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                <title>क्या कांग्रेस के हाथों से फिसल रहा कर्नाटक? दोनों पक्षों के दावे राजनीतिक रूप से उचित;  सिर्फ नेतृत्व नहीं, नियंत्रण भी</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरूनी कलह तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को दिल्ली आलाकमान ने तलब किया है। 136 विधायकों के स्पष्ट बहुमत के बावजूद दोनों गुटों में नेतृत्व परिवर्तन और रोटेशन फॉर्मूले को लेकर रस्साकशी जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/is-karnataka-slipping-from-the-hands-of-congress-the-claims/article-155038"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/karnataka.jpg" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति को एक बार फिर मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच शक्ति संघर्ष के रूप में देखा जा रहा है और यह मुद्दा केवल मुख्यमंत्री पद को लेकर व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता का नहीं, बल्कि कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण राज्य में सत्ता संतुलन, महत्वाकांक्षाओं और संगठनात्मक अनुशासन को संभालने की संरचनात्मक चुनौती का है। सिद्दारमैया और शिवकुमार को दिल्ली तलब किये जाने तथा पार्टी आलाकमान के साथ उनकी बैठकों के बाद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। यह सवाल कांग्रेस सरकार के 2023 में गठन के समय से ही मौजूद हैं। </p>
<p>फर्क सिर्फ इतना है कि अब दोनों खेमों की ओर से संकेत अधिक स्पष्ट हो गये हैं और पार्टी के कुछ वर्गों में अधीरता बढ़ी है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में एक राजनीतिक विरोधाभास है। कर्नाटक में कांग्रेस संख्यात्मक रूप से मजबूत है, लेकिन आंतरिक रूप से पूरी तरह एकजुट नहीं है। 224 सदस्यीय विधानसभा में 136 विधायकों के साथ पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत है। इसके बावजूद यह मजबूती स्थिर नेतृत्व सहमति में तब्दील नहीं हो सकी है। स्थिति को अब तक अनौपचारिक समझौतों, परस्पर अपेक्षाओं और समय-समय पर आलाकमान के हस्तक्षेप के जरिए संभाला जाता रहा है। सिद्दारमैया अनुभव, जनाधार आधारित राजनीति और 'अहिंदा' सामाजिक समीकरण का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसने लंबे समय से कर्नाटक में कांग्रेस के आधार को मजबूत किया है। उनके समर्थक उन्हें ऐसा स्थिर नेता मानते हैं जिसने चुनावी सफलता दिलायी और जो अब भी विधायकों के बीच प्रभाव बनाए हुए हैं।</p>
<p>दूसरी ओर, शिवकुमार संगठनात्मक क्षमता, चुनावी रणनीति और 2023 की जीत में अपनी भूमिका के आधार पर दावेदारी पेश करते हैं। उनका खेमा संख्या बल के साथ-साथ योगदान, समय और पार्टी संगठन पर पकड़ को भी अपनी ताकत मानता है। कांग्रेस आलाकमान के सामने चुनौती यह है कि दोनों पक्षों के दावे राजनीतिक रूप से उचित हैं, लेकिन लंबे समय तक दोनों को साथ लेकर चलना आसान नहीं है। एक पक्ष को संतुष्ट करने से दूसरे पक्ष में असंतोष बढ़ने का जोखिम बना रहता है। इसी कारण समाधान की जगह संतुलन साधने की राजनीति जारी है।</p>
<p>यही वजह है कि कर्नाटक की राजनीति बार-बार "रोटेशन", "मंत्रिमंडल फेरबदल" और "आलाकमान चर्चा" जैसे शब्दों के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। ये स्थायी समाधान नहीं, बल्कि दबाव को अस्थायी रूप से नियंत्रित करने के उपाय हैं, जो सरकार के भीतर दो शक्ति केंद्रों की मूल समस्या को टालते रहे हैं। हाल के दिनों में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चा भी इसी पृष्ठभूमि में देखी जा रही है। विभागों में बदलाव या मंत्रिमंडल विस्तार से अस्थायी संतुलन जरूर बनाया जा सकता है, लेकिन इससे नेतृत्व अधिकार का मूल प्रश्न हल नहीं होता। इससे केवल मौजूदा व्यवस्था को कुछ समय के लिए आगे बढ़ाया जाता है।</p>
<p>असल सवाल यह नहीं है कि सिद्दारमैया अपना कार्यकाल पूरा करेंगे या शिवकुमार भविष्य में मुख्यमंत्री बनेंगे। मुख्य प्रश्न यह है कि क्या कांग्रेस के पास ऐसी कोई स्थायी व्यवस्था है, जिसके तहत उस राज्य में दोहरे नेतृत्व को प्रभावी ढंग से संभाला जा सके, जहां चुनावी सफलता ने कई दावेदार पैदा कर दिये हैं, लेकिन आलाकमान के अलावा कोई स्पष्ट निर्णायक व्यवस्था नहीं है। दल-बदल, विधानसभा अंकगणित या विपक्षी समीकरणों को लेकर लगायी जा रही अटकलों की अब तक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल किसी भी गुट के पास सरकार की स्थिरता को प्रभावित करने का स्पष्ट रास्ता नहीं दिखता और संख्या बल अब भी कांग्रेस के पक्ष में है। ऐसे में आलाकमान केवल दर्शक नहीं, बल्कि संतुलन बनाए रखने वाली प्रमुख शक्ति है। </p>
<p>हालांकि, उसकी क्षमता भी सीमित है। निर्णयों में देरी से अटकलें बढ़ती हैं, अस्पष्ट संकेतों से गुटीय व्याख्याओं को बल मिलता है और समझौता आधारित समाधान अक्सर उत्तराधिकार के सवाल को हल करने के बजाय टाल देते हैं। कर्नाटक की स्थिति भारतीय राजनीति के व्यापक स्वरूप को भी दर्शाती है, जहां मजबूत क्षेत्रीय नेताओं, व्यक्तिगत नेटवर्क और केंद्रीकृत पार्टी नियंत्रण के कारण चुनावी सफलता के बाद टकराव की स्थिति पैदा होती है, खासकर तब जब नेतृत्व पहले से स्पष्ट नहीं किया गया हो।</p>
