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                <title> घरों व दुकानों में घुसकर चुराता था खाना, बस्तियों को बना लिया था फूड कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[रणथंभौर का भालू अब कोटा के पिंजरे में:  बस्तियों में घुसने की आदत के चलते किया  रेस्क्यू।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/used-to-break-into-homes-and-shops-to-steal-food--had-turned-human-settlements-into-its-personal--food-court/article-147357"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(15)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रणथंभौर टाइगर रिजर्व के आस-पास के गांवों में पिछले कुछ समय से दहशत का पर्याय बना एक सात वर्षीय नर भालू अब कोटा वन्यजीव मंडल की निगरानी में है। इंसानी बस्तियों में घुसकर घरों से भोजन और खाने-पीने का सामान चुराने की अजीब आदत के चलते, किसी संभावित जनहानि को रोकने के लिए वन विभाग ने इसे रेस्क्यू कर कोटा के पुराने चिड़ियाघर (नयापुरा) में शिफ्ट कर दिया है।</p>
<p><strong>सुबह पिंजरे में छोड़ा</strong><br />भालू कोटा पहुचते ही कोटा वन्य जीव मण्डल कार्यालय में बने रेस्क्यू सेंटर का स्टाफ काम पर लग गया। नर भालू रात भर से आक्रामक बना हुुआ था ऐसे में शीघ्र ही इसे पिंजरे में शिफ्ट करना जरूरी था। असिस्टेन्ट फॉरेस्टर वाईल्ड़ लाईफ प्रेम कंवर ने बताया कि सुबह साढ़े 10 बजे के करीब भालू को पिंजरे मे छोड़ा गया था। अभी भालू शान्त है। आगे से प्राप्त निदेर्शों के अनुुसार पिंजरे की सुरक्षा के लिये कर्मी तैनात कर दिये है। खाने की व्यवस्था के लिये जरूरी सामान जुटा लिये गये है।</p>
<p><strong>क्यों पड़ी रेस्क्यू की जरूरत?</strong><br />यह भालू पूरी तरह से वयस्क है और स्वभाव से शांत बताया जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय से इसका झुकाव जंगल की अपेक्षा गांवों की ओर अधिक देखा जा रहा था। यह अक्सर घरों में घुसकर खाने की वस्तुएं उठा ले जाता था। हाल ही में रणथंभौर क्षेत्र में एक टाईगर द्वारा ग्रामीण पर हमले और उसके बाद ग्रामीणों द्वारा टाईगर को मार देने की हिंसक घटना को देखते हुए, प्रशासन ने इस भालू की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को टालने के लिए इसे स्थानांतरित करने का कड़ा फैसला लिया।</p>
<p><strong>बाजोली रेस्क्यू आॅपरेशन और कोटा में हलचल</strong><br />कोटा वन मंडल के उपवन संरक्षक अनुराग भटनागर ने बताया कि गुरुवार रात रणथंभौर के बाहरी गांवों में भालू की मौजूदगी की सूचना मिलते ही विशेष टीम ने मोर्चा संभाला। बाजोली गांव मे भालू को ट्रेंकुलाइज (बेहोश) कर पिंजरे में लिया गया और शुक्रवार सुबह 10 बजे इसे कोटा लाया गया। पिंजरे में कैद होने के बाद भालू काफी असहज दिखा। उसने रात भर पिंजरे में उछल-कूद की और पिंजरे में लगी लकड़ी को भी नुकसान पहुँचाया। फिलहाल उसे शांत करने और नए माहौल में ढालने के प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>नयापुरा चिड़ियाघर में विशेष इंतजाम</strong><br />वन विभाग पिछले 10 दिनों से इस 'मेहमान' के स्वागत की तैयारी कर रहा था।<br />इसके लिए निम्नलिखित व्यवस्थाएं की गई हैं:पुराने चिड़ियाघर में खाली पड़े टाइगर के पिंजरे की मरम्मत कर उसे रेलिंग से मजबूत किया गया है। आने वाली गर्मी को देखते हुए पिंजरे के भीतर पुराने वॉटर पॉन्ड (कुंड) को साफ कर वॉटर पंप चालू कर दिया गया है। भालू की हरकतों और सेहत पर नजर रखने के लिए विशेष कार्मिकों को तैनात किया गया है जो इसकी पूरी हरकतों को रिकार्ड में भी दर्ज करेंगे ।</p>
<p><strong>भालू पूरी तरह स्वस्थ-खाने का मेनू कार्ड तैयार</strong><br />कोटा पहुचने पर भालू का वरिष्ठ वन्य जीव चिकित्सक द्वारा परिक्षण किया गया। जिसके बाद उन्होने सुबह के समय पपीता ककड़ी, तथा शाम के समय खीर और दलिया देने की सलाह दी है। हालांकि उन्होने बताया कि भालू को मुख्य रूप से दीमक, चींटियां, मकड़ी और मधुमक्खी का छत्ता (शहद) पसंद है। इसके अलावा, विभाग उसे तेंदू फल, ककड़ी, तरबूज और गाजर जैसे मौसमी फल भी उपलब्ध करा रहा है, जिन्हें वह बड़े चाव से खाता है। अभेड़ा बायोलोजिकल पार्क के प्रभारी बुधाराम जाट ने बताया कि भालू यदि आपको नजर आ जाये तो तुरन्त अपना रास्ता बदल लें। भालुु को दिन के समय कम दिखाई देता हे ऐसे में अधिक दुरी बनाकर आप सुरक्षित रह सकते है ।ध्याान रखे प्रकृति ने इसे पेड़ो से लेकर जमींन के नीचे स्थित जीवों ओर जड़मूल को खाने के लिये ही बाल ओर नाखुन दिये हे ऐसे में हमे तुरन्त उस जगह से निकल जाना चाहिये।</p>
