<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/burden/tag-7816" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>burden - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/7816/rss</link>
                <description>burden RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>वृद्धजन परिवार के बोझ नहीं, आधार हैं</title>
                                    <description><![CDATA[अपनी वृद्धावस्था और अशक्तता के कारण वे इस अन्याय को चुपचाप बर्दाश्त करने को मजबूर जीये जा रहे हैं। इनके लिए आवाज उठाने वाली कोई संस्था वा व्यक्ति क्यों नहीं आगे आ रहे हैं?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/the-elderly-are-not-the-burden-of-the-family-but/article-48846"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-(8)6.png" alt=""></a><br /><p>लो आ गया एक और वृद्धजन दिवस, हर वर्ष की तरह फिर परंपरागत रूप से समारोह और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और वृद्धजनों को बुलाकर फूलों, मालाओं से लाद दिया जाएगा। उनके लिए बड़ी-बड़ी बातें एवं घोषणाएं की जाएंगी। बस इसके बाद फिर वही ढर्रा चलता रहेगा, लेकिन हकीकत में भारतीय समाज में कम से कम यह तो देखा जा रहा है कि आम परिवारों में वृद्धों को वह सम्मान और सामान्य जीवन की सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जो उन्हें मिलना चाहिए, यह उनका अधिकार भी हैं। अपनी वृद्धावस्था और अशक्तता के कारण वे इस अन्याय को चुपचाप बर्दाश्त करने को मजबूर जीये जा रहे हैं। इनके लिए आवाज उठाने वाली कोई संस्था वा व्यक्ति क्यों नहीं आगे आ रहे हैं? यह भी एक ताज्जुब का विषय हैं।आज साधारणत: संयुक्त परिवार बिखरते चले जा रहे हैं, आज की पीढ़ी जहां अपने पैरों में खड़ी होती हैं और विवाह होने के बाद मां-बाप से अलग होने की फिराक में लगे रहते हैं। उनसे अगर कुछ मिलने की उम्मीद रहती हैं या वे कुछ अर्थोपार्जन में लगे हैं, तब तब उनकी पूछ परख ठीक तरह से होती हैं। लेकिन जब वे अपनी वृद्धावस्था या अशक्तता के कारण कार्य (अर्थोपार्जन) से रिटायर्ड हो जाते हैं। तभी से उनकी उपेक्षा घर में शुरु हो जाती हैं। आज सामाजिक, आर्थिक परिस्थितियों में तेजी से बदल रहे प्रतिमानों के कारण परिवार उतनी ही तेजी से विघटन की ओर अग्रसर हो रहे हैं। महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता वही पुरुषों का इगो जब टकराता है तो परिवारों को अस्थिर होने में जरा भी समय नहीं लगता। भारतीय परिवार की इस टूटन भरी त्रासदी के बीच वृद्ध अब दो पाटों में गेंहू के समान पीसे जाने को मजबूर हो गए हैं।<br />आज वृद्धजनों को अब वह सम्मानजनक स्थान नहीं मिल पा रहा, जो उन्हें पहले मिलता था। वृद्धावस्था के मायने हैं शक्तिहीन, जर्जर काया और शिथिल मन। शायद इसी कारण प्राचीन शास्त्रों में कहा गया था कि जब मनुष्य यह देखे कि उसके शरीर के बाल पक गए हैं पुत्र के भी पुत्र या पुत्री हो गए हैं, तब उसे सांसारिक सुखों को  छोड़कर वन का आश्रय ले लेना चाहिए। क्योंकि वहीं वह अपने को मोक्ष प्राप्ति के लिए तैयार कर सकता है। आज के परिवेश में अब वह व्यवस्था लागू नहीं की जा सकती। </p>
<p>इसलिए मजबूरन वृद्धों ने अपने आपको पारिवारिक जीवन में ही खपा लिया है। इसीलिए अब शायद उनके सम्मान में कमी आ गई हैं एकाकीपन, सामाजिक असुरक्षा उन्हें व्यथित कर रही हैं आज समूचा संसार वर्ष 2023 को विश्व वृद्धजन वर्ष के रुप में मना रहा हैं और उनकी संतानें अर्थात युवाजनों द्वारा वृद्धों की उपेक्षा, मानसिक कष्ट दिए जाने की घटनाएं आम हो चली हैं। वृद्धजन जो उम्र भर बैल के समान परिवार की गाड़ी को अपने कंधों पर खींचता है। अपने संतानों को पाल पोसकर उसे शिक्षा दीक्षा देकर बड़ा करता है। और जब उसके थकेहारे उम्रदराज हो चुके शरीर को सहारे की आवश्यकता पड़ती है तो उनकी एहसान फरामोश संताने उन्हें अपना बोझ समझकर ठुकराने पर तुल उठती है। यही कारण है कि अब वृद्धों के लिए वृद्धावस्था अभिशाप बन गई हैं उनकी संतानें ये क्यों भूल जाती हैं कि आज वे, जो वृद्ध हैं कभी वेल अपना बचपन उन्हीं के सहारे गुजारे हैं, अब जब वे अकेले और निशक्त हैं उन्हें जरुरत है सहारे की वैसे भी वृद्धों को उचित सहारे देखभाल की आवश्यकता होती हैं। पर वर्तमान पीढ़ी परिवार के वृद्धों को बोझ मानकर उनके उचित देखभाल के दायित्व को नकार देती हैं। जिससे वृद्धों को कष्टकर जीवन बिताने के लिए विवश होना पड़ता हैं। आज का युवा वर्ग वृद्धों को पिछड़पने की निशानी समझती हैं। और उनकी तथा उनके समस्याओं को अनदेखा करती हैं। गरीब तथा ग्रामीण परिवेश के वृद्धों की हालत तो और भी खराब है। उन्हें तो दो जून की रोटी या सर छिपाने के लिए घर भी नसीब नहीं होता। उनके घर वाले उन्हें मारे-मारे फिरने तथा वृद्धाश्रमों में शरण लेने के लिए मजबूर कर देते हैं।</p>
<p>अब जरूरत है कि समाज, परिवार तथा सरकार वृद्धों के कल्याण के लिए कुछ ठोस कदम उठाए। सभी का नैतिक दायित्व बनता है कि वृद्धजनों के प्रति स्वस्थ्य तथा सकारात्मक दृष्टिकोण रखें। सरकार को भी चाहिए कि वृद्धों को सामाजिक सुरक्षा दिलाने की व्यवस्था बनाएं। उनके स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए निशुल्क चिकित्सा व्यवस्था की शुरुआत करनी चाहिए। सार्वजनिक यातायात में वृद्धों को छूट मिलनी चाहिए। राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना में सुधार करना होगा एवं वृद्धों को समुचित पेंशन दी जानी चाहिए। उनके लिए आजीवन के लिए साधन भी उपलब्ध कराना होगा। यह सामाजिक संगठनों का उत्तरदायित्व हैं। आज की पीढ़ी अगर इसी तरह वृद्धों को अनादर, उपेक्षा और उनके जीवन में रोड़ा बिछायेंगें तो यह उन्हें अच्छी तरह से समझ लेना होगा कि आने वाले भविष्य के दिनों में वे स्वयं भी वृद्ध अवश्य ही होंगे। तब स्वयं उनकी संतानें भी परंपरानुसार उनके ही पद चिन्हों पर ही चलेगी। इसमें कोई दो मत नहीं हैं। तब क्या होगा...? अगर यह सब सोच लो तो वृद्धों की समस्या ही खत्म हो जाएं।  </p>