<p>मंत्रिमंडल संतुलन, विभिन्न गुटों को आश्वस्त करने और नियंत्रित राजनीतिक संदेशों का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। फिलहाल राजनीतिक हित निरंतरता के पक्ष में हैं, इसलिए किसी बड़े टकराव की संभावना कम मानी जा रही है।हालांकि सरकार संख्या बल के लिहाज से स्थिर है, लेकिन आंतरिक रूप से अस्थिर बनी हुई है। इसके पीछे वह मूल प्रश्न अब भी अनसुलझा है, जिससे पार्टी 2023 से बचती रही है; जब जीत सामूहिक हो, लेकिन नेतृत्व विवादित हो, तब अधिकार का निर्धारण कौन करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 14:13:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>तमिलनाडु में विजय के राज्याभिषेक पर सस्पेंस: वीसीके पर टिकी सबकी निगाहें, आईयूएमएल का यू-टर्न, समर्थन देने से किया इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु में सरकार गठन पर सस्पेंस गहरा गया है। बहुमत के लिए वीसीके (VCK) किंगमेकर बनकर उभरी है। थलापति विजय की पार्टी TVK ने 116 का समर्थन जुटाया है, लेकिन 118 का जादुई आंकड़ा थिरुमावलवन के फैसले पर टिका है। सौदेबाजी और आरोपों के बीच राज्य राष्ट्रपति शासन या नई सरकार के दोराहे पर खड़ा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/suspense-on-vijays-coronation-in-tamil-nadu-all-eyes-on/article-153237"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/tvk.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु के राज्यपाल आर वी अर्लेकर से तीन बार मुलाकात करने के बावजूद टीवीके के संस्थापक और मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार विजय के सरकार बनाने को लेकर जारी असमंजस और सस्पेंस जारी है। अब सभी की निगाहें द्रमुक के सहयोगी वीसीके के संस्थापक और लोकसभा सांसद थोल थिरुमावलवन पर टिकी हुई है। नवगठित पार्टी को समर्थन देने का उनका निर्णय शनिवार को राज्य में अगली सरकार के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</p>
<p>अपनी पार्टी के नेताओं के साथ उच्च स्तरीय बैठक करने के बाद उन्होंने कहा था कि वीसीके ने शुक्रवार रात विजय को समर्थन देने का फैसला लिया है और आवश्यक संख्या (234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के आंकड़े से दो अधिक, यानी 118 से अधिक) पूरी हो गई है, जिससे स्थिति नाटकीय रूप से बदल गई। द्रमुक की एक अन्य सहयोगी पार्टी आईयूएमएल ने पहले तो टीवीके को समर्थन देने से इनकार कर दिया लेकिन अचानक अपना समर्थन देने का वादा किया फिर एक और यू-टर्न लेते हुए टीवीके को समर्थन देने से इनकार कर दिया। दो विधायकों वाली वीसीके द्वारा भी अपना समर्थन वापस लेने और श्री रुमावलवन के लिए उपमुख्यमंत्री पद सहित कई मुद्दों पर सौदेबाजी करने की खबरों के बाद, राज्य में स्थिति अचानक बदल गई और विजय द्वारा शनिवार को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने की संभावना कम ही नजर आ रही है क्योंकि राज्यपाल ने अभी तक उन्हें औपचारिक रूप से आमंत्रित नहीं किया है।</p>
<p>इस संदर्भ में, सभी की निगाहें वीसीके पर टिकी हुई है क्योंकि थिरुमावलवन किंगमेकर बनकर उभरे हैं। वह आज दोपहर मीडिया से मिलकर अपने फैसले का खुलासा कर सकते है, जो विजय के भाग्य का फैसला करेगा, जिन्होंने चुनावी मैदान में शानदार शुरुआत करते हुए 108 सीटें प्राप्त की हैं। चूंकि विजय ने दो सीटों पर जीत दर्ज की इसलिए तकनीकी रूप से टीवीके की ताकत 107 है और कांग्रेस ने पांच विधायकों के साथ द्रमुक के नेतृत्व वाले मोर्चे से अलग होकर विजय के साथ गठबंधन करके समर्थन देने का वादा किया है और वामपंथी दल सीपीआई और सीपीआई-एम ने भी दो-दो विधायकों के साथ टीवीके को समर्थ दिया है जिससे विधायकों की संख्या बढ़कर 116 हो गई।<br />आईयूएमएल और वीसीके के दो-दो विधायकों के समर्थन से विजय को 120 वोट मिल सकते हैं, जो आवश्यक संख्या 118 से दो अधिक हैं लेकिन उनके अचानक रुख बदलने और वीसीके नेता द्वारा निवर्तमान मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एम.के. स्टालिन से मुलाकात करने, उच्च स्तरीय बैठक के बाद अपने फैसले का खुलासा न करने और समर्थन वापस लेने से विजय की राह में बाधा उत्पन्न हो रही है।</p>
<p>राज्यपाल ने विजय को बहुमत को साबित करने के लिए 10 मई तक का समय दिया है, इसलिए वीसीके के मीडिया मुलाकात में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि क्या टीवीके पर्याप्त समर्थन जुटाने में सक्षम होगा और क्या यह वीसीके या आईयूएमएल या दोनों के निर्णय पर निर्भर करेगा। मामले को और पेचीदा बनाते हुए अन्नाद्रमुक की सहयोगी टीटीवी दिनाकरन की एएमएमके ने टीवीके के खिलाफ तीखा आरोप लगाया है कि टीवीके ने उनकी पार्टी के इकलौते विधायक के समर्थन का जाली पत्र प्रस्तुत किया है और कार्रवाई की मांग की है। मन्नारगुडी से निर्वाचित विधायक कामराज कुछ समय के लिए लापता हो गए लेकिन बाद में सामने आए और कल रात राज्यपाल से मिलने के लिए टीटीवी के साथ गए। श्री दिनाकरन ने विजय के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है।</p>