<p>हमें उच्चाधिकारियों से निर्देश मिले थे कि भालू को यहाँ सुरक्षित रखा जाए। हमने टाइगर केज को पूरी तरह से री-फर्बिश किया है ताकि भालू को पर्याप्त जगह और पानी मिल सके। हमारी प्राथमिकता भालू और स्थानीय निवासियों, दोनों की सुरक्षा है।<br /><strong>- अनुराग भटनागर, उपवन संरक्षक, कोटा वन मंडल</strong></p>
<p>भालू पूरी तरह स्वस्थ है इसकी उम्र 7 वर्ष हे, केवल इंसानी बस्तियों में जाकर खाना तलाश करता था यह केवल इसकी आदत में था।<br /><strong>-डॉ. अखिलेश पाण्डे, वरिष्ठ वन्य जीव चिकित्सक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 16:55:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>झुमरी से जल्द मिलेगी खुशखबरी; बाघ का जोड़ा लाने में भालू की भी अहम भूमिका</title>
                                    <description><![CDATA[नाहरगढ़ जैविक उद्यान के वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. अरविंद माथुर ने बताया कि यहां झुमरी के खानपान का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/good-news-will-soon-be-received-from-jhumri-bear-also/article-93171"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-size-(6)14.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नाहरगढ़ जैविक उद्यान में विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीव रहवास कर रहे हैं। इनमें से कइयों में सफल प्रजनन भी हो रहा है। बाघिन रानी और शेरनी तारा के बाद अब यहां रह रही मादा भालू झुमरी के भी नवम्बर तक बच्चे देने की संभावना जताई जा रही है। झुमरी को नर भालू शम्भू के साथ जोड़ा बनाकर रखा गया था। इससे पहले झुमरी साल 2020 और 2022 बच्चों को जन्म दे चुकी है।</p>
<p>इसका एक बच्चा नर भालू गणेश कोटा के अभेड़ा जैविक उद्यान में पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। वहीं जयपुर स्थित नाहरगढ़ जैविक उद्यान में करीब 21 साल का नर भालू शंभू, करीब 13 साल की मादा भालू झुमरी और 2 साल की कावेरी पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। </p>
<p>नाहरगढ़ जैविक उद्यान के वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ. अरविंद माथुर ने बताया कि यहां झुमरी के खानपान का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इसे सीजनल फू्रट्स, शहद देने के साथ ही जल्द अण्डे देने भी शुरू किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त आवश्यक मिनरल, कैल्शियम और सप्लीमेंट्स दिए जा रहे हैं। अभी झुमरी को नर भालु शंभू से अलग दूसरे पिंजरे में रखा जा रहा है।</p>
<p><strong>बाघ के जोड़े के बदले में दिया गया भालू भी  </strong><br />पिछले माह के दौरान नागपुर से बाघ गुलाब और बाघिन चमेली को यहां लाया गया था। इनके एक्सचेंज कार्यक्रम में भालुओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। इस दौरान नर भालू कार्तिकेय, एक जोड़ा जरख और एक जोड़ा भेड़िए का दिया गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Oct 2024 11:02:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रणथम्भौर में चर्चा में भालू: पूजा के समय पहुंचता है मंदिर, आरती के बाद करता है जंगल का रूख</title>
                                    <description><![CDATA[ यहां आने वाले श्रद्धालुओं के बीच यह भालू खासा चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इस भालू की तुलना जामवंत से कर रहे है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-wandering-priest-of-the-bear-feeds-rotis-in-the/article-88663"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1rer-(17).png" alt=""></a><br /><p>सवाईमाधोपुर। रणथम्भौर में सोलेश्वर महादेव मंदिर में एक भालू इन दिनों खासी सुर्खियां बटोर रहा है। यह भालू रोज यहां मंदिर में पूजा के समय पहुंच जाता है और आरती के बाद वापस जंगल में लौट जाता है। इतना ही नहीं यह भालू, मंदिर के पुजारी का दोस्त भी बन चुका है। भालू को रोज पुजारी खाना भी खिलाते है।</p>
