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                <title>हाडौती के टैक्सटाइल, इंजीनियरिंग और कृषि उत्पादों के निर्यात को मिलेगा बढ़ावा</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिटेन से जुड़ेगा कोटा का कारोबार, बढ़ेंगे अवसर व रोजगार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/exports-of-hadauti%E2%80%99s-textile--engineering--and-agricultural-products-to-get-a-boost/article-160020"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)62.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । भारत और ब्रिटेन के बीच लागू होने जा रहे मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट-एफटीए) को देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ राजस्थान के कोटा संभाग के उद्योगों और कृषि क्षेत्र के लिए भी बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस समझौते के तहत ब्रिटेन भारतीय उत्पादों पर लगने वाले अधिकांश आयात शुल्क को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करेगा, जिससे भारतीय उत्पाद ब्रिटेन के बाजार में पहले की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे। इसका सीधा लाभ कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ जिले के निर्यातकों और उद्यमियों को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कोटा संभाग में टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग उत्पाद, स्टोन, मसाले, धनिया, सोयाबीन आधारित उत्पाद, लहसुन, खाद्य प्रसंस्करण और एमएसएमई इकाइयों का मजबूत आधार है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन में भारतीय उत्पादों के लिए शुल्क कम होने से इन क्षेत्रों के उत्पादों की मांग बढ़ सकती है। इससे स्थानीय उद्योगों को नए आॅर्डर मिलने के साथ उत्पादन और निवेश में भी वृद्धि होगी।</p>
<p><strong>विदेश में महकेगी यहां के मसालों की खुशबू</strong><br />कोटा देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में शामिल है। यहां इंस्ट्रूमेंटेशन, इंजीनियरिंग उपकरण, केबल, विद्युत उपकरण, मशीन पार्ट्स और विभिन्न मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां कार्यरत हैं। एफटीए के बाद इन उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार तक अपेक्षाकृत कम लागत में पहुंचाने का अवसर मिलेगा। वहीं बारां और झालावाड़ जैसे कृषि प्रधान जिलों में उत्पादित धनिया, मसाले, सोयाबीन और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। उद्योग जगत का मानना है कि यह समझौता केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को भी वैश्विक बाजार से जुड़ने का अवसर देगा। निर्यात बढ़ने से उत्पादन क्षमता का विस्तार होगा और इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इस समझौते से परिवहन, पैकेजिंग, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।</p>
<p><strong>अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोटा संभाग की बनेगी पहचान</strong><br />आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता कोटा संभाग के उद्योग, कृषि और एमएसएमई क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोल सकता है। यदि स्थानीय उद्योग आधुनिक तकनीक, गुणवत्ता सुधार और नियार्तोन्मुख उत्पादन पर ध्यान दें तो आने वाले समय में कोटा संभाग अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ब्रिटेन जैसे विकसित बाजार में टिके रहने के लिए स्थानीय उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों, आधुनिक पैकेजिंग, प्रमाणन और समयबद्ध आपूर्ति पर विशेष ध्यान देना होगा। यदि उद्योग समय रहते अपनी उत्पादन प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार करते हैं तो आने वाले वर्षों में कोटा संभाग का निर्यात उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकता है।</p>
<p><strong>आम लोगों को क्या फायदा होगा?</strong><br />-ब्रिटिश लग्जरी कारें होंगी सस्ती: रॉल्स-रॉयस, लैंड रोवर, जगुआर जैसी ब्रिटिश कारों पर आयात शुल्क चरणबद्ध तरीके से कम होने से इनकी कीमतों में आने वाले वर्षों में कमी आ सकती है।<br />-रोजगार के अवसर बढ़ेंगे: कोटा संभाग में इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, कृषि प्रसंस्करण और एमएसएमई इकाइयों को नए निर्यात आॅर्डर मिलने पर उत्पादन बढ़ेगा, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।<br />-किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना: कोटा, बारां और झालावाड़ के धनिया, सोयाबीन, मसाले और अन्य कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ने पर किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिलने की उम्मीद रहेगी।<br />-स्थानीय कारोबार को मिलेगा बढ़ावा: निर्यात बढ़ने से परिवहन, पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स और छोटे व्यापारियों के काम में भी तेजी आएगी।<br />-विदेश में नौकरी और प्रोफेशनल्स को फायदा: भारतीय इंजीनियर, आईटी विशेषज्ञ, चार्टर्ड अकाउंटेंट, आर्किटेक्ट और अन्य पेशेवरों के लिए ब्रिटेन में काम करने के अवसर बढ़ सकते हैं। इससे कोटा जैसे शिक्षा केंद्र के विद्यार्थियों को भी भविष्य में नए अवसर मिलेंगे।<br />-कुछ आयातित उत्पाद सस्ते हो सकते हैं: ब्रिटेन से आने वाले कुछ कॉस्मेटिक्स, चॉकलेट, प्रीमियम फूड आइटम, मेडिकल उपकरण और अन्य उत्पादों की कीमतों में भी समय के साथ कमी आ सकती है।</p>