<p>ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि पर्दे के पीछे कई तरह की जोड़-तोड़ चल रही है जिससे विधायकों की खरीद-फरोख्त भी शामिल है। ऐसे में वीसीके का वह फैसला और उसके बाद अर्लेकर की कार्रवाई तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य को तय करेगी कि विजय के नेतृत्व में सरकार बनती है या तमिलनाडु राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 14:21:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बंगाल में भाजपा का उदय: शुभेंदु अधिकारी ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, पांच अन्य मंत्री भी मंत्रिमंडल में शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिगेड परेड मैदान में शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 207 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ भाजपा ने पहली बार राज्य में सत्ता संभाली। प्रधानमंत्री मोदी और शीर्ष नेताओं की उपस्थिति में दिलीप घोष सहित पाँच मंत्रियों ने भी शपथ ली, जो बंगाल की राजनीति में नए युग का प्रतीक है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rise-of-bjp-in-bengal-subhendu-adhikari-took-oath-as/article-153224"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(1)37.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। भारतीय जनता पार्टी के नेता शुभेंदु अधिकारी को शनिवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलायी गयी। उनके साथ पांच अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ली। इसके साथ ही राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार बनी है। पार्टी ने विधानसभा चुनाव में 207 सीटों के साथ दो तिहाई से भी अधिक बहुमत हासिल किया है।शुभेंदु अधिकारी को यहां बिग्रेड परेड मैदान में राज्यपाल आर एन रवि ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायी। उनके अलावा दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू तथा निसिथ प्रमाणिक को मंत्रिपद की शपथ दिलायी गयी।</p>
<p>इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह तथा कई अन्य केन्द्रीय मंत्री, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के शासन वाले अन्य विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और बड़ी संख्या में भाजपा नेता मौजूद थे। ब्रिगेड परेड मैदान में विशाल जनसमूह भी शपथ ग्रहण समारोह का साक्षी बना।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 13:06:13 +0530</pubDate>
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                <title>अबकी बार &quot;विजय सरकार&quot;: बहुमत का आंकड़ा पार, कांग्रेस के बाद इन 3 दलों ने दिया समर्थन, आज करेंगे राज्यपाल से मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु में राजनीतिक गतिरोध समाप्त! थलापति विजय की पार्टी TVK को सीपीआई(एम), सीपीआई और वीसीके का निर्णायक समर्थन मिल गया है। 118 के बहुमत आंकड़े को पार करते हुए विजय आज शाम राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। यह राज्य की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/this-time-vijay-sarkar-crossed-the-majority-mark-after-congress/article-153175"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/tvk-2.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु में नई सरकार के गठन को लेकर चल रहा राजनीतिक असमंजस अब लगभग खत्म होता नजर आ रहा है। जानकारी के मुताबिक, सीपीआई(एम), सीपीआई और वीसीके ने थलापति विजय की पार्टी टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया है। इन दलों के समर्थन के बाद विजय के नेतृत्व वाले गठबंधन को विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा मिल गया है।</p>
<p>234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी है, जो अब टीवीके के पक्ष में बताया जा रहा है। पार्टी के पास पहले से 107 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस समेत अन्य सहयोगी दलों का समर्थन भी उसे प्राप्त है। सूत्रों के अनुसार, विजय आज शाम राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं। वहीं, समर्थन देने वाले दल संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने फैसले की औपचारिक घोषणा भी कर सकते हैं। टीवीके नेताओं ने दावा किया है कि पार्टी के पास स्थिर सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 17:27:43 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>डी.के. शिवकुमार का राज्यपाल पर निशाना, बोले- वाजपेयी को मौका मिल सकता है, तो टीवीके को क्यों नहीं ? </title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने तमिलनाडु में TVK को सरकार बनाने का मौका न देने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि बहुमत का फैसला केवल सदन में होना चाहिए। उन्होंने राज्यपाल से लोकतांत्रिक सिद्धांतों का पालन करते हुए सबसे बड़ी पार्टी को अवसर देने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/on-reports-of-not-being-given-a-chance-to-form/article-153139"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/tvk1.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शुक्रवार को तमिलनाडु में टीवीके को सरकार बनाने का अवसर न दिए जाने की रिपोर्टाें पर सवाल उठाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि बहुमत की परीक्षा केवल सदन में ही होनी चाहिए। शिवकुमार ने तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा बहुमत साबित करने के प्रयास के बावजूद टीवीके को दावा पेश करने के लिए आमंत्रित करने से कथित रूप से मना करने की आलोचना करते हुए पूछा,"क्या वाजपेयी को मौका नहीं मिला था?"</p>
<p>विधानसभा में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रथा और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुसार सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने एवं विश्वास मत प्राप्त करने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "राज्यपाल को सरकार बनाने की अनुमति देनी चाहिए। कर्नाटक में भी बी एस येदियुरप्पा को सरकार बनाने की अनुमति दी गई थी। अधिक संख्या वाली पार्टियों को हमेशा अपना बहुमत साबित करने का मौका दिया जाता रहा है।"</p>
