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                <title>Acquisition - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>ओडिशा बॉक्साइट खनन विवाद: कांग्रेस ने आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन का लगाया आरोप, केंद्र से निष्पक्ष जांच की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ओडिशा के कोरापुट और कालाहांडी जिलों में बॉक्साइट खनन के खिलाफ ग्रामीणों के प्रदर्शन पर चिंता जताई है। उन्होंने कलिंगा एल्युमिना लिमिटेड द्वारा 400 एकड़ वन भूमि के कथित अवैध उपयोग और ग्राम सभा की फर्जी मंजूरियों के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/odisha-bauxite-mining-dispute-congress-alleges-violation-of-tribal-rights/article-155714"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/jairam-ramesh-333.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने ओडिशा में बॉक्साइट खनन परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शनों पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र से इस मामले में हस्तक्षेप कर प्रभावितों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। पार्टी ने खनन परियोजनाओं से जुड़े वन अधिकार कानून, 2006 के कथित उल्लंघन, वन भूमि के उपयोग तथा ग्राम सभा की स्वीकृतियों में कथित अनियमितताओं के आरोपों को गंभीर बताते हुए उनकी व्यापक और निष्पक्ष जांच की मांग की है।</p>
<p>कांग्रेस महासचिव एवं संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि ओडिशा के कोरापुट जिले में बॉक्साइट खनन के लिए दी गई स्वीकृतियों को लेकर ग्रामीणों का विरोध जारी है। उन्होंने कहा कि कलिंगा एल्युमिना लिमिटेड पर लगभग 400 एकड़ वन भूमि के कथित अवैध उपयोग के आरोप लगाए जा रहे हैं, जिस पर आंदोलनरत ग्रामीण वन अधिकार कानून, 2006 के तहत अपने पारंपरिक और आध्यात्मिक अधिकार होने का दावा कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम सभा की मंजूरी प्राप्त करने की प्रक्रिया में कंपनी और जिला प्रशासन के अधिकारियों की कथित मिलीभगत से अनियमितताएं हुई हैं, जिसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को भी दी गई है। उनका कहना था कि इसी प्रकार के आरोप कालाहांडी और रायगढ़ा जिलों में भी लगाए जा रहे हैं। जयराम रमेश ने कहा कि केंद्र सरकार में जनजातीय कार्य मंत्री ओडिशा से हैं, वन अधिकार कानून, 2006 को उसकी भावना और प्रावधानों के अनुरूप लागू कराने के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में हो रहे इन विरोध प्रदर्शनों और उनके कारणों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 16:33:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला: बीएसएफ को सौंपी 142.79 एकड़ जमीन, संवेदनशील इलाकों में घुसपैठ की गतिविधियों पर लगेगी लगाम </title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा पुख्ता करने के लिए बीएसएफ को 142.79 एकड़ जमीन सौंपी है। उत्तर और दक्षिण बंगाल के नौ जिलों में फैली इस भूमि का उपयोग नई सीमा चौकियों और बाड़बंदी निर्माण के लिए होगा। इससे बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ और तस्करी रोकने में मदद मिलेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-decision-of-west-bengal-government-14279-acres-of-land/article-155239"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/bengal-cm.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को राज्य के कई जिलों में सीमा चौकियों और कांटेदार तार की बाड़ के निर्माण के लिए 142.79 एकड़ जमीन सौंपी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक पोस्ट के माध्यम से भूमि हस्तांतरण का विवरण साझा करते हुए कहा कि इस पहल का उद्देश्य संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाना और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।</p>
<p>मुख्यमंत्री के अनुसार, बीएसएफ अवसंरचना के तेजी से निर्माण और सीमा पर परिचालन तत्परता में सुधार के लिए उत्तर और दक्षिण बंगाल के नौ जिलों में यह जमीन उपलब्ध कराई गई है। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से केंद्रीय बल को बांग्लादेश से सटे संवेदनशील इलाकों में घुसपैठ, सीमा पार अपराध और तस्करी की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के प्रयासों को तेज करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री द्वारा जारी विवरण के अनुसार राज्य सरकार ने कूच बिहार में 22.925 एकड़ और उसके बाद जलपाईगुड़ी में 35.165 एकड़ जमीन बीएसएफ को सौंप दी है।</p>