<p><strong>-सुरेश सिंह बैस शाश्वत</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/the-elderly-are-not-the-burden-of-the-family-but/article-48846</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/opinion/the-elderly-are-not-the-burden-of-the-family-but/article-48846</guid>
                <pubDate>Thu, 15 Jun 2023 10:18:30 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-06/630-400-size-%288%296.png"                         length="330743"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बच्चों पर किताबों और भारी बस्तों का बोझ कम करने की नीति, प्रदेश में नो बैग डे की शुरुआत </title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शनिवार को नो बैग डे यानी की बिना बस्ते के स्कूल की शुरुआत हो गई। शहर में प्रतियोगी परीक्षा होने से ज्यादातर बड़े स्कूल में अवकाश है, लेकिन आठवीं तक के अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित हुए विद्यालय के स्टूडेंट्स ने शनिवार को इस अनोखे दिन का खूब आनंद लिया और जहां बच्चों को राजस्थान और भाषा कौशल के बारे में बताया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/policy-to-reduce-the-burden-of-books-and-heavy-bags/article-14018"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/bag-bojh_school.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शनिवार को नो बैग डे यानी की बिना बस्ते के स्कूल की शुरुआत हो गई। शहर में प्रतियोगी परीक्षा होने से ज्यादातर बड़े स्कूल में अवकाश है, लेकिन आठवीं तक के अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित हुए विद्यालय के स्टूडेंट्स ने शनिवार को इस अनोखे दिन का खूब आनंद लिया और जहां बच्चों को राजस्थान और भाषा कौशल के बारे में बताया गया। भाषा कौशल में अंग्रेजी से हिंदी ट्रांसलेशन, नए मीनिंग, संस्कृत से हिंदी की जानकारी दी गई। टीचर भी इस पहल को <span style="color:#000000;">सकारात्मक </span>मानते हैं, उनका कहना है कि 6 दिन शिक्षण के बाद 1 दिन बिना किताबों के बातों-बातों और खेल-खेल में होने वाली पढ़ाई उनके मन और मस्तिष्क पर ज्यादा प्रभाव डालती है।</p>
<p><strong> बस्ते का बोझ कम करने की कवायद:</strong> केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सभी राज्यों को स्कूल बैग का बोझ हल्का करने की गाइडलाइन जारी की है, जिसके अनुसार बच्चे के स्कूल बैग का बोझ उसके वजन के 10 फीसदी तक होना चाहिए। सप्ताह में एक दिन बिना बैग भी इसी कवायद का हिस्सा है। देश में राजस्थान से पहले मणिपुर, उत्तर प्रदेश भी सप्ताह में एक दिन नो बैग डे लागू कर चुका है।</p>
<p><strong> 2 साल बाद फिर बस्ता मुक्त हुए हम:</strong> राज्य सरकार ने 2020 में इसकी घोषणा की थी, जिसके अनुसार नए सत्र से अब सरकारी स्कूलों के बच्चों को शनिवार को बस्ता लेकर स्कूल नहीं जाना है। इसलिए सभी सरकारी स्कूलों में शनिवार को नो बैग डे मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 20 फरवरी, 2020 को बजट भाषण के दौरान शिक्षा विभाग से संबंधित घोषणाओं में हफ्ते में एक दिन शनिवार को सरकारी स्कूलों में बैग नहीं ले जाने व उस दिन कोई अध्यापन कार्य नहीं किए जाने संबंधी फैसले का ऐलान किया था। सत्र 2022-23 में सप्ताह में प्रत्येक शनिवार को बस्ता मुक्त दिवस मनाया जा रहा है।े</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/policy-to-reduce-the-burden-of-books-and-heavy-bags/article-14018</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/policy-to-reduce-the-burden-of-books-and-heavy-bags/article-14018</guid>
                <pubDate>Sun, 10 Jul 2022 15:15:30 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-07/bag-bojh_school.jpg"                         length="162540"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व जनसंख्या दिवस पर विशेष: आबादी के बोझ से कराहती धरती</title>
                                    <description><![CDATA[वर्ष 2019 में जब कोरोना ने विश्व मेंअपना प्रकोप दिखाना आरंभ किया तो पूरी दुनिया को समझ में आया कि जनसंख्या का अधिक होना हमारे लिए कितना खतरनाक है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/special-on-world-population-day-earth-groaning-with-the-burden-of-population/article-14019"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/hklsajfajls.jpg" alt=""></a><br /><p>वर्ष 2019 में जब कोरोना ने विश्व मेंअपना प्रकोप दिखाना आरंभ किया तो पूरी दुनिया को समझ में आया कि जनसंख्या का अधिक होना हमारे लिए कितना खतरनाक है।<br /><br />चीन के बाद सर्वाधिक आबादी वाले देश भारत में तो यह कोरोना कहर बनकर आया। आक्सीजन और दवाओं के साथ ही अस्पतालों की कमी ने हमें बताया कि यदि हम अभी भी नहीं चेते तो हमारा भविष्य उज्जवल नहीं है। बाकी की पोल बढ़ती आबादी ने ग्लोबल वार्मिंग के रूप में हमारे सामने खोलकर रख दी है। इस वर्ष के अभी तक के मौसम चक्र में सर्दी और गर्मी दोनों ही हर वर्ष के मुकाबले अधिक रहीं और अब जब वर्षा ऋतु चल रही है तो वर्षा का प्रकोप पूरे देश में नजर आ रहा है।<br /><br />यह सब बताता है कि आबादी का बोझ हमारे जीवन में भस्मासुर बन गया है। भारत तथा चीन दुनिया के सर्वाधिक आबादी वाले देश हैं। यहां की सरकारें आबादी नियंत्रण के लिए लंबे समय से प्रयासरत हैं। चीन ने 1979 में एक संतान की नीति लागू की थी। उसकी योजना थी कि इससे देश में जनसंख्या वृद्धि नियंत्रण में आ जाएगी। भारत ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए हम दो हमारे दो की नीति के साथ ही परिवार नियोजन के विभिन्न साधन अपनाने पर भी जोर दिया।<br /><br />सरकारी सेवाओं में भी इसी परिवार नियोजन को विभिन्न योजनाओं से जोड़ा गया। थोड़ा और विस्तार से देखें तो कोविड 19 के प्रसार के शुरुआती दौर में महानगरों से बड़ी संख्या में लोग गांवों की तरफ भाग चले थे। लेकिन यह बहुत कम समय तक होने वाली प्रक्रिया थी। तब लोगों ने समझा था कि गांव इस महामारी से ज्यादा सुरक्षित रहेंगे। शहरी क्षेत्र में संक्रमण के ज्यादा मामलों और महामारी के कारण हुई आर्थिक दिक्कत के बावजूद शहर फिर से अवसरों का केन्द्र बनते जा रहे हैं। वे रोजगार, शिक्षा और प्रशिक्षण के अवसर मुहैया कराते हैं और गांवों में होने वाले अनेक संघर्षों से भी व्यक्ति की रक्षा करते हैं। शहरीकरण की प्रक्रिया में एकरूपता नहीं है फिर भी शहरों का विकास अब होता ही जाएगा और मानवता का भविष्य अब नगरों में ही निहित है। शहरों की जनसंख्या वृद्धि का एक कारण यह भी है।</p>
