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                <title>Bank Negligence - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Bank Negligence RSS Feed</description>
                
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                <title>ओडिशा कंकाल मामला: CCTV फुटेज से खुली बैंक की लापरवाही की पोल ; बैंक के दावे झूठे, CCTV ने बताई पूरी कहानी</title>
                                    <description><![CDATA[ओडिशा के कंकाल कांड में नया मोड़ आया है। CCTV फुटेज से पुष्टि हुई है कि जीतू मुंडा बैंक गए थे, लेकिन अधिकारियों ने सहयोग नहीं किया। ₹19,300 के लिए एक भाई को बहन के अवशेष कब्र से निकालने पड़े। इस प्रशासनिक संवेदनहीनता के बाद सरकार ने दस्तावेज जारी कर सहायता राशि देने की घोषणा की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/odisha-skeleton-case-cctv-changed-the-story-questions-raised-on/article-152280"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(9).png" alt=""></a><br /><p>ओडिशा। ओडिशा के क्योंझर जिले में अपनी बहन का कंकाल बैंक ले जाने वाले व्यक्ति के मामले में नया मोड़ आया है। प्रारंभिक जांच में  बैंक अधिकारियों की लापरवाही की बात सामने आई है, जिससे पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, डायनाली गांव के 59 वर्षीय जीतू मुंडा ने अपनी बहन की मौत साबित करने और उसके खाते में जमा 19,300 रुपये निकालने के लिए यह असामान्य कदम उठाया। लगातार प्रयासों के बावजूद जब उन्हें बैंक से निराशा हाथ लगी, तो उन्होंने बहन के अवशेष कब्र से निकालकर बैंक पहुंचने का फैसला किया।</p>
<p>रेवेन्यू डिवीजनल कमिश्नर संग्राम केशरी महापात्रा ने बताया कि बैंक के CCTV फुटेज का गहन निरीक्षण करने पर यह स्पष्ट हुआ कि जीतू मुंडा घटना वाले दिन बैंक में मौजूद थे और उन्होंने कई कर्मचारियों से बातचीत भी की थी। हालांकि फुटेज में ऑडियो नहीं है, लेकिन अधिकारियों की शारीरिक भाषा से लापरवाही का संकेत मिलता है। पहले बैंक की ओर से दावा किया गया था कि मुंडा पहली बार आए थे और उनके पास जरूरी दस्तावेज नहीं थे। लेकिन जांच में यह बात गलत साबित होती दिखी। अधिकारियों को पहले से ही भाई-बहन की जानकारी होने के बावजूद उचित सहयोग नहीं दिया गया।</p>
<p>घटना के बाद प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी वारिस से जुड़े दस्तावेज जारी किए, जिसके बाद बैंक ने राशि जारी कर दी। साथ ही, राज्य सरकार ने राहत के तौर पर 30 हजार रुपये देने की घोषणा भी की है। इस मामले को लेकर विपक्ष ने भी सरकार पर निशाना साधा है और इसे प्रशासनिक संवेदनहीनता का उदाहरण बताया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 09:53:01 +0530</pubDate>
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