<p>इस दौरान भालू किसी को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचाता, खाना खाकर भालू वापस चला जाता है। पिछले 7 दिन से चल रहा सिलसिला। इस पूरे मामले का एक वीडियो भी सामने आया। इस वीडियो में भालू मंदिर में पहुंचता हुआ दिखाई दे रहा है। इस दौरान भालू मंदिर में चहलकदमी करता है। यहां आने पर भालू को पुजारी की ओर से खाना भी खिलाया जाता है। इसके बाद भालू मंदिर से लौट जाता है।</p>
<p>यह सिलसिला पिछले करीब 7 दिन से चल रहा है। भालू का व्यवहार किसी जंगली जानकर जैसा नहीं है। वह पुजारी के साथ रोजाना पालतू जानवर जैसा व्यवहार करता है। अभी तक भालू ने यहां किसी भी श्रद्धालु को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है। वहीं यहां आने वाले श्रद्धालुओं के बीच यह भालू खासा चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इस भालू की तुलना जामवंत से कर रहे है।घने जंगल में है सोलेश्वर महादेव मंदिर<br />सोलेश्वर महादेव मन्दिर रणथम्भौर के घने जंगलों में स्थित है। यह मन्दिर रणथम्भौर की सबसे ऊंची पहाड़ियों में एक पहाड़ी पर बना हुआ है। सोलेश्वर महादेव मन्दिर टाइगर रिजर्व के जोन नम्बर 2 में स्थित है। यह शिवालय करीब 450 फीट ऊंचाई पर स्थित है। यहां पर झरने का पानी गौमुख से आकर सीधे भगवान शिव का जलाभिषेक करता है।</p>
<p><strong>सवा 700 साल पुराना है मंदिर</strong><br />मन्दिर के बारे में बताया जाता है कि यह मन्दिर रणथम्भौर के प्रतापी शासक राव हम्मीर के समकालीन है। ऐसे में मन्दिर को करीब करीब सवा 700 साल पुराना माना जाता है। सोलेश्वर महादेव मन्दिर जाने के लिए एक रास्ता पुराने शहर के जोन नम्बर 6 से और एक रास्ता बोदल गांव से जाता है। यहा पर श्रद्धालु पैदल ही पहुंचते है। टाइगर रिजर्व का कोर एरिया होने के कारण यहां जाने के लिए लोगों को प्रशासन से इजाजत लेनी पड़ती है। इस इलाके में प्राइवेट वाहनों को ले जाने की अनुमति नहीं है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि भालू यात्रा पर हमला करें या ना करें, इस इलाके में करीब 2 बाघ, बाघिन, लेपर्ड, भालू स्वछंद विचरण करते है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Aug 2024 11:55:24 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा की धरती पर कल कदम रखेगा भालू</title>
                                    <description><![CDATA[वन्यजीव विभाग की टीम आज होगी नाहरगढ़ रवाना।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bear-will-set-foot-on-kota-land-tomorrow/article-76959"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/photo-size-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशखबरी है। मंगलवार को अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में भालू गणेश की एंट्री होगी। इसके लिए वन्यजीव विभाग ने तैयारियां कर ली है।  कोटा से वन अधिकारियों व कर्मचारियों की एक टीम सोमवा को जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के लिए रवाना होगी। जहां आवश्यक कागजी कार्यवाही पूरी कर मंगलवार को नर भालू गणेश को लेकर वापस कोटा पहुंचेगी। यहां लंबे समय से एकाकी जीवन काट रही मादा भालू काली को जीवन साथी मिल सकेगा। वहीं, पर्यटकों को एक नहीं दो भालू देखने को मिलेंगे। हालांकि, कुछ दिनों तक नर भालू को क्वारंटाइन रखा जाएगा। </p>
<p><strong>चिंकारा भी करेंगे एंट्री </strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जोधपुर के माछिया बायोलॉजिकल पार्क से 4 चिंकारा अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए विभाग द्वारा प्रस्ताव बनाकर भिजवा दिए गए हैं। इनमें 2 मेल और 2 फिमेल जोड़े शामिल हैं। वर्तमान में अभेड़ा में 4 फिमेल चिंकारा है। ऐसे में 4 नए आने से इनकी संख्या 8 हो जाएगी। </p>
