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                <title>Integration - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पवन कल्याण का बड़ा शक्ति प्रदर्शन: जन सेना का 'सेना प्रस्थानम्' मिशन शुरू, राष्ट्रीय मुद्दों पर बनेगी रणनीति</title>
                                    <description><![CDATA[जन सेना पार्टी का विशेष राष्ट्रीय सम्मेलन 'सेना प्रस्थानम्' दिल्ली में शुरू हुआ। पार्टी अध्यक्ष पवन कल्याण के नेतृत्व में आयोजित इस अधिवेशन में दक्षिण भारत के 150 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में संगठनात्मक और राष्ट्रीय एकता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी, जिसके बाद कल्याण राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pawan-kalyans-big-show-of-strength-jana-senas-sena-prasthanam/article-157015"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/pawan-kalyan.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। जन सेना पार्टी का विशेष राष्ट्रीय सम्मेलन 'सेना प्रस्थानम्–फॉर नेशनल इंटीग्रेशन' सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में शुरू हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम् के सामूहिक गायन से हुई, जिसके बाद पार्टी अध्यक्ष पवन कल्याण ने उद्घाटन संबोधन दिया। दिनभर चलने वाले इस सम्मेलन में जन सेना पार्टी के सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य, विभिन्न निगमों के अध्यक्ष, निर्वाचित जनप्रतिनिधि तथा देश के दक्षिणी राज्यों से आए लगभग 150 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के प्रतिनिधि भागीदारी कर रहे हैं। बैठक के दौरान संगठनात्मक मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर व्यापक चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, विभिन्न सत्रों में चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पेश किए जाने की संभावना है।</p>
<p>सम्मेलन के समापन के बाद जन सेना पार्टी अध्यक्ष्य कल्याण राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) जायेंगे। इस दौरान वह देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। जन सेना पार्टी के अनुसार, 'सेना प्रस्थानम्' पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना, दक्षिणी राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक विमर्श को आगे बढ़ाना है। पार्टी का मानना है कि यह सम्मेलन देश की एकता और समावेशी विकास को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:59:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत-बांग्लादेश संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत: ढाका में दिनेश त्रिवेदी की तैनाती, जल बंटवारे से सुरक्षा तक कई मुद्दे अहम</title>
                                    <description><![CDATA[भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी शुक्रवार को ढाका के लिए उड़ान भरेंगे। उनकी यह रवानगी गंगा जल संधि के नवीनीकरण, तीस्ता नदी परियोजना में चीन की दखल और बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच हो रही है। त्रिवेदी का मुख्य फोकस दोनों देशों के बीच व्यापारिक और भू-राजनीतिक मतभेदों को संभालना होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/beginning-of-a-new-chapter-in-india-bangladesh-relations-dinesh-trivedi/article-156663"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/dinesh-trivedi.png" alt=""></a><br /><p>ढाका। बांग्लादेश में भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी शुक्रवार को यहां से बांग्लादेश के लिए उड़ान भरेंगे और उनकी यह रवानगी एक ऐसे संवेदनशील मोड़ पर हो रही है, जब दोनों पक्ष राजनीतिक बदलावों, उभरते रणनीतिक तनाव तथा आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों को आकार देने वाली कई महत्वपूर्ण वार्ताओं के बीच अपने रिश्तों को नए सिरे से स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। त्रिवेदी ने ढाका रवाना होने से पहले मीडिया से कहा कि दोनों देशों पर लगभग 160 करोड़ लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी है। उन्होंने भारत एवं बांग्लादेश के रिश्ते को 'विशेष' बताया और कहा कि इसने राजनीतिक बदलावों तथा समय-समय पर पैदा होने वाले तनावों को झेला है। यह मजबूत एवं सुरक्षित नींव पर टिका है।</p>
<p>केंद्र सरकार में रेल मंत्री रह चुके त्रिवेदी ऐसे समय में ढाका पहुंचेंगे जब द्विपक्षीय संबंधों के दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों (जल बंटवारे और व्यापार) पर नए सिरे से बातचीत शुरू होने वाली है। गंगा के जल बंटवारे की 1996 संधि का नवीनीकरण होना है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में व्यापक स्तर पर फिर से बातचीत करना मुश्किल साबित हो सकता है, जिससे अल्पावधि के लिए इस संधि को कुछ समय के लिए आगे बढ़ा देना ही सबसे संभावित परिणाम दिखाई देता है। विदेश मंत्रालय में पूर्व सचिव पिनाक आर चक्रवर्ती और अन्य रणनीतिक पर्यवेक्षकों ने तर्क दिया है कि पानी को व्यापक संबंधों से अलग करके नहीं देखा जा सकता।</p>
<p>भारतीय नीति निर्माता अब बदलती परिस्थितियों को देखते हुए इस संधि पर दोबारा विचार करना जरूरी समझ रहे हैं। हिमालय में ग्लेशियरों के कम पिघलने से नदियों के प्रवाह पर असर पड़ा है, जबकि जनसंख्या वृद्धि और कृषि मांग ने सीमा के दोनों ओर पानी की आवश्यकताओं को नाटकीय रूप से बढ़ा दिया है। जल बंटवारे पर वार्ता व्यापक आर्थिक चर्चाओं से भी जुड़ी हुई है। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था, जो अब 510 अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर चुकी है, लगातार मध्यम आय वाले देश के दर्जे की ओर बढ़ रही है।</p>
<p>चूंकि बांग्लादेश सबसे कम विकसित देशों की श्रेणी से बाहर निकल रहा है, इसलिए भारत द्वारा पिछले कुछ वर्षों में एकतरफा रूप से दी गई कई व्यापारिक रियायतों और तरजीही व्यवस्थाओं में अनिवार्य रूप से संशोधन की आवश्यकता होगी। इसलिए, दोनों देशों के अधिकारी एक अधिक संतुलित रिश्ते के लिए डिज़ाइन किए गए एक नए व्यापार ढांचे की तलाश कर रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में दोनों पक्षों को राजनीतिक रूप से परेशान करने वाले मुद्दों को संभालने की आवश्यकता होगी। जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटीजंस पार्टी के कुछ धड़ों की भारत-विरोधी बयानबाजी ने भारत में चिंता पैदा की है। इसके बावजूद भारतीय अधिकारी इस बात को स्वीकार करते हैं कि समय-समय पर आने वाले राजनीतिक बयानों को भूगोल, अर्थशास्त्र और लोगों के आपसी रिश्तों पर बने इस रिश्ते को पटरी से उतारने की अनुमति नहीं दी जा सकती। त्रिवेदी के लिए यह चुनौती होगी कि वह दोनों देशों के रिश्तों को राजनीतिक उतार-चढ़ाव से बचाकर रखें।</p>