<table style="width:708px;">
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:center;width:707px;" colspan="2"><strong>जनसंख्या की दृष्टि से टॉप 8 देश</strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:163.117px;">नाईजारिया</td>
<td style="width:543.883px;">15,52,15,573</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:163.117px;">बांग्लादेश</td>
<td style="width:543.883px;">15,85,70,535</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:163.117px;">पाकिस्तान</td>
<td style="width:543.883px;">18,73,42,721</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:163.117px;">ब्राजील</td>
<td style="width:543.883px;">20,34,26,773</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:163.117px;">इंडोनेशिया</td>
<td style="width:543.883px;">24,56,13,043</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:163.117px;">संयु. अमेरिका</td>
<td style="width:543.883px;">31,32,32, 044</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:163.117px;">भारत</td>
<td style="width:543.883px;">15,85,70,535</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:163.117px;">चीन</td>
<td style="width:543.883px;">1,33,67,18015</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>सर्वाधिक लोग एशिया में</strong></span></p>
<p>महादेशों में सर्वाधिक जनसंख्या एशिया की है।  दूसरा स्थान अफ्रिका का है।  इनकी जनसंख्या 1.34 अरब है।  एशिया में जहां विश्व के 36% लोग रहते हैं,  वहीं अफ्रिका में 17.7 प्रतिशत। यूरोप की जनसंख्या 74.7 करोड़ है।  जहां दुनिया के 10 प्रतिशत लोग रहते है।<br /><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>उत्तर अमेरिका में दुनिया 5% लोग</strong></span><br />उत्तर अमेरिका महादेश में वर्ष 2020 के अंत तक 36.6 करोड़ लोग रहते थे।  जो पूरी दुनिया की जनसंख्या का लगभग पांच प्रतिशत है।<br /><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>दक्षिण अमेरिका में दुनिया के 8% लोग</strong></span><br />दक्षिण अमेरिका और कैरीबियन की जनसंख्या इस समय अर्थात वर्ष 2020 तक 65.3 करोड़ थी। जो विश्व आबादी का आठ प्रतिशत है।<br /><br />एक अनुमान के अनुसार 10 हजार ई. पूर्व कृषि कार्य की शुरुआत होने तक दुनिया की आबादी दस लाख से एक करोड़ के बीच थी। कृषि कार्य शुरू होने पर अन्न की प्रचुरता हुई और दुनिया की जनसंख्या तेजी से बढ़ने लगी।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>शहरीकरण और चुनौतियां</strong></span><br />पिछले दो दशक में एशिया में भारत और चीन में बहुत तेज आर्थिक वृद्धि हुई और शहरीकरण भी खूब हुआ। वर्ष 2035 तक चीन की शहरी आबादी के 1.05 अरब हो जाने की सम्भावना है। जबकि एशिया महादेश की शहरी जनसंख्या 2.99 अरब। तब तक दक्षिण एशिया की शहरी जनसंख्या 98,75,92,000 तक पहुंच जाएगी। भारत और चीन जैसी बहुत बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में विश्व जनसंख्या का बहुत बड़ा भाग निवास करता है, इसलिए उनके विकास के अनुचित रास्ते विश्व में असमानता बढ़ाते हैं। वर्तमान शहरी जनसंख्या अधिक जन्मदर के कारण लगातार बढ़ रही है। निम्नआय वाले देशों में तो ऐसा हो ही रहा है।<br /><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>जन्मदर और वृद्धि का कारण</strong></span><br />वर्ष 2021 के नवम्बर में विश्व की जनसंख्या 7.9 अरब पहुंच गई।  मानव इतिहास में जनसंख्या के एक अरब तक पहुंचने में 20 लाख वर्ष लगे।  वर्ष 1814 से लेकर 2021 तक के 207 वर्ष में ही विश्व जनसंख्या  7.9 अरब हो गई। जन्म दर में वृद्धि का कारण माना जा रहा है कि  हमने तमाम बीमारियों पर काबू कर लिया है ।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>महामारियों ने कम की आबादी</strong></span><br />रोमन सम्राट जस्टीनियन के शासन काल में यूरोप में प्लेग फैला था। जिससे वहां की आधी आबादी मौत के मुंह में चली गई। यह रोग भारत में भी फैला, यहां भी भारी संख्या में लोगों की मृत्यु हुई। कोरोना जैसी महामारी ने भी विश्व की आबादी कम करने में अपनी अह्म भूमिका निभाई है। <br /><br /><strong><span style="color:#ff0000;">संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार 6 जुलाई 2022 को</span></strong><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>भारत की जनसंख्या एक अरब 40 करोड़ 71 लाख 99 हजार 129 थी।</strong></span><br />संयुक्त राष्ट्र का सांख्यिकी कर्मी चीन की जनसंख्या अब भारत से अधिक नहीं मानते। उनका कहना है कि अनेक वर्षों तक एक बच्चा नीति के कारण चीन की आबादी कम हो गई है। लेकिन वह आंकड़ों में हेर फेर कर अपने को विश्व का सबसे बड़े देश दिखा रहा है। वर्ष 2020 में भारत की जनसंख्या एक अरब 38 करोड़ थी। यह आंकड़ा भी संयुक्त राष्ट्र के अनुसार ही है।</p>
<table style="width:708px;">
<tbody>
<tr style="height:41px;">