<p><strong>दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पक्षी भी लाएंगे  </strong><br />दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नोन फ्लाई बर्ड यानी (उड़ने में अक्षम) पक्षी की झलक भी अभेड़ा बायलॉजिकल पार्क में देखने को मिलेगी। वन्यजीव विभाग ने पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए जोधपुर से 5 ऐमु लाने की तैयारी शुरू कर दी है। इनमें 2 नर व 3 मादा शामिल हैं। हालांकि, इससे पहले अगस्त 2019 में चार ऐमु जोधपुर के माछिया बायोलॉजिकल पार्क से कोटा चिड़िया घर में लाए गए थे, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए थे।  लेकिन, गत वर्ष चारों ऐमु की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद से कोटावासियों को ऐमू देखने को नहीं मिले। </p>
<p><strong>नाहरगढ़ से आएगा गणेश</strong><br />वन्यजीव विभाग के डीएफओ अनुराग भटनागर ने बताया कि अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क से नर भालू लाया जाएगा। इसके लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से स्वीकृति मिल चुकी है और आवश्यक कागजी कार्यवाही भी पूरी हो चुकी है। ऐसे में  सोमवार को टीम नाहरगढ़ जाएगी और अगले दिन भालू को लेकर वापस अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क लौटेगी। गणेश के आने से पर्यटकों को एक की जगह दो भालू देखने को मिलेंगे। </p>
<p><strong>गर्मी से बचाव के किए इंतजाम</strong><br />बायोलॉजिकल पार्क में कुल 78 वन्यजीव हैं। शाकाहार व मांसाहारी वन्यजीवों को गर्मी से बचाव के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। लॉयन, टाइगर, शावक, भेड़िए, जरख, सियार, भालू सहित मांसाहारी जानवरों के लिए डक्टिंग चालू करवा दी गई है। वहीं, इनके एनक्लोजर में बने वाटर प्वाइंट भी सुबह-शाम भरे जा रहे हैं। साथ ही दोनों वक्त पानी का छिड़काव भी किया जा रहा है। इसके  अलावा नाइट शेल्टरों व कराल एरिया में हल्दी का छिड़काव भी किया गया है, ताकि उन्हें किसी भी तरह का इंफेक्शन से संबंधित कोई खतरा न हो। </p>
<p><strong>शाकाहारियों के पिंजरों में लगाई ग्रीन नेट </strong><br />वन्यजीव विभाग से मिली जानकारी के अनुसार शाकाहारी वन्यजीवों के एनक्लोजर में व नाइट शेल्टरों में पराल बिछाई गई है। वहीं, कई जगहों पर ग्रीन नेट लगाई गई। जिससे धूप से राहत मिल सकेगी। वहीं, इनके डाइट में भी परिवर्तन कर दिया गया है। अब इनके आहार में कैटल फूड भी शामिल किया गया है। </p>
<p>अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में लंबे समय से नर भालू लाए जाने की आवश्यकता बनी हुई थी। इसके लिए लगातार प्रयास किए गए। आखिरकार, सीजेडए से स्वीकृति मिल गई है। ऐसे में सोमवार को टीम नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क जयपुर के लिए रवाना होगी और आवश्यक कागजी कार्यवाही पूरी कर मंगलवार को नर भालू को लेकर अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क लौटेगी। इसके बाद ऐमू सहित अन्य वन्यजीव भी लाए जाने हैं।<br /><strong>- अनुराग भटनागर, उपवन संरक्षक, वन्यजीव विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 May 2024 15:25:00 +0530</pubDate>
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                <title>नाहरगढ़ जैविक उद्यान में भालू ने दिया बच्चे को जन्म</title>
                                    <description><![CDATA[मादा भालू  झुमरी ने बच्चे को जन्म दिया है। अभी मादा ने बच्चे को मांद में ही रखा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bear-gave-a-baby-in-nahargarh-biological-park/article-30066"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/whatsapp-image-2022-11-18-at-12.50.59.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नाहरगढ़ जैविक उद्यान में पर्यटन सीजन में पर्यटकों की अच्छी आवक देखने को मिल रही है। शेर, बाघ, बघेरो के साथ ही विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीव देख बड़ों के साथ ख़ासकर बच्चे रोमांचित हो जाते हैं। इस बीच जैविक उद्यान से वन्यजीव प्रेमियों के लिए अच्छी ख़बर सामने आइ है। मादा भालू  झुमरी ने बच्चे को जन्म दिया है। अभी मादा ने बच्चे को मांद में ही रखा है।</p>
<p>अभी जैविक उद्यान में नर भालू शंभु, मादा भालू झुमरी, बेबी भालू गणेश रहवास कर रहे हैं। जैविक उद्यान के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अरविंद माथुर इनकी निगरानी कर रहे हैं। साथ ही इनके खानपान के साथ ही आवश्यक दवाइयाँ दे रहे है। वहीं भालुओं के केयर टेकर गोपाल लाल हैं। रेंजर गौरव चौधरी भी इनकी निगरानी कर रहे हैं।</p>
