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                <title>buddha purnima - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>buddha purnima RSS Feed</description>
                
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                <title>पीएम मोदी ने बुद्ध पूर्णिमा की दी शुभकामनाएं: बुद्ध के आदर्शों के प्रति नवीकृत प्रतिबद्धता का किया आह्वान, बोले-गौतम बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति एवं महापरिनिर्वाण का प्रतीक </title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुद्ध पूर्णिमा पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए भगवान बुद्ध के सत्य, करुणा और सद्भाव के आदर्शों को याद किया। उन्होंने कहा कि बुद्ध के विचार समाज में एकता और आनंद की भावना को मजबूत करते हैं। यह पावन पर्व भगवान बुद्ध के ज्ञान और शांति के वैश्विक संदेश का प्रतीक है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-wished-buddha-purnima-and-called-for-renewed-commitment/article-152273"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pm-modi3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और भगवान बुद्ध की शिक्षाओं की शाश्वत प्रासंगिकता एवं समाज में सद्भाव को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका पर बल दिया। पीएम मोदी ने एक्स पर एक संदेश में कहा, “बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान बुद्ध के आदर्शों को साकार करने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता बहुत दृढ़ है। उनके विचार हमारे समाज में आनंद एवं एकता की भावना को मजबूत करें।”</p>
<p>उन्होंने अपने बयानों से इस बात पर प्रकाश डाला गया कि सरकार शांति, करुणा एवं एकता जैसे मूल्यों को बढ़ावा देने पर लगातार बल दे रही है जो बौद्ध दर्शन के केंद्र में हैं। बुद्ध पूर्णिमा को वैशाख पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है जो कि गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति एवं महापरिनिर्वाण का प्रतीक है और भारत और विश्व में उनके लाखों अनुयायियों द्वारा मनाया जाता है।</p>
<p>भारत में इस दिन का विशेष महत्व है क्योंकि बुद्ध के जीवन से जुड़े कई स्थल, जिनमें बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर शामिल हैं, तीर्थयात्रा एवं सांस्कृतिक विरासत के प्रमुख केंद्रों में शामिल हैं। प्रधानमंत्री का संदेश भारत के समृद्ध आध्यात्मिक परंपराओं को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है, विशेष रूप से उन पहलों के माध्यम से जो देश की बौद्ध विरासत को उसकी सांस्कृतिक कूटनीति के रूप में उजागर करती हैं।</p>
<p>पीएम मोदी का "खुशी एवं एकजुटता की भावना को गहरा करने" का आह्वान ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक चर्चा में प्रायः सामाजिक सामंजस्य एवं सामूहिक जिम्मेदारी पर बल दिया जाता है और ये ऐसे विषय हैं जो बुद्ध की शिक्षाओं से गहराई से मेल खाते हैं। उनका संदेश राजनीतिक दृष्टिकोण से सभी नेताओं की शुभकामनाओं की श्रृंखला में शामिल है, जो त्योहार की सार्वभौमिक अपील तथा शांति एवं सद्भाव का संदेश देते हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 11:32:55 +0530</pubDate>
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                <title>आज बुद्ध पूर्णिमा : सम्राट अशोक के समय राजस्थान में हुआ था बौद्ध धर्म का प्रसार, कई जगह स्तूप </title>
                                    <description><![CDATA[गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व आज के नेपाल के लुंबिनी में हुआ था, उनका अधिकांश समय बिहार और उत्तरप्रदेश में गुजरा, बुद्ध कभी राजस्थान तो नहीं आए, लेकिन सम्राट अशोक के समय में राजस्थान में बौद्ध धर्म का काफी प्रचार-प्रसार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/today-on-buddha-purnima-buddhism-spread-in-rajasthan-during-the/article-152270"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(5).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व आज के नेपाल के लुंबिनी में हुआ था, उनका अधिकांश समय बिहार और उत्तरप्रदेश में गुजरा, बुद्ध कभी राजस्थान तो नहीं आए, लेकिन सम्राट अशोक के समय में राजस्थान में बौद्ध धर्म का काफी प्रचार-प्रसार हुआ। राज्य में अनेक जगह बौद्ध मठों और शिलालेखों का निर्माण हुआ। झालावाड़ में कई बौद्ध गुफाएं हैं, यहां कई स्तूप और ध्यान कक्ष बने हुए हैं। कोटा के पास बौद्ध अवशेष भी मिले हैं।</p>