<p>भारत बांग्लादेश के चीन और पाकिस्तान के साथ बढ़ते रिश्तों को लेकर भी लगातार सावधान है। यह चिंता सबसे ज्यादा नदी से जुड़े मुद्दों में दिख रही है। गंगा नदी के जल बंटवारे पर बातचीत चल रही है, लेकिन बांग्लादेश ने तीस्ता नदी के प्रबंधन और परियोजनाओं में चीन की मदद मांगी है। इस प्रस्ताव से भारत चिंतित है, क्योंकि यह परियोजना सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के बहुत पास है। सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं सिर्फ चीन तक ही सीमित नहीं हैं। हाल ही में बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य संपर्क—जैसे पायलट प्रशिक्षण पर बातचीत और पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों में बांग्लादेश की रुचि—ने भारत को सतर्क कर दिया है। साथ ही, खुफिया एजेंसियां बांग्लादेश में पाकिस्तान की आईएसआई की बढ़ती गतिविधियों पर भी नजर रख रही हैं।</p>
<p>ये चिंताएं पुराने अनुभवों से भी जुड़ी हैं। भारतीय एजेंसियां लंबे समय से मानती हैं कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों ने पहले पूर्वोत्तर भारत के उग्रवादी समूहों की मदद की थी। 2002 में कोलकाता के अमेरिकन सेंटर पर हुए हमले जैसी घटनाओं की जांच में भी पाकिस्तान और बांग्लादेश के कुछ चरमपंथी संगठनों के संबंध सामने आए थे। फिर भी, इन चिंताओं के बावजूद दोनों देश लंबे समय तक खराब रिश्ते नहीं रख सकते। बांग्लादेश, दक्षिण एशिया में भारत का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है और बंगाल की खाड़ी तक पहुंच का एक महत्वपूर्ण रास्ता भी है। वहीं, भारत भी बांग्लादेश के लिए संपर्क, ऊर्जा और क्षेत्रीय बाजारों तक पहुंच के लिहाज से बहुत जरूरी है। इसलिए त्रिवेदी के लिए असली काम मतभेद खत्म करना नहीं, बल्कि उन्हें संभालकर रिश्तों को आगे बढ़ाना होगा।</p>
<p>आखिर में, इस बातचीत की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि क्या भारत और बांग्लादेश राजनीतिक तनाव से ऊपर उठकर बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपने रिश्तों को नया रूप दे पाते हैं। दोनों देशों के करोड़ों लोगों की तरक्की एक-दूसरे से जुड़ी हुई है, इसलिए सहयोग बनाए रखना बहुत जरूरी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 15:58:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>यूक्रेन के यूरोपीय संघ प्रवेश को हरी झंडी: हंगरी ने पहले वार्ता क्लस्टर को दी मंजूरी, कीव के साथ हुआ ऐतिहासिक समझौता</title>
                                    <description><![CDATA[हंगरी के प्रधानमंत्री पीटर मग्यार ने यूक्रेन को पहला यूरोपीय संघ (EU) वार्ता क्लस्टर खोलने की मंजूरी दे दी है। ट्रांसकारपाथिया में हंगेरियन अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर कीव के साथ समझौता होने के बाद यह कदम उठाया गया। आयरिश समकक्ष माइकल मार्टिन ने इस सुधार प्रक्रिया का स्वागत करते हुए यूक्रेन के ब्लॉक में शामिल होने का समर्थन किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/hungary-gives-green-signal-to-ukraines-eu-accession-talks/article-156128"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/europ1.png" alt=""></a><br /><p>बुडापेस्ट। हंगरी के प्रधानमंत्री पीटर मग्यार ने कहा है कि हंगरी ने यूक्रेन को अपना पहला यूरोपीय संघ वार्ता क्लस्टर खोलने की मंजूरी प्रदान की है। मग्यार ने गुरुवार को यहां अपने आयरिश समकक्ष माइकल मार्टिन के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हम राजदूत स्तर पर यूरोपीय संघ में यूक्रेन के शामिल होने की वार्ता में पहले क्लस्टर के उद्घाटन को मंजूरी देने में सक्षम हैं।" उन्होंने कहा कि हंगरी ने यूक्रेन के ट्रांसकारपाथिया क्षेत्र में हंगेरियन अल्पसंख्यकों की भाषा, सांस्कृतिक, शैक्षिक एवं राजनीतिक अधिकारों के संबंध में कीव के साथ एक समझौता किया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यूक्रेन आवश्यक विधायी परिवर्तनों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है और हंगरी वार्ता क्लस्टर खोलने का समर्थन करता है।<br />मार्टिन हंगरी में नई सरकार के गठन के बाद बुडापेस्ट का दौरा करने वाले पहले विदेशी प्रमुख हैं और एक जुलाई को आयरलैंड द्वारा यूरोपीय संघ परिषद का अध्यक्ष पद संभालने से पहले वहां पहुंचे हैं। मगयार ने कहा कि हंगरी यूरोपीय मामलों में आयरलैंड के व्यावहारिक दृष्टिकोण को महत्व देता है और मौलिक यूरोपीय संघ मूल्यों का सम्मान करते हुए ब्लॉक को मजबूत करने के प्रयासों का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि प्रवासन जैसे मुद्दों पर मतभेदों के बावजूद हंगरी का लक्ष्य यूरोपीय संघ के निर्णय लेने में एक रचनात्मक भागीदार बनना है।</p>
<p>मार्टिन ने कानून का शासन बनाए रखने एवं लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए मग्यार की प्रतिबद्धता का स्वागत किया और कहा कि ये कदम हंगरी को यूरोपीय संघ के मूल अवस्था में वापस लाएंगे। उन्होंने पुष्टि की कि आयरलैंड आगामी यूरोपीय संघ की अध्यक्षता के दौरान हंगरी की सुधार प्रक्रिया का समर्थन करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 18:37:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पीएम मोदी से मिलीं सिटी बैंक की अध्यक्ष एवं सीईओ: भारत के विकास की प्राथमिकताओं, सहयोग के अवसरों पर हुई चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सिटी बैंक की सीईओ जेन फ्रेज़र ने मुलाकात की। उन्होंने भारत के 'विकसित भारत 2047' लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता जताई। बैठक में वैश्विक पूंजी निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई। सिटी बैंक भारत में अपने परिचालन के 125 वर्ष पूरे करने जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/citibank-chairman-and-ceo-met-pm-modi-discussed-indias-development/article-156012"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/city-bank.