रखेगा सख्त नजर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने कहा कि अमेरिका-ईरान समझौता यह सुनिश्चित करता है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की प्रतिबद्धताओं पर कड़ी नजर रखी जाएगी। यदि समझौता सफल रहता है, तो अगले 50 वर्षों में पश्चिम एशिया निवेश का बड़ा केंद्र बनेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/jds-big-statement-said-iran-will-neither-try-to/article-156991"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/jd-vance.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने कहा है कि अमेरिका-ईरान समझौता यह पक्का करता है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा। वेंस ने कहा, "इसका मतलब है कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होगा। वह न तो परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करेगा और न ही उन्हें खरीदने या हासिल करने की कोशिश करेगा। यह बात इस समझौते में शामिल है।"</p>
<p>अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका इस बात पर नज़र रखेगा कि ईरान समझौते का पालन कर रहा है या नहीं, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि इसके बदले ईरान को क्या मिलेगा। वेंस ने कहा, "यहां एक ऐसा तरीका अपनाया जा रहा है, जिसमें हम जांच-पड़ताल करते रहेंगे और जब ईरान अपनी ज़िम्मेदारियां पूरी करेगा, तो उसे वास्तविक फ़ायदे भी मिलेंगे।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि अगर ईरान समझौते का पालन करता है, तो अगले पचास सालों में पश्चिम एशिया में बुनियादी बदलाव आएगा और यह इलाका निवेश के लिए ज़्यादा अनुकूल बन जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 14:07:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जयराम रमेश का बड़ा बयान: हॉर्मुज खुलने से भारत को फायदा, लेकिन अर्थव्यवस्था की चुनौतियां बरकरार</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते का स्वागत करते हुए इसे सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से भारत को ऊर्जा और व्यापार में बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि इससे भारत की सुस्त निजी निवेश और रिकॉर्ड व्यापार घाटे जैसी ढांचागत समस्याएं हल नहीं होंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-statement-of-jairam-ramesh-india-benefits-from-opening-of/article-157004"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/jairam-ramesh.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने अमेरिका और ईरान के बीच 19 जून को जिनेवा में प्रस्तावित समझौते का स्वागत करते हुए कहा है कि पश्चिम एशिया में शत्रुता समाप्त करने की दिशा में यह एक सकारात्मक और आवश्यक कदम है। रमेश ने आशा व्यक्त की, कि अमेरिका, ईरान और इजराइल इस समझौते का पालन करेंगे तथा यह पहल क्षेत्र में स्थायी शांति और सामान्य संबंधों की दिशा में मार्ग प्रशस्त करेगी। उन्होंने कहा कि हॉर्मुज जलडमरुमध्य के बिना किसी प्रतिबंध के पुनः खुलने से भारत को निश्चित रूप से राहत मिलेगी, विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों के संदर्भ में। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा संरचनात्मक समस्याओं का समाधान नहीं होगा।</p>
<p>कांग्रेस महासचिव ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट से पहले ही भारतीय अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही थी। उनके अनुसार रुपया लंबे समय से दबाव में है, डॉलर की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है तथा निजी निवेश की दरें कई वर्षों से सुस्त बनी हुई हैं, जबकि यही निवेश आर्थिक विकास का प्रमुख आधार है। कांग्रेस नेता ने मांग में कमजोरी के लिए तीन प्रमुख कारण बताए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में वास्तविक मजदूरी में ठहराव रहा है, चीन से आयात की डंपिंग पर रोक लगाने में केंद्र सरकार विफल रही है जिससे रिकॉर्ड व्यापार घाटा पैदा हुआ है और रोजगार सृजित करने वाले एमएसएमई क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आरोप लगाया कि कर अधिकारियों और जांच एजेंसियों को दी गई अत्यधिक शक्तियों के कारण निवेश का समग्र वातावरण प्रभावित हुआ है।</p>