<p>भारत-ब्रिटेन एफटीए निर्यातकों के लिए बड़ा अवसर है। कोटा संभाग के व्यापार जगत के लिए यह समझौता काफी लाभकारी साबित हो सकता है। यहां की इंजीनियरिंग, एमएसएमई इकाइयों सहित अन्य उद्योगों को ब्रिटेन में नए बाजार मिल सकेंगे।<br /><strong>-अशोक माहेश्वरी, महासचिव, कोटा व्यापार महासंघ</strong></p>
<p>ब्रिटेन में शुल्क कम होने से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। इससे कोटा के उद्योगों को नए आॅर्डर मिलने और उत्पादन बढ़ाने का अवसर मिलेगा। यहां की सामग्री को निर्यात में छूट मिलने से मंद हो रहे कई उद्योग को संजीवनी मिल सकती है।<br /><strong>-भूपेन्द्र सोनी, उद्योगपति व व्यापारी</strong></p>
<p>कोटा, झालावाड़ और बारां क्षेत्र में मसाले, धनिया और सोयाबीन का अच्छा उत्पादन होता है। यदि इन उत्पादों की प्रोसेसिंग और गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए तो ब्रिटेन सहित यूरोपीय बाजार में अच्छी मांग मिल सकती है।<br /><strong>-आर.के. शर्मा, कृषि विशेषज्ञ</strong></p>
<p>एफटीए का वास्तविक लाभ उन्हीं उद्योगों को मिलेगा जो अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता, पैकेजिंग और प्रमाणन के मानकों का पालन करेंगे। यह समझौता निर्यातकों के लिए दीर्घकालिक अवसर लेकर आया है।<br /><strong>-रोहित जैन, सीए व निर्यात सलाहकार</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:00:24 +0530</pubDate>
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                <title>नेस्ले में क्वॉलिटी समस्या, कंपनी ने वापस मंगाए उत्पाद</title>
                                    <description><![CDATA[यह रिकॉल दिसंबर में शुरू हुआ था। ऑस्ट्रिया के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इससे 10 से अधिक फैक्ट्रियों के 800 से ज्यादा उत्पाद प्रभावित हुए हैं, जिसे नेस्ले का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉल बताया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/quality-problem-in-nestle-company-recalled-products/article-138645"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/6622-copy10.jpg" alt=""></a><br /><p>कैनबरा। नेस्ले ने यूरोप के कई देशों में बच्चों के उत्पादों के दूध के कुछ बैच क्वॉलिटी समस्या के चलते वापस मंगाए हैं। कंपनी के अनुसार सप्लायर से जुड़ी गड़बड़ी सामने आई है, जिसके बाद SMA, BEBA और NAN फॉर्मूला की जांच की जा रही है।</p>
<p>रिपोर्ट्स के मुताबिक इनमें संभावित रूप से जहरीला तत्व हो सकता है, जिससे उल्टी और मतली की आशंका है। हालांकि अब तक किसी बीमारी की पुष्टि नहीं हुई है। यह रिकॉल दिसंबर में शुरू हुआ था। ऑस्ट्रिया के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इससे 10 से अधिक फैक्ट्रियों के 800 से ज्यादा उत्पाद प्रभावित हुए हैं, जिसे नेस्ले का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉल बताया गया है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 09:56:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>ट्रम्प ट्रैरिफ : हाड़ौती में 500 करोड़ का निर्यात गड़बड़ाया</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका में करीब 50 लाख से अधिक भारतीय, टैरिफ बढ़ने से महंगे मिलेंगे उत्पाद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/trump-tariff--exports-worth-rs-500-crore-in-hadoti-affected/article-125257"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/54.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर 50 फीसदी ट्रैरिफ लगाने से जहां देशभर से अमेरिका को होने वाले भारतीय उत्पादों का निर्यात प्रभावित होगा। वहीं इसका हाड़ौती संभाग पर भी सीधा असर पड़ेगा। यहां से अमेरिका को भेजे जाने वाले उत्पादों का निर्यात कम होगा। जिससे करीब 500 करोड़  का कारोबार प्रभावित होने का अनुमान है। हाड़ौती संभाग के चारों जिलों में कई उत्पाद ऐसे हैं जिनकी अमेरिका में काफी डिमांड रहती है। अमेरिका में रहने वाले करीब 50 लाख से अधिक भारतीय उन स्थानीय उत्पादों का उपयोग भी करते हैं। उन उत्पादों को भारत सरकार के माध्यम से अमेरिका में निर्यात किया जाता है। लेकिन हालत यह है कि पहले जहां अमिरिका द्वारा भारत पर 25 फीसदी ही टैरिफ लगाया हुआ था। वहीं उसे बढ़ाकर अब 50 फीसदी कर दिया है। इससे अमेरिका में निर्यात होने वाले भारतीय उत्पादों की जहां कीमत तो अधिक होगी ही साथ ही महंगी होने से वहां इन उत्पादों की मांग कम होने से निर्यात पर इसका सीधा असर पड़ेगा।  हालांकि भारत सरकार द्वारा टैरिफ का तोड़ निकालते हुए स्थानीय बाजार व अन्य देशों को निर्यात करने की योजना बनाई गई है। लेकिन उसमें समय लगने से निर्यात कम होने से हर उत्पाद का बाजार प्रभावित हुआ है। </p>