<p>इनके अतिरिक्त सवाई माधोपुर से रेस्क्यू कर लाया गया नर भालू भी यहाँ रहवास कर रहा है। ये रेस्क्यू कर लाया गया एनिमल है इसलिए इसे डिस्प्ले में नहीं रखा है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नाहरगढ़ जैविक उद्यान में मादा भालू झुमरी ने शुक्रवार सुबह बच्चे को जन्म दिया है। <br /><strong>कपिल चंद्रावल, डीसीएफ़</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Nov 2022 15:03:46 +0530</pubDate>
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                <title>टाइगर ने किया भालू का शिकार</title>
                                    <description><![CDATA[ रणथंभौर टाइगर रिजर्व में एक बार फिर से एक शानदार लम्हा देखने को मिला। जिसे देखकर पर्यटक रोमांचित हो उठे। पर्यटकों ने यहां टाइगर को एक जंगली भालू का शिकार करने के बाद इस शिकार का लुफ्त उठाते हुए देखा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/tiger-hunted-bear/article-12747"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/t-31.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>सवाई माधोपुर।</strong>  रणथंभौर टाइगर रिजर्व में एक बार फिर से एक शानदार लम्हा देखने को मिला। जिसे देखकर पर्यटक रोमांचित हो उठे। पर्यटकों ने यहां टाइगर को एक जंगली भालू का शिकार करने के बाद इस शिकार का लुफ्त उठाते हुए देखा। रणथंभौर के जोन नम्बर 3 में सुबह की पारी में पर्यटकों को टाइगर सफारी के दौरान टाइगर टी.120 योद्धा के दीदार हुए। पर्यटकों ने यहां पदम तालाब के पास टाइगर टी.120 योद्धा को एक जंगली भालू का शिकार करते हुए देखा। जिसके बाद टाइगर टी.120 योद्धा को इस शिकार का लुफ्त उठाता हुआ भी दिखाई दिया। जिसे देखकर पर्यटक रोमांचित हो उठे। यहां मौजूद पर्यटकों ने इस पूरे वाकया को अपने कैमरे मे कैद कर लिया। </p>
<p>रणथंभौर में टाइगर इससे पहले हाइना, कुत्ते, मगरमच्छ और लेपर्ड का भी शिकार कर चुके है। जिसके बाद एक बार फिर से यहां वाइल्ड लाइफ का रेयर वीडियों देखने को मिला है। गौरतलब  है कि हाल ही में टाइगर टी.120 योद्धा सांभर के शिकार को लेकर बाघिन.84 के साथ झड़प करता हुआ दिखाई दिया था। जिसमें बाघ की बीच हुई और बाघिन को शिकार छोड़ना पड़ा था। टाइगर टी.120 योद्धा रणथंभौर का एक युवा और ताकतवर बाघ है। जिसकी टेरेटरी फिलहाल रणथंभौर के जोन नम्बर तीन में है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jun 2022 11:51:25 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क से पिंजरा तोड़ कर आबादी क्षेत्र में घुसा भालू</title>
                                    <description><![CDATA[अब तक आबादी क्षेत्र में पैंथर और जरख सहित अन्य वन्यजीवों के देखे जाने के मामले लगातार सामने आते रहे है, लेकिन पहली बार एक भालू आबादी क्षेत्र में आ गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/team-rescue-of-bear/article-8047"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/aaj-ka-rashifal-copy4.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अब तक आबादी क्षेत्र में पैंथर और जरख सहित अन्य वन्यजीवों के देखे जाने के मामले लगातार सामने आते रहे है, लेकिन पहली बार एक भालू आबादी क्षेत्र में आ गया। एक नर भालू नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क स्थित रेस्क्यू का पिंजरा तोड़ कर बाहर भाग गया। पिंजरा तोड़ कर भालू दिल्ली रोड स्थित जयसिंह पुरा खोर के आबादी क्षेत्र में जा घुसा, जिसे देखकर लोगों में दहशत हो गई और उन्होंने स्थानीय पार्षद को इसकी सूचना दी। पार्षद ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। सुबह ग्रामीणों ने भालू को एक मकान में छिपते हुए देखा।</p>
<p>इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पंहुची। डीसीएफ अजय चित्तोड़ा, एसीएफ जगदीश गुप्ता, पशु चिकित्सक डॉ. अरविंद माथुर, डॉ. अशोक तंवर, वनपाल जोगेंद्र सिंह, सहायक वनपाल सुरेश चौधरी, प्रह्लाद जाट और राजेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे। चार घंटे के बाद भालू को ट्रैंक्यूलाइज किया गया। भालू को रेस्क्यू कर रेस्क्यू सेंटर लाया गया है।</p>