<p>डी.के. शिवकुमार ने अतीत के उदाहरणों से तुलना करते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति के.आर. नारायणन और ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भी इसी तरह लोकतांत्रिक परंपरा का पालन करते हुए पहले सरकारों के गठन की अनुमति दी और बाद में संसद में उनका परीक्षण किया। उन्होंने कहा, "बहुमत एक वोट से भी प्राप्त किया जा सकता है या गंवाया जा सकता है। क्या वाजपेयी के मामले में ऐसा नहीं हुआ? सबसे पहले, बहुमत साबित करने का अवसर दिया जाना चाहिए। अगर संख्या पर्याप्त नहीं होती है तो अगले विकल्प पर विचार किया जा सकता है।"</p>
<p>राज्यपाल की कथित कार्रवाई को गलत बताते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की जनता की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, "यह लोकतंत्र है। सदन में ही यह तय होना चाहिए कि किसके पास बहुमत है।" एक अन्य मुद्दे पर, डी.के. शिवकुमार ने कहा कि सरकार प्रस्तावित बेंगलुरु नॉर्थ कॉर्पोरेशन कार्यालय के लिए तीन से चार स्थानों पर विचार कर रही है और स्थलों के निरीक्षण के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गांधी कृषि विज्ञान केंद्र फिलहाल इस परियोजना के लिए विचाराधीन नहीं है। कांग्रेस नेताओं सतीश जार की होली और लक्ष्मी हेब्बलकर के साथ अपनी हालिया मुलाकात की बात करते हुए उन्होंने कहा कि चर्चा बेलगावी जिले में सिंचाई परियोजनाओं से संबंधित थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 15:55:00 +0530</pubDate>
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                <title>तमिलनाडु विधानसभा चुनाव:  स्टालिन ने दिया मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा ; अभिनेता विजय ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, राज्यपाल से मुलाकात कर 15 दिन का मांगा समय </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के इस्तीफे के साथ तमिलनाडु में एक युग का अंत हो गया है। अभिनेता से राजनेता बने विजय (TVK) ने 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सरकार बनाने का दावा पेश किया है। बहुमत के लिए 10 सीटों की कमी को पूरा करने हेतु वे अन्य दलों के संपर्क में हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/tamil-nadu-assembly-elections-stalin-resigns-from-the-post-of/article-152739"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/actor-vijay.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव हारने के एक दिन बाद, मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने मंगलवार को अपना इस्तीफा दे दिया। इस बीच, राजनीति में नवागंतुक और तमिलगा वेट्री कषगम (टीवीके) के संस्थापक और अभिनेता-राजनेता विजय ने आज राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से अगली सरकार बनाने के लिए औपचारिक रूप से अपना दावा पेश करने के लिए मुलाकात का समय मांगा है। स्टालिन ने राज्यपाल को अपना त्यागपत्र भेज दिया है और इसे लोक भवन में सौंप दिया गया है। इसी बीच विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश किया और राज्यपाल को पत्र लिखकर मिलने का समय मांगा है।</p>
<p>रिपोर्टों के अनुसार, लोक भवन को भेजे गए एक ईमेल में विजय ने कहा कि उनकी पार्टी ने 108 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में जनादेश प्राप्त कर लिया है और सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किए जाने की हकदार है। उन्होंने विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने के लिए समय सीमा भी मांगी। उन्होंने कहा "हम 108 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी हैं और सरकार बनाने का अधिकार रखते हैं। हम अपना बहुमत साबित करने का अवसर चाहते हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि वह 15 दिनों के भीतर बहुमत साबित कर देंगे।</p>
<p>सूत्रों ने संकेत दिया है कि राज्यपाल द्वारा विजय को जल्द ही आमंत्रित किए जाने और उन्हें अपना बहुमत साबित करने के लिए सात से 15 दिनों का समय दिए जाने की उम्मीद है क्योंकि टीवीके को 118 विधायकों के साधारण बहुमत के आंकड़े से 10 सीटें कम मिली हैं। इस बीच, विजय को आज बाद में पनयूर स्थित पार्टी मुख्यालय में नव निर्वाचित विधायकों की बैठक में टीवीके के विधायक दल के नेता के रूप में चुना जाना तय है। इसके बाद वह राज्यपाल से मुलाकात करेंगे और खुद को विधायक दल के नेता के रूप में चुने जाने का पत्र सौंपेंगे और सरकार बनाने का अपना दावा पेश करेंगे।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि सोमवार सुबह तक जब वोटों की गिनती शुरू हुई थी, तब तक सत्तारूढ़ द्रमुक अध्यक्ष श्री स्टालिन के सत्ता में बने रहने और द्रविड़ मॉडल 2.0 सरकार बनाने की प्रबल संभावना थी, क्योंकि चुनाव के बाद के पूर्वानुमानों में द्रमुक के नेतृत्व वाले मोर्चे की आरामदायक जीत की भविष्यवाणी की गई थी। द्रमुक को इन चुनावों में करारी शिकस्त मिली है और मुख्यमंत्री स्टालिन स्वयं अपनी पारंपरिक कोलाथुर सीट से हार गए, जहां उन्होंने लगातार तीन बार जीत दर्ज की थी। वह कांग्रेस के दिग्गज नेता एम. बख्तावत्सलम (1967 में) और अन्नाद्रमुक की सुप्रीमो जे. जयललिता (1996 में) के बाद तीसरे मौजूदा मुख्यमंत्री बन गए जो मुख्यमंत्री रहते हुए निर्वाचित होने में असफल रहे।</p>