<p>इसके अलावा दार्जिलिंग में 8.815 एकड़, उत्तर दिनाजपुर में 2.84 एकड़ और दक्षिण दिनाजपुर में 20.1701 एकड़ जमीन भी बीएसएफ को सौंपी गई है। दक्षिण बंगाल के जिलों में मालदा में 10.90 एकड़, मुर्शिदाबाद में 38.805 एकड़, नादिया में 0.55 एकड़ और उत्तर 24 परगना में 2.6 एकड़ जमीन बीएसएफ को हस्तांतरित की गई है। अधिकारियों ने बताया कि इस जमीन का मुख्य रूप से उपयोग नई सीमा चौकियों के निर्माण और सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माने जाने वाले क्षेत्रों में कांटेदार तार की बाड़ के विस्तार के लिए किया जाएगा।</p>
<p>मजबूत बुनियादी ढांचे से जिला प्रशासन और बीएसएफ के बीच समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है, साथ ही सीमा पर चौबीसों घंटे निगरानी संभव हो पाएगी। कई वर्षों से, विभिन्न सीमावर्ती जिलों में बाड़बंदी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण संबंधी विवादों के कारण देरी हो रही थी। कई स्थानों पर, स्थानीय विरोध और निवासियों की आपत्तियों ने सुरक्षा परियोजनाओं के लिए भूमि की पहचान और अधिग्रहण की प्रक्रिया को धीमा कर दिया था।</p>
<p>हालांकि, राज्य प्रशासन ने हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में जिला अधिकारियों को भूमि की पहचान और हस्तांतरण में तेजी लाने का निर्देश दिया है। नबन्ना ने जिला प्रशासनों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सीमावर्ती बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से संबंधित लंबित भूमि मुद्दों का जल्द से जल्द समाधान सुनिश्चित किया जाए। पिछले सप्ताह, मुख्यमंत्री ने नबन्ना सभागार में एक कार्यक्रम के दौरान औपचारिक रूप से भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया शुरू की। इस नवीनतम हस्तांतरण को सीमा प्रबंधन को मजबूत करने और बंगाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लंबे समय से लंबित सुरक्षा अवसंरचना परियोजनाओं को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 12:21:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>राजस्थान रॉयल्स का मालिक फिर बदला : IPL 2026 के बीच 15,660 करोड़ में बिकी टीम, जानें कौन है नए मालिक ?</title>
                                    <description><![CDATA[दिग्गज उद्योगपति लक्ष्मी मित्तल और अदार पूनावाला ने राजस्थान रॉयल्स में नियंत्रण हिस्सेदारी खरीदने का ऐतिहासिक समझौता किया है। $1.65 अरब के इस सौदे से टीम की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी। 2026 तक पूरी होने वाली इस डील के बाद मित्तल परिवार के पास 75% हिस्सेदारी होगी, जो टीम के लिए नए युग की शुरुआत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/owner-of-rajasthan-royals-changed-again-team-sold-for-rs/article-152542"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/ipl.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आईपीएल की प्रसिद्ध टीम राजस्थान रॉयल्स के स्वामित्व में बड़ा बदलाव तय हो गया है। देश के दिग्गज उद्योगपति लक्ष्मी मित्तल के परिवार ने उद्योगपति अदार पूनावाला के साथ मिलकर टीम में नियंत्रण हिस्सेदारी खरीदने का समझौता किया है। इस सौदे की कुल कीमत करीब 1.65 अरब डॉलर यानी लगभग 15,660 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह टीम अब तक मनोज बडाले और उनके सहयोगियों के पास थी, जिनसे इसे खरीदा जा रहा है। इस समझौते में केवल राजस्थान रॉयल्स ही नहीं, बल्कि दक्षिण अफ्रीका और कैरेबियाई क्षेत्र में इसकी सहयोगी टीमों को भी शामिल किया गया है, जिससे यह एक बहु-देशीय खेल पहचान के रूप में और मजबूत होगी।</p>
<p>सौदा पूरा होने के बाद मित्तल परिवार के पास करीब 75 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि अदार पूनावाला के पास लगभग 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। बाकी 7 प्रतिशत हिस्सा पहले से जुड़े निवेशकों के पास रहेगा। यह प्रक्रिया वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही तक पूरी होने की संभावना है, हालांकि इसके लिए भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग और आईपीएल संचालन परिषद से मंजूरी आवश्यक होगी।</p>
<p>नई संरचना में लक्ष्मी मित्तल, अदार पूनावाला और मनोज बडाले निदेशक मंडल में शामिल होंगे। राजस्थान रॉयल्स, जिसने Indian Premier League 2008 का पहला खिताब जीता था, उभरते खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए जानी जाती है। लक्ष्मी मित्तल ने इस निवेश को अपने राजस्थान से जुड़े पारिवारिक रिश्तों से भी जोड़ा है, जबकि अदार पूनावाला ने इसे टीम के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 15:44:47 +0530</pubDate>
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