<p>नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क स्थित रेस्क्यू सेंटर का पिंजरा तोड़कर भालू जयसिंहपुरा खोर स्थित एक निर्माणाधीन मकान में घुस गया था, जिसे ट्रेंकुलाइज के बाद रेस्क्यू कर लिया गया है। भालू ने किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है।<br /><strong>- अजय चित्तोड़ा, डीसीएफ (वाइल्ड लाइफ)</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 Apr 2022 14:22:15 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title> नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में भालू खा रहे हैं आइसक्रीम... जाने क्यों</title>
                                    <description><![CDATA[नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में रहवास कर रहे विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीवों को भीषण गर्मी से बचाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई हैं। सभी वन्यजीवों के एनक्लोजर में स्प्रिंकल्स एवं रेन गन लगाई गई है, ताकि तापमान ठंडा रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/wildlife-is-also-eating-ice-cream-in-weather/article-7650"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/46546546546510.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में रहवास कर रहे विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीवों को भीषण गर्मी से बचाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई हैं। सभी वन्यजीवों के एनक्लोजर में स्प्रिंकल्स एवं रेन गन लगाई गई है, ताकि तापमान ठंडा रहे। टाइगर, लॉयन, पैंथर और भालू के नाइट शेल्टर को एयर कूल्ड किया गया है। भालू फैमिली की डाइट में बदलाव करते हुए अब उन्हें जौ का , ठण्डा दूध एवं शहद दिया जा रहा है।</p>
<p>इसके साथ ही केला, सेब, पपीता और तरबूज भी डाइट में शामिल कर दिया है। जानकारी के अनुसार नर भालू शम्भू, गणेश और मादा भालू झुमरी को विशेष रूप से रोजाना एक-एक किलो आइसक्रीम दी जा रही है। दूध में सेव, केला सहित अन्य सीजनल फू्रट्स को मिक्स कर स्पेशल फू्रट आइसक्रीम तैयार की जाती है। इसे ये तीनों बड़े चाव से खाते हैं। इसके अतिरिक्त अन्य वन्यजीवों की डाइट में भी परिवर्तन किया गया है। हाथियों को गर्मी से बचाने के लिए गन्ना, तरबूज सहित अन्य खाद्य वस्तुएं दी जा रही हैं।</p>
<p>सभी वन्यजीवों को एंटी स्ट्रेस और इम्यूनो मोड्यूलेटर दवाई दी जा रही हैं। पीने के पानी में इलेक्ट्रॉल और ग्लूकोस दिया जा रहा है। ताकि उन्हें डिहाईड्रेशन से बचाया जाए। साथ ही वन्यजीवों की 24 घंटे मॉनिटरिंग की जा रही है। साथ ही गर्मी में सभी की डाइट में परिवर्तन किया गया है।<br /><strong>- डॉ. अरविंद माथुर, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी, नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Apr 2022 10:43:56 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मकान और भूखण्ड का पट्टा लेने के लिए आवेदक को नहीं छपवानी पड़ेगी आम सूचना</title>
                                    <description><![CDATA[ अब प्राधिकरण और यूआईटी अपने स्तर पर समाचार पत्रों में यह आम सूचना प्रकाशित करवाएंगे और इस पर आने वाला खर्च भी प्राधिकरण और यूआईटी ही वहन करेंगी। इसके लिए जनता से पैसा नहीं वसूला जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/to-take-the-lease-of-the-house-and-the-plot--the-applicant-will-not-have-to-print-the-general-information--relief-to-the-general-public---authority-uit-will-bear-the-expenses/article-6168"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/uit.jpg" alt=""></a><br /><p><br />जयपुर। शहरी क्षेत्रों में मकान और भूखण्ड का पट्टा लेने वालों को समाचार पत्रों में प्रकाशित करवाई जाने वाली आम सूचना से राहत प्रदान की है। अब प्राधिकरण और यूआईटी अपने स्तर पर समाचार पत्रों में यह आम सूचना प्रकाशित करवाएंगे और इस पर आने वाला खर्च भी प्राधिकरण और यूआईटी ही वहन करेंगी। इसके लिए जनता से पैसा नहीं वसूला जाएगा।</p>