<p>विजय की टीवीके पार्टी ने कुल 234 सीटों में से 108 सीटें जीती हैं और साधारण बहुमत के 118 के आंकड़े से 10 सीटें कम हैं और अगली सरकार बनाने का दावा करने के लिए तैयार है। विजय ने चेन्नई के पेरम्बूर और त्रिची पूर्व दोनों सीटों से जीत दर्ज की है। रिपोर्टों के अनुसार कांग्रेस समेत कुछ पार्टियों ने विजय की पार्टी से संपर्क साधा है और टीवीके आवश्यक संख्या जुटाने के लिए सभी विकल्पों पर विचार कर रही है। चूंकि कांग्रेस ने केवल पांच सीटों पर जीत हासिल की है इसलिए उसका समर्थन अकेले पर्याप्त नहीं होगा और टीवीके को और अधिक समर्थन की आवश्यकता होगी। इस तरह की रिपोर्टें भी है कि अन्नाद्रमुक, जिसने अपने नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा जीती गई कुल 53 सीटों में से 47 सीटें जीती हैं, भी विजय की पार्टी के संपर्क में है और समर्थन देने के लिए तैयार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 18:27:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने किया चुनाव जीतने का ऐलान, भारी बहुतम हासिल करने का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[थाईलैंड के संसदीय चुनाव में भुमजैथाई पार्टी ने बहुमत हासिल करने का दावा किया, पीपल्स पार्टी दूसरे और फ्यू थाई पार्टी तीसरे स्थान पर रही।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/acting-prime-minister-of-thailand-anutin-charnvirakul-announced-victory-in/article-142519"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(22).png" alt=""></a><br /><p>बैंकॉक। थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री और भुमजैथाई पार्टी के नेता अनुतिन चर्नविराकुल ने कहा है कि उनकी पार्टी ने थाईलैंड के संसदीय चुनाव जीत लिये हैं। चर्नविराकुल ने रविवार को एक संवाददाता सम्मेलन में यह घोषणा करते हुए कहा कि यह पूरे देश की जीत है। चुनाव आयोग द्वारा 87 प्रतिशत बैलेट गिने जाने तक भुमजैथाई पार्टी ने बहुमत हासिल कर ली। पीपल्स पार्टी दूसरे स्थान पर रही जबकि फ्यू थाई पार्टी तीसरे स्थान पर रही।</p>
<p>इससे पूर्व, पीपल्स पार्टी के नेता नत्ताफोंग रुंगपान्यावुत ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि उनकी पार्टी चुनावी नतीजों को स्वीकार करती है और जनमत को चुनौती देने के लिये गठबंधन नहीं बनाएगी। अगर भुमजैथाई पार्टी थाईलैंड में सरकारी बनाती है, तो पीपल्स पार्टी विपक्ष में बैठने के लिये तैयार है। </p>
<p>इस बीच, थाईलैंड डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता अभिसित वेज्जाजिवा ने भी कहा कि वह जनादेश के बाद विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। फ्यू थाई पार्टी के नेता जुलापुन अमोर्नविवात ने कहा कि उनकी पार्टी जनादेश का सम्मान करती है और किसी भी भूमिका में लोगों की भलाई के लिए काम करना जारी रखेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 18:30:27 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Britain Election Result : लेबर पार्टी को 326 सीटों के साथ बहुमत, ऋषि सुनक ने हार स्वीकार की</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिटेन की संसद के निचले सदन के लिए हुए आम चुनाव में कीर स्टारमर की अध्यक्षता वाली लेबर पार्टी ने पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/britain-election-result-labor-party-gets-majority-with-326-seats/article-83716"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer-(1)9.png" alt=""></a><br /><p>लंदन। ब्रिटेन की संसद के निचले सदन के लिए हुए आम चुनाव में कीर स्टारमर की अध्यक्षता वाली लेबर पार्टी ने पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। समाचार चैनल स्काई न्यूज ने अब तक जीती गई सीटों की संख्या के अनुसार यह जानकारी दी।</p>
<p>स्काई न्यूज ने शुक्रवार तड़के कहा कि संसद की 650 सीटों में से 467 सीटों की घोषणा के साथ ही लेबर पार्टी ने 326 सीटें जीत ली हैं।</p>
<p>तीन प्रसारकों-बीबीसी, आईटीवी और स्काई न्यूज द्वारा कराए गए एग्जिट पोल में कुछ घंटे पहले भविष्यवाणी की गई थी कि लेबर पार्टी 410 सीटों की भारी जीत हासिल करेगी, जबकि कंजर्वेटिव पार्टी 131 सीटों पर सिमट जाएगी।</p>
<p><strong>सुनक ने ब्रिटेन के आम चुनाव में हार स्वीकार की<br /></strong>ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने संसदीय आम चुनाव में सत्तारूढ़ कंजर्वेटिव पार्टी को भारी नुकसान के बाद हार स्वीकार कर ली। सुनक ने कहा कि लेबर पार्टी ने यह आम चुनाव जीता है और मैंने सर कीर स्टार्मर को उनकी जीत पर बधाई देने के लिए फोन किया है। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश लोगों ने आज रात एक गंभीर फैसला सुनाया है, सीखने के लिए बहुत कुछ है और मैं इस हार की जिम्मेदारी लेता हूं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jul 2024 12:33:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>पूर्ण बहुमत वाली सरकार यानी जनता की जीत : नरेंद्र चौधरी</title>