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर काम करने वाले अमेरिका के प्रसिद्ध बैंकिंग संस्थान सिटी बैंक के संचालक मंडल की प्रमुख और मुख्य अधिशासी अधिकारी (सीईओ) जेन फ्रेज़र ने यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और भारत के आर्थिक विकास में सहयोग देने की अपनी कंपनी की प्रतिबद्धता को दोहराया। सिटी अगले वर्ष भारत में अपने परिचालन के 125 साल पूरे करने जा रहा है। सिटी बैंक की ओर से गुरुवार को हुई इस मुलाकात पर जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रधानमंत्री के साथ सिटी की सीईओ की कल हुई बातचीत में देश में वैश्विक निवेश आकर्षित करने, विदेशों में भारतीय कंपनियों को बढ़ावा देने और वैकल्पिक ऊर्जा तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्रों में अवसरों की तलाश करने जैसे विषय शामिल थे।</p>
<p>बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विकास की गति को तेज़ करने और आर्थिक रफ़्तार को बढ़ाने के अपने दृष्टिकोण को साझा किया। चर्चा में कई विषयों को शामिल किया गया, जिनमें भारत में निवेश और पूंजी प्रवाह, विदेशों में भारत के कॉर्पोरेट क्षेत्र के लिए अवसर, वैकल्पिक ऊर्जा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शामिल थे। उन्होंने इस बात पर विचार-विमर्श किया कि सिटी किस प्रकार भारत के आर्थिक एजेंडे को और अधिक समर्थन दे सकती है, देश में वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने में मदद कर सकती है, और दुनिया भर में नए बाज़ारों में विस्तार कर रही भारतीय कंपनियों को बढ़ावा दे सकती है।</p>
<p>इसके अतिरिक्त, उन्होंने देश के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विकास से संबंधित अवसरों पर भी चर्चा की, जिसमें सौर ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन जैसे हरित ऊर्जा स्रोत शामिल हैं। बातचीत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विषय भी शामिल था, जिसमें इसके विनियमन की भूमिका और उन क्षेत्रों पर चर्चा हुई जहाँ आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए इस तकनीक का उपयोग किया जा सकता है। इस बैठक में फ्रेज़र के साथ सिटी के भारत में कारोबार के प्रभारी सीईओ, बैंकिंग प्रमुख और भारतीय उपमहाद्वीप के सब-क्लस्टर प्रमुख के. बालासुब्रमण्यम भी मौजूद थे। दोनों ने देश में सिटी की हालिया प्रगति पर चर्चा की और देश तथा अपने ग्राहकों को समर्थन देने की कंपनी की मज़बूत प्रतिबद्धता को दोहराया।</p>
<p>सिटी की ओर से कहा गया है कि यह बैठक प्रधानमंत्री मोदी के सुधार के एजेंडे में वैश्विक वित्तीय संस्थानों के विश्वास को दर्शाता है। पीएम की ऐतिहासिक पहलों ने भारत के बैंकिंग परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है और वित्तीय समावेशन की प्रक्रिया को तेज़ किया है। देश के अग्रणी अंतरराष्ट्रीय बैंक के तौर पर सिटी ने 3-5 जून तक मुंबई में सीटी इंडिया कांफ्रेंस आयोजित किया है जिसमें में 1,500 से ज़्यादा ग्राहक और निवेशक आमंत्रित किये गये हैं। इस सम्मेलन का इस प्लेटफॉर्म का मकसद भारत से जुड़ी चर्चाओं को आगे बढ़ाना और वैश्विक पूंजी के लिए निवेश के अवसरों को उजागर करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 18:29:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जनहित में बड़ा कदम: EHCC हॉस्पिटल से हुआ MoU, जरूरतमंदों को मिलेगा बेहतर उपचार</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं द्वारा निःशुल्क हृदय एवं मस्तिष्क रोग परिचर्चा शिविर आयोजित किया गया। पूर्व राज्यमंत्री राजीव अरोड़ा के निर्देशन में EHCC हॉस्पिटल के साथ जनहित में एमओयू किया गया। विशेषज्ञों ने बदलती जीवनशैली में गंभीर बीमारियों से बचाव और समय पर जांच के महत्व की जानकारी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/big-step-in-public-interest-needy-will-get-better-treatment/article-155636"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/jaipur.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। समाजसेवी संस्थान यूनिराज एल्युमिनी फेडरेशन, सद्भावना के सिपाही संगठन, एस टी टी फाउंडेशन और साईनाथ चैरिटेबल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में एक स्वास्थ्य परिचर्चा शिविर का सफल आयोजन किया गया। जनहित को समर्पित इस शिविर का उद्देश्य आमजन को हृदय एवं मस्तिष्क संबंधी रोगों के प्रति जागरूक करना था। शिविर में प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल कासलीवाल और मस्तिष्क रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग सिहाग ने व्याख्यान दिए। दोनों विशेषज्ञों ने बदलती जीवनशैली में बढ़ते रोगों के कारण, बचाव और समय पर जांच के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही उपस्थित लोगों को निःशुल्क परामर्श भी प्रदान किया गया। </p>
<p>संस्थाओं के मार्गदर्शक संरक्षक एवं पूर्व राज्यमंत्री राजीव अरोड़ा के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी जुड़ी। संस्थाओं के प्रतिनिधि नितिन शारदा भगेरिया, के. विक्रम रस्तोगी, कैलाश शर्मा और अक्षय जैन मोदी ने EHCC हॉस्पिटल के साथ जनहित में MoU पर हस्ताक्षर किए, जिससे भविष्य में जरूरतमंदों को बेहतर उपचार सुलभ होगा। इस अवसर पर राजीव अरोड़ा ने पूर्ववर्ती गहलोत सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभ उपलब्धता सरकार की प्राथमिकता रही है। ऐसे शिविर समाज और संस्थाओं के सहयोग से स्वस्थ राजस्थान की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 17:30:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अजेय कुमार की मदन राठौड़ और राधा मोहन से मुलाकात: दिल्ली में हुई राजस्थान के नए संगठन महामंत्री की अहम बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान भाजपा के नए संगठन महामंत्री अजेय कुमार ने दिल्ली में प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल से मुलाकात की। बैठक में आगामी निकाय-पंचायत चुनाव और सरकार के कामकाज पर प्रारंभिक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से भी आज उनकी मुलाकात संभावित है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ajay-kumars-activism-increased-after-meeting-top-leaders-in-delhi/article-155637"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/ajay-kumra.