<p>विदेश नीति के मुद्दे पर रमेश ने कहा कि 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद जिस पाकिस्तान को भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में सफलता प्राप्त की थी, वह अब क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर नया प्रभाव हासिल करता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के रणनीतिक ढांचे में चीन की बढ़ती भूमिका भारत के लिए एक गंभीर भू-राजनीतिक चुनौती बन चुकी है। उन्होंने केंद्र सरकार की पश्चिम एशिया नीति की आलोचना करते हुए कहा कि भारत के राष्ट्रीय हित संतुलित कूटनीतिक दृष्टिकोण की मांग करते हैं। रमेश के अनुसार, मानवीय सरोकारों और भारत की पारंपरिक विदेश नीति प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार को अधिक संतुलित रुख अपनाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 12:50:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद: अमेरिका-ईरान जंग खत्म करने पर राजी, 19 जून को होंगे ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता पूरा हो गया है। सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत रोक दी गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के लिए खोल दिया गया है, जिससे कच्चे तेल का प्रवाह दोबारा शुरू हो सकेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/hope-for-peace-in-west-asia-america-iran-agree-to-end/article-156990"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/tru-p.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के मुद्दे पर राजी हो गये हैं। दोनों देशों के बीच रविवार को जंग खत्म करने के लिए शांति समझौते पर सहमति बन गयी और अब आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह शुक्रवार 19 जून को स्विट्जरलैंड में होगा। इस बात की जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया दी है। ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो गया है। सभी को बधाई! मैं इसके ज़रिए होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के खोलने और साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने की मंज़ूरी देता हूँ। दुनिया भर के जहाज़ अपने इंजन चालू करें। तेल का प्रवाह शुरू होने दो!।"</p>
<p>वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। दोनों पक्षों ने लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और हमेशा के लिए रोकने का ऐलान किया है। इस समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह शुक्रवार 19 जून को स्विट्जरलैंड में होगा।" उन्होंने कहा, "हम इस विवाद का कूटनीतिक समाधान खोजने की अपनी प्रतिबद्धता के लिए अमेरिका और ईरान का धन्यवाद करना चाहते हैं। हम इस समझौते तक पहुँचने में मदद के लिए मध्यस्थता की कोशिश में शामिल अपने भाइयों कतर के महान नेतृत्व का भी दिल से आभार व्यक्त करते हैं। मैं सऊदी अरब और तुर्की के दूरदर्शी नेतृत्व का भी विशेष रूप से धन्यवाद करना चाहता हूं, जिन्होंने इस दिशा में बहुत बड़ा योगदान दिया है।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि अब जब समझौता हो गया है, तो मध्यस्थ इस हफ़्ते कई बैठकों का आयोजन करेंगे। समझौते को लागू करने से पहले की ये चर्चाएं तकनीकी और आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह के लिए आधार तैयार करेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 12:33:19 +0530</pubDate>
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                <title>ऐतिहासिक अमेरिका-ईरान समझौता : सुरक्षा परिषद देगी अंतिम मंजूरी, $24 अरब की ईरानी संपत्ति से हटेगी रोक</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव से अमेरिका-ईरान समझौते को अंतिम मंजूरी दी जाएगी। शर्तों के तहत अमेरिका ईरान पर लगे तेल प्रतिबंध हटाएगा और उसकी $24 अरब की संपत्ति मुक्त करेगा। बदले में ईरान परमाणु हथियार न बनाने और 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर सहमत हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-final-agreement-between-iran-and-america-will-be-approved/article-156987"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump2.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव से मंज़ूरी दी जाएगी। ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते के मसौदा का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा, “अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव से मंज़ूरी दी जाएगी।” एजेंसी ने कहा है कि अमेरिका ने ईरानी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को हटाने, ईरान के खिलाफ़ नये प्रतिबंध न लगाने और पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य ताकत न बढ़ाने का वादा किया है। समाचार एजेंसी ने मसौदा ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा, “तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और पेट्रोकेमिकल डेरिवेटिव्स की बिक्री पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएंगे। </p>
<p>अमेरिका पश्चिम एशिया में अपनी सेना न बढ़ाने और ईरान के खिलाफ नये प्रतिबंध न लगाने का वादा किया है।” इसके अलावा मसौदा ज्ञापन के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के आंतरिक मामलों में दखल न देने और इस्लामिक गणराज्य की संप्रभुता का सम्मान करने का वादा किया है। दोनों पक्षों के बीच ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के 30 दिनों के भीतर ही होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल दिया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की संधि (एनपीटी) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी है और परमाणु हथियार न बनाने का वादा किया है। एजेंसी ने मसौदा ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा कि दस्तावेज़ में यह उल्लेख है।</p>