<p><strong>सबसे अधिक कोटा स्टोन व सेंड स्टोन उद्योग पर असर</strong><br />कोटा का कोटा स्टोन व डाबी का सेंड स्टोन उच्च क्वा लिटी का होने से इसकी डिमांड अमेरिका समेत अन्य देशो में अधिक है। ऐसे में अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाने से न तो कोटा स्टोन का निर्यात हो सकेगा और न ही सेंड स्टोन का। उद्यमियों के अनुसार इससे दोनों का सालाना निर्यात करीब 100-100 करोड़ का होता है। जिससे कोटा संभाग से करीब 200 करोड़ का पत्थर उद्योग प्रभावित होगा। </p>
<p><strong>मसाले व चावल उद्योग प्रभावित</strong><br />बूंदी व रामगंजमंडी में सबसे अधिक उच्च क्वालिटी का चावल पैदा होता है। जिसकी अमेरिका में सबसे अधिक डिमांड है। वहीं झालावाड़ व मंडी के धनिया की अमेरिका में अधिक खपत होती है। इसी तरह से कोटा में बनने वाला आशीर्वाद आटा भी सबसे अधिक अमेरिका में रहने वाले भारतीयों द्वारा उपयोग किया जाता है। ऐसे में करीब 100 करोड़ से अधिक के इन कृषि उत्पादों का हाड़ौती संभाग से निर्यात प्रभावित होगा।</p>
<p><strong>कैमिकल का निर्यात भी होगा कम</strong><br />हाड़ौती में करीब आधा दर्जन से अधिक कैमिकल उद्योग है। इन उद्योगों में तैयार होने वाला कैमिकल भी काफी मात्रा में अमेरिका में निर्यात होता है। अमेरिका के ट्रम्प टैरिफ का संभाग के कैमिकल उद्योग पर भी असर पडेÞगा। उद्यमियों के अनुसार करीब 100 करोड़ से अधिक का कैमिकल यहां से हर साल निर्यात किया जाता है। इनके अलावा भी कई ऐसे उत्पाद हैं जिनका हाड़ौती के चारों जिलों से कम मात्रा में ही सही निर्यात होता है। टैरिफ बढ़ने से ये सभी चीजें अमेरिका में तो महंगी होंगी ही। साथ ही इनका निर्यात करना भी महंगा हो जाएगा। ऐसे में यहां से होने वाला निर्यात प्रभावित होगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अमेरिका में करीब 50 लाख से अधिक भारतीय निवास कर रहे है। वे सभी अधिकतर भारत में तैयार सामानों का ही उपयोग करते हैं। हाड़ौती से कोटा स्टोन, सैंड स्टोन, धनिया,मसाले व आटा निर्यात किया जाता है। टैरिफ बढ़ाने से ये सभी वस्तुएं महंगी होने से वहां उनकी खपत कम होगी। साथ ही निर्यात भी प्रभावित होगी। सभी उद्योगों  का 400 से 500 करोड़ का निर्यात प्रभावित होने का अनुमान है।  <br /><strong>- अशोक माहेश्वरी, महासचिव कोटा व्यापार महासंघ</strong></p>
<p>अमेरिका द्वारा भारत पर दो गुना टैरिफ लगाना गलत है। इससे कोटा संभाग ही नहीं पूरे देश का निर्यात उद्योग प्रभावित होगा। हाड़ौती से भी कई उत्पादों का अमेरिका में निर्यात होता है। टैरिफ बढ़ने से निर्यात करना महंगा होगा। साथ ही वहां रहनगे वाले भारतीयों को भी अधिक महंगे दाम में वस्तुएं मिलेंगी तो लोग भारत की वस्तुओं को कम खरीदेंगे। हालांकि भारत सरकार के स्तर पर इसमें सुधार के प्रयास किए जा रहे है। लेकिन उसमें समय लगेगा।<br /><strong>- अंकुर गुप्ता, अध्यक्षलघु उद्योग भारती</strong></p>
<p>हाड़ौती से केवल कोटा स्टोन व सेंड स्टोन ही अमेरिका को निर्यात नहीं होता है। यहां के मसाले, चावल व आटा समेत कई ऐसे उत्पाद हैं जिनकी  अमेरिका में काफी अधिक खपत है। कोटा संभाग से भी बड़ी संख्या में लोग वहां रहते है। वे केवल यहां के चावल व आटे का ही उपयोग करते है। टैरिफ अधिक होने से अब वे अन्य देशों के सामान खरीदेंगे तो हाड़ौती के उद्योगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।<br /><strong>- राजेन्द्र जैन, अध्यक्ष हाड़ौती ग्रामीण उद्योग संघ </strong></p>
<p>कोटा स्टोन व सेंड स्टोन सबसे अधिक निर्यात होता है। इनकी क्वालिटी व फिनिशिंग बेहतर होने से इनकी अमेरिका में डिमांड रहती है। हाड़।ती के कई अन्य उत्पाद भी टैरिफ अधिक होने से अमेरिका को भेजना महंगा होगा। साथ ही वहां रहने वालों के  लिए खरीदना भी महंगा होगा। ऐसे में ये वस्तुएं जिन देशों की सस्ती होंगी वहां की खरीदी जाएंगी। अमेरिका में डिमांड व खपत कम होने का सीधा असर निर्यात पर पड़ेगा। अमेरिका में निर्यात कम होने से भारत में उनकी खपत का प्रयास तो किया जा रहा है लेकिन टैरिफ बढ़ाने से निर्यात पर तो सीधा असर पड़ेगा। <br /><strong>- राकेश पाटौदी, अध्यक्ष स्टोन मर्चेंट विकास समिति</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Aug 2025 17:20:05 +0530</pubDate>