                                    <description><![CDATA[यदि पूर्ण बहुमत की सरकार आने के बाद भी जनप्रतिनिधि वादों को पूरा करने से मना करते हैं तो यह जनता की जिम्मेदारी है की वह उनसे वादे पूरे करवाए। यह प्रजातंत्र है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/editorial--government-with-absolute-majority-means-victory-of-the-people--narendra-chaudhary/article-7192"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/chunav.jpg" alt=""></a><br /><p>हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में पूर्ण बहुमत प्राप्त सरकारों का आना जनता की जीत है। इससे जनता को ही फायदा होगा। क्योंकि पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनने पर जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है की वो जनता से किए वादों को पूरा करें। यदि पूर्ण बहुमत की सरकार आने के बाद भी जनप्रतिनिधि वादों को पूरा करने से मना करते हैं तो यह जनता की जिम्मेदारी है की वह उनसे वादे पूरे करवाए। यह प्रजातंत्र है। दूसरी ओर पूर्ण बहुमत नहीं आने की स्थिति में यदि त्रिशंकु सरकार आती है तो जनता का भला नहीं हो पाता है। जनता को ही इसका खामियाजा उठाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में ना तो जनता के कार्य होते हैं और ना ही किसी राज्य या देश का विकास हो पाता है। क्योंकि त्रिशंकु सरकार अपनी ही कुर्सी को बचाने में लगी रहती है। जिस भी पार्टी की त्रिशंकु सरकार बनती है उन्हें यह अनिश्चितता रहती है कि कितने दिन, कितने माह, कितने साल हमारी सरकार सत्ता में रहेगी। ऐसे में उस पार्टी के जनप्रतिनिधि भी जनहित कार्यों में दिलचस्पी नहीं लेते हैं। वह अपने हाथ खड़े कर देते हैं और उनके पास जनता को कहने के लिए यह बहाना मिल जाता है कि हम आपके कार्य कैसे पूरे करवाएं। जनता ने पूर्ण बहुमत से हमें नहीं चुना। हम आपके कार्य करवाने में सक्षम नहीं है। जबकि होता यह है कि अल्पमत में रहते हुए भी जनप्रतिनिधि स्वयं के कार्यों को तो पूरा करवा लेते हैं किंतु जनता से किए वादों को पूरा करने में हाथ खींच लेते हैं। दूसरा, जब भी चुनाव आते हैं, सभी राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने चुनावी घोषणा पत्र जारी करती हैं। उसमें यह कोई नहीं लिखता कि त्रिशंकु सरकार आने की स्थिति में भी हम जनता के कामों को प्रमुखता से प्राथमिकता देंगे। चुनाव जीतने के लिए चुनाव से पहले तो पार्टियां व जनप्रतिनिधि लुभावने वादों की बात करते हैं। जनता को आश्वासन देते हैं कि सत्ता में आते ही हम वादे निभाएंगे। लेकिन वो सिर्फ कोरे वादे ही साबित होते हैं। त्रिशंकु सरकार बनने पर जनता से किए वादे तो पूरे होते नहीं हैं। बल्कि जनता के सिर ही ठीकरा फोड़ते हैं कि आपने ही त्रिशंकु सरकार दी है। जबकि पार्टी व जनप्रतिनिधि स्वयं का पूरा फायदा उठा लेते हैं। वह भूल जाते हैं कि आज जो भी पद-प्रतिष्ठा उन्हें मिल रही है जनता की वजह से ही मिल रही है। सत्ता में होने पर जो फायदा उठाते हैं वह भी जनता की वजह से ही है। सत्ता में आते ही उन्हें अपने हित नजर आने लगते हैं। वह भूल जाते हैं कि जनता से भी हमने वादे किए हैं। जब भी चुनाव आए जनता को त्रिशंकु सरकार की जगह पूर्ण बहुमत वाली सरकार को चुनना चाहिए। चाहे किसी भी राजनीतिक पार्टी को चुनें उसे पूर्ण बहुमत के साथ चुनकर लाएं। तभी जनता को फायदा होगा। अन्यथा त्रिशंकु और अल्पमत सरकार में चुने गए जनप्रतिनिधियों को जनता का कार्य नहीं करने का यह बहाना मिल जाएगा कि हमारी त्रिशंकु सरकार है। ऐसे में अन्य पार्टी पर कार्य ना होने की बात डाल कर जनता के कार्यों से बच कर खुद का पूरा फायदा उठा लेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Apr 2022 12:06:45 +0530</pubDate>
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                <title>उत्तराखंड में भाजपा की सत्ता बरकरार, 70 सीटों की विधानसभा चुनाव परिणामों में बीजेपी को मिला पूर्ण बहुमत</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा को पार्टी के मुख्य चुनावी मुद्दें राष्ट्र सुरक्षा कल्याण और धार्मिक पर्यटन का लाभ मिला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/-bjp-retains-power-in-uttarakhand--bjp-gets-absolute-majority-in-seventy-seat-assembly-election-results/article-5918"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/uttarakhand-04.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"> <span lang="hi" style="font-size:16pt;line-height:115%;font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="hi">देहरादून। उत्तराखंड में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सत्ता विरोधी लहर का सफलतापूर्वक मुकाबला किया और पार्टी ने जीत दर्ज की। भाजपा ने मुख्य प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस को हरा दिया। भाजपा को पार्टी के मुख्य चुनावी मुद्दें राष्ट्र सुरक्षा कल्याण और धार्मिक पर्यटन का लाभ मिला है।</span></p>
<p class="MsoNormal"> <span lang="hi" style="font-size:16pt;line-height:115%;font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="hi">भाजपा को 70 सीटों वाली विधानसभा में पूर्ण बहुमत मिला है। भाजपा के</span><span style="font-size:16pt;line-height:115%;font-family:Aparajita, 'sans-serif';"> <span lang="hi" xml:lang="hi">उम्मीदवारों ने 48 सीटों पर जीत दर्ज की है। मुख्य विपक्षी कांग्रेस केवल</span> 18 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों पर ही चुनाव जीतने में सफल रही है। </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> </span><span lang="hi" xml:lang="hi"> इसके अलावा अन्य के खाते में</span> 4 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटें आई है। लेकिन चौकाने वाली बात है कि यहां से मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री स्वयं चुनाव हार गए।  उत्तराखंड सीएम पुष्कर सिंह धामी और पूर्व सीएम हरीश रावत चुनाव हार गए।</span> </span></p>