<p>हालांकि, इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन विशिष्ट प्रतिरोधी बलों का उल्लेख किया गया है। दस्तावेज़ में यह भी कहा गया है कि ईरान और अमेरिका के बीच अंतिम वार्ता तब तक शुरू नहीं होगी, जब तक ईरान की विदेशी परिसंपत्तियों का आधा हिस्सा मुक्त नहीं कर दिया जाता, ईरानी तेल पर लगाए गए प्रतिबंध नहीं हटा लिए जाते और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त नहीं कर दी जाती। मसौदे के अनुसार, अमेरिका ने ईरान की 24 अरब डॉलर की विदेशी परिसंपत्तियों पर लगी रोक हटाने का वादा किया है। इनमें से आधी राशि दोनों देशों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने से पहले ही ईरान को वापस दी जानी होगी। इससे पहले, ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने ईरान और अमेरिका के बीच समझौता ज्ञापन पर काम पूरा होने की पुष्टि की थी। इस पर हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 11:15:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान-अमेरिका समझौते से करीब 1,300 अंक उछला सेंसेक्स ; निफ्टी 24,000 के करीब, इन शेयरों पर रखें नज़र</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान शांति समझौते की खबर से भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को जबरदस्त तेजी देखी गई। ट्रंप की घोषणा के बाद सेंसेक्स करीब 1,300 अंक उछल गया, जबकि निफ्टी भी शानदार बढ़त के साथ खुला। वैश्विक बाजारों में तेजी के बीच रुपया मजबूत हुआ और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/sensex-rises-nearly-1300-points-due-to-iran-us-agreement-keep/article-156984"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/share-market8.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता होने की खबर से घरेलू शेयर बाजारों में सोमवार को जबरदस्त तेजी देखी गयी और बीएसई का सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 1,300 अंक के करीब उछल गया। सेंसेक्स 1,197.32 अंक की बढ़त में 76,725.27 अंक पर खुला और 1,293 अंक की तेजी में 76,821 अंक पर पहुंच गया। खबर लिखे जाते समय यह 1,036.56 अंक (1.37 प्रतिशत) की मजबूती के साथ 76,564.51 अंक पर था।</p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को घोषणा की कि ईरान के साथ शांति वार्ता को अंतिम रूप दे दिया गया है। इसमें लेबनान सहित सभी मोर्चों पर हमले रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए तुरंत खोलने के भी प्रावधान हैं। शांति समझौते पर 19 जून को स्विजरलैंड में एक औपचारिक समारोह में हस्ताक्षर होंगे। इस खबर के बाद दुनिया भर के शेयर बाजारों में तेजी देखी जा रही है, जबकि डॉलर और कच्चा तेल दबाव में हैं। जापान का निक्केई पांच प्रतिशत चढ़ गया है। डॉलर के मुकाबले रुपया 55 पैसे मजबूत हुआ है।</p>
<p>चौतरफा लिवाली के बीच नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 361.95 अंक चढ़कर 23,984.85 अंक पर खुला। खबर लिखे जाते समय यह 314.55 अंक यानी 1.33 प्रतिशत ऊपर 23,937.45 अंक पर रहा। सभी सेक्टरों में इस समय लिवाली चल रही है। ऑटो, बैंकिंग, वित्त, रियल्टी, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद, तेल एवं गैस और सीमेंट सेक्टरों में ज्यादा तेजी रही। सेंसेक्स की कंपनियों में इंडिगो का शेयर चार प्रतिशत से अधिक की बढ़त में है। इटरनल, एलएंडटी और बजाज फिनसर्व के शेयर तीन से चार प्रतिशत के बीच ऊपर चल रहे हैं। बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, ट्रेंट और मारुति सुजुकी में दो से तीन प्रतिशत तक की तेजी है। सनफार्मा फिलहाल लाल निशान में है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 11:08:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जापान और फिलीपींस ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया: प्रधानमंत्री ताकाइची सनाए</title>