<p><br />नगरीय विकास विभाग ने इस संबंध में सोमवार को आदेश जारी कर दिए है। फिलहाल विकास प्राधिकरण और यूआईटी में सोसायटी के पट्टों की लीज डीड लेने, नाम ट्रांसफर करवाने, उपविभाजन या पुनर्गठन करवाने, धारा-90ए, भू उपयोग परिवर्तन सहित अन्य कार्यों के लिए राज्य स्तरीय समाचार पत्रों में आमसूचना निकलवानी पड़ती है। इस पर आने वाला खर्च आवेदक को ही वहन करना होता है। कई बार तो स्थिति यह भी बन जाती है कि काम से ज्यादा पैसा इस आम सूचना के प्रकाशन पर देना पड़ता है। ऐसी स्थिति में अब यूडीएच ने आम सूचना प्राधिकरण व यूआईटी स्तर पर ही प्रकाशित करवाने का निर्णय लिया है। इसके लिए आवेदन के बाद यूआईटी व प्राधिकरण अपने स्वयं के खर्च पर आम सूचना प्रकाशित करवाएंगे। इसका प्रारूप छोटा होगा, जिसमें केवल कॉलोनी या मोहल्ले का नाम और प्रकरण की संख्या की जानकारी होगी। शेष जानकारी संबंधित एजेंसी की वेबसाइट पर देखी जा सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Mar 2022 11:25:49 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विश्व वन्यजीव दिवस आज: स्लोथ बियर और हिप्पो में सफल प्रजनन प्रदेश में केवल नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क</title>
                                    <description><![CDATA[गुलाबी नगरी स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, झालाना लेपर्ड रिजर्व, हाथी गांव, लॉयन सफारी में वन्यजीवों को देखने की चाह लिए हजारों पर्यटक यहां की विजिट करते हैं। खासकर एगजोटिक पार्क में रहवास कर रहा हिप्पो परिवार विजिटर्स की पहली पसंद बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/world-wildlife-day-today--successful-breeding-in-sloth-bear-and-hippo-only-nahargarh-biological-park-in-the-state--beaver-can-be-brought-from-gujarat/article-5374"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/nahargarh-biological-park.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गुलाबी नगरी स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, झालाना लेपर्ड रिजर्व, हाथी गांव, लॉयन सफारी में वन्यजीवों को देखने की चाह लिए हजारों पर्यटक यहां की विजिट करते हैं। खासकर एगजोटिक पार्क में रहवास कर रहा हिप्पो परिवार विजिटर्स की पहली पसंद बना हुआ है। प्रदेश में नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क ऐसी पहली जगह है, जहां विजिटर्स को हिप्पो देखने को मिलते हैं। इसके अतिरिक्त यहां 26 विभिन्न प्रजातियों के तकरीबन 270 से अधिक वन्यजीव रहवास कर रहे हैं।<br /><br /><strong>स्लोथ बियर का हुआ सफल प्रजनन</strong><br />प्रदेश के बायोलॉजिकल पार्कों और चिड़ियाघरों की बात करें तो जयपुर स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में रहवास कर रहे स्लोथ बियर में (कैप्टिविटी में) पहली बार सफल प्रजनन हुआ। दूसरे जिलों के बायोलॉजिकल पार्कों और चिड़ियाघर में (कैप्टिविटी में) ऐसा अब तक नहीं हो पाया है। नर भालू शम्भू, मादा झुमरी और बच्चा गणेश अपने एन्क्लोजर में चहल-कदमी करते हुए देखे जा सकते हैं।<br /><br /><strong>एक जोड़ा लाए, अब संख्या तीन हुई</strong> <br />दिल्ली चिड़ियाघर से अगस्त, 2019 में हिप्पो का पहला और एकमात्र जोड़ा नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क लाया गया। जहां 17 जुलाई, 2020 में इसका (कैप्टिविटी में) सफल प्रजनन हुआ। प्रदेश में इसकी उपस्थिति केवल जयपुर में देखने को मिलती है। साथ ही प्रदेश के बायोलॉजिकल पार्कों के इतिहास में पहली बार इस प्रजाति के एनीमल में सफल प्रजनन भी यहीं हुआ है। अभी ये हिप्पो जोड़ा बायोलॉजिकल पार्क स्थित एगजोटिक पार्क में रहवास कर रहा है। साथ ही ये जोड़ा फिर से खुशखबरी दे सकता है। <br /><br /><strong>सबसे ज्यादा वुल्फ यहां</strong><br />प्रदेश के बायोलॉजिकल पार्कों की बात करें तो सबसे ज्यादा वुल्फ नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में ही देखने को मिलते हैं। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरविंद माथुर ने बताया कि यहां इनमें कैप्टिविटी में अच्छी ब्रीडिंग भी हो रही है। इसी का नतीजा है कि वन्यजीव एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत वुल्फ के बदले देश के विभिन्न बायोलॉजिकल पार्कों और चिड़ियाघरों से जयपुर को अच्छ एनीमल्स मिले हैं। साथ ही स्लोथ बियर और हिप्पो में सफल प्रजनन केवल यहीं देखने को मिला है।<br /><br /><strong>8 विभिन्न प्रजातियों के हिरण भी यहां</strong><br />नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क ऐसी पहली जगह है। जहां विजिटस को 8 विभिन्न प्रजातियों के हिरण देखने को मिलते हैं। इनमें चीतल, चिंकारा, सिक्का डियर, हॉक डियर, सांभर, ब्लैक बग, बारहसिंघा और चौसिंघा के नाम शामिल है। साथ ही इनमें सफल प्रजनन भी हो रहा है। खासकर चिंकारा में अच्छी ब्रीडिंग हो रही है। इन्हें एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत देश के अन्य चिड़ियाघरों में दिया जा चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Mar 2022 10:45:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>जनता उठाएगी भार : प्रदेश सरकार को अडानी कंपनी को देने है 5000 करोड़ रुपए</title>
                                    <description><![CDATA[बिजली बिलों का फ्यूल सरचार्ज देगा करंट : अभी पांच पैसे प्रति यूनिट, अगले तीन साल इसे दस पैसे प्रति यूनिट करने की तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%89%E0%A4%A0%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0---%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%85%E0%A4%A1%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%82%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88-5000-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A5%9C-%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A4%8F/article-2007"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/orange-bulb_light.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर।</strong> केस हारने के बाद अडानी ग्रुप को भुगतान की जाने वाली राशि को राजस्थान की जनता चुकाएगी। जनता से बिजली बिलों में फ्यूल सरचार्ज के नाम पर हो रही वसूली को अगले तीन साल और बढ़ाया जा सकता है। अभी पांच पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से हो रही वसूली को सितम्बर 2022 के बाद दस पैसे प्रति यूनिट होने की संभावना है। अडानी ग्रुप को भुगतान की बड़ी रकम होने के कारण यह वसूली अगले तीन साल तक वसूली जा सकती है। दरअसल, कोयला खरीद मामले में अडानी पावर राजस्थान से केस हारने के बाद ऊर्जा विभाग को मोटे तौर पर अभी पांच हजार करोड़ रुपए का भुगतान और करना पड़ेगा। इस मामले में बिजली कम्पनियां अडानी पावर को इससे पहले 2426 करोड़ का अंतरिम भुगतान कर चुकी हैं। <br /> इसलिए उपभोक्ताओं से पिछले दो सालों से बिलों में वसूली जारी है। भुगतान की वसूली के लिए विद्युत विनियामक आयोग ने गत 13 जून 2019 को डिस्कॉम को वसूली के लिए अधिकृत किया था। डिस्कॉम का 36 किश्तों में वसूला जाने वाला यह पैसा सितम्बर 2019 से लिया जाना जारी है, जो सितम्बर 2022 तक पांच पैसे प्रति यूनिट है। <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> होगी दुगुनी वसूली</strong></span></span><br /> केस हारने के बाद ऊर्जा विभाग को अडानी ग्रुप को करीब पांच हजार करोड़ रुपए और देने है। इसलिए यह भार भी जनता के ऊपर ही आएगा। इसी वजह से विशेष फ्यूल सरचार्ज को पांच पैसे से बढ़ाकर दस पैसे प्रति यूनिट करने पर विचार चल रहा है। यानि सितम्बर 2022 के बाद अगले तीन साल तक दस पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से वसूली होगी। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>फ्यूल सरचार्ज वसूली के लिए भाजपा जिम्मेदार</strong></span></span><br /> फ्यूल सरचार्ज वसूली के पीछे भाजपा जिम्मेदार है। भाजपा सरकार ने जाते जाते अडानी पावर को पैसा देने का फैसला कर दिया था। हमने आते ही चुनौती दी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज हो गई। <br /> -<strong>डॉ. बीडी कल्ला, ऊर्जा मंत्री</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Oct 2021 11:50:18 +0530</pubDate>
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