<p class="MsoNormal"> <span lang="hi" style="font-size:16pt;line-height:115%;font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="hi">भाजपा ने सत्ता बरकरार रखते हुए नया रिकॉर्ड बनाया है। उत्तराखंड की स्थापना के बाद से सत्ता विरोधी लहर ने कभी भी किसी भी पार्टी को लगातार दूसरी बार सत्ता में नहीं आने दिया है। चुनाव आयोग के जारी आंकड़ों के अनुसार भाजपा को </span><span style="font-size:16pt;line-height:115%;font-family:Aparajita, 'sans-serif';">48, <span lang="hi" xml:lang="hi">कांग्रेस को</span> 18 <span lang="hi" xml:lang="hi">और अन्य को4</span> <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों पर जीत मिली है। </span></span></p>
<p> </p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Fri, 11 Mar 2022 11:36:44 +0530</pubDate>
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                <title>यूपी में योगी का धमाका, बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में एंट्री</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों के परिणाम जारी हो गए है। 403 सीटों के जारी परिणामों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/yogi-s-blast-in-up--re-entering-power-with-majority/article-5920"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/up-01.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"> <span lang="hi" style="font-size:16pt;line-height:115%;font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="hi">लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों के परिणाम जारी हो गए है। 403 सीटों के जारी परिणामों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली है। भाजपा लगातार दूसरी बार सत्ता बरकरार रखने में सफल रही है। भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला है। पार्टी को</span><span style="font-size:16pt;line-height:115%;font-family:Aparajita, 'sans-serif';"> 273 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों पर जीत मिली है। </span></span></p>
<p> <span lang="hi" style="font-size:16pt;line-height:115%;font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="hi">चुनाव में दूसरे नंबर पर समाजवादी पार्टी रही है। समाजवादी पार्टी के</span><span style="font-size:16pt;line-height:115%;font-family:Aparajita, 'sans-serif';"> <span lang="hi" xml:lang="hi">उम्मदीवारों ने 125 जीत दर्ज की है। कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस को यूपी में जनता ने पूरी तरह से नकार दिया है। प्रियंका गांधी का नारा </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">लड़की हूं, लड़ सकती हूं</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">यूपी चुनावों में कारगर साबित नहीं हो सका। कांग्रेस को केवल</span> 02 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों पर ही जीत मिली है। इस चुनाव में कांग्रेस के बड़े नेता भी चुनाव हार गए है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:16pt;line-height:115%;font-family:Aparajita, 'sans-serif';" xml:lang="hi">चुनाव आयोग के जारी आंकड़ों के अनुसार भाजपा को273</span><span style="font-size:16pt;line-height:115%;font-family:Aparajita, 'sans-serif';">, <span lang="hi" xml:lang="hi">समाजवादी पार्टी को</span> 125, <span lang="hi" xml:lang="hi"><span> </span>कांग्रेस को</span> 02, <span lang="hi" xml:lang="hi">बसपा को</span> 01 <span lang="hi" xml:lang="hi">और अन्य को</span> 02 <span lang="hi" xml:lang="hi">सीटों पर जीत मिली है। बता दे कि यूपी चुनावों में सबसे ज्यादा वोटों से पंकज सिंह ने जीत दर्ज की है। पंकज सिंह ने नोएडा विधानसभा से 1लाख 80वोटों से जीत दर्ज की है। वहीं योगी आदित्यनाथ ने भी 1लाख से अधिक वोटों से जीत दर्ज की है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:16pt;line-height:115%;font-family:Aparajita, 'sans-serif';"><span lang="hi" xml:lang="hi"><strong>यूपी में योगी ने बनाया नया रिकॉर्ड</strong> <br />उत्तर प्रदेश में एक नया रिकॉर्ड भी बना। पहली बार कोई मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूर्ण कर लगातार दूसरी बार अपार बहुमत के साथ सत्ता में आए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा इस चुनाव में तमाम मिथकों को ध्वस्त करते हुए पिछले चुनाव की तुलना में कम मतदान के बावजूद वोटों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में कामयाब रही। एक मिथक यह भी था कि जो मुख्यमंत्री नोएडा आता है, उसकी गद्दी छिन जाती है। अनेक दशकों से यह मिथक बना था जो इस चुनाव में टूट गया। योगी आदित्यनाथ ने अनेक बार नोएडा की यात्रा की लेकिन फिर भी वे जीत गए।<br /><br /><strong>उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री मौर्य हारे</strong> <br /> उत्तर प्रदेश में एक बड़ा परिणाम आया। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य शिराथू से हार गए। समाजवादी पार्टी की पल्लवी पटेल ने यहां से जीत दर्ज की। <br />मुलायम की बहू ने योगी को लगाया विजय तिलक : सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू और भाजपा नेता अपर्णा यादव ने पार्टी की जीत पर खुशी का इजहार करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को तिलक लागया और अपनी पुत्री के हाथों से भी तिलक लगवाया। योगी ने मासूम को दुलारा और आशीर्वाद दिया।  </span></span></p>