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                <title>एआई समेत हाई टेक प्रोडक्ट्स में चीन की भारी बढ़त, 10 सालों में हासिल की महारात </title>
                                    <description><![CDATA[सूत्रों ने बताया कि चीन के इस रेस से पश्चिमी देशों में गरही चिंता है और वे इससे मुकाबले का उपाय ढूंढ़ रहे हैं। 2015 में चीन की सरकार ने मेड इन चाइना 2025 प्लान की घोषणा की थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-gained-a-huge-lead-in-high-tech-products-including/article-103652"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/china-flag2.png" alt=""></a><br /><p>लंदन। चीन के चैटबॉट डीपसीक ने दुनिया को हैरान कर दिया है, लेकिन चीन पर नजर रखने वालों के लिए इसमें हैरानी जैसा कुछ भी नहीं है। चीन बीते 10 साल से धीरे-धीरे एआई समेत हाई टेक प्रोडक्ट्स में महारत हासिल कर रहा है। ये चीन के बेहद महत्वाकांक्षी मेड इन चाइना 2025 प्लान का एक हिस्सा है। चीन उच्च तकनीक से जुड़े हर क्षेत्र में आगे निकलने की कोशिश में वर्ष 2015 में ही जुट गया था और अब उसकी कोशिशें रंग ला रही हैं। अमेरिका, ब्रिटेन और जापान कार बेचने के मामले में भी चीन से पिछड़ गए हैं। कुछ समय पूर्व ही ऑटोमोबाइल के उत्पादन और सेल पर जापान का दबदबा था। सूत्रों ने बताया कि चीन के इस रेस से पश्चिमी देशों में गरही चिंता है और वे इससे मुकाबले का उपाय ढूंढ़ रहे हैं। 2015 में चीन की सरकार ने मेड इन चाइना 2025 प्लान की घोषणा की थी।</p>
<p>इसके पीछे आइडिया यह था कि हर दिन इस्तेमाल होने वाली लाखों चीजों के मामले में हाई क्वालिटी और हाई टेक सुप्रीमेसी स्थापित की जाए। चीन ने साल 2025 तक इस मामले में सबसे आगे रहने के विचार के साथ टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के 10 क्षेत्रों को चुना और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, इलेक्ट्रिकल कार, रिन्यूएबल एनर्जी और बैटरी टेक्नोलॉजी को डॉक्यूमेंट्स में जगह दी गई। कुछ क्षेत्रों में चीन ने सफलता हासिल की है और वो बड़ा प्लेयर बन गया है और कुछ मामलों में उसे बड़ी सफलता मिली है।  लंदन में डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स की एक्सपर्ट डॉक्टर युनदन गोंग की नजर में मेड इन चाइना 2025 प्रोजेक्ट कामयाब रहा है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में चीन आगे बढ़ रहा है और कुछ क्षेत्रों में चीन ने बढ़त बना रखी है। जर्मनी, जापान और अमेरिका को पछाड़ते हुए चीन कार बेचने के मामले में सबसे आगे निकल गया है। इसका श्रेय इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली कंपनी बीवाईडी को जाता है। ईवी की कामयाबी चीन के साथ जुड़ी हुई है और वह दुनिया का सबसे ज्यादा बैटरी बनाने वाला देश भी बन गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Feb 2025 12:03:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>कोटा में चल रहा सफेद दूध का काला खेल</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में जितना भी दूध खुला बिक रहा है उसमें से लगभग 10 प्रतिशत दूध नकली है। एक अनुमान के अनुसार पूरे कोटा शहर में इस समय कोटा डेयरी या अन्य डेयरी से रोजना लगभग 75000 से 1 लाख लीटर पैक दूध बिकता है और लगभग 20 से 25 हजार लीटर खुला दूध बिकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/black-game-of-white-milk-going-on-in-kota/article-46401"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/kota-mein-chal-raha-safed-doodh-ka-kala-khel...kota-news-23-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर में बड़ी मात्रा में धडल्ले से नकली दूध बेचा जा रहा है लेकिन खाद्य विभाग और स्वास्थ्य की रक्षा का दावा करने वाला स्वास्थ्य विभाग इस मामले को लेकर चुप बैठा है। स्वास्थ्य विभाग ने साल भर में मात्र 125 नमूने लिए हैं जो विभाग की उदासीनता को दर्शाता है। हाल ही कोटा डेयरी ने लगभग 3500 लीटर नकली दूध पकड़कर उसे नष्ट किया था। जो इस बात की गवाही दे रहा है कि शहर में रोजाना हजारों लीटर नकली दूध बेचा जा रहा है। लोग इस दूध को काम में लेकर  गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे है। लेकिन ना तो चिकित्सा विभाग और ना ही रसद विभाग शहर में बिक रहे नकली दूध को लेकर गंभीर बना हुआ है। शहर के ही एक ख्ुाले दूध विक्रेता ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि शहर में जितना भी दूध खुला बिक रहा है उसमें से लगभग 10 प्रतिशत दूध नकली है। अभी हाल ही में कोटा डेयरी में लगभग 3500 लीटर नकली दूध पकड़कर उसे नष्ट किया गया था। जिसके बाद ये सवाल उठने लगा है कि यहां तो आधुनिक जांच उपकरण होने के कारण असली और नकली में अन्तर करके नकली को नष्ट कर दिया गया लेकिन जो दूध खुला बेचा रहा है उसकी गुणवत्ता की क्या गारन्टी है। खुला दूध बचने वालों में से एक का कहना है कि नकली दूध कभी सीधा नहीं बेचा जाता है उसे या तो असली के साथ मिलाकर या उसका कोई प्रोडक्ट बनाकर बेचा जाता है। </p>