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान के नए संगठन महामंत्री अजय कुमार नियुक्ति के साथ ही दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और संगठन प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल से मिले हैं। जानकारी के अनुसार अजेय कुमार ने दोनों से मुलाकात में राजस्थान की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, सरकार के कामकाज और आगामी पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर प्रारंभिक चर्चा की बताएं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी दिल्ली दौरे पर हैं। ऐसे में उनकी आज भाजपा प्रदेश मुख्यालय में अजेय कुमार से मुलाकात भी हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 15:02:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत ऑपरेशन सिंदूर 2.0 के लिए तैयार: सेना प्रमुख बोले- अभी केवल संघर्ष विराम जैसे हालात</title>
                                    <description><![CDATA[सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि संघर्ष विराम की स्थिति है। जरूरत पड़ने पर तीनों सेनाएं ऑपरेशन सिंदूर 2.0 के लिए तैयार हैं। उन्होंने नए सैन्य अधिकारियों को आधुनिक युद्ध के पारदर्शी होने और मल्टी-डोमेन लड़ाइयों के प्रति सतर्क रहने की हिदायत दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/india-is-ready-for-operation-sindoor-20-army-chief-said/article-155531"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/army.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है। फिलहाल संघर्ष विराम जैसी स्थिति है। जरूरत पड़ी तो तीनों सेनाएं ऑपरेशन सिंदूर 2.0 के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने एक बेंचमार्क सेट कर दिया है कि भारत किसी भी उकसावे पर कैसे जवाब देता है। आज पास होने वाले अफसर अपने करियर की शुरुआत से ही इस बेंचमार्क को बनाए रखें।</p>
<p><strong>आधुनिक युद्ध पारदर्शी हो गए</strong></p>
<p>सेना प्रमुख ने नए अफसरों को मैसेज देते हुए कहा कि आधुनिक युद्ध पारदर्शी हो गया है। 24 घंटे हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है। ऐसे में सैनिकों की तैनाती, ऑपरेशन और बॉर्डर के पास बसे नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।</p>
<p><strong>हमेशा दिमाग से जीती जाती है जंग </strong></p>
<p>सेना प्रमुख ने कहा कि जीत हमेशा दिमाग में होती है। यह जमीन पर नहीं होती। इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर तभी सफल होता है जब पूरा देश एक साथ आए और सूचना देने वाले लोगों पर भरोसा करे। जब युद्ध की गति बहुत तेज हो रही होए तब संसाधनों के दायरे में रहकर मदद की जरूरत पड़ती है, ताकि तेजी से फैसले ले सकें। भविष्य की लड़ाइयां केवल पारंपरिक तरीके से नहीं लड़ी जाएंगी, बल्कि ये कई मोर्चों पर होंगी। इनमें जमीन, आकाश, समुद्र, अंतरिक्ष, साइबर, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक, लोगों के दिमाग और सोच पर असर डालना शामिल होंगे।</p>
<p><strong>वर्दी का नजरिया हमेशा राष्ट्रीय ही रहना चाहिए </strong></p>
<p>जनरल द्विवेदी ने कहा है कि भविष्य के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को ऐसे तेजी से जटिल होते सुरक्षा माहौल में काम करने के लिए तैयार रहना होगा जहां प्रतिस्पर्धा और संघर्ष के बीच का अंतर धुंधला होता जा रहा है। यहां जो कुछ भी शुरू होता है, वह हमेशा आपके साथ रहता है उन्होंने कैडेटों  से कहा कि आज, जब मैं वर्दी वाली जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर आपके सामने खड़ा हूं और अपनी वर्दी उतारने की तैयारी कर रहा हूं, जबकि आप अपनी वर्दी पहनने की तैयारी कर रहे हैं तो मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूं कि यहां जो कुछ भी शुरू होता है, वह हमेशा आपके साथ रहता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 11:08:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या विपक्ष को फिर एकजुट करेंगी ममता? राहुल से मुलाकात के बाद तेज हुई अटकलें ; बढ़ी सियासी हलचल, 6 जून को होगी भविष्य की रणनीति तय</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनाव में हार के बाद विपक्षी खेमे को एकजुट करने के लिए 6 जून को 'INDIA' गठबंधन की बैठक होगी। राहुल गांधी से लंबी बातचीत के बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के इसमें शामिल होने की संभावना है। बैठक में भाजपा विरोधी दलों की एकजुटता और भविष्य की रणनीति तय की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/will-mamata-unite-the-opposition-again-speculations-intensified-after-meeting/article-155486"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rahul1.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के छह जून को होने वाली 'इंडिया' गठबंधन की बैठक में शामिल होने की संभावना है। इसे एक बेहद महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम की तरह देखा जा रहा है। देश के बदलते राजनीतिक माहौल के बीच बनर्जी के इस अहम बैठक में शामिल हो सकने की सूचना तब सामने आई, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को बनर्जी से आधे घंटे से भी अधिक समय तक बातचीत की। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, चुनावी मोर्चे पर गठबंधन के कई मुख्य सहयोगियों को मिली लगातार हार के बाद विपक्षी खेमे की रणनीति निशाने पर है। ऐसे माहौल में ममता बनर्जी का इस बैठक में जाना सियासत के लिहाज से काफी मायने रखता है।</p>
<p>हालिया विधानसभा चुनावों में मिले निराशाजनक नतीजों के बाद गठबंधन के भविष्य की रणनीति तय करने के लिए इस बैठक को बेहद जरूरी माना जा रहा है। इसकी अहम वजह यह है कि हाल ही में आये चुनावी नतीजों ने देश के कई राज्यों में विपक्षी खेमे को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया है। खेमे के दो बड़े दलों को हार मिली है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को शिकस्त का सामना करना पड़ा और द्रमुक तमिलनाडु में सत्ता बचाने में नाकाम रही है।</p>