<td style="text-align:center;width:705px;height:41px;" colspan="2"><span style="color:#ff0000;"><strong>ये वो देश हैं जो जनसंख्या की दृष्टि से हमारे राज्य के बराबर</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">आंध्र प्रदेश</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">जर्मनी</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">अरुणाचल प्रदेश</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">मॉरीशियस</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">असम</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">पेरु</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">छत्तीसगढ़</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">नेपाल</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">दिल्ली</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">बेलारूस</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">गोवा</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">एस्टोनिया</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">गुजरात</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">इटली</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">हरियाणा</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">यमन</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">हिमाचल प्रदेश</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">हॉंगकांग</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">जम्मू और कश्मीर</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">जिम्बाब्वे</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">झारखंड</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">इराक</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">कर्नाटक</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">फ्रांस</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">केरल</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">कनाड़ा</td>
</tr>
<tr style="height:41.2px;">
<td style="width:299.667px;height:41.2px;">मध्यप्रदेश</td>
<td style="width:405.333px;height:41.2px;">इरान</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">महाराष्ट्र</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">जापान</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">मणिपुर</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">मंगोलिया</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">मेघालय</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">ओमान</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">मिजोरम</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">बहरीन</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">नागालैंड</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">स्लोबोनिया</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">ओडिशा</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">अर्जेंटीना</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">पंजाब</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">मलेशिया</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:299.667px;height:41px;">राजस्थान</td>
<td style="width:405.333px;height:41px;">थाइलैंड</td>
</tr>
</tbody>
</table>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/special-on-world-population-day-earth-groaning-with-the-burden-of-population/article-14019</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/special-on-world-population-day-earth-groaning-with-the-burden-of-population/article-14019</guid>
                <pubDate>Sun, 10 Jul 2022 14:47:47 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-07/hklsajfajls.jpg"                         length="226597"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बच्चों पर भारी पड़ता बस्ते का बोझ</title>
                                    <description><![CDATA[बच्चों को स्कूल आते समय कितनी किताबें व नोटबुक लाना चाहिए। यह स्कूल तय नहीं कर पा रहे हैं। एक समय था जब बच्चों को स्कूल में ही पीने का पानी मिल जाता था, लेकिन करीब एक लीटर की पानी की बोटल और लंच बॉक्स का बोझ तो इसलिए बोझ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह बच्चे के लिए जरुरी है, लेकिन किताबों और नोटबुक के बोझ को आसानी से कम किया जा सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/burden-on-childrens-of-school-bag/article-13425"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/45465465.jpg" alt=""></a><br /><p>बच्चों को स्कूल आते समय कितनी किताबें व नोटबुक लाना चाहिए। यह स्कूल तय नहीं कर पा रहे हैं। एक समय था जब बच्चों को स्कूल में ही पीने का पानी मिल जाता था, लेकिन करीब एक लीटर की पानी की बोटल और लंच बॉक्स का बोझ तो इसलिए बोझ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह बच्चे के लिए जरुरी है, लेकिन किताबों और नोटबुक के बोझ को आसानी से कम किया जा सकता है। यह हमारी शिक्षा व्यवस्था का ही कमाल है कि बच्चों पर पढ़ाई के बोझ से ज्यादा बस्ते का बोझ होता जा रहा है। स्कूलों में बैग का बोझ दिन प्रतिदिन ज्यादा ही होता जा रहा है, जबकि 16 साल पहले ही तमिलनाडु सरकार ने बस्ता हल्का करने का नियम बना दिया था। इसके लिए तमिलनाडु सरकार ने कक्षाओं के हिसाब से बस्ते का वजन तय किया था तो बाद में मद्रास हाईकोर्ट ने भी मई 2018 में इन नियमों को लागू करने के निर्देश दिए थे। हालांकि बस्ते के बढ़ते बोझ को कम करने की चिंता सभी को रही है। यही कारण है कि एनसीईआरटी ने भी 2018 में ही देशभर के प्राइवेट स्कूलों में इन नियमों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए पर आज भी वहीं ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। एनसीईआरटी के बिहार में मार्च महीने में किए गए सर्वे के जो परिणाम आए हैं कमोबेस वही हालात समूचे देश के हैं। बच्चे पढ़ाई के बोझ से ज्यादा बस्ते के बोझ से त्रस्त हैं।</p>