<p><strong>सवा लाख लीटर दूध की प्रति दिन बिक्री</strong><br />एक अनुमान के अनुसार पूरे कोटा शहर में इस समय कोटा डेयरी या अन्य डेयरी से रोजना लगभग 75000 से 1 लाख लीटर पैक दूध बिकता है और लगभग 20 से 25 हजार लीटर खुला दूध बिकता है। पैक दूध को लेकर ये दावा किया गया है कि कोटा डेयरी में कभी भी नकली दूध नहीं आ सकता है। अगर आता भी हैं तो कुछ मिनटों में ही पकड़ लिया जाता है। कारण उसका ये है कि आधुनिक जांच उपकरण लगे होने के कारण कोई भी व्यक्ति डेयरी में नकली या बना हुआ दूध नहीं ला सकता है। इसलिए डेयरी का दूध अपनी गुणवत्ता पर खरा उतरता है लेकिन खुले दूध की गुणवत्ता की कोई गारन्टी नहीं है। </p>
<p><strong>नकली पकड़ना मुश्किल </strong><br />वहीं खुला दूध बचने वाले नामा डेयरी के मालिक उमाशंकर नामा का कहना है कि शहर में रोजाना करीब 40 से 50 हजार लीटर दूध बिकने को आता है जबकि मांग लगभग आधी है। मांग के ज्यादा ही दूध की सप्लाई होती है। नामा का कहना है कि शहर में नकली दूध ना के बराबर आता है और आता भी है तो इसे पकड़ना बहुत मुश्किल होता है। क्योंकि सीधा नकली दूध कभी नहीं बिकता है। या तो उसे असली दूध में मिलाकर बेचा जाता है या कोई दूध का उत्पाद बनाकर बेचा जाता है। </p>
<p><strong>ऐसे बनता है सिंथेटिक दूध</strong><br />सिथेंटिक दूध बनाने के लिए सबसे पहले उसमें यूरिया डालकर उसे हल्की आंच पर उबाला जाता है। इसके बाद इसमें कपड़े धोने वाला डिटर्जेंट, सोडा स्टार्च, फॉरेमैलिन और वाशिंग पाउडर मिलाया जाता है। इसके बाद इसमें थोड़ा असली दूध भी मिलाया जाता है। सिंथेटिक दूध पीने से फूड पॉयजनिंग हो सकती है। उल्टी और दस्त की शिकायत हो सकती है। किडनी और लीवर पर भी बेहद बुरा असर पड़ता है। स्किन से जुड़ी बीमारी भी हो सकती है।</p>
<p><strong>यह अन्तर होता है असली और नकली दूध में</strong><br />सिंथेटिक दूध में साबुन जैसी गंध आती है जबकि असली दूध में कुछ खास गंध नहीं आती। असली दूध का स्वाद हल्का मीठा होता है, नकली दूध का स्वाद डिटर्जेंट और सोडा मिला होने की वजह से कड़वा हो जाता है। असली दूध स्टोर करने पर अपना रंग नहीं बदलता, नकली दूध कुछ वक्तके बाद पीला पड़ने लगता है। अगर असली दूध में यूरिया भी हो तो ये हल्के पीले रंग का ही होता है, वहीं अगर सिंथेटिक दूध में यूरिया मिलाया जाए तो ये गाढ़े पीले रंग का दिखने लगता है। असली दूध को हाथों के बीच रगड़ने पर कोई चिकनाहट महसूस नहीं होती। वहीं, नकली दूध को अपने हाथों के बीच रगड़ेंगे तो डिटर्जेंट जैसी चिकनाहट महसूस होगी।</p>
<p><strong>चिकित्सकों का कहना है</strong><br />खाने की चीजों में मिलावट से फूड प्वाइजनिंग से लेकर कैंसर तक बीमारियां हो सकती हैं। स्किन डिजीज स्टमक डिजीज हो सकती है। लगातार मिलावटी खाना खाने से कैंसर भी हो सकता। नकली मावा तो मिठाई में इस्तेमाल होता है। असली और नकली मिठाई में पहचान करना मुश्किल है। इसका रंग नहीं बदलता, वहीं नकली दूध उबालने पर पीले रंग का हो जाता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कोटा में गत वर्ष लगभग 125 नमूने दूध की जांच के लिए गए है। इनमें से एक में भी सिंथेटिक दूध नहीं मिला है। कोटा में चल प्रयोगशाला में दूध की तुरन्त जांच हो सकती है लेकिन केवल यूरिया की क्योंकि अन्य घटकों की तुरन्त जांच संभव नहीं है। दूध की जांच के लिए विभाग की ओर से सालभर नमूने लिए जाते हैं। <br /><strong>-खाद्य सुरक्षा अधिकारी, कोटा। </strong></p>
<p>डेयरी में अभी हाल ही में पहली बार मिलावटी दूध का मामला सामने आया था। वरना डेयरी में एक लीटर दूध भी नकली नहीं आता है। यहां जो आॅटोमेटिक लैब मशीनें लगी हुई है उनसे इस बात की भी पुष्टि हो जाती है कि इस दूध में कितना पानी कब मिलाया गया है। इसके अलावा डेयरी की जो समितियां दूध एकत्रित करती है वहां पर भी टेस्टिंग मशीनें लगाई गई हैं। वहां जांच करने के बाद डेयरी में फिर दूध की जांच की जाती है। <br /><strong>-चैन सिंह राठौड़, अध्यक्ष, कोटा डेयरी। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 May 2023 14:12:43 +0530</pubDate>