<p>राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छह जून की बैठक का ध्यान न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मुकाबला करने की रणनीति पर होगा, बल्कि बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में गठबंधन के सहयोगियों के राजनीतिक वजूद और उनकी प्रासंगिकता को बचाये रखने के तौर-तरीकों पर भी रहेगा। ममता बनर्जी के शामिल होने की संभावना ने इस बैठक की अहमियत को और बढ़ा दिया है, क्योंकि कई लोग उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देख रहे हैं, जो विपक्षी राजनीति में एक बार फिर निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लिए इस बैठक को उनके नेतृत्व की कड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि वे एक ऐसे समय में विपक्षी गठबंधन को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं, जब इसकी एकजुटता और भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p>तमिलनाडु के सियासी घटनाक्रमों की वजह से भी 'इंडिया' गठबंधन की स्थिरता को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गयी हैं। हालांकि कांग्रेस और द्रमुक ने मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन ख़बरों के मुताबिक चुनावी नतीजों के बाद दोनों पार्टियों के रिश्तों में कड़वाहट आ गयी है, क्योंकि कांग्रेस कथित तौर पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय की पार्टी टीवीके के करीब जा रही है। इस बढ़ते तनाव ने इन अटकलों को हवा दे दी है कि द्रमुक गठबंधन के साथ अपने जुड़ाव पर दोबारा विचार कर सकती है।</p>
<p>इसी तरह केरल में वामपंथियों के हाथ से सत्ता जाने के बाद राजनीतिक विश्लेषक माकपा नेतृत्व के रुख पर भी पैनी नजर रख रहे हैं। यह पार्टी 'इंडिया' गठबंधन के भीतर सक्रिय रूप से जुड़ी रहेगी या नहीं, इस बात पर भी बैठक में चर्चा होने की उम्मीद है। इस पूरे ताने-बाने के बीच छह जून की यह बैठक काफी ज्यादा अहमियत रखती है, क्योंकि इसमें होने वाले मंथन से भाजपा विरोधी दलों की भावी दिशा और उनकी एकजुटता की एक साफ तस्वीर सामने आने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 18:41:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिद्दारमैया ने जाते-जाते शिवकुमार, राहुल के लिए खड़ी की मुश्किलें, पढ़ें क्या है पूरा मामला ?</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने 'सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण रिपोर्ट' को मंजूरी देकर कांग्रेस नेतृत्व को बड़ी उलझन में डाल दिया है। इस फैसले से राहुल गांधी और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार असहज स्थिति में हैं, क्योंकि वोक्कालिगा समुदाय की नाराजगी और नया आरक्षण समीकरण पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/siddaramaiah-created-problems-for-shivkumar-rahul-while-leaving-read-what/article-155452"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/dkk.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने जाते-जाते राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की तैयार की गयी 'सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण रिपोर्ट' को मंजूर कर कांग्रेस नेतृत्व को असमंजस की स्थिति में खड़ा कर दिया है। उल्लेखनीय है कि सियासत में कभी-कभी ऐसे लम्हे आते हैं जब कोई सरकारी फाइल सिर्फ आगे नहीं बढ़ती, बल्कि उसका अपना एक अलग वजूद बन जाता है। कर्नाटक की जातिगत सर्वेक्षण रिपोर्ट भी एक ऐसा ही मोहरा है। जहां निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने जिस अफसरशाही इत्मीनान और राजनीतिक अंतिम रूप के साथ इसे मंजूर किया है, उसने खामोशी से वही काम करना शुरू कर दिया है, जो आंकड़े अक्सर सबसे बेहतर तरीके से करते हैं- </p>
<p><strong>ताकतवरों की नींद उड़ाना।</strong></p>
<p>रिपोर्ट की मंजूरी देने की एक आम प्रक्रिया है लेकिन इसके भीतर ज्यादा दिलचस्प हलचल छिपी हुई है। राज्य के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी अब खुद को ऐसी असहज स्थिति में पा रहे हैं, जहां उन्हें एक ऐसे दस्तावेज़ पर जवाब देना भारी पड़ रहा है। वे उसे पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं कर सकते। कर्नाटक के सियासी मिजाज के मंझे खिलाड़ी सिद्दारमैया ने शायद वही किया है, जो तजुर्बेकार सियासतदान अक्सर सबसे बेहतर तरीके से करते हैं एक ऐसा माहौल छोड़ जाना, जो कानूनी तौर पर तो बिल्कुल साफ-सुथरा हो लेकिन राजनीतिक रूप से काफी उलझा हुआ हो। यह रिपोर्ट एक बार मंजूर होने के बाद अब सिर्फ कोई सुझाव नहीं रह गयी है। यह एक ऐसा सवाल बन चुकी है, जो जवाब के इंतजार में है।</p>
<p>शिवकुमार के लिए यह मुद्दा फिलहाल सबसे अहम है और सीधे उनके क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। राज्य का जातीय समीकरण कभी भी हवा-हवाई नहीं होता। यह उन समुदायों के रूप में सामने आता है, जो पुरानी बातें याद रखते हैं, ऐतराज जताते हैं और एकजुट होते हैं। वोक्कालिगा समुदाय का एक वर्ग, जो पहले भी जातीय सर्वेक्षण को लेकर हुए विवादों को लेकर संवेदनशील रहा है, इसके क्रियान्वयन की दिशा में उठाए जाने वाले किसी भी कदम पर कड़ी और सतर्क निगाह रख सकता है। पद्धति और आंकड़ों पर बहस भले ही दफ्तरों में हो, लेकिन पहचान और प्रतिनिधित्व का सवाल सड़कों पर तय होता है।</p>
<p>राहुल गांधी की परेशानी का स्तर थोड़ा अलग है। जातिगत जनगणना के हक में उनका लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक रुख अब इसे अमली जामा पहनाने में टेडी खीर नजर आ रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी आदत के मुताबिक, इस सूरत-ए-हाल को नीति के विकास के रूप में नहीं, बल्कि एक सियासी विरोधाभास के तौर पर देखना शुरू कर दिया है। उनका तर्क है कि कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर एक भाषा बोलती है और राज्यों में दूसरी। कांग्रेस जैसा लाजिमी है, इस बात से सरासर इनकार करती है।</p>
<p>अब कांग्रेस के सामने दो रास्ते खुलते हैं, और दोनों में से कोई भी रास्ता आरामदेह नहीं है। अगर इस रिपोर्ट को लागू नहीं किया जाता है, तो इसके प्रशासनिक ईमानदारी और फिर उसके बाद आने वाली राजनीतिक हिचकिचाहट का एक और भारतीय उदाहरण बन जाने का खतरा है। इसने पिछड़े समुदायों और सामाजिक न्याय के पैरोकारों के बीच जो उम्मीदें जगाई हैं, वे इतनी आसानी से खत्म नहीं होंगी। ऐसी सूरत में इस रिपोर्ट को इस बात के लिए कम याद किया जायेगा कि इसमें क्या कहा गया था, बल्कि इस बात के लिए ज्यादा याद किया जायेगा कि इसके साथ क्या नहीं किया गया।</p>