<p>बिहार में कक्षा एक से 12वीं तक के बच्चों के बस्ते के बोझ का अध्ययन किया गया तो सामने आया कि बच्चे के बस्ते का वजन तीन से चार किलो अधिक है। बच्चों को तीन से चार किलो अधिक वजन लेकर जाना पड़ता है। दसवीं बारहवीं के बच्चों के स्कूल बैग का वजन दस से 12 किलो तक हो जाता है। इसका दुष्प्रभाव सीधे- सीधे बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। बच्चों की रीढ़ की हड्डी पर असर पड़ने के साथ ही उनके पोस्चर पर प्रभाव पड़ने लगा है। आदर्श स्थिति यह है कि बच्चे के वजन का 10 प्रतिशत वजन ही स्कूल बैग का वजन होना चाहिए पर ऐसा हो नहीं रहा है। हालांकि एनसीईआरटी सहित विशेषज्ञोें ने स्कूल बैग का वजन कम करने के सुझाव भी दिए हैं और यह सुझाव नहीं है, लेकिन इन सुझावों को पूरी तरह से दरकिनार करते हुए बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। इसके लिए स्कूलों को अपने सिस्टम में सुधार करना होगा। दरअसल बच्चों को स्कूल आते समय कितनी किताबें व नोटबुक लाना चाहिए। यह स्कूल तय नहीं कर पा रहे हैं। एक समय था जब बच्चों को स्कूल में ही पीने का पानी मिल जाता था, पर करीब एक लीटर की पानी की बोटल और लंच बॉक्स का बोझ तो इसलिए बोझ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह बच्चे के लिए जरुरी है। पर किताबों और नोटबुक के बोझ को आसानी से कम किया जा सकता है। स्कूल यदि यह तय कर ले कि अमुख दिन यह किताब लानी है तो दूसरी और बच्चों को स्कूल में किताबों को शेयर करने की आदत ड़ालकर भी समस्या का कुछ समाधान हो सकता है। इसी तरह से सभी विषयों की नोटबुक के स्थान पर बच्चों को एक या दो नोटबुक या खाली कागज लाने की आदत डाली जाए, तो उससे भी बस्ते का बोझा काफी हद तक कम हो सकता है। इसके अलावा केन्द्रीय विद्यालयों की तर्ज पर लॉकर सुविधा हो तो भी बच्चे स्कूल में किताब रखकर जा सकते हैं। यह कोई नए सुझाव या नई बात नहीं है अपितु कमोबेस एनसीईआरटी के सुझावों में यही कुछ बातें हैं।</p>
<p>हमें बच्चे की पढ़ाई और स्वास्थ्य दोनों में ही तालमेल बैठाना होगा। स्कूल बैग के बोझ को लेकर बच्चे और पेरेंट्स दोनों ही चिंतित है तो दूसरी और शिक्षाविद और मनोविज्ञानी भी इसे लेकर गंभीर है। सरकार द्वारा भी इसे लेकर गंभीर चिंतन मनन होता है, पर नतीजा वहीं का वहीं बना हुआ है। होने यह तक लगा है कि पीठ पर बस्ते के बोझ के चलते बच्चों की पीठ का अनावश्यक झुकाब बढ़ता जा रहा है तो स्पाइनल प्रोब्लम आम होती जा रही है यह अलग बात है। बच्चे तो बच्चे बच्चों के पेरेन्ट्स को भी स्कूल बैग उठाते हुए पसीना आ जाता है, तो इसकी गंभीरता को आसानी से समझा जा सकता है। एक समय था जब रफ नोटबुक मल्टीपरपज नोटबुक होती थी। इस रफ नोटबुक को अधिक उपयोगी बनाने की दिशा में चिंतन कर बस्ते की नोटबुकोंं के बोझ का काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी तरह से टाइम टेबल इस तरह से तैयार किया जाए, ताकि पीरियड्स की किताबों और बस्ते के वजन में संतुलन बनाया जा सकें।</p>
<p>एक समय था जब काउंटिंग, अल्फावेट, ककहरा आदि की खुली कक्षाएं होती थीं और बच्चों को बोल-बोल कर रटाया जाता था। इस तरह के प्रयोग के पीछे वैज्ञानिक कारण भी रहा है। ऐसे में कुछ विषयों की कक्षाएं दिन विशेष को इस तरह से भी आयोजित करने पर विचार किया जा सकता है। पहले शनिवार को आधे दिन लगभग इसी तरह की खुली कक्षाएं व रचनात्मक गतिविधियां होती थीं, आज कितने स्कूलों में शनिवार को यह होता है, विचारणीय है। हालात साफ -साफ  है। हमें बच्चों के स्कूल बैग के बोझ के साथ-साथ बच्चे के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ के प्रति भी सजग होना पड़ेगा। पहले चरण में यदि एनसीईआरटी के अनिवार्य आदेशों, दिशा-निर्देशों और सुझावों को ही ईमानदारी से लागू कर दिया जाए, तो समस्या का काफी हद तक हल निकल सकता है। प्राइवेट स्कूलों को भी इस दिशा में आगे आकर सरकार के सामने ठोस प्रस्ताव रखने चाहिए ताकि समस्या का समाधान खोजा जा सके। आखिर बच्चे राष्ट्र की धरोहर है और उनकी शारीरिक और मानसिक स्थितियों को हमें समझना होगा और कोई ना कोई व्यावहारिक हल खोजना होगा, ताकि पढ़ाई और बस्ते के बोझ के बीच एक समन्वय बन सके।</p>
<p><strong>- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/burden-on-childrens-of-school-bag/article-13425</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/opinion/burden-on-childrens-of-school-bag/article-13425</guid>
                <pubDate>Sat, 02 Jul 2022 11:29:52 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-07/45465465.jpg"                         length="142532"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिजली चोरी के मामलों में वसूली करने में विभाग फेल, भार आम उपभोक्ता पर</title>
                                    <description><![CDATA[विद्युत विभाग पूरे जिले भर में चोरी के मामलों में आरोपियों से वसूली और कार्रवाई में लगातार पीछे रहता चल रहा है, यही वह सबसे बड़ा कारण है जिसके चलते झालावाड़ जिले में चोरी पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/department-fails-to-recover-in-cases-of-electricity-theft--the-burden-is-on-the-common-consumer/article-13221"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/bijli-chori-ke-maamlo.jpg" alt=""></a><br /><p>झालावाड़। विद्युत विभाग पूरे जिले भर में चोरी के मामलों में आरोपियों से वसूली और कार्रवाई में लगातार पीछे रहता चल रहा है, यही वह सबसे बड़ा कारण है जिसके चलते झालावाड़ जिले में चोरी पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाया है। विद्युत विभाग के अधिकारी और विजिलेंस टीमें कहने को तो साल भर फील्ड में विद्युत चोरी करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करती रहती है, किंतु अधिकांश मामलों में ना तो वसूली हो पाती है ना ही नियमानुसार एफआईआर की कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसे में लोगों के मन से विद्युत विभाग द्वारा की जाने वाली कार्रवाहियों का डर निकल चुका है और लोग खुलेआम बिजली की चोरी कर रहे हैं, जिसके चलते विद्युत विभाग की छीजत लगातार बढ़ती जा रही है और आम उपभोक्ता बोझ के तले पिसता जा रहा है।<br /><br /><strong>छीजत में अव्वल है झालावाड़ जिला</strong><br />कहा जाता है कि जयपुर डिस्कॉम के अंतर्गत आने वाले कुल 17 जिलों में से झालावाड़ जिला छीजत में अव्वल है, यहां पर विभाग के आंकड़े खुद 20%  छीजत की बात स्वीकार करते हैं, लेकिन विद्युत विभाग के सूत्र बताते हैं कि झालावाड़ जिले के कुछ क्षेत्रों में छीजत 45 से 50% तक भी है जिसको रोकने में महकमा बिल्कुल नाकाम साबित हो रहा है। विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-20 झालावाड़ जिले में 20. 