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                <title>यूक्रेन पर रूस के हमले के इफेक्ट: कनाडा ने किराना स्टोर से हटाये रूसी उत्पाद</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी उत्पादों के कनाडाई किराना दुकानों से हटने से रूस की अर्थव्यवस्था पर इसका ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7/effects-of-russia-s-attack-on-ukraine--canada-removes-russian-products-from-grocery-stores/article-6920"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/stop.jpg" alt=""></a><br /><p>ओटावा। रूस के यूक्रेन में विशेष सैन्य अभियान की शुरुआत तथा उस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद कनाडा ने अपने किराना स्टोर से रूसी उत्पादों को हटाना शुरू कर दिया है।  एम्पायर कंपनी लिमिटेड के प्रवक्ता जैकलिन वेदरबी के हवाले से बताया कि किराना उत्पाद बेचने वाली सोबीज, सेफवे और फ्रेशको जैसी दुकानों ने रूसी उत्पादों को मार्च की शुरुआत से ही दुकानों से हटाना शुरू कर दिया था। <br /><br />द ग्लोब एंड मेल ने मेट्रो इंक के प्रवक्ता मैरी-क्लाउड बेकन के हवाले से बताया कि इस महीने की शुरुआत में ही मेट्रो इंक ने अपनी दुकान से करीब एक दर्जन से ज्यादा रूसी उत्पादों को बाहर निकालने के बाद रूसी उत्पाद बेचना बंद कर दिया था। लोबलो कंपनी के प्रवक्ता कैथरीन थॉमस ने बताया कि उसकी दुकानों से भी रूसी उत्पाद लगभग पूरी तरह हटाये जा चुके हैं। कनाडा में रूसी उत्पाद कम ही बेचे जाते रहे हैं जिसमें सुरजमूखी के बीज, क्वास माल्ट बियर, और चॉकलेट से ढके मार्शमॉलो शामिल हैं। ऐसे में रूसी उत्पादों के कनाडाई किराना दुकानों से हटने से रूस की अर्थव्यवस्था पर इसका ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Mar 2022 18:25:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> किसानों की आय बढ़ाने के लिए राजस्थान स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज डवलपमेंट बोर्ड होगा गठित, दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मुद्दा,  'बाय प्रोडक्टस' बदल देगी किसानों की किस्मत! शिर्षक नाम से खबर की थी प्रकाशित </title>
                                    <description><![CDATA[इस विषय पर दैनिक नवज्योति ने किसानों, मंडी व्यापारियों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों से जाना था कि यदि बंपर फसल की स्थिति में उससे संबंधित बाय प्रोडक्ट इंडस्ट्री लग जाए तो क्या इस समस्या का हल होगा? साथ ही बताया था कि बाय प्रोडक्टस के लिए नए प्रयोग होने चाहिए।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%AF-%E0%A4%AC%E0%A5%9D%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%8F%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B-%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%9C-%E0%A4%A1%E0%A4%B5%E0%A4%B2%E0%A4%AA%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%9F-%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A4%A0%E0%A4%BF%E0%A4%A4--%E0%A4%A6%E0%A5%88%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%89%E0%A4%A0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A5%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%BE----%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%AF-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%B8--%E0%A4%AC%E0%A4%A6%E0%A4%B2-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%A4--%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%96%E0%A4%AC%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A5%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%A4/article-4103"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/adgasf.jpeg.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य में कृषि विपणन तंत्र को मजबूत कर किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से राजस्थान स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज डवलपमेंट बोर्ड का गठन होगा। यह बोर्ड किसानों की आय बढ़ाने के लिए ठोस नीति बनाने एवं इसके प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में सुझाव देगा। साथ ही प्रदेश के अधिकाधिक किसानों को एग्रो-प्रोसेसिंग एवं मूल्य संवर्धन से जोड़ने के लिए रुपरेखा तैयार करेगा। </p>
<p>दैनिक नवज्योति ने किसानों के मुद्दे उठाते हुए प्रमुखता से 'बाय प्रोडक्टस' बदल देगी किसानों की किस्मत! शिर्षक से ख़बर प्रकाशित की थी। ख़बर में इस बात को उठाया गया था कि प्रकृति और सरकार के बीच किसान का भविष्य और फसल के भंडारण की किसानों के पास कोई सुविधा नहीं थी। इस विषय पर दैनिक नवज्योति ने किसानों, मंडी व्यापारियों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों से जाना था कि यदि बंपर फसल की स्थिति में उससे संबंधित बाय प्रोडक्ट इंडस्ट्री लग जाए तो क्या इस समस्या का हल होगा? साथ ही बताया था कि बाय प्रोडक्टस के लिए नए प्रयोग होने चाहिए। </p>