<p>अगर इसे लागू किया जाता है, तो इसके नतीजे ज्यादा त्वरित और साफ तौर पर दिखाई देने वाले होंगे। आरक्षण का नये सिरे से निर्धारण समुदायों का प्रतिनिधित्व और जनसांख्यिकीय दावे सक्रिय रूप से राजनीति के केंद्र में आ जायेंगे। समर्थन और विरोध दोनों एक साथ खड़े होंगे। कानूनी पेचीदगियां सामने आ सकती हैं। प्रदर्शन शुरू हो सकते हैं तथा गठबंधन को संभालना और भी मुश्किल हो जायेगा। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के लिए इसका मतलब पार्टी के अनुशासन और अपने समुदाय की भावनाओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी और श्री गांधी के लिए इसका मतलब अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता को उसकी तमाम अपरिहार्य उलझनों के साथ प्रशासनिक हकीकत में बदलना होगा। दोनों ही सूरतों में दबाव खत्म नहीं होता दिखाई दे रहा है।</p>
<p>यही वजह है कि राजनीतिक हलकों में सिद्दारमैया के इस रिपोर्ट को मंजूर किये जाने को सिर्फ कागजी या प्रक्रियात्मक कार्रवाई से बढ़कर देखा जा रहा है। इस जिम्मेदारी को पार्टी के भीतर खामोशी लेकिन मजबूती के साथ दूसरों के कंधों पर डालने के तौर पर देखा जा रहा है- एक तजुर्बेकार सियासतदान का यह तय करने का तरीका कि एक बार जो फैसला ले लिया गया, वह आराम से सिर्फ उनका ही होकर न रह जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 14:09:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खरीफ सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन से लेकर डिजिटल खेती तक बनेगा नया कृषि रोडमैप: शिवराज सिंह चौहान</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय खरीफ अभियान का शुभारंभ करते हुए बताया कि वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 3,765 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन हुआ है। भारत धान उत्पादन में चीन को पीछे छोड़कर विश्व में शीर्ष पर पहुंच गया है। अब बेहतर योजना के लिए 8 कृषि-जलवायु क्षेत्रों के आधार पर सम्मेलन होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/from-climate-change-to-digital-farming-a-new-agricultural-roadmap/article-155285"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/shivraj-singh-chauhan.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भविष्य में कृषि-जलवायु क्षेत्र के आधार पर भी क्षेत्रीय सम्मेलनों के आयोजन पर विचार किया जा रहा है। शिवराज सिंह चौहान ने गुरूवार को यहां आयोजित खरीफ सम्मेलन के अवसर पर संवाददाता सम्मेलन में कहा कि देश को मोटे तौर पर आठ कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बांटा जा सकता है। सरकार की कोशिश है कि पांच के बजाय इन आठ क्षेत्रों के आधार पर क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जाएं ताकि कृषि से जुड़ी योजनाएं और रणनीतियां जमीनी स्तर तक प्रभावी तरीके से पहुंच सकें।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि 28 और 29 मई यहां, पूसा परिसर में राष्ट्रीय खरीफ अभियान–2026 पर कृषि सम्मेलन आयोजित किया गया है जिसमें देशभर के कृषि मंत्री, वैज्ञानिक और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए हैं। इसमें खरीफ सीजन की तैयारी को लेकर दो दिन तक विस्तार से चर्चा और समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि खरीफ और रबी फसलों की तैयारी, बुवाई के लिए उपयुक्त बीजों की उपलब्धता और कृषि मिशनों को प्रभावी ढंग से जमीन तक पहुंचाने को लेकर सम्मेलन में व्यापक चर्चा की जा रही है। सम्मेलन से पहले राज्यों के साथ वर्चुअल बैठकें आयोजित की गई जिनमें विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई थी। इसी आधार पर राज्य अपनी तैयारियों के साथ सम्मेलन में पहुंचे हैं। हमारा उद्देश्य है कि किसानों को बेहतर योजना, बेहतर तकनीक और बेहतर समर्थन मिले।</p>
<p>केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि हमारा देश बहुत बड़ा है, इसलिए इस बार केवल राष्ट्रीय सम्मेलन ही नहीं बल्कि क्षेत्रीय सम्मेलन भी प्रारंभ किए गए हैं। अब तक जयपुर, लखनऊ और भुवनेश्वर में तीन क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं। इसके अलावा दो और सम्मेलन नॉर्थ-ईस्ट और दक्षिण भारत में आयोजित किए जाएंगे, जिनकी तारीखें जल्द तय की जाएंगी। चौहान ने कहा कि अलग-अलग राज्यों की खेती और जलवायु परिस्थितियां अलग होती हैं। ऐसे में क्षेत्रीय स्तर पर चर्चा अधिक व्यावहारिक और प्रभावी साबित होती है। उन्होंने कहा कि जब छोटे समूहों में राज्यों के साथ चर्चा होती है तो हर राज्य की समस्याओं और जरूरतों पर विस्तार से बात हो पाती है।</p>
<p>केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि दलहन और तिलहन के लिए अलग-अलग मिशन बनाए गए हैं। राज्यों के साथ मिलकर बेहतर बीज, सीड रिप्लेसमेंट रेट बढ़ाने, डेमोंस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। बागवानी क्षेत्र में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसमें अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर और कॉटन मिशन पर भी चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में प्राकृतिक खेती, सॉइल हेल्थ कार्ड और उर्वरकों के संतुलित उपयोग जैसे विषयों पर विशेष फोकस रहेगा। उन्होंने कहा कि कई किसान जानकारी के अभाव में जरूरत से अधिक उर्वरकों का उपयोग कर लेते हैं, इसलिए संतुलित उपयोग को बढ़ावा देना जरूरी है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल पर भी चर्चा की जाएगी। हमारे देश में खेतों का आकार छोटा है। ऐसे में किसान कम जमीन में ज्यादा लाभ कैसे कमा सके, इस पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि खेती के लिए पर्याप्त वित्त पोषण भी जरूरी है। किसानों को फसल उत्पादन के साथ-साथ पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट और जोखिम से सुरक्षा की आवश्यकता होती है। कृषि ऋण वितरण में अभी भी राज्यों के बीच असमानता है। कुछ राज्यों में कृषि ऋण बहुत कम है और कुछ में ज्यादा। यदि किसानों के पास केसीसी और निवेश के लिए पूंजी होगी तो वे बेहतर खेती कर पाएंगे।</p>