17% छीजत थी। 2020-21 मई छीजत का प्रतिशत 20.04 रहा जबकि वर्ष 2021-22 की बात करें तो छीजत घटकर 18.62% तक पहुंची है।<br /><br /><strong>चोरी के मामलों में वसूली और एफआईआर में विभाग फेल</strong><br />विद्युत चोरी के मामले में आरोपियों से पैनल्टी वसूली तथा वसूली नहीं होने पर एफआईआर को लेकर विभाग का प्रदर्शन जरा भी ठीक नहीं है। आंकड़ों पर यदि नजर डालें तो विभाग पूरी तरह से फेल नजर आता है। पिछले 3 सालों में विभाग द्वारा की गई कार्यवाही पर यदि नजर डालें तो लगभग 20% मामलों में ही विभाग वसूली कर पाया है, वही इतने ही मामलों में एफआईआर दर्ज करवाए जाने की कार्यवाही हुई है, जबकि विभागीय निदेर्शों के अनुसार ऐसे सभी मामले जिनमें वसूली नहीं हो पाती है इनमें एफआईआर करवाए जाने का प्रावधान है। जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड झालावाड़ से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-20 के दौरान विद्युत विभाग की विभिन्न टीमों ने जिले में कुल 2195 चोरी के मामले पकड़े, जिनमें से 180 मामलों में ही आरोपियों से वसूली हो पाई, जबकि 879 मामलों में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई। इसी प्रकार से वर्ष 2020-21 के दौरान विद्युत विभाग ने कुल 3541 चोरी के मामले पकड़े, जिनमें से 1357 मामलों में वसूली हो पाई तथा 1058 मामलों में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई। इसी तरह से वर्ष 2021-22 के दौरान विद्युत विभाग ने चोरी के कुल 1765 से मामले पकड़े, 488 मामलों में वसूली हुई जबकि 264 में एफ आई आर दर्ज करवाई गई। इसी प्रकार से यदि पिछले 3 वर्ष के कुल आंकड़ों की बात करें तो उनमें विद्युत विभाग में कुल 7501 मामले चोरी के पकड़े, जिनमें से 2025 में वसूली हो पाई, जबकि 2201 मामलों में एफआईआर दर्ज करवाई गई, शेष 3275 चोरी में पकड़े जाने वाले उपभोक्ताओं के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं हो पाई। यानी अब तक कुल चोरी के मामलों में से आधे मामलों में कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है, जो सीधे तौर पर विद्युत विभाग की उदासीनता को दशार्ता है तथा यही वह आंकड़े हैं जो चोरी करने वाले उपभोक्ताओं के हौसलों को बुलंद करते हैं।<br /><br /><strong>एक्सपर्ट व्यू: चोरी रुकेतो मिले उच्च क्वालिटीकी बिजली</strong><br />जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड झालावाड़ के अधीक्षण अभियंता एसके अग्रवाल का कहना है कि छीजत कम होने और चोरी रुकने से आर्थिक फायदा उपभोक्ताओं को कितना हो सकता है यह ऊपर के स्तर से तय होगा। किंतु यह बात निश्चित तौर पर कही जा सकती है कि उपभोक्ता को अच्छी क्वालिटी की विद्युत आपूर्ति मिल पाएगी जिससे आम उपभोक्ताओं को काफी फायदा होगा। अग्रवाल ने बताया कि अभी जहां पर जितने लोड के कनेक्शन है वहां उतनी ही क्षमता का ट्रांसफार्मर लगाया जाता है, लेकिन वहां आंकड़े डालने वाले लोड को बढ़ा देते हैं और ट्रांसफार्मर ओवरलोड हो जाते हैं, जिससे नियमित उपभोक्ताओं को पूरा वोल्टेज नहीं मिल पाता है ना ही उन्हें अच्छी क्वालिटी की बिजली मिल पाती है। अग्रवाल ने कहा कि यदि चोरी रुक जाएगी और सभी उपभोक्ता विद्युत कनेक्शन लेकर बिजली जलाएंगे तो विद्युत विभाग के पास विद्युत भार की भी पूरी गणना होगी, उसी के अनुसार ट्रांसफार्मर लगाए जा सकेंगे ताकि उपभोक्ताओं को बिजली अच्छी तरह मिल सके और बार-बार होने वाली तकनीकी परेशानियों से छुटकारा मिल पाए।<br /><br /> विद्युत चोरी रोकने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं जिन मामलों में वसूली नहीं हो पाई है उन में एफआईआर करवाने के निर्देश दे दिए गए हैं। चोरी और छीजत कम होने से उपभोक्ताओं को काफी फायदा होगा, बेहतर क्वालिटी की बिजली मिल पाएगी जिससे आर्थिक रूप से भी कहीं ना कहीं फायदा जरूर मिलेगा।<br /><strong> एसके अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता, जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड झालावाड़</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/department-fails-to-recover-in-cases-of-electricity-theft--the-burden-is-on-the-common-consumer/article-13221</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/department-fails-to-recover-in-cases-of-electricity-theft--the-burden-is-on-the-common-consumer/article-13221</guid>
                <pubDate>Wed, 29 Jun 2022 15:44:33 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-06/bijli-chori-ke-maamlo.jpg"                         length="41449"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>23,665 मुकदमों का बोझ है हाईकोर्ट के हर न्यायाधीश पर</title>
                                    <description><![CDATA[स्वीकृत 50 न्यायाधीशों में से 25 जज की मौजूद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--burden-of-23-665-cases-is-on-every-judge-of-the-high-court/article-9123"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/hammer-1707735__340.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश की न्यायपालिका के लंबित मुकदमों की संख्या घटाने के प्रयासों के बावजूद हाईकोर्ट में लंबित मुकदमों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। फिलहाल वर्तमान में हाईकोर्ट की मुख्य पीठ जोधपुर और जयपुर पीठ में कुल पांच लाख 91 हजार 647 मुकदमे लंबित चल रहे हैं। वहीं हाईकोर्ट में एक न्यायाधीश के बीते सोमवार को सेवानिवृत्त होने के बाद अब जजों की संख्या घटकर 25 ही रह गई है। यानि हाईकोर्ट के हर जज पर 23 हजार 665 मुकदमे निस्तारण करने का बोझ है।<br /><br /><strong>आज तक नहीं भरे स्वीकृत पद</strong><br />हाईकोर्ट में वैसे तो जजों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या पचास है, लेकिन आज तक प्रदेश की इस सर्वोच्च अदालत के पूरे स्वीकृत पद कभी भरे ही नहीं गए हैं। वर्तमान में आधे पद खाली चल रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि मुख्य न्यायाधीश का पद भी सीजे अकील कुरैशी के गत माह सेवानिवृत्त होने के बाद खाली पड़ा है। हालांकि व्यवस्था सुचारू रखने के लिए वरिष्ठतम जज एमएम श्रीवास्तव को बतौर एक्टिंग सीजेए सीजे का कार्यभार दे रखा है।