<p><br />गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में बुधवार को सीएमआर से वीसी के जरिए हुई कैबिनेट की बैठक बोर्ड गठन को मंजूरी दी गई। सरकार ने कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, व्यवसाय एवं निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात नीति-2019 लागू की थी। इस नीति के बाद राज्य में उत्पादित कृषि जिन्सों जैसे- जीरा, धनिया, लहसुन, ईसबगोल, अनार, खजूर, प्याज आदि के निर्यात को बढ़ावा देने तथा इनकी अंतर्राष्टÑीय स्तर पर पहचान सुनिश्चित करने की दिशा में इस बोर्ड का गठन राज्य सरकार का एक और बड़ा कदम होगा। कैबिनेट ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी भागीदारी को प्रोत्साहन देने के उदेश्य से व्यास विद्यापीठ विश्वविद्यालय, जोधपुर विधेयक-2021 के प्रारूप का अनुमोदन किया है। अब यह विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा और विधेयक के पारित होने से इस विश्वविद्यालय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त होगा।<br /><br /><br /><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Fri, 21 Jan 2022 14:52:21 +0530</pubDate>
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                <title>गांवों में बनेंगी मॉडल सड़कें और कचरे से खाद, सामुदायिक शौचालय, महिलाओं के बनाए उत्पाद बिकेंगे मॉल्स में : मीणा</title>
                                    <description><![CDATA[मंत्री का दावा: ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग में जल्दी दिखेंगे कई बदलाव, कचरे और ड्रेनेज व्यवस्था में बदलाव कर खाद भी बनाएंगी पंचायतें]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%89%E0%A4%A1%E0%A4%B2-%E0%A4%B8%E0%A5%9C%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%9A%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%A6--%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%B6%E0%A5%8C%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF--%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%8F-%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A6-%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%89%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82---%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A3%E0%A4%BE/article-3294"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/ramesh-meena.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग में पिछले एक साल में हुए कार्यों पर नजर डालें तो ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं पर कई योजनाओं का पैसा खर्च हुआ है। कोरोनाकाल की वजह से नरेगा, राजीविका, वाटरशेड सहित कई योजनाओं में कुछ मद चाहकर भी खर्च नहीं हो पाया। </p>
<p><br />इस राशि से विभाग आगामी दिनों में नए सिरे से खर्च करने का खाका तैयार कर रहा है। पंचायतीराज मंत्री रमेश मीणा ने दावा किया है कि गांवों में जल्दी ही मॉडल सड़कें, शहरी तर्ज पर शौचालय, महिला समूहों के उत्पादों का शहरी मॉल्स में बिकना, ग्रामीण युवाओं को रोजगार, बेहतर जल प्रबंधन नजर आएंगे। <br /><br /><strong>सरकार के तीन साल होने पर पंचायतीराज मंत्री रमेश मीणा से दैनिक नवज्योति ने की खास बातचीत</strong><br />    पिछले एक साल में सरकार की योजनाओं का ग्रामीण क्षेत्रों में कितना असर रहा और लोगों तक कितना फायदा पहुंचा।<br />जवाब: राज्य सरकार ने कई नीतिगत निर्णय लेकर क्रियान्वयन किया। नरेगा, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण, जलग्रहण और भू संरक्षण, शौचालय निर्माण, आवास निर्माण, सड़क, बिजली, पानी आदि में खूब काम कराए। प्रशासन गांव के संग अभियान में चारागाह भूमि पर भी लोगों को पट्टे मिले। कोरोनाकाल में जरूर कुछ काम बाधित हुए, लेकिन विधायकों के फंड से ग्रामीण क्षेत्रों में खूब काम कराए गए। </p>
<p><br />    केन्द्र और राज्य की कई योजनाओं के काम भी अटके रहे, ये कब पूरे होंगे।<br />जवाब: यह सही है कि कोरोना के चलते केन्द्र और राज्य की कई योजनाओं का काम पूरी तरह धरातल पर नहीं हो पाया। कुछ केन्द्रीय योजनाओं का पैसा समय से नहीं मिलने के कारण भी परेशानी हुई। कोरोनाकाल के दौरान वित्तीय प्रबंधन के दौरान कुछ कार्यों की रफ्तार कम हुई तो उन्हें अब गति दी जाएगी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कम रफ्तार वाले कार्यों पर खुद सजग हैं। </p>
<p><br />    पिछले एक साल में हुए कार्यों में वित्तीय संकट जैसे अडंगों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाएंगे।<br />जवाब: कोरोनाकाल के दौरान कई योजनाओं के मद का पैसा रोका गया था। अब इस पैसे को ढंग से उपयोग के लिए प्लानिंग चल रही है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद विभागीय अफसर अलग-अलग मदों के पैसे का आंकलन कर रहे हैं। कन्वर्जेंस के माध्यम से यह पैसा अटके कार्यों पर खर्च किया जाएगा। </p>