<p>केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि सम्मेलन में एग्री इंफ्रा फंड, पीएम-आशा योजना, डिजिटल कृषि, फार्मर आईडी और एफपीओ को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी। इसके लिए राज्यों को अलग-अलग समूहों में बांटा गया है, जहां दिनभर विभिन्न मुद्दों पर मंथन होगा। अगले दिन राज्यों के कृषि मंत्रियों की मौजूदगी में विभिन्न विषयों पर प्रेजेंटेशन दिए जाएंगे और खरीफ फसल के लिए देश और राज्यों का संयुक्त कृषि रोडमैप तैयार किया जाएगा। शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सम्मेलन में "खेत बचाओ अभियान" पर भी व्यापक चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर तय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए समन्वित प्रयास करेंगी। शिवराज सिंह ने कहा कि किसानों के परिश्रम, भारत सरकार की योजनाओं व विकसित नई बीज किस्मों के कारण इस बार देश ने रिकॉर्ड उत्पादन हासिल किया है। </p>
<p>वर्ष 2025-26 में देश का कुल अनुमानित खाद्यान्न उत्पादन 3,765.63 लाख टन तक पहुंच गया है जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 188 लाख टन अधिक है। वहीं, धान उत्पादन में भारत ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। धान का उत्पादन 1,540.24 लाख टन तक पहुंच गया है और अब दुनिया में भारत नंबर-1 बन गया है। हमने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने बताया कि गेहूं का उत्पादन 1,206.57 लाख टन और मक्का का उत्पादन 550.92 लाख टन दर्ज किया गया है जो अपने आप में रिकॉर्ड स्तर है। उन्होंने कहा कि केवल खाद्यान्न ही नहीं, बल्कि तिलहन उत्पादन में भी देश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस वर्ष तिलहन का संभावित उत्पादन 430.59 लाख टन रहने का अनुमान है। इसमें मूंगफली का उत्पादन 130.74 लाख टन और रेपसीड-सरसों का उत्पादन 137.68 लाख टन तक पहुंच गया है जो रिकॉर्ड स्तर है। दलहन उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की गई है और आने वाले समय में उत्पादन में और बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 18:35:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'टुमॉरो मेकर्स' की शुरुआत: वंचित पृष्ठभूमि के प्रतिभावान छात्रों को मिलेंगे तरक्की के समान अवसर</title>
                                    <description><![CDATA[गोदरेज फाउंडेशन ने असमानता को दूर करने के लिए राष्ट्रीय मंच ‘टुमॉरो मेकर्स’ लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य वंचित पृष्ठभूमि के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मेंटर्स और संस्थानों से जोड़ना है। यह पहल स्टेम (STEM), कला और रक्षा क्षेत्र में भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं की एक मजबूत पाइपलाइन तैयार करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/godrej-foundations-tomorrow-makers-will-provide-equal-opportunities-to-underprivileged/article-155245"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>भारत की शिक्षा व्यवस्था में, खासकर छोटे शहरों और वंचित समुदायों के विद्यार्थियों के लिए किस कमी को टुमॉरो मेकर्स दूर करना चाहते हैं?</p>
<p>उमर मोमिन, गोदरेज फाउंडेशन हेड ने मीडिया को बताया कि भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है। कमी है, तो एक समान अवसरों की। देश में सबसे अधिक आय वर्ग वाले परिवारों के 51 प्रतिशत युवा उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ते हैं, जबकि सबसे कम आय वर्ग वाले परिवारों के केवल 8 प्रतिशत युवा ही उच्च शिक्षण संस्थानों तक पहुँच पाते हैं। बिना सपोर्ट के कम आय वर्ग वाले परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थी अपनी क्षमताओं का विकास करने में असमर्थ हो जाते हैं। इस कमी को दूर करने के लिए गोदरेज इंडस्ट्रीज़ ग्रुप में 15 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले समाजसेवी ट्रस्ट, गोदरेज फाउंडेशन ने टुमॉरो मेकर्स की शुरुआत की है। यह एक राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म है, जो वंचित पृष्ठभूमि के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को पहचानने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। यह इन विद्यार्थियों को एक मजबूत पार्टनर ईकोसिस्टम के माध्यम से मेंटर्स और संस्थानों से जोड़ता है तथा अवंति फैलोज़, दक्षणा, स्लैम आउट लाउड, मेकरघाट, और डेल्टा स्क्वैड फाउंडेशन जैसे संगठनों के सहयोग से उन्हें अवसर उपलब्ध कराता है। हमारा लक्ष्य उन्हें केवल शिक्षा प्राप्त करने में मदद करना ही नहीं है, बल्कि हम स्टेम (साईंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ्स), इनोवेशन, कला और रक्षा सेवाओं में नेतृत्व का विकास भी करना चाहते हैं। हमारा मानना है कि अवसर प्रतिभा के आधार पर मिलने चाहिए, न कि बैकग्राउंड या पिन कोड के आधार पर।</p>
<p>टुमॉरो मेकर्स के अंतर्गत स्टेम के साथ कला और रक्षा को शामिल करना जरूरी क्यों था?</p>
<p>जैसा मैंने पहले बताया कि टुमॉरो मेकर्स की बुनियाद यह विश्वास है कि अवसर प्रतिभा के आधार पर मिलने चाहिए। लेकिन प्रतिभा कोई एक क्षेत्र में नहीं होती, इसलिए अवसर भी भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में मिलने चाहिए। माता-पिता अक्सर इंजीनियरिंग या मेडिसीन की ओर झुकाव रखते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि हर बच्चे में कई क्षेत्रों में आगे बढ़ने की प्रतिभा होती है। स्टेम के लिए हमारा सहयोग अवंति फैलोज़, दक्षणा और जेनवाईज़ कर रहे हैं। कला के क्षेत्र में हमें स्लैम आउट लाउड की मदद मिल रही है। वहीं रक्षा क्षेत्र में डेल्टा स्क्वैड फाउंडेशन और युवातेजस हमें सहयोग दे रहे हैं। विभिन्न तरह की प्रतिभाओं को बढ़ावा देने में गहरी विशेषज्ञता के साथ ये पार्टनर जमीनी स्तर पर गहरी पकड़ और समुदाय का विश्वास भी रखते हैं। इससे हमें विभिन्न प्रतिभाओं और महत्वाकांक्षाओं वाले विद्यार्थियों को अनेक अवसर प्रदान करने में मदद मिलेगी। </p>
<p>आज वंचित बैकग्राउंड के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को किन सबसे बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ता है?</p>