<br /><br /><strong>759 मुकदमों को तीस साल से न्याय का इंतजार</strong><br />राजस्थान हाईकोर्ट में 759 मुकदमे ऐसे हैं, जो बीते तीस साल से भी अधिक अवधि से लंबित चले आ रहे हैं। इनमें 199 सिविल और शेष 560 केस आपराधिक प्रकृति के हैं।<br /><br />हाईकोर्ट खुद जता चुका है चिंता<br />लंबित मुकदमों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट भी कई बार चिंता जता चुका है। हाल ही में हाईकोर्ट के समक्ष 13 साल पुराने नरेगा कार्य में आठ हजार रुपए के गबन के मामले में आरोपियों पर आरोप तय नहीं होने का मामला आया था। हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि केस की सुनवाई जल्दी नहीं होनाए संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों का हनन है।<br /><br />न्यायपालिका में जजों की संख्या काफी कम है। ऐसे में एक जज को रोजाना सैकडों मुकदमों की सुनवाई करन पडती है। अदालतों में अवकाश भी काफी अधिक रहते हैं। जिसके चलते मुकदमों की सुनवाई प्रभावित हो रही है।-<strong> राजकुमार गुप्ता, अधिवक्ता, राजस्थान हाईकोर्ट</strong>।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--burden-of-23-665-cases-is-on-every-judge-of-the-high-court/article-9123</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--burden-of-23-665-cases-is-on-every-judge-of-the-high-court/article-9123</guid>
                <pubDate>Wed, 04 May 2022 16:38:24 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-05/hammer-1707735__340.jpg"                         length="20610"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनता पर एक लाख 25 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की महंगाई का बोझ</title>
                                    <description><![CDATA[मोदी सरकार ने 62 करोड़ किसानों से बदला लिया है और डीएपी खाद की कीमत डेड सौ रुपए प्रति बैग बढ़ाकर 1350 रुपए कर दी: सुरजेवाला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/--burden-of-inflation-of-more-than-one-lakh-25-thousand-crore-rupees-on-the-public--bjp-s-election-victory-became-a-license-to-loot--congress/article-7208"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/bjp-congress-logo.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देशभर में आम जनता पर महंगाई की मार दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। कांग्रेस ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने देश के किसानों से आंदोलन का बदला उर्वरक की कीमतें बढ़ाकर लिया है और एक अप्रैल से जनता पर एक लाख 25 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की महंगाई का बोझ डाल दिया है।<br /><br /> कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा है कि मोदी सरकार ने 62 करोड़ किसानों से बदला लिया है और डीएपी खाद की कीमत डेड सौ रुपए प्रति बैग बढ़ाकर 1350 रुपए कर दी है। इसी तरह से एनपीके खाद के बैग में 110 रुपए की वृद्धि कर 1400 रुपए प्रति बैग कर किसानों पर करीब 7500 करोड़ रुपए का वजन डाल दिया है। उन्होंने कहा कि आज 12 दिन में लगातार दसवीं बार पेट्रोल डीजल की कीमतें बढ़ी है और इस तरह से पेट्रोल की कीमतें पिछले 12 दिन में 7.20 पैसे प्रति लीटर बढ़ गई है। उनका कहना था इस वृद्धि से देश की जनता पर 52353 करोड रुपए का अतिरिक्त बोझ डाला गया है।<br /><br /> प्रवक्ता ने कहा कि रसोई गैस के सिलेंडर के दाम 140 रुपए प्रति सिलेंडर से ज्यादा बढ़ाकर सरकार ने 28 हजार करोड़ रुपए से अधिक का बजन जनता पर डाला है। उन्होंने कहा कि एक अप्रैल से सरकार ने पीएफ अकाउंट पर ढाई लाख रुपए से ज्यादा की कमाई पर कर लगा दिया है और आधार तथा पैन कार्ड ङ्क्षलक करने पर भी वसूली शुरु कर दी है। इसी तरह से कार, टीवी, रेफ्रिजरेटर, ऐसी,, एलइडी, मोबाइल आदि के दाम भी बढ़ा दिए है और आम आदमी के जीवन को दूभर बना दिया है।<br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/--burden-of-inflation-of-more-than-one-lakh-25-thousand-crore-rupees-on-the-public--bjp-s-election-victory-became-a-license-to-loot--congress/article-7208</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/--burden-of-inflation-of-more-than-one-lakh-25-thousand-crore-rupees-on-the-public--bjp-s-election-victory-became-a-license-to-loot--congress/article-7208</guid>
                <pubDate>Sat, 02 Apr 2022 15:05:26 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-04/bjp-congress-logo.jpg"                         length="89230"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेट्रोल-डीजल के दामों में दूसरे दिन भी बढ़ोतरी</title>
                                    <description><![CDATA[रसोई गैस के दाम बढ़े जनता की जेब पर 75 करोड़ का भार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/petrol-and-diesel-prices-hiked-for-the-second-day--petrol-87-and-diesel-costlier-by-82-paise--the-price-of-cooking-gas-increased--a-burden-of-75-crores-on-the-pocket-of-the-public/article-6566"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/lpg.