<p><br />    किस तरह के बदलाव नजर आएंगे और इनके लिए क्या प्लानिंग की जा रही है।<br />जवाब: एमएलए और एमपी लैड स्कीम, वित्त आयोगों की राशि, केन्द्र और राज्य प्रवर्तित योजनाओं के सभी मदों में खर्च और अवशेष राशि का डाटा तैयार किया जा रहा है। इस पैसे को कन्वर्जेंस माध्यम से खर्च कर गांव में मॉडल सड़कें, गांव के कचरे और ड्रेनेज से खाद बनाने, राजीविका के तहत महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को और अधिक रोजगार से जोडने, नरेगा, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण, वाटरशेड, जल जीवन मिशन आदि योजनाओं के अधूरे कार्यो पूरा करेंगे। तैयार प्लान को मुख्यमंत्री के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।</p>
<p><br />    शहरी तर्ज पर विकास की बात कही, किस तरह से विकास करेंगे।<br />जवाब: पीडब्ल्यूडी से कन्वर्जेंस के माध्यम से एक दूसरे गांव को जोड़ने के लिए मॉडल सड़कें बनाएंगे। शहरी तर्ज पर सामुदायिक शौचालय बनाएंगे। गांवों में कचरे और ड्रेनेज व्यवस्था में बदलाव कर मेकेनाइज्ड सिस्टम से खाद बनाएंगे। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के रोजगार को बढ़ावा देने के लिए उत्पादों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इन महिलाओं के उत्पाद शहरों के बड़े नामी गिरामी मॉल्स में बेचे जाएंगे। वाटर रिसोर्स के कार्यों को इस तरह विकसित किया जाएगा कि बारिश के पानी को सहेज कर ग्रामीणों को सालभर पानी उपलब्ध हो सके। नरेगा में रोजगार को बढ़ावा देने पर हमारा फोकस और ज्यादा रहेगा। <br /><br />विभाग की प्रमुख उपलब्धियां<br />    राजीव गांधी जल संचय योजना के तहत हजारों गांव में जल संरक्षण के कार्य।<br />    प्रशासन गांव के संग अभियान में करीब नौ लाख पट्टे वितरित।<br />    पेयजल योजना में 16 हजार से ज्यादा काम।<br />    साढ़े तीन लाखे ज्यादा जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी।<br />    78 हजार से ज्यादा शौचालय निर्माण का भुगतान किया।<br />    भूमिहीन परिवारों को 15,716 पट्टे जारी।<br />    25,297 बीपीएल परिवारों को निशुल्क भूखण्ड आवंटन, 16,348 पात्र व्यक्तियों को रियायती दर पर भूखंड मिला।<br />    जलग्रहण क्षेत्रों की 3580 हैक्टेयर बंजर भूमि में पौधारोपण।<br />    कोरोनाकाल में ग्रामीणों के पलायन के चलते 22 जिलों में गरीब कल्याण रोजगार <br />अभियान चलाया।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 17 Dec 2021 14:22:04 +0530</pubDate>
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                <title>जीएसटी चोरी के मामले में कंपनी निदेशक की जमानत अर्जी खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[मिराज प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक विनयकांत आमेटा की जमानत अर्जी को खारिज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/617d28f04b67f/article-2024"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/justice_hammer_concept.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायालय क्रम-4 महानगर द्वितीय ने करोड़ों रुपए की जीएसटी चोरी के मामले में मिराज प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक विनयकांत आमेटा की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा की आरोपी पर बड़ी कर चोरी का आरोप है। ऐसे में उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता है। जमानत अर्जी में अधिवक्ता हरीश त्रिपाठी ने बताया कहा गया की उसे मामले में झूठा फंसाया गया है। विभाग ने जीएसटी की गणना भी गलत की है। विभाग ने फैक्ट्री में उत्पाद के खाली पड़े रैपर के आधार पर जीएसटी की गणना कर 869 करोड़ रुपए की कर चोरी बताई है। जबकि कर की गणना उत्पाद के बिक्री होने के बाद की जानी चाहिए थी। इसके अलावा प्रार्थी कंपनी में वेतनभोगी कर्मचारी है। कर चोरी से उसे कोई फायदा नहीं होने वाला था। ऐसे में उसे जमानत पर रिहा किया जाए। जिसका विरोध करते हुए विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि विभाग ने आरोपी के खिलाफ बड़ी कर चोरी पकड़ी है। इसलिए आरोपी को जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने आरोपी की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। गौरतलब है की डीजीजीआई ने गत दिनों आरोपी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद विशेष न्यायालय ने आरोपी को जेल भेज दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Oct 2021 17:30:02 +0530</pubDate>
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