<p>इन विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ी बाधाएं पहुँच और एक्सपोज़र की हैं। उदाहरण के लिए, 27 से 37 प्रतिशत विद्यार्थी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए पेड कोचिंग सिस्टम पर निर्भर हैं, जिससे अवसर की उपलब्धता आर्थिक क्षमता पर निर्भर हो गई है। छोटे शहरों के विद्यार्थियों को कोचिंग उपलब्ध नहीं होती हैं। साथ ही, उन्हें मेंटरशिप, मिलकर तैयारी करने वाले साथी, प्रतियोगिताओं का एक्सपोज़र और उनके लिए मौजूद अवसरों का मार्गदर्शन भी नहीं मिल पाता है। नतीजा यह होता है कि इस सिस्टम द्वारा विद्यार्थी प्रतिभा नहीं बल्कि सुविधा की उपलब्धता के आधार पर आगे बढ़ जाते हैं। टुमॉरो मेकर्स के माध्यम से हम सभी विद्यार्थियों को समान अवसर उपलब्ध कराना चाहते हैं, ताकि प्रतिभाशाली विद्यार्थी, चाहे किसी भी स्थान से आए हों, उन्हें समान रूप से वो अवसर प्राप्त हो सकें।</p>
<p>भारत के युवाओं के लिए टुमॉरो मेकर्स का क्या दीर्घकालिक प्रभाव होगा?</p>
<p>हमारा लक्ष्य साफ है। हम वंचित बैकग्राउंड के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अवसर उपलब्ध कराना चाहते हैं ताकि वो अपनी क्षमताओं का विकास कर सकें। पहले साल, हम संरचनाबद्ध तरीके से 5,000 से 10,000 विद्यार्थियों तक पहुँचेंगे। हमारी इस पहल में हमारे पार्टनर हमारी मदद करेंगे। इसके बाद हम क्वालिटी को बनाए रखते हुए अपनी इस पहल का विस्तार करेंगे। व्यापक स्तर पर यह हमारे देश के भविष्य से जुड़ा है। भारत का भविष्य केवल औसत सुधारों द्वारा तय नहीं होगा, बल्कि इस बात से तय होगा कि क्या विभिन्न आय, भौगोलिक क्षेत्रों और पहचान वाली असाधारण प्रतिभाओं को प्रभावशाली पदों और नेतृत्व तक पहुँचने का अवसर मिलेगा या नहीं। इसलिए हमारा दीर्घकालिक लक्ष्य विभिन्न स्थानों और सामाजिक आर्थिक बैकग्राउंड वाली प्रतिभाओं को आगे लाकर भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं की एक पाईपलाईन तैयार करना है।<br />साथ ही, हम पहली जनरेशन के सफल लोगों का ज्यादा बड़ा समूह बनाना चाहते हैं। क्योंकि जब एक युवा सफल होता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार और समुदाय पर पड़ता है।</p>
<p>टुमॉरो मेकर्स को देशव्यापी प्लेटफॉर्म बनाने के लिए पार्टनर संगठनों और मेंटर्स के साथ सहयोग कितने महत्वपूर्ण हैं?</p>
<p>टुमॉरो मेकर्स का काम करने का तरीका पार्टनरशिप पर आधारित है। हम शुरू से ही हर काम अपने आप करना नहीं चाहते हैं। इसलिए हम उन संगठनों के साथ साझेदारी कर रहे हैं, जो प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं। उदाहरण के लिए अवंति फैलोज़ 7,000 से अधिक विद्यार्थियों तक पहुँच चुके हैं। स्लैम आउट लाउड ने 4.7 मिलियन से अधिक विद्यार्थियों को आगे बढ़ाया है और मेकरघाट 1.4 मिलियन से अधिक युवाओं से जुड़े हैं और 20,000 से अधिक एजुकेटर्स को प्रशिक्षित कर रहे हैं। इससे साफ हो जाता है कि इस ईकोसिस्टम के पास प्रमाणित और प्रभावशाली मॉडल है, पर वो सब टुकड़ों मंल काम कर रहे हैं। टुमॉरो मेकर्स इस प्रमाणित ईकोसिस्टम को उच्च क्षमता वाले विद्यार्थियों से जोड़ेंगे, जिन्हें पहचान से लेकर तैयार और करियर में आगे बढ़ने तक हर चरण में मार्गदर्शन उपलब्ध नहीं हो पाता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 13:05:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>'अफ्रीका दिवस' पर यूएन प्रमुख का संदेश: सतत विकास और समृद्धि के लिए अफ्रीका के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 'अफ्रीका दिवस' (25 मई 2026) पर अफ्रीकी संघ की 63वीं वर्षगांठ के अवसर पर बधाई दी। उन्होंने एक शांतिपूर्ण और समृद्ध भविष्य के निर्माण के लिए प्रतिबद्धता जताई। गुटेरेस ने महाद्वीप में मुक्त व्यापार, नवीकरणीय ऊर्जा और वैश्विक एकजुटता के जरिए 'जल एवं स्वच्छता' की उपलब्धता पर विशेष जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/antonio-guterres-said-on-africa-day-un-will-work-together/article-154975"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/antónio-guterres.png" alt=""></a><br /><p>जेनेवा। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सोमवार को 'अफ्रीका दिवस' के अवसर पर अफ्रीकी देशों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र को एक शांतिपूर्ण, समृद्ध और टिकाऊ भविष्य के निर्माण के लिए अफ्रीका के साथ मिलकर काम करने पर गर्व है। 'अफ्रीकी संघ' की 63वीं वर्षगांठ के अवसर पर जारी अपने संदेश में संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा, "आज और हर दिन, संयुक्त राष्ट्र उन सभी अफ्रीकी देशों के साथ काम करने में गर्व महसूस करता है जो एक ऐसे शांतिपूर्ण, समृद्ध और टिकाऊ भविष्य का निर्माण कर रहे हैं जिसके हकदार न केवल सभी अफ्रीकी नागरिक हैं, बल्कि हमारी पूरी दुनिया है।"</p>
<p>गुटेरेस ने महाद्वीप की प्रचुर ताकत, लचीलेपन और वैश्विक मंच पर इसके बढ़ते प्रभाव की सराहना की। उन्होंने कहा कि अफ्रीका के लोगों ने गुलामी और उपनिवेशवाद के विनाशकारी परिणामों का सामना करते हुए आपदा को एकता और संकल्प में बदला है। आज यही साझा संकल्प महाद्वीप में मुक्त व्यापार, नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) के विस्तार, नवाचार (इनोवेशन) को बढ़ावा देने और स्थायी शांति की नींव रखने के उद्देश्यों को गति दे रहा है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने इस वर्ष के विषय (थीम) 'जल और स्वच्छता' पर विशेष जोर देते हुए कहा कि ये सेवाएं सार्वजनिक स्वास्थ्य, मानवीय गरिमा और आर्थिक अवसरों की आधारशिला हैं। हालांकि, जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण महाद्वीप में लाखों लोगों, विशेषकर महिलाओं और युवाओं को अभी भी इन आवश्यक सेवाओं तक पहुंच नहीं मिल पा रही है। उन्होंने अफ्रीकी देशों को फंड जुटाने, कर्ज राहत तंत्र तक पहुंच बनाने और सौर व पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों में बड़े पैमाने पर निवेश करने के लिए वैश्विक एकजुटता का आह्वान किया।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि प्रत्येक वर्ष 25 मई को अफ्रीका दिवस मनाया जाता है। यह दिन 25 मई 1963 को 'ऑर्गनाइजेशन ऑफ अफ्रीकन यूनिटी' (ओएयू) की स्थापना के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जिसे अब 'अफ्रीकन यूनियन' (एयू) के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष अफ्रीका संघ अपनी 63वीं वर्षगांठ 'एकता, एकीकरण और विकास के 63 वर्ष, आइए मिलकर जश्न मनाएं' थीम के तहत मना रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 18:17:03 +0530</pubDate>
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