<p> </p>
<p class="MsoNormal"><span dir="rtl" lang="ar-sa" style="line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="ar-sa"> </span></p>
<p> </p>
<p></p>]]></content:encoded>
                
                

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                <pubDate>Fri, 11 Mar 2022 11:20:39 +0530</pubDate>
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                <title>चुनाव परिणाम से पहले कांग्रेस-बीजेपी के बयान: प्रताप सिंह दावा -पांच राज्यों में एग्जिट पोल के विपरीत आएंगे परिणाम, जबकि अरुण सिंह का कहना - पांच में से चार राज्यों में प्रचंड बहुमत से बनेगी भाजपा सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[10 मार्च बुधवार को पांच राज्यों के चुनाव परिणामों का इंतजार खत्म होने जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/congress-bjp-statements-on-election-results--pratap-singh-claims---exit-polls-in-five-states-will-have-opposite-results--while-arun-singh-says---bjp-government-will-be-formed-with-a-thumping-majority-in-four-out-of-five-states/article-5786"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/pratap-singh-khachariyawas1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। 10 मार्च बुधवार को पांच राज्यों के चुनाव परिणामों का इंतजार खत्म होने जा रहा है। तमाम राजनीतिक पार्टियां एग्जिट पोल के बाद अपने-अपने स्तर पर जीत के दावें कर रही है। हालांकि पांच राज्यों के चुनाव परिणामों में मुख्य फोकस यूपी और पंजाब चुनाव परिणामों पर नजर आ रहा है। राजस्थान में भी मार्च में पांच राज्यों के चुनाव परिणामों से पहले बयानों की गर्मी महसूस की जा सकती है। जहां कांग्रेसी नेता और गहलोत सरकार में मंत्री प्रताप सिंह परिणाम एग्जिट पोल के विपरित बता रहे है, वहीं बीजेपी राजस्थान के प्रभारी  अरुण सिंह पांच में से चार राज्यों में प्रचंड बहुमत से सरकार बनाने का दावा कर रहे है। हालांकि स ये तो चुनाव परिणाम के बाद ही तय होगा कि परिणाम एग्जिट पोल के विपरित जाते है या फिर बीजेपी के दावे सच साबित होते है।<br /><br /><br /><strong>पांच राज्यों में एग्जिट पोल के विपरीत आएंगे परिणाम,जनता भाजपा को सिखाएगी सबक: खाचरियावास</strong><br /> केबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि पांचों राज्यों में एग्जिट पोल के विपरीत परिणाम आएंगे और भाजपा जनता को सबक सिखाएगी। वहीं, दिव्या मदेरणा के विधानसभा में मंत्री के खिलाफ दिए बयान पर खाचरियावास ने समर्थन किया है। खाचरियावास के अनुसार 5 राज्यों के चुनाव परिणाम गुरुवार को आएंगे। विधानसभा के बाहर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जनता ने अपने मताधिकार के जरिए तय कर लिया है की किसकी सरकार बनेगी और इसका खुलासा चुनाव परिणाम सामने आने के बाद हो जाएगा। चुनाव से हटकर बात करें तो सदन में कांग्रेस विधायक दिव्या मदेरणा की ओर से अपनी ही सरकार के जलदाय मंत्री को रबर स्टैंप बताने और अधिकारियों के खिलाफ मुखर होने के मामले में खाचरियावास ने मदेरणा का समर्थन किया। खाचरियावास से कहा कि दिव्या मदेरणा जनता की आवाज सदन में उठाती है और यदि अधिकारियों के कारण किसी काम में कोई कमी रह गई है तो उसे दुरुस्त करवाने के लिए आवाज उठाना सही है। अधिकारियों को समझ लेना चाहिए कि विधायक और जनप्रतिनिधियों की बात सुने, क्योंकि वह जनता की बात कहते हैं और जनता के लिए लड़ते हैं।</p>
<p><strong>पांच में से चार राज्यों में प्रचंड बहुमत से बनेगी भाजपा सरकार: अरुण सिंह</strong><br />वहीं भाजपा के प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह ने अपने जयपुर दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में कहा है कि देश के 5 राज्यों में हुए चुनाव में से चार राज्यों में भारतीय जनता पार्टी प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बना रही है । उन्होंने कहा कि यूपी में 300 से ज्यादा सीटों पर भाजपा जीत रही है । वहीं उत्तराखंड गोवा और मणिपुर में भी भाजपा राज आ रहा है। हालांकि उन्होंने पंजाब चुनाव में भाजपा की एक तरह से हार होने के संकेत दे दिए हैं। पंजाब को लेकर केवल इतना कहा कि भाजपा वहां बढ़ोतरी कर रही है। अरुण सिंह बुधवार को भाजपा के विधानसभा चुनाव प्रवासी सदस्यों की बैठक लेने जयपुर आए हुए हैं। इस बैठक में यूपी सहित अन्य राज्यों में राजस्थान से गए भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं से फीडबैक लेकर रिपोर्ट तैयार की जा रही है कि इन पांच राज्यों में भाजपा की क्या स्थिति रहेगी ।यह रिपोर्ट बुधवार शाम को ही केंद्रीय आलाकमान को भेजी जाएगी ।बैठक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और संगठन महामंत्री चंद्रशेखर भी मौजूद थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Mar 2022 16:12:32 +0530</pubDate>
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