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी का सिलसिला एक बार फिर से शुरू होता नजर आ रहा है। मंगलवार को दूसरे दिन भी पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी हुई है। पेट्रोल 87 और डीजल 82 पैसे प्रतिलीटर और महंगा हो गया है। अब जयपुर में पेट्रोल करीब 108.81 रुपए प्रतिलीटर और डीजल 92.35 रुपए प्रतिलीटर हो गया है। प्रदेश में दो दिन में पेट्रोल पर 1.75 रुपए और डीजल पर 1.65 रुपए प्रतिलीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है। आगामी एक पखवाड़े तक बढ़ोतरी जारी रहने की आशंका है। <br /><br /><strong>रसोई गैस के दाम बढ़े जनता की जेब पर 75 करोड़ का भार</strong><br />राजस्थान में रसोई गैस एलपीजी गैस सिलेंडर पर 50 रुपए के दाम बढ़ने से प्रदेश की जनता पर एकदम 75 करोड़ रुपए का भार आएगा। जानकारी के अनुसार प्रदेश में एलपीजी रसोई गैस के करीब 1.50 करोड़ उपभोक्ता है। प्रति परिवार हर माह औसतन एक सिलेंडर की खपत हो रही है। इस हिसाब से प्रदेश में यह आर्थिक भार आमजन की जेब पर आ रहा है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के कारण अभी गैस के दामों में इस माह के अंत में 100 रुपए प्रति घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दामों में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में प्रदेश में इसके बाद गैस सिलेंडर के दाम एक हजार रुपए के पार हो जाएंगे। अभी रसोई गैस सिलेंडर 953.50 पैसे का हो गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/petrol-and-diesel-prices-hiked-for-the-second-day--petrol-87-and-diesel-costlier-by-82-paise--the-price-of-cooking-gas-increased--a-burden-of-75-crores-on-the-pocket-of-the-public/article-6566</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/petrol-and-diesel-prices-hiked-for-the-second-day--petrol-87-and-diesel-costlier-by-82-paise--the-price-of-cooking-gas-increased--a-burden-of-75-crores-on-the-pocket-of-the-public/article-6566</guid>
                <pubDate>Wed, 23 Mar 2022 10:55:50 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-03/lpg.jpg"                         length="40848"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनता उठाएगी भार : प्रदेश सरकार को अडानी कंपनी को देने है 5000 करोड़ रुपए</title>
                                    <description><![CDATA[बिजली बिलों का फ्यूल सरचार्ज देगा करंट : अभी पांच पैसे प्रति यूनिट, अगले तीन साल इसे दस पैसे प्रति यूनिट करने की तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%89%E0%A4%A0%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0---%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%85%E0%A4%A1%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%82%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88-5000-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A5%9C-%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A4%8F/article-2007"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/orange-bulb_light.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर।</strong> केस हारने के बाद अडानी ग्रुप को भुगतान की जाने वाली राशि को राजस्थान की जनता चुकाएगी। जनता से बिजली बिलों में फ्यूल सरचार्ज के नाम पर हो रही वसूली को अगले तीन साल और बढ़ाया जा सकता है। अभी पांच पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से हो रही वसूली को सितम्बर 2022 के बाद दस पैसे प्रति यूनिट होने की संभावना है। अडानी ग्रुप को भुगतान की बड़ी रकम होने के कारण यह वसूली अगले तीन साल तक वसूली जा सकती है। दरअसल, कोयला खरीद मामले में अडानी पावर राजस्थान से केस हारने के बाद ऊर्जा विभाग को मोटे तौर पर अभी पांच हजार करोड़ रुपए का भुगतान और करना पड़ेगा। इस मामले में बिजली कम्पनियां अडानी पावर को इससे पहले 2426 करोड़ का अंतरिम भुगतान कर चुकी हैं। <br /> इसलिए उपभोक्ताओं से पिछले दो सालों से बिलों में वसूली जारी है। भुगतान की वसूली के लिए विद्युत विनियामक आयोग ने गत 13 जून 2019 को डिस्कॉम को वसूली के लिए अधिकृत किया था। डिस्कॉम का 36 किश्तों में वसूला जाने वाला यह पैसा सितम्बर 2019 से लिया जाना जारी है, जो सितम्बर 2022 तक पांच पैसे प्रति यूनिट है। <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> होगी दुगुनी वसूली</strong></span></span><br /> केस हारने के बाद ऊर्जा विभाग को अडानी ग्रुप को करीब पांच हजार करोड़ रुपए और देने है। इसलिए यह भार भी जनता के ऊपर ही आएगा। इसी वजह से विशेष फ्यूल सरचार्ज को पांच पैसे से बढ़ाकर दस पैसे प्रति यूनिट करने पर विचार चल रहा है। यानि सितम्बर 2022 के बाद अगले तीन साल तक दस पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से वसूली होगी। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>फ्यूल सरचार्ज वसूली के लिए भाजपा जिम्मेदार</strong></span></span><br /> फ्यूल सरचार्ज वसूली के पीछे भाजपा जिम्मेदार है। भाजपा सरकार ने जाते जाते अडानी पावर को पैसा देने का फैसला कर दिया था। हमने आते ही चुनौती दी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज हो गई। <br /> -<strong>डॉ. बीडी कल्ला, ऊर्जा मंत्री</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%89%E0%A4%A0%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0---%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%85%E0%A4%A1%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%82%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88-5000-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A5%9C-%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A4%8F/article-2007</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%89%E0%A4%A0%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0---%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%85%E0%A4%A1%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%82%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88-5000-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A5%9C-%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A4%8F/article-2007</guid>
                <pubDate>Sat, 30 Oct 2021 11:50:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2021-10/orange-bulb_light.jpg"                         length="44192"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        