                                    <description><![CDATA[जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची सनाए और फिलीपींस के राष्ट्रपति मार्कोस जूनियर ने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया है। दोनों देश गोपनीय सैन्य सूचना सुरक्षा और गश्ती पोतों के हस्तांतरण पर सहमत हुए हैं। इसके साथ ही एआई, अंतरिक्ष और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर सहयोग बढ़ेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/japan-and-philippines-elevate-their-relations-to-the-level-of/article-155339"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/takaichi.png" alt=""></a><br /><p>टोक्यो। जापान और फिलीपींस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति जताई है। यह जानकारी जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने दी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने गुरुवार को एक बयान में कहा, "28 मई को जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची सनाए ने फिलीपींस गणराज्य के राष्ट्रपति फर्डिनेंड रोमुआल्डेज़ मार्कोस जूनियर से शिखर सम्मेलन किया, जो राजकीय अतिथि के रूप में जापान की यात्रा पर हैं। दोनों नेताओं ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया, जो फिलीपींस के लिए अपनी तरह की पहली साझेदारी है। यह द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के प्रति उनके दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।"</p>
<p>बयान में यह भी कहा गया है कि दोनों पक्ष गोपनीय सैन्य सूचनाओं की सुरक्षा के लिए एक समझौते पर औपचारिक बातचीत शुरू करने पर सहमत हुए हैं। इसमें यह भी जोड़ा गया है कि जापान और फिलीपींस गश्ती पोतों सहित उपकरणों के हस्तांतरण पर सहयोग में तेजी लाने का इरादा रखते हैं। इसके अतिरिक्त, जापान और फिलीपींस ने कथित तौर पर एशिया में आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने सहित आर्थिक सहयोग को और गहरा करने तथा कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष, ऊर्जा और मानव संसाधन विकास में सहयोग विकसित करने पर सहमति व्यक्त की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 17:16:19 +0530</pubDate>
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                <title>एनपीटी समीक्षा बैठक में पश्चिमी एशिया को परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्र बनाने के पुराने वादे को प्राथमिकता मिलेः ईरान</title>
                                    <description><![CDATA[वियना में ईरानी मिशन ने मांग की है कि आगामी एनपीटी समीक्षा सम्मेलन में पश्चिमी एशिया को परमाणु मुक्त बनाने के वादों को प्राथमिकता दी जाए। ईरान ने चेतावनी दी कि इजरायल को संधि के दायरे में लाने में 30 साल की देरी ने एनपीटी की विश्वसनीयता को कम किया है। कार्रवाई न होने पर सम्मेलन विफल हो सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-old-promise-of-making-western-asia-a-nuclear-weapon/article-151230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran5.png" alt=""></a><br /><p>वियना। संयुक्त राष्ट्र के लिए ईरानी मिशन ने मंगलवार को वियना में कहा कि 2026 में होने वाले परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) समीक्षा सम्मेलन में पश्चिमी एशिया को परमाणु हथियारों से मुक्त बनाने के पुराने वादों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। एनपीटी के 191 हस्ताक्षरकर्ता देशों में से अधिकांश के प्रतिनिधि 27 अप्रैल से 22 मई तक अमेरिका के न्यूयॉर्क में बैठक के लिए एकत्र होंगे। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य परमाणु हथियारों के फैलाव को रोकना और परमाणु ऊर्जा के सुरक्षित इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।</p>
<p>ईरानी मिशन ने सोशल मीडिया पर कहा कि 1995 में पश्चिमी एशिया को लेकर जो प्रस्ताव पास हुआ था, उसे अब पूरी तरह लागू करने का समय आ गया है। इस प्रस्ताव का मकसद इस पूरे क्षेत्र को परमाणु और सामूहिक विनाश के हथियारों से मुक्त करना था। ईरान का कहना है कि इसी वादे पर इस संधि को आगे बढ़ाया गया था, इसलिए जब तक यह लक्ष्य पूरा नहीं होता, यह प्रस्ताव प्रभावी रहना चाहिए। बयान में 2000 के एनपीटी समीक्षा सम्मेलन के परिणामों का भी उल्लेख किया गया, जिसमें इजरायल से संधि में शामिल होने और अपने सभी परमाणु केंद्रों को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सुरक्षा घेरे में रखने का आग्रह किया गया था।</p>
<p>ईरान ने कहा कि पश्चिमी एशिया पर एनपीटी प्रतिबद्धताओं को लागू करने में '30 से अधिक वर्षों की अनुचित देरी' ने संधि की विश्वसनीयता को कम किया है और इसकी समीक्षा प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। मिशन ने चेतावनी देते हुए कहा, "यह अनुचित देरी रुकनी चाहिए।" मिशन ने यह भी कहा कि कार्रवाई करने में विफलता आगामी समीक्षा सम्मेलन को एक 'विफल सम्मेलन' बना देगी।<br />उल्लेखनीय है कि इजरायल परमाणु अस्पष्टता की नीति बनाए रखता है, न तो वह परमाणु हथियार होने की पुष्टि करता है और न ही इससे इनकार करता है। वह एनपीटी का सदस्य भी नहीं है।</p>
<p>हर पांच साल में आयोजित होने वाला एनपीटी समीक्षा सम्मेलन, परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग और निशस्त्रीकरण को बढ़ावा देने वाली संधि के कार्यान्वयन का आकलन करने के लिए सदस्य देशों को एक साथ लाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 18:25:46 +0530</pubDate>
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