<p><strong>जन्म, ज्ञान और परिनिर्वाण वैशाख पूर्णिमा को ही हुआ: </strong>बुद्ध का जन्म, ज्ञान की प्राप्ति और महापरिनिर्वाण वैशाख पूर्णिमा के दिन हुआ था, इसलिए इसे बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जानते हैं।</p>
<p><strong>अप्प दीपो भव:</strong> बुद्ध के जाने का समय नजदीक आया तो शिष्यों को बुलाकर कहा कि वे अब निर्वाण को प्राप्त होंगे। यह सुनते ही शिष्य रोने लगे, उनके प्रिय शिष्य आनन्द भी उद्विग्न हो गए। शिष्यों ने कहा-आपके जाने के बाद हमारा मार्गदर्शन कौन करेगा? इस पर बुद्ध ने कहा-अप्प दीपो भव अर्थात स्वयं अपना प्रकाश बनो। </p>
<p><strong>वीणा के तारों को इतना मत कसो:</strong> सिद्धार्थ  राजमहल से चुपके से निकलने के बाद कठोर तपस्या में लीन हो गए, उनका शरीर सूख कर काटा हो गया। तपस्या में लीन थे, उसी दौरान कुछ महिलाएं, वहां से गीत गाते हुए निकली, जिसका भावार्थ था- वीणा के तारों को इतना मत कसो की वीणा टूट ही जाए और इतना ढीला भी मत छोड़ों कि वीणा बजे ही नहीं। इसके बाद बुद्ध ने मध्यम मार्ग चुना। </p>
<p><strong>पहला उपदेश सारनाथ में: </strong>भगवान बुद्ध ने पहला उपदेश सारनाथ में दिया, जिसे धर्मचक्रप्रवर्तन कहा गया, इसके बाद उन्होंने जीवनभर लोगों को धर्म और सत्य का ज्ञान दिया। </p>
<p><strong>सिद्धार्थ से बने बुद्ध, पेड़ बन गया बौधि वृक्ष, स्थान बना बोध गया: </strong>सिद्धार्थ को जब ज्ञान की प्राप्ति हुई, उसके बाद से वे बुद्ध कहलाए। पीपल का पेड़ बौधि वृक्ष और जिस जगह उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई वह स्थान बौद्ध गया कहलाया। </p>
<p><strong>बुद्ध को विष्णु का नौवां अवतार भी माना: </strong>बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए यह सबसे पवित्र दिन है। जबकि कई हिंदू मान्यताएं बुद्ध को भगवान विष्णु का नौवां अवतार मानकर इस दिन उनकी पूजा करते हैं। </p>
<p><strong>महिला के रूप में गौतमी को मिला था संघ में प्रवेश:</strong> महाप्रजापति गौतमी बुद्ध की मौसी थी, जिसने सिद्धार्थ का लालन-पालन किया था, महिला के रूप में सर्वप्रथम बौद्ध संघ में प्रवेश गौतमी को ही मिला था। आनंद बुद्ध का प्रिय शिष्य था। बुद्ध आनंद को ही संबोधित करके अपने उपदेश देते थे। वे उनके मौसी और चाचा के लड़के थे।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 10:03:54 +0530</pubDate>
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                <title>देवनानी ने बुद्ध पूर्णिमा व श्रमिक दिवस पर दी शुभकामनाएं, कहा- उनका योगदान आर्थिक व सामाजिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने बुद्ध पूर्णिमा और अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि गौतम बुद्ध के पंचशील सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं और उनका जीवन अहिंसा, करुणा व सत्य का संदेश देता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/devnani-extended-best-wishes-on-buddha-purnima-and-labor-day/article-152232"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/vasudev-devnani.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने बुद्ध पूर्णिमा और अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि गौतम बुद्ध के पंचशील सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं और उनका जीवन अहिंसा, करुणा व सत्य का संदेश देता है। देवनानी ने मध्यम मार्ग और अष्टांगिक मार्ग को जीवन में अपनाने की बात कही।</p>
<p>श्रमिक दिवस पर उन्होंने श्रमिकों को राष्ट्र निर्माण की धुरी बताते हुए कहा कि उनका योगदान आर्थिक व सामाजिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने श्रमिकों के अधिकार, सम्मान और सुरक्षित कार्य-परिस्थितियों पर जोर देते हुए सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की आवश्यकता जताई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:31:10